तीन बुद्धिमान — लोककथा का सारांश, सरल व्याख्या और प्रश्नोत्तर | कक्षा 7 मल्हार
कक्षा 7 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक 'मल्हार' का दूसरा पाठ 'तीन बुद्धिमान' एक प्रेरक लोककथा है, जिसमें एक निर्धन पिता के तीन पुत्र अपनी पैनी दृष्टि (अवलोकन-शक्ति) और तीक्ष्ण बुद्धि के बल पर हर संकट से पार पाते हैं। इस लेख में आपको पाठ का परिचय, पूरी कहानी, सरल व्याख्या, कठिन शब्दों के अर्थ, पाठ्यपुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों के उत्तर (कारक-व्याकरण सहित) तथा अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न (MCQ सहित) — सब कुछ एक ही जगह मिलेगा।
पाठ परिचय
'तीन बुद्धिमान' एक प्राचीन लोककथा (folk tale) है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक परंपरा द्वारा चली आ रही है। कहानी में एक निर्धन व्यक्ति अपने तीन बेटों को रुपये-पैसे या सोने-चाँदी के स्थान पर 'पैनी दृष्टि' और 'तीव्र बुद्धि' रूपी धन संचित करने की सीख देता है। पिता की मृत्यु के बाद तीनों भाई एक नगर की यात्रा पर निकलते हैं, जहाँ वे बिना देखे ही एक खोए हुए ऊँट के बारे में सटीक अनुमान लगाकर पहले शक के घेरे में आ जाते हैं और फिर राजा की परीक्षा में अपनी बुद्धिमानी सिद्ध करके उसके दरबार में सम्मान पाते हैं। यह कथा अवलोकन-शक्ति (observation), तर्कशक्ति (logical reasoning) और सच्चाई के महत्व को बड़े ही रोचक ढंग से प्रस्तुत करती है।
मूल पाठ (लोककथा)
एक समय की बात है कि एक निर्धन व्यक्ति के तीन बेटे थे। वह प्रायः अपने बेटों से कहता— "मेरे बेटो! हमारे पास न तो रुपया-पैसा है और न ही सोना-चाँदी। इसलिए तुम्हें एक दूसरे प्रकार का धन संचित करना चाहिए— हर वस्तु और स्थिति को पूर्णत: समझने और जानने का प्रयास करो। कुछ भी तुम्हारी दृष्टि से न बच पाए। रुपये-पैसे के स्थान पर तुम्हारे पास पैनी दृष्टि होगी और सोने-चाँदी के स्थान पर तीव्र बुद्धि होगी। ऐसा धन संचित कर लेने पर तुम्हें कभी किसी प्रकार की कमी न रहेगी और तुम दूसरों की तुलना में उन्नीस नहीं रहोगे।"
समय बीता और कुछ समय पश्चात् पिता चल बसे। बेटे मिलकर बैठे, उन्होंने सारी स्थिति पर विचार किया और फिर बोले— "हमारे लिए यहाँ कुछ भी तो करने को नहीं। आओ, घूम-फिरकर जगत देखें। आवश्यकता होने पर हम चरवाहों या खेत में श्रमिकों का काम कर लेंगे। हम कहीं भी क्यों न हों, भूखे नहीं मरेंगे।"
अंतत: वे तैयार होकर यात्रा पर चल दिए। उन्होंने सुनसान-वीरान घाटियाँ लाँघीं और ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों को पार किया। इस तरह वे लगातार चालीस दिनों तक चलते रहे। उनके पास जितना खाने-पीने का सामान था, अब तक समाप्त हो गया था। वे थककर चूर हो गए थे और उनके पैरों में छाले पड़ गए थे किंतु सड़क थी कि समाप्त होने को नहीं आ रही थी। वे आराम करने के लिए रुके और पुनः आगे चल दिए। अंत में उन्हें अपने सामने वृक्ष और मकान दिखाई दिए— वे एक बड़े नगर के पास पहुँच गए थे।
तीनों भाई बहुत प्रसन्न हुए और शीघ्रता से पग बढ़ाने लगे। जब वे नगर के बिलकुल निकट पहुँच गए तो सबसे बड़ा भाई अचानक रुका, उसने धरती पर दृष्टि डाली और बोला— "थोड़ी ही देर पहले यहाँ से एक बहुत बड़ा ऊँट गया है।" वे थोड़ा और आगे गए तो मझला भाई रुका और सड़क के दोनों ओर देखकर बोला— "संभवत: वह ऊँट एक आँख से नहीं देख पाता हो।" वे कुछ और आगे गए तो सबसे छोटे भाई ने कहा— "ऊँट पर एक महिला और एक बच्चा सवार थे।" "बिलकुल सही!" दोनों बड़े भाइयों ने कहा और वे तीनों फिर आगे बढ़ चले।
कुछ समय पश्चात् एक घुड़सवार उनके पास से निकला। सबसे बड़े भाई ने उसकी ओर देखकर पूछा— "घुड़सवार, तुम किसी खोई हुई वस्तु को ढूँढ़ रहे हो न?" घुड़सवार ने घोड़ा रोककर उत्तर दिया— "हाँ।" "तुम्हारा ऊँट खो गया है न?" सबसे बड़े भाई ने पूछा। "हाँ।" "बहुत बड़ा-सा?" "हाँ।" "वह एक आँख से नहीं देख पाता है न?" मझले भाई ने पूछा। "हाँ।" "एक छोटे-से बच्चे के साथ उस पर महिला सवार थी न?" सबसे छोटे भाई ने सवाल किया। घुड़सवार ने तीनों भाइयों को शंका की दृष्टि से देखा और बोला— "आह तो तुम्हारे पास है मेरा ऊँट! तुरंत बताओ, तुमने उसका क्या किया?" "हमने तुम्हारे ऊँट का मुँह तक नहीं देखा", भाइयों ने उत्तर दिया। "तो तुम्हें उसके बारे में सभी बातें कैसे पता चलीं?"
"क्योंकि हम अपनी आँखों और बुद्धि से काम लेना जानते हैं", भाइयों ने उत्तर दिया। "शीघ्रता से उस दिशा में अपना घोड़ा दौड़ाओ। वहाँ तुम्हें तुम्हारा ऊँट मिल जाएगा।" "नहीं", ऊँट के स्वामी ने उत्तर दिया, "मैं उस दिशा में नहीं जाऊँगा। मेरा ऊँट तुम्हारे पास है और तुम्हें ही उसे मुझे लौटाना पड़ेगा।" "हमने तो तुम्हारे ऊँट को देखा तक नहीं", भाइयों ने चिंतित होते हुए कहा। लेकिन घुड़सवार उनकी एक भी सुनने को तैयार नहीं था। उसने अपनी तलवार निकाल ली और उसे ज़ोर से घुमाते हुए तीनों भाइयों को अपने आगे-आगे चलने का आदेश दिया। इस प्रकार वह उन्हें सीधे अपने देश के राजा के भवन में ले गया। इन तीनों भाइयों को सुरक्षा कर्मियों को सौंपकर वह स्वयं राजा के पास गया।
"मैं अपने रेवड़ों को पहाड़ों पर लिए जा रहा था", उसने कहा, "और मेरी पत्नी मेरे छोटे-से बेटे के साथ एक बड़े-से ऊँट पर मेरे पीछे-पीछे आ रही थी। किसी कारण उनका ऊँट पीछे रह गया और वे रास्ते से भटक गए। मैं उन्हें ढूँढ़ने गया तो मुझे रास्ते में तीन व्यक्ति मिले जो पैदल चले जा रहे थे मुझे पूरा विश्वास है कि उन्होंने मेरा ऊँट चुराया है और मेरी पत्नी तथा बेटे को मार डाला है।" "तुम ऐसा क्यों समझते हो?" जब वह व्यक्ति अपनी बात कह चुका तो राजा ने पूछा। "इसलिए कि मैंने उन लोगों से इस संबंध में एक भी शब्द नहीं कहा था फिर भी उन्होंने मुझे यह बताया कि ऊँट बहुत बड़ा था और एक आँख से नहीं देख पाता था तथा उस पर एक महिला बच्चे के साथ सवार थी।"
राजा ने थोड़ी देर सोच-विचार किया और फिर बोला— "जैसा कि तुम कहते हो तुम्हारे बताए बिना ही तुम्हारे ऊँट के विषय में उन्होंने सभी कुछ इतनी अच्छी तरह से बताया है तो अवश्य उन्होंने उसे चुराया होगा। जाओ, उन चोरों को यहाँ लाओ।" ऊँट का स्वामी बाहर गया और तीनों भाइयों को साथ लेकर झटपट अंदर आया। "चोरो, तुरंत बताओ!" राजा उन्हें धमकाते हुए बोला। "तुरंत उत्तर दो, तुमने इस आदमी का ऊँट कहाँ छिपाया है?" "हम चोर नहीं हैं, हमने इसका ऊँट कभी नहीं देखा", भाइयों ने उत्तर दिया।
तब राजा बोला— "इस व्यक्ति के कुछ भी बताए बिना तुमने ऊँट के विषय में सब कुछ बिलकुल सही बता दिया। अब तुम यह कहने का कैसे साहस करते हो कि तुमने उसे नहीं चुराया?" "महाराज, इसमें तो आश्चर्य की कोई बात नहीं है" भाइयों ने उत्तर दिया। "बचपन से ही हमें ऐसी आदत पड़ गई है कि हम कुछ भी अपनी दृष्टि से नहीं चूकने देते। हमने अपने परिवेश को पैनी दृष्टि से देखने और बुद्धि से सोचने के प्रयास में बहुत समय लगाया है। इसीलिए ऊँट को देखे बिना ही हमने बता दिया कि वह कैसा है।"
राजा हँस दिया। "किसी को भी देखे बिना ही उसके विषय में क्या इतना कुछ जानना संभव हो सकता है?" उसने पूछा। "हाँ, संभव है", भाइयों ने उत्तर दिया। "तो ठीक है, हम अभी तुम्हारी सच्चाई की जाँच कर लेंगे।" राजा ने उसी समय अपने मंत्री को बुलाया और उसके कान में कुछ फुसफुसाया। मंत्री तुरंत महल के बाहर चला गया। लेकिन शीघ्र ही वह दो सेवकों के साथ लौटा जो एक बहुत बड़ी-सी पेटी लाए थे। दोनों ने पेटी को बहुत सावधानी से द्वार के पास ऐसे रख दिया कि वह राजा को दिखाई दे सके और स्वयं एक ओर हट गए। तीनों भाई दूर से खड़े उन्हें देखते रहे। उन्होंने इस बात को ध्यान से देखा कि पेटी कहाँ से और कैसे लाई गई थी और किस ढंग से रखी गई थी।
"हाँ, तो चोरों, हमें बताओ कि उस पेटी में क्या है?" राजा ने कहा। "महाराज, हम तो पहले ही यह विनती कर चुके हैं कि हम चोर नहीं हैं", सबसे बड़े भाई ने कहा। "पर यदि आप चाहते हैं तो मैं आपको यह बता सकता हूँ कि उस पेटी में क्या है। उसमें कोई छोटी-सी गोल वस्तु है।" "उसमें अनार है", मझला भाई बोला। "हाँ, और वह अभी कच्चा है", सबसे छोटे भाई ने कहा।
यह सुनकर राजा ने पेटी को पास लाने का आदेश दिया। सेवकों ने तुरंत आदेश पूरा किया। राजा ने सेवकों से पेटी खोलने के लिए कहा। पेटी खुल जाने पर उसने उसमें झाँका। जब उसे उसमें कच्चा अनार दिखाई दिया तो उसके आश्चर्य की कोई सीमा न रही। आश्चर्यचकित राजा ने अनार निकालकर वहाँ उपस्थित सभी लोगों को दिखाया। तब उसने ऊँट के मालिक से कहा— "इन लोगों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ये चोर नहीं हैं। वास्तव में ये बहुत ही बुद्धिमान लोग हैं। तुम इनके बताए रास्ते पर जाकर अपने ऊँट को खोजो।"
राजा के महल में उस समय उपस्थित सभी लोगों के आश्चर्य का कोई ठिकाना न था। किंतु सबसे बढ़कर तो स्वयं राजा चकित था। उसने सभी तरह के अच्छे और स्वादिष्ट भोजन मँगवाए और लगा इन भाइयों की आवभगत करने। "तुम लोग बिलकुल निर्दोष हो और जहाँ भी जाना चाहो जा सकते हो। किंतु जाने से पहले तुम मुझे सारी बात विस्तार के साथ बताओ। तुम्हें यह कैसे पता चला कि उस व्यक्ति का ऊँट खो गया है और तुमने यह कैसे जाना कि ऊँट कैसा था?" सबसे बड़े भाई ने कहा— "धूल पर उसके पैरों के चिह्नों से मुझे पता चला कि कोई बहुत बड़ा ऊँट वहाँ से गया है। जब मैंने अपने पास से जानेवाले घुड़सवार को अपने चारों ओर नज़र दौड़ाते देखा तो उसी समय मेरी समझ में यह बात आ गई कि वह क्या खोज रहा है।"
"बहुत अच्छा!" राजा ने कहा "अच्छा, अब यह बताओ कि तुम में से किसने इस घुड़सवार को यह बताया था कि उसका ऊँट एक ही आँख से देख पाता है? उसका तो सड़क पर चिह्न नहीं रहा होगा।" "मैंने इस बात का अनुमान ऐसे लगाया कि सड़क के दायीं ओर की घास तो ऊँट ने चरी थी, मगर बायीं ओर की घास ज्यों की त्यों थी", मझले भाई ने उत्तर दिया। "बहुत उत्तम!" राजा ने कहा, "तुम में से यह अनुमान किसने लगाया था कि उस पर बच्चे के साथ एक महिला सवार थी?" "मैंने", सबसे छोटे भाई ने उत्तर दिया, "मैंने देखा कि एक स्थान पर ऊँट के घुटने टेककर बैठने के चिह्न बने हुए थे। उनके पास ही रेत पर एक महिला के जूतों के चिह्न दिखाई दिए। साथ ही छोटे-छोटे पैरों के चिह्न थे, जिससे मुझे पता चला कि महिला के साथ एक बच्चा भी था।"
"बहुत अच्छा! तुमने बिलकुल सही कहा है", राजा बोला— "लेकिन तुम लोगों को यह कैसे पता चला कि पेटी में एक कच्चा अनार है? यह बात तो मेरी समझ में बिलकुल नहीं आ रही।" सबसे बड़े भाई ने कहा— "जिस तरह दोनों व्यक्ति उसे उठाकर लाए थे, उससे बिलकुल स्पष्ट था कि वह थोड़ी भी भारी नहीं है। जब वे पेटी को रख रहे थे तो मुझे उसके अंदर किसी छोटी-सी गोल वस्तु के लुढ़कने की ध्वनि सुनाई दी।" मझला भाई बोला— "मैंने ऐसा अनुमान लगाया कि चूँकि पेटी उद्यान की ओर से लाई गई है और उसमें कोई छोटी-सी गोल वस्तु है तो वह अवश्य अनार ही होगा। कारण कि आपके महल के आसपास अनार के बहुत-से पेड़ लगे हुए हैं।" "बहुत अच्छा!" राजा ने कहा और उसने सबसे छोटे भाई से पूछा— "लेकिन तुम्हें यह कैसे पता चला कि अनार कच्चा है?" "इस समय तक उद्यान में सभी अनार कच्चे हैं। यह तो आप स्वयं ही देख सकते हैं", उसने उत्तर दिया और खुली हुई खिड़की की ओर संकेत किया। राजा ने बाहर देखा तो पाया कि उद्यान में लगे अनार के सभी वृक्षों पर कच्चे अनार लटक रहे थे।
राजा इन भाइयों की असाधारण पैनी दृष्टि और तीक्ष्ण बुद्धि से चकित रह गया। "धन-संपत्ति या सांसारिक वस्तुओं की दृष्टि से तो तुम धनवान नहीं हो लेकिन तुम्हारे पास बुद्धि का बहुत बड़ा कोष है", उसने प्रशंसा करते हुए कहा और उन्हें अपने दरबार में रख लिया।
सरल व्याख्या
भाग 1 — पिता की सीख
भावार्थ — एक निर्धन पिता अपने तीन बेटों को समझाता है कि चूँकि उसके पास उन्हें देने के लिए धन-संपत्ति नहीं है, इसलिए वे 'पैनी दृष्टि' (हर वस्तु को गहराई से देखने-समझने की क्षमता) और 'तीव्र बुद्धि' रूपी अमूल्य धन संचित करें। पिता के अनुसार यह ज्ञान-रूपी धन उन्हें जीवन में कभी असहाय नहीं होने देगा।
भाग 2 — यात्रा आरंभ और नगर तक पहुँचना
भावार्थ — पिता की मृत्यु के बाद तीनों भाई आत्मनिर्भर होने का निश्चय करके यात्रा पर निकल पड़ते हैं। चालीस दिनों की कठिन यात्रा — सुनसान घाटियाँ, ऊँचे पहाड़, भूख, थकान और छालेदार पैर — पार करके वे अंतत: एक बड़े नगर के निकट पहुँच जाते हैं। यह भाग उनके साहस और परिश्रम को दर्शाता है।
भाग 3 — बिना देखे ऊँट का सटीक अनुमान
भावार्थ — नगर के निकट पहुँचते ही तीनों भाई सड़क पर पड़े चिह्नों (पैरों के निशान, घास का असमान रूप से चरा जाना, ऊँट के बैठने के निशान) के आधार पर बिना ऊँट को देखे ही उसके बारे में तीन सटीक बातें बता देते हैं — वह बहुत बड़ा है, एक आँख से नहीं देख पाता, और उस पर एक महिला व बच्चा सवार थे। यही अवलोकन-शक्ति आगे चलकर उन्हें विपत्ति में डालती है।
भाग 4 — घुड़सवार का शक और राजा के समक्ष अभियोग
भावार्थ — ऊँट के स्वामी (घुड़सवार) को लगता है कि बिना देखे इतनी सटीक जानकारी केवल चोर ही दे सकते हैं। वह भाइयों की एक भी बात सुने बिना तलवार दिखाकर उन्हें राजा के भवन में ले जाता है और चोरी का आरोप लगाता है। राजा भी पहले तर्क से यही निष्कर्ष निकालता है कि बिना बताए इतना सब जान लेना चोरी का ही प्रमाण है — यह भाग बताता है कि केवल तार्किक अनुमान से किसी को दोषी ठहराना जल्दबाज़ी हो सकती है।
भाग 5 — पेटी की परीक्षा और सम्मान
भावार्थ — राजा भाइयों की सच्चाई परखने के लिए एक पेटी में कच्चा अनार छिपाकर मँगवाता है। भाई फिर से केवल अवलोकन (पेटी का हल्कापन, अंदर वस्तु की आवाज़, पेटी के आने की दिशा, बगीचे के अनार अभी तक कच्चे होना) के बल पर सही उत्तर दे देते हैं। इससे राजा को पूर्ण विश्वास हो जाता है कि वे चोर नहीं बल्कि असाधारण रूप से बुद्धिमान हैं, और वह उन्हें अपने दरबार में सम्मानपूर्वक स्थान देता है। कथा का केंद्रीय संदेश यही है कि सच्ची संपत्ति धन नहीं, बल्कि पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि है।
शब्द-संपदा
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| निर्धन | गरीब, धनहीन |
| संचित करना | इकट्ठा करना, जमा करना |
| पूर्णत: | पूरी तरह से |
| तीव्र बुद्धि | तेज़ समझ-शक्ति |
| उन्नीस रहना (मुहावरा) | किसी से कम या कमतर रहना |
| पश्चात् | बाद में |
| चरवाहा | पशु चराने वाला व्यक्ति |
| सुनसान-वीरान | निर्जन, जनरहित |
| घाटियाँ | पहाड़ों के बीच का निचला भाग |
| थककर चूर होना (मुहावरा) | बहुत अधिक थक जाना |
| छाले | त्वचा पर पड़ने वाले फफोले |
| चिह्न | निशान |
| शंका | संदेह |
| घुड़सवार | घोड़े पर सवार व्यक्ति |
| रेवड़ | भेड़-बकरियों आदि पशुओं का झुंड |
| फुसफुसाना | धीरे-धीरे और गुप्त रूप से बोलना |
| आश्चर्यचकित | बहुत हैरान |
| कोष | भंडार, ख़ज़ाना |
| विनती | प्रार्थना, निवेदन |
| अनुमान | अटकल, तर्क द्वारा निकाला गया निष्कर्ष |
| चकित | हैरान, आश्चर्यचकित |
| निर्दोष | बेकसूर, दोषरहित |
| आवभगत | अतिथि-सत्कार, स्वागत-सत्कार |
पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे सही उत्तर कौन-सा है? उनके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
- माँ...नहीं — लोककथा में पिता ने अपने बेटों से 'धन संचय करने' को कहा। इसका क्या अर्थ हो सकता है?
- खेती-बारी करना और धन इकट्ठा करना
- ★ पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि का विकास करना
- ऊँट का व्यापार करना
- गाँव छोड़कर किसी नगर में जाकर बसना
- तीनों भाइयों ने अपने ज्ञान और बुद्धि का उपयोग करके ऊँट के बारे में बहुत-कुछ बता दिया। इससे क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
- बुद्धि का प्रयोग करके ऊँट के बारे में सब-कुछ बताया जा सकता है
- ★ समस्या को सुलझाने के लिए ध्यान से निरीक्षण करना महत्वपूर्ण है
- किसी व्यक्ति का ज्ञान, बुद्धि और धन ही सबसे बड़ी ताकत है
- ऊँट के बारे में जानने के लिए दूसरों पर भरोसा करना चाहिए
- राजा ने भाइयों की बुद्धिमत्ता पर विश्वास क्यों किया?
- ★ भाइयों ने अपनी बात को तर्क के साथ समझाया
- राजा को ऊँट के स्वामी की बातों पर संदेह था
- राजा ने स्वयं ऊँट और पेटी की जाँच कर ली थी
- भाइयों ने राजा को अपनी बात में उलझा लिया था
- लोककथा के पात्रों और घटनाओं के आधार पर, राजा के निर्णय के पीछे कौन-सा मूल्य छिपा है?
- दोषी को कड़ा-से-कड़ा दंड देना हर समस्या का सबसे बड़ा समाधान है
- ★ अच्छी तरह जाँच किए बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए
- राजा की प्रत्येक बात और निर्णय को सदा सही माना जाना चाहिए
- ऊँट की चोरी के निर्णय के लिए सेवक की बुद्धि का उपयोग करना चाहिए
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। यह एक समूह-चर्चा गतिविधि है — विद्यार्थी अपने चुने गए उत्तर के पक्ष में पाठ की पंक्तियों का हवाला देकर तर्क प्रस्तुत करें, जैसे "मैंने यह उत्तर चुना क्योंकि पिता स्पष्ट कहते हैं कि रुपये-पैसे के स्थान पर पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि ही असली धन है।"
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
(क) "रुपये-पैसे के स्थान पर तुम्हारे पास पैनी दृष्टि होगी और सोने-चाँदी के स्थान पर तीव्र बुद्धि होगी। ऐसा धन संचित कर लेने पर तुम्हें कभी किसी प्रकार की कमी न रहेगी और तुम दूसरों की तुलना में उन्नीस नहीं रहोगे।"
भावार्थ: पिता कहना चाहते हैं कि ज्ञान और बुद्धि ही वह धन है जो कभी चोरी नहीं हो सकता और जो जीवन में व्यक्ति को दूसरों से पीछे नहीं रहने देता।(ख) "हर वस्तु और स्थिति को पूर्णत: समझने और जानने का प्रयास करो। कुछ भी तुम्हारी दृष्टि से न बच पाए।"
भावार्थ: पिता अपने बेटों को बारीक अवलोकन-शक्ति विकसित करने की सलाह देते हैं ताकि वे किसी भी परिस्थिति की हर छोटी-बड़ी बात को समझ सकें।(ग) "हमने अपने परिवेश को पैनी दृष्टि से देखने और बुद्धि से सोचने के प्रयास में बहुत समय लगाया है।"
भावार्थ: भाई स्पष्ट करते हैं कि उनकी असाधारण अवलोकन-शक्ति कोई जादू नहीं बल्कि निरंतर अभ्यास और परिश्रम का परिणाम है।इस लोककथा में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे स्तंभ 1 में दिए गए हैं। उनके भाव या अर्थ से मिलते-जुलते वाक्य स्तंभ 2 में दिए गए हैं। स्तंभ 1 के वाक्यों को स्तंभ 2 के उपयुक्त वाक्यों से सुमेलित कीजिए—
| स्तंभ 1 | सही मिलान (स्तंभ 2) |
|---|---|
| 1. कुछ समय पश्चात् पिता चल बसे। | थोड़े समय के बाद पिता का देहांत हो गया। |
| 2. हम कहीं भी क्यों न हों, भूखे नहीं मरेंगे। | हम चाहे जहाँ भी हों, हमें खाने के लिए कुछ न कुछ मिल ही जाएगा। |
| 3. घुड़सवार ने तीनों भाइयों को शंका की दृष्टि से देखा। | घोड़े पर सवार व्यक्ति ने तीनों भाइयों को अविश्वास से देखा। |
| 4. बचपन से ही हमें ऐसी आदत पड़ गई है कि हम कुछ भी अपनी दृष्टि से नहीं चूकने देते। | बचपन से ही हमें आदत हो गई है कि हम हर छोटी-बड़ी वस्तु पर ध्यान अवश्य देते हैं। |
| 5. लोगों के आश्चर्य का कोई ठिकाना न था। | लोग इतने अचंभित थे कि उनका आश्चर्य व्यक्त करना कठिन था। |
लोककथा को एक बार फिर ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए—
(क) तीनों भाइयों ने बिना ऊँट को देखे उसके विषय में कैसे बता दिया था?
उन्होंने धूल पर पड़े ऊँट के पैरों के चिह्नों, सड़क के केवल एक ओर चरी गई घास, और ऊँट के बैठने के स्थान पर महिला व बच्चे के जूतों-पैरों के निशान — इन छोटी-छोटी बातों को बारीकी से देखकर तर्कपूर्ण अनुमान लगाया।(ख) आपके अनुसार इस लोककथा में सबसे अधिक महत्व किस बात को दिया गया है — तार्किक सोच, अवलोकन या सत्यवादिता? लोककथा के आधार पर समझाइए।
तीनों बातें आपस में जुड़ी हुई हैं — पहले अवलोकन (चिह्नों को देखना), फिर तार्किक सोच (उन चिह्नों से निष्कर्ष निकालना) और अंत में सत्यवादिता (राजा के सामने भी सच बोलते रहना) — इन तीनों के मेल से ही भाई संकट से बच पाए, इसलिए लोककथा इन तीनों को समान महत्व देती है।(ग) लोककथा में राजा ने पहले भाइयों पर संदेह किया लेकिन बाद में उन्हें निर्दोष माना। राजा की सोच क्यों बदल गई?
जब भाइयों ने बिना देखे पेटी के अंदर के कच्चे अनार के बारे में भी बिलकुल सही अनुमान लगाकर दिखाया, तो राजा को स्पष्ट प्रमाण मिल गया कि यह चोरी नहीं बल्कि असाधारण अवलोकन-शक्ति और बुद्धि का परिणाम है।(घ) ऊँट के स्वामी ने भाइयों पर तुरंत संदेह क्यों किया? आपके विचार से उसे क्या करना चाहिए था जिससे उसे अपना ऊँट मिल जाता?
भाइयों को बिना देखे ऊँट की इतनी सटीक जानकारी होने से घुड़सवार को लगा कि यह जानकारी केवल चोर ही दे सकते हैं। उसे भाइयों की बात ध्यान से सुनकर उनके बताए रास्ते पर जाकर पहले ऊँट को खोज लेना चाहिए था।(ङ) पिता ने बेटों को "दूसरे प्रकार का धन" संचित करने की सलाह क्यों दी? इससे पिता के बारे में क्या-क्या पता चलता है?
पिता के पास बेटों को देने के लिए भौतिक धन-संपत्ति नहीं थी, इसलिए उन्होंने ज्ञान-रूपी धन देना उचित समझा। इससे पता चलता है कि पिता दूरदर्शी, व्यावहारिक और अपने बच्चों के भविष्य के प्रति गंभीर रूप से चिंतित व्यक्ति थे।(च) राजा ने भाइयों की परीक्षा लेने के लिए पेटी का उपयोग किया। इस परीक्षा से राजा के व्यक्तित्व और निर्णय-शैली के बारे में क्या-क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
राजा जल्दबाज़ी में निर्णय देने के बजाय प्रमाण के आधार पर सच्चाई परखने वाला, न्यायप्रिय और बुद्धिमान शासक है, जो अपनी प्रजा के साथ निष्पक्षता से पेश आना चाहता है।(छ) आप इस लोककथा के भाइयों की किस विशेषता को अपनाना चाहेंगे और क्यों?
यह व्यक्तिगत पसंद पर आधारित एक खुला प्रश्न है — विद्यार्थी अपनी पसंद और कारण अपने शब्दों में लिखें, जैसे "मैं उनकी अवलोकन-शक्ति अपनाना चाहूँगा/चाहूँगी क्योंकि इससे रोज़मर्रा की समस्याओं को सुलझाने में मदद मिलती है।"अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—
(क) यदि राजा ने बिना जाँच के भाइयों को दोषी ठहरा दिया होता तो इस लोककथा का क्या परिणाम होता?
तीनों निर्दोष भाइयों को अनुचित दंड मिलता, सच्चाई कभी सामने न आ पाती और लोककथा एक दुखद अंत की ओर बढ़ जाती — यह दर्शाता है कि बिना जाँचे निर्णय लेना कितना अन्यायपूर्ण हो सकता है।(ख) यदि भाइयों ने अनार के बारे में सही अनुमान न लगाया होता तो लोककथा का अंत किस प्रकार होता? अपने विचार व्यक्त करें।
तब राजा का संदेह और गहरा हो जाता और संभवतः भाइयों को चोर मानकर दंडित कर दिया जाता — इस प्रकार लोककथा का अंत सुखद के बजाय दुखद होता।(ग) लोककथा में यदि तीनों भाई ऊँट को खोजने जाते तो उन्हें कौन-कौन-सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता था?
उन्हें अनजान रास्तों में भटकने, समय और ऊर्जा नष्ट होने, तथा ऊँट न मिलने पर भी घुड़सवार के संदेह का सामना करने जैसी कठिनाइयाँ झेलनी पड़ सकती थीं।(घ) यदि राजा के स्थान पर आप होते तो भाइयों की परीक्षा लेने के लिए किस प्रकार के सवाल या गतिविधियाँ करते? अपनी कल्पना साझा करें।
यह एक रचनात्मक/कल्पनाशील प्रश्न है — विद्यार्थी अपनी कल्पना से नई परीक्षा-विधि सुझाएँ, जैसे किसी ढकी हुई वस्तु के आकार, भार या रंग का अनुमान लगवाना।नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में 'बुद्धि' से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए—
'बुद्धि' से जुड़े शब्द: मस्तिष्क, चतुराई, समझदारी, विवेक, तर्कशक्ति, प्रज्ञा, समझ (विद्यार्थी समूह-चर्चा से इनमें से कुछ या अन्य उपयुक्त शब्द भी लिख सकते हैं)।लोककथा के लिखित रूप में आने से पहले कहानियों का प्रचलन मौखिक रूप में ही पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता था। अब आप अपने समूह के साथ मिलकर इस लोककथा को रोचक ढंग से सुनाइए। इसे प्रभावशाली बनाने के सुझाव: स्वर में उतार-चढ़ाव, भावनाओं की अभिव्यक्ति, पात्रों के लिए अलग-अलग स्वर, हाथों और शरीर का उपयोग, हास्य का प्रयोग, रोचक मोड़ पर रुकना, तथा संवादों को स्पष्ट व स्वाभाविक बनाना।
यह एक मौखिक प्रस्तुतीकरण गतिविधि है — विद्यार्थी समूह में मिलकर उपर्युक्त सुझावों का पालन करते हुए कथा सुनाने का अभ्यास करें।
नीचे दिए गए वाक्य को ध्यान से पढ़िए— "भाइयों जवाब दिया।" यह वाक्य कुछ अटपटा लग रहा है न? अब इसे पढ़िए— "भाइयों ने जवाब दिया।" दूसरे वाक्य में 'ने' शब्द 'भाइयों' और 'जवाब दिया' के बीच संबंध जोड़ रहा है। संज्ञा या सर्वनाम के साथ प्रयुक्त होने वाले शब्दों के ऐसे रूपों को कारक या परसर्ग कहते हैं।
| कारक | चिह्न (परसर्ग) | पहचान |
|---|---|---|
| कर्ता कारक | ने | क्रिया करने वाला |
| कर्म कारक | को | जिस पर क्रिया का प्रभाव पड़े |
| करण कारक | से, के द्वारा | क्रिया करने का साधन |
| संप्रदान कारक | को, के लिए | जिसके लिए क्रिया हो |
| अपादान कारक | से (अलगाव) | जहाँ से अलगाव हो |
| संबंध कारक | का, की, के | दो शब्दों में संबंध |
| अधिकरण कारक | में, पर | क्रिया का आधार/स्थान |
| संबोधन कारक | हे, हो, अरे | पुकारने/संबोधित करने के लिए |
नीचे दिए गए वाक्यों में कारक लिखकर इन्हें पूरा कीजिए—
- "हमने तो तुम्हारे ऊँट को देखा तक नहीं", भाइयों ने परेशान होते हुए कहा।
- "मैं अपने रेवड़ों को पहाड़ों पर लिये जा रहा था", उसने कहा, "और मेरी पत्नी मेरे छोटे-से बेटे के साथ एक बड़े-से ऊँट पर मेरे पीछे-पीछे आ रही थी।"
- राजा ने उसी समय अपने मंत्री को बुलाया और उसके कान में कुछ फुसफुसाया।
- यह सुनकर राजा ने पेटी को पास लाने का आदेश दिया। सेवकों ने तुरंत आदेश पूरा किया। राजा ने सेवकों को पेटी खोलने के लिए कहा।
कल्पना कीजिए कि आप इस लोककथा के वह घुड़सवार हैं जिसका ऊँट खो गया है। आप अपने ऊँट को खोजने के लिए एक सूचना कागज़ पर लिखकर पूरे शहर में जगह-जगह चिपकाना चाहते हैं। अपनी कल्पना और लोककथा में दी गई जानकारी के आधार पर एक सूचनापत्र लिखिए।
यह एक रचनात्मक लेखन-कार्य है; नीचे एक सुझावित/नमूना उत्तर दिया गया है—
मेरा एक बहुमूल्य ऊँट पहाड़ी क्षेत्र के निकट कहीं खो गया है। यह ऊँट आकार में बहुत बड़ा है और एक आँख से नहीं देख पाता। जिस समय यह खोया, उस पर एक महिला और एक छोटा बच्चा सवार थे। जिस किसी को भी इस ऊँट के बारे में कोई जानकारी मिले, कृपया नीचे दिए गए पते पर तुरंत संपर्क करें। सही सूचना देने वाले को उचित पुरस्कार दिया जाएगा।
— एक चिंतित ऊँट-स्वामी
1. लोककथा में तीन भाइयों की पैनी दृष्टि की बात कही गई है। क्या आपने कभी अपनी पैनी दृष्टि का प्रयोग किसी समस्या को हल करने के लिए किया है? उस समस्या और आपके द्वारा दिए गए हल के विषय में लिखिए।
यह एक व्यक्तिगत अनुभव-आधारित प्रश्न है — विद्यार्थी अपने जीवन की किसी घटना का उदाहरण देकर बताएँ कि बारीकी से ध्यान देने से उन्होंने कोई समस्या कैसे सुलझाई।2. लोककथा में बताया गया है कि भाइयों ने "बचपन से हर वस्तु पर ध्यान देने की आदत डाली।" यदि आपने ऐसा किया है तो आपको अपने जीवन में इसके क्या-क्या लाभ मिलते हैं?
बारीकी से ध्यान देने की आदत से समस्याओं को जल्दी समझने, सही निर्णय लेने और गलतियों से बचने में सहायता मिलती है।3. लोककथा में भाइयों को यात्रा करते समय अनेक कठिनाइयाँ आईं, जैसे— भूख, थकान और पैरों के छाले। आप अपने दैनिक जीवन में किन-किन कठिनाइयों का सामना करते हैं? लिखिए।
विद्यार्थी अपने अनुभव के आधार पर लिखें, जैसे पढ़ाई का दबाव, समय-प्रबंधन की कठिनाई आदि।4. भाइयों ने बिना देखे ही ऊँट के बारे में सही-सही बातें बताईं। क्या आपको लगता है कि अनुभव और समझ से देखे बिना भी सही निर्णय लिया जा सकता है? क्या आपने कभी ऐसा किया है?
हाँ, अनुभव और तार्किक सोच से देखे बिना भी सही निष्कर्ष निकाला जा सकता है, जैसे आवाज़ या परिस्थिति से किसी बात का अनुमान लगाना — विद्यार्थी अपना उदाहरण दें।5. जब ऊँट के स्वामी ने भाइयों पर शक किया तो भाइयों ने बिना गुस्सा किए शांति से उत्तर दिया। क्या आपको लगता है कि कभी किसी को संदेह होने पर हमें भी शांत रहकर उत्तर देना चाहिए? क्या आपने कभी ऐसी स्थिति का सामना किया है? ऐसे में आपने क्या किया?
हाँ, शांत रहकर स्पष्टीकरण देना स्थिति को बिगड़ने से बचाता है — विद्यार्थी अपने अनुभव के आधार पर उत्तर दें।6. राजा ने भाइयों की बुद्धिमानी देखकर बहुत आश्चर्य व्यक्त किया। क्या आपको कभी किसी की सोच, समझ या किसी विशेष कौशल को देखकर आश्चर्य हुआ है? क्या आपने कभी किसी से कुछ ऐसा सीखा है जो आपके लिए बिलकुल नया और चौंकाने वाला हो?
विद्यार्थी अपने जीवन के किसी व्यक्ति (मित्र, परिजन, शिक्षक) के उदाहरण के आधार पर उत्तर दें।7. लोककथा में पिता ने अपने बेटों को यह सलाह दी कि वे समझ और ज्ञान जमा करें। क्या आपको कभी किसी बड़े व्यक्ति से ऐसी कोई सलाह मिली है जो आपके जीवन में उपयोगी रही हो? क्या आप भी अपने अनुभव से किसी को ऐसी सलाह देंगे?
विद्यार्थी अपने माता-पिता/शिक्षक से मिली किसी सलाह का उल्लेख करें और उसका महत्व बताएँ।8. भाइयों ने अपने ऊपर लगे आरोपों के होते हुए भी सदा सच्चाई का साथ दिया। क्या आपको लगता है कि सदा सच बोलना महत्वपूर्ण है, भले ही स्थिति कठिन क्यों न हो? क्या आपको किसी समय ऐसा लगा कि आपकी सच्चाई ने आपको समस्याओं से बाहर निकाला हो?
हाँ, सच बोलना दीर्घकाल में विश्वास बनाए रखता है — विद्यार्थी अपने अनुभव के आधार पर उदाहरण दें।"बचपन से ही हमें ऐसी आदत पड़ गई है कि हम किसी वस्तु को अपनी दृष्टि से नहीं चूकने देते। हमने वस्तुओं को पैनी दृष्टि से देखने और बुद्धि से सोचने के प्रयास में बहुत समय लगाया है।" इस लोककथा में तीनों भाई आसपास की प्रत्येक घटना, वस्तु आदि को ध्यान से देखते, सुनते, सूँघते और अनुभव करते हैं अर्थात् अपनी ज्ञानेंद्रियों और बुद्धि का पूरा उपयोग करते हैं। ज्ञानेंद्रियाँ पाँच होती हैं— आँख, कान, नाक, जीभ और त्वचा।
इसके अभ्यास हेतु पाठ्यपुस्तक में दो गतिविधियाँ सुझाई गई हैं: (क) 'हाँ या नहीं' प्रश्न-उत्तर खेल — एक विद्यार्थी किसी वस्तु/स्थान का नाम चुनता है और शेष विद्यार्थी अधिकतम 20 हाँ/नहीं प्रश्न पूछकर उसका अनुमान लगाते हैं। (ख) 'स्पर्श, गंध और स्वाद से पहचानना' — आँखों पर पट्टी बाँधकर केवल स्पर्श, गंध या स्वाद के आधार पर वस्तु की पहचान करना। ये दोनों कक्षा में समूह के साथ की जाने वाली मौखिक/व्यावहारिक गतिविधियाँ हैं।
पहेली 1 — कौन है यह प्राणी? संकेत: इसकी लंबी पूँछ होती है जो पेड़ों की शाखाओं के चारों ओर लिपटी रहती है। इसका मुख्य आहार कीट और छोटे जीव होते हैं जिन्हें यह चुपके से पकड़ता है। यह प्राणी अपने परिवेश में घुल-मिल जाता है और अपनी रंगत बदल सकता है। इसके पास तेज़ आँखें होती हैं जो चारों दिशाओं में देख सकती हैं।
उत्तर: गिरगिट। (गिरगिट की पूँछ पेड़ की डालियों में लिपटती है, वह कीट खाता है, रंग बदलकर परिवेश में घुल-मिल जाता है और उसकी दोनों आँखें स्वतंत्र रूप से चारों ओर घूम सकती हैं।)पहेली 2 — रंगीन डिब्बे: एक मेज़ पर चार रंगीन डिब्बे बराबर-बराबर रखे हैं— लाल, हरा, नीला और पीला। संकेत: (1) लाल डिब्बा नीले डिब्बे के पास है। (2) हरा डिब्बा पीले डिब्बे के पास नहीं है। (3) पीला डिब्बा लाल डिब्बे के पास नहीं है। (4) हरा डिब्बा लाल डिब्बे के पास है। बताइए, पीले डिब्बे के बराबर में कौन-सा डिब्बा है?
उत्तर: नीला डिब्बा। (क्रम इस प्रकार बनता है — हरा, लाल, नीला, पीला — जिसमें सभी चारों संकेत सही बैठते हैं; अतः पीले डिब्बे के ठीक बराबर में नीला डिब्बा है।)पाठ्यपुस्तक में दिए गए लिंकों की सहायता से विद्यार्थी अन्य कई रोचक लोककथाएँ देख-सुन सकते हैं (जैसे 'सुनो लोककथा', 'दुनिया की छत', 'भूल चूक लेनी देनी' आदि)। यह एक स्वतंत्र अन्वेषण-गतिविधि है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में लोककथाओं के प्रति रुचि बढ़ाना है।
अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न
(अ) बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
- 'तीन बुद्धिमान' पाठ किस विधा की रचना है?
- (क) कविता
- (ख) लोककथा ✓
- (ग) नाटक
- (घ) निबंध
- पिता ने बेटों को किस प्रकार का धन संचित करने को कहा?
- (क) रुपये-पैसे
- (ख) सोना-चाँदी
- (ग) पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि ✓
- (घ) भूमि-संपत्ति
- पिता की मृत्यु के बाद बेटों ने क्या निर्णय लिया?
- (क) गाँव में ही रहने का
- (ख) यात्रा पर निकलने का ✓
- (ग) व्यापार करने का
- (घ) राजा के पास जाने का
- तीनों भाई कितने दिनों तक लगातार चलते रहे?
- (क) तीस दिन
- (ख) पैंतीस दिन
- (ग) चालीस दिन ✓
- (घ) पचास दिन
- सबसे बड़े भाई ने ऊँट के बारे में सबसे पहले क्या अनुमान लगाया?
- (क) यहाँ से एक बहुत बड़ा ऊँट गया है ✓
- (ख) ऊँट एक आँख से नहीं देख पाता
- (ग) ऊँट पर महिला सवार थी
- (घ) ऊँट खो गया है
- मझले भाई ने ऊँट के विषय में क्या अनुमान लगाया?
- (क) ऊँट बड़ा है
- (ख) ऊँट एक आँख से नहीं देख पाता ✓
- (ग) ऊँट पर बच्चा सवार था
- (घ) ऊँट भाग गया है
- सबसे छोटे भाई ने ऊँट पर किसे सवार बताया?
- (क) राजा को
- (ख) एक महिला और बच्चे को ✓
- (ग) घुड़सवार को
- (घ) चरवाहे को
- घुड़सवार ने भाइयों से सबसे पहले क्या पूछा?
- (क) तुम कौन हो
- (ख) तुम किसी खोई हुई वस्तु को ढूँढ़ रहे हो न? ✓
- (ग) तुम कहाँ जा रहे हो
- (घ) तुम्हारा नाम क्या है
- घुड़सवार तीनों भाइयों को कहाँ ले गया?
- (क) अपने घर
- (ख) राजा के भवन में ✓
- (ग) बाज़ार में
- (घ) जंगल में
- घुड़सवार ने राजा को क्या शिकायत की?
- (क) भाइयों ने उसे रास्ता नहीं बताया
- (ख) भाइयों ने उसका ऊँट चुरा लिया है ✓
- (ग) भाइयों ने उसकी पत्नी को परेशान किया
- (घ) भाइयों ने झूठ बोला
- भाइयों ने राजा को अपनी बात किस आधार पर सिद्ध की?
- (क) गवाहों के आधार पर
- (ख) तर्क और स्पष्टीकरण के आधार पर ✓
- (ग) धन देकर
- (घ) राजा से विनती करके
- राजा ने भाइयों की सच्चाई जाँचने के लिए क्या किया?
- (क) उन्हें जेल भेज दिया
- (ख) एक पेटी में वस्तु छिपाकर मँगवाई ✓
- (ग) उन्हें ऊँट खोजने भेजा
- (घ) मंत्री से पूछताछ करवाई
- पेटी में क्या रखा गया था?
- (क) सोने का सिक्का
- (ख) एक छोटा-सा कच्चा अनार ✓
- (ग) एक पत्थर
- (घ) एक फूल
- सबसे बड़े भाई ने पेटी के भीतर की वस्तु के गोल होने का अनुमान कैसे लगाया?
- (क) पेटी हल्की थी और अंदर वस्तु के लुढ़कने की ध्वनि सुनाई दी ✓
- (ख) उसने पेटी खोलकर देखा था
- (ग) राजा ने बता दिया था
- (घ) मंत्री ने संकेत दिया था
- मझले भाई ने अनार होने का अनुमान किस आधार पर लगाया?
- (क) पेटी की गंध से
- (ख) राजा के महल के आसपास अनार के पेड़ होने से ✓
- (ग) पेटी के रंग से
- (घ) सेवकों के व्यवहार से
- सबसे छोटे भाई ने अनार के कच्चे होने का अनुमान कैसे लगाया?
- (क) पेटी छूकर
- (ख) उद्यान में लगे सभी अनार अभी कच्चे होने से (खिड़की से देखकर) ✓
- (ग) राजा से पूछकर
- (घ) आवाज़ सुनकर
- राजा ने अंत में भाइयों के बारे में क्या कहा?
- (क) वे धोखेबाज़ हैं
- (ख) उनके पास बुद्धि का बहुत बड़ा कोष है ✓
- (ग) उन्हें दंड मिलना चाहिए
- (घ) वे झूठे हैं
- राजा ने भाइयों को अंततः क्या दिया?
- (क) धन-संपत्ति
- (ख) अपने दरबार में स्थान ✓
- (ग) एक नया ऊँट
- (घ) राज्य का एक भाग
- इस लोककथा से हमें मुख्य रूप से क्या शिक्षा मिलती है?
- (क) धन ही सबसे बड़ी शक्ति है
- (ख) पैनी दृष्टि और बुद्धि से बड़ी-से-बड़ी समस्या सुलझाई जा सकती है ✓
- (ग) राजाओं पर भरोसा नहीं करना चाहिए
- (घ) यात्रा नहीं करनी चाहिए
- 'निर्धन' शब्द का क्या अर्थ है?
- (क) धनवान
- (ख) गरीब ✓
- (ग) बुद्धिमान
- (घ) चतुर
- 'चरवाहा' शब्द का प्रयोग पाठ में किस अर्थ में हुआ है?
- (क) पशु चराने वाला ✓
- (ख) खेत जोतने वाला
- (ग) व्यापार करने वाला
- (घ) शिकार करने वाला
- 'शंका' शब्द का समानार्थी शब्द है?
- (क) विश्वास
- (ख) संदेह ✓
- (ग) प्रसन्नता
- (घ) क्रोध
- पाठ के अनुसार धूल पर पैरों के चिह्नों से बड़े भाई ने क्या जाना?
- (क) ऊँट का रंग
- (ख) एक बहुत बड़ा ऊँट वहाँ से गया है ✓
- (ग) ऊँट की उम्र
- (घ) ऊँट किसका है
- सड़क के किनारे घास की स्थिति से किस बात का पता चला?
- (क) ऊँट भूखा था
- (ख) ऊँट एक आँख से नहीं देख पाता (एक ओर की घास ही चरी थी) ✓
- (ग) ऊँट बीमार था
- (घ) ऊँट तेज़ चल रहा था
- यह लोककथा किस प्रकार की शिक्षा पर आधारित है?
- (क) अवलोकन और तर्कशक्ति ✓
- (ख) धन-संचय
- (ग) युद्ध-कौशल
- (घ) राजनीति
(ब) अति लघु उत्तरीय प्रश्न
- 'तीन बुद्धिमान' किस प्रकार की रचना है?
लोककथा। - पिता के पास बेटों को देने के लिए क्या नहीं था?
रुपया-पैसा और सोना-चाँदी। - पिता ने बेटों को किस प्रकार का धन संचित करने को कहा?
पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि रूपी धन। - पिता की मृत्यु के बाद बेटों ने क्या किया?
वे यात्रा पर निकल पड़े। - भाई कितने दिनों तक चलते रहे?
चालीस दिनों तक। - सबसे बड़े भाई ने सबसे पहले क्या अनुमान लगाया?
कि वहाँ से एक बहुत बड़ा ऊँट गया है। - मझले भाई ने ऊँट के बारे में क्या कहा?
कि वह एक आँख से नहीं देख पाता। - सबसे छोटे भाई ने ऊँट पर किसे सवार बताया?
एक महिला और एक बच्चे को। - घुड़सवार ने भाइयों पर क्या आरोप लगाया?
ऊँट चुराने का। - घुड़सवार भाइयों को कहाँ ले गया?
राजा के भवन में। - राजा ने भाइयों की सच्चाई जाँचने के लिए क्या मँगवाया?
एक पेटी। - पेटी में क्या रखा था?
एक छोटा-सा कच्चा अनार। - बड़े भाई ने पेटी में गोल वस्तु होने का अनुमान कैसे लगाया?
अंदर वस्तु के लुढ़कने की आवाज़ से। - मझले भाई ने अनार होने का अनुमान किस आधार पर लगाया?
महल के आसपास अनार के पेड़ होने से। - छोटे भाई ने अनार के कच्चे होने का अनुमान कैसे लगाया?
उद्यान के सभी अनार अभी कच्चे होने से। - राजा ने भाइयों को अंत में क्या कहा?
कि उनके पास बुद्धि का बड़ा कोष है। - राजा ने भाइयों को कहाँ स्थान दिया?
अपने दरबार में। - 'निर्धन' का विलोम शब्द बताइए।
धनवान/धनी। - भाइयों ने अपनी सफ़ाई किस आधार पर दी?
तर्क और स्पष्टीकरण के आधार पर। - लोककथा से मुख्य शिक्षा क्या मिलती है?
पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि से बड़ी-से-बड़ी समस्याएँ भी सुलझाई जा सकती हैं।
(स) लघु उत्तरीय प्रश्न
- पिता ने अपने बेटों को कौन-सी सीख दी और क्यों?
पिता ने बेटों को धन-संपत्ति के बजाय पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि रूपी धन संचित करने की सीख दी, क्योंकि उसके पास देने के लिए भौतिक संपत्ति नहीं थी और वह चाहता था कि उसके बेटे जीवन में कभी असहाय न रहें। - तीनों भाई यात्रा पर क्यों निकले?
पिता की मृत्यु के बाद गाँव में करने के लिए कुछ विशेष न होने के कारण उन्होंने आत्मनिर्भर बनने और जगत देखने के उद्देश्य से यात्रा पर निकलने का निर्णय लिया। - घुड़सवार ने भाइयों पर संदेह क्यों किया?
भाइयों ने बिना ऊँट को देखे ही उसके बारे में इतनी सटीक जानकारी दे दी कि घुड़सवार को लगा कि यह जानकारी केवल ऊँट चुराने वाले ही दे सकते हैं। - भाइयों ने ऊँट के बारे में जो अनुमान लगाए, वे कितने सटीक निकले?
भाइयों के तीनों अनुमान — ऊँट का बड़ा आकार, एक आँख से न देख पाना, और उस पर महिला-बच्चे का सवार होना — पूरी तरह सही निकले, जिसकी पुष्टि स्वयं घुड़सवार ने की। - राजा ने भाइयों की सच्चाई की जाँच किस प्रकार की?
राजा ने एक पेटी में कच्चा अनार छिपाकर मँगवाई और भाइयों से बिना देखे उसके भीतर की वस्तु के बारे में बताने को कहा, ताकि उनकी अवलोकन-शक्ति और सच्चाई परखी जा सके। - पेटी की परीक्षा में भाइयों ने अपनी बुद्धिमानी कैसे सिद्ध की?
भाइयों ने पेटी की हल्की भारी होने की स्थिति, अंदर वस्तु की आवाज़, पेटी के आने की दिशा और बगीचे में अनार के कच्चे होने जैसी बारीक बातों को जोड़कर सही उत्तर दे दिया। - भाइयों की सफलता के पीछे कौन-सी विशेषताएँ थीं?
उनकी असाधारण अवलोकन-शक्ति, तार्किक सोच, धैर्य और हर परिस्थिति में सच बोलते रहने का साहस ही उनकी सफलता का मुख्य कारण था। - इस लोककथा में राजा का चरित्र कैसा दर्शाया गया है?
राजा को एक न्यायप्रिय, जिज्ञासु और विवेकशील शासक के रूप में दर्शाया गया है, जो जल्दबाज़ी में निर्णय लेने के बजाय प्रमाण के आधार पर सच्चाई परखता है। - भाइयों ने ऊँट के स्वामी के आरोप का उत्तर कैसे दिया?
भाइयों ने शांतिपूर्वक और विनम्रता से यह स्पष्ट किया कि उन्होंने ऊँट को कभी नहीं देखा और अपनी बात को तर्क सहित समझाने का प्रयास किया। - लोककथा के अंत में भाइयों को क्या पुरस्कार मिला और क्यों?
भाइयों को राजा के दरबार में सम्मानजनक स्थान मिला, क्योंकि उन्होंने अपनी असाधारण अवलोकन-शक्ति और बुद्धि से राजा को गहराई से प्रभावित किया। - 'मेरे बेटो! हमारे पास न तो रुपया-पैसा है' — इस कथन से पिता की मनोदशा पर प्रकाश डालिए।
इस कथन से पता चलता है कि पिता आर्थिक रूप से विवश होते हुए भी अपने बेटों के भविष्य के प्रति गंभीर और चिंतित था, इसलिए उसने भौतिक धन के अभाव की भरपाई ज्ञान-रूपी धन से करने की कोशिश की। - भाइयों ने यात्रा के दौरान किन कठिनाइयों का सामना किया?
उन्हें सुनसान-वीरान घाटियाँ और ऊँचे पहाड़ पार करने पड़े, भोजन समाप्त हो गया, वे थककर चूर हो गए और उनके पैरों में छाले पड़ गए। - राजा ने मंत्री को बुलाकर क्या आदेश दिया?
राजा ने मंत्री के कान में फुसफुसाकर भाइयों की सच्चाई परखने हेतु एक पेटी में कोई छोटी वस्तु छिपाकर मँगवाने का गुप्त आदेश दिया। - भाइयों ने पेटी की वस्तु का वर्णन किन चरणों में किया?
पहले बड़े भाई ने बताया कि वस्तु छोटी और गोल है, फिर मझले भाई ने बताया कि वह अनार है, और अंत में छोटे भाई ने बताया कि वह कच्चा है। - इस लोककथा में 'सच्चाई' का क्या महत्व दिखाया गया है?
आरोप और संदेह के बावजूद भाइयों ने कभी झूठ का सहारा नहीं लिया, और अंततः उनकी सच्चाई ही उन्हें न्याय दिलाने का आधार बनी। - राजा ने ऊँट के स्वामी से अंत में क्या कहा?
राजा ने कहा कि ये लोग चोर नहीं बल्कि बहुत बुद्धिमान हैं और उसे इन्हीं के बताए रास्ते पर जाकर अपना ऊँट खोजना चाहिए। - भाइयों के उत्तरों से राजा पर क्या प्रभाव पड़ा?
राजा भाइयों की असाधारण अवलोकन-शक्ति और तर्कशक्ति से इतना प्रभावित हुआ कि उसने उन्हें अपने दरबार में सम्मानपूर्वक स्थान दे दिया। - लोककथा में वर्णित यात्रा-वर्णन (चालीस दिन, घाटियाँ, पहाड़) का क्या उद्देश्य है?
यह वर्णन भाइयों के धैर्य, संघर्षशीलता और दृढ़ संकल्प को उजागर करता है तथा कथा को यथार्थवादी बनाता है। - 'हम अपनी आँखों और बुद्धि से काम लेना जानते हैं' — यह कथन भाइयों के बारे में क्या दर्शाता है?
यह कथन दर्शाता है कि भाइयों को अपनी अवलोकन-शक्ति और तर्कशक्ति पर पूर्ण आत्मविश्वास है, जो उनके निरंतर अभ्यास का परिणाम है। - इस लोककथा को 'शिक्षाप्रद' क्यों कहा जा सकता है?
क्योंकि यह अवलोकन-शक्ति, तर्कशक्ति, धैर्य और सच्चाई जैसे गुणों के महत्व को एक रोचक कथा के माध्यम से सिखाती है।
(द) महत्वपूर्ण प्रश्न
- इस लोककथा के आधार पर बताइए कि अवलोकन-शक्ति (observation) जीवन में कैसे उपयोगी हो सकती है।
अवलोकन-शक्ति हमें छोटी-छोटी बारीकियों से बड़ी जानकारी निकालने में सक्षम बनाती है — जैसे भाइयों ने पैरों के चिह्नों और घास की स्थिति से ऊँट के बारे में सटीक अनुमान लगाया। यह क्षमता पढ़ाई, समस्या-समाधान और दैनिक जीवन के निर्णयों में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है। - 'तीन बुद्धिमान' लोककथा से मिलने वाली शिक्षा को अपने जीवन के किसी अनुभव से जोड़कर समझाइए।
यह एक खुला/व्यक्तिगत प्रश्न है — विद्यार्थी अपने जीवन के किसी अनुभव को इस बात से जोड़ें कि ध्यान से देखने-समझने या सच बोलने से उन्हें कैसे लाभ हुआ। - यदि राजा भाइयों की परीक्षा नहीं लेता तो लोककथा का अंत किस प्रकार भिन्न हो सकता था?
तब भाइयों की सच्चाई कभी सिद्ध न हो पाती, संभवतः उन्हें दोषी मानकर दंडित कर दिया जाता, और कथा एक अन्यायपूर्ण एवं दुखद मोड़ ले लेती। - भाइयों के इस कथन 'हम अपनी आँखों और बुद्धि से काम लेना जानते हैं' का विस्तार से विश्लेषण कीजिए।
यह कथन भाइयों के आत्मविश्वास, दीर्घकालिक अभ्यास और अपनी क्षमताओं पर स्पष्ट समझ को दर्शाता है। यह बताता है कि उनकी सूझबूझ कोई जादुई शक्ति नहीं बल्कि निरंतर सजगता और चिंतन का परिणाम है, जिसे कोई भी अभ्यास से प्राप्त कर सकता है। - इस लोककथा में न्याय और सच्चाई के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
कथा दिखाती है कि आरोप कितने भी गंभीर क्यों न हों, सच्चाई पर दृढ़ रहने और प्रमाण देने से न्याय अवश्य मिलता है; वहीं राजा का चरित्र यह सिखाता है कि निष्पक्ष जाँच के बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए। - लोककथा की भाषा-शैली (संवाद-प्रधान शैली) की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
यह कथा मुख्यतः संवादों के माध्यम से आगे बढ़ती है, जिससे पात्रों के विचार और भावनाएँ सीधे पाठक तक पहुँचती हैं; सरल-सहज भाषा और तार्किक क्रम कथा को रोचक व प्रवाहमय बनाते हैं। - पिता के चरित्र का मूल्यांकन कीजिए — वे अपने बेटों को कैसा जीवन-दर्शन देना चाहते थे?
पिता एक दूरदर्शी, व्यावहारिक और चिंतनशील व्यक्ति के रूप में सामने आते हैं, जो भौतिक संपत्ति से अधिक ज्ञान और बुद्धि को स्थायी व मूल्यवान संपत्ति मानते हैं — यही जीवन-दर्शन वे अपने बेटों को देना चाहते थे। - राजा के व्यक्तित्व की उन विशेषताओं का उल्लेख कीजिए जो इस कथा में उभरकर आती हैं।
राजा जिज्ञासु, न्यायप्रिय, धैर्यवान और तर्कसंगत है — वह तुरंत निर्णय देने के बजाय ठोस प्रमाण जुटाकर सच्चाई परखता है, और गुणी व्यक्तियों को पहचानकर उचित सम्मान देना भी जानता है। - 'धन-संपत्ति की अपेक्षा बुद्धि अधिक मूल्यवान है' — इस कथन पर लोककथा के आधार पर अपने विचार लिखिए।
लोककथा इस कथन की पुष्टि करती है — निर्धन भाइयों के पास धन नहीं था, फिर भी उनकी बुद्धि ने उन्हें संकट से उबारा और राजदरबार में सम्मान दिलाया, जो यह सिद्ध करता है कि बुद्धि एक ऐसी संपत्ति है जो कभी छिन नहीं सकती। - इस लोककथा और अन्य ऐसी लोककथाओं (जिनमें बुद्धिमानी से समस्या सुलझाई जाती है) के बीच समानता स्पष्ट कीजिए।
विश्व की कई लोककथाओं में नायक धन-बल के बजाय बुद्धि-बल से विजय पाते हैं (जैसे पंचतंत्र की कथाएँ); इस लोककथा में भी भाई शारीरिक शक्ति या धन के बजाय केवल अवलोकन और तर्क से सम्मान अर्जित करते हैं, जो इस सार्वभौमिक विषय (universal theme) को दर्शाता है।
माइंड मैप
- विधा — लोककथा
- ATU 655 प्रकार
- 'सेरेंडिप' कथा-परंपरा से जुड़ाव
- निर्धन पिता
- तीन बुद्धिमान भाई
- घुड़सवार (ऊँट-स्वामी)
- न्यायप्रिय राजा
- पिता की सीख
- ऊँट का अनुमान
- राजदरबार में अभियोग
- पेटी की परीक्षा
- अवलोकन-शक्ति
- तर्कशक्ति व सच्चाई
- बुद्धि सबसे बड़ा धन
- संवाद-प्रधान शैली
- सरल कथात्मक भाषा
- नाटकीय मोड़
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
'तीन बुद्धिमान' किस कक्षा और पाठ्यपुस्तक का पाठ है?
यह कक्षा 7 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक 'मल्हार' का दूसरा पाठ है।
'तीन बुद्धिमान' किस विधा की रचना है?
यह एक लोककथा (folk tale) है, जिसका कोई एक निश्चित लेखक नहीं है — यह मौखिक परंपरा से चली आ रही है।
कहानी में तीन भाई किस प्रकार अपनी बुद्धिमानी सिद्ध करते हैं?
वे बिना किसी वस्तु को सीधे देखे, केवल सूक्ष्म चिह्नों और परिस्थितियों के अवलोकन से उसके बारे में सटीक अनुमान लगाकर अपनी असाधारण अवलोकन-शक्ति और तर्कशक्ति सिद्ध करते हैं।
लोककथा का केंद्रीय संदेश क्या है?
केंद्रीय संदेश यह है कि पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि ही सच्चा और स्थायी धन है, तथा किसी को दोषी ठहराने से पहले पूरी जाँच-पड़ताल आवश्यक है।
क्या यह कथा किसी अन्य प्रसिद्ध विश्व-लोककथा से जुड़ी है?
हाँ, इसका कथानक विश्वप्रसिद्ध फ़ारसी परंपरा की कथा 'सेरेंडिप के तीन राजकुमार' (The Three Princes of Serendip) से मिलता-जुलता है, जिससे अंग्रेज़ी का शब्द 'serendipity' भी जन्मा है।
परीक्षा की दृष्टि से इस पाठ के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु कौन-से हैं?
पाठ का सारांश (ऊँट-प्रसंग व पेटी-प्रसंग), पात्रों की भूमिका, कारक-व्याकरण, कठिन शब्दों के अर्थ, तथा केंद्रीय संदेश (अवलोकन-शक्ति व सच्चाई का महत्व) — ये सभी बिंदु परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें