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अलंकार क्या है? शब्दालंकार और अर्थालंकार की पूरी जानकारी, भेद व उदाहरण सहित

हिंदी व्याकरण · कक्षा 6-10 · परीक्षा तैयारी अलंकार – शब्दालंकार और अर्थालंकार : परिभाषा, भेद, उदाहरण और अभ्यास सरल भाषा में पूरी जानकारी, मौलिक उदाहरण, पहचानने की ट्रिक्स और 40 अभ्यास प्रश्न — कक्षा 6 से 10 के विद्यार्थियों, शिक्षकों और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वालों के लिए। जब हम किसी को "तुम बहुत अच्छे हो" कहने की बजाय "तुम चंदा से भी सुंदर हो" कहते हैं, तो दूसरा वाक्य पहले से कहीं ज़्यादा मन में उतरता है। यही जादू है अलंकार का। "अलंकार" शब्द दो भागों से मिलकर बना है — अलम् + कार , जिसका अर्थ है "आभूषण" या "गहना"। जिस तरह गहने पहनकर एक साधारण चेहरा भी सुंदर और आकर्षक लग उठता है, उसी तरह भाषा में अलंकारों का प्रयोग करने से एक सीधी-सादी बात भी सुंदर, प्रभावशाली और यादगार बन जाती है। सरल शब्दों में कहें तो — भाषा को सुंदर, चमत्कारी और प्रभावशाली बनाने वाले शब्दों या अर्थों के विशेष प्रयोग को अलंकार कहते हैं। भाषा में अलंकारों की आवश्यकता तीन मुख्य कारणों से होती है: सौंदर्य के लिए (गहनों जैसी शोभा), प्रभाव के ...

विस्मयादिबोधक क्या है? परिभाषा, भेद और उदाहरण | कक्षा 6, 7, 8 हिंदी व्याकरण

विस्मयादिबोधक क्या है? परिभाषा, भेद और उदाहरण (कक्षा 6, 7, 8) जब हम अचानक खुश होते हैं तो मुँह से निकलता है — "वाह!" जब चोट लगती है तो निकलता है — "आह!" जब कोई अचानक सामने आ जाए तो हम कह उठते हैं — "अरे!" ये सारे शब्द हमारे मन के अचानक उठे भाव को प्रकट करते हैं, और हिंदी व्याकरण में इन्हें ही विस्मयादिबोधक कहा जाता है। आइए इस लेख में इसे बहुत आसान भाषा में, उदाहरणों, चित्रों और एक माइंड मैप के साथ समझते हैं। विस्मयादिबोधक की परिभाषा विस्मयादिबोधक उन शब्दों को कहते हैं जिनसे बोलने वाले के मन का अचानक उठा भाव — जैसे हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा, भय या स्वीकृति — प्रकट होता है। ये शब्द वाक्य के दूसरे शब्दों से व्याकरण के नियम से नहीं जुड़ते, यानी इनका कोई लिंग, वचन या कारक नहीं होता। ये अपने आप में स्वतंत्र होते हैं। उदाहरण: वाह! क्या सुंदर दृश्य है। — यहाँ "वाह" शब्द बोलने वाले की खुशी को दर्शाता है, यही विस्मयादिबोधक है। विस्मयादिबोधक चिन्ह (!) कहाँ और कैसे लगाएँ विस्मयादिबोधक शब्द के तुरंत बाद विस्मयादिबोधक चिन्ह "!...

घर की याद Class 9 Poem — भवानीप्रसाद मिश्र | पूरी कविता, व्याख्या व प्रश्नोत्तर

घर की याद - नोट्स व प्रश्नोत्तर | HINDI GYAN HINDI GYAN | कक्षा 9 | पाठ 12 | काव्य-खंड (गंगा) घर की याद कवि - भवानीप्रसाद मिश्र नोट्स • व्याख्या • अभ्यास हल • 75+ अतिरिक्त प्रश्नोत्तर ✍️  कवि परिचय — भवानीप्रसाद मिश्र जीवन परिचय भवानीप्रसाद मिश्र का जन्म सन् 1913 में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद (अब नर्मदापुरम्) में हुआ था। साहित्य के साथ-साथ स्वाधीनता आंदोलन में जिन कवियों की सक्रिय भागीदारी थी, उनमें ये प्रमुख हैं। इनका निधन सन् 1985 में हुआ। प्रमुख रचनाएँ गीत-फरोश, खुशबू के शिलालेख, चकित है दुख, अँधेरी कविताएँ, बुनी हुई रस्सी (कविता संग्रह — इस पर इन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला), कवितांतर, शतदल, गांधी-पंचशती, त्रिकाल संध्या आदि। साहित्यिक व सामाजिक योगदान भवानीप्रसाद मिश्र ने राष्ट्रभाषा प्रचार समिति में कार्य किया और सन् 1952-55 तक हैदराबाद से प्रकाशित हिंदी की लोकप्रिय साहित्यिक पत्रिका कल्पना का संपादन भी किया। सन् 1955-58 के बीच वे आकाशवाणी के हिंदी कार्यक्रमों से संबद्ध रहे। उन्होंने संपूर्ण गांधी वाङ्मय का भी संपादन किया। 📖  प...