मातृभूमि
सोहनलाल द्विवेदी की देशभक्ति कविता — भारत माता के प्राकृतिक सौंदर्य और गौरवशाली इतिहास का बखान
1कवि से परिचय — सोहनलाल द्विवेदी
इस कविता को हिंदी के प्रसिद्ध कवियों में से एक सोहनलाल द्विवेदी जी (1906–1988) ने लिखा है। उनका जन्म आज से लगभग सवा सौ साल पहले हुआ था। उस समय अंग्रेजों का भारत पर आधिपत्य था। उन्होंने अपनी लेखनी से अंग्रेजों का विरोध किया।
उनकी लेखनी का सबसे प्रिय विषय था 'देशभक्ति'। भारत के गौरव का गान करना उन्हें बहुत प्रिय था। उनकी कुछ और चर्चित रचनाएँ हैं — 'बढ़े चलो, बढ़े चलो', 'कोशिश करने वालों की हार नहीं होती' आदि।
2पाठ परिचय
प्रस्तुत कविता में कवि सोहनलाल द्विवेदी ने अपनी मातृभूमि भारत के प्राकृतिक सौंदर्य, पवित्रता और गौरवशाली इतिहास का बड़ा ही सजीव वर्णन किया है। ऊँचा हिमालय, गंगा-यमुन-त्रिवेणी जैसी पवित्र नदियाँ, झरने, चिड़ियों की चहचहाहट, घनी अमराइयाँ, सुगंधित मलय पवन — इन सबके साथ-साथ कवि यह भी बताते हैं कि यही वह पुण्यभूमि है जहाँ श्रीराम, सीता, श्रीकृष्ण और गौतम बुद्ध जैसे महापुरुषों ने जन्म लिया। कवि बार-बार दोहराते हैं कि यह भूमि उनकी जन्मभूमि और मातृभूमि है, जिस पर उन्हें गर्व है।
3मूल पाठ
ऊँचा खड़ा हिमालय आकाश चूमता है,
नीचे चरण तले झुक, नित सिंधु झूमता है।
गंगा यमुन त्रिवेणी नदियाँ लहर रही हैं,
जगमग छटा निराली, पग पग छहर रही हैं।
वह पुण्य-भूमि मेरी, वह स्वर्ण-भूमि मेरी।
वह जन्मभूमि मेरी वह मातृभूमि मेरी।
झरने अनेक झरते जिसकी पहाड़ियों में,
चिड़ियाँ चहक रही हैं, हो मस्त झाड़ियों में।
अमराइयाँ घनी हैं कोयल पुकारती है,
बहती मलय पवन है, तन-मन सँवारती है।
वह धर्मभूमि मेरी, वह कर्मभूमि मेरी।
वह जन्मभूमि मेरी वह मातृभूमि मेरी।
जन्मे जहाँ थे रघुपति, जन्मी जहाँ थी सीता,
श्रीकृष्ण ने सुनाई, वंशी पुनीत गीता।
गौतम ने जन्म लेकर, जिसका सुयश बढ़ाया,
जग को दया सिखाई, जग को दिया दिखाया।
वह युद्ध-भूमि मेरी, वह बुद्ध-भूमि मेरी।
वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी।
— सोहनलाल द्विवेदी
4सरल व्याख्या (भावार्थ)
भाग 1 — हिमालय, नदियाँ और भूमि की महिमा
ऊँचा हिमालय पर्वत मानो आकाश को चूम रहा है और नीचे उसके चरणों में समुद्र सदा झूम रहा है। गंगा, यमुन और त्रिवेणी जैसी पवित्र नदियाँ लहरा रही हैं, और उनकी चमकती हुई अनोखी छटा हर कदम पर फैल रही है। कवि कहते हैं कि यही उनकी पुण्यभूमि, स्वर्णभूमि, जन्मभूमि और मातृभूमि है।
भाग 2 — झरने, पक्षी और सुगंधित पवन
इस भूमि की पहाड़ियों में अनेक झरने झरते हैं, और झाड़ियों में मस्त होकर चिड़ियाँ चहचहाती हैं। यहाँ घनी अमराइयाँ (आम के बाग) हैं जहाँ कोयल पुकारती है, और दक्षिण से आने वाली सुगंधित मलय पवन बहती है, जो तन-मन को सँवार देती है। कवि कहते हैं कि यही उनकी धर्मभूमि, कर्मभूमि, जन्मभूमि और मातृभूमि है।
भाग 3 — महापुरुषों की जन्मभूमि
यही वह भूमि है जहाँ श्रीराम (रघुपति) और सीता का जन्म हुआ, और जहाँ श्रीकृष्ण ने पवित्र गीता का उपदेश सुनाया। गौतम बुद्ध ने भी यहीं जन्म लेकर इस भूमि का यश बढ़ाया, संसार को दया करना सिखाया और सही मार्ग दिखाया। कवि कहते हैं कि यही उनकी युद्धभूमि और बुद्धभूमि है, और अंततः यही उनकी मातृभूमि और जन्मभूमि है।
5शब्द-संपदा
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| चरण तले | पैरों के नीचे |
| सिंधु | समुद्र |
| त्रिवेणी | तीन नदियों के मिलने की धारा, संगम |
| जगमग छटा | चमकीली, दमकती हुई शोभा |
| निराली | अनोखी, अद्भुत |
| छहर रही हैं | बिखर रही हैं, फैल रही हैं |
| पुण्य-भूमि | पवित्र भूमि |
| अमराइयाँ | आम के घने बाग |
| मलय पवन | दक्षिण भारत के मलय पर्वत से आने वाली सुगंधित हवा |
| तन-मन सँवारती है | शरीर और मन को तरोताजा कर देती है |
| रघुपति | श्रीरामचंद्र (रघुकुल के स्वामी) |
| वंशी | बाँसुरी |
| पुनीत | पवित्र |
| सुयश | अच्छा यश, कीर्ति |
| जग | संसार |
| युद्ध-भूमि | युद्ध होने की भूमि |
| बुद्ध-भूमि | गौतम बुद्ध से जुड़ी भूमि |
6पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
मेरी समझ से (क)
- हिंद महासागर के लिए कविता में कौन-सा शब्द आया है?
- चरण
- हिमालय
- वंशी
- सिंधु ✔
- मातृभूमि कविता में मुख्य रूप से—
- भारत की प्रशंसा की गई है ✔
- भारत के महापुरुषों की जय की गई है
- भारत की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की गई है ✔
- भारतवासियों की वीरता का बखान किया गया है
मिलकर करें मिलान
| शब्द | अर्थ या संदर्भ |
|---|---|
| 1. हिमालय | 10. भारत की उत्तरी सीमा पर फैली पर्वत-माला |
| 2. त्रिवेणी | 4. तीन नदियों की मिली हुई धारा, संगम |
| 3. मलय पवन | 6. दक्षिणी भारत के मलय पर्वत से चलने वाली सुगंधित वायु |
| 4. सिंधु | 8. समुद्र, एक नदी का नाम |
| 5. गंगा-यमुना | 3. भारत की प्रसिद्ध नदियाँ |
| 6. रघुपति | 5. श्री रामचंद्र का एक नाम, दशरथ के पुत्र |
| 7. श्रीकृष्ण | 2. वसुदेव के पुत्र वासुदेव |
| 8. सीता | 9. जनक की पुत्री जानकी |
| 9. गीता | 7. एक प्रसिद्ध और प्राचीन ग्रंथ 'श्रीमद्भगवद्गीता', इसमें वे प्रश्न-उत्तर और संवाद हैं जो महाभारत में श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच हुए थे |
| 10. गौतम बुद्ध | 1. एक प्रसिद्ध महापुरुष, बौद्ध धर्म के प्रवर्तक |
पंक्तियों पर चर्चा
"वह युद्ध-भूमि मेरी, वह बुद्ध-भूमि मेरी। वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी।"
अर्थ — भारत भूमि पर वीरों ने अनेक युद्ध लड़े हैं और यहीं गौतम बुद्ध ने जन्म लेकर करुणा व अहिंसा का संदेश दिया। कवि इस भूमि को अपनी मातृभूमि और जन्मभूमि बताते हुए इसके प्रति अपना गहरा प्रेम और गर्व व्यक्त करते हैं।
सोच-विचार के लिए
(क) कविता को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए—
1. कोयल कहाँ रहती है?
कोयल घनी अमराइयों (आम के बागों) में रहती है और वहीं से पुकारती है।
2. तन-मन कौन सँवारती है?
बहती हुई मलय पवन (सुगंधित दक्षिणी हवा) तन-मन को सँवारती है।
3. झरने कहाँ से झरते हैं?
झरने पहाड़ियों से झरते हैं।
4. श्रीकृष्ण ने क्या सुनाया था?
श्रीकृष्ण ने वंशी (बाँसुरी) बजाकर पुनीत (पवित्र) गीता सुनाई थी।
5. गौतम ने किसका यश बढ़ाया?
गौतम बुद्ध ने जन्म लेकर अपनी मातृभूमि (भारत) का सुयश बढ़ाया।
(ख) "नदियाँ लहर रही हैं, पग पग छहर रही हैं" — 'लहर' का अर्थ है पानी का हिलोरा, मौज, उमंग, वेग, जोश; 'छहर' का अर्थ है बिखरना, छितराना, छिटकना, फैलना। कविता पढ़कर पता लगाइए और लिखिए—
कहाँ-कहाँ छटा छहर रही है?
गंगा, यमुन, त्रिवेणी नदियों की जगमग छटा हर कदम (पग-पग) पर छहर (फैल) रही है।
किसका पानी लहरा रहा है?
गंगा, यमुन और त्रिवेणी नदियों का पानी लहरा रहा है।
कविता की रचना
"गंगा यमुन त्रिवेणी, नदियाँ लहर रही हैं" — 'यमुन' शब्द यहाँ 'यमुना' नदी के लिए आया है। कभी-कभी कवि कविता की लय और सौंदर्य को बढ़ाने के लिए इस प्रकार से शब्दों को थोड़ा बदल देते हैं। यदि आप कविता को थोड़ा और ध्यान से पढ़ेंगे तो आपको और भी बहुत-सी विशेषताएँ पता चलेंगी।
आपको जो विशेष बातें दिखाई दें, उन्हें आपस में साझा कीजिए और लिखिए, जैसे सबसे ऊपर इस कविता का एक शीर्षक है।
कुछ विशेषताएँ — 1) कविता का शीर्षक 'मातृभूमि' पूरी कविता के केंद्रीय भाव को दर्शाता है; 2) हर अंतरे के बाद एक टेक (refrain) आती है जिसमें 'मेरी' शब्द बार-बार दोहराया गया है — इससे कवि का अपनी भूमि के प्रति गहरा लगाव झलकता है; 3) 'भूमि' शब्द के साथ अलग-अलग विशेषण जोड़े गए हैं (पुण्य-भूमि, स्वर्ण-भूमि, धर्मभूमि, कर्मभूमि, युद्ध-भूमि, बुद्ध-भूमि); 4) कविता में तुकांत (एक जैसी ध्वनि वाले) शब्दों का सुंदर प्रयोग है, जैसे चूमता-झूमता, रही हैं-रही हैं।
मिलान
स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलते-जुलते भाव वाली पंक्तियों को मिलाइए—
| स्तंभ 1 | मिलान — स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी। | 2. मैंने उस भूमि पर जन्म लिया है। वह भूमि मेरी माँ समान है। |
| 2. चिड़ियाँ चहक रही हैं, हो मस्त झाड़ियों में। | 3. वहाँ की जलवायु इतनी सुखदायी है कि पक्षी पेड़-पौधों के बीच प्रसन्नता से गीत गा रहे हैं। |
| 3. अमराइयाँ घनी हैं, कोयल पुकारती है। | 1. यहाँ आम के घने उद्यान हैं जिनमें कोयल आदि पक्षी चहचहा रहे हैं। |
अनुमान या कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—
(क) "अमराइयाँ घनी हैं, कोयल पुकारती है" — कोयल क्यों पुकार रही होगी? किसे पुकार रही होगी? कैसे पुकार रही होगी?
कोयल शायद वसंत ऋतु के आगमन की खुशी में या अपने साथी को बुलाने के लिए पुकार रही होगी। वह मीठी, कुहू-कुहू ध्वनि में गा-गाकर पुकारती होगी, जो सुनने वालों के मन को मोह लेती है।
(ख) "बहती मलय पवन है, तन मन सँवारती है" — पवन किसका तन-मन सँवारती है? वह यह कैसे करती है?
मलय पवन इस भूमि पर रहने वाले सभी प्राणियों — मनुष्यों, पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों — का तन-मन सँवारती है। वह अपनी ठंडक और सुगंध से थकान मिटाकर शरीर को तरोताजा और मन को प्रसन्न कर देती है।
शब्दों के रूप
(क) "जगमग छटा निराली, पग पग छहर रही हैं" — इन पंक्तियों में 'पग' शब्द दो बार आया है। इसका अर्थ है 'हर पग' या 'हर कदम' पर। शब्दों के ऐसे ही कुछ जोड़े नीचे दिए गए हैं, इनके अर्थ:
| शब्द-जोड़ा | अर्थ |
|---|---|
| घर-घर | हर घर में, प्रत्येक घर में |
| बाल-बाल | बहुत बारीकी से, थोड़े से अंतर से (जैसे 'बाल-बाल बचना') |
| साँस-साँस | हर साँस में, प्रत्येक क्षण |
| देश-देश | हर देश में, अनेक देशों में |
| पर्वत-पर्वत | हर पर्वत पर, अनेक पर्वतों में |
(ख) "वह युद्ध-भूमि मेरी, वह बुद्ध-भूमि मेरी" — कविता में 'भूमि' शब्द में अलग-अलग शब्द जोड़कर नए-नए शब्द बनाए गए हैं। कुछ नए शब्द और उनके अर्थ:
| नया शब्द | अर्थ |
|---|---|
| तप-भूमि | तपस्या करने की भूमि |
| देव-भूमि | देवताओं से जुड़ी पवित्र भूमि |
| भारत-भूमि | भारत देश की भूमि |
| जन्म-भूमि | जन्म लेने की भूमि |
| कर्म-भूमि | कर्म/कार्य करने की भूमि |
| कर्तव्य-भूमि | कर्तव्य निभाने की भूमि |
| मरु-भूमि | रेगिस्तानी भूमि |
| मलय-भूमि | मलय पर्वत से जुड़ी भूमि |
| मल्ल-भूमि | पहलवानों/कुश्ती से जुड़ी भूमि |
| यज्ञ-भूमि | यज्ञ करने की भूमि |
| रंग-भूमि | खेल/नाटक होने की भूमि, रंगमंच |
| रण-भूमि | युद्ध होने की भूमि |
| सिद्ध-भूमि | सिद्ध पुरुषों से जुड़ी भूमि |
थोड़ा भिन्न, थोड़ा समान
"जग को दया सिखाई, जग को दिया दिखाया।" — 'दया' और 'दिया' में केवल एक मात्रा का अंतर है, लेकिन इस एक मात्रा के कारण शब्द का अर्थ पूरी तरह बदल गया है (दया = करुणा, दिया = मार्ग दिखाने वाला/रास्ता)। अपने समूह में मिलकर ऐसे शब्दों की सूची बनाइए जिनमें केवल एक मात्रा का अंतर हो:
उदाहरण: घड़ा-घड़ी
कुछ और उदाहरण — किताब-किताबी नहीं, बल्कि: तार-तारा, मिल-मील, कल-काल, दिन-दीन, तन-तान, पल-पाल, दल-दाल, चल-चाल। (विद्यार्थी अपने समूह में और भी उदाहरण खोज सकते हैं।)
आपकी बात
(क) इस कविता में भारत का सुंदर वर्णन किया गया है। आप भारत के किस स्थान पर रहते हैं? वह स्थान आपको कैसा लगता है? उस स्थान की विशेषताएँ बताइए। (संकेत — प्रकृति, खान-पान, जलवायु, प्रसिद्ध स्थान आदि)
(व्यक्तिगत उत्तर है।) उदाहरण — मैं बहादुरगढ़, हरियाणा में रहता हूँ। यहाँ की जलवायु गर्मियों में गर्म और सर्दियों में ठंडी होती है, यहाँ के लोग मेहनती और मिलनसार हैं, और यहाँ का खान-पान (जैसे बाजरे की रोटी, साग) बहुत स्वादिष्ट है।
(ख) अपने परिवार के किसी सदस्य या मित्र के बारे में लिखिए। उसकी कौन-कौन सी बातें आपको अच्छी लगती हैं?
(व्यक्तिगत उत्तर है।) उदाहरण — मेरी माँ मुझे हमेशा ईमानदारी और मेहनत से काम करने की सीख देती हैं; उनका धैर्य और स्नेह मुझे सबसे अच्छा लगता है।
वंशी-से
"श्रीकृष्ण ने सुनाई, वंशी पुनीत गीता" — 'वंशी' बाँसुरी को कहते हैं। यह मुँह से फूँक कर बजाया जाने वाला एक 'वाद्य' यानी बाजा है। नीचे फूँक कर बजाए जाने वाले कुछ वाद्यों के नाम शब्द-जाल से खोजकर दिए गए हैं:
| दिया गया अक्षर | वाद्य का नाम |
|---|---|
| अ | अलगोजा |
| बी | बीन |
| बाँ | बाँसुरी |
| सीं | सींगी |
| श | शहनाई |
| ना | नरसिंगा |
| भं | भंकोरा (भोंपू) |
| शं | शंख |
आज की पहेली
नीचे कुछ अक्षर दिए गए हैं। इन्हें मिलाकर कोई सार्थक शब्द बनाइए। अक्षरों को आगे-पीछे किया जा सकता है यानी उनका क्रम बदला जा सकता है। आप अपने मन से किसी भी अक्षर के साथ कोई मात्रा भी लगा सकते हैं। पहला शब्द पहले ही बना दिया गया है:
| क्रम संख्या | अक्षर | शब्द |
|---|---|---|
| 1 | स म ह ग र | महासागर (उदाहरण-स्वरूप दिया गया) |
| 2 | ह म य ल | हिमालय |
| 3 | ग ग | गंगा |
| 4 | भ त र | भारत |
| 5 | ल क य | कोयल |
| 6 | व न प | पवन |
7झरोखे से — वंदे मातरम्
आप अपने विद्यालय में 'वंदे मातरम्' गाते होंगे। 'वंदे मातरम्' बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचा गया था। यह गीत स्वतंत्रता की लड़ाई में लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत था। भारत में इसका स्थान 'जन गण मन' के समान है।
| वंदे मातरम् | भावार्थ |
|---|---|
| वंदे मातरम्, वंदे मातरम्! सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्, शस्यश्यामलाम्, मातरम्! वंदे मातरम्! | हे माता, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ! तुम जल से भरी हुई हो, फलों से परिपूर्ण हो, तुम्हें मलय से आती हुई पवन शीतलता प्रदान करती है, तुम अन्न के खेतों से परिपूर्ण वंदनीय माता हो! हे माँ मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ! |
| शुभ्रज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम्, फुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्, सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्, सुखदाम् वरदाम्, मातरम्! वंदे मातरम्, वंदे मातरम्! | जिसकी रमणीय रात्रि को चंद्रमा का प्रकाश शोभायमान करता है, जो खिले हुए फूलों के पेड़ों से सुसज्जित है, सदैव हँसने वाली, मधुर भाषा बोलने वाली, सुख देने वाली, वरदान-देने वाली माँ, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ! |
आप नीचे दी गई इंटरनेट कड़ी पर इसे संगीत के साथ सुन भी सकते हैं — https://knowindia.india.gov.in/hindi/national-identity-elements/national-song.php
8पढ़ने के लिए — पुष्प की अभिलाषा
पुष्प की अभिलाषा
चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं, प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं, सम्राटों के शव पर हे हरि डाला जाऊँ,
चाह नहीं, देवों के सिर पर चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ,
मुझे तोड़ देना वनमाली!
उस पथ में देना तुम फेंक।
मातृ-भूमि पर शीश चढ़ाने,
जिस पथ जावें वीर अनेक।
— माखनलाल चतुर्वेदी
इस कविता में एक फूल की अभिलाषा (इच्छा) व्यक्त की गई है — वह किसी सुंदरी के गहनों में या राजाओं के शव पर नहीं, बल्कि उस रास्ते में गिरना चाहता है जहाँ से मातृभूमि पर अपना शीश चढ़ाने (बलिदान देने) वाले वीर सैनिक गुजरते हैं। यह कविता भी 'मातृभूमि' कविता की तरह देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण के भाव को दर्शाती है।
9साझी समझ
आपने 'मातृभूमि' कविता को भी पढ़ा और 'वंदे मातरम्' को भी। अब कक्षा में चर्चा कीजिए और पता लगाइए कि इन दोनों में कौन-कौन सी बातें एक जैसी हैं और कौन-कौन सी बातें कुछ अलग हैं।
समान बातें — दोनों रचनाओं में भारत भूमि को माँ के समान पूजनीय बताया गया है, दोनों में प्रकृति (जल, फल, हवा, फूल) के माध्यम से मातृभूमि की समृद्धि का वर्णन है, और दोनों में गहरी देशभक्ति की भावना है। अलग बातें — 'मातृभूमि' कविता में भारत के महापुरुषों (राम, कृष्ण, बुद्ध) का उल्लेख है, जबकि 'वंदे मातरम्' में मुख्य रूप से भारत माता के प्राकृतिक स्वरूप और उसकी वंदना पर बल दिया गया है।
10खोजबीन के लिए
नीचे पाठ से संबंधित कुछ रचनाएँ दी गई हैं, इन्हें पुस्तक में दिए गए क्यू.आर.कोड की सहायता से पढ़ें, देखें व समझें (शिक्षक/अभिभावक की अनुमति से):
- स्वाधीनता की सरगम — वंदना के इन स्वरों में
- ना हाथ एक शस्त्र हो
- पुष्प की अभिलाषा
- यह महिमामय अपना भारत
11पाठ का सार — माइंड मैप
12अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
सोहनलाल द्विवेदी कौन थे?
सोहनलाल द्विवेदी (1906–1988) हिंदी के प्रसिद्ध देशभक्ति कवि थे, जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में अपनी लेखनी से अंग्रेजों का विरोध किया। भारत के गौरव का गान उनकी रचनाओं का प्रिय विषय था।
'मातृभूमि' कविता का मुख्य भाव क्या है?
यह कविता भारत की प्राकृतिक सुंदरता (हिमालय, नदियाँ, झरने) और यहाँ जन्मे महापुरुषों (राम, कृष्ण, बुद्ध) का वर्णन करते हुए मातृभूमि के प्रति कवि के गहरे प्रेम, गर्व और श्रद्धा को व्यक्त करती है।
कविता में भारत को किन-किन नामों से पुकारा गया है?
कविता में भारत को पुण्य-भूमि, स्वर्ण-भूमि, धर्मभूमि, कर्मभूमि, युद्ध-भूमि, बुद्ध-भूमि, जन्मभूमि और मातृभूमि जैसे अनेक नामों से संबोधित किया गया है।
कविता में किन महापुरुषों का उल्लेख है?
कविता में श्रीराम (रघुपति), सीता, श्रीकृष्ण (जिन्होंने गीता का उपदेश दिया) और गौतम बुद्ध — इन चार महापुरुषों का उल्लेख है, जिन्होंने इसी भूमि पर जन्म लिया।
'वंदे मातरम्' किसने रचा था?
'वंदे मातरम्' बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचा गया था। यह स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोगों के लिए प्रेरणा का प्रमुख स्रोत था, और भारत में इसका स्थान राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान माना जाता है।
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शीर्षक (Title): मातृभूमि — पाठ 1, कक्षा 6 हिंदी मल्हार : सम्पूर्ण व्याख्या व प्रश्नोत्तर
मेटा विवरण (Meta description): कक्षा 6 हिंदी मल्हार पाठ 1 'मातृभूमि' (सोहनलाल द्विवेदी) का सरल भावार्थ, शब्द-संपदा, कवि परिचय, वंदे मातरम् और पाठ्यपुस्तक के सभी प्रश्नों के उत्तर एक ही लेख में।
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