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रीढ़ की हड्डी एकांकी — जगदीशचंद्र माथुर | सारांश, व्याख्या, अभ्यास प्रश्न उत्तर, महत्वपूर्ण प्रश्न, Class 9, कक्षा-9

रीढ़ की हड्डी — जगदीशचंद्र माथुर | संपूर्ण अध्ययन सामग्री (व्याख्या, अभ्यास उत्तर, प्रश्नोत्तरी)

रीढ़ की हड्डी

(एकांकी — जगदीशचंद्र माथुर) — संपूर्ण अध्ययन सामग्री
नोट: इस सामग्री में सभी प्रश्न काले रंग में तथा उनके उत्तर नीले रंग में दिए गए हैं। 25 वस्तुनिष्ठ, 20 अति लघु, 20 लघु तथा 10 महत्वपूर्ण प्रश्न पाठ्यपुस्तक के 'अभ्यास' खंड से अलग हैं।

लेखक परिचय

जगदीशचंद्र माथुर

जगदीशचंद्र माथुर

जन्म: सन् 1917, शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश।  निधन: सन् 1978।

जगदीशचंद्र माथुर का जन्म सन् 1917 में शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ। उनकी शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हुई। वे इंडियन सिविल सर्विस में भी चयनित हुए। बिहार राज्य के शिक्षा सचिव, आकाशवाणी के महानिदेशक, सूचना और प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव आदि प्रशासनिक पदों पर कार्य करते हुए वे आजीवन साहित्य-सृजन में सक्रिय रहे।

प्रयाग में अध्ययन के दौरान ही जगदीशचंद्र माथुर ने लेखन आरंभ कर दिया था, उस समय की चर्चित पत्रिकाओं 'चाँद' और 'रूपाभ' आदि में उनके लिखे नाटक-एकांकी छपने लगे थे। हिंदी नाटक और रंगमंच के विकास में उनके एकांकी व नाटकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐतिहासिक नाटकों के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक समस्याओं से जुड़े एकांकी-नाटक भी लिखे। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं — भोर का तारा, कोणार्क, ओ मेरे सपने, शारदीया, पहला राजा, दस तस्वीरें, जिन्होंने जीना जाना। इनकी संपूर्ण रचनाएँ 'जगदीशचंद्र माथुर रचनावली' (चार खंड) में संकलित हैं। 'कोणार्क' उनका सर्वाधिक चर्चित और मंचित नाटक है। सन् 1978 में उनका निधन हो गया।

एकांकी परिचय: 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी भारतीय समाज में परंपरागत विवाह की व्यवस्था और स्त्रियों की शिक्षा को लेकर रूढ़िगत सोच पर चोट करती है। इस एकांकी की रचना सन् 1939 में की गई। उस समय भारतीय समाज में शिक्षा और अन्य कार्यक्षेत्रों में स्त्रियों को समान अवसर नहीं मिलते थे। इस एकांकी के माध्यम से विवाह के लिए कम पढ़ी-लिखी लड़कियों की माँग, विवाह में लेन-देन जैसी सामाजिक कुरीतियों को उजागर किया गया है। एकांकी की मुख्य पात्र उमा पढ़ी-लिखी सशक्त महिला का प्रतिनिधित्व करती है।

पात्र परिचय

पात्रपरिचय
उमालड़की — रामस्वरूप व प्रेमा की शिक्षित, स्वाभिमानी बी.ए. पास बेटी
रामस्वरूप (बाबू)लड़की का पिता — बाहर से आधुनिक, भीतर से रूढ़िवादी विचारों वाला
प्रेमालड़की की माँ — शिक्षा को 'जंजाल' मानने वाली पारंपरिक सोच की महिला
शंकरलड़का — मेडिकल कॉलेज का विद्यार्थी, दोहरे चरित्र वाला
गोपालप्रसादलड़के का पिता — दिखावटी शिष्टाचार व रूढ़िवादी विचारों वाला वकील
रतनरामस्वरूप का घरेलू सहायक

एकांकी का माइंड मैप

  • रीढ़ की हड्डी
    • लेखक व विधा
      • जगदीशचंद्र माथुर
      • एकांकी (1939)
      • व्यंग्यात्मक शैली
      • कोणार्क (प्रसिद्ध नाटक)
    • पात्र
      • उमा
      • रामस्वरूप
      • प्रेमा
      • शंकर
      • गोपालप्रसाद
      • रतन
    • कथानक
      • विवाह-प्रस्ताव की तैयारी
      • गोपालप्रसाद-शंकर का आगमन
      • उमा की परीक्षा
      • उमा का प्रतिकार
      • शंकर की पोल खुलना
      • नाटकीय अंत
    • मूल भाव
      • स्त्री-शिक्षा का महत्व
      • दिखावटी आधुनिकता पर व्यंग्य
      • आत्म-सम्मान
      • सामाजिक कुरीतियाँ

कथासार एवं व्याख्या

भूमिका

'रीढ़ की हड्डी' जगदीशचंद्र माथुर द्वारा सन् 1939 में रचित एक व्यंग्यात्मक एकांकी है, जो भारतीय समाज में प्रचलित परंपरागत विवाह-व्यवस्था और स्त्री-शिक्षा को लेकर रूढ़िगत सोच पर तीखा प्रहार करती है। उस समय समाज में लड़की के अधिक पढ़े-लिखे होने को विवाह में बाधा माना जाता था। इस एकांकी की नायिका उमा, शिक्षित व स्वाभिमानी स्त्री के रूप में इन्हीं रूढ़ियों को चुनौती देती है।

विवाह-प्रस्ताव की तैयारी

एकांकी का आरंभ एक साधारण सजे कमरे में होता है, जहाँ बाबू रामस्वरूप अपने घरेलू सहायक रतन के साथ मिलकर वर पक्ष के स्वागत की तैयारी में जुटे हैं — तख्त बिछवाना, मेज़पोश ठीक करना, फूल सजाना। इसी बीच उनकी पत्नी प्रेमा आती हैं, जो किसी काम में व्यस्त जान पड़ती हैं। रामस्वरूप व प्रेमा के बीच बातचीत से पता चलता है कि उमा (उनकी बेटी) पढ़ाई-लिखाई के कारण 'मुँह फुलाए' बैठी है, क्योंकि उससे झूठ बुलवाने या स्वयं को कम पढ़ा-लिखा दिखाने के लिए कहा गया है। प्रेमा शिक्षा को 'पढ़ाई-लिखाई का जंजाल' मानती हैं, जबकि रामस्वरूप बाहर से आधुनिक बर्ताव दिखाने के बावजूद बेटी की शिक्षा को छिपाना चाहते हैं।

रामस्वरूप का दोहरा व्यक्तित्व

रामस्वरूप के व्यवहार में एक स्पष्ट अंतर्द्वंद्व दिखाई देता है — वे वर पक्ष के सामने आधुनिक व सुसंस्कृत दिखने के लिए बाजा-सितार मँगवाते हैं, विलायती चाय का प्रस्ताव रखते हैं, पर भीतर ही भीतर बेटी की उच्च शिक्षा को गोपालप्रसाद से छिपाकर उसे केवल मैट्रिक-पास बताते हैं। यह दिखावटी आधुनिकता और वास्तविक रूढ़िवादी सोच के बीच का द्वंद्व एकांकी का प्रमुख व्यंग्य-बिंदु है।

गोपालप्रसाद और शंकर का आगमन

वर पक्ष के रूप में गोपालप्रसाद अपने पुत्र शंकर के साथ आते हैं। गोपालप्रसाद की बातचीत से उनकी चतुराई, चालबाजी और दिखावटी शिष्टाचार झलकता है — वे बार-बार 'हँ-हँ-हँ' करके खुशामद व औपचारिकता दिखाते हैं। बातचीत के दौरान दोनों पुरानी पीढ़ी की डींगें हाँकते हैं — पुराने जमाने की सेहत, पढ़ाई और अनुशासन की तारीफ करते हैं, नई पीढ़ी को कमजोर बताते हैं।

चाय-नाश्ते के दौरान हास्य-व्यंग्य

चाय-नाश्ते के दौरान गोपालप्रसाद चीनी पर बढ़ते टैक्स की बात करते हैं और मजाक में कहते हैं कि सरकार को औरतों की खूबसूरती पर टैक्स लगाना चाहिए, जिस पर सब हँस पड़ते हैं। इस हल्के-फुल्के संवाद के बीच लेखक ने समाज की सतही व दिखावटी बातचीत की शैली पर सूक्ष्म व्यंग्य किया है।

गोपालप्रसाद की रूढ़िवादी सोच

गोपालप्रसाद स्पष्ट रूप से कहते हैं कि लड़की को अधिक पढ़ा-लिखा नहीं होना चाहिए, केवल मैट्रिक-पास होना ही काफी है। वे तर्क देते हैं — "मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं; शेर के बाल होते हैं, शेरनी के नहीं", यानी कुछ बातें केवल पुरुषों के लिए होती हैं, ऊँची शिक्षा भी उन्हीं में से एक है। यह संवाद एकांकी के केंद्रीय व्यंग्य — स्त्री-पुरुष भेदभाव — को उजागर करता है।

उमा का आगमन और परीक्षा

उमा को पान की तश्तरी लेकर बुलाया जाता है। सादगी भरे कपड़ों व झुकी गर्दन के साथ आई उमा से गाना-बजाना, सितार वादन आदि के बारे में पूछा जाता है — मानो किसी वस्तु की तरह उसकी 'परीक्षा' ली जा रही हो। उमा मीरा का प्रसिद्ध गीत सितार पर गाना शुरू करती है, पर शंकर की झेंपती-सी आँखों से नजर मिलते ही रुक जाती है। जब पान देते समय उसका चश्मा दिखता है, तो सब चौंक उठते हैं और रामस्वरूप का झूठ (आँखें दुखने का बहाना) पकड़ में आने लगता है।

उमा का साहसिक प्रतिकार

जब गोपालप्रसाद इनाम-विनाम व पढ़ाई के बारे में रूखे स्वर में सवाल करते हैं, तो उमा चुप्पी तोड़कर दृढ़ स्वर में जवाब देती है — जैसे कुर्सी-मेज बिकते समय दुकानदार केवल खरीदार को दिखाता है, वैसे ही यह भी दिखावे की परीक्षा है, मानो लड़कियाँ कसाई द्वारा जाँची जाने वाली बेबस भेड़-बकरियाँ हों। वह स्पष्ट कहती है कि वह बी.ए. पास है, कॉलेज में पढ़ी है, न कोई पाप किया न कोई चोरी — उसे अपनी इज्जत व मान का पूरा खयाल है।

शंकर की पोल खुलना

इसी क्रम में उमा शंकर की सच्चाई उजागर कर देती है — पिछली फरवरी में शंकर लड़कियों के हॉस्टल के आसपास घूमता पकड़ा गया था और शर्मिंदा होकर मुँह छिपाकर भाग गया था। यह सुनकर गोपालप्रसाद स्तब्ध रह जाते हैं, क्योंकि उन्हें रामस्वरूप ने बेटी की शिक्षा के विषय में झूठ बताया था, जबकि पुत्र का यह आचरण सामने आ जाता है।

गोपालप्रसाद का क्रोध और प्रस्थान

अपमानित व क्रोधित गोपालप्रसाद रामस्वरूप पर दगा करने का आरोप लगाते हैं और अपनी छड़ी माँगकर बेटे के साथ जाने की तैयारी करते हैं। जाते-जाते उमा व्यंग्यात्मक टिप्पणी करती है — "घर जाकर जरा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं — यानी बैकबोन, बैकबोन!" यह वाक्य एकांकी का केंद्रीय संदेश है — नैतिक साहस व चारित्रिक दृढ़ता ('रीढ़ की हड्डी') का असली महत्व शिक्षा या दिखावे से कहीं अधिक है।

नाटकीय अंत

गोपालप्रसाद व शंकर के जाने के बाद उमा की खामोशी सिसकियों में बदल जाती है। घबराई प्रेमा उसे रोता देख चिंतित हो उठती हैं। ठीक इसी गंभीर क्षण में रतन 'बाबूजी, मक्खन!' कहते हुए प्रवेश करता है और परदा गिर जाता है। यह अप्रत्याशित हास्यास्पद अंत पूरी घटना की विडंबना को उभारता है — जिस मक्खन की चिंता में सारा नाटक हुआ, वह अंततः बेमानी साबित होता है।

निष्कर्ष

'रीढ़ की हड्डी' एकांकी सजीव संवादों, हास्य-व्यंग्य व नाटकीय स्थितियों के माध्यम से स्त्री-शिक्षा के महत्व, दिखावटी आधुनिकता की पोल और विवाह-व्यवस्था में व्याप्त कुरीतियों को प्रभावी ढंग से उजागर करती है। उमा का चरित्र आत्मसम्मान, साहस व शिक्षा की सच्ची शक्ति का प्रतीक बनकर उभरता है।

पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर

रचना से संवाद — मेरे उत्तर मेरे तर्क

1. एकांकी 'रीढ़ की हड्डी' का शीर्षक किसका प्रतीक है?
उत्तर: (ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का। तर्क — 'रीढ़ की हड्डी' शारीरिक अंग के प्रतीकात्मक अर्थ में यहाँ आत्म-सम्मान, नैतिक साहस व चारित्रिक दृढ़ता के लिए प्रयुक्त हुआ है, विशेषकर उमा की अंतिम व्यंग्यात्मक टिप्पणी में।
2. 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी में किस पर व्यंग्य किया गया है?
उत्तर: (घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर। तर्क — एकांकी विवाह में लड़की की शिक्षा के प्रति नकारात्मक सोच, दिखावटी आधुनिकता व रूढ़िवादी मान्यताओं जैसी समाज की अनुचित मान्यताओं पर सीधा व्यंग्य करता है।
3. "घर जाकर जरा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं" यह वाक्य शंकर की किस छवि को उजागर करता है?
उत्तर: (क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता। तर्क — शंकर लड़कियों के हॉस्टल के आसपास चोरी-छिपे घूमता था और पकड़े जाने पर मुँह छिपाकर भाग गया था, जो नैतिक साहस की कमी व चारित्रिक दुर्बलता को दर्शाता है।
4. "जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी.ए. पास किया है।" उमा की दृष्टि में शिक्षा प्राप्त करने का सही अर्थ है?
उत्तर: (घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना। तर्क — उमा शिक्षा के बल पर ही निर्भीकता से अपने विचार व्यक्त करती है और अन्याय का प्रतिकार करती है, जो दर्शाता है कि उसके लिए शिक्षा का सच्चा अर्थ आत्मबल व स्वतंत्र विचार है।
5. गोपालप्रसाद और रामस्वरूप में क्या-क्या समानताएँ हैं?
उत्तर: (ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं। तर्क — दोनों पात्र बाहरी रूप से आधुनिक व्यवहार दिखाते हैं (जैसे बाजा-सितार का प्रबंध), पर भीतर से रूढ़िवादी विचार व दिखावटी परंपराओं में जकड़े हैं।
6. इस एकांकी की संवाद शैली मुख्यतः कैसी है?
उत्तर: (ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण। तर्क — एकांकी की भाषा बोलचाल की, सहज व हास्य-व्यंग्य से भरपूर है, जो पात्रों के स्वभाव व सामाजिक स्थितियों को सजीवता से उजागर करती है।

मेरी समझ मेरे विचार

1. बाबू रामस्वरूप समाज में आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं, जबकि उनके विचार रूढ़िवादी हैं। इस अंतर्द्वंद्व के उदाहरण एकांकी में से खोजकर लिखिए।
उत्तर: रामस्वरूप बाहर से गोपालप्रसाद व शंकर के सामने अत्यंत विनम्र, आधुनिक व्यवहार दिखाते हैं — बाजा-सितार मँगवाना, विलायती चाय की पेशकश करना, बेटी को गाना-बजाना सिखाना; परंतु भीतर ही भीतर वे बेटी की शिक्षा को छिपाना चाहते हैं, उससे झूठ बुलवाने की कोशिश करते हैं और गोपालप्रसाद के सामने उमा को केवल मैट्रिक-पास बताते हैं — यह उनके दिखावटी आधुनिकता व वास्तविक रूढ़िवादी सोच के बीच का अंतर्द्वंद्व है।
2. 'रीढ़ की हड्डी' का संदर्भ दो अलग-अलग पात्रों के लिए भिन्न-भिन्न अर्थों में आया है, उनकी पहचान कीजिए और लिखिए।
उत्तर: एकांकी में 'रीढ़ की हड्डी' शारीरिक अर्थ में गोपालप्रसाद व शंकर द्वारा 'बैकबोन' यानी मेरुदंड की सामान्य बात के रूप में प्रयुक्त हुआ है, जबकि अंत में उमा इसी शब्द का प्रयोग व्यंग्यात्मक (प्रतीकात्मक) अर्थ में करती है — यह पूछते हुए कि शंकर की 'रीढ़ की हड्डी' यानी नैतिक साहस व चारित्रिक दृढ़ता है भी या नहीं।
3. "मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।" प्रेमा की इस सोच से उस समय की स्त्री-शिक्षा की स्थिति के विषय में क्या पता चलता है?
उत्तर: इससे पता चलता है कि उस समय के समाज में, स्वयं स्त्रियों में भी शिक्षा के प्रति नकारात्मक धारणा व्याप्त थी। प्रेमा जैसी माँएँ स्वयं कम पढ़ी-लिखी होने के कारण पढ़ाई को अनावश्यक 'जंजाल' मानती थीं और लड़कियों की शिक्षा को विवाह में बाधा समझती थीं, जो उस युग की स्त्री-शिक्षा के प्रति समाज की उपेक्षापूर्ण सोच को दर्शाता है।
4. लेखक ने 'रीढ़ की हड्डी' शब्द को एकांकी के शीर्षक के रूप में क्यों चुना होगा? यदि आप इस एकांकी का दूसरा शीर्षक रखना चाहें, जो इसकी मुख्य बात को दर्शाए, तो वह क्या होगा और क्यों?
उत्तर: लेखक ने यह शीर्षक इसलिए चुना क्योंकि यह एकांकी के मूल भाव — आत्म-सम्मान व नैतिक दृढ़ता के महत्व — को सटीक व व्यंग्यात्मक ढंग से व्यक्त करता है। विद्यार्थी अपनी कल्पना से दूसरा शीर्षक सुझा सकते हैं, जैसे 'सच्चा परिचय' या 'शिक्षा का सम्मान', क्योंकि ये भी एकांकी की मूल भावना को दर्शाते हैं। (विद्यार्थी अपने तर्क सहित कोई भी उचित शीर्षक सुझाएँ।)

विधा से संवाद — एकांकी की पड़ताल

'रीढ़ की हड्डी' से संबंधित नीचे दिए गए बिंदुओं से संबंधित एक-एक उदाहरण —

1. एकांकी का नाम
उत्तर: रीढ़ की हड्डी।
2. लेखक का नाम
उत्तर: जगदीशचंद्र माथुर।
3. पात्र
उत्तर: उमा, रामस्वरूप, प्रेमा, शंकर, गोपालप्रसाद, रतन।
4. परिवेश/देश-काल
उत्तर: सन् 1939 के आसपास का भारतीय मध्यवर्गीय घरेलू परिवेश, जहाँ विवाह-प्रस्ताव हेतु वर पक्ष का आगमन होता है।
5. रंग-निर्देश/मंच-निर्देश
उत्तर: "(मामूली तरह से सजा हुआ एक कमरा। अंदर के दरवाजे से आते हुए जिन महाशय की पीठ नजर आ रही है, वह अधेड़ उम्र के मालूम होते हैं...)"
6. संवाद-निर्देश
उत्तर: "(जरा तेज आवाज़ में)", "(हँसता है)", "(चौंककर)", "(खँखारकर)" जैसे कोष्ठक-निर्देश।
7. समस्या
उत्तर: विवाह हेतु लड़की की योग्यता आँकते समय अशिक्षा को गुण व शिक्षा को दोष मानने की सामाजिक मानसिकता।
8. संवाद
उत्तर: "क्या जवाब दूँ बाबूजी! जब कुर्सी-मेज बिकती है तब दुकानदार कुर्सी-मेज से कुछ नहीं पूछता, सिर्फ खरीदार को दिखला देता है।"
9. मुख्य विचार
उत्तर: स्त्री-शिक्षा का महत्व, दिखावटी आधुनिकता पर व्यंग्य, तथा आत्म-सम्मान की रक्षा।
10. समाधान/परिणाम
उत्तर: उमा द्वारा शंकर की सच्चाई उजागर करने पर गोपालप्रसाद क्रोधित होकर चले जाते हैं — झूठ व दिखावे की हार होती है।
कक्षा-गतिविधि: समूह के साथ एकांकी के किसी एक दृश्य का चुनाव कर उसे कक्षा में अभिनीत कीजिए।
उत्तर: यह अभिनय-आधारित कक्षा-गतिविधि है — विद्यार्थी समूह बनाकर एकांकी के किसी दृश्य की तैयारी करें और उचित हाव-भाव के साथ उसे कक्षा में प्रस्तुत करें, आवश्यकतानुसार रंग-निर्देशों में परिवर्तन भी कर सकते हैं।
मेरी टिप्पणी: उमा द्वारा शंकर के लिए कही गई बात ("...आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं") पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: उमा की यह टिप्पणी अत्यंत सटीक व साहसिक है। यह स्पष्ट करती है कि सच्चा 'चरित्र' केवल दिखावे या डिग्री से नहीं, बल्कि नैतिक साहस व सच्चाई से बनता है। उमा ने संक्षिप्त शब्दों में शंकर के दोहरे चरित्र को बेनकाब कर दिया, जो उसकी स्पष्टवादिता व आत्मविश्वास को दर्शाता है।

विषयों से संवाद — तुलना और विचार

1. "गोपालप्रसाद: भला पूछिए इन अक्ल के ठेकेदारों से कि क्या लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात है।" एकांकी में उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ पात्रों के व्यवहार में लड़कों तथा लड़कियों के प्रति भिन्न-भिन्न दृष्टि अभिव्यक्त हुई है। अब यह भी लिखिए कि आप इस भिन्नता को किस प्रकार समझते हैं।
उत्तर: एकांकी में गोपालप्रसाद कहते हैं — "मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं; शेर के बाल होते हैं, शेरनी के नहीं", "मर्द के दाढ़ी होती है, औरत के नहीं" — जिससे स्त्री-पुरुष के स्वाभाविक भेद को शिक्षा जैसे अधिकार से जोड़ा गया है। इसके विपरीत शंकर की गलतियों (हॉस्टल के आसपास घूमना) को नजरअंदाज किया जाता है, जबकि लड़की की शिक्षा को दोष माना जाता है। यह भिन्नता उस समय के समाज की दोहरी मानसिकता को दर्शाती है, जहाँ लड़कों की गलतियाँ माफ कर दी जाती थीं पर लड़कियों पर अनुचित बंदिशें लगाई जाती थीं।
2. "मुझे अपनी इज्जत, अपने मान का खयाल है। लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।" एकांकी में उमा अपने अधिकार और विचार खुलकर व्यक्त करती है। इससे उमा के व्यक्तित्व के विषय में क्या-क्या पता चलता है? आपके विचार से उसके व्यक्तित्व में ये विशेषताएँ कैसे आई होंगी?
उत्तर: इससे पता चलता है कि उमा साहसी, स्वाभिमानी, स्पष्टवादी व निर्भीक स्वभाव की है, जो अन्याय के सामने चुप नहीं रहती। उसके व्यक्तित्व में ये विशेषताएँ उसकी शिक्षा (बी.ए. पास) व आत्मविश्वास के कारण आई होंगी, जिसने उसे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक व निर्भीक बनाया।

सृजन — एकांकी का विस्तार

1. एकांकी के अंत में रतन कहता है — "बाबूजी, मक्खन!" और परदा गिर जाता है। लेखक ने इस संवाद से एकांकी का अंत क्यों किया होगा?
उत्तर: लेखक ने इस साधारण-से लगने वाले संवाद से एकांकी का अंत हास्य-व्यंग्य उत्पन्न करने के लिए किया है। जिस गंभीर व तनावपूर्ण क्षण में यह घटित होता है, उसमें रतन का निरर्थक ढंग से 'मक्खन' कहना स्थिति की विडंबना व हास्यास्पदता को उभारता है — जिस मक्खन की चिंता में सारा नाटक हुआ, वह अंततः बेमानी साबित हुआ।
2. एकांकी में यदि परदा दोबारा उठ जाए तो अगला दृश्य क्या होगा? अनुमान लगाइए और लिखिए।
उत्तर: यह रचनात्मक/कल्पनात्मक प्रश्न है — विद्यार्थी अपनी कल्पना से अगला दृश्य लिखें, जैसे परिवार में उमा को सांत्वना देना, रामस्वरूप का आत्मचिंतन करना, या उमा के साहस की सराहना होना।

भाषा से संवाद — व्याकरण की बात

मेरे शब्द
एकांकी में से पाँच ऐसे शब्द चुनकर रेखांकित कर लीजिए जो आपके लिए बिल्कुल नए थे। उन शब्दों वाले वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। अब उन शब्दों के अर्थ अपने अनुमान से लिखिए। इसके बाद उनके अर्थ शब्दकोश में से देखकर लिखिए।
उत्तर: यह व्यक्तिगत गतिविधि है — विद्यार्थी एकांकी में से पाँच नए शब्द (जैसे दकियानूसी, फितरती, ठठोली, खासियत, तकल्लुफ) चुनकर रेखांकित करें, उनके वाक्य बनाएँ, अपने अनुमान से अर्थ लिखें और फिर शब्दकोश से अर्थ मिलाकर लिखें।
भाषा में मुहावरे

एकांकी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में जहाँ-जहाँ मुहावरे आए हैं, उन्हें पहचानकर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए —

1. "उनके पीछे-पीछे भीगी बिल्ली की तरह रतन आ रहा है — खाली हाथ।"
उत्तर: मुहावरा — भीगी बिल्ली बनना (डरा-सहमा होना)। नया वाक्य: चोरी पकड़े जाने पर वह भीगी बिल्ली बन गया।
2. "लेकिन वह तुम्हारी लाडली बेटी तो मुँह फुलाए पड़ी है।"
उत्तर: मुहावरा — मुँह फुलाना (नाराज होना)। नया वाक्य: थोड़ी-सी बात पर वह मुँह फुलाकर बैठ गई।
3. "और तुम उसकी माँ, किस मर्ज की दवा हो?"
उत्तर: मुहावरा — किस मर्ज की दवा होना (किसी काम का न होना)। नया वाक्य: तुम भी किस मर्ज की दवा हो, कभी समय पर काम ही नहीं करते।
4. "तुम्हीं ने उसे पढ़ा-लिखाकर इतना सिर चढ़ा रखा है।"
उत्तर: मुहावरा — सिर चढ़ाना (बहुत लाड़ करना, बिगाड़ना)। नया वाक्य: माता-पिता ने बेटे को इतना सिर चढ़ा रखा है कि वह किसी की बात नहीं सुनता।
5. "मगर तुम तो अभी से सब-कुछ उगले देती हो।"
उत्तर: मुहावरा — उगल देना (राज खोल देना)। नया वाक्य: पूछताछ में उसने सारा भेद उगल दिया।
6. "यह लीजिए, आप तो मुझे काँटों में घसीटने लगे।"
उत्तर: मुहावरा — काँटों में घसीटना (मुश्किल में डालना)। नया वाक्य: उसने बेवजह मुझे इस झगड़े के काँटों में घसीट दिया।
7. "बाबू रामस्वरूप, आपने मेरी इज्जत उतारने के लिए मुझे यहाँ बुलाया था?"
उत्तर: मुहावरा — इज्जत उतारना (अपमान करना)। नया वाक्य: सबके सामने उसकी इज्जत उतार दी गई।
8. "लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।"
उत्तर: मुहावरा — मुँह छिपाकर भागना (शर्मिंदा होकर भाग जाना)। नया वाक्य: चोर पुलिस को देखकर मुँह छिपाकर भाग गया।
संदर्भ में शब्द
"बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।" एकांकी में इस कहावत का प्रयोग रामस्वरूप द्वारा गोपालप्रसाद और शंकर की नकारात्मक प्रवृत्ति का उल्लेख करने के लिए किया गया है। लेकिन इस कहावत का प्रयोग सकारात्मक अर्थ में भी किया जा सकता है। अब आप इस नए प्रयोग से वाक्य बनाकर लिखिए।
उत्तर: सकारात्मक अर्थ में उदाहरण वाक्य — "रमेश अपने पिता की तरह ही ईमानदार व मेहनती निकला, सच है, बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।"

गतिविधियाँ — आप भी संवाददाता

1. मान लीजिए आप एक संवाददाता हैं और आपको उमा की कहानी का पता चलता है। अब आप उमा तथा अन्य पात्रों का साक्षात्कार लेकर उनका पक्ष दर्शकों के सामने प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: यह भूमिका-निर्वाह गतिविधि है — विद्यार्थी संवाददाता बनकर उमा व अन्य पात्रों का काल्पनिक साक्षात्कार तैयार करें और कक्षा में प्रस्तुत करें।
2. मान लीजिए आप उमा के घर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं जब उसके घर में शंकर आया था। इस पूरे घटनाक्रम को जीवंत प्रसारण (लाइव रिपोर्ट) की तरह प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: यह भूमिका-निर्वाह गतिविधि है — विद्यार्थी लाइव रिपोर्टिंग की शैली में शंकर के आगमन से लेकर गोपालप्रसाद के जाने तक की पूरी घटना का जीवंत वर्णन प्रस्तुत करें।

भाषा संगम

"मक्खन वाले की दुकान दूर है" — 'मक्खन' शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित विभिन्न भारतीय भाषाओं में शब्दों की सूची दी गई है। इनके अतिरिक्त यदि आप 'मक्खन' शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए। उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
उत्तर: यह व्यक्तिगत/भाषा-आधारित गतिविधि है — विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में "मक्खन वाले की दुकान दूर है" वाक्य लिखें तथा 'मक्खन' शब्द के लिए अपनी भाषा में प्रचलित शब्द बताएँ।

खोजबीन

दिए गए लिंक का प्रयोग करके एकांकी विधा और 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी के विषय में और अधिक जान-समझ सकते हैं।
उत्तर: यह स्वाध्याय गतिविधि है — विद्यार्थी पाठ्यपुस्तक में दिए गए लिंकों के माध्यम से एकांकी विधा व 'रीढ़ की हड्डी' के विषय में अतिरिक्त जानकारी प्राप्त करके सहपाठियों के साथ चर्चा करें।

शब्द-संपदा

शब्दअर्थ
अधेड़आधी उम्र का, ढलती उम्र का
तख्तलकड़ी की बड़ी चौकी, सिंहासन
गंदुमीगेहुँए रंग का
डाटटेक, अटकाव
जंजालझंझट, झमेला, संसार का बखेड़ा
ठठोलीहँसी, परिहास
करीने/करीनाढंग, क्रम, मेल, समानता
दकियानूसीपुराने विचार का, पुराना
तालीमशिक्षा
चौपटनष्ट, चारों ओर से खुला हुआ
दस्तकखटखटाना, हाथ का हलका आघात या धक्का, ताली
फितरतीचालबाज, प्रकृतिगत
खीस निपोरना/खीस निकालनाइस तरह हँसना कि दाँत दिखाई दें, बेढंगी हँसी हँसना
खासियत/खासीयतविशेषता, गुण, प्रभाव, प्रकृति, स्वभाव
तशरीफ़आदर, सम्मान, महत्व
मार्जिनसीमा, किनारा
बालाईऊपर का हिस्सा
तकल्लुफबनावट, शिष्टाचार
माफ़िकअनुकूल, अनुसार
मुखातिबसंबोधन करने वाला, बात करने वाला
निहायतअत्यधिक, अत्यंत, बहुत ज्यादा
जायचाजन्मपत्री
अर्ज़निवेदन, प्रार्थना, चौड़ाई
अधीरधैर्य रहित, उतावला, आकुल, दृढ़ता रहित

25 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (बहुविकल्पीय) उत्तर सहित

(ये प्रश्न पाठ्यपुस्तक के अभ्यास खंड से अलग हैं।)

1. 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी के लेखक कौन हैं?
(क) प्रेमचंद   (ख) जगदीशचंद्र माथुर   (ग) भारतेंदु हरिश्चंद्र   (घ) मोहन राकेश
उत्तर: (ख) जगदीशचंद्र माथुर
2. जगदीशचंद्र माथुर का जन्म किस वर्ष हुआ?
(क) 1907   (ख) 1917   (ग) 1927   (घ) 1937
उत्तर: (ख) सन् 1917
3. जगदीशचंद्र माथुर का जन्म-स्थान कौन-सा है?
(क) शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश   (ख) इंदौर, मध्यप्रदेश   (ग) पटना   (घ) लखनऊ
उत्तर: (क) शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश
4. जगदीशचंद्र माथुर की शिक्षा किस विश्वविद्यालय से हुई?
(क) लखनऊ विश्वविद्यालय   (ख) इलाहाबाद विश्वविद्यालय   (ग) दिल्ली विश्वविद्यालय   (घ) बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
उत्तर: (ख) इलाहाबाद विश्वविद्यालय
5. जगदीशचंद्र माथुर किस सेवा में चयनित हुए?
(क) भारतीय पुलिस सेवा   (ख) इंडियन सिविल सर्विस   (ग) भारतीय वन सेवा   (घ) भारतीय राजस्व सेवा
उत्तर: (ख) इंडियन सिविल सर्विस
6. बिहार राज्य में जगदीशचंद्र माथुर किस पद पर रहे?
(क) मुख्य सचिव   (ख) शिक्षा सचिव   (ग) स्वास्थ्य सचिव   (घ) वित्त सचिव
उत्तर: (ख) शिक्षा सचिव
7. जगदीशचंद्र माथुर किस संस्था के महानिदेशक रहे?
(क) दूरदर्शन   (ख) आकाशवाणी   (ग) प्रसार भारती   (घ) साहित्य अकादमी
उत्तर: (ख) आकाशवाणी
8. जगदीशचंद्र माथुर का सर्वाधिक चर्चित और मंचित नाटक कौन-सा है?
(क) भोर का तारा   (ख) कोणार्क   (ग) शारदीया   (घ) पहला राजा
उत्तर: (ख) कोणार्क
9. जगदीशचंद्र माथुर की संपूर्ण रचनाएँ किस नाम से संकलित हैं?
(क) जगदीशचंद्र माथुर ग्रंथावली   (ख) जगदीशचंद्र माथुर रचनावली   (ग) माथुर समग्र   (घ) माथुर संचयन
उत्तर: (ख) जगदीशचंद्र माथुर रचनावली
10. जगदीशचंद्र माथुर का निधन किस वर्ष हुआ?
(क) 1968   (ख) 1978   (ग) 1988   (घ) 1998
उत्तर: (ख) सन् 1978
11. 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी की रचना किस वर्ष हुई?
(क) 1929   (ख) 1939   (ग) 1949   (घ) 1959
उत्तर: (ख) सन् 1939
12. एकांकी की नायिका (मुख्य पात्र) कौन है?
(क) प्रेमा   (ख) उमा   (ग) मास्टराइन   (घ) मीना
उत्तर: (ख) उमा
13. उमा के पिता का नाम क्या है?
(क) रामस्वरूप   (ख) गोपालप्रसाद   (ग) दीनानाथ   (घ) जगन
उत्तर: (क) रामस्वरूप
14. उमा की माँ का नाम क्या है?
(क) मास्टराइन   (ख) प्रेमा   (ग) गंगा   (घ) राधा
उत्तर: (ख) प्रेमा
15. वर पक्ष के लड़के का नाम क्या है?
(क) रतन   (ख) शंकर   (ग) गोपाल   (घ) राम
उत्तर: (ख) शंकर
16. शंकर के पिता का नाम क्या है?
(क) रामस्वरूप   (ख) गोपालप्रसाद   (ग) रतन   (घ) दीनानाथ
उत्तर: (ख) गोपालप्रसाद
17. रामस्वरूप के घरेलू सहायक का नाम क्या है?
(क) रतन   (ख) गनपत   (ग) शंकर   (घ) गोपाल
उत्तर: (क) रतन
18. शंकर किस कॉलेज में पढ़ रहा है?
(क) इंजीनियरिंग कॉलेज   (ख) मेडिकल कॉलेज   (ग) लॉ कॉलेज   (घ) कृषि कॉलेज
उत्तर: (ख) मेडिकल कॉलेज
19. गोपालप्रसाद के अनुसार लड़की में सबसे जरूरी क्या होना चाहिए?
(क) पढ़ी-लिखी होना   (ख) खूबसूरत होना   (ग) नौकरी करना   (घ) संगीत जानना
उत्तर: (ख) खूबसूरत होना
20. गोपालप्रसाद के अनुसार लड़की की पढ़ाई अधिकतम कहाँ तक होनी चाहिए?
(क) बी.ए. तक   (ख) मैट्रिक तक   (ग) एम.ए. तक   (घ) कोई सीमा नहीं
उत्तर: (ख) मैट्रिक तक
21. पान की तश्तरी लाते समय उमा के चेहरे पर क्या दिखता है, जिससे राज खुल जाता है?
(क) आँसू   (ख) सोने की रिम वाला चश्मा   (ग) मुस्कान   (घ) सिंदूर
उत्तर: (ख) सोने की रिम वाला चश्मा
22. रामस्वरूप ने उमा के चश्मे के विषय में क्या झूठ बताया था?
(क) आँखें दुखने की वजह से चश्मा लगाना पड़ा   (ख) यह फैशन के लिए है   (ग) यह पढ़ाई के लिए है   (घ) यह धूप से बचाव के लिए है
उत्तर: (क) आँखें दुखने की वजह से चश्मा लगाना पड़ा
23. उमा ने शंकर के विषय में क्या राज खोला?
(क) वह परीक्षा में फेल हुआ था   (ख) वह लड़कियों के हॉस्टल के आसपास घूमता था   (ग) वह धूम्रपान करता था   (घ) वह झूठ बोलता था
उत्तर: (ख) वह लड़कियों के हॉस्टल के आसपास घूमता था
24. एकांकी के अंत में रतन क्या लेकर आता है?
(क) चाय   (ख) पान   (ग) मक्खन   (घ) मिठाई
उत्तर: (ग) मक्खन
25. 'रीढ़ की हड्डी' शीर्षक अंततः किसका प्रतीक बनकर उभरता है?
(क) शारीरिक बनावट का   (ख) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का   (ग) पारिवारिक संपत्ति का   (घ) सामाजिक प्रतिष्ठा का
उत्तर: (ख) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का

20 अति लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर सहित

(ये प्रश्न पाठ्यपुस्तक के अभ्यास खंड से अलग हैं।)

1. 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी के लेखक कौन हैं?
उत्तर: जगदीशचंद्र माथुर।
2. लेखक का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर: सन् 1917 में शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश में।
3. लेखक किस सेवा में चयनित हुए?
उत्तर: इंडियन सिविल सर्विस।
4. लेखक का सर्वाधिक चर्चित नाटक कौन-सा है?
उत्तर: कोणार्क।
5. लेखक का निधन कब हुआ?
उत्तर: सन् 1978 में।
6. 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी की रचना कब हुई?
उत्तर: सन् 1939 में।
7. एकांकी की नायिका का नाम बताइए।
उत्तर: उमा।
8. उमा के माता-पिता का नाम बताइए।
उत्तर: रामस्वरूप (पिता) और प्रेमा (माता)।
9. शंकर के पिता का नाम बताइए।
उत्तर: गोपालप्रसाद।
10. रामस्वरूप के घरेलू सहायक का नाम क्या है?
उत्तर: रतन।
11. शंकर कहाँ पढ़ता है?
उत्तर: मेडिकल कॉलेज में।
12. गोपालप्रसाद के अनुसार लड़की की पढ़ाई अधिकतम कहाँ तक होनी चाहिए?
उत्तर: मैट्रिक तक।
13. उमा ने अपने पिता को पान देते समय क्या पहन रखा था?
उत्तर: चश्मा।
14. उमा का चश्मा किस रंग की रिम का था?
उत्तर: सोने की रिम का।
15. उमा ने शंकर के विषय में क्या भेद खोला?
उत्तर: वह लड़कियों के हॉस्टल के आसपास घूमता था।
16. एकांकी के अंत में रतन क्या लेकर आता है?
उत्तर: मक्खन।
17. उमा किस परीक्षा में उत्तीर्ण हुई है?
उत्तर: बी.ए.।
18. प्रेमा स्त्री-शिक्षा के विषय में क्या सोचती है?
उत्तर: वह पढ़ाई-लिखाई को व्यर्थ का जंजाल मानती है।
19. गोपालप्रसाद किस कहावत का प्रयोग करता है?
उत्तर: "बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।"
20. 'रीढ़ की हड्डी' शीर्षक किसका प्रतीक है?
उत्तर: आत्म-सम्मान व नैतिक दृढ़ता का।

20 लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर सहित

(ये प्रश्न पाठ्यपुस्तक के अभ्यास खंड से अलग हैं।)

1. रामस्वरूप के चरित्र की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: रामस्वरूप एक दोहरे व्यक्तित्व वाले पात्र हैं — बाहर से वे आधुनिक, विनम्र व सुसंस्कृत दिखने का प्रयास करते हैं, पर भीतर से रूढ़िवादी सोच रखते हैं। वे बेटी की शिक्षा को छिपाने और झूठ बोलने में भी संकोच नहीं करते।
2. प्रेमा के चरित्र का चित्रण कीजिए।
उत्तर: प्रेमा एक पारंपरिक सोच वाली माँ हैं, जो शिक्षा को 'जंजाल' मानती हैं और बेटी की उच्च शिक्षा से चिंतित रहती हैं। वे चाहती हैं कि उमा किसी तरह वर पक्ष को प्रभावित करके विवाह तय करा ले, भले ही इसके लिए झूठ का सहारा लेना पड़े।
3. गोपालप्रसाद के व्यक्तित्व की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: गोपालप्रसाद दिखावटी शिष्टाचार व चालाकी से भरे वकील हैं, जो बार-बार खुशामद करते हैं। वे रूढ़िवादी विचारों के पोषक हैं, स्त्री-शिक्षा के घोर विरोधी हैं और सोचते हैं कि केवल पुरुषों को ही ऊँची शिक्षा का अधिकार है।
4. शंकर का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर: शंकर मेडिकल कॉलेज का विद्यार्थी है, जो ऊपर से सभ्य दिखता है, पर वास्तव में दोहरे चरित्र का है — वह लड़कियों के हॉस्टल के आसपास घूमता पकड़ा गया था और शर्मिंदा होकर भाग गया था, जो उसकी नैतिक दुर्बलता को उजागर करता है।
5. उमा के चरित्र की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: उमा शिक्षित, स्वाभिमानी, साहसी व स्पष्टवादी युवती है। वह बी.ए. पास है, सितार बजाना जानती है, और अन्याय व दिखावे के सामने चुप नहीं रहती — वह निर्भीकता से अपने विचार व्यक्त करती है और शंकर की सच्चाई भी उजागर कर देती है।
6. एकांकी में विवाह से पूर्व लड़की की 'परीक्षा' किस प्रकार ली जाती थी?
उत्तर: उमा को पान लाने बुलाया जाता है, फिर गाना-बजाना, सितार वादन, चित्रकारी, सिलाई आदि गुणों के बारे में पूछताछ की जाती है — मानो किसी वस्तु की तरह उसकी परीक्षा ली जा रही हो, जिसकी तुलना उमा स्वयं कुर्सी-मेज बिकने से करती है।
7. गोपालप्रसाद स्त्री-शिक्षा के विषय में क्या विचार रखता है?
उत्तर: गोपालप्रसाद मानता है कि लड़कियों को ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं होना चाहिए, केवल मैट्रिक तक ही शिक्षा काफी है। वह तर्क देता है कि ऊँची शिक्षा जैसी बातें केवल पुरुषों के लिए हैं, स्त्रियों के लिए नहीं।
8. उमा ने अपने पिता के सामने अपने विचार किस प्रकार व्यक्त किए?
उत्तर: जब गोपालप्रसाद रूखे स्वर में सवाल करते हैं, तो उमा दृढ़ता से जवाब देती है कि यह परीक्षा दिखावे जैसी है, जैसे भेड़-बकरियों को कसाई परखता है। वह स्पष्ट कहती है कि उसे अपनी पढ़ाई व इज्जत पर गर्व है।
9. उमा ने शंकर की कौन-सी पोल खोली?
उत्तर: उमा ने खुलासा किया कि पिछली फरवरी में शंकर लड़कियों के हॉस्टल के आसपास घूमता पकड़ा गया था और शर्मिंदा होकर मुँह छिपाकर भाग गया था — यह उसके दोहरे चरित्र को उजागर करता है।
10. एकांकी के अंत में गोपालप्रसाद की क्या प्रतिक्रिया होती है?
उत्तर: अपमानित व क्रोधित गोपालप्रसाद रामस्वरूप पर दगा करने का आरोप लगाते हैं और अपनी छड़ी माँगकर बेटे के साथ तुरंत वहाँ से चले जाने का निर्णय लेते हैं।
11. रामस्वरूप के दोहरे व्यक्तित्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: रामस्वरूप वर पक्ष के सामने आधुनिक व सुसंस्कृत दिखने के लिए बाजा-सितार मँगवाते हैं, विलायती चाय की पेशकश करते हैं, पर भीतर ही भीतर बेटी की उच्च शिक्षा को छिपाकर उसे केवल मैट्रिक-पास बताते हैं — यही उनका दोहरापन है।
12. एकांकी में हास्य-व्यंग्य किस प्रकार उत्पन्न किया गया है?
उत्तर: चीनी पर टैक्स की बात, गोपालप्रसाद व रामस्वरूप की खुशामदपूर्ण बातचीत, तथा अंत में रतन का अप्रासंगिक ढंग से 'मक्खन' कहना जैसे प्रसंगों से एकांकी में सहज हास्य-व्यंग्य उत्पन्न होता है।
13. 'रीढ़ की हड्डी' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' शारीरिक अर्थ से आगे बढ़कर आत्म-सम्मान व नैतिक दृढ़ता का प्रतीक बन जाता है, जैसा उमा की अंतिम टिप्पणी में स्पष्ट होता है — यह शीर्षक एकांकी के केंद्रीय भाव को सटीक ढंग से व्यक्त करता है।
14. एकांकी का अंत (रतन का मक्खन लेकर आना) किस प्रकार का है?
उत्तर: यह अंत अप्रत्याशित व हास्यास्पद है। जिस गंभीर क्षण में गोपालप्रसाद क्रोधित होकर चले जाते हैं और उमा सिसक रही है, उसी क्षण रतन का निरर्थक ढंग से मक्खन लेकर आना पूरी स्थिति की विडंबना को उभारता है।
15. गोपालप्रसाद और रामस्वरूप में क्या समानताएँ हैं?
उत्तर: दोनों बाहर से आधुनिक व सभ्य दिखने का प्रयास करते हैं, पर भीतर से रूढ़िवादी विचारों में जकड़े हैं। दोनों दिखावे व औपचारिकता को महत्व देते हैं तथा अपनी असली सोच को छिपाने का प्रयास करते हैं।
16. एकांकी में स्त्री-पुरुष असमानता को किस प्रकार उजागर किया गया है?
उत्तर: गोपालप्रसाद के कथन — 'मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं', 'शेर के बाल होते हैं, शेरनी के नहीं' — के माध्यम से स्त्री-पुरुष के बीच शिक्षा व अधिकारों में भेदभाव को स्पष्ट रूप से उजागर किया गया है।
17. उमा के सितार बजाने वाले दृश्य का क्या महत्व है?
उत्तर: उमा मीरा का प्रसिद्ध भजन सितार पर गाना शुरू करती है, जिससे उसकी कलात्मक प्रतिभा प्रकट होती है, पर शंकर की झेंपती नजरों से आँखें मिलते ही वह रुक जाती है — यह दृश्य दोनों पात्रों के बीच के अंतर्द्वंद्व व असहजता को दर्शाता है।
18. रतन के चरित्र की भूमिका एकांकी में क्या है?
उत्तर: रतन एक हास्य-पात्र के रूप में कार्य करता है। उसका बार-बार 'मक्खन' की चिंता करना और अंत में गंभीर क्षण में मक्खन लेकर आना एकांकी में हास्य व नाटकीय विडंबना उत्पन्न करता है।
19. एकांकी में विवाह में लेन-देन/दिखावे की प्रथा को कैसे दर्शाया गया है?
उत्तर: एकांकी में लड़की की योग्यता को दिखावे व बाहरी सुंदरता से आँकने, तथा जायचा (जन्मपत्री) मिलाने जैसे रीति-रिवाजों के माध्यम से विवाह में व्याप्त औपचारिकता व दिखावे की प्रथा को उजागर किया गया है।
20. एकांकी से हमें समाज के विषय में क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: यह एकांकी सिखाती है कि स्त्री-शिक्षा को बाधा नहीं, बल्कि शक्ति समझना चाहिए। यह यह भी सिखाती है कि दिखावटी आधुनिकता व रूढ़िवादी सोच के बीच का पाखंड अंततः उजागर हो जाता है, और सच्चा सम्मान शिक्षा व साहस से मिलता है।

10 महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित

(ये प्रश्न पाठ्यपुस्तक के अभ्यास खंड से अलग हैं।)

1. 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: 'रीढ़ की हड्डी' जगदीशचंद्र माथुर द्वारा रचित एक व्यंग्यात्मक एकांकी है, जिसमें विवाह हेतु गोपालप्रसाद व उनका पुत्र शंकर रामस्वरूप के घर उनकी बेटी उमा को देखने आते हैं। रामस्वरूप उमा की उच्च शिक्षा छिपाकर उसे मैट्रिक-पास बताते हैं, पर पान लाते समय उमा के चश्मे से यह राज खुल जाता है। जब गोपालप्रसाद रूखे स्वर में सवाल करते हैं, तो शिक्षित व स्वाभिमानी उमा दृढ़ता से जवाब देती है और शंकर की सच्चाई (हॉस्टल के आसपास घूमना) उजागर कर देती है। अपमानित गोपालप्रसाद क्रोधित होकर चले जाते हैं, और उमा व्यंग्यात्मक टिप्पणी करती है कि पहले शंकर की 'रीढ़ की हड्डी' है या नहीं, यह पता कर लें।
2. लेखक जगदीशचंद्र माथुर का साहित्यिक परिचय दीजिए।
उत्तर: जगदीशचंद्र माथुर का जन्म सन् 1917 में शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और इंडियन सिविल सर्विस में चयनित हुए। उन्होंने बिहार के शिक्षा सचिव, आकाशवाणी के महानिदेशक जैसे पदों पर कार्य करते हुए आजीवन साहित्य-सृजन किया। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं — भोर का तारा, कोणार्क, ओ मेरे सपने, शारदीया आदि, जिनमें 'कोणार्क' सर्वाधिक चर्चित व मंचित नाटक है। सन् 1978 में उनका निधन हुआ।
3. एकांकी की नायिका उमा के चरित्र की विस्तार से विवेचना कीजिए।
उत्तर: उमा शिक्षित, स्वाभिमानी व साहसी युवती है, जो बी.ए. पास है और सितार बजाना जानती है। वह पिता की इच्छा के विरुद्ध अपनी शिक्षा छिपाने को तैयार नहीं होती। जब उसे व्यंग्य व अपमान का सामना करना पड़ता है, तो वह निर्भीकता से अपने विचार रखती है और शंकर के दोहरे चरित्र को भी बेनकाब कर देती है। वह एकांकी में शिक्षित, स्वतंत्र-विचार वाली आधुनिक स्त्री का सशक्त प्रतिनिधित्व करती है।
4. गोपालप्रसाद और रामस्वरूप के चरित्रों की तुलना करते हुए स्पष्ट कीजिए कि वे किस प्रकार दिखावे व रूढ़िवादिता के प्रतीक हैं।
उत्तर: दोनों पात्र समाज में एक जैसी दोहरी मानसिकता का प्रतिनिधित्व करते हैं। रामस्वरूप बाहर से आधुनिक दिखने के लिए बाजा-सितार मँगवाते हैं, पर बेटी की शिक्षा छिपाते हैं। गोपालप्रसाद खुद पढ़े-लिखे वकील हैं, समाज में प्रगतिशील दिखते हैं, पर स्त्री-शिक्षा के घोर विरोधी हैं। दोनों की यह दिखावटी आधुनिकता व वास्तविक रूढ़िवादिता एकांकी के केंद्रीय व्यंग्य का आधार बनती है।
5. एकांकी के माध्यम से लेखक ने स्त्री-शिक्षा को लेकर समाज की किस मानसिकता पर व्यंग्य किया है?
उत्तर: लेखक ने उस मानसिकता पर व्यंग्य किया है जो लड़की की शिक्षा को विवाह में बाधा व दोष मानती थी, जबकि लड़कों की शिक्षा व आचरण संबंधी कमियों को नजरअंदाज कर दिया जाता था। गोपालप्रसाद के कथन ('मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं') इस दोहरी मानसिकता को स्पष्ट करते हैं, जिसे लेखक ने उमा के प्रतिकार द्वारा करारा जवाब दिया है।
6. एकांकी में विवाह-व्यवस्था से जुड़ी किन सामाजिक कुरीतियों को उजागर किया गया है?
उत्तर: एकांकी में लड़की को दिखावे व बाहरी सुंदरता के आधार पर परखना, उसकी शिक्षा को छिपाना या उसे दोष मानना, जायचा (जन्मपत्री) मिलाने की औपचारिकता, तथा वर पक्ष द्वारा कन्या-पक्ष पर अनुचित दबाव जैसी कुरीतियों को उजागर किया गया है।
7. उमा द्वारा शंकर की पोल खोले जाने वाले प्रसंग का वर्णन कीजिए और इसका क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: जब गोपालप्रसाद उमा की शिक्षा पर सवाल उठाते हैं, तो उमा पलटवार करते हुए बताती है कि शंकर पिछली फरवरी में लड़कियों के हॉस्टल के आसपास घूमता पकड़ा गया था और शर्मिंदा होकर भाग गया था। इससे गोपालप्रसाद व शंकर दोनों बेनकाब हो जाते हैं, और अपमानित होकर वे वहाँ से चले जाते हैं — दिखावे व झूठ की हार होती है।
8. एकांकी विधा की दृष्टि से 'रीढ़ की हड्डी' की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: यह एकांकी संक्षिप्त कथानक, सीमित पात्रों, एक ही दृश्य-स्थान तथा स्वाभाविक व व्यंग्यपूर्ण संवाद-शैली जैसी सभी एकांकी-विशेषताओं से युक्त है। रंग-निर्देश व संवाद-निर्देश (कोष्ठक में दिए निर्देश) पात्रों के भाव व मंच की स्थिति को सजीव बनाते हैं, तथा अंत चौंकाने वाला व व्यंग्यात्मक है।
9. 'रीढ़ की हड्डी' शीर्षक की सार्थकता पर विस्तार से प्रकाश डालिए।
उत्तर: शीर्षक आरंभ में शारीरिक अर्थ में (शंकर की 'बैकबोन' के रूप में) प्रयुक्त होता है, पर अंत में उमा इसी शब्द को नैतिक साहस व चारित्रिक दृढ़ता के प्रतीकात्मक अर्थ में प्रयोग करती है। यह दोहरा अर्थ शीर्षक को अत्यंत सार्थक व व्यंग्यपूर्ण बनाता है, क्योंकि यही एकांकी का केंद्रीय संदेश भी है।
10. इस एकांकी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: यह एकांकी सिखाती है कि स्त्री-शिक्षा को हेय दृष्टि से नहीं, बल्कि शक्ति व गौरव के रूप में देखना चाहिए। यह यह भी सिखाती है कि दिखावटी आधुनिकता व रूढ़िवादी सोच का पाखंड अंततः उजागर हो जाता है, और सच्चा आत्म-सम्मान शिक्षा, साहस व सच्चाई से ही मिलता है।

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