🚩 झाँसी की रानी
सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म सन् 1904 में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुआ था। उनकी आरंभिक शिक्षा प्रयागराज में हुई। अपने समय की प्रसिद्ध रचनाकार होने के साथ-साथ वह एक स्वतंत्रता सेनानी भी थीं, जिसके कारण उन्हें दो बार जेल भी जाना पड़ा था। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से जनमानस में राष्ट्रीय चेतना जगाई।
उनके लेखन में देशप्रेम, स्त्री-केंद्रित विषयों और स्वाधीनता संग्राम के प्रति गहन प्रतिबद्धता दिखाई देती है। उनकी भाषा की सहजता ने उनकी रचनाओं को व्यापक लोकप्रियता दिलाई।
प्रमुख रचनाएँ: मुकुल, त्रिधारा (कविता संग्रह); बिखरे मोती, उन्मादिनी, सीधे-सादे चित्र (कहानी संग्रह); कदंब का पेड़, सभा का खेल (बाल साहित्य)।
मुकुल तथा बिखरे मोती के लिए उन्हें दो बार 'सेकसरिया पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। सन् 1948 में उनकी आकस्मिक मृत्यु हो गई। भारतीय डाक विभाग ने उनके सम्मान में एक डाक टिकट भी जारी किया।
'झाँसी की रानी' सुभद्रा कुमारी चौहान की बहुत प्रसिद्ध कविता है। यह कविता 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि पर लिखी गई है। यह कविता रानी लक्ष्मीबाई के जीवन-वृत्त, उनके संघर्ष और विद्रोह से हमारा ओजपूर्ण साक्षात्कार कराती है। यह कविता वीरता, उत्साह और देशप्रेम की भावना से ओत-प्रोत है तथा पाठकों में जोश-साहस का संचार करती है। कविता की कथात्मक शैली और गेयता इसे और अधिक जीवंत व प्रभावशाली बनाती है।
सिंहासन हिल उठे, राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,
बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी,
गुमी हुई आजादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फ़िरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी,
चमक उठी सन् सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
• • •
कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन 'छबीली' थी,
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी,
नाना के संग पढ़ती थी वह, नाना के संग खेली थी,
बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी,
वीर शिवाजी की गाथाएँ उसको याद जबानी थीं।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
• • •
लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार,
देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार,
नकली युद्ध, व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार,
सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना, ये थे उसके प्रिय खिलवार,
महाराष्ट्र-कुल-देवी उसकी भी आराध्य भवानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
• • •
हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में,
ब्याह हुआ रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में,
राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छाई झाँसी में,
सुभट बुँदेलों की विरुदावलि-सी वह आई झाँसी में,
चित्रा ने अर्जुन को पाया, शिव से मिली भवानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
• • •
उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजयाली छाई,
किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई,
तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई,
रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई,
निःसंतान मरे राजाजी रानी शोक-समानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
• • •
बुझा दीप झाँसी का तब डलहौजी मन में हरषाया,
राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया,
फौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया,
लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया,
अश्रुपूर्ण रानी ने देखा झाँसी हुई बिरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
• • •
अनुनय-विनय नहीं सुनता है, विकट फ़िरंगी की माया,
व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया,
डलहौजी ने पैर पसारे अब तो पलट गई काया,
राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया,
रानी दासी बनी, बनी यह दासी अब महरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
• • •
छिनी राजधानी देहली की, लिया लखनऊ बातों-बात,
कैद पेशवा था बिठूर में, हुआ नागपुर का भी घात,
उदैपुर, तंजोर, सतारा, करनाटक की कौन बिसात,
जब कि सिंध, पंजाब, ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात,
बंगाले, मद्रास आदि की भी तो यही कहानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
• • •
रानी रोई रनिवासों में बेगम ग़म से थीं बेजार,
उनके गहने-कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाजार,
सरे-आम नीलाम छापते थे अंग्रेजों के अखबार,
'नागपूर के जेवर ले लो' 'लखनऊ के लो नौलख हार',
यों परदे की इज्जत पर-देशी के हाथ बिकानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
• • •
कुटियों में थी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान,
वीर सैनिकों के मन में था, अपने पुरखों का अभिमान,
नाना धुंधूपंत पेशवा जुटा रहा था सब सामान,
बहन छबीली ने रण-चंडी का कर दिया प्रकट आह्वान,
हुआ यज्ञ प्रारंभ उन्हें तो सोई ज्योति जगानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
• • •
महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी,
यह स्वतंत्रता की चिनगारी अंतरतम से आई थी,
झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थीं,
मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी,
जबलपुर, कोल्हापुर में भी कुछ हलचल उकसानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
• • •
इस स्वतंत्रता-महायज्ञ में कई वीरवर आए काम,
नाना धुंधूपंत, ताँतिया, चतुर अज़ीमुल्ला सरनाम,
अहमद शाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह सैनिक अभिराम,
भारत के इतिहास-गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम,
लेकिन आज जुर्म कहलाती उनकी जो कुर्बानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
• • •
इनकी गाथा छोड़ चलें हम झाँसी के मैदानों में,
जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में,
लेफ्टिनेंट वॉकर आ पहुँचा, आगे बढ़ा जवानों में,
रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्व असमानों में,
जख्मी होकर वॉकर भागा, उसे अजब हैरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
• • •
रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार,
घोड़ा थक कर गिरा भूमि पर, गया स्वर्ग तत्काल सिधार,
यमुना-तट पर अंग्रेजों ने फिर खाई रानी से हार,
विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार,
अंग्रेजों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी रजधानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
• • •
विजय मिली, पर अंग्रेजों की फिर सेना घिर आई थी,
अबके जनरल स्मिथ सन्मुख था, उसने मुँह की खाई थी,
काना और मंदरा सखियाँ रानी के संग आई थीं,
युद्ध क्षेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी,
पर, पीछे हृ रोज आ गया, हाय! घिरी अब रानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
• • •
तो भी रानी मार-काटकर चलती बनी सैन्य के पार,
किंतु सामने नाला आया, था यह संकट विषम अपार,
घोड़ा अड़ा, नया घोड़ा था, इतने में आ गए सवार,
रानी एक, शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार पर वार,
घायल होकर गिरी सिंहनी उसे वीर-गति पानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
• • •
रानी गई सिधार, चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी,
मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी,
अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी,
हमको जीवित करने आई बन स्वतंत्रता नारी थी,
दिखा गई पथ, सिखा गई हमको जो सीख सिखानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
• • •
जाओ रानी याद रखेंगे हम कृतज्ञ भारत वासी,
यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता अविनाशी,
होवे चुप इतिहास, लगे सच्चाई को चाहे फाँसी,
हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी,
तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
• • •
(प्रत्येक स्तवक के अंत में आने वाली टेक — "बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥" — का भाव है कि यह वीरगाथा हमने बुंदेलखंड के लोकगायकों से सुनी है, और रानी लक्ष्मीबाई पुरुषों की भाँति वीरता से लड़ीं।)
स्तवक 1: "सिंहासन हिल उठे, राजवंशों ने भृकुटी तानी थी..."
भावार्थ: सन् 1857 की क्रांति के समय अंग्रेजों के राजसिंहासन हिलने लगे और भारतीय राजाओं ने विद्रोह की भृकुटी (त्योरी) तान ली। बूढ़े हो चुके भारत में मानो नई जवानी (नई ऊर्जा) आ गई। लोगों ने खोई हुई आजादी का मूल्य पहचान लिया और अंग्रेजों को देश से दूर करने का दृढ़ निश्चय कर लिया। सन् सत्तावन (1857) में वर्षों से म्यान में पड़ी पुरानी तलवार फिर से चमक उठी, यानी विद्रोह की शुरुआत हुई।
स्तवक 2: "कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन 'छबीली' थी..."
भावार्थ: रानी लक्ष्मीबाई नाना साहेब की मुँहबोली बहन थीं और उन्हें प्यार से 'छबीली' कहा जाता था। वे अपने पिता की इकलौती संतान थीं। नाना के साथ ही वे पढ़ती-खेलती थीं, और बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी जैसे शस्त्र ही उनकी सच्ची सहेलियाँ थे। वीर शिवाजी की वीरगाथाएँ उन्हें कंठस्थ (ज़बानी याद) थीं।
स्तवक 3: "लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार..."
भावार्थ: कवयित्री कहती हैं कि लक्ष्मीबाई मानो साक्षात लक्ष्मी या दुर्गा देवी की तरह वीरता की प्रतिमूर्ति थीं। उनकी तलवारबाज़ी के वार देखकर मराठे प्रसन्न होकर रोमांचित हो उठते थे। नकली युद्ध खेलना, सेना की व्यूह-रचना करना, शिकार खेलना, सेना घेरना और किले तोड़ना — ये सब उनके प्रिय खेल थे। महाराष्ट्र की कुल-देवी भवानी उनकी भी आराध्य देवी थीं।
स्तवक 4: "हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में..."
भावार्थ: झाँसी में वीरता (लक्ष्मीबाई) का विवाह वैभव अर्थात झाँसी के राजा गंगाधर राव से हुआ। ब्याह होकर लक्ष्मीबाई झाँसी की रानी बनकर आईं और राजमहल में बधाइयाँ बजने लगीं, चारों ओर खुशियाँ छा गईं। वीर बुंदेलों की यशोगाथा-सी वे झाँसी में आईं। कवयित्री उपमा देती हैं कि जैसे चित्रा (अर्जुन की पत्नी) को अर्जुन मिले और शिव को भवानी (पार्वती) मिलीं, वैसे ही यह मिलन हुआ।
स्तवक 5: "उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजयाली छाई..."
भावार्थ: रानी का सौभाग्य उदय हुआ और महल खुशियों से जगमगा उठे, परंतु समय की गति ने चुपके-चुपके काली घटा (दुर्भाग्य के बादल) घेर लिए। जिन हाथों में तीर-कमान शोभा देते थे, उन्हें चूड़ियाँ पहनना पसंद नहीं था, फिर भी दुर्भाग्यवश राजा गंगाधर राव का निधन हो गया और रानी विधवा हो गईं। विधाता को भी उन पर दया न आई। राजा निःसंतान मरे, और रानी शोक में डूब गईं।
स्तवक 6: "बुझा दीप झाँसी का तब डलहौजी मन में हरषाया..."
भावार्थ: झाँसी का दीपक (राजा गंगाधर राव) बुझ जाने पर अंग्रेज गवर्नर-जनरल डलहौजी मन-ही-मन प्रसन्न हुआ, क्योंकि उसे झाँसी राज्य हड़पने का सुनहरा अवसर मिल गया (डलहौजी की कुख्यात 'गोद-निषेध नीति' का संकेत)। उसने तुरंत सेनाएँ भेजकर किले पर अपना झंडा फहरा दिया और लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज ने झाँसी पर कब्ज़ा कर लिया। रानी ने आँसू बहाते हुए देखा कि झाँसी अब पराई हो गई है।
स्तवक 7: "अनुनय-विनय नहीं सुनता है, विकट फ़िरंगी की माया..."
भावार्थ: भयंकर अंग्रेजी माया-जाल किसी की विनती नहीं सुनता। जो अंग्रेज व्यापारी बनकर, दया की भीख माँगते हुए भारत आए थे, डलहौजी ने अब अपने पैर पूरी तरह पसार लिए और उनकी काया (स्वभाव) पूरी तरह बदल गई। उसने राजाओं-नवाबों को भी ठुकरा दिया। जो रानी (भारत) कभी दासी की तरह व्यवहार करती थी, अब वह दासी (अंग्रेज) ही महारानी बन बैठी — यानी शासक-शासित की स्थिति उलट गई।
स्तवक 8: "छिनी राजधानी देहली की, लिया लखनऊ बातों-बात..."
भावार्थ: अंग्रेजों ने दिल्ली की राजधानी छीन ली, बातों-ही-बातों में लखनऊ हड़प लिया। पेशवा को बिठूर में कैद कर दिया गया, नागपुर पर भी आघात हुआ। उदयपुर, तंजौर, सतारा, कर्नाटक की तो बिसात ही क्या थी। सिंध, पंजाब और ब्रह्म (बर्मा) पर भी वज्र के समान कठोर प्रहार हो चुका था। बंगाल, मद्रास आदि की भी यही दुर्दशा हुई — पूरे भारत पर अंग्रेजों का शिकंजा कसता गया।
स्तवक 9: "रानी रोई रनिवासों में बेगम ग़म से थीं बेजार..."
भावार्थ: रनिवासों में रानियाँ रो रही थीं और बेगमें दुख से व्याकुल थीं। उनके गहने-कपड़े कलकत्ते के बाजारों में बिकने लगे। अंग्रेजी अखबार खुलेआम इन वस्तुओं की नीलामी का विज्ञापन छापते — 'नागपुर के जेवर ले लो', 'लखनऊ का नौलखा हार लो'। इस प्रकार पर्दानशीन (घूँघट में रहने वाली) महिलाओं की इज्जत की वस्तुएँ भी विदेशियों के हाथ बिकने लगीं — यह भारत के अपमान की पराकाष्ठा थी।
स्तवक 10: "कुटियों में थी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान..."
भावार्थ: गरीबों की कुटियों में भारी पीड़ा थी और महलों में अपमान की चोट लगी हुई थी। वीर सैनिकों के मन में अपने पूर्वजों का स्वाभिमान जाग उठा। नाना धुंधूपंत पेशवा विद्रोह की सारी तैयारी में जुटे थे। बहन छबीली (लक्ष्मीबाई) ने रण-चंडी (युद्ध की देवी) का स्पष्ट आह्वान कर दिया। यज्ञ (क्रांति) आरंभ होते ही मानो सोई हुई ज्योति (चेतना) को फिर से जगाना था।
स्तवक 11: "महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी..."
भावार्थ: महलों और झोंपड़ियों दोनों ने विद्रोह की आग सुलगाई — यानी अमीर-गरीब सभी वर्ग स्वतंत्रता संग्राम में एकजुट हुए। यह स्वतंत्रता की चिंगारी हर भारतीय के अंतर्मन से उठी थी। झाँसी, दिल्ली और लखनऊ में विद्रोह की लपटें फैल गईं। मेरठ, कानपुर, पटना में भारी हलचल मची और जबलपुर, कोल्हापुर में भी विद्रोह की सुगबुगाहट फैली।
स्तवक 12: "इस स्वतंत्रता-महायज्ञ में कई वीरवर आए काम..."
भावार्थ: इस स्वतंत्रता रूपी महायज्ञ में नाना धुंधूपंत, तात्या टोपे, चतुर अज़ीमुल्ला, अहमद शाह मौलवी और ठाकुर कुँवर सिंह जैसे कई वीर सैनिक शहीद हुए। भारत के इतिहास में इनके नाम सदा अमर रहेंगे। कवयित्री खेद व्यक्त करती हैं कि उस समय अंग्रेजों ने उनकी इस कुर्बानी को 'जुर्म' (अपराध) करार दिया था।
स्तवक 13: "इनकी गाथा छोड़ चलें हम झाँसी के मैदानों में..."
भावार्थ: इन वीरों की गाथा को छोड़कर अब कवयित्री हमें झाँसी के युद्धक्षेत्र में ले चलती हैं, जहाँ लक्ष्मीबाई पुरुषों के समान वीरता से डटी खड़ी थीं। लेफ्टिनेंट वॉकर आगे बढ़ता हुआ रानी के सामने आ पहुँचा। रानी ने तुरंत तलवार खींच ली और दोनों में घमासान द्वंद्व-युद्ध हुआ। अंततः घायल होकर वॉकर मैदान छोड़कर भाग गया, और उसे इस पर बड़ी हैरानी हुई कि एक स्त्री इतनी कुशलता से लड़ सकती है।
स्तवक 14: "रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार..."
भावार्थ: रानी सौ मील की निरंतर यात्रा तय करके कालपी पहुँचीं; इतनी लंबी यात्रा से उनका घोड़ा थककर गिर पड़ा और उसकी वहीं मृत्यु हो गई। यमुना नदी के तट पर अंग्रेजों को फिर एक बार रानी से हार का सामना करना पड़ा। विजयी रानी आगे बढ़ीं और ग्वालियर पर अधिकार कर लिया। लेकिन अंग्रेजों के मित्र सिंधिया राजा युद्ध का सामना किए बिना ही अपनी राजधानी छोड़कर भाग गए।
स्तवक 15: "विजय मिली, पर अंग्रेजों की फिर सेना घिर आई थी..."
भावार्थ: रानी को विजय तो मिली, पर अंग्रेजों की एक और सेना घेरकर आ गई। इस बार जनरल स्मिथ रानी के सामने आया, पर उसे भी मुँह की खानी पड़ी (हार का सामना करना पड़ा)। रानी की सखियाँ काना और मंदरा भी उनके साथ युद्ध में शामिल हुईं और दोनों ने रणक्षेत्र में शत्रुओं पर भारी प्रहार किए। किंतु पीछे से जनरल ह्यू रोज़ की सेना आ गई और रानी अब चारों ओर से घिर गईं।
स्तवक 16: "तो भी रानी मार-काटकर चलती बनी सैन्य के पार..."
भावार्थ: फिर भी रानी शत्रु सेना को मार-काटकर आगे निकल गईं, परंतु सामने एक नाला आ गया जो बहुत बड़ा संकट बन गया। उनका घोड़ा नाला पार करने से हिचकिचाया, और वह नया (अपरिचित) घोड़ा था। इसी बीच शत्रु सैनिक आ पहुँचे। रानी अकेली थीं और शत्रु अनेक — चारों ओर से वार होने लगे। अंततः घायल होकर वीरांगना रूपी सिंहनी गिर पड़ीं और उन्हें वीरगति प्राप्त हुई।
स्तवक 17: "रानी गई सिधार, चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी..."
भावार्थ: रानी स्वर्ग सिधार गईं, अब चिता ही उनकी दिव्य सवारी बनी। उनका तेज परम-तेज (परमात्मा के तेज) में जा मिला, क्योंकि वे सचमुच उस तेज की सच्ची अधिकारिणी थीं। मात्र तेईस वर्ष की अल्पायु में ही उन्होंने यह वीरता दिखाई — कवयित्री कहती हैं कि वे कोई साधारण मनुष्य नहीं, बल्कि साक्षात स्वतंत्रता की अवतार नारी थीं, जो हमें जीवित करने (जगाने) आई थीं। वे हमें रास्ता दिखा गईं और वह सीख सिखा गईं जो सिखानी आवश्यक थी।
स्तवक 18: "जाओ रानी याद रखेंगे हम कृतज्ञ भारत वासी..."
भावार्थ: कवयित्री रानी को श्रद्धांजलि देते हुए कहती हैं — हे रानी, जाओ, हम कृतज्ञ भारतवासी सदैव तुम्हें याद रखेंगे। तुम्हारा यह बलिदान अमर स्वतंत्रता की भावना को सदा जगाता रहेगा। चाहे इतिहास इस सच्चाई पर मौन रहे या इसे मिटाने की कितनी भी कोशिश हो, चाहे झाँसी को गोलों से उड़ा भी दिया जाए, फिर भी रानी का बलिदान अमिट रहेगा — क्योंकि रानी का असली स्मारक वह स्वयं है, वह स्वयं एक अमिट (न मिटने वाली) यशोगाथा है।
1. 'बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी' पंक्ति में 'नई जवानी' शब्द किस भाव को व्यक्त करता है?
(क) देश का स्वाभिमान (ख) विद्रोह की चिंगारी (ग) स्वाधीनता का भय (घ) भारत की युवावस्था
उत्तर: (ख) विद्रोह की चिंगारी — पूरा स्तवक 1857 में भारतीयों में जागे नए जोश व विद्रोह-भावना का वर्णन करता है; 'नई जवानी' एक रूपक है जो अगली पंक्तियों में वर्णित विद्रोह की चिंगारी (चमक उठी तलवार) से जुड़ता है।
2. लक्ष्मीबाई को 'छबीली' कहना उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है?
(क) विनम्रता (ख) शोभायुक्त (ग) सहिष्णुता (घ) कठोरता
उत्तर: (ख) शोभायुक्त — 'छबीली' शब्द का शाब्दिक अर्थ ही है तेजस्वी, सुंदर व छवि-युक्त अर्थात शोभायुक्त व्यक्तित्व वाली — यह सीधे उनके तेजस्वी रूप-सौंदर्य को दर्शाता है।
3. 'बुझा दीप झाँसी का' पंक्ति का भावार्थ है—
(क) अंग्रेजों का झाँसी पर अधिकार हो जाना (ख) झाँसी राज्य की उम्मीदों का नष्ट हो जाना (ग) राजा की आकस्मिक मृत्यु होना (घ) रानी के जीवन में उदासी होना
उत्तर: (ग) राजा की आकस्मिक मृत्यु होना — 'दीप' यहाँ राजा गंगाधर राव के जीवन/वंश-प्रकाश का प्रतीक है; दीप बुझना उनकी आकस्मिक मृत्यु का रूपक है, जिसके बाद ही डलहौजी को राज्य हड़पने का अवसर मिला।
4. 'इस स्वतंत्रता-महायज्ञ में कई वीरवर आए काम' पंक्ति में स्वतंत्रता आंदोलन की किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया गया है?
(क) असहयोग आंदोलन (ख) भारत छोड़ो आंदोलन (ग) 1857 की क्रांति (घ) सविनय अवज्ञा आंदोलन
उत्तर: (ग) 1857 की क्रांति — संपूर्ण कविता 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि पर आधारित है, और उल्लिखित सभी वीर (नाना धुंधूपंत, ताँतिया, अज़ीमुल्ला आदि) इसी क्रांति से जुड़े थे।
5. 'व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया' पंक्ति में 'यह' शब्द किसके लिए कहा गया है?
(क) नवाबों के लिए (ख) जनरल डलहौजी के लिए (ग) लेफ्टिनेंट वॉकर के लिए (घ) ब्रिटिश राज के लिए
उत्तर: (घ) ब्रिटिश राज के लिए — यह पंक्ति संपूर्ण अंग्रेजी सत्ता के भारत-आगमन की बात कर रही है, जो पहले व्यापार के बहाने आई और बाद में शासक बन बैठी; डलहौजी इसी ब्रिटिश राज का एक प्रतिनिधि मात्र है।
1. 'झाँसी की रानी' कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल कौन-कौन से थे? उनका बचपन दूसरों से किस प्रकार भिन्न था?
उत्तर: लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल थे — नकली युद्ध खेलना, सेना की व्यूह-रचना करना, शिकार खेलना, सेना घेरना और दुर्ग तोड़ना; बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी जैसे शस्त्र-संचालन में निपुणता प्राप्त करना भी उन्हें प्रिय था। उनका बचपन इसलिए भिन्न था क्योंकि उस समय लड़कियों को सामान्यतः घरेलू कार्यों की शिक्षा दी जाती थी, जबकि लक्ष्मीबाई ने नाना साहेब के साथ शस्त्र-विद्या व युद्ध-कौशल सीखा और वीर शिवाजी की गाथाएँ कंठस्थ कीं।
2. 'किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई' पंक्ति के माध्यम से किस घटना की ओर संकेत किया गया है?
उत्तर: यह पंक्ति राजा गंगाधर राव की आकस्मिक मृत्यु और रानी के विधवा हो जाने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना की ओर संकेत करती है, जिसने रानी के सुखी जीवन में अचानक शोक व संकट ला दिया।
3. 'महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी' पंक्ति समाज के विभिन्न वर्गों की एकता को दर्शाती है, इस एकता का स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में क्या महत्व है?
उत्तर: यह पंक्ति दर्शाती है कि 1857 का विद्रोह केवल राजा-महाराजाओं तक सीमित नहीं था, बल्कि संपन्न वर्ग (महल) और आम जनता (झोंपड़ी) दोनों ने मिलकर इसमें भाग लिया। किसी भी बड़े जन-आंदोलन की सफलता के लिए सभी वर्गों की सहभागिता आवश्यक होती है — यही एकजुटता स्वतंत्रता संग्राम को व्यापक जन-आंदोलन बनाती है।
4. 'सरे-आम नीलाम छापते थे अंग्रेजों के अखबार' पंक्ति में 'नीलाम छापते' शब्द किसकी ओर संकेत करता है? यह भी बताइए कि किसकी नीलामी की जाती थी और क्यों?
उत्तर: 'नीलाम छापते' शब्द अंग्रेजी अखबारों द्वारा भारतीय राजघरानों से लूटे गए गहनों व वस्त्रों की सार्वजनिक नीलामी के विज्ञापन छापने की ओर संकेत करता है। नागपुर व लखनऊ जैसी रियासतों की रानियों-बेगमों के आभूषण व वस्त्र नीलाम किए जाते थे, क्योंकि इन राज्यों पर अधिकार करने के बाद अंग्रेजों ने वहाँ की संपत्ति लूटकर बेच दी — यह भारतीयों के अपमान व शोषण का प्रतीक है।
5. 'अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी' पंक्ति में 'अवतारी' शब्द व्यक्ति के विशेष गुणों की ओर इंगित कर रहा है। कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के किन गुणों के कारण उनको 'अवतारी' कहा गया है?
उत्तर: लक्ष्मीबाई को उनकी असाधारण वीरता, युद्ध-कौशल, नेतृत्व-क्षमता, निर्भीकता और मात्र तेईस वर्ष की अल्पायु में देश के लिए बलिदान देने के साहस के कारण 'अवतारी' कहा गया है। वे साधारण मनुष्य की भाँति नहीं, बल्कि स्वतंत्रता की साक्षात मूर्ति के समान थीं, जिन्होंने अपने आचरण से पूरे राष्ट्र को प्रेरणा दी।
1. पाठ की संरचना को समझते हुए इसमें वर्णित प्रमुख घटनाओं को समय-रेखा (टाइमलाइन) पर दर्शाइए।
उत्तर: बचपन (नाना के साथ खेलना व शस्त्र-विद्या सीखना) → विवाह (झाँसी नरेश गंगाधर राव से) → वैधव्य (राजा की मृत्यु, निःसंतान) → राज्य-हड़प (डलहौजी की नीति से झाँसी पर अंग्रेजी अधिकार) → विद्रोह की तैयारी (रण-चंडी का आह्वान) → 1857 की क्रांति में भागीदारी → वॉकर से द्वंद्व-युद्ध व विजय → कालपी व ग्वालियर पर विजय → अंतिम युद्ध व वीरगति प्राप्ति।
1. 'लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया', ब्रिटिश राज किस नीति के कारण 'लावारिस का वारिस' बन जाता था?
उत्तर: इसे 'गोद-निषेध नीति' (Doctrine of Lapse) कहा जाता है, जो गवर्नर-जनरल लॉर्ड डलहौजी ने लागू की थी। इस नीति के अनुसार यदि किसी भारतीय शासक की मृत्यु बिना प्राकृतिक (जैविक) पुत्र के होती थी, तो उसका राज्य अंग्रेजी कंपनी में मिला लिया जाता था, भले ही उसने किसी को गोद लिया हो। इसी नीति के आधार पर राजा गंगाधर राव के निःसंतान निधन के बाद झाँसी को 'लावारिस' घोषित कर हड़प लिया गया।
2. इस कविता में लक्ष्मीबाई की जीवन-गाथा के साथ-साथ अनेक वीरों के त्याग व बलिदान का भी उल्लेख है। उनकी सूची बनाइए तथा 1857 की क्रांति में उनके योगदान के विषय में लिखिए।
उत्तर: कविता में उल्लिखित वीर हैं — नाना धुंधूपंत (नाना साहेब): कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व किया; ताँतिया टोपे: नाना साहेब के प्रमुख सेनापति, गुरिल्ला युद्ध में निपुण; अज़ीमुल्ला खान: नाना साहेब के सलाहकार व कूटनीतिज्ञ; अहमद शाह मौलवी (मौलवी अहमदुल्ला): फैज़ाबाद में विद्रोह के नेता; ठाकुर कुँवर सिंह: बिहार (जगदीशपुर) में विद्रोह के वयोवृद्ध नेता। इन सभी ने अपने-अपने क्षेत्रों में अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया, जिसके लिए इन्हें अंग्रेजों ने 'विद्रोही/अपराधी' घोषित किया, जबकि भारतीय इतिहास में ये सदा के लिए अमर हो गए।
3. यह कविता जिस समय व परिवेश में लिखी गई, उसमें युद्ध व साहसिक कार्य पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था; वर्तमान में लगभग हर क्षेत्र में महिलाएँ कार्य कर रही हैं। इन क्षेत्रों (दमकल केंद्र, रेलगाड़ी चालक, खेल, व्यापार-प्रबंधन, विज्ञान-तकनीक) में कार्यरत महिलाओं व उनके विषय में लिखिए।
उत्तर: उदाहरण: रेलगाड़ी चालक — सुरेखा यादव, भारत की पहली महिला रेल इंजन चालक; दमकल केंद्र — हर्षिनी कान्वर (देश की पहली महिला अग्निशमन अधिकारियों में से एक); खेल — पी.वी. सिंधु, मैरी कॉम आदि; विज्ञान-तकनीक — इसरो की महिला वैज्ञानिक (जैसे रितु करिधाल, चंद्रयान मिशन); व्यापार-प्रबंधन — किरण मजूमदार-शॉ (बायोकॉन की संस्थापक)। छात्र अपनी समझ अनुसार इनमें और उदाहरण जोड़ सकते हैं।
4. कविता में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित अनेक स्थानों के नाम आए हैं। मानचित्र में उन स्थानों/नगरों को चिह्नित करके नाम लिखिए।
उत्तर: यह एक मानचित्र-आधारित गतिविधि है, जिसे शिक्षक की सहायता से भारत के रेखा-मानचित्र पर पूर्ण करना है। कविता में उल्लिखित प्रमुख स्थान हैं — झाँसी, कानपुर, दिल्ली, लखनऊ, बिठूर, नागपुर, उदयपुर, तंजौर (तंजोर), सतारा, कर्नाटक, सिंध, पंजाब, बर्मा (ब्रह्म), बंगाल, मद्रास, मेरठ, पटना, जबलपुर, कोल्हापुर, कालपी और ग्वालियर — इन सभी को मानचित्र पर चिह्नित करें।
1. शब्द एक अर्थ अनेक (अनेकार्थी शब्द) — संदर्भ के अनुसार सही अर्थ:
| काव्य-पंक्ति | शब्द | प्रसंगानुकूल सही अर्थ |
|---|---|---|
| तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई | तीर | बाण (नदी का किनारा / सीसा में से प्रसंगानुकूल अर्थ) |
| रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई | विधि | विधाता (शास्त्र-व्यवस्था / तरीका में से प्रसंगानुकूल अर्थ) |
| रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्व असमानों में | द्वंद्व | युद्ध (संशय / युग्म में से प्रसंगानुकूल अर्थ) |
| हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी | गोलों | तोप से दागे जाने वाले गोले (गोल पिंड / नारियल में से प्रसंगानुकूल अर्थ) |
| मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी | तेज | आभा/ओज (गति / चाकू की धार में से प्रसंगानुकूल अर्थ) |
2. वर्तनी भिन्नता:
कविता में मानक वर्तनी से भिन्न प्रयोग किन शब्दों में मिलता है, और रचनाकार ऐसा प्रयोग क्यों करते हैं?
उत्तर: कविता में 'कानपूर' (मानक: कानपुर), 'बुंदेले/बुंदेला' जैसे शब्दों में तुक (छंद-लय) बनाए रखने हेतु मानक वर्तनी से थोड़ा भिन्न प्रयोग मिलता है। कवि/कवयित्री प्रायः कविता की लय, तुकबंदी व गेयता बनाए रखने के लिए शब्दों की वर्तनी में मामूली परिवर्तन कर लेते हैं, जिससे पढ़ने व गाने में प्रवाह बना रहे।
| काव्य-पंक्ति | मुहावरा | नया वाक्य |
|---|---|---|
| अबके जनरल स्मिथ सन्मुख था, उसने मुँह की खाई थी | मुँह की खाना | मोहन ने सोचा था कि वह आसानी से जीत जाएगा, लेकिन अंत में उसे मुँह की खानी पड़ी। (उदाहरण) |
| डलहौजी ने पैर पसारे अब तो पलट गई काया | पैर पसारना | महामारी ने थोड़े ही दिनों में पूरे शहर में अपने पैर पसार लिए। |
| राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया | पैरों ठुकराना | सफलता मिलते ही उसने अपने पुराने मित्रों को पैरों ठुकरा दिया। |
| हुआ यज्ञ प्रारंभ उन्हें तो सोई ज्योति जगानी थी | सोई ज्योति जगाना | नेता के ओजस्वी भाषण ने युवाओं के मन में सोई ज्योति जगा दी। |
| मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी | धूम मचाना | भारतीय टीम की जीत ने पूरे देश में धूम मचा दी। |
1. लक्ष्मीबाई की सखियों काना तथा मंदरा की ओर से लक्ष्मीबाई को एक पत्र लिखिए जिसमें काना तथा मंदरा द्वारा ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध युद्ध की रणनीति पर चर्चा की गई हो।
उत्तर: आदरणीय रानी माँ,
सादर प्रणाम। हम दोनों — काना और मंदरा — कालपी की ओर बढ़ने की पूरी तैयारी कर चुकी हैं। हमारा सुझाव है कि हम रात्रि में शत्रु-सेना के शिविर पर आक्रमण करें, जब उनकी चौकसी ढीली रहती है, और फिर तुरंत आगे बढ़ जाएँ ताकि वे संगठित होकर घेर न सकें। हम अंतिम साँस तक आपके साथ रणभूमि में डटी रहेंगी। जय भारत!
आपकी सेविकाएँ — काना व मंदरा
2. युद्धपूर्व रात्रि में झाँसी की रानी के मन में अगले दिन की संभावनाओं को लेकर कई तरह के भाव-विचार उठ रहे होंगे। अपने जीवन के ऐसे किसी ऊहापोह के क्षण को डायरी में लिखिए (जैसे परीक्षा से एक दिन पूर्व की स्थिति)।
उत्तर: मॉडल संकेत: डायरी लेखन में तिथि, समय का उल्लेख करते हुए अपनी उत्सुकता, घबराहट व आत्मविश्वास के मिश्रित भावों को स्वाभाविक भाषा में व्यक्त करें — जैसे 'कल परीक्षा है, मन में कई प्रश्न घूम रहे हैं, फिर भी मैंने पूरी तैयारी की है और आत्मविश्वास से मैदान में उतरूँगा/उतरूँगी...' — छात्र अपने वास्तविक अनुभव के आधार पर व्यक्तिगत उत्तर लिखें।
1. शौर्य के समाचार: कविता में वर्णित घटनाओं को एक समाचार-वाचक की तरह समाचार के रूप में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: "आज झाँसी की रणभूमि पर रानी लक्ष्मीबाई ने अपनी अद्भुत वीरता और शौर्य का परिचय दिया। अपने घोड़े पर सवार, एक हाथ में तलवार व दूसरी गोद में अपने पुत्र को लिए, रानी ने अंग्रेज सेना का डटकर सामना किया। लेफ्टिनेंट वॉकर से हुए द्वंद्व-युद्ध में रानी ने उसे बुरी तरह घायल कर पीछे हटने पर विवश किया। जनता में रानी के इस अदम्य साहस की चर्चा है..."
2. 'हरबोलों' और हमारी कहानी: अपने क्षेत्र के लोकगायकों तथा उनके द्वारा गाए जाने वाले देशभक्तिपूर्ण गीतों का संकलन तैयार कीजिए।
उत्तर: यह एक खुला, क्षेत्र-आधारित संकलन कार्य है। बुंदेलखंड के 'हरबोला' लोकगायकों की भाँति भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी-अपनी लोकगायन परंपराएँ हैं (जैसे राजस्थान के मांगणियार, पंजाब के ढाडी गायक आदि) — छात्र अपने क्षेत्र के ऐसे ही लोकगायकों व उनके देशभक्तिपूर्ण गीतों की जानकारी एकत्र करें और कक्षा में साझा करें।
3. भाषा संगम: 'बहन' शब्द के लिए भारत की विभिन्न भाषाओं में प्रयुक्त शब्द अपनी मातृभाषा में भी लिखिए तथा वाक्य का अनुवाद कीजिए।
उत्तर: पाठ्यपुस्तक में दी गई सूची के अनुसार — बहन (हिंदी), भगिनी/स्वसृ (संस्कृत), भैण (पंजाबी), हमशीरा (उर्दू), बैनी (कश्मीरी), भेण (सिंधी), बहीण (मराठी), बहेन (गुजराती), भयण (कोंकणी) आदि। छात्र अपनी मातृभाषा का शब्द जोड़कर वाक्य 'कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन छबीली थी' का अपनी भाषा में अनुवाद करें।
झलकारी बाई (जन्म: 22 नवंबर 1830, भोजला गाँव, झाँसी के निकट) रानी लक्ष्मीबाई की विश्वसनीय सहेली व 'दुर्गा दल' नामक महिला सेना की सदस्य थीं। वे रानी से शक्ल-सूरत में काफ़ी मिलती-जुलती थीं। सन् 1858 में जब जनरल ह्यू रोज़ की अंग्रेजी सेना ने झाँसी के किले को घेर लिया, तब झलकारी बाई ने स्वयं रानी का वेश धारण कर सेना की कमान संभाली और अंग्रेजों से लड़ीं, जिससे रानी को अपने पुत्र सहित सुरक्षित महल से निकलने का समय मिल गया। उनकी वीरता आज भी बुंदेलखंड की लोक-स्मृति का हिस्सा है, और हर वर्ष उनके सम्मान में 'झलकारी बाई जयंती' मनाई जाती है।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| फ़िरंगी | अंग्रेज, विलायती |
| मर्दानी/मर्दाना | बहादुर, पुरुषोचित |
| छबीली/छबीला | तेजस्वी, सुंदर, छविवाली, सजीली |
| बरछी | छोटा भाला |
| ढाल | तलवार-भाले आदि के आघात को रोकने का लोहे का साधन |
| गाथाएँ/गाथा | कथा, प्रशंसागीत |
| अवतार | उतरना, देवता का मनुष्यादि रूप में जन्म लेना |
| नाना | माता का पिता, अनेक प्रकार के |
| दुर्ग | गढ़, किला |
| सुभट | रणकुशल योद्धा |
| विरुदावलि/विरुद | विस्तृत यशोगाथा, प्रशंसासूचक पदवी |
| विधि | सृष्टि की रचना करने वाला, कार्य करने का ढंग, विधाता |
| बिरानी/बिराना | पराया |
| बिसात | फैलाव, हैसियत, शक्ति, सामर्थ्य |
| निपात | गिरना, चलाना, फेंकना, पतन, विनाश |
| बेज़ार | दुखी, ऊबा हुआ |
| सन्मुख | समक्ष, सामने |
| कृतज्ञ | उपकार मानने वाला, एहसानमंद |
| अविनाशी | नाशरहित, अक्षय, नित्य |
| मदमाती/मदमाता | मस्त, मदमत्त |
| स्मारक | स्मृति-रक्षा हेतु स्थापित संस्था/भवन/स्तंभ |
(ये प्रश्न पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नों से भिन्न हैं — अतिरिक्त अभ्यास हेतु)
प्रश्न 1. सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म किस वर्ष हुआ था? (1 अंक)
(क) 1900 (ख) 1904 (ग) 1910 (घ) 1915
प्रश्न 2. सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म स्थान कौन-सा है? (1 अंक)
(क) प्रयागराज (ख) झाँसी (ग) कानपुर (घ) लखनऊ
प्रश्न 3. सुभद्रा कुमारी चौहान को किस पुरस्कार से दो बार सम्मानित किया गया? (1 अंक)
(क) ज्ञानपीठ पुरस्कार (ख) सेकसरिया पुरस्कार (ग) पद्मश्री (घ) साहित्य अकादमी पुरस्कार
प्रश्न 4. सुभद्रा कुमारी चौहान का निधन किस वर्ष हुआ? (1 अंक)
(क) 1945 (ख) 1948 (ग) 1950 (घ) 1952
प्रश्न 5. 'झाँसी की रानी' कविता किस स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि पर लिखी गई है? (1 अंक)
(क) 1942 का आंदोलन (ख) 1857 का संग्राम (ग) 1919 का आंदोलन (घ) 1930 का आंदोलन
प्रश्न 6. लक्ष्मीबाई नाना साहेब की क्या लगती थीं? (1 अंक)
(क) सगी बहन (ख) मुँहबोली बहन (ग) चचेरी बहन (घ) बुआ
प्रश्न 7. लक्ष्मीबाई अपने पिता की कैसी संतान थीं? (1 अंक)
(क) सबसे बड़ी (ख) सबसे छोटी (ग) इकलौती (घ) दूसरी
प्रश्न 8. लक्ष्मीबाई को किस वीर की गाथाएँ ज़बानी याद थीं? (1 अंक)
(क) महाराणा प्रताप (ख) वीर शिवाजी (ग) पृथ्वीराज चौहान (घ) राणा सांगा
प्रश्न 9. लक्ष्मीबाई का विवाह किससे हुआ? (1 अंक)
(क) नाना साहेब से (ख) राजा गंगाधर राव से (ग) ताँतिया टोपे से (घ) कुँवर सिंह से
प्रश्न 10. राजा गंगाधर राव की मृत्यु के समय रानी की क्या स्थिति थी? (1 अंक)
(क) संतान सहित (ख) निःसंतान (ग) गर्भवती (घ) पुत्र सहित
प्रश्न 11. झाँसी राज्य को किस अंग्रेज गवर्नर-जनरल ने हड़प लिया? (1 अंक)
(क) लॉर्ड कर्ज़न (ख) लॉर्ड डलहौजी (ग) लॉर्ड कैनिंग (घ) लॉर्ड विलियम बेंटिक
प्रश्न 12. महाराष्ट्र की कुल-देवी के रूप में कविता में किसका उल्लेख है? (1 अंक)
(क) दुर्गा (ख) लक्ष्मी (ग) भवानी (घ) सरस्वती
प्रश्न 13. लेफ्टिनेंट वॉकर के साथ द्वंद्व-युद्ध में क्या हुआ? (1 अंक)
(क) रानी हार गईं (ख) वॉकर घायल होकर भागा (ग) दोनों बराबरी पर रहे (घ) युद्ध रुक गया
प्रश्न 14. रानी ने घोड़े पर सवार होकर कितने मील की निरंतर यात्रा तय की? (1 अंक)
(क) पचास मील (ख) सौ मील (ग) दो सौ मील (घ) पचहत्तर मील
प्रश्न 15. कालपी की यात्रा के बाद रानी के घोड़े का क्या हुआ? (1 अंक)
(क) वह बीमार पड़ गया (ख) थककर गिर गया और मर गया (ग) उसे बदल दिया गया (घ) कुछ नहीं हुआ
प्रश्न 16. रानी ने ग्वालियर पर अधिकार करने के बाद वहाँ के किस राजा ने राजधानी छोड़ दी? (1 अंक)
(क) सिंधिया (ख) होल्कर (ग) पेशवा (घ) निज़ाम
प्रश्न 17. रानी के साथ युद्धक्षेत्र में लड़ने वाली उनकी दो सखियों के नाम क्या थे? (1 अंक)
(क) राधा और सीता (ख) काना और मंदरा (ग) रुक्मिणी और मीरा (घ) गीता और उषा
प्रश्न 18. रानी लक्ष्मीबाई को अंततः किसकी सेना ने घेर लिया था? (1 अंक)
(क) जनरल स्मिथ (ख) जनरल ह्यू रोज़ (ग) लेफ्टिनेंट वॉकर (घ) लॉर्ड कैनिंग
प्रश्न 19. वीरगति प्राप्त करते समय रानी लक्ष्मीबाई की आयु कितनी थी? (1 अंक)
(क) उन्नीस वर्ष (ख) तेईस वर्ष (ग) तीस वर्ष (घ) पैंतीस वर्ष
प्रश्न 20. कविता में किसे 'रण-चंडी' का आह्वान करने वाली बताया गया है? (1 अंक)
(क) नाना साहेब (ख) बहन छबीली (लक्ष्मीबाई) (ग) ताँतिया टोपे (घ) कुँवर सिंह
प्रश्न 21. कविता में बार-बार दोहराई जाने वाली टेक (रिफ्रेन) किस समुदाय के गायकों से संबंधित है? (1 अंक)
(क) चारण (ख) हरबोले (ग) भाट (घ) मिरासी
प्रश्न 22. कविता में 'चित्रा' और 'अर्जुन' का उल्लेख किस संदर्भ में हुआ है? (1 अंक)
(क) युद्ध कौशल दिखाने हेतु (ख) रानी व राजा के मिलन की उपमा हेतु (ग) शस्त्र-विद्या हेतु (घ) कोई संदर्भ नहीं
प्रश्न 23. डलहौजी ने झाँसी राज्य हड़पने के लिए किस नीति का प्रयोग किया? (1 अंक)
(क) फूट डालो राज करो (ख) गोद-निषेध नीति (ग) सहायक संधि (घ) स्थायी बंदोबस्त
प्रश्न 24. कविता के अनुसार रानी अंत में किस बाधा के कारण घिर गईं? (1 अंक)
(क) पहाड़ के कारण (ख) नाला पार करते समय घोड़ा अड़ जाने के कारण (ग) भोजन की कमी के कारण (घ) सैनिकों के विद्रोह के कारण
प्रश्न 25. कविता का मूल भाव/संदेश क्या है? (1 अंक)
(क) युद्ध की निंदा (ख) देशप्रेम, वीरता व बलिदान की भावना (ग) पारिवारिक जीवन का चित्रण (घ) प्रकृति-सौंदर्य
1. (ख) 1904
2. (क) प्रयागराज
3. (ख) सेकसरिया पुरस्कार
4. (ख) 1948
5. (ख) 1857 का संग्राम
6. (ख) मुँहबोली बहन
7. (ग) इकलौती
8. (ख) वीर शिवाजी
9. (ख) राजा गंगाधर राव से
10. (ख) निःसंतान
11. (ख) लॉर्ड डलहौजी
12. (ग) भवानी
13. (ख) वॉकर घायल होकर भागा
14. (ख) सौ मील
15. (ख) थककर गिर गया और मर गया
16. (क) सिंधिया
17. (ख) काना और मंदरा
18. (ख) जनरल ह्यू रोज़
19. (ख) तेईस वर्ष
20. (ख) बहन छबीली (लक्ष्मीबाई)
21. (ख) हरबोले
22. (ख) रानी व राजा के मिलन की उपमा हेतु
23. (ख) गोद-निषेध नीति
24. (ख) नाला पार करते समय घोड़ा अड़ जाने के कारण
25. (ख) देशप्रेम, वीरता व बलिदान की भावना
(एक पंक्ति में उत्तर)
1. 'झाँसी की रानी' कविता की कवयित्री कौन हैं?
उत्तर: सुभद्रा कुमारी चौहान।
2. लक्ष्मीबाई को किस नाम से पुकारा जाता था?
उत्तर: 'छबीली'।
3. लक्ष्मीबाई का बचपन का साथी कौन था?
उत्तर: नाना साहेब।
4. लक्ष्मीबाई किस कुल-देवी की उपासक थीं?
उत्तर: भवानी।
5. लक्ष्मीबाई का विवाह किस राज्य में हुआ?
उत्तर: झाँसी में।
6. झाँसी के राजा का नाम क्या था?
उत्तर: गंगाधर राव।
7. डलहौजी ने झाँसी राज्य पर अधिकार के लिए किस नीति का सहारा लिया?
उत्तर: गोद-निषेध नीति (व्यपगत का सिद्धांत)।
8. रानी के गहने-कपड़े किस शहर के बाज़ार में बेचे गए?
उत्तर: कलकत्ता (कलकत्ते) के बाज़ार में।
9. रानी ने रण-चंडी का आह्वान कब किया?
उत्तर: क्रांति (यज्ञ) प्रारंभ होने पर।
10. लेफ्टिनेंट वॉकर से युद्ध में किसकी जीत हुई?
उत्तर: रानी लक्ष्मीबाई की।
11. रानी कालपी कितनी दूरी तय करके पहुँचीं?
उत्तर: सौ मील।
12. ग्वालियर के जिस राजा ने राजधानी छोड़ दी, उसका नाम बताइए।
उत्तर: सिंधिया।
13. रानी के साथ युद्ध में लड़ने वाली दो सखियों के नाम बताइए।
उत्तर: काना और मंदरा।
14. रानी को अंततः किस अंग्रेज जनरल की सेना ने घेरा?
उत्तर: जनरल ह्यू रोज़।
15. वीरगति प्राप्त होते समय रानी की आयु क्या थी?
उत्तर: तेईस वर्ष।
16. कविता में किस समुदाय के लोकगायकों का उल्लेख है?
उत्तर: हरबोले (बुंदेलखंड के लोकगायक)।
17. 1857 की क्रांति में शहीद हुए किन्हीं दो वीरों के नाम लिखिए।
उत्तर: नाना धुंधूपंत और ताँतिया टोपे।
18. रानी की तुलना किन दो देवियों से की गई है?
उत्तर: लक्ष्मी और दुर्गा।
19. रानी के जीवन का अंत कैसे हुआ?
उत्तर: युद्धभूमि में घायल होकर वीरगति प्राप्त करते हुए।
20. सुभद्रा कुमारी चौहान की किन्हीं दो रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर: मुकुल और त्रिधारा।
(2–3 पंक्तियों में उत्तर)
1. लक्ष्मीबाई का बचपन कैसा बीता?
उत्तर: लक्ष्मीबाई का बचपन नाना साहेब के साथ बीता। वे नाना के साथ पढ़ती-खेलती थीं तथा बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी जैसे शस्त्रों के संचालन में निपुणता प्राप्त करती थीं। वीर शिवाजी की गाथाएँ उन्हें कंठस्थ थीं।
2. डलहौजी ने झाँसी राज्य पर किस प्रकार अधिकार किया?
उत्तर: राजा गंगाधर राव के निःसंतान निधन के बाद डलहौजी ने 'गोद-निषेध नीति' का सहारा लेते हुए झाँसी को लावारिस घोषित कर दिया और फौरन फौजें भेजकर किले पर झंडा फहराकर राज्य पर अधिकार कर लिया।
3. अंग्रेजी अखबारों ने भारतीय राजघरानों के साथ क्या अन्याय किया?
उत्तर: अंग्रेजी अखबार लूटे गए भारतीय राजघरानों की रानियों-बेगमों के गहने-कपड़ों की सरेआम नीलामी के विज्ञापन छापते थे, जिससे पर्दानशीन महिलाओं की वस्तुएँ भी विदेशियों के हाथ बिकने लगीं।
4. लेफ्टिनेंट वॉकर के साथ हुए युद्ध का वर्णन कीजिए।
उत्तर: लेफ्टिनेंट वॉकर आगे बढ़ता हुआ रानी के सामने आ पहुँचा। रानी ने तुरंत तलवार खींचकर उससे घमासान द्वंद्व-युद्ध किया, जिसमें वॉकर घायल होकर भाग गया और उसे रानी की वीरता पर बड़ी हैरानी हुई।
5. कालपी की यात्रा में रानी को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?
उत्तर: रानी ने सौ मील की निरंतर यात्रा तय की, जिससे उनका घोड़ा थककर गिर गया और उसकी मृत्यु हो गई। इसके बावजूद रानी ने यमुना तट पर अंग्रेजों को पुनः हराया और आगे बढ़ती रहीं।
6. रानी के अंतिम युद्ध का वर्णन कीजिए।
उत्तर: शत्रु सेना को मार-काटकर आगे बढ़ते समय रानी के सामने एक नाला आ गया, जिसे उनका नया घोड़ा पार करने में हिचकिचाया। इसी बीच शत्रु सैनिकों ने उन्हें घेर लिया और घायल होकर रानी वीरगति को प्राप्त हुईं।
7. झलकारी बाई के योगदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर: झलकारी बाई रानी लक्ष्मीबाई की विश्वसनीय सहेली थीं, जो शक्ल-सूरत में रानी से मिलती-जुलती थीं। किले को घेरे जाने पर उन्होंने रानी का वेश धारण कर सेना की कमान संभाली, जिससे रानी को सुरक्षित निकलने का समय मिल गया।
8. 1857 की क्रांति में किन-किन नगरों में विद्रोह की लपटें फैलीं?
उत्तर: कविता के अनुसार झाँसी, दिल्ली, लखनऊ, मेरठ, कानपुर, पटना, जबलपुर और कोल्हापुर आदि नगरों में विद्रोह की लपटें और हलचल फैली।
9. कवयित्री ने रानी को श्रद्धांजलि किस प्रकार दी है?
उत्तर: कवयित्री कहती हैं कि कृतज्ञ भारतवासी रानी को सदा याद रखेंगे और उनका बलिदान स्वतंत्रता की भावना को अमर रूप से जगाता रहेगा; रानी का बलिदान ही उनका सच्चा स्मारक है।
10. डलहौजी के व्यवहार में आए बदलाव को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: जो अंग्रेज पहले व्यापारी बनकर दया की भीख माँगते हुए भारत आए थे, कालांतर में डलहौजी ने अपने पैर पूरी तरह पसार लिए और राजाओं-नवाबों तक को ठुकरा दिया — यानी दास से स्वामी बनने की स्थिति हो गई।
11. कविता में वर्णित किन्हीं तीन वीरों के नाम व उनका परिचय दीजिए।
उत्तर: नाना धुंधूपंत (कानपुर में विद्रोह के नेता), ताँतिया टोपे (नाना के सेनापति) और ठाकुर कुँवर सिंह (बिहार में वयोवृद्ध विद्रोही नेता) — इन सभी ने 1857 की क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
12. रानी के जन्म व बचपन के विषय में कविता क्या बताती है?
उत्तर: कविता के अनुसार रानी का जन्म-नाम लक्ष्मीबाई था, वे अपने पिता की इकलौती संतान थीं और नाना साहेब की मुँहबोली बहन 'छबीली' कहलाती थीं।
13. रानी विधवा कैसे हुईं?
उत्तर: राजा गंगाधर राव की निःसंतान अवस्था में ही आकस्मिक मृत्यु हो गई, जिससे रानी विधवा हो गईं और शोक में डूब गईं।
14. कविता में सन् सत्तावन (1857) का क्या महत्व बताया गया है?
उत्तर: सन् सत्तावन में वर्षों से म्यान में पड़ी पुरानी तलवार फिर चमक उठी, अर्थात भारतीयों में स्वाधीनता की चेतना जागी और 1857 की क्रांति की शुरुआत हुई।
15. रानी के प्रिय खेलों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: नकली युद्ध खेलना, सेना की व्यूह-रचना करना, शिकार खेलना, सेना घेरना और दुर्ग तोड़ना — ये रानी के प्रिय खेल थे।
16. जनरल स्मिथ के साथ हुए युद्ध का परिणाम क्या रहा?
उत्तर: जनरल स्मिथ रानी के सामने आया, पर उसे रानी व उनकी सखियों काना-मंदरा से मुँह की खानी पड़ी, अर्थात हार का सामना करना पड़ा।
17. कविता की भाषा-शैली की विशेषता बताइए।
उत्तर: कविता की भाषा सरल, ओजपूर्ण व गेय है। इसमें वीर रस की प्रधानता है तथा कथात्मक शैली व बार-बार आने वाली टेक (रिफ्रेन) इसे संगीतात्मक व प्रभावशाली बनाती है।
18. सिंधिया के व्यवहार का वर्णन कीजिए।
उत्तर: सिंधिया अंग्रेजों के मित्र थे; रानी द्वारा ग्वालियर पर अधिकार करते ही वे बिना युद्ध किए अपनी राजधानी छोड़कर भाग गए।
19. रानी को 'सिंहनी' की उपमा क्यों दी गई है?
उत्तर: रानी की असीम वीरता, निर्भीकता और अंतिम क्षण तक डटकर लड़ने के साहस के कारण कवयित्री ने उन्हें घायल होकर गिरती हुई 'सिंहनी' की उपमा दी है, जो वीरगति को प्राप्त हुई।
20. कविता का ऐतिहासिक महत्व बताइए।
उत्तर: यह कविता 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की एक जीवंत झलक प्रस्तुत करती है और रानी लक्ष्मीबाई सहित अनेक वीरों के बलिदान को अमर बनाकर आने वाली पीढ़ियों में देशभक्ति की भावना जगाती है।
(विश्लेषणात्मक / परीक्षा में अधिक अंकों के लिए)
1. 'झाँसी की रानी' कविता के आधार पर सुभद्रा कुमारी चौहान के काव्य-कौशल पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: सुभद्रा कुमारी चौहान ने इस कविता में ओजपूर्ण, कथात्मक और गेय शैली का कुशल प्रयोग करते हुए रानी लक्ष्मीबाई के संपूर्ण जीवन-चरित्र को क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने वीर रस की प्रधानता के साथ-साथ ऐतिहासिक तथ्यों को कुशलता से पिरोया है। बार-बार दोहराई जाने वाली टेक (रिफ्रेन) कविता को संगीतात्मकता व प्रभावशीलता प्रदान करती है, जिससे यह कविता आज भी उतनी ही जीवंत व प्रेरणादायक बनी हुई है।
2. कविता में लक्ष्मीबाई को देवी स्वरूप में चित्रित करने के पीछे कवयित्री का क्या उद्देश्य रहा होगा?
उत्तर: कवयित्री का उद्देश्य रानी के प्रति श्रद्धा और असाधारण वीरता को उजागर करना रहा होगा। रानी की तुलना लक्ष्मी, दुर्गा जैसी देवियों से करके कवयित्री यह संदेश देना चाहती हैं कि रानी साक्षात शक्ति-स्वरूपा थीं। यह चित्रण स्वतंत्रता-पूर्व काल में राष्ट्रीय चेतना व स्त्री-शक्ति जागृत करने का एक सशक्त माध्यम था।
3. कविता में वर्णित 1857 की क्रांति के प्रसार का वर्णन कीजिए।
उत्तर: यह क्रांति केवल झाँसी तक सीमित नहीं रही, बल्कि दिल्ली, लखनऊ, मेरठ, कानपुर, पटना, जबलपुर, कोल्हापुर सहित पूरे भारत में फैल गई। महलों और झोंपड़ियों दोनों ने विद्रोह की आग सुलगाई, जो दर्शाता है कि यह क्रांति समाज के हर वर्ग की सम्मिलित भागीदारी वाला व्यापक जन-आंदोलन थी।
4. 'स्त्री-शक्ति' की अवधारणा कविता में किस प्रकार साकार होती है?
उत्तर: कविता में रानी लक्ष्मीबाई, झलकारी बाई, काना और मंदरा जैसी अनेक वीरांगनाओं का चित्रण मिलता है, जो दर्शाता है कि उस काल में भी स्त्रियाँ पुरुषों के समान युद्ध-कौशल व नेतृत्व-क्षमता रखती थीं। 'खूब लड़ी मर्दानी' पंक्ति इस बात का प्रमाण है कि रानी ने परंपरागत स्त्री-छवि को तोड़कर वीरता की नई मिसाल कायम की।
5. कविता के आधार पर बताइए कि उपनिवेशवाद (अंग्रेजी शासन) ने भारतीय समाज को किस प्रकार प्रभावित किया?
उत्तर: कविता दर्शाती है कि अंग्रेजों ने व्यापारी बनकर भारत में प्रवेश किया, परंतु धीरे-धीरे राज्य हड़पने की नीतियाँ अपनाईं (जैसे गोद-निषेध नीति)। उन्होंने भारतीय राजघरानों को अपमानित किया, उनकी संपत्ति लूटी और सरेआम नीलाम की। इस प्रकार उपनिवेशवाद ने भारतीय समाज के स्वाभिमान, संपत्ति व स्वतंत्रता पर गहरा आघात पहुँचाया।
6. कविता में प्रयुक्त अलंकारों का काव्य-सौंदर्य पर क्या प्रभाव पड़ता है, उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: कविता में उपमा अलंकार (जैसे 'लक्ष्मी थी या दुर्गा थी'), रूपक अलंकार (जैसे 'बुझा दीप झाँसी का' — राजा की मृत्यु हेतु) और मानवीकरण (जैसे 'काली घटा घेर लाई' — दुर्भाग्य हेतु) का सुंदर प्रयोग हुआ है। इन अलंकारों से भावों की गहनता व चित्रात्मकता बढ़ती है, जिससे कविता अधिक प्रभावशाली व स्मरणीय बन जाती है।
7. सुभद्रा कुमारी चौहान के जीवन-परिचय के आधार पर बताइए कि उनके व्यक्तित्व की किन विशेषताओं का प्रभाव उनकी रचनाओं पर पड़ा।
उत्तर: सुभद्रा कुमारी चौहान स्वयं एक स्वतंत्रता सेनानी थीं, जिन्हें दो बार जेल जाना पड़ा था। उनके इस संघर्षमय जीवन का सीधा प्रभाव उनकी रचनाओं में देशप्रेम, वीरता व राष्ट्रीय चेतना के स्वर के रूप में दिखता है। उनकी भाषा की सहजता व स्त्री-केंद्रित विषयों के प्रति संवेदनशीलता उनकी सामाजिक चेतना को दर्शाती है।
8. यदि आपको इस कविता के आधार पर एक भाषण तैयार करना हो, तो आप किन बिंदुओं को शामिल करेंगे?
उत्तर: भाषण में रानी लक्ष्मीबाई के बचपन से वीरगति तक के संघर्ष, 1857 की क्रांति के व्यापक स्वरूप, स्त्री-शक्ति के उदाहरण (लक्ष्मीबाई व झलकारी बाई), देशप्रेम व बलिदान की भावना, तथा वर्तमान पीढ़ी के लिए इससे मिलने वाली प्रेरणा जैसे बिंदु शामिल करूँगा।
9. वर्तमान समय में यह कविता कितनी प्रासंगिक है? अपने विचार लिखिए।
उत्तर: यह कविता आज भी उतनी ही प्रासंगिक है क्योंकि यह हमें देशप्रेम, साहस व आत्म-सम्मान की प्रेरणा देती है। वर्तमान में जब स्त्री-सशक्तिकरण एक महत्वपूर्ण विषय है, रानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगनाओं की गाथा युवा पीढ़ी, विशेषतः लड़कियों को निडरता व आत्मविश्वास से आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
10. कविता का शीर्षक 'झाँसी की रानी' कितना सार्थक है?
उत्तर: शीर्षक पूर्णतः सार्थक है क्योंकि पूरी कविता झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के जीवन, संघर्ष, वीरता और बलिदान पर ही केंद्रित है। कविता का हर स्तवक उन्हीं के इर्द-गिर्द बुना गया है, और बार-बार दोहराई गई टेक भी 'झाँसी वाली रानी' को ही रेखांकित करती है।
🙏 धन्यवाद! अधिक नोट्स, व्याकरण व वर्कशीट के लिए HINDI GYAN से जुड़े रहें।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें