फूल और काँटा — कविता व्याख्या, कवि परिचय और प्रश्नोत्तर | कक्षा 7 मल्हार
कक्षा 7 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक 'मल्हार' का तीसरा पाठ 'फूल और काँटा' कवि अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की एक भावपूर्ण कविता है, जो एक ही पौधे पर उगने वाले फूल और काँटे के माध्यम से मनुष्य के भिन्न-भिन्न स्वभावों और सच्चे बड़प्पन के अर्थ को उजागर करती है। इस लेख में आपको कवि-परिचय, मूल कविता, सरल व्याख्या, कठिन शब्दों के अर्थ, पाठ्यपुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों के उत्तर (विशेषण-व्याकरण सहित) तथा अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न (MCQ सहित) — सब कुछ एक ही जगह मिलेगा।
कवि परिचय
'फूल और काँटा' के रचयिता अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' हिंदी साहित्य में 'कवि सम्राट' के नाम से विख्यात हैं। उनका जन्म निजामाबाद, आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। बचपन में ही उन्होंने घर पर उर्दू, फ़ारसी, संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेज़ी भाषाओं का अध्ययन किया। हरिऔध जी की चर्चित काव्य-कृति 'प्रिय प्रवास' (1914) को खड़ी बोली हिंदी का पहला महाकाव्य माना जाता है, जो श्रीकृष्ण के ब्रज-त्याग और उसके फलस्वरूप राधा व गोपियों के विरह पर आधारित है। हिंदी साहित्य सम्मेलन ने उन्हें 'विद्यावाचस्पति' की उपाधि से सम्मानित किया था। बच्चों के लिए भी उन्होंने अनेक रोचक कविताएँ लिखी हैं, जिनमें 'उठो लाल, अब आँखें खोलो। पानी लाई हूँ, मुँह धो लो' जैसी प्रसिद्ध पंक्तियाँ शामिल हैं।
- जन्म-स्थान निजामाबाद, आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश)
- उपाधि 'कवि सम्राट' तथा 'विद्यावाचस्पति' (हिंदी साहित्य सम्मेलन)
- प्रमुख महाकाव्य प्रिय प्रवास (1914) — खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य; वैदेही वनवास
- अन्य काव्य-कृतियाँ पारिजात, चोखे चौपदे, चुभते चौपदे, रसकलश, कल्पलता, बोलचाल
- उपन्यास अधखिला फूल, ठेठ हिन्दी का ठाट
- नाटक प्रद्युम्न विजय, रुक्मिणी परिणय
मूल पाठ
— अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
सरल व्याख्या
भाग 1 — समान उत्पत्ति और समान परिस्थितियाँ
भावार्थ — कवि कहते हैं कि फूल और काँटा दोनों एक ही स्थान पर जन्म लेते हैं और एक ही पौधा उन दोनों का पालन-पोषण करता है। रात में चमकने वाला चाँद भी दोनों पर एक-सी चाँदनी बिखेरता है — अर्थात् दोनों को समान परिस्थितियाँ और समान संसाधन प्राप्त होते हैं।
भाग 2 — भिन्न स्वभाव का संकेत
भावार्थ — बारिश और हवा भी फूल और काँटे पर समान रूप से पड़ती है, फिर भी दोनों का व्यवहार (ढंग) एक जैसा नहीं होता। कवि इसके माध्यम से यह संकेत देते हैं कि समान परिस्थितियाँ पाकर भी हर व्यक्ति का स्वभाव अलग-अलग हो सकता है।
भाग 3 — काँटे का हानिकारक स्वभाव
भावार्थ — काँटा किसी की उँगलियों को छेद देता है और किसी के सुंदर वस्त्र को फाड़ देता है। वह प्रेम में डूबी तितलियों के पंख काट देता है और भौंरे के काले शरीर को भी बेध डालता है। इस प्रकार काँटे का स्वभाव कष्ट पहुँचाने वाला है।
भाग 4 — फूल का उपकारी स्वभाव
भावार्थ — इसके विपरीत फूल तितलियों को अपनी गोद में स्थान देता है और भौंरे को अपना अनोखा रस पिलाता है। वह अपनी सुगंध और निराले रंग से कली को सदा प्रसन्न (जी खिला हुआ) रखता है। इस प्रकार फूल सबको सुख और आनंद देने वाला है।
भाग 5 — केंद्रीय संदेश: सच्चा बड़प्पन
भावार्थ — काँटा सबकी आँखों में खटकता (चुभता) है जबकि फूल देवताओं के सिर पर भी शोभा पाता है। कवि अंत में कहते हैं कि यदि किसी व्यक्ति में गुण और बड़प्पन की कमी हो, तो उसके कुल (परिवार/वंश) की प्रसिद्धि या बड़ाई का कोई महत्व नहीं रह जाता। कविता का केंद्रीय संदेश यही है कि व्यक्ति का सम्मान उसके कुल से नहीं, बल्कि उसके अपने गुणों और कर्मों से होता है।
शब्द-संपदा
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| जनम | जन्म |
| पालना | पोषण करना, बड़ा करना |
| चाँदनी | चाँद की रोशनी |
| मेह | बारिश, वर्षा |
| हवायें | हवाएँ, पवन |
| ढंग | तरीका, स्वभाव |
| छेद करना | छिद्र बनाना, बींधना |
| वर बसना | सुंदर वस्त्र |
| प्यार-डूबी | प्रेम में डूबी हुई |
| पर कतरना | पंख काटना |
| भौंर | भँवरा, एक कीट |
| बेधना | छेदना, बींधना |
| श्याम तन | काला शरीर |
| गोद | अंक, आश्रय |
| अनूठा | अनोखा, अद्वितीय |
| निज | अपना |
| सुगंध | खुशबू |
| निराला | अनोखा, विशिष्ट |
| कली | अधखिला फूल |
| जी खिलना (मुहावरा) | मन प्रसन्न होना |
| खटकना | अखरना, चुभना |
| सोहना | शोभा देना |
| सुर शीश | देवताओं का सिर |
| कुल | वंश, परिवार |
| बड़ाई | प्रशंसा, प्रसिद्धि |
| बड़प्पन | गुण, महानता, श्रेष्ठता का भाव |
| कसर | कमी |
पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
(क) कविता के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उनके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
- कविता में काँटे के बारे में कौन-सा वाक्य सत्य है?
- काँटा अपने आस-पास की सुगंध को नष्ट करता है
- काँटा तितलियों और भौंरों को आकर्षित करता है
- ★ काँटा उँगलियों को छेदता है और वस्त्र फाड़ देता है
- काँटा पौधे को हानि पहुँचाता है
- कविता में फूल और काँटे में समानताओं और विभिन्नताओं का उल्लेख किया गया है। निम्नलिखित में से कौन-सा वाक्य इन्हें सही रूप में व्यक्त करता है?
- फूल सुंदरता का प्रतीक है और काँटा कठोरता का
- फूल और काँटे के बारे में लोगों के विचार समान होते हैं
- ★ फूल और काँटे एक ही पौधे पर उगते हैं, लेकिन उनके स्वभाव भिन्न होते हैं
- फूल और काँटे को समान देखभाल मिलती है फिर भी उनके रंग-ढंग अलग होते हैं
- कविता के आधार पर कौन-सा निष्कर्ष उपयुक्त है?
- व्यक्ति का कुल ही उसके सम्मान का आधार होता है
- ★ व्यक्ति के कार्यों के कारण ही लोग उसका सम्मान करते हैं
- कुल की प्रतिष्ठा हमेशा व्यक्ति के गुणों से बड़ी होती है
- यदि व्यक्ति अच्छे कार्य करता है तो उसके कुल को प्रसिद्धि मिलती है
- कविता के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा कथन 'बड़प्पन' के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है?
- धन-दौलत और ताकत से व्यक्ति के बड़प्पन का पता चलता है
- कुल के बड़प्पन की प्रशंसा व्यक्ति की कमियों को ढक देती है
- ★ बड़प्पन व्यक्ति के गुणों, स्वभाव और कर्मों से पहचाना जाता है
- कुल का नाम व्यक्ति में बड़प्पन की पहचान का मुख्य आधार है
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग या एक से अधिक उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने — यह एक समूह-चर्चा गतिविधि है।
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
(क) "मेह उन पर है बरसता एक सा, एक सी उन पर हवायें हैं बही। पर सदा ही यह दिखाता है हमें, ढंग उनके एक से होते नहीं।"
भावार्थ: समान परिस्थितियाँ और संसाधन पाने के बावजूद हर व्यक्ति का स्वभाव अलग-अलग होता है — यही प्रकृति का नियम है।
(ख) "किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।"
भावार्थ: यदि किसी व्यक्ति में स्वयं के गुण और अच्छाई की कमी हो, तो उसके परिवार या वंश की प्रसिद्धि उसे सम्मान नहीं दिला सकती।
इस कविता में 'फूल' और 'काँटा' के उदाहरण द्वारा लोगों के स्वभावों के अंतर और समानताओं की ओर संकेत किया गया है। दूसरे शब्दों में, 'फूल' और 'काँटा' प्रतीक के रूप में प्रयोग किए गए हैं। फूल और काँटा किस-किस के प्रतीक हो सकते हैं, इन्हें उपयुक्त प्रतीकों से जोड़िए—
| प्रतीक | जुड़े हुए भाव |
|---|---|
| फूल | दया, अच्छाई, सुख, सुंदरता, कोमलता, आनंद, परोपकार, प्रेम, प्रसन्नता |
| काँटा | स्वार्थ, बुराई, दुख, कठोरता, पीड़ा |
कविता को एक बार पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए—
(क) कविता में ऐसी कौन-कौन सी समानताओं का उल्लेख किया गया है जो सभी पौधों पर समान रूप से लागू होती हैं?
एक ही स्थान पर जन्म लेना, एक ही पौधे द्वारा पालन-पोषण, समान चाँदनी, समान वर्षा और समान हवा — ये सभी समानताएँ हर पौधे पर लागू होती हैं।
(ख) आपको फूल और काँटे के स्वभाव में मुख्य रूप से कौन-सा अंतर दिखाई दिया?
फूल दूसरों को सुख, सुगंध और आनंद देता है जबकि काँटा दूसरों को चुभकर कष्ट व पीड़ा पहुँचाता है।
(ग) कविता में मुख्य रूप से कौन-सी बात कही गई है? उसे पहचानिए, समझिए और अपने शब्दों में लिखिए।
कविता में यह बताया गया है कि व्यक्ति का वास्तविक सम्मान उसके अपने गुणों और स्वभाव से होता है, न कि उसके कुल या वंश की प्रसिद्धि से।
(घ) "किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर" उदाहरण देकर समझाइए।
उदाहरण के लिए, यदि किसी प्रतिष्ठित परिवार का व्यक्ति स्वयं बुरे कर्म करता है, तो उसके परिवार की प्रसिद्धि उसे सम्मान नहीं दिला सकती — जैसे काँटा एक ही अच्छे पौधे पर उगकर भी अपने दुर्गुण के कारण सम्मान नहीं पाता।
(ङ) "है खटकता एक सब की आँख में, दूसरा है सोहता सुर शीश पर।" लोग कैसे स्वभाव के व्यक्तियों की प्रशंसा करते हैं और कैसे स्वभाव वाले व्यक्तियों से दूर रहना पसंद करते हैं?
लोग विनम्र, उदार और दूसरों का भला करने वाले (फूल जैसे) स्वभाव के व्यक्तियों की प्रशंसा करते हैं, जबकि स्वार्थी, कठोर और कष्ट पहुँचाने वाले (काँटे जैसे) स्वभाव के व्यक्तियों से दूर रहना पसंद करते हैं।
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—
(क) कल्पना कीजिए कि चाँदनी, हवा और मेघ केवल एक पौधे पर बरसते हैं। बाकी पौधे इन सबके बिना कैसे दिखेंगे और उनके जीवन पर इसका क्या प्रभाव होगा?
बाकी पौधे मुरझाए, कमज़ोर और निर्जीव-से दिखेंगे, क्योंकि धूप, हवा और पानी के बिना उनका विकास और जीवन असंभव है।
(ख) यदि सभी पौधे एक जैसे होते तो दुनिया कैसी लगती?
दुनिया नीरस और एकरंगी लगती, क्योंकि प्रकृति की विविधता (अलग-अलग रंग, रूप और गुण) ही उसकी सुंदरता का कारण है।
(ग) यदि काँटे न होते और हर पौधा केवल फूलों से भरा होता तो क्या होता?
तब शायद पौधों की अपनी कोई प्राकृतिक सुरक्षा न रहती, क्योंकि काँटे पौधे को जानवरों और नुकसान से बचाने का भी काम करते हैं — यह एक खुला विचार-प्रश्न है।
(घ) कल्पना कीजिए कि एक तितली काँटे से मित्रता करना चाहती है, उनके बीच कैसा संवाद होगा?
यह एक रचनात्मक/कल्पनाशील प्रश्न है — विद्यार्थी अपनी कल्पना से तितली और काँटे के बीच संवाद लिखें, जैसे तितली काँटे से उसके स्वभाव के कारणों के बारे में पूछ सकती है।
(ङ) कल्पना कीजिए कि आपको किसी काँटे, फूल या दोनों के गुणों के साथ जीवन जीने का अवसर मिलता है। आप किसके गुणों को अपनाना चाहेंगे? कारण सहित बताइए।
यह व्यक्तिगत पसंद पर आधारित एक खुला प्रश्न है — विद्यार्थी अपनी पसंद और कारण अपने शब्दों में लिखें, जैसे "मैं फूल के गुण अपनाना चाहूँगा/चाहूँगी क्योंकि इससे दूसरों को सुख मिलता है।"
नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में 'बड़प्पन' से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए—
'बड़प्पन' से जुड़े शब्द: संतोष, सहनशीलता, उदारता, त्याग, आदर, सम्मान (विद्यार्थी समूह-चर्चा से इनमें से कुछ या अन्य उपयुक्त शब्द भी लिख सकते हैं)।'बड़प्पन' शब्द 'बड़ा' और 'पन' से मिलकर बना है। इसका अर्थ होता है — बड़ाई, श्रेष्ठ या बड़ा होने का भाव, महत्व, गौरव। इसका उपयोग मुख्य रूप से व्यक्तित्व, गुण और चरित्र की ऊँचाई या महानता बताने के लिए किया जाता है, जैसे — उनकी सादगी और बड़प्पन ने सबका मन जीत लिया।
नीचे कुछ शब्द दिए गए हैं जो किसी भाव को व्यक्त करते हैं। इनमें से जो शब्द 'बड़प्पन' के भाव व्यक्त करते हैं, उन पर एक गोला बनाइए, जो बड़प्पन का भाव व्यक्त नहीं करते, उनके नीचे रेखा खींचिए।
बड़प्पन को व्यक्त करने वाले शब्द (गोला): सहनशीलता, दया, उदारता, त्याग, संतोष, समर्पण, आदर, सम्मान, निष्ठा, परोपकार, सद्भावना, विश्वास, विनम्रता।बड़प्पन को व्यक्त न करने वाले शब्द (रेखा): अहंकार, घमंड, ईर्ष्या, द्वेष, प्रतिशोध, क्रूरता, स्वार्थ, अपमान, अविश्वास, झूठ, अधीरता, लालच, झगड़ालूपन।
"फूल लेकर तितलियों को गोद में, भौंर को अपना अनूठा रस पिला। निज सुगंधों औ निराले रंग से, है सदा देता कली का जी खिला।" इस पंक्ति में रेखांकित शब्द पर ध्यान दीजिए। यह शब्द है 'औ' — जो 'और' के लिए प्रयुक्त हुआ है। कविता में 'र' वर्ण नहीं लिखा गया है; कई बार बोलते हुए हम शब्द की अंतिम ध्वनि उच्चारित नहीं करते। कवि भी कविता की लय के अनुसार ऐसा प्रयोग करते हैं। इस कविता में ऐसी अनेक विशेषताएँ छिपी हैं, जैसे— 'प्यार में डूबी तितलियों' के स्थान पर 'प्यार-डूबी तितलियों' का प्रयोग किया गया है। हर दूसरी पंक्ति का अंतिम शब्द मिलती-जुलती ध्वनि वाला यानी 'तुकांत' है आदि।
(क) अपने समूह के साथ मिलकर इन विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
यह एक समूह-चर्चा गतिविधि है — विद्यार्थी शब्द-संक्षेपण (औ, प्यार-डूबी), तुकांत-योजना और मानवीकरण जैसी विशेषताओं की सूची बनाएँ।
(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ झलकती हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए। आप कविता की पंक्तियों में एक से अधिक विशेषताएँ भी ढूँढ़ सकते हैं।
| कविता की विशेषताएँ | सही मिलान (कविता की पंक्तियाँ) |
|---|---|
| 1. एक ही वर्ण से शुरू होने वाले दो शब्द एक ही पंक्ति में साथ-साथ आए हैं। | भौंर को अपना अनूठा रस पिला (अपना, अनूठा — दोनों 'अ' से) |
| 2. मुहावरे का प्रयोग किया गया है। | है सदा देता कली जी का खिला ('जी खिलना' मुहावरा) |
| 3. प्रश्न पूछा गया है। | किस तरह कुल की बड़ाई काम दे |
| 4. प्राकृतिक वस्तुओं, जैसे— पेड़-पौधों में मानवीय कार्यों और भावनाओं का वर्णन किया गया है। | फूल लेकर तितलियों को गोद में (गोद में लेना — मानवीय क्रिया) |
| 5. एक-दूसरे के विपरीत अर्थ वाले शब्दों का प्रयोग किया गया है। | है खटकता एक सब की आँख में, दूसरा है सोहता सुर शीश पर (खटकना ↔ सोहना) |
(क) आगे कविता की कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। इनमें कुछ शब्द हटा दिए गए हैं और साथ में मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द भी दिए गए हैं। इनमें से प्रत्येक शब्द से वह पंक्ति पूरी करके देखिए जो कविता की मूल पंक्ति में है, उस पर घेरा बनाइए—
1. "____ में उन पर चमकता ____ भी (राति, रात्रि, रजनी, निशा) (शशि, चंद्रमा, चाँद, राकेश, इंदु) एक ही सी चाँदनी है डालता।"
मूल पंक्ति में शब्द: 'रात' और 'चाँद' (शेष सभी शब्द अर्थ में मिलते-जुलते हैं परंतु मूल कविता में यही दो शब्द प्रयुक्त हुए हैं)।
2. "____ उन पर है बरसता एक सा (मेह, बादल, मेघ, जलद), एक सी उन पर ____ हैं बही (वायु, पवन, समीर, मारुत, बयारें, हवायें)।"
मूल पंक्ति में शब्द: 'मेह' और 'हवायें'।
(ख) अपने समूह में चर्चा करके पता लगाइए कि कौन-सा शब्द रिक्त स्थानों में सबसे अधिक साथियों को जँच रहा है और क्यों? — यह एक समूह-चर्चा गतिविधि है।
"भौंर का है बेध देता श्याम तन।" 'श्याम तन' का अर्थ है— काला शरीर। यहाँ 'श्याम' शब्द भँवरे के 'शरीर' की विशेषता बता रहा है, अर्थात् 'श्याम' विशेषण है। 'तन' एक संज्ञा शब्द है जिसकी विशेषता बताई जा रही है अर्थात् 'तन' विशेष्य शब्द है।
(क) नीचे दी गई पंक्तियों में विशेषण और विशेष्य शब्दों की पहचान करके लिखिए—
| पंक्ति | विशेषण | विशेष्य |
|---|---|---|
| 1. भौंर का है बेध देता श्याम तन | श्याम | तन |
| 2. फाड़ देता है किसी का वर बसन | वर | बसन |
| 3. भौंर को अपना अनूठा रस पिला | अनूठा | रस |
| 4. निज सुगंधों औ निराले ढंग से | निराले | ढंग |
(ख) नीचे दिए गए विशेष्यों के लिए अपने मन से विशेषण सोचकर लिखिए—
- फूल — सुंदर फूल, कोमल फूल
- काँटा — नुकीला काँटा, तीखा काँटा
- मेह — घनघोर मेह, रिमझिम मेह
- चाँद — उजला चाँद, शीतल चाँद
- रात — अंधेरी रात, शांत रात
(क) यदि आपको फूल और काँटे में से किसी एक को चुनना हो तो आप किसे चुनेंगे और क्यों?
यह व्यक्तिगत पसंद पर आधारित एक खुला प्रश्न है — विद्यार्थी अपनी पसंद और तर्क अपने शब्दों में लिखें, जैसे "मैं फूल को चुनूँगा/चुनूँगी क्योंकि वह दूसरों को सुख और सुगंध देता है।"
(ख) कविता में बताया गया है कि फूल अपनी सुगंध और व्यवहार से चारों ओर प्रसन्नता और आनंद फैला देता है। आप अपने मित्रों या परिवार के जीवन में प्रसन्नता और आनंद लाने के लिए क्या-क्या करते हैं और क्या-क्या कर सकते हैं?
विद्यार्थी अपने अनुभव के आधार पर लिखें, जैसे मदद करना, अच्छे व्यवहार से पेश आना, हँसी-खुशी बाँटना आदि।
(ग) 'फूल' और 'काँटा' एक-दूसरे से बिलकुल भिन्न हैं फिर भी साथ-साथ पाए जाते हैं। अपने आस-पास से ऐसे अन्य उदाहरण दीजिए। (संकेत— वस्तुएँ, जैसे— नमक और चीनी; स्वभाव, जैसे— शांत और क्रोधी; स्वाद, जैसे— खट्टा-मीठा; रंग, जैसे— काला-सफेद; अनुभव, जैसे— सुख-दुख आदि)
उदाहरण: दिन और रात, धूप और छाँव, हँसी और आँसू, सफलता और असफलता — ये सभी विपरीत होते हुए भी जीवन में साथ-साथ पाए जाते हैं।
(घ) "छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ, फाड़ देता है किसी का वर बसना" आप अपने आस-पास की किसी समस्या का वर्णन कीजिए जिसे आप 'काँटे' के समान महसूस करते हैं। उस समस्या का समाधान भी सुझाइए।
विद्यार्थी अपने अनुभव के आधार पर किसी समस्या (जैसे झगड़ा, आलस्य, बुरी आदत) का उदाहरण देकर उसका समाधान सुझाएँ।
(क) इस कविता के बारे में एक चित्र बनाइए। आप चित्र में जहाँ चाहें, अपने मनोनीत रंग भर सकते हैं।
यह एक रचनात्मक चित्रकला-गतिविधि है — विद्यार्थी अपनी कल्पना के अनुसार फूल और काँटे का चित्र बनाएँ और रंग भरें।
(ख) मान लीजिए कि फूल और काँटे के बीच बातचीत हो रही है। उनकी बातचीत या संवाद अपनी कल्पना से लिखिए। संवाद का विषय: उनके गुणों और विशेषताओं पर चर्चा; यह समझाना कि उनका जीवन में क्या योगदान है।
फूल: मैं दूसरों के जीवन में सुगंध और सुख फैलाने आया हूँ।
काँटा: और मैं संघर्ष की याद दिलाने और सुरक्षा देने के लिए हूँ।
फूल: पर तुम तो सबको चुभते हो, दुख पहुँचाते हो!
काँटा: हाँ, पर मैं अपने पौधे की रक्षा भी तो करता हूँ — बिना मेरे कोई भी इसे आसानी से नुकसान पहुँचा सकता है।
फूल: यह सच है। शायद हम दोनों अपने-अपने ढंग से पौधे के लिए ज़रूरी हैं।
विभिन्न समूह बनाकर कक्षा में एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। इसके लिए विषय है— 'जीवन में फूल और काँटे, दोनों की आवश्यकता होती है'।
यह एक मौखिक वाद-विवाद गतिविधि है, जिसमें कक्षा को सात-आठ समूहों में बाँटा जाता है — आधे समूह 'फूल' के पक्ष में और आधे 'काँटे' के पक्ष में तर्क देते हैं, जबकि एक समूह निर्णायक मंडल की भूमिका निभाता है। प्रत्येक समूह को तैयारी के लिए 15 मिनट तथा बोलने के लिए तीन-चार मिनट का समय मिलता है, और अंत में निर्णायक मंडल तर्कों की गुणवत्ता के आधार पर विजेता समूह की घोषणा करता है।
नीचे कुछ ऐसे पेड़-पौधों के नाम दिए गए हैं जिनमें फूल और काँटे साथ-साथ पाए जाते हैं। पाठ्यपुस्तक में दिए गए चित्रों को उनके सही नामों से रेखा खींचकर जोड़ने की गतिविधि है। संदर्भ हेतु प्रत्येक पौधे का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है—
| पौधा | फूल व काँटे की विशेषता |
|---|---|
| बबूल | फूल पीले/सफेद छोटे गुच्छेदार; काँटे लंबे व नुकीले; ईंधन, चारा व औषधि में उपयोगी |
| गुलाब | फूल लाल, सफेद, गुलाबी आदि रंगों में; तने पर छोटे तीखे काँटे; सजावट व इत्र के लिए प्रसिद्ध |
| नागफनी | फूल रंग-बिरंगे; काँटे पूरी सतह पर; सूखे क्षेत्रों में पाया जाने वाला सजावटी पौधा |
| बेर | फूल छोटे हल्के पीले; काँटे शाखाओं पर छोटे-छोटे; फल खाद्य व औषधीय |
| करौंदा | फूल छोटे, सफेद, सुगंधित; काँटे तीखे; फल से अचार-जैम बनता है |
| नीबू | फूल छोटे सफेद/हल्के गुलाबी, सुगंधित; काँटे शाखाओं पर तीखे; फल विटामिन-सी से भरपूर |
पाठ्यपुस्तक में दिए गए लिंकों की सहायता से विद्यार्थी रंग-बिरंगे फूलों और 'फूलों की घाटी' पर आधारित कविता जैसी सामग्री देख-सुन सकते हैं। यह एक स्वतंत्र अन्वेषण-गतिविधि है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में प्रकृति और कविता के प्रति रुचि बढ़ाना है।
अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न
(अ) बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
- 'फूल और काँटा' कविता के रचयिता कौन हैं?
- (क) मैथिलीशरण गुप्त
- (ख) अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' ✓
- (ग) सुमित्रानंदन पंत
- (घ) रामधारी सिंह दिनकर
- हरिऔध जी का जन्म कहाँ हुआ था?
- (क) काशी
- (ख) निजामाबाद, आजमगढ़ ✓
- (ग) इलाहाबाद
- (घ) आगरा
- हरिऔध जी को हिंदी साहित्य में किस उपाधि से जाना जाता है?
- (क) राष्ट्रकवि
- (ख) कवि सम्राट ✓
- (ग) महाकवि
- (घ) कविगुरु
- हरिऔध जी की किस कृति को खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य माना जाता है?
- (क) साकेत
- (ख) प्रिय प्रवास ✓
- (ग) यशोधरा
- (घ) कामायनी
- हिंदी साहित्य सम्मेलन ने हरिऔध जी को कौन-सी उपाधि प्रदान की?
- (क) पद्म भूषण
- (ख) विद्यावाचस्पति ✓
- (ग) भारत रत्न
- (घ) ज्ञानपीठ
- कविता के अनुसार फूल और काँटा कहाँ जन्म लेते हैं?
- (क) अलग-अलग स्थानों पर
- (ख) एक ही स्थान/पौधे पर ✓
- (ग) अलग-अलग मौसम में
- (घ) अलग-अलग बगीचों में
- कविता के अनुसार फूल और काँटे पर किसकी चाँदनी पड़ती है?
- (क) सूर्य की
- (ख) चाँद की ✓
- (ग) तारों की
- (घ) बिजली की
- कविता के अनुसार फूल और काँटे में क्या भिन्न होता है?
- (क) जन्म-स्थान
- (ख) प्राप्त होने वाली वर्षा
- (ग) उनका ढंग/स्वभाव ✓
- (घ) उन पर पड़ने वाली चाँदनी
- काँटा किसकी उँगलियाँ छेद देता है?
- (क) किसी की भी ✓
- (ख) केवल बच्चों की
- (ग) केवल माली की
- (घ) केवल पक्षियों की
- काँटा किसके पंख कतर देता है?
- (क) पक्षियों के
- (ख) तितलियों के ✓
- (ग) भौंरों के
- (घ) मधुमक्खियों के
- काँटा भौंरे के किस अंग को बेध देता है?
- (क) पंख को
- (ख) श्याम तन (शरीर) को ✓
- (ग) आँखों को
- (घ) पैरों को
- फूल तितलियों के साथ क्या करता है?
- (क) उन्हें दूर भगाता है
- (ख) उन्हें गोद में लेता है ✓
- (ग) उनके पंख काटता है
- (घ) उन्हें नज़रअंदाज़ करता है
- फूल भौंरे को क्या पिलाता है?
- (क) पानी
- (ख) अपना अनूठा रस ✓
- (ग) दूध
- (घ) शहद
- फूल किसकी सहायता से कली को प्रसन्न रखता है?
- (क) अपने काँटों से
- (ख) अपनी सुगंध और रंग से ✓
- (ग) अपने आकार से
- (घ) अपनी ऊँचाई से
- कविता के अनुसार कौन सबकी आँखों में खटकता है?
- (क) काँटा ✓
- (ख) फूल
- (ग) पत्ती
- (घ) तना
- कविता के अनुसार कौन देवताओं के सिर पर शोभा पाता है?
- (क) काँटा
- (ख) फूल ✓
- (ग) पत्ती
- (घ) जड़
- कविता के अनुसार 'बड़प्पन की कसर' होने पर क्या व्यर्थ हो जाता है?
- (क) धन-संपत्ति
- (ख) कुल की बड़ाई ✓
- (ग) शिक्षा
- (घ) रूप-सौंदर्य
- कविता का केंद्रीय संदेश क्या है?
- (क) कुल की प्रतिष्ठा सबसे महत्वपूर्ण है
- (ख) व्यक्ति का सम्मान उसके गुणों-कर्मों से होता है ✓
- (ग) फूल हमेशा काँटे से श्रेष्ठ होता है
- (घ) प्रकृति में कोई भिन्नता नहीं होती
- 'श्याम तन' में 'श्याम' शब्द है—
- (क) संज्ञा
- (ख) विशेषण ✓
- (ग) क्रिया
- (घ) सर्वनाम
- 'बड़प्पन' शब्द किन दो शब्दों से मिलकर बना है?
- (क) बड़ा + पना
- (ख) बड़ा + पन ✓
- (ग) बड़प्प + अन
- (घ) बड़ी + पन
- 'कसर' शब्द का अर्थ है—
- (क) अधिकता
- (ख) कमी ✓
- (ग) प्रशंसा
- (घ) सुंदरता
- 'जी खिलना' मुहावरे का अर्थ है—
- (क) उदास होना
- (ख) मन प्रसन्न होना ✓
- (ग) क्रोधित होना
- (घ) थक जाना
- कविता में 'औ' शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
- (क) 'अब' के लिए
- (ख) 'और' के लिए ✓
- (ग) 'ओर' के लिए
- (घ) 'औरत' के लिए
- कविता में तुकांत-योजना की क्या विशेषता है?
- (क) हर पंक्ति का अंत भिन्न ध्वनि से होता है
- (ख) हर दूसरी पंक्ति का अंतिम शब्द मिलती-जुलती ध्वनि का है ✓
- (ग) कविता में कोई तुकांत नहीं है
- (घ) केवल पहली और अंतिम पंक्ति तुकांत में हैं
- यह कविता मुख्य रूप से किस विषय पर आधारित है?
- (क) प्रकृति-वर्णन मात्र
- (ख) मानव-स्वभाव और सच्चे बड़प्पन पर ✓
- (ग) ऋतु-परिवर्तन पर
- (घ) पशु-पक्षियों के जीवन पर
(ब) अति लघु उत्तरीय प्रश्न
- 'फूल और काँटा' कविता के कवि कौन हैं?
अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'। - हरिऔध जी को किस उपाधि से जाना जाता है?
कवि सम्राट। - हरिऔध जी की किस रचना को खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य माना जाता है?
प्रिय प्रवास। - फूल और काँटा कहाँ जन्म लेते हैं?
एक ही स्थान पर, एक ही पौधे पर। - रात में फूल और काँटे पर क्या चमकता है?
चाँद। - फूल और काँटे पर क्या-क्या समान रूप से पड़ता है?
चाँदनी, वर्षा (मेह) और हवा। - काँटा किसकी उँगलियाँ छेद देता है?
किसी की भी। - काँटा किसके पंख कतर देता है?
तितलियों के। - काँटा भौंरे के किस अंग को बेधता है?
श्याम तन (शरीर) को। - फूल तितलियों को कहाँ स्थान देता है?
अपनी गोद में। - फूल भौंरे को क्या पिलाता है?
अपना अनूठा रस। - फूल किससे कली को प्रसन्न रखता है?
अपनी सुगंध और निराले रंग से। - कविता के अनुसार सबकी आँखों में कौन खटकता है?
काँटा। - कविता के अनुसार देवताओं के सिर पर कौन शोभा पाता है?
फूल। - कविता के अनुसार कुल की बड़ाई कब व्यर्थ हो जाती है?
जब व्यक्ति में स्वयं बड़प्पन (गुण) की कमी हो। - 'श्याम तन' में विशेष्य शब्द कौन-सा है?
तन। - 'बसन' शब्द का अर्थ बताइए।
वस्त्र, कपड़ा। - 'निज' शब्द का अर्थ बताइए।
अपना। - हरिऔध जी का जन्म किस वर्ष हुआ था?
1865 में। - कविता से हमें मुख्य रूप से क्या शिक्षा मिलती है?
व्यक्ति का सम्मान उसके अपने गुणों और कर्मों से होता है, कुल की प्रसिद्धि से नहीं।
(स) लघु उत्तरीय प्रश्न
- फूल और काँटे में समानताएँ क्या-क्या हैं?
दोनों एक ही स्थान और एक ही पौधे पर जन्म लेते हैं, दोनों पर समान चाँदनी, वर्षा और हवा पड़ती है — अर्थात् दोनों को समान परिस्थितियाँ प्राप्त होती हैं। - काँटे का स्वभाव कविता में किस प्रकार दर्शाया गया है?
काँटे को हानिकारक स्वभाव वाला दिखाया गया है — वह उँगलियाँ छेदता है, वस्त्र फाड़ता है, तितलियों के पंख कतरता है और भौंरे के शरीर को बेध देता है। - फूल का स्वभाव कविता में किस प्रकार दर्शाया गया है?
फूल को उपकारी स्वभाव वाला दिखाया गया है — वह तितलियों को गोद में लेता है, भौंरे को रस पिलाता है और अपनी सुगंध व रंग से कली को प्रसन्न रखता है। - कविता में 'ढंग उनके एक से होते नहीं' पंक्ति का क्या आशय है?
समान परिस्थितियाँ पाने के बावजूद फूल और काँटे का व्यवहार/स्वभाव भिन्न होता है — यह दर्शाता है कि परिस्थितियाँ एक-सी होने पर भी स्वभाव अलग-अलग हो सकता है। - कविता का केंद्रीय संदेश क्या है?
केंद्रीय संदेश यह है कि व्यक्ति का वास्तविक सम्मान उसके अपने गुणों, स्वभाव और कर्मों से होता है, न कि उसके कुल या वंश की प्रसिद्धि से। - 'फूल' और 'काँटा' किस प्रकार प्रतीकात्मक अर्थ रखते हैं?
फूल दया, अच्छाई, प्रेम और सुख जैसे सद्गुणों का प्रतीक है, जबकि काँटा स्वार्थ, बुराई, कठोरता और पीड़ा जैसे दुर्गुणों का प्रतीक है। - कविता में मानवीकरण (मानवीय भावनाओं का प्रकृति पर आरोपण) का उदाहरण दीजिए।
"फूल लेकर तितलियों को गोद में" और "है सदा देता कली जी की खिला" जैसी पंक्तियों में फूल को मानवीय क्रियाएँ (गोद में लेना, मन प्रसन्न करना) करते दिखाया गया है। - कविता में तुकांत-योजना की क्या विशेषता है?
कविता में हर दूसरी पंक्ति का अंतिम शब्द मिलती-जुलती ध्वनि (तुकांत) का है, जिससे कविता में लयबद्धता और संगीतात्मकता आती है। - हरिऔध जी के जीवन और साहित्यिक योगदान का संक्षेप में परिचय दीजिए।
अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' (1865-1947) का जन्म निजामाबाद, आजमगढ़ में हुआ था। उन्हें 'कवि सम्राट' कहा जाता है और उनकी रचना 'प्रिय प्रवास' को खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य माना जाता है। - कविता में विशेषण और विशेष्य का एक उदाहरण देकर समझाइए।
"श्याम तन" में 'श्याम' विशेषण है जो 'तन' (विशेष्य) की विशेषता (रंग) बता रहा है — अर्थात् काला शरीर। - 'बड़प्पन' शब्द की व्युत्पत्ति और अर्थ स्पष्ट कीजिए।
'बड़प्पन' शब्द 'बड़ा' और 'पन' प्रत्यय से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है श्रेष्ठता, महानता या बड़े होने का भाव — यह व्यक्ति के गुण और चरित्र की ऊँचाई दर्शाता है। - कविता के आधार पर बताइए कि व्यक्ति का सम्मान किस पर निर्भर करता है?
व्यक्ति का सम्मान उसके कुल या वंश पर नहीं, बल्कि उसके अपने गुणों, स्वभाव और कर्मों पर निर्भर करता है। - प्रकृति में विविधता (फूल-काँटे जैसी भिन्नता) का क्या महत्व है?
प्रकृति की विविधता ही उसे संतुलित और सुंदर बनाती है — हर वस्तु का अपना अलग स्वभाव और भूमिका होती है, जो जीवन-चक्र को पूर्ण बनाती है। - कविता में काँटे की उपयोगिता (यदि कोई हो) पर अपने विचार लिखिए।
यद्यपि कविता काँटे को हानिकारक दिखाती है, वास्तविक जीवन में काँटे पौधे को जानवरों से सुरक्षा प्रदान करते हैं — यह एक विचारणीय बिंदु है। - कविता में 'प्यार-डूबी तितलियाँ' पद का क्या भाव है?
इसका भाव है कि तितलियाँ फूलों के प्रति प्रेम में इतनी लीन रहती हैं मानो वे प्रेम में डूबी हुई हों — यह एक काव्यात्मक अभिव्यक्ति है। - कविता की भाषा-शैली की विशेषताएँ बताइए।
कविता की भाषा सरल, लयबद्ध और तुकांतयुक्त है; इसमें मानवीकरण और प्रतीकों का सुंदर प्रयोग हुआ है, जो इसे बालोपयोगी व रोचक बनाता है। - कविता में शब्द-संक्षेपण (जैसे 'औ' और 'प्यार-डूबी') का क्या उद्देश्य है?
कविता की लय और तुकांत बनाए रखने के लिए कवि शब्दों को संक्षिप्त रूप में प्रयोग करते हैं, जिससे पंक्तियाँ अधिक गेय और प्रवाहमय बनती हैं। - यदि आप फूल होते तो आप अपने आस-पास किस प्रकार का प्रभाव डालना चाहते?
यह एक व्यक्तिगत/कल्पनाशील प्रश्न है — विद्यार्थी अपने विचार लिखें, जैसे "मैं सबको खुशी और सकारात्मकता बाँटना चाहूँगा/चाहूँगी।" - 'कुल की बड़ाई' और 'व्यक्तिगत बड़प्पन' में क्या अंतर है?
'कुल की बड़ाई' परिवार या वंश की प्रसिद्धि को दर्शाती है, जबकि 'व्यक्तिगत बड़प्पन' स्वयं व्यक्ति के गुणों और अच्छे कर्मों से अर्जित सम्मान को दर्शाता है — कविता के अनुसार दूसरा अधिक महत्वपूर्ण है। - इस कविता को बाल-साहित्य की दृष्टि से उपयोगी क्यों माना जा सकता है?
यह कविता सरल भाषा में प्रकृति के उदाहरण द्वारा नैतिक शिक्षा (गुणों का महत्व) देती है, जो बच्चों को रोचक ढंग से समझ आती है।
(द) महत्वपूर्ण प्रश्न
- 'फूल और काँटा' कविता के केंद्रीय भाव को विस्तार से स्पष्ट कीजिए।
कविता के माध्यम से कवि यह बताना चाहते हैं कि समान परिस्थितियों में पले-बढ़े दो प्राणी भी स्वभाव में पूर्णतः भिन्न हो सकते हैं; और अंततः व्यक्ति का सम्मान उसके कुल या वंश से नहीं, बल्कि उसके अपने गुणों, स्वभाव और कर्मों से निर्धारित होता है। - फूल और काँटे के प्रतीकों के माध्यम से कवि ने मानव-स्वभाव के बारे में क्या संदेश दिया है?
कवि ने बताया है कि जिस प्रकार एक ही पौधे पर फूल और काँटा भिन्न स्वभाव के होते हैं, उसी प्रकार समाज में भी अच्छे और बुरे स्वभाव वाले लोग एक साथ रहते हैं; समाज उन्हीं का सम्मान करता है जो फूल की तरह उपकारी और सुखदायी होते हैं। - 'किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर' — इस पंक्ति के आलोक में कुल-प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत गुणों के महत्व पर अपने विचार लिखिए।
यह पंक्ति स्पष्ट करती है कि कुल या वंश की प्रतिष्ठा तभी सार्थक है जब व्यक्ति स्वयं भी गुणवान हो; केवल वंश के नाम पर सम्मान पाना उचित नहीं, क्योंकि व्यक्ति के अपने कर्म ही उसकी वास्तविक पहचान बनाते हैं। - कविता में प्रकृति-चित्रण (चाँद, चाँदनी, मेह, हवा) का कविता के भाव पर क्या प्रभाव पड़ता है?
प्रकृति-चित्रण कविता को सजीव और सरल बनाता है; समान प्राकृतिक परिस्थितियों (चाँदनी, वर्षा, हवा) का उल्लेख करके कवि यह स्थापित करते हैं कि परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि आंतरिक स्वभाव व्यक्ति को अलग बनाता है। - इस कविता और बाल-मनोविज्ञान के बीच क्या संबंध है, अर्थात् यह कविता बच्चों को क्या सीख देती है?
यह कविता बच्चों को सरल उदाहरण (फूल-काँटा) के माध्यम से सिखाती है कि अच्छे स्वभाव और अच्छे कर्मों का महत्व वंश या परिवार की प्रतिष्ठा से कहीं अधिक है, जिससे बच्चों में अच्छे गुण अपनाने की प्रेरणा मिलती है। - कविता की भाषा-शैली (तुकांत, लय, मानवीकरण) की विशेषताओं का विश्लेषण कीजिए।
कविता में सरल खड़ी बोली, नियमित तुकांत-योजना, लयबद्धता और प्रकृति का मानवीकरण (फूल का गोद में लेना, कली का जी खिलना) जैसी विशेषताएँ हैं, जो इसे बालोपयोगी और सुगेय बनाती हैं। - 'बड़प्पन' और 'कुल की बड़ाई' के परस्पर संबंध को कविता के आधार पर स्पष्ट करते हुए अपने विचार व्यक्त कीजिए।
कविता के अनुसार 'कुल की बड़ाई' तभी सार्थक है जब वह व्यक्ति के अपने 'बड़प्पन' (गुणों) से पुष्ट हो; बिना व्यक्तिगत गुणों के केवल कुल की प्रसिद्धि व्यर्थ है — यही कविता का मूल दार्शनिक विचार है। - हरिऔध जी के साहित्यिक योगदान का मूल्यांकन कीजिए।
हरिऔध जी हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं — उन्होंने खड़ी बोली में पहला महाकाव्य 'प्रिय प्रवास' रचकर हिंदी काव्य को नई दिशा दी; इसके साथ ही बच्चों के लिए सरल व शिक्षाप्रद कविताएँ लिखकर बाल-साहित्य को भी समृद्ध किया। - यदि समाज में सभी लोग 'फूल' के समान स्वभाव अपना लें, तो समाज पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? अपने विचार लिखिए।
यदि सभी लोग फूल जैसे उपकारी, विनम्र और परोपकारी स्वभाव अपना लें, तो समाज में प्रेम, सद्भावना और सुख-शांति बढ़ेगी तथा आपसी वैमनस्य व संघर्ष में उल्लेखनीय कमी आएगी। - इस कविता की तुलना किसी अन्य ऐसी रचना से कीजिए जिसमें प्रकृति के माध्यम से मानव-स्वभाव को दर्शाया गया हो।
यह एक तुलनात्मक/खुला प्रश्न है — विद्यार्थी किसी अन्य पाठ या कविता (जैसे पंचतंत्र की कथाएँ, जिनमें पशु-पक्षियों के माध्यम से मानव-स्वभाव दर्शाया जाता है) से तुलना करके अपने विचार लिखें।
माइंड मैप
- अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' (1865-1947)
- कवि सम्राट
- प्रिय प्रवास (प्रथम खड़ी बोली महाकाव्य)
- फूल — सद्गुण, सुख, प्रेम
- काँटा — दुर्गुण, पीड़ा, स्वार्थ
- समान परिस्थितियाँ
- भिन्न स्वभाव
- काँटे व फूल के कार्य
- सच्चा बड़प्पन गुणों से
- कुल की बड़ाई व्यर्थ बिना गुण
- तुकांतयुक्त लय
- मानवीकरण
- विशेषण-विशेष्य प्रयोग
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
'फूल और काँटा' किस कक्षा और पाठ्यपुस्तक की कविता है?
यह कक्षा 7 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक 'मल्हार' का तीसरा पाठ है।
'फूल और काँटा' कविता के कवि कौन हैं?
इस कविता के कवि अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' हैं, जिन्हें हिंदी साहित्य में 'कवि सम्राट' कहा जाता है।
कविता का केंद्रीय संदेश क्या है?
कविता का केंद्रीय संदेश है कि व्यक्ति का वास्तविक सम्मान उसके अपने गुणों, स्वभाव और कर्मों से होता है, न कि उसके कुल या वंश की प्रसिद्धि से।
कविता में फूल और काँटे को किस रूप में प्रयोग किया गया है?
फूल और काँटे को प्रतीक के रूप में प्रयोग किया गया है — फूल सद्गुणों (दया, प्रेम, सुख) का प्रतीक है और काँटा दुर्गुणों (स्वार्थ, कठोरता, पीड़ा) का।
हरिऔध जी की सबसे प्रसिद्ध रचना कौन-सी है?
उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना 'प्रिय प्रवास' (1914) है, जिसे खड़ी बोली हिंदी का पहला महाकाव्य माना जाता है।
परीक्षा की दृष्टि से इस पाठ के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु कौन-से हैं?
कवि-परिचय, कविता का सारांश व केंद्रीय भाव, फूल-काँटे के प्रतीकात्मक अर्थ, विशेषण-विशेष्य व्याकरण, तथा कठिन शब्दों के अर्थ — ये सभी बिंदु परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
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