विस्मयादिबोधक क्या है? परिभाषा, भेद और उदाहरण (कक्षा 6, 7, 8) जब हम अचानक खुश होते हैं तो मुँह से निकलता है — "वाह!" जब चोट लगती है तो निकलता है — "आह!" जब कोई अचानक सामने आ जाए तो हम कह उठते हैं — "अरे!" ये सारे शब्द हमारे मन के अचानक उठे भाव को प्रकट करते हैं, और हिंदी व्याकरण में इन्हें ही विस्मयादिबोधक कहा जाता है। आइए इस लेख में इसे बहुत आसान भाषा में, उदाहरणों, चित्रों और एक माइंड मैप के साथ समझते हैं। विस्मयादिबोधक की परिभाषा विस्मयादिबोधक उन शब्दों को कहते हैं जिनसे बोलने वाले के मन का अचानक उठा भाव — जैसे हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा, भय या स्वीकृति — प्रकट होता है। ये शब्द वाक्य के दूसरे शब्दों से व्याकरण के नियम से नहीं जुड़ते, यानी इनका कोई लिंग, वचन या कारक नहीं होता। ये अपने आप में स्वतंत्र होते हैं। उदाहरण: वाह! क्या सुंदर दृश्य है। — यहाँ "वाह" शब्द बोलने वाले की खुशी को दर्शाता है, यही विस्मयादिबोधक है। विस्मयादिबोधक चिन्ह (!) कहाँ और कैसे लगाएँ विस्मयादिबोधक शब्द के तुरंत बाद विस्मयादिबोधक चिन्ह "!...