परीक्षा
लेखक: प्रेमचंद (1880–1936) · विधा: कहानी
✒️ लेखक से परिचय
📜 मूल पाठ — सार-रूप में
भाग 1 — दीवान का त्यागपत्र
रियासत देवगढ़ के दीवान सरदार सुजानसिंह जब बूढ़े हुए तो परमात्मा की याद आई। उन्होंने महाराज से विनती की — "चालीस साल तक सेवा की है, अब राज-काज सँभालने की शक्ति नहीं रही। कहीं भूल-चूक हो गई तो बुढ़ापे में दाग लगेगा।" राजा साहब ने बहुत समझाया, पर अंततः उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली — शर्त यह रखी कि रियासत के लिए नया दीवान उन्हें स्वयं ही खोजना पड़ेगा।
भाग 2 — विज्ञापन और उम्मीदवारों की भीड़
दूसरे दिन देश के प्रसिद्ध पत्रों में विज्ञापन छपा — देवगढ़ के लिए सुयोग्य दीवान चाहिए, ग्रेजुएट होना ज़रूरी नहीं, पर स्वस्थ और कर्तव्यनिष्ठ होना आवश्यक है। एक महीने तक उम्मीदवारों के आचार-विचार की परख होगी। इस विज्ञापन ने पूरे मुल्क में तहलका मचा दिया — सैकड़ों लोग अपनी किस्मत आज़माने देवगढ़ पहुँचे। सभी अपने-अपने ढंग से अच्छा दिखने की कोशिश करने लगे — कोई देर तक सोने वाला सुबह टहलने लगा, कोई नौकरों से रूखा बोलने वाला अचानक विनम्र हो गया, कोई किताबों से नफ़रत करने वाला बड़े-बड़े ग्रंथ पढ़ने का दिखावा करने लगा।
भाग 3 — हॉकी का खेल और छिपा जौहरी
एक दिन नए उम्मीदवारों ने आपस में हॉकी खेलने का प्रस्ताव रखा। पढ़े-लिखे भलेमानुस दौड़-कूद के खेल को बच्चों का खेल समझते थे, फिर भी खेल शुरू हो गया। इसी बीच भीड़ में छिपा एक बूढ़ा जौहरी चुपचाप देख रहा था कि इन बगुलों (दिखावटी लोगों) में असली हंस (सच्चा इनसान) कहाँ छिपा है।
भाग 4 — दलदल में फँसी गाड़ी
खेल के मैदान के पास एक नाला था, जिसमें एक ग़रीब किसान की अनाज से भरी बैलगाड़ी दलदल में फँस गई। किसान बार-बार कोशिश कर रहा था, पर गाड़ी नहीं निकल रही थी। हॉकी खेलकर लौट रहे खिलाड़ियों ने उसे देखा, पर उनकी आँखों में सहानुभूति नहीं थी — "उनमें स्वार्थ था, मद था, मगर उदारता और वात्सल्य का नाम भी न था।" तभी उसी समूह में से एक युवक, जिसके पैर में स्वयं आज खेलते हुए चोट लगी थी, किसान की मदद के लिए आगे बढ़ा। उसने कोट उतारा, कीचड़ में उतरकर पहिए को धक्का दिया और किसान के साथ मिलकर गाड़ी को दलदल से बाहर निकाल दिया। किसान ने कृतज्ञता से हाथ जोड़े तो युवक ने हँसकर इनाम माँगा। किसान ने कहा — "नारायण चाहेंगे तो दीवानी आपको ही मिलेगी।" युवक को शक हुआ कि यह वृद्ध किसान कहीं सुजानसिंह तो नहीं — आवाज़ और चेहरा दोनों मिलते-जुलते थे। किसान मुस्कराकर बोला — "गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है।"
भाग 5 — निर्णय की घड़ी
चुनाव का दिन आया। संध्या को राजा के दरबार में सभी उम्मीदवार, रईस और कर्मचारी एकत्र हुए। सरदार सुजानसिंह ने खड़े होकर कहा — "इस पद के लिए ऐसे पुरुष की आवश्यकता थी, जिसके हृदय में दया हो और साथ-साथ आत्मबल भी, जो उदार हो और आपत्ति का वीरता से सामना करे। ऐसे लोग संसार में कम हैं। मैं रियासत के पंडित जानकीनाथ को दीवानी पाने पर बधाई देता हूँ।" सभी उम्मीदवारों की आँखों में ईर्ष्या थी, पर रियासत के लोगों की आँखों में सत्कार। सरदार साहब ने आगे कहा — "जिसने आज घायल होकर भी एक ग़रीब किसान की गाड़ी दलदल से निकाली, उसके हृदय में साहस, आत्मबल और उदारता का वास है। ऐसा व्यक्ति ग़रीबों को कभी नहीं सताएगा। भले ही वह धोखा खा जाए, पर दया और धर्म के मार्ग से कभी नहीं हटेगा।"
— प्रेमचंद
💡 सरल व्याख्या (मुख्य भाव)
कहानी 'परीक्षा' यह संदेश देती है कि सच्चा नेतृत्व-गुण दिखावे से नहीं, संकट के समय व्यक्ति के वास्तविक व्यवहार से पहचाना जाता है। जहाँ बाकी उम्मीदवार केवल एक महीने तक अच्छा बनने का स्वांग रचते रहे, वहीं पंडित जानकीनाथ ने बिना किसी दिखावे के, स्वयं घायल होते हुए भी, एक अजनबी ग़रीब किसान की सच्चे मन से सहायता की — यही उनकी असली 'परीक्षा' थी, जिसे उन्होंने अनजाने में ही पास कर लिया। सरदार सुजानसिंह का किसान के वेश में स्वयं परीक्षा लेना यह दर्शाता है कि सच्ची योग्यता परखने के लिए कभी-कभी परिस्थिति ही सबसे बड़ी कसौटी होती है।
📖 शब्द-संपदा
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| दीवान | राजा या रियासत का प्रधानमंत्री/मुख्य कार्यभार-प्रबंधक |
| नीतिकुशल | नीति (राजनीति/व्यवहार-कुशलता) में निपुण |
| नेकनामी | सुख्याति, अच्छा नाम |
| सुयोग्य | योग्य, उपयुक्त |
| हृष्ट-पुष्ट | स्वस्थ और बलवान |
| मंदाग्नि | पाचन शक्ति का कमज़ोर होना |
| रईस | धनी, उच्च वर्ग का व्यक्ति |
| तहलका मचाना | हलचल पैदा करना |
| दलदल | कीचड़ भरी जगह जहाँ पैर धँस जाए |
| वात्सल्य | स्नेह, ममता |
| आत्मबल | मन/आत्मा की शक्ति, भीतरी साहस |
| उदारता | दरियादिली, खुले दिल का स्वभाव |
| तीक्ष्ण दृष्टि | पैनी नज़र |
| ईर्ष्या | जलन, डाह |
| सत्कार | आदर, सम्मान |
| आपत्ति | संकट, मुसीबत |
📝 पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
मेरी समझ से — (क) सटीक उत्तर चुनिए
- महाराज ने दीवान को ही उनका उत्तराधिकारी चुनने का कार्य उनके किस गुण के कारण सौंपा? सादगी बल उदारता ✔ नीतिकुशलता (राजा साहब अपने अनुभवशील नीतिकुशल दीवान का बड़ा आदर करते थे)
- दीवान साहब द्वारा नौकरी छोड़ने के निश्चय का क्या कारण था? ✔ परमात्मा की याद (और साथ में यह भय कि उम्र के कारण राज-काज में भूल-चूक होने से जीवनभर की नेकनामी मिट्टी में मिल जाएगी) राज-काज सँभालने योग्य शक्ति न रहना बदनामी का भय चालीस वर्ष की नौकरी पूरा हो जाना
शीर्षक
(क) प्रेमचंद ने इस कहानी का नाम 'परीक्षा' क्यों रखा होगा?
क्योंकि पूरी कहानी असल में एक गुप्त परीक्षा के इर्द-गिर्द घूमती है — दीवान सुजानसिंह किसान के वेश में उम्मीदवारों के असली चरित्र की परीक्षा लेते हैं, न कि उनकी डिग्री या दिखावटी व्यवहार की। यह शीर्षक कहानी के मूल भाव को सटीक रूप से व्यक्त करता है।
(ख) आप इस कहानी को कोई अन्य नाम देना चाहें तो क्या देंगे और क्यों?
इसे 'असली कसौटी' या 'दिखावे से परे' जैसा शीर्षक भी दिया जा सकता है, क्योंकि कहानी यही दिखाती है कि सच्चा गुण दिखावटी व्यवहार से नहीं बल्कि वास्तविक परिस्थिति में सामने आता है।
पंक्तियों पर चर्चा
"इस पद के लिए ऐसे पुरुष की आवश्यकता थी, जिसके हृदय में दया हो और साथ-साथ आत्मबल हो..."
अर्थ — सरदार सुजानसिंह यह स्पष्ट करते हैं कि दीवान पद के लिए डिग्री या धन नहीं, बल्कि दया और आंतरिक साहस जैसे दुर्लभ गुण चाहिए, जो विपत्ति में भी व्यक्ति को उदार व निडर बनाए रखें। ऐसे गुणी लोग संसार में कम मिलते हैं, इसलिए उन्हें खोजने के लिए एक वास्तविक परीक्षा आवश्यक थी।
सोच-विचार के लिए
(क) नौकरी की चाह में आए लोगों ने नौकरी पाने के लिए कौन-कौन से प्रयत्न किए?
सभी ने दिखावटी अच्छा व्यवहार अपनाया — मिस्टर 'अ' देर तक सोने की जगह सुबह बगीचे में टहलने लगे; मिस्टर 'द', 'स' और 'ज' नौकरों से रूखा व्यवहार करने वाले अब बिना 'आप' और 'जनाब' कहे बात नहीं करते थे; मिस्टर 'ल' किताबों से नफ़रत करने के बावजूद बड़े-बड़े ग्रंथ पढ़ने का दिखावा करने लगे। सब एक महीने के लिए नम्रता और सदाचार का स्वांग रचने लगे।
(ख) "उसे किसान की सूरत देखते ही सब बातें ज्ञात हो गईं।" खिलाड़ी को कौन-कौन सी बातें पता चल गईं?
उसे शक हुआ कि यह वृद्ध किसान असल में सरदार सुजानसिंह ही हैं — क्योंकि आवाज़ और चेहरा-मोहरा दोनों उनसे मिलते-जुलते थे। उसे यह भी समझ आ गया कि यह सारा दृश्य एक सुनियोजित परीक्षा थी।
(ग) "मगर उन आँखों में सत्कार था, इन आँखों में ईर्ष्या।" किनकी आँखों में सत्कार था और किनकी में ईर्ष्या थी? क्यों?
रियासत के कर्मचारियों और रईसों की आँखों में जानकीनाथ के प्रति सत्कार (आदर) था, क्योंकि उन्होंने निष्पक्ष भाव से उनकी योग्यता को स्वीकार किया। जबकि दीवानी के अन्य उम्मीदवारों की आँखों में ईर्ष्या थी, क्योंकि वे स्वयं वह पद पाना चाहते थे और जानकीनाथ का चुना जाना उनकी हार जैसा प्रतीत हुआ।
खोजबीन
(क) वह वाक्य खोजिए जिससे पता चलता है कि युवक बूढ़े किसान की असलियत पहचान गया था।
"युवक ने किसान की तरफ़ ग़ौर से देखा। उसके मन में एक संदेह हुआ, क्या यह सुजानसिंह तो नहीं हैं? आवाज़ मिलती है, चेहरा-मोहरा भी वही। किसान ने भी उसकी ओर तीक्ष्ण दृष्टि से देखा। शायद उसके दिल के संदेह को भाँप गया।"
(ख) वह वाक्य खोजिए जिससे पता चलता है कि नौकरी के लिए आए लोग किसी तरह बस नौकरी पा लेना चाहते थे।
"लोग समझते थे कि एक महीने का झंझट है, किसी तरह काट लें, कहीं कार्य सिद्ध हो गया तो कौन पूछता है?"
कहानी की रचना
"लोग पसीने से तर हो गए। खून की गर्मी आँख और चेहरे से झलक रही थी।" इस प्रकार की चित्रात्मक भाषा के अन्य उदाहरण खोजिए।
जैसे — "बेचारा इधर-उधर निराश होकर ताकता मगर वहाँ कोई सहायक नज़र न आता", "किसान बार-बार ज़ोर लगाता और बार-बार झुँझलाकर बैलों को मारता, लेकिन गाड़ी उभरने का नाम न लेती", "खिलाड़ियों के कलेजे धड़क रहे थे"। ये वाक्य पाठक की आँखों के सामने दृश्य को जीवंत कर देते हैं।
समस्या और समाधान
(क) महाराज के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा?
समस्या — अनुभवी दीवान सुजानसिंह सेवानिवृत्त होना चाहते थे। समाधान — महाराज ने यह शर्त रखकर इस्तीफा स्वीकार किया कि दीवान स्वयं अपना योग्य उत्तराधिकारी खोजकर लाएँगे।
(ख) दीवान के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा?
समस्या — दिखावटी व्यवहार करने वाले सैकड़ों उम्मीदवारों में से सच्चे चरित्र वाले व्यक्ति को कैसे पहचानें। समाधान — किसान का भेष बनाकर, दलदल में गाड़ी फँसाकर एक वास्तविक कठिन परिस्थिति में सबका असली स्वभाव परखा।
(ग) नौकरी के लिए आए लोगों के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा?
समस्या — पद पाने की होड़ में अपनी योग्यता कैसे साबित करें। अधिकतर का (ग़लत) समाधान — एक महीने के लिए दिखावटी अच्छा व्यवहार अपनाना, जो अंततः असफल रहा। जानकीनाथ का (सही) समाधान — बिना किसी दिखावे के सच्चे मन से एक ज़रूरतमंद की सहायता करना, जो सफल रहा।
मन के भाव
"स्वार्थ था, मद था, मगर उदारता और वात्सल्य का नाम भी न था" — कहानी से ऐसे ही अन्य भाव-वाचक शब्द खोजिए।
दया, साहस, सत्कार, ईर्ष्या, संदेह, आशा, निराशा, विश्वास, आदर, कृतज्ञता — ये सभी मन के भावों के नाम हैं।
विपरीतार्थक शब्द — सही जोड़े
| शब्द | विपरीतार्थक शब्द |
|---|---|
| आना | जाना |
| गुण | अवगुण |
| आदर | अनादर |
| स्वस्थ | अस्वस्थ |
| कम | अधिक |
| दयालु | निर्दयी |
| योग्य | अयोग्य |
| हार | जीत |
| आशा | निराशा |
कहावत — कहानी से जोड़ें
अधजल गगरी छलकत जाए
अर्थ — जिसके पास थोड़ा ज्ञान होता है, वह उसका दिखावा ज़्यादा करता है। यह उन उम्मीदवारों पर लागू होती है जो एक महीने के लिए बनावटी सदाचार दिखाकर स्वयं को श्रेष्ठ सिद्ध करने की कोशिश करते हैं।
अब पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गईं खेत
अर्थ — समय निकल जाने के बाद पछताना व्यर्थ होता है। परिणाम घोषित होने के बाद असफल उम्मीदवारों का पछतावा भी इसी कहावत जैसा होगा।
एक अनार सौ बीमार
अर्थ — किसी एक चीज़ को चाहने वाले अनेक हों। विज्ञापन में एक ही पद था, पर उम्मीदवार हज़ारों आ गए — यही इस कहावत का अर्थ है।
जो गरजते हैं वे बरसते नहीं
अर्थ — जो अधिक बढ़-चढ़कर बोलते या दिखावा करते हैं, वे प्रायः काम नहीं करते। दिखावटी उम्मीदवार इसी कहावत के उदाहरण हैं, जबकि चुपचाप सच्चा काम करने वाले जानकीनाथ इसके विपरीत सिद्ध हुए।
जहाँ चाह, वहाँ राह
अर्थ — सच्ची इच्छा हो तो रास्ता निकल ही आता है। जानकीनाथ की किसान की सच्चे मन से सहायता करने की इच्छा ने ही उन्हें दीवानी तक पहुँचाया।
पाठ से आगे
अनुमान/कल्पना (क) — विज्ञापन किसने निकलवाया होगा?
संभवतः स्वयं सरदार सुजानसिंह ने, महाराज की अनुमति से, रियासत के किसी कर्मचारी के माध्यम से यह विज्ञापन प्रसिद्ध पत्रों में छपवाया होगा।
(ख) विज्ञापन ने पूरे देश में तहलका क्यों मचाया?
क्योंकि बिना डिग्री की शर्त वाला इतना ऊँचा पद दुर्लभ अवसर था; ऐसा सुनहरा मौक़ा किस्मत आज़माने के लिए देशभर से हज़ारों लोगों को आकर्षित कर गया।
अच्छाई और दिखावा (ख) — 'स्वयं को अच्छा दिखाने' और 'स्वयं के अच्छा होने' में क्या अंतर है?
'स्वयं को अच्छा दिखाना' ऊपरी और अस्थायी होता है — यह केवल दूसरों को प्रभावित करने के लिए किया जाता है और मौक़ा मिलते ही बदल जाता है (जैसे कहानी के उम्मीदवार)। जबकि 'स्वयं के अच्छा होना' हृदय से निकलता है और हर परिस्थिति में — चाहे कोई देख रहा हो या नहीं — एक समान बना रहता है (जैसे जानकीनाथ का व्यवहार)।
आपकी बात — यदि आप दीवान के स्थान पर होते तो योग्य व्यक्ति को कैसे चुनते?
मैं भी उम्मीदवारों की एक महीने की परख से संतुष्ट न होकर उन्हें किसी वास्तविक कठिन परिस्थिति में परखने की कोशिश करता — जैसे किसी ज़रूरतमंद की सहायता का अवसर बनाकर — क्योंकि सच्चा चरित्र दबाव में ही उजागर होता है, दिखावे में नहीं।
परिधान तरह-तरह के
पाठ में उल्लेखित/चित्रित कुछ पारंपरिक भारतीय परिधान — दुपट्टा (कंधे या सिर ढकने का वस्त्र), गमछा (कंधे पर डाला जाने वाला छोटा तौलियानुमा वस्त्र), लहँगा (घेरदार लंबा घाघरा), फिरन (कश्मीरी ऊनी लबादा), धोती (कमर में लपेटा जाने वाला वस्त्र), अचकन (लंबा बंद-गले का कोट), पगड़ी (सिर पर बाँधा जाने वाला वस्त्र)। ये सभी भारत के विभिन्न प्रांतों की पारंपरिक पोशाकें हैं — विद्यार्थी अपने घर में इनके प्रचलित नामों की खोज कर सकते हैं।
आज की पहेली — अंतर खोजें
दिए गए दोनों चित्र एक जैसे प्रतीत होते हैं, पर उनमें कुछ अंतर हैं।
यह विशुद्ध रूप से चित्र-आधारित गतिविधि है, इसलिए सटीक अंतर मूल पुस्तक के चित्रों को बारीकी से देखकर ही बताए जा सकते हैं। विद्यार्थी इन बिंदुओं पर ध्यान देकर अंतर खोजें — यातायात संकेत/सिग्नल की स्थिति, टोकरी ले जा रहे व्यक्ति का रंग-रूप, वस्त्रों का पैटर्न, पेड़-इमारतों का विवरण, तथा ज़ेब्रा-क्रॉसिंग की रेखाएँ।
झरोखे से
पाठ में दिए गए क्यू.आर. कोड के माध्यम से एक और कहानी पढ़ी जा सकती है, जो हमारे देश के एक होनहार बालक और उसके गुरु चाणक्य के बारे में है। इसे हिंदी के प्रसिद्ध लेखक जयशंकर प्रसाद ने लिखा है। (यह प्रसिद्ध ऐतिहासिक प्रसंग बालक चंद्रगुप्त और आचार्य चाणक्य की गुरु-शिष्य परंपरा से जुड़ा माना जाता है।)
खोजबीन के लिए
क्यू.आर. कोड की सहायता से प्रेमचंद की इन अन्य कहानियों का आनंद भी लिया जा सकता है — ईदगाह (हामिद नामक बालक की मेले में दादी के लिए चिमटा खरीदने की मार्मिक कहानी), नादान दोस्त, और दो बैलों की कथा (हीरा-मोती बैलों की मित्रता और स्वाभिमान की कहानी)।
🧠 पाठ का सार — माइंड मैप
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्र. 'परीक्षा' कहानी के लेखक कौन हैं?
उ. यह कहानी प्रेमचंद (वास्तविक नाम धनपतराय, 1880–1936) द्वारा लिखी गई है।
प्र. सुजानसिंह ने नए दीवान की परख किस तरह की?
उ. उन्होंने स्वयं एक बूढ़े किसान का भेष धारण कर, दलदल में बैलगाड़ी फँसाकर देखा कि कौन उम्मीदवार सच्चे मन से मदद के लिए आगे आता है।
प्र. दीवान पद के लिए किसे चुना गया और क्यों?
उ. पंडित जानकीनाथ को चुना गया, क्योंकि उन्होंने स्वयं घायल होते हुए भी बिना किसी स्वार्थ के एक ग़रीब किसान की सहायता की, जो उनकी सच्ची दया और आत्मबल को दर्शाता है।
प्र. कहानी 'परीक्षा' से हमें क्या सीख मिलती है?
उ. सच्ची योग्यता दिखावे से नहीं, बल्कि संकट के समय किए गए वास्तविक व्यवहार से पहचानी जाती है।
🔗 कक्षा 6 मल्हार — सभी पाठ आपस में जुड़े हुए
इस पाठ के साथ-साथ कक्षा 6 हिंदी मल्हार पुस्तक के बाकी सभी पाठ भी पढ़ें:
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