क्या लिखूँ?
(पद्मलाल पुन्नालाल बख्शी) — संपूर्ण अध्ययन सामग्री
नोट: इस सामग्री में सभी प्रश्न काले रंग में तथा उनके उत्तर नीले रंग में दिए गए हैं। नीचे दिए गए वस्तुनिष्ठ, अति लघु, लघु तथा महत्वपूर्ण प्रश्न पाठ्यपुस्तक के 'अभ्यास' खंड से अलग हैं।
विषय-सूची (Quick Links)
पाठ का सार एवं व्याख्या
1. भूमिका
'क्या लिखूँ?' निबंध में पद्मलाल पुन्नालाल बख्शी ने निबंध की रचना-प्रक्रिया को आत्मकथात्मक व हास्य-व्यंग्यपूर्ण शैली में समझाया है। लेखक को अपनी दो विद्यार्थियों — नमिता और अमिता — के लिए क्रमशः 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' और 'समाज-सुधार' विषयों पर आदर्श निबंध लिखने हैं। इसी बहाने लेखक निबंध-लेखन की संपूर्ण प्रक्रिया — सामग्री-संग्रह, रूपरेखा-निर्माण और शैली-निर्धारण — को रोचक ढंग से उजागर करते हैं।
2. गार्डिनर का मत और लेखक की कठिनाई
लेखक अंग्रेजी के प्रसिद्ध निबंधकार ए.जी. गार्डिनर का उल्लेख करते हैं, जिनके अनुसार निबंध लिखने के लिए मन की एक विशेष उमंग-भरी स्थिति चाहिए, जिसमें विषय की चिंता नहीं रहती — हृदय के भाव व्यक्त करना ही मुख्य उद्देश्य है, विषय तो केवल माध्यम (खूँटी) है, असली वस्तु भाव (हैट) है। परंतु लेखक स्वीकार करते हैं कि उन्हें ऐसी सहज मानसिक स्थिति का अनुभव नहीं होता — उन्हें सोचना, चिंता करना और परिश्रम करना पड़ता है, तभी वे निबंध लिख पाते हैं।
3. सामग्री-संग्रह और रूपरेखा की समस्या
निबंधशास्त्र के आचार्यों के अनुसार निबंध के दो प्रधान अंग हैं — सामग्री और शैली। लेखक को पहले सामग्री एकत्र करनी थी, परंतु समय की कमी के कारण पुस्तकालय जाकर शोध करना संभव नहीं था, इसलिए उन्हें अपने ही ज्ञान पर विश्वास करके लिखना पड़ा। विद्वानों का कथन है कि निबंध लिखने से पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए, परंतु लेखक को यह व्यावहारिक नहीं लगता — वे उदाहरण देते हैं कि गार्डिनर को भी अपने लेखों का शीर्षक बनाने में सबसे अधिक कठिनाई होती थी, और शेक्सपियर को नाटक लिखने से अधिक कठिनाई नाटकों के नामकरण में हुई, इसीलिए घबराकर उन्होंने एक नाटक का नाम रख दिया 'जैसा तुम चाहो' (As You Like It)।
4. शैली का निर्धारण
आचार्यों का मत है कि भाषा में प्रवाह हो, वाक्य छोटे-छोटे किंतु परस्पर संबद्ध हों। लेखक व्यंग्यात्मक ढंग से कहते हैं कि अपनी विद्वता दिखाने के लिए वाक्य कम-से-कम आधे पृष्ठ में समाप्त होने चाहिए, जैसे बाणभट्ट ने कादंबरी में लिखे; वाक्यों में अस्पष्टता भी होनी चाहिए, जैसे श्रीहर्ष और सेनापति ने अपनी रचनाओं को जान-बूझकर दुर्बोध बनाया, क्योंकि यह गांभीर्य का आभास कराती है। साथ ही अलंकार, मुहावरे और लोकोक्तियों का समावेश भी आवश्यक बताया जाता है।
5. अंग्रेजी निबंधकारों की पद्धति (मानटेन)
इसके विपरीत अंग्रेजी निबंधकारों ने एक भिन्न पद्धति अपनाई, जिसके जन्मदाता मानटेन माने जाते हैं। उन्होंने जो कुछ स्वयं देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध किया। ऐसे निबंधों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे मन की स्वच्छंद रचनाएँ होते हैं — न इनमें कवि की उदात्त कल्पना रहती है, न आख्यायिका-लेखक की सूक्ष्म दृष्टि, न विज्ञों की गंभीर तर्कपूर्ण विवेचना। इनमें लेखक की सच्ची अनुभूति और उल्लास रहता है।
6. अमीर खुसरो की युक्ति और निबंध की रचना
लेखक को अमीर खुसरो की एक कहानी याद आती है — प्यास लगने पर खुसरो एक कुएँ के पास पहुँचे, जहाँ चार औरतें पानी भर रही थीं। पानी माँगने पर उन्होंने क्रमशः खीर, चरखे, कुत्ते और ढोल पर कविता सुनाने की इच्छा जताई। प्रतिभाशाली खुसरो ने एक ही पद्य में चारों की इच्छाएँ पूरी कर दीं — “खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला। आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा।” इसी युक्ति से प्रेरित होकर लेखक भी अपने दोनों विषयों — 'दूर के ढोल सुहावने' और 'समाज-सुधार' — को एक ही निबंध में समाहित करने का निर्णय लेते हैं।
7. 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' — मूल भाव
लेखक बताते हैं कि ढोल की कर्कशता (कठोर आवाज़) दूर तक नहीं पहुँचती। ढोल के पास बैठे लोगों के कान भले ही फटने लगें, पर दूर किसी नदी के तट पर वही ध्वनि मधुरता में बदल जाती है। दूर बैठा व्यक्ति उस ध्वनि को सुनकर मन में किसी के विवाहोत्सव की सुखद कल्पना कर लेता है — कोलाहलपूर्ण घर के एक कोने में बैठी लज्जाशील नव-वधू के प्रेम, उल्लास, संकोच व आशंका से भरे हृदय का चित्र उसकी कल्पना में उभर आता है। सच यह है कि दूर रहने से यथार्थता की कठोरता का अनुभव नहीं होता।
8. तरुण-वृद्ध का द्वंद्व और सुधार की निरंतरता
इसी सिद्धांत को लेखक तरुण और वृद्ध पर भी लागू करते हैं। जो तरुण संसार के जीवन-संग्राम से दूर हैं, उन्हें संसार का चित्र मनमोहक प्रतीत होता है; जो वृद्ध हो गए हैं, उन्हें अपनी बाल्यावस्था व तरुणावस्था की स्मृति सुखद लगती है। तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल होता है तो वृद्धों के लिए अतीत सुखद — दोनों वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं। तरुण क्रांति के समर्थक होते हैं और वृद्ध अतीत-गौरव के संरक्षक। इन्हीं दोनों कारणों से वर्तमान सदैव सुधारों का काल बना रहता है।
मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न रही हो। बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक, राजा राममोहन राय, स्वामी दयानंद और महात्मा गांधी में ही सुधारकों की गणना समाप्त नहीं होती। जीवन में नए-नए दोष उत्पन्न होते रहते हैं और उनके नए-नए सुधार भी होते रहते हैं। जो कभी सुधार थे, वे आज दोष बन गए हैं और उनका फिर नव-सुधार किया जाता है। तभी तो यह जीवन प्रगतिशील माना गया है। हिंदी में बन रहा प्रगतिशील साहित्य भी कुछ समय बाद अतीत का स्मारक हो जाएगा और आज के तरुण भी वृद्ध होकर अतीत-गौरव का स्वप्न देखेंगे — दोनों ही स्वप्न सुखद होते हैं, क्योंकि दूर के ढोल सुहावने होते हैं।
पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
रचना से संवाद — मेरे उत्तर मेरे तर्क
1. “हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है...असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।” निबंध में 'हैट' और 'खूँटी' का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है?
उत्तर: (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना।
तर्क: गार्डिनर के अनुसार निबंध-लेखन में विषय गौण होता है, महत्वपूर्ण है लेखक के मन में उठने वाला भाव/आवेग; विषय तो केवल भावों को व्यक्त करने का साधन (खूँटी) मात्र है, जबकि हृदय के भाव ही असली वस्तु (हैट) हैं।
2. “उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है...उसका उल्लास रहता है।” मानटेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है?
उत्तर: (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना।
तर्क: मानटेन की पद्धति में लेखक स्वयं जो देखता-सुनता-अनुभव करता है, उसे सहज व स्वच्छंद रूप में लिपिबद्ध करता है; यही अनुभव-आधारित मुक्त लेखन इस पद्धति का आधार है।
3. “तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल...वृद्धों के लिए अतीत सुखद...” यह तुलना किस पर आधारित है?
उत्तर: (घ) अभिलाषा और अनुभव।
तर्क: तरुणों की भविष्य के प्रति अभिलाषा और वृद्धों का अतीत का अनुभव ही इस तुलना का आधार है।
4. निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?
उत्तर: (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए।
तर्क: लेखक को भी दो विषयों (दूर के ढोल सुहावने और समाज-सुधार) पर एक ही निबंध में लिखना था; अमीर खुसरो की तरह एक ही रचना में कई विषयों को समाहित करने की युक्ति दिखाने हेतु यह उदाहरण दिया गया है।
5. निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है?
उत्तर: (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
तर्क: लेखक ने स्पष्ट कहा है कि मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल नहीं हुआ, जब सुधार की आवश्यकता न रही हो।
मेरी समझ मेरे विचार
1. निबंध लेखन के विषय में ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?
उत्तर: गार्डिनर का मानना है कि निबंध लेखन के लिए मन में एक विशेष उमंग व स्फूर्ति भरी स्थिति उत्पन्न होनी चाहिए, जिसमें विषय की चिंता नहीं रहती — हृदय का भाव ही महत्वपूर्ण है, विषय गौण। वहीं लेखक (बख्शी जी) का अनुभव इससे भिन्न है — उन्हें निबंध लिखने के लिए सोचना, चिंता करना और परिश्रम करना पड़ता है; भाव अपने आप उत्पन्न नहीं होते। इस प्रकार गार्डिनर सहज-स्फूर्ति को महत्व देते हैं, जबकि लेखक श्रम और चिंतन को आवश्यक मानते हैं।
2. लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर: तरुणों की असंतुष्टि का कारण है कि वे वर्तमान की सीमाओं व कठिनाइयों को देखकर बदलाव व नए भविष्य की कामना करते हैं; ऊर्जावान होकर वे क्रांति चाहते हैं। वृद्धों की असंतुष्टि इसलिए होती है क्योंकि वे वर्तमान की तेज़ी से बदलती जीवन-शैली और मूल्यों में अपने समय की परंपराओं व स्थिरता को खोता हुआ पाते हैं, इसलिए वे अतीत को श्रेष्ठ मानकर उसकी स्मृतियों में सुख ढूँढते हैं।
3. नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं?
उत्तर: नमिता का आग्रह है कि लेखक 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' विषय पर, तथा अमिता का आग्रह है कि 'समाज-सुधार' विषय पर आदर्श निबंध लिखें। कठिनाई यह थी कि दोनों विषय परीक्षा में पहले भी आ चुके थे, इसलिए इन्हें नए व मौलिक ढंग से लिखना चुनौतीपूर्ण था। साथ ही दोनों विषयों पर पाँच पृष्ठ जितना विस्तृत लिखना कठिन था और लेखक को दोनों विषयों को जोड़कर निबंध-रचना का रहस्य भी समझाना था।
4. निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?
उत्तर: आचार्यों के अनुसार निबंध के दो प्रधान अंग हैं — सामग्री और शैली। पहले सामग्री एकत्र करनी चाहिए (विचार-संग्रह/मनन), फिर निबंध की रूपरेखा बनानी चाहिए, तत्पश्चात उचित शैली (प्रवाहमयी भाषा, संबद्ध व छोटे वाक्य) का निर्धारण करना चाहिए।
(विद्यार्थी अपने अनुभव के अनुसार उत्तर दें — जैसे विषय पर सोचना, मुख्य बिंदु बनाना, सामग्री जुटाना, रूपरेखा बनाकर क्रमबद्ध ढंग से लिखना आदि।)
5. मानटेन ने “जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।” निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?
उत्तर: देखने, सुनने और अनुभव करने से निबंध में सच्चाई व सजीवता आती है, विचार मौलिक और प्रामाणिक बनते हैं। इससे लेखक की अपनी दृष्टि और भावनाएँ स्वाभाविक रूप से अभिव्यक्त होती हैं, निबंध कृत्रिम न होकर सहज व प्रभावशाली बनता है तथा पाठक को आत्मीय अनुभव होता है।
विषयों से संवाद
1. निबंध में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक आदि कई महान व्यक्तियों के नाम आए हैं। इनके विषय में जानकारी एकत्रित करके संक्षेप में बताइए कि इन्होंने अपने समय में समाज के लिए क्या-क्या कार्य किए।
उत्तर: गौतम बुद्ध ने अहिंसा, करुणा और मध्यम मार्ग का उपदेश देकर यज्ञों में पशुबलि जैसी कुरीतियों का विरोध किया। महावीर स्वामी ने अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह के सिद्धांतों से समाज-सुधार का मार्ग दिखाया। नागार्जुन ने बौद्ध दर्शन (शून्यवाद) का प्रचार कर तार्किक चिंतन को बढ़ावा दिया। शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत का प्रचार कर हिंदू धर्म को संगठित रूप दिया। कबीर ने हिंदू-मुस्लिम एकता और अंधविश्वास-जातिवाद का विरोध किया। गुरु नानक देव ने समानता, भाईचारे और एक ईश्वर की उपासना का संदेश दिया।
2. निबंध में उल्लिखित महान व्यक्तियों ने अपने कार्यों से समाज को नई दिशा दिखाई। हमारे आस-पास भी ऐसे व्यक्ति और संस्थाएँ हैं जो स्त्री-शिक्षा, पर्यावरण, असमानता, दिव्यांगजन आदि के लिए कार्य करते हैं। ऐसे व्यक्तियों/संस्थाओं के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
उत्तर: उदाहरण के लिए — सावित्रीबाई फुले ने स्त्री-शिक्षा के लिए कार्य किया; सुंदरलाल बहुगुणा ने पर्यावरण-संरक्षण (चिपको आंदोलन) के लिए कार्य किया; बाबा आमटे ने कुष्ठ रोगियों व दिव्यांगजनों की सेवा के लिए कार्य किया। विद्यार्थी अपने आस-पास की स्थानीय संस्थाओं की जानकारी एकत्र कर उन्हें भी लिख सकते हैं।
3. आपको 'समाज-सुधार' करने का अवसर मिले तो आप क्या-क्या सुधार करना चाहेंगे और कैसे करना चाहेंगे? लिखिए।
उत्तर: नमूने के तौर पर — मैं शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाना चाहूँगा ताकि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके, पर्यावरण-संरक्षण हेतु वृक्षारोपण व स्वच्छता अभियान चलाना चाहूँगा, तथा सामाजिक भेदभाव व लैंगिक असमानता दूर करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना चाहूँगा।
4. भारतीय ज्ञान साहित्य में अनेक स्थानों पर नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन में संतुलन की बात कही गई है। इस विषय पर अपने शिक्षक के साथ मिलकर चर्चा कीजिए।
उत्तर: यह कक्षा-चर्चा आधारित गतिविधि है। विद्यार्थी गीता, उपनिषद, पंचतंत्र आदि भारतीय ग्रंथों से उदाहरण लेकर नैतिक (सदाचार), आध्यात्मिक (आत्म-चिंतन) और व्यावहारिक (कर्तव्य-पालन) जीवन के बीच संतुलन पर शिक्षक के मार्गदर्शन में चर्चा करें।
सृजन
1. 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' लोकोक्ति और 'जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास' विषय को मिलाकर एक संक्षिप्त लेख तैयार कीजिए।
उत्तर (संकेत): जैविक खाद बनाना दूर से सरल व सुहावना लगता है, परंतु निकट से इसमें धैर्य, मेहनत व निरंतर देखभाल की आवश्यकता होती है; इसी प्रकार जैसे दूर के ढोल सुहावने होते हैं, वैसे ही किसी भी कार्य की वास्तविक कठिनाई निकट जाने पर ही पता चलती है — पर सच्चे प्रयास से वह भी सफल व सुखद परिणाम देता है।
2. आपने पढ़ा कि ढोल के पास बैठे व्यक्ति की अपेक्षा दूर बैठे व्यक्ति के लिए ढोल की आवाज़ का अनुभव भिन्न है। अपने अनुभव के आधार पर ऐसी किसी घटना का उल्लेख डायरी में कीजिए, जब किसी वस्तु/व्यक्ति/संस्था के विषय में दूर से आपका अनुमान कुछ और रहा हो, पर निकट से अनुभव बिल्कुल अलग रहा हो।
उत्तर: (व्यक्तिगत/रचनात्मक गतिविधि — विद्यार्थी अपने वास्तविक अनुभव के आधार पर डायरी-शैली में लिखें, जैसे किसी नई जगह, विद्यालय, व्यक्ति या कार्य के विषय में दूर से बनी धारणा और निकट जाने पर बदले अनुभव का वर्णन।)
भाषा से संवाद — व्याकरण की बात
समास
| सामासिक पद | समास-विग्रह | समास का नाम |
|---|---|---|
| निबंधशास्त्र | निबंध का शास्त्र | तत्पुरुष समास |
| समाज-सुधार | समाज का सुधार | तत्पुरुष समास |
| जीवन-संग्राम | जीवन का संग्राम | तत्पुरुष समास |
| नव-वधू | नई वधू | कर्मधारय समास |
| अतीत-गौरव | अतीत का गौरव | तत्पुरुष समास |
उपसर्ग एवं प्रत्यय
1. निबंध लिखना बड़ी ______ (कठिन) की बात है।
उत्तर: कठिनाई (कठिन + आई प्रत्यय)
2. वर्तमान से दोनों को ______ (संतोष) होता है।
उत्तर: असंतोष (अ उपसर्ग + संतोष)
3. वाक्यों में कुछ ______ (स्पष्ट) भी चाहिए, क्योंकि यह ______ (स्पष्ट/बोध) गांभीर्य ला देती है।
उत्तर: अस्पष्टता (अ उपसर्ग + स्पष्ट + ता प्रत्यय); दुर्बोधता (दुर् उपसर्ग + बोध + ता प्रत्यय)
4. मधुर, सुधार, सुंदर, गति, समाज — इन शब्दों में उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाइए।
उत्तर: मधुर → मधुरता, सुमधुर | सुधार → सुधारक, प्रतिसुधार | सुंदर → सुंदरता, असुंदर | गति → प्रगति, गतिशील | समाज → सामाजिक, असामाजिक।
भाव-विस्तार
1. “जो तरुण संसार के जीवन-संग्राम से दूर हैं, उन्हें संसार का चित्र बड़ा ही मनमोहक प्रतीत होता है।”
भाव-विस्तार: जो युवा अभी व्यावहारिक जीवन के संघर्षों, जिम्मेदारियों और कठिनाइयों से रूबरू नहीं हुए हैं, वे संसार को दूर से देखकर उसे रंगीन, सुंदर और आकर्षक समझते हैं। वास्तविकता से अनभिज्ञ होने के कारण उनकी कल्पना में जीवन आसान व मनोहर लगता है, जबकि वास्तविक संघर्ष में उतरने पर सच्चाई कठोर व भिन्न होती है।
2. “मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।”
भाव-विस्तार: मानव सभ्यता का इतिहास साक्षी है कि प्रत्येक युग में समाज में कोई न कोई बुराई, रूढ़ि या असमानता रही है, जिसे दूर करने के लिए सुधारकों की आवश्यकता महसूस हुई। बुद्ध से लेकर गांधी तक अनेक महापुरुषों ने अपने-अपने समय में सुधार कार्य किए, फिर भी नई समस्याएँ जन्म लेती रहीं — इसीलिए सुधार की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती, यह एक सतत चलने वाली यात्रा है।
3. “आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।”
भाव-विस्तार: समय का चक्र निरंतर घूमता रहता है। आज जो युवा पीढ़ी वर्तमान में बदलाव व क्रांति की बात करती है, समय बीतने पर वही वृद्ध होकर पुरानी यादों में खो जाएगी और अपने युवाकाल को स्वर्णिम मानकर उसकी प्रशंसा करेगी। यह मानव-स्वभाव की एक शाश्वत विशेषता है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी दोहराई जाती है।
4. “निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है।”
भाव-विस्तार: संक्षिप्तता निबंध-लेखन का एक महत्वपूर्ण गुण है। छोटे निबंध में विचारों की स्पष्टता व सुगठन बना रहता है, पाठक की रुचि व एकाग्रता बनी रहती है। इसके विपरीत लंबे निबंध में शब्दों के विस्तार से रचना की सुंदरता व प्रभाव कम हो सकता है, इसलिए विद्वानों का मत है कि संक्षिप्त निबंध ही श्रेष्ठ माना जाता है।
25 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (बहुविकल्पीय) उत्तर सहित
1. 'क्या लिखूँ?' निबंध के लेखक कौन हैं?
(क) महादेवी वर्मा (ख) पद्मलाल पुन्नालाल बख्शी (ग) प्रेमचंद (घ) रामधारी सिंह दिनकर
उत्तर: (ख) पद्मलाल पुन्नालाल बख्शी
2. पद्मलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म किस वर्ष हुआ था?
(क) 1884 (ख) 1894 (ग) 1904 (घ) 1914
उत्तर: (ख) सन् 1894
3. बख्शी जी का जन्म-स्थान कौन-सा है?
(क) रायपुर (ख) खैरागढ़, राजनांदगांव (ग) इंदौर (घ) भोपाल
उत्तर: (ख) खैरागढ़, राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)
4. बख्शी जी हिंदी साहित्य में विशेष रूप से किस रूप में प्रसिद्ध हैं?
(क) उपन्यासकार (ख) नाटककार (ग) निबंधकार (घ) पत्रकार
उत्तर: (ग) निबंधकार
5. निम्नलिखित में से बख्शी जी की रचना कौन-सी नहीं है?
(क) पंच-पात्र (ख) प्रबंध पारिजात (ग) गोदान (घ) कुछ बिखरे पन्ने
उत्तर: (ग) गोदान (यह प्रेमचंद की रचना है)
6. बख्शी जी ने किन पत्रिकाओं का संपादन किया?
(क) हंस और सरस्वती (ख) सरस्वती और छाया (ग) कादंबिनी और धर्मयुग (घ) नंदन और चंपक
उत्तर: (ख) सरस्वती और छाया
7. बख्शी जी का निधन किस वर्ष हुआ?
(क) 1961 (ख) 1971 (ग) 1981 (घ) 1991
उत्तर: (ख) सन् 1971
8. निबंध में लेखक को मुख्यतः किनके लिए निबंध लिखना था?
(क) परीक्षा के लिए (ख) नमिता और अमिता के लिए (ग) संपादक के लिए (घ) प्रकाशक के लिए
उत्तर: (ख) नमिता और अमिता के लिए
9. नमिता ने किस विषय पर निबंध लिखने का आग्रह किया?
(क) समाज-सुधार (ख) 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' (ग) मेरा प्रिय कवि (घ) स्वतंत्रता दिवस
उत्तर: (ख) 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं'
10. अमिता ने किस विषय पर निबंध लिखने का आग्रह किया?
(क) 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' (ख) समाज-सुधार (ग) मित्रता (घ) विज्ञान
उत्तर: (ख) समाज-सुधार
11. ए.जी. गार्डिनर किस भाषा के प्रसिद्ध निबंध लेखक थे?
(क) हिंदी (ख) संस्कृत (ग) अंग्रेजी (घ) फ्रेंच
उत्तर: (ग) अंग्रेजी
12. गार्डिनर के अनुसार निबंध लिखने के लिए सबसे आवश्यक क्या है?
(क) विषय की गहन जानकारी (ख) एक विशेष मानसिक स्थिति (उमंग/आवेग) (ग) बड़ी शब्दावली (घ) अलंकारों का प्रयोग
उत्तर: (ख) एक विशेष मानसिक स्थिति (उमंग/आवेग)
13. 'हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है' — इस कथन से क्या भाव उजागर होता है?
(क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता (ख) खूँटी सबसे जरूरी वस्तु है (ग) हैट बेकार वस्तु है (घ) खूँटी और हैट एक समान हैं
उत्तर: (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता
14. निबंधशास्त्र के आचार्यों के अनुसार निबंध के प्रधान अंग कितने हैं?
(क) एक (ख) दो (ग) तीन (घ) चार
उत्तर: (ख) दो — सामग्री और शैली
15. निबंध लिखने से पहले विद्वानों के अनुसार क्या तैयार करना चाहिए?
(क) शब्दकोश (ख) रूपरेखा (ग) चित्र (घ) प्रस्तावना
उत्तर: (ख) रूपरेखा
16. ए.जी. गार्डिनर को अपने लेखों में सबसे अधिक कठिनाई किसमें होती थी?
(क) सामग्री जुटाने में (ख) शीर्षक बनाने में (ग) निष्कर्ष लिखने में (घ) व्याकरण में
उत्तर: (ख) शीर्षक बनाने में
17. घबराकर शेक्सपियर ने अपने एक नाटक का नाम क्या रख दिया?
(क) 'जैसा तुम चाहो' (ख) 'हैमलेट' (ग) 'मैकबेथ' (घ) 'ओथेलो'
उत्तर: (क) 'जैसा तुम चाहो' (As You Like It)
18. बाणभट्ट के किस ग्रंथ का उल्लेख आधे पृष्ठ के लंबे वाक्यों के उदाहरण रूप में हुआ है?
(क) हर्षचरित (ख) कादंबरी (ग) मृच्छकटिकम् (घ) मेघदूत
उत्तर: (ख) कादंबरी
19. संस्कृत के किस कवि ने जान-बूझकर अपने काव्य में गुत्थियाँ डालीं थीं?
(क) कालिदास (ख) श्रीहर्ष (ग) भवभूति (घ) माघ
उत्तर: (ख) श्रीहर्ष
20. अंग्रेजी निबंधकारों की स्वच्छंद पद्धति के जन्मदाता किसे माना जाता है?
(क) शेक्सपियर (ख) गार्डिनर (ग) मानटेन (घ) मिल्टन
उत्तर: (ग) मानटेन (Montaigne)
21. मानटेन-शैली के निबंधों की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
(क) कल्पना की उड़ान (ख) मन की स्वच्छंद रचना (सच्ची अनुभूति) (ग) तर्कपूर्ण विवेचना (घ) ऐतिहासिक विवरण
उत्तर: (ख) मन की स्वच्छंद रचना (सच्ची अनुभूति)
22. अमीर खुसरो की कथा में कुएँ पर पानी भर रही औरतों की संख्या तथा उनकी इच्छाओं की वस्तुएँ क्या थीं?
(क) तीन — खीर, चरखा, कुत्ता (ख) चार — खीर, चरखा, कुत्ता, ढोल (ग) पाँच — फूल, फल, दीप, ढोल, कुत्ता (घ) दो — चरखा, ढोल
उत्तर: (ख) चार — खीर, चरखा, कुत्ता, ढोल
23. 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' — इसका आशय क्या है?
(क) दूर से देखने पर वस्तुएँ सुंदर लगती हैं, निकट का यथार्थ कठोर होता है (ख) ढोल की आवाज़ हमेशा मधुर होती है (ग) दूर की वस्तुएँ हमेशा बेकार होती हैं (घ) निकट और दूर में कोई अंतर नहीं होता
उत्तर: (क) दूर से देखने पर वस्तुएँ सुंदर लगती हैं, निकट का यथार्थ कठोर होता है
24. निबंध में निम्नलिखित में से किस समाज-सुधारक का उल्लेख नहीं हुआ है?
(क) बुद्धदेव (ख) कबीर (ग) महात्मा गांधी (घ) रवींद्रनाथ टैगोर
उत्तर: (घ) रवींद्रनाथ टैगोर
25. लेखक के अनुसार तरुण किसके समर्थक तथा वृद्ध किसके संरक्षक होते हैं?
(क) तरुण अतीत के, वृद्ध क्रांति के (ख) तरुण क्रांति के, वृद्ध अतीत-गौरव के (ग) दोनों वर्तमान के (घ) दोनों भविष्य के
उत्तर: (ख) तरुण क्रांति के, वृद्ध अतीत-गौरव के
20 अति लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर सहित
1. 'क्या लिखूँ?' निबंध के लेखक का नाम बताइए।
उत्तर: पद्मलाल पुन्नालाल बख्शी।
2. बख्शी जी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर: सन् 1894 में खैरागढ़, राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ (तत्कालीन मध्यप्रदेश) में।
3. बख्शी जी का निधन कब हुआ?
उत्तर: सन् 1971 में।
4. बख्शी जी की किन्हीं दो निबंध-रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर: पंच-पात्र और प्रबंध पारिजात।
5. बख्शी जी के किन्हीं दो काव्य-संग्रहों के नाम लिखिए।
उत्तर: अश्रुदल और शतदल।
6. बख्शी जी की किन्हीं दो आलोचनात्मक रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर: विश्व साहित्य और हिंदी साहित्य विमर्श।
7. बख्शी जी ने किन पत्रिकाओं का संपादन किया?
उत्तर: सरस्वती और छाया का।
8. लेखक को किन दो विद्यार्थियों के लिए निबंध लिखना था?
उत्तर: नमिता और अमिता के लिए।
9. नमिता ने किस विषय पर निबंध माँगा था?
उत्तर: 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' विषय पर।
10. अमिता ने किस विषय पर निबंध माँगा था?
उत्तर: 'समाज-सुधार' विषय पर।
11. ए.जी. गार्डिनर कौन थे?
उत्तर: अंग्रेजी के प्रसिद्ध निबंध लेखक।
12. निबंधशास्त्र के अनुसार निबंध के दो प्रधान अंग कौन-से हैं?
उत्तर: सामग्री और शैली।
13. निबंध लिखने से पहले क्या बनाने की सलाह दी जाती है?
उत्तर: रूपरेखा।
14. गार्डिनर को अपने लेखों में सबसे अधिक कठिनाई किसमें होती थी?
उत्तर: लेखों का शीर्षक बनाने में।
15. शेक्सपियर के जिस नाटक का उल्लेख निबंध में हुआ है, उसका नाम बताइए।
उत्तर: 'जैसा तुम चाहो' (As You Like It)।
16. बाणभट्ट की किस रचना का उल्लेख निबंध में हुआ है?
उत्तर: कादंबरी।
17. अंग्रेजी निबंध-पद्धति के जन्मदाता किसे माना जाता है?
उत्तर: मानटेन को।
18. अमीर खुसरो के पद्य की पहली पंक्ति लिखिए।
उत्तर: “खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला।”
19. लेखक के अनुसार तरुण किसके समर्थक होते हैं?
उत्तर: क्रांति के।
20. लेखक के अनुसार वृद्ध किसके संरक्षक होते हैं?
उत्तर: अतीत-गौरव के।
20 लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर सहित
1. ए.जी. गार्डिनर के अनुसार निबंध लेखन की आदर्श मानसिक स्थिति क्या होती है?
उत्तर: गार्डिनर के अनुसार निबंध लिखते समय मन में एक विशेष उमंग व स्फूर्ति उत्पन्न होनी चाहिए, हृदय में आवेग उठना चाहिए। उस समय विषय की चिंता नहीं रहती, केवल मन के भावों को व्यक्त करने की आवश्यकता होती है — चाहे विषय कोई भी हो।
2. लेखक (बख्शी जी) को निबंध लिखने में गार्डिनर से भिन्न किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?
उत्तर: लेखक को गार्डिनर की तरह सहज भाव-प्रवाह का अनुभव नहीं होता, इसलिए उन्हें निबंध लिखने के लिए विशेष रूप से सोचना, चिंता करना और परिश्रम करना पड़ता है। कठिन विषयों व समय की कमी के कारण उन्हें अतिरिक्त परिश्रम करना पड़ा।
3. निबंधशास्त्र के अनुसार निबंध के दो प्रधान अंग कौन-से हैं और उनका क्या अर्थ है?
उत्तर: निबंध के दो प्रधान अंग सामग्री और शैली हैं। सामग्री का अर्थ है विषय से संबंधित विचारों व तथ्यों का संग्रह, और शैली का अर्थ है उन विचारों को भाषा में प्रस्तुत करने का ढंग।
4. लेखक को 'दूर के ढोल सुहावने' विषय की रूपरेखा बनाने में क्या कठिनाई हुई?
उत्तर: लेखक को समझ नहीं आ रहा था कि इस विषय की रूपरेखा किस प्रकार बनाई जाए, क्योंकि निबंध लिखने के बाद ही उसका सार दो-पाँच शब्दों में आ सकता है, पहले नहीं। इसलिए उन्होंने बिना रूपरेखा बनाए ही निबंध लिखने का निर्णय लिया।
5. गार्डिनर को निबंध लेखन में सबसे अधिक कठिनाई किस बात में होती थी और उन्होंने इसका हल कैसे निकाला?
उत्तर: गार्डिनर को लेखों का शीर्षक बनाने में सबसे अधिक कठिनाई होती थी। उन्होंने इस भार को अपने मित्र पर छोड़ दिया, अर्थात् शीर्षक तय करने का काम किसी और को सौंप दिया।
6. शेक्सपियर के संबंध में निबंध में क्या उदाहरण दिया गया है?
उत्तर: कहा गया है कि शेक्सपियर को नाटक लिखने में उतनी कठिनाई नहीं हुई होगी, जितनी नाटकों के नामकरण में हुई होगी। इसी कारण घबराकर उन्होंने अपने एक नाटक का नाम 'जैसा तुम चाहो' (As You Like It) रख दिया।
7. आदर्श शैली के विषय में आचार्यों का क्या मत है?
उत्तर: आचार्यों के अनुसार भाषा में प्रवाह होना चाहिए; इसके लिए वाक्य छोटे-छोटे किंतु एक-दूसरे से संबद्ध होने चाहिए। इससे भाषा स्पष्ट और सुगठित बनती है।
8. बाणभट्ट और संस्कृत कवियों के उदाहरण देकर लेखक ने वाक्य-रचना पर क्या व्यंग्य किया है?
उत्तर: लेखक ने व्यंग्यात्मक ढंग से कहा कि अपनी विद्वता प्रदर्शित करने के लिए वाक्य कम-से-कम आधे पृष्ठ में समाप्त होने चाहिए, जैसे बाणभट्ट ने कादंबरी में लिखे हैं, और वाक्यों में अस्पष्टता भी होनी चाहिए, जैसे श्रीहर्ष व सेनापति ने अपनी रचनाएँ दुर्बोध बना दीं, क्योंकि यह गांभीर्य का आभास कराती है।
9. अंग्रेजी निबंधकारों की पद्धति भारतीय (संस्कृत) आचार्यों की पद्धति से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर: भारतीय आचार्यों की पद्धति में रूपरेखा, शैली, अलंकार व दुर्बोधता पर बल दिया जाता है, जबकि अंग्रेजी निबंधकार (मानटेन की पद्धति के अनुयायी) अपने देखे-सुने-अनुभव किए हुए को सहज, स्वच्छंद और सच्ची अनुभूति के साथ लिपिबद्ध करते हैं, जिसमें न कवि की कल्पना होती है न आख्यायिका-लेखक की सूक्ष्म दृष्टि।
10. मानटेन-शैली में लिखे निबंधों की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: ऐसे निबंध मन की स्वच्छंद रचनाएँ होते हैं। उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति और उल्लास रहता है; वे उस मानसिक स्थिति में लिखे जाते हैं जिसमें न ज्ञान की गरिमा रहती है न कल्पना का अभाव — लेखक अपनी दृष्टि से संसार को देखता है और अपने भाव से ग्रहण करता है।
11. लेखक ने दो विषयों को एक निबंध में समेटने के लिए किस युक्ति का सहारा लिया?
उत्तर: लेखक ने अमीर खुसरो की कहानी से प्रेरणा लेकर दोनों विषयों ('दूर के ढोल सुहावने' और 'समाज-सुधार') को एक ही निबंध में जोड़ने की युक्ति अपनाई, जैसे खुसरो ने एक ही पद्य में चार अलग-अलग इच्छाओं को पूरा किया था।
12. अमीर खुसरो की कहानी संक्षेप में लिखिए।
उत्तर: एक बार प्यास लगने पर अमीर खुसरो एक कुएँ के पास पहुँचे, जहाँ चार औरतें पानी भर रही थीं। पानी माँगने पर पहली ने खीर पर, दूसरी ने चरखे पर, तीसरी ने कुत्ते पर और चौथी ने ढोल पर कविता सुनाने की इच्छा जताई। प्रतिभाशाली खुसरो ने एक ही पद्य में चारों की इच्छाएँ पूरी कर दीं।
13. 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' — लेखक ने इसका क्या कारण बताया है?
उत्तर: लेखक के अनुसार ढोल की कर्कशता (कठोर आवाज़) दूर तक नहीं पहुँचती। ढोल के पास बैठे लोगों के कान भले ही फटने लगें, पर दूर बैठे व्यक्ति के कान में वही ध्वनि मधुरता में बदल जाती है और वह सुखद कल्पना कर पाता है।
14. दूर बैठा व्यक्ति ढोल की ध्वनि सुनकर मन में क्या कल्पना करता है?
उत्तर: दूर बैठा व्यक्ति ढोल की ध्वनि सुनकर अपने हृदय में किसी के विवाहोत्सव का चित्र बना लेता है; वह कोलाहलपूर्ण घर के एक कोने में बैठी लज्जाशील नव-वधू की कल्पना कर लेता है, जिसके हृदय में प्रेम, उल्लास, संकोच व आशंका जैसे भाव उमड़ रहे होते हैं।
15. लेखक के अनुसार तरुणों और वृद्धों की मनोदशा में क्या अंतर होता है?
उत्तर: तरुण जीवन-संग्राम से दूर होते हैं, इसलिए उन्हें संसार का चित्र मनमोहक लगता है और वे भविष्य को वर्तमान में देखना चाहते हैं। वृद्ध अपनी बाल्यावस्था और तरुणावस्था से दूर हो चुके होते हैं, इसलिए उन्हें अतीत की स्मृतियाँ सुखद लगती हैं और वे अतीत को वर्तमान में खींचना चाहते हैं।
16. वर्तमान काल को सदैव सुधारों का काल क्यों कहा गया है?
उत्तर: क्योंकि तरुण क्रांति के समर्थक होते हैं और वृद्ध अतीत-गौरव के संरक्षक होते हैं। दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, इसी असंतोष के कारण वर्तमान में निरंतर सुधार होते रहते हैं।
17. निबंध में किन-किन समाज-सुधारकों का उल्लेख किया गया है?
उत्तर: निबंध में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक, राजा राममोहन राय, स्वामी दयानंद और महात्मा गांधी का उल्लेख किया गया है।
18. लेखक के अनुसार सुधार की प्रक्रिया कभी समाप्त क्यों नहीं होती?
उत्तर: क्योंकि जीवन में नए-नए दोष उत्पन्न होते रहते हैं और उनके निवारण के लिए नए-नए सुधार किए जाते रहते हैं। जो कभी सुधार माने जाते थे, वे समय के साथ दोष बन जाते हैं और उनका पुनः सुधार किया जाता है। इसीलिए मानव-जीवन को प्रगतिशील माना गया है।
19. हिंदी में प्रगतिशील साहित्य के निर्माताओं के विषय में लेखक क्या कहते हैं?
उत्तर: लेखक कहते हैं कि प्रगतिशील साहित्य के निर्माता यह समझते हैं कि उनके साहित्य में भविष्य का गौरव निहित है, परंतु कुछ समय बाद यह साहित्य भी अतीत का स्मारक बन जाएगा और आज के तरुण वृद्ध होकर अतीत-गौरव का स्वप्न देखेंगे। यह क्रम आगे भी चलता रहेगा।
20. निबंध का शीर्षक 'क्या लिखूँ?' कितना सार्थक है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: निबंध का शीर्षक पूर्णतः सार्थक है, क्योंकि पूरा निबंध लेखक की उसी उधेड़बुन के इर्द-गिर्द घूमता है कि वह क्या और कैसे लिखे। लेखक अपनी लेखन-प्रक्रिया, कठिनाइयों व निबंध-रचना के रहस्यों को आत्मकथात्मक शैली में उजागर करते हुए अंततः दो कठिन विषयों को मिलाकर एक सफल निबंध रच देते हैं।
10 महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित
1. 'क्या लिखूँ?' निबंध के आधार पर निबंध-लेखन की संपूर्ण प्रक्रिया को अपने शब्दों में समझाइए।
उत्तर: निबंध-लेखन की प्रक्रिया को लेखक ने चार चरणों में समझाया है — पहला, विषय-चयन और सामग्री-संग्रह, जिसमें विषय से संबंधित विचारों को मनन के द्वारा एकत्र किया जाता है; दूसरा, रूपरेखा-निर्माण, जिसमें निबंध का ढाँचा तय किया जाता है (यद्यपि लेखक स्वयं इसकी व्यावहारिकता पर संदेह प्रकट करते हैं); तीसरा, शैली-निर्धारण, जिसमें भाषा के प्रवाह, वाक्य-रचना, अलंकार आदि पर ध्यान दिया जाता है; और चौथा, लेखन व समापन, जिसमें विचारों को क्रमबद्ध रूप से अंतिम रूप दिया जाता है। लेखक इस पूरी प्रक्रिया को हास्य-व्यंग्यपूर्ण व आत्मकथात्मक शैली में प्रस्तुत करते हुए यह भी दिखाते हैं कि एक कुशल लेखक अपनी बुद्धि व अनुभव के सहारे इन नियमों से हटकर भी सफल निबंध रच सकता है।
2. निबंध में वर्णित 'सामग्री और शैली' के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: निबंधशास्त्र के आचार्यों के अनुसार सामग्री और शैली निबंध के दो अनिवार्य अंग हैं। सामग्री के बिना निबंध खोखला रहेगा, और शैली के बिना अच्छी सामग्री भी प्रभावहीन रहेगी। सामग्री विषय को गहराई व प्रामाणिकता प्रदान करती है, जबकि शैली उस सामग्री को रोचक, प्रवाहमय और पाठक के लिए ग्राह्य बनाती है। लेखक इस निबंध में स्वयं इन दोनों तत्वों को जुटाने में हुई कठिनाइयों का वर्णन करते हुए इनके महत्व को व्यावहारिक रूप से रेखांकित करते हैं।
3. 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' शीर्षक निबंध-अंश का सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: इस अंश में लेखक बताते हैं कि किसी भी वस्तु या ध्वनि की वास्तविकता निकट से जितनी कठोर होती है, दूरी बढ़ने पर वह उतनी ही मधुर व सुखद प्रतीत होने लगती है। ढोल के पास बैठे व्यक्ति के कान के परदे फटने लगते हैं, परंतु वही ध्वनि दूर किसी नदी के तट पर मधुरता में बदल जाती है और सुनने वाला उसमें विवाहोत्सव जैसी सुंदर कल्पना कर लेता है। इसी सिद्धांत को लेखक तरुण और वृद्ध के जीवन-दृष्टिकोण पर भी लागू करते हैं — तरुणों को जीवन-संग्राम से दूर होने के कारण संसार मनोहर लगता है, और वृद्धों को बाल्यावस्था से दूर होने के कारण अतीत सुखद लगता है। इस प्रकार दूरी (चाहे स्थान की हो या समय की) यथार्थ की कठोरता को छिपाकर वस्तुओं को सुंदर बना देती है।
4. निबंध के आधार पर 'समाज-सुधार' की निरंतरता को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: लेखक के अनुसार मानव-इतिहास में कोई ऐसा काल नहीं रहा जब समाज को सुधार की आवश्यकता न रही हो। बुद्ध, महावीर, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक, राजा राममोहन राय, स्वामी दयानंद और महात्मा गांधी जैसे अनेक सुधारक हर युग में उत्पन्न हुए। जीवन में सदैव नए-नए दोष उत्पन्न होते रहते हैं और उनके निवारण हेतु नए-नए सुधार किए जाते रहते हैं। जो आज सुधार के रूप में स्वीकार किया जाता है, वही समय बीतने पर दोष बनकर पुनः सुधार की माँग करता है। इसी सतत प्रक्रिया के कारण मानव-जीवन को प्रगतिशील कहा गया है, और समाज-सुधार का कार्य कभी पूर्ण रूप से समाप्त नहीं होता।
5. 'क्या लिखूँ?' निबंध की भाषा-शैली की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: इस निबंध की भाषा-शैली आत्मकथात्मक व संवादात्मक है, जिसमें लेखक स्वयं पाठकों से सीधे संवाद करते प्रतीत होते हैं। इसमें हास्य-व्यंग्य का पुट है, जैसे स्वयं को 'मास्टर' कहकर अपनी विद्वता के प्रदर्शन की इच्छा पर व्यंग्य करना। लेखक ने साहित्यिक व सांस्कृतिक संदर्भों (गार्डिनर, मानटेन, बाणभट्ट, श्रीहर्ष, शेक्सपियर, अमीर खुसरो) का सटीक व प्रभावी प्रयोग किया है, जिससे निबंध ज्ञानवर्धक बन जाता है। सरल, सहज व प्रवाहमयी भाषा के साथ-साथ तार्किकता भी इस निबंध की विशेषता है।
6. निबंध के आधार पर बताइए कि लेखक ने अपनी रचना-प्रक्रिया को किस प्रकार पाठकों के समक्ष उजागर किया है?
उत्तर: लेखक ने अपने मन में उठने वाले प्रत्येक विचार, संदेह व कठिनाई को खुलकर पाठकों के सामने रखा है — चाहे वह सामग्री जुटाने की समस्या हो, रूपरेखा बनाने की दुविधा हो, या शैली तय करने का असमंजस। वे विभिन्न विद्वानों (गार्डिनर, निबंधशास्त्र के आचार्य, मानटेन) के मतों की समीक्षा करते हुए स्वयं अपनी राय व निर्णय भी बताते हैं। इस आत्मपरक शैली के कारण पाठक निबंध-रचना की संपूर्ण मानसिक प्रक्रिया से गुजरता हुआ प्रतीत होता है, जिससे निबंध अधिक जीवंत, आत्मीय व प्रभावशाली बन जाता है।
7. लेखक ने अमीर खुसरो की कथा का उदाहरण देकर क्या सिद्ध करने का प्रयास किया है?
उत्तर: लेखक ने यह सिद्ध करने का प्रयास किया है कि प्रतिभा और बुद्धिमत्ता से कठिन-से-कठिन समस्या का भी सरल समाधान निकाला जा सकता है।
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