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तरुण के स्वप्न (सुभाषचंद्र बोस) - कक्षा 8 मल्हार पाठ 10 पूर्ण व्याख्या, सारांश, प्रश्न-उत्तर व नोट्स

तरुण के स्वप्न तरुण के स्वप्न – सुभाषचंद्र बोस का भाषण, व्याख्या और प्रश्नोत्तर | कक्षा 8 मल्हार नेताजी सुभाषचंद्र बोस केवल एक क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं थे, बल्कि एक ऐसे दूरदर्शी विचारक भी थे जो आज़ादी के साथ-साथ एक न्यायपूर्ण, समान और शोषणमुक्त समाज की भी कल्पना करते थे। कक्षा 8 की हिंदी पाठ्यपुस्तक 'मल्हार' के दसवें पाठ 'तरुण के स्वप्न' में उनके उसी भाषण का एक अंश दिया गया है, जो उन्होंने 29 दिसंबर 1929 को मेदिनीपुर ज़िला युवक-सम्मेलन में युवाओं को संबोधित करते हुए दिया था। इस लेख में हम इस भाषण का पूरा पाठ, सरल व्याख्या, शब्दार्थ, पाठ्यपुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों के उत्तर और अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न विस्तार से देखेंगे, जिससे विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी में पूरी सहायता मिल सके। वक्ता परिचय (सुभाषचंद्र बोस) नेताजी सुभाषचंद्र बोस (1897–1945) जन्म : 23 जनवरी 1897, कटक (उड़ीसा, अब ओडिशा) उपाधि : 'नेताजी' कांग्रेस अध्यक्ष : 1938 (हरिपुरा) व 1939 (त्रिपुरी) ...