जलाते चलो
द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी की प्रेरक कविता — आशा, प्रयास और स्नेह के दीये सदा जलाए रखने का संदेश
1कवि से परिचय
द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी (1916–1998) हिंदी के प्रसिद्ध कवि थे। बाल साहित्य के चर्चित रचनाकारों में उनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उन्होंने बच्चों के लिए बहुत-सी सुंदर रचनाएँ लिखीं।
उनके द्वारा लिखित 'हम सब सुमन एक उपवन के' जैसे गीत आज भी बहुत लोकप्रिय हैं।
2पाठ परिचय
प्रस्तुत कविता 'जलाते चलो' में कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी मनुष्य को स्नेह और प्रेम से भरे दीये निरंतर जलाते रहने की प्रेरणा देते हैं। कवि के अनुसार भले ही विज्ञान अंधकार को दूर करने में सक्षम हो, परंतु असली अंधकार तो मन के अंदर के स्वार्थ और द्वेष का है, जिसे केवल सच्चे स्नेह और निःस्वार्थ प्रयास से ही दूर किया जा सकता है। कविता आशा और उत्साह से भरी है — यह विश्वास दिलाती है कि यदि धरती पर एक भी दीया (एक भी अच्छाई) शेष रहेगा, तो अंधकार-भरी रात के बाद सुंदर सवेरा अवश्य आएगा।
3मूल पाठ
जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर
कभी तो धरा का अँधेरा मिटेगा।
भले शक्ति विज्ञान में है निहित वह
कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी,
मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में
घिरी आ रही है अमावस निशा-सी।
बिना स्नेह विद्युत-दिये जल रहे जो
बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा।।
जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की
चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी,
तिमिर की सरित पार करने तुम्हीं ने
बना दीप की नाव तैयार की थी।
बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर
कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा।।
युगों से तुम्हीं ने तिमिर की शिला पर
दिये अनगिनत हैं निरंतर जलाए,
समय साक्षी है कि जलते हुए दीप
अनगिन तुम्हारे पवन ने बुझाए।
मगर बुझ स्वयं ज्योति जो दे गए वे
उसी से तिमिर को उजेला मिलेगा।।
दिये और तूफ़ान की यह कहानी
चली आ रही और चलती रहेगी,
जली जो प्रथम बार लौ दीप की
स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी।
रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि
कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।।
— द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
4सरल व्याख्या (भावार्थ)
भाग 1 — कवि का आह्वान
कवि सभी मनुष्यों का आह्वान करते हुए कहते हैं कि हमें प्रेम और स्नेह से भरे दीये निरंतर जलाते रहना चाहिए। कवि को पूर्ण विश्वास है कि यदि हम यह प्रयास लगातार करते रहेंगे, तो एक-न-एक दिन धरती का अँधेरा (अर्थात दुख, द्वेष और बुराई) अवश्य मिट जाएगा।
भाग 2 — विज्ञान की शक्ति और असली अंधकार
कवि कहते हैं कि विज्ञान में इतनी शक्ति निहित है कि वह अमावस्या की काली रात को भी पूर्णिमा जैसा उजला बना सकता है, अर्थात बिजली आदि आविष्कारों से रात को भी दिन जैसा उजाला किया जा सकता है। फिर भी आज संसार में दिन के उजाले में भी मानो अमावस्या जैसी काली रात का अंधकार (द्वेष, स्वार्थ, मानवीयता की कमी) क्यों घिरता जा रहा है? कवि कहते हैं कि जो बिजली के दीये बिना स्नेह (सच्ची भावना) के जल रहे हैं, उन्हें बुझा दो, क्योंकि केवल बाहरी उजाले से सही राह नहीं मिल सकती — असली उजाला तो हृदय के स्नेह से ही आता है।
भाग 3 — मनुष्य का साहस और संघर्ष
कवि मनुष्य को संबोधित करते हुए कहते हैं कि उसी ने सबसे पहले दीपक जलाकर अंधकार (तिमिर) को चुनौती देना स्वीकार किया था, और अंधकार रूपी नदी को पार करने के लिए दीये की नाव भी उसी ने तैयार की थी। कवि प्रेरणा देते हैं कि उस नाव को निरंतर बहाते चलो, विश्वास रखो कि एक दिन अंधकार का किनारा (अर्थात अंत) अवश्य मिलेगा।
भाग 4 — निरंतर प्रयास और बलिदान
मनुष्य ने युगों-युगों से अंधकार की शिला पर अनगिनत दीये जलाए हैं। समय इस बात का साक्षी है कि तूफानी हवाओं (कठिनाइयों) ने उनमें से अनगिनत दीये बुझा भी दिए। परंतु कवि कहते हैं कि जो दीये स्वयं बुझकर भी अपनी ज्योति (प्रकाश और बलिदान) दे गए, उन्हीं के त्याग से अंततः अंधकार को उजाला अवश्य मिलेगा — अर्थात कोई भी सच्चा बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता।
भाग 5 — आशा का संदेश
कवि कहते हैं कि दीये (अच्छाई) और तूफान (बुराई/कठिनाई) के बीच यह संघर्ष सदा से चला आ रहा है और चलता रहेगा। जो ज्योति सबसे पहली बार जली थी, वह आज भी सोने की तरह चमकते हुए जल रही है और सदा जलती रहेगी। कवि पूर्ण आशा और विश्वास के साथ कहते हैं कि यदि धरती पर एक भी दीया (एक भी अच्छाई या नेकी) शेष रहेगा, तो निश्चित ही एक दिन काली रात (निशा) को सुंदर सवेरा अवश्य मिलेगा।
5शब्द-संपदा
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| स्नेह | प्रेम, प्यार |
| धरा | पृथ्वी, धरती |
| निहित | छिपा हुआ, समाहित |
| अमावस | अमावस्या — वह रात जब चाँद दिखाई नहीं देता |
| पूर्णिमा | वह रात जब चाँद पूरा दिखाई देता है |
| विश्व | संसार |
| दिवस | दिन |
| निशा | रात |
| विद्युत | बिजली |
| तिमिर | अंधकार |
| प्रथम | पहला |
| सरित | नदी |
| युगों से | बहुत लंबे समय से |
| शिला | चट्टान, पत्थर |
| अनगिनत / अनगिन | जिसकी गिनती न हो सके, असंख्य |
| साक्षी | गवाह |
| पवन | हवा |
| ज्योति | प्रकाश, लौ |
| उजेला | उजाला, प्रकाश |
| सवेरा | सुबह |
| किनारा | तट |
| स्वर्ण | सोना |
6पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
मेरी समझ से (क)
- निम्नलिखित में से कौन-सी बात इस कविता में मुख्य रूप से कही गई है?
- भलाई के कार्य करते रहना ✔
- दीपावली के दीपक जलाना
- बल्ब आदि जलाकर अंधकार दूर करना
- तिमिर मिलने तक नाव चलाते रहना
- "जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की, चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी" — यह वाक्य किससे कहा गया है?
- तूफ़ान से
- मनुष्यों से ✔
- दीपकों से
- तिमिर से
मिलकर करें मिलान
| शब्द | सही अर्थ या संदर्भ |
|---|---|
| अमावस | अमावस्या, जिस रात आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता। |
| पूर्णिमा | पूर्णमासी, वह तिथि जिस रात चंद्रमा पूरा दिखाई देता है। |
| विद्युत-दिये | विद्युत दिये अर्थात बिजली से जलने वाले दीपक, बल्ब आदि उपकरण। |
| युग | समय, काल — युग संख्या में चार माने गए हैं: सतयुग, त्रेता युग, द्वापर युग और कलियुग। |
पंक्तियों पर चर्चा
"दिये और तूफ़ान की यह कहानी चली आ रही और चलती रहेगी, जली जो प्रथम बार लौ दीप की स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी। रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।"
अर्थ — अच्छाई (दीये) और बुराई/कठिनाई (तूफान) के बीच का यह संघर्ष सदा से चला आ रहा है और आगे भी चलता रहेगा। जो ज्योति (नेकी, प्रेम, सेवा-भाव) सबसे पहले जगी थी, वह सोने की तरह चमकते हुए आज भी जल रही है और सदा जलती रहेगी। कवि को पूरा विश्वास है कि यदि धरती पर एक भी दीया (एक भी अच्छाई) बचा रहेगा, तो अंधकार-भरी रात के बाद सुंदर सवेरा अवश्य आएगा।
सोच-विचार के लिए
(क) कविता में अँधेरे या तिमिर के लिए किन वस्तुओं के उदाहरण दिए गए हैं?
कविता में अंधकार के लिए अमावस (अमावस्या की रात), निशा, तिमिर की शिला (अंधकार की चट्टान) और तूफान (जो दीयों को बुझाता है) जैसे उदाहरण दिए गए हैं — ये सभी दुख, कठिनाई और बुराई के प्रतीक के रूप में प्रयुक्त हुए हैं।
(ख) यह कविता आशा और उत्साह जगाने वाली कविता है। इसमें क्या आशा की गई है? यह आशा क्यों की गई है?
कविता में यह आशा की गई है कि एक दिन अंधकार (तिमिर) का किनारा अवश्य मिल जाएगा, अर्थात संसार से बुराई, दुख और कठिनाइयाँ दूर हो जाएँगी और सुख-शांति आएगी। यह आशा इसलिए की गई है क्योंकि कवि का दृढ़ विश्वास है कि जब तक धरती पर एक भी दीपक (यानी नेकी, प्रेम व सेवा का भाव) जलता रहेगा, तब तक अंधकार को मिटाने की उम्मीद बनी रहेगी।
(ग) कविता में किसे जलाने और किसे बुझाने की बात कही गई है?
कवि ने स्नेह (प्रेम) से भरे दीयों को निरंतर जलाते रहने की बात कही है, और बिना स्नेह के जलने वाले बिजली के दीयों (विद्युत-दियों) को बुझाने की बात कही है — अर्थात दिखावटी और भावनाशून्य कार्यों को छोड़कर सच्चे प्रेम व सेवा-भाव से भरे कार्य करते रहने की प्रेरणा दी गई है।
कविता की रचना
(क)-(ख) इस कविता को पढ़कर अपने समूह में इसकी विशेषताओं की सूची बनाइए और साझा कीजिए।
कविता की कुछ विशेषताएँ — (1) प्रत्येक पंक्ति को बोलने/गाने में लगभग समान समय लगता है (2-4, 2-4 शब्दों के क्रम में लय)। (2) हर बंद (स्टैंज़ा) के अंत में एक विशेष, इंडेंट की हुई तुकांत पंक्ति-युग्म दोहराई गई है, जो 'मिलेगा' शब्द पर समाप्त होती है और आशा का भाव जगाती है। (3) कविता में 'चलो' शब्द का बार-बार प्रयोग (जलाते चलो, बहाते चलो) पाठक को लगातार कर्म करते रहने की प्रेरणा देता है। (4) प्रकाश और अंधकार के प्रतीकों (दीया, ज्योति, उजेला — तिमिर, अमावस, तूफान) का सुंदर प्रयोग हुआ है। (5) तुकांत मिलान (जैसे 'मिटेगा-मिलेगा', 'थी-थी', 'रहेगी-रहेगी') से कविता में संगीतमयता आई है।
मिलान
स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलते-जुलते भाव वाली पंक्तियों को मिलाकर लिखिए—
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 — मिलता हुआ भाव |
|---|---|
| 1. कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा। | विश्व की समस्याओं से एक न एक दिन छुटकारा अवश्य मिलेगा। |
| 2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर। | दूसरों के सुख-चैन के लिए प्रयास करते रहिए। |
| 3. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी। | विश्व में सुख-शांति क्यों कम होती जा रही है? |
| 4. बिना स्नेह विद्युत-दिये जल रहे हो, बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा। | विश्व की भलाई का ध्यान रखे बिना प्रगति करने से कोई लाभ नहीं होगा। |
अनुमान या कल्पना से
(क) "दिये और तूफ़ान की यह कहानी चली आ रही और चलती रहेगी" — दीपक और तूफान की यह कौन-सी कहानी हो सकती है जो सदा से चली आ रही है?
यह अच्छाई और बुराई (या प्रकाश और अंधकार) के बीच की वह सदा चलने वाली कहानी हो सकती है, जिसमें अच्छाई (दीपक) कठिनाइयों और मुश्किलों (तूफान) के बावजूद भी डटी रहती है और अंततः विजय प्राप्त करती है।
(ख) "जली जो प्रथम बार लौ दीप की, स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी" — दीपक की यह सोने जैसी लौ क्या हो सकती है जो अनगिनत सालों से जल रही है?
यह वह भलाई, त्याग और सेवा की भावना हो सकती है, जो सबसे पहले मानवता के हृदय में जगी थी और तब से आज तक पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों के मन में जलती आ रही है और सदा जलती रहेगी।
शब्दों के रूप
"कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी" — 'अमावस' का अर्थ है 'अमावस्या'। इन दोनों शब्दों का अर्थ तो समान है, लेकिन इनके लिखने-बोलने में थोड़ा-सा अंतर है। कविता से खोजकर ऐसे ही मिलते-जुलते दूसरे शब्द लिखिए—
| कविता का शब्द | मिलता-जुलता रूप |
|---|---|
| 1. दिया | दीप |
| 2. उजेला | उजाला |
| 3. अनगिन | अनगिनत |
| 4. रात | निशा / रात्रि |
| 5. चाँद | चंद्रमा |
| 6. आग | अग्नि |
अर्थ की बात
(क) "जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर" — इस पंक्ति में 'चलो' के स्थान पर 'रहो' शब्द रखकर पढ़िए। इस शब्द के बदलने से पंक्ति के अर्थ में क्या अंतर आ रहा है?
'चलो' शब्द में निरंतर आगे बढ़ते हुए, उत्साह के साथ कार्य करते रहने का भाव है — यह एक साथ मिलकर कर्म में जुटे रहने का आह्वान करता है। जबकि 'रहो' शब्द में केवल स्थिर रूप से बने रहने या टिके रहने का भाव है, जिसमें 'चलो' जैसी गतिशीलता और सामूहिक प्रयास की प्रेरणा नहीं झलकती। इसलिए 'चलो' शब्द पंक्ति को अधिक ऊर्जावान और प्रेरक बनाता है।
(ख) नीचे दी गई पंक्तियों में आपको वह शब्द चुनना है, जो उस पंक्ति में सबसे उपयुक्त रहेगा—
1. बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर, कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा।। (विकल्प: नैया/नाव/नौका; तट/तीर/किनारा)
2. रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि, कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा। (विकल्प: धरा/धरती/भूमि; प्रात:/सुबह/सवेरा)
3. जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की, चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी। (विकल्प: अंधकार/तिमिर/अँधेरे; प्रथम/अव्वल/पहली)
मूल कविता में क्रमशः 'नाव', 'किनारा', 'धरा', 'सवेरा', 'तिमिर' और 'प्रथम' शब्दों का ही प्रयोग हुआ है, क्योंकि ये शब्द कविता की लय और भाव के साथ सबसे अधिक मेल खाते हैं।
प्रतीक
(क) "कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा" — निशा का अर्थ है रात। सवेरा का अर्थ है सुबह। पर क्या कविता में इनका प्रयोग केवल 'रात' और 'सुबह' के लिए ही हुआ है?
नहीं। कविता में 'निशा' और 'सवेरा' का प्रयोग प्रतीकात्मक रूप में हुआ है — यहाँ 'निशा' अँधेरे, दुख, स्वार्थ और बुराई की ओर संकेत करती है, जबकि 'सवेरा' उजाले, आशा, सुख और अच्छाई की ओर संकेत करता है।
(ख) कविता में से चुने गए शब्दों को 'सवेरा' और 'निशा' के भाव के अनुसार उचित स्थान पर लिखिए—
सवेरा (उजाले-आशा से जुड़े शब्द): दिये, पूर्णिमा, दिवस, ज्योति, उजेला, लौ, स्वर्ण, जलना।
निशा (अँधेरे-कठिनाई से जुड़े शब्द): अँधेरा, अमावस, तिमिर, शिला, तूफान, बुझाना, नाव, किनारा।
(नाव और किनारा को यहाँ तिमिर पार करने के संघर्ष से जुड़े होने के कारण 'निशा' समूह में रखा गया है — शिक्षक के मार्गदर्शन में इस पर चर्चा की जा सकती है, कुछ शब्दों को उचित तर्क के साथ दूसरे समूह में भी रखा जा सकता है।)
(ग) अपने समूह में मिलकर 'निशा' और 'सवेरा' के लिए कुछ और शब्द सोचिए और लिखिए (संकेत — बर्फ़ीली चोटियाँ, खंडहर व हरा-भरा किला, गुलाब के फूल, बादल में छिपा व साफ़ चाँद जैसे चित्रों पर विचार कीजिए)।
(यह समूह-गतिविधि है, विद्यार्थी अपने विचार लिखें।) उदाहरण के लिए — सवेरा से जुड़े शब्द: उजाला, चमक, हरियाली, वसंत, खिलना, ताज़गी। निशा से जुड़े शब्द: वीरानी, खंडहर, सूखापन, मुरझाना, काली रात, उदासी।
पंक्ति से पंक्ति
कविता की पंक्ति "जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी" को वाक्य के रूप में इस प्रकार लिखा जा सकता है — "तुम्हीं ने पहला दीप जला तिमिर की चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी।" अब नीचे दी गई पंक्तियों को इसी प्रकार वाक्यों के रूप में लिखिए—
1. बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर।
तुम वह नाव निरंतर बहाते चलो।
2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर।
तुम ये दिये स्नेह भर-भरकर जलाते चलो।
3. बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा।
इन्हें बुझाओ, नहीं तो इस प्रकार पथ नहीं मिल सकेगा।
4. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी।
मगर आज विश्व पर दिवस में ही अमावस जैसी निशा क्यों घिर आ रही है।
सा/सी/से का प्रयोग
'सा/सी/से' का प्रयोग करते हुए अपनी कल्पना से पाँच वाक्य लिखिए।
(व्यक्तिगत उत्तर है, उदाहरण के लिए) 1. उसका चेहरा चाँद-सा सुंदर है। 2. यह कपड़ा रेशम-सा मुलायम है। 3. बच्चे की आवाज़ बुलबुल-सी मीठी है। 4. आज पानी बर्फ-सा ठंडा लग रहा है। 5. डर के मारे उसका मुँह पीला पड़ गया, बिलकुल हल्दी-सा।
पाठ से आगे — आपकी बात
(क) "रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि, कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा" — यदि हर व्यक्ति अपना कर्तव्य समझे और दूसरों की भलाई के लिए कार्य करे तो पूरी दुनिया सुंदर बन जाएगी। आप भी दूसरों के लिए प्रतिदिन बहुत-से अच्छे कार्य करते होंगे। अपने उन कार्यों के बारे में बताइए।
(व्यक्तिगत उत्तर है, उदाहरण के लिए) मैं अपने छोटे भाई-बहन की पढ़ाई में सहायता करता/करती हूँ, ज़रूरतमंदों को अपनी पुरानी किताबें व कपड़े देता/देती हूँ, विद्यालय में सफ़ाई बनाए रखने में योगदान देता/देती हूँ और अपने दोस्तों को कठिनाई के समय सहायता करता/करती हूँ।
(ख) इस कविता में निराश न होने, चुनौतियों का सामना करने और सबके सुख के लिए कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया है। यदि आपको अपने किसी मित्र को निराश न होने के लिए प्रेरित करना हो तो आप क्या करेंगे? क्या कहेंगे?
(व्यक्तिगत उत्तर है, उदाहरण के लिए) मैं अपने मित्र से कहूँगा/कहूँगी कि हर कठिनाई अस्थायी होती है और निरंतर प्रयास करने वाला व्यक्ति ही सफल होता है। मैं उसे यह भी बताऊँगा/बताऊँगी कि जिस तरह इस कविता में एक दीया भी अंधकार से लड़ने की उम्मीद रखता है, उसी तरह हमें भी हार न मानकर डटे रहना चाहिए।
(ग) क्या आपको कभी किसी ने कोई कार्य करने के लिए प्रेरित किया है? कब? कैसे? उस घटना के बारे में बताइए।
(व्यक्तिगत उत्तर है, उदाहरण के लिए) एक बार परीक्षा में कम अंक आने पर मैं निराश हो गया/गई था/थी, तब मेरे शिक्षक/माता-पिता ने मुझे समझाया कि निरंतर मेहनत करने से सफलता अवश्य मिलती है। उनकी इस बात से प्रेरित होकर मैंने कड़ी मेहनत की और अगली परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त किए।
अमावस्या और पूर्णिमा
नीचे दिए गए चित्र में अमावस्या, पूर्णिमा, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को पहचानकर उचित स्थान पर लिखिए।
सामान्य नियम यह है — जब चंद्रमा की चमक अमावस्या (पूर्ण अंधकार) से बढ़ते-बढ़ते पूर्णिमा (पूरा चाँद) तक पहुँचती है, वह वृद्धि वाला भाग 'शुक्ल पक्ष' कहलाता है; और जब पूर्णिमा से घटते-घटते चाँद फिर अमावस्या तक पहुँचता है, वह घटाव वाला भाग 'कृष्ण पक्ष' कहलाता है। पुस्तक में दिए गए वास्तविक चित्र को ध्यान से देखकर, इस नियम के अनुसार प्रत्येक चंद्र-आकृति के नीचे सही नाम लिखिए — आवश्यकता पड़ने पर अपने शिक्षक या अभिभावक की सहायता लें।
तिथिपत्र
नीचे तिथिपत्र (कैलेंडर) के एक महीने (जनवरी 2023) का पृष्ठ दिया गया है। इसे ध्यान से देखिए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए—
| वार | दिनांक — तिथि (पक्ष) | ||||
|---|---|---|---|---|---|
| रविवार | 1 दशमी(शुक्ल) · 8 द्वितीया(कृष्ण) · 15 अष्टमी(कृष्ण) · 22 प्रतिपदा(शुक्ल) · 29 अष्टमी(शुक्ल) | ||||
| सोमवार | 2 एकादशी(शुक्ल) · 9 द्वितीया(कृष्ण) · 16 नवमी(कृष्ण) · 23 द्वितीया(शुक्ल) · 30 नवमी(शुक्ल) | ||||
| मंगलवार | 3 द्वादशी(शुक्ल) · 10 तृतीया(कृष्ण) · 17 दशमी(कृष्ण) · 24 तृतीया(शुक्ल) · 31 दशमी(शुक्ल) | ||||
| बुधवार | 4 त्रयोदशी(शुक्ल) · 11 चतुर्थी(कृष्ण) · 18 एकादशी(कृष्ण) · 25 चतुर्थी(शुक्ल) | ||||
| गुरुवार | 5 चतुर्दशी(शुक्ल) · 12 पंचमी(कृष्ण) · 19 द्वादशी(कृष्ण) · 26 वसंत पंचमी(शुक्ल) | ||||
| शुक्रवार | 6 पूर्णिमा · 13 षष्ठी(कृष्ण) · 20 त्रयोदशी(कृष्ण) · 27 षष्ठी(शुक्ल) | ||||
| शनिवार | 7 प्रतिपदा(कृष्ण) · 14 सप्तमी(कृष्ण) · 21 अमावस्या · 28 सप्तमी(शुक्ल) | ||||
(क) दिए गए महीने में कुल कितने दिन हैं?
जनवरी महीने में कुल 31 दिन हैं।
(ख) पूर्णिमा और अमावस्या किस दिनांक और वार को पड़ रही है?
पूर्णिमा — 6 जनवरी, शुक्रवार को। अमावस्या — 21 जनवरी, शनिवार को।
(ग) कृष्ण पक्ष की सप्तमी और शुक्ल पक्ष की सप्तमी में कितने दिनों का अंतर है?
कृष्ण पक्ष की सप्तमी 14 जनवरी को है और शुक्ल पक्ष की सप्तमी 28 जनवरी को है। इन दोनों में 14 दिनों का अंतर है (28 − 14 = 14)।
(घ) इस महीने में कृष्ण पक्ष में कुल कितने दिन हैं?
कृष्ण पक्ष 7 जनवरी (प्रतिपदा) से शुरू होकर 21 जनवरी (अमावस्या) तक चलता है, अर्थात कुल 15 दिन।
(ङ) 'वसंत पंचमी' की तिथि बताइए।
वसंत पंचमी 26 जनवरी, गुरुवार को है, जो शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है।
आज की पहेली
"समय साक्षी है कि जलते हुए दीप, अनगिन तुम्हारे पवन ने बुझाए। 'पवन' शब्द का अर्थ है हवा। नीचे दिए गए अक्षर-जाल में 'पवन' के लिए प्रयोग किए जाने वाले अलग-अलग नाम छिपे हैं। इन्हें खोजिए।
| बा | द | ल | ई | ब |
| प | अ | नि | ल | या |
| व | क | स | मी | र |
| न | ह | वा | यु | ब |
| मा | रु | त | स | ड़ |
अक्षर-जाल में छिपे 'पवन' के पर्यायवाची शब्द खोजकर लिखिए (एक उदाहरण पहले से दिया गया है)।
इस अक्षर-जाल में 'पवन' के लिए ये शब्द छिपे मिलते हैं — हवा (दिया गया उदाहरण, चौथी पंक्ति में), अनिल (दूसरी पंक्ति में), समीर (तीसरी पंक्ति में), वायु (चौथी पंक्ति में), मारुत (पाँचवीं पंक्ति में), और बयार (पहले स्तंभ में ऊपर से नीचे — ब-या-र)। इस प्रकार कुल छह शब्द खोजे जा सकते हैं।
खोजबीन के लिए
7पाठ का सार — माइंड मैप
8अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
'जलाते चलो' कविता के कवि कौन हैं?
'जलाते चलो' कविता के कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी (1916–1998) हैं, जो बाल साहित्य के चर्चित रचनाकार थे।
कविता में 'तिमिर' और 'निशा' किसके प्रतीक हैं?
कविता में 'तिमिर' और 'निशा' अंधकार, दुख, स्वार्थ और बुराई के प्रतीक हैं, जबकि 'दिये' और 'सवेरा' आशा, प्रेम और अच्छाई के प्रतीक हैं।
कवि विद्युत-दियों को बुझाने की बात क्यों कहते हैं?
क्योंकि बिना स्नेह (सच्ची भावना) के जलने वाले बिजली के दीयों से केवल बाहरी उजाला मिलता है, सही राह नहीं मिलती — असली उजाला तो हृदय के स्नेह से ही आता है।
अमावस्या और पूर्णिमा में क्या अंतर है?
पूर्णिमा वह रात है जब चंद्रमा पूरा दिखाई देता है, जबकि अमावस्या वह रात है जब चंद्रमा दिखाई नहीं देता। चंद्रमा के बढ़ने के दिनों को शुक्ल पक्ष और घटने के दिनों को कृष्ण पक्ष कहते हैं।
कविता का मुख्य संदेश क्या है?
कविता का मुख्य संदेश है कि हमें निराश हुए बिना निरंतर स्नेह और भलाई के कार्य (दीये) जलाते रहना चाहिए, क्योंकि यदि धरती पर एक भी अच्छाई शेष रहेगी, तो अंधकार-भरी रात के बाद सुंदर सवेरा अवश्य आएगा।
ब्लॉगर SEO सुझाव
सुझाया गया शीर्षक: जलाते चलो — कक्षा 6 हिंदी मल्हार पाठ 7: भावार्थ, शब्दार्थ और संपूर्ण प्रश्नोत्तर
मेटा विवरण: कक्षा 6 मल्हार पाठ 7 'जलाते चलो' का सरल भावार्थ, शब्द-संपदा, कवि परिचय, तिथिपत्र, अमावस्या-पूर्णिमा की जानकारी, पहेली-हल और सभी पाठ्यपुस्तक प्रश्नों के हल — एक ही स्थान पर।
लेबल/टैग्स:
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