मीरा के पद
मीराबाई के दो भक्ति-पद — श्रीकृष्ण-रूप वर्णन और सावन में उनके आगमन की उमंग
1कवयित्री से परिचय — मीराबाई
ये दोनों पद आज से लगभग 500 वर्ष पहले रचे गए थे। इन्हें हिंदी की महान कवयित्री, कृष्ण-भक्त और संत मीरा ने रचा था। यह माना जाता है कि मीरा बचपन से ही कृष्ण की भक्ति में मगन रहती थीं।
एक राजकुमारी होते हुए भी उन्होंने संतों का जीवन चुना और महलों को त्यागकर तीर्थों की यात्राएँ करने लगीं। उन्होंने मंदिरों में भजन गाना और सत्संग करना प्रारंभ कर दिया। उनके गाए हुए भजन लोग आज भी श्रद्धा और प्रेम से गाते, पढ़ते और सुनते-सुनाते हैं।
2पाठ परिचय
प्रस्तुत दोनों पद मीराबाई की कृष्ण-भक्ति भावना को व्यक्त करते हैं। पहले पद में मीरा श्रीकृष्ण से विनती करती हैं कि वे उनके नैनों में सदा बसे रहें, और साथ ही उनकी मोहक मूर्ति, साँवली सूरत, मुरली, वैजंती माला, कमर की घंटियों और पायल की मधुर ध्वनि का सुंदर वर्णन करती हैं। दूसरे पद में सावन ऋतु में घिरे बादलों, बिजली की चमक और झमाझम बरसात का वर्णन है — मीरा का मन इसलिए उमंग से भर उठा है क्योंकि उन्होंने अपने प्रभु गिरधरनागर (श्रीकृष्ण) के आने की आहट सुनी है।
3मूल पाठ
बसो मेरे नैनन में नंदलाल।
मोहनि मूरति साँवरि सूरति, नैना बने विशाल॥
अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल॥
क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल॥
मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल॥
बरसे बदरिया सावन की, सावन की मन भावन की॥
सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की॥
उमड़ घुमड़ चहुँ दिश से आया, दामिन दमके झर लावन की॥
नन्हीं नन्हीं बूँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सोहावन की॥
मीरा के प्रभु गिरधरनागर, आनंद मंगल गावन की॥
— मीरा
4सरल व्याख्या (भावार्थ)
भाग 1 — पद (1) : "बसो मेरे नैनन में नंदलाल"
मीरा श्रीकृष्ण से विनती करती हैं कि हे नंदलाल! तुम सदा मेरे नैनों में बसे रहो। तुम्हारी मोहक मूर्ति, साँवली सूरत और विशाल नैन बहुत सुंदर हैं। तुम्हारे होंठों पर अमृत-सी मीठी मुरली शोभा दे रही है और हृदय पर वैजंती माला सजी है। कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ शोभा दे रही हैं और पैरों के नूपुर मधुर ध्वनि कर रहे हैं। मीरा कहती हैं कि उनके प्रभु संतों को सुख देने वाले और भक्तों से प्रेम करने वाले गोपाल हैं।
भाग 2 — पद (2) : "बरसे बदरिया सावन की"
सावन के महीने की बदरिया बरस रही है, जो मन को बहुत भाती है। मीरा का मन सावन में उमंग से भर उठा है, क्योंकि उन्होंने हरि (श्रीकृष्ण) के आने की आहट सुनी है। चारों दिशाओं से बादल घुमड़ते हुए आए हैं और बिजली चमक रही है — मानो सुंदर वर्षा की झड़ी लग गई हो। छोटी-छोटी बूँदों में मेघ बरस रहे हैं और शीतल, सुहावनी हवा बह रही है। मीरा कहती हैं कि उनके प्रभु गिरधरनागर आनंद और मंगल के गीत गा रहे हैं।
5शब्द-संपदा
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| नैनन | आँखों में (नैन = आँख) |
| मोहनि मूरति | मोहने वाली मूर्ति, सुंदर स्वरूप |
| साँवरि सूरति | साँवला रूप/चेहरा |
| अधर | होंठ |
| सुधा रस | अमृत जैसा मीठा रस |
| मुरली राजति | बाँसुरी शोभा दे रही है |
| उर | हृदय |
| वैजंती माल | वैजयंती के बीजों से बनी माला, कृष्ण की विशेष माला |
| क्षुद्र घंटिका | छोटी-छोटी घंटियाँ |
| कटितट सोभित | कमर पर शोभा दे रही हैं |
| नूपुर | पायल, पैरों में पहनने का आभूषण |
| रसाल | मधुर, रसीला |
| संतन सुखदाई | संतों को सुख देने वाले |
| भक्त वछल (वत्सल) | भक्तों से प्रेम करने वाले |
| गोपाल | गायों का पालन करने वाले, श्रीकृष्ण |
| बदरिया | बादल, बदली |
| मन भावन की | मन को भाने वाली |
| उमग्यो | उमंग से भर गया |
| मनवा | मन |
| भनक | आहट, हल्की-सी सूचना |
| हरि | श्रीकृष्ण/विष्णु |
| आवन | आना, आगमन |
| उमड़ घुमड़ | घने बादलों का इकट्ठा होकर छा जाना |
| चहुँ दिश | चारों दिशाओं से |
| दामिन दमके | बिजली चमके |
| झर लावन की | सुंदर झड़ी/वर्षा की |
| बूँदन | बूँदें |
| मेहा | मेघ, बादल |
| सोहावन की | सुहावनी |
| गिरधरनागर | गोवर्धन पर्वत को धारण करने वाले चतुर नागर, श्रीकृष्ण |
| गावन | गाना |
6पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
मेरी समझ से (क)
- "बसो मेरे नैनन में नंदलाल" पद में मीरा किनसे विनती कर रही हैं?
- संतों से
- भक्तों से
- वैजंती से
- श्रीकृष्ण से ✔
- "बसो मेरे नैनन में नंदलाल" पद का मुख्य विषय क्या है?
- प्रेम और भक्ति ✔
- प्रकृति की सुंदरता
- युद्ध और शांति
- ज्ञान और शिक्षा
- "बरसे बदरिया सावन की" पद में कौन-सी ऋतु का वर्णन किया गया है?
- सर्दी
- गरमी
- वर्षा ✔
- वसंत
- "बरसे बदरिया सावन की" पद को पढ़कर ऐसा लगता है, जैसे मीरा—
- प्रसन्न हैं ✔
- दुखी हैं
- उदास हैं
- चिंतित हैं
मिलकर करें मिलान
| शब्द | अर्थ/संदर्भ |
|---|---|
| 1. नंदलाल | 4. नंद के पुत्र, श्रीकृष्ण |
| 2. वैजंती माल | 3. वैजयंती पौधे के बीजों से बनने वाली माला |
| 3. सावन | 2. श्रावण का महीना, आषाढ़ के बाद का और भाद्रपद के पहले का महीना |
| 4. गिरधर | 1. पर्वत को धारण करने वाले, श्रीकृष्ण |
पंक्तियों पर चर्चा
(क) "नन्हीं नन्हीं बूँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सोहावन की॥"
अर्थ — आकाश से छोटी-छोटी बूँदों में मेघ बरस रहे हैं, और साथ ही ठंडी, सुहावनी हवा भी बह रही है — सावन ऋतु का यह मनोहर दृश्य मन को शांति और आनंद से भर देता है।
(ख) "मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल॥"
अर्थ — मीरा कहती हैं कि उनके आराध्य श्रीकृष्ण संतों को सुख देने वाले और अपने भक्तों से गहरा प्रेम करने वाले गोपाल हैं — यह पंक्ति श्रीकृष्ण की करुणा और वात्सल्य भावना को दर्शाती है।
सोच-विचार के लिए
पाठ को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए—
(क) पहले पद में श्रीकृष्ण के बारे में क्या-क्या बताया गया है?
पहले पद में बताया गया है कि श्रीकृष्ण की मूर्ति मोहक है, उनकी सूरत साँवली और नैन विशाल हैं, उनके होंठों पर अमृत-सी मीठी मुरली शोभा देती है, हृदय पर वैजंती माला सजी है, कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ और पैरों में मधुर बजने वाले नूपुर हैं, और वे संतों को सुख देने वाले तथा भक्तों से प्रेम करने वाले (भक्त वत्सल) गोपाल हैं।
(ख) दूसरे पद में सावन के बारे में क्या-क्या बताया गया है?
दूसरे पद में बताया गया है कि सावन की बदरिया बरस रही है जो मन को भाती है, चारों दिशाओं से बादल घुमड़कर आए हैं, बिजली चमक रही है, छोटी-छोटी बूँदों में मेघ बरस रहे हैं, और ठंडी सुहावनी हवा बह रही है — इसी सावन में मीरा का मन श्रीकृष्ण के आने की आहट सुनकर उमंग से भर उठा है।
कविता की रचना
"मीरा के प्रभु संतन सुखदाई" और "मीरा के प्रभु गिरधरनागर" — इन दोनों पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन पंक्तियों में मीरा ने अपने नाम का उल्लेख किया है। मीरा के समय के अनेक कवि अपनी रचना के अंत में अपने नाम को सम्मिलित कर दिया करते थे; आज भी कुछ कवि अपना नाम कविता में जोड़ देते हैं।
(क) इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस पाठ की विशेषताओं की सूची बनाइए।
इस पाठ की मुख्य विशेषताएँ — 1) दोनों पदों में छोटी-छोटी पंक्तियाँ हैं; 2) श्रीकृष्ण के लिए अलग-अलग नामों का प्रयोग किया गया है (नंदलाल, गोपाल, गिरधरनागर, हरि); 3) प्रत्येक पद के अंत में कवयित्री का नाम (छाप/भणीता) आता है — "मीरा के प्रभु..."; 4) पंक्तियों के अंत में समान ध्वनि (तुकांत) है, जैसे दोनों पद में हर पंक्ति "...की" या "...ल" पर समाप्त होती है; 5) भाषा ब्रज मिश्रित राजस्थानी है, जिसमें कई पुराने शब्द-रूप (नैनन, सोभित, आवन) प्रयुक्त हुए हैं।
(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
(यह एक कक्षा-प्रस्तुति गतिविधि है — प्रत्येक समूह अपनी सूची कक्षा के सामने साझा करे।)
अनुमान और कल्पना से
(क) मान लीजिए कि बादलों ने मीरा को श्रीकृष्ण के आने का संदेश सुनाया है। आपको क्या लगता है कि उन्होंने क्या कहा होगा? कैसे कहा होगा?
(यह एक कल्पनाशील समूह-चर्चा गतिविधि है।) उदाहरण — बादलों ने गरजकर कहा होगा, "हे मीरा! प्रसन्न हो जाओ, तुम्हारे गिरधरनागर शीघ्र ही आने वाले हैं, हम उन्हीं का संदेश लेकर आए हैं!" — यह संदेश बिजली की चमक और बादलों की गड़गड़ाहट के साथ उत्साह और उमंग भरे स्वर में दिया गया होगा।
(ख) यदि आपको मीरा से बातचीत करने का अवसर मिल जाए तो आप उनसे क्या-क्या कहेंगे और क्या-क्या पूछेंगे?
(यह भी एक व्यक्तिगत, कल्पनाशील उत्तर है।) उदाहरण — मैं मीरा से पूछता कि उन्हें इतनी गहरी भक्ति और साहस कहाँ से मिला कि उन्होंने राजमहल त्यागकर संतों का जीवन चुना, और उनसे उनके प्रिय भजनों के बारे में भी जानना चाहता।
शब्दों के रूप
पद में 'साँवरि' शब्द आया है, जिसके स्थान पर अधिकतर 'साँवली' शब्द का प्रयोग किया जाता है। इसी तरह पद में आए अन्य पुराने शब्द-रूपों को आज जिस रूप में बोला-लिखा जाता है, वह इस प्रकार है:
| पद में प्रयुक्त शब्द | आज प्रचलित रूप |
|---|---|
| नैनन | नैन |
| सोभित | शोभित |
| भक्त वछल | भक्त वत्सल |
| बदरिया | बदली |
| मेरो मनवा | मेरा मन |
| आवन | आना |
| दिश | दिशा |
| मेहा | मेघ |
शब्द से जुड़े शब्द
नीचे दिए गए स्थानों में श्रीकृष्ण से जुड़े शब्द पाठ में से चुनकर लिखे गए हैं (केंद्र में 'श्रीकृष्ण', एक शाखा में पहले से दिया गया 'मुरली'):
नंदलाल, गोपाल, गिरधर, गिरधरनागर, हरि, मोहन — ये सभी नाम पाठ में श्रीकृष्ण के लिए प्रयुक्त हुए हैं।
पंक्ति से पंक्ति
नीचे स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलती-जुलती पंक्तियों को मिलाइए—
| स्तंभ 1 | मिलान — स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल | 2. होंठों पर सुरीली धुनों से भरी हुई बाँसुरी और सीने पर वैजयंती माला सजी हुई है। |
| 2. क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल | 5. कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ सजी हुई हैं और पैरों में बँधे हुए नूपुर मीठी आवाज में बोल रहे हैं। |
| 3. मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल | 4. हे मीरा के प्रभु! तुम संतों को सुख देने वाले हो और अपने भक्तों से स्नेह करने वाले हो। |
| 4. सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की | 3. सावन के महीने में मेरे मन में बहुत-सी उमंगें उठ रही हैं, क्योंकि मैंने श्रीकृष्ण के आने की चर्चा सुनी है। |
| 5. उमड़ घुमड़ चहुँ दिश से आया, दामिन दमके झर लावन की | 1. चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़ कर बरस रहे हैं, बिजली चमक रही है, वर्षा की झड़ी लग गई है। |
कविता का सौंदर्य
"बरसे बदरिया सावन की।" इस पंक्ति में 'बरसे' और 'बदरिया' दोनों शब्द साथ-साथ आए हैं और दोनों 'ब' वर्ण से शुरू हो रहे हैं — दूसरे शब्दों में कहें तो इस पंक्ति में 'ब' वर्ण की आवृत्ति (अनुप्रास अलंकार) हो रही है, जिस कारण यह पंक्ति और भी अधिक सुंदर बन गई है। पाठ में से इस प्रकार के अन्य उदाहरण:
"साँवरि सूरति" — 'स' वर्ण की आवृत्ति।
"क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित" में भी 'क' और 'ट' ध्वनियों की सुंदर आवृत्ति सुनाई देती है। "नन्हीं नन्हीं बूँदन" में शब्द की पुनरावृत्ति से भी लय और सौंदर्य उत्पन्न होता है।
रूप बदलकर
पाठ के किसी एक पद को एक अनुच्छेद के रूप में लिखिए। उदाहरण के लिए — 'सावन के बादल बरस रहे हैं...' या 'सावन की बदरिया बरसती है...' आदि:
सावन के महीने में बादल बरस रहे हैं, जो मन को बहुत भाते हैं। मीरा का मन उमंग से भर गया है, क्योंकि उन्होंने सुना है कि श्रीकृष्ण जल्द ही आने वाले हैं। चारों दिशाओं से बादल घुमड़ते हुए आए हैं, बिजली चमक रही है और वर्षा की सुंदर झड़ी लगातार बरस रही है। धीरे-धीरे छोटी-छोटी बूँदें गिर रही हैं और शीतल, सुहावनी हवा बह रही है। मीरा कहती हैं कि उनके प्रभु गिरधरनागर आनंद और मंगल के गीत गा रहे हैं।
मुहावरे
"बसो मेरे नैनन में नंदलाल।" — नैनों या आँखों में बस जाना एक मुहावरा है, जब हमें कोई व्यक्ति या वस्तु इतनी अधिक प्रिय लगने लगती है कि उसका ध्यान हर समय मन में बना रहने लगता है, तब हम इस मुहावरे का प्रयोग करते हैं — जैसे "उसकी छवि मेरी आँखों में बस गई है"। ऐसा ही एक अन्य मुहावरा है — आँखों में घर करना। नीचे आँखों से जुड़े कुछ और मुहावरे और उनके अर्थ व वाक्य-प्रयोग दिए गए हैं:
सबकी प्रस्तुति
पाठ के किसी एक पद को चुनकर अपने समूह के साथ मिलकर अलग-अलग तरीके से कक्षा के सामने प्रस्तुत कीजिए, उदाहरण के लिए — गायन करना, भाव-नृत्य प्रस्तुति करना, कविता पाठ करना आदि।
आपकी बात
(क) "बरसे बदरिया सावन की"
1. इस पद में सावन का सुंदर चित्रण किया गया है। जब आपके गाँव या नगर में सावन आता है तो मौसम में क्या परिवर्तन आते हैं? वर्णन कीजिए।
(व्यक्तिगत अनुभव साझा करने की गतिविधि है।) उदाहरण — आसमान में काले बादल छा जाते हैं, ठंडी हवा चलने लगती है, हरियाली बढ़ जाती है और सड़कों पर पानी भर जाता है।
2. सावन की ऋतु में किस-किस प्रकार की ध्वनियाँ सुनाई देती हैं? इन ध्वनियों को सुनकर आपके मन में कौन-कौन सी भावनाएँ उठती हैं? आप कैसा अनुभव करते हैं? (उदाहरण के लिए — बिजली के कड़कने या बूँदों के टपकने की ध्वनियाँ)
बादलों की गरज, बिजली की कड़क, बूँदों की टपटप, छत पर बारिश की आवाज़ जैसी ध्वनियाँ सुनाई देती हैं। इन्हें सुनकर मन में उत्साह, आनंद के साथ-साथ कभी-कभी हल्का डर भी महसूस होता है।
3. वर्षा ऋतु में आपको कौन-कौन सी गतिविधियाँ करने या खेल खेलने में आनंद आता है?
कागज़ की नाव चलाना, बारिश में भीगना, छत पर बैठकर बारिश देखना, गरमागरम पकौड़े खाना, दोस्तों के साथ छप-छप करके चलना।
4. सावन के महीने में हमारे देश में अनेक त्योहार मनाए जाते हैं। आपके घर, परिसर या गाँव में सावन में कौन-कौन से त्योहार मनाए जाते हैं? किसी एक के विषय में अपने अनुभव बताइए।
सावन में रक्षाबंधन, हरियाली तीज, नागपंचमी जैसे त्योहार मनाए जाते हैं। उदाहरण — रक्षाबंधन पर बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बाँधती हैं और पूरा परिवार मिलकर उत्सव मनाता है।
(ख) "बसो मेरे नैनन में नंदलाल" — इस पद में मीरा श्रीकृष्ण को 'संतों को सुख देने वाला' और 'भक्तों का पालन करने वाला' कहती हैं।
1. क्या आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति है जो सदैव आपकी सहायता करता है और आपको आनंदित करता है? विस्तार से बताइए।
(यह एक व्यक्तिगत उत्तर है।) उदाहरण — मेरी दादी हमेशा मेरी सहायता करती हैं और अपनी बातों से मुझे प्रसन्न रखती हैं; उनकी उपस्थिति मुझे सुरक्षित और आनंदित महसूस कराती है।
2. कवयित्री ने पाठ में 'नूपुर' और 'क्षुद्र घंटिका' जैसे उदाहरणों का प्रयोग किया है। किसी का वर्णन करने के लिए हम केवल बड़ी-बड़ी ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी छोटी-छोटी बातें भी बता सकते हैं। आप भी अपने आस-पास के किसी व्यक्ति या वस्तु का वर्णन करते हुए उससे जुड़ी छोटी-छोटी बातों पर ध्यान दीजिए और उन्हें लिखिए।
उदाहरण — मेरी माँ के हाथ में पहनी पतली चूड़ियाँ काम करते समय हल्की खनक करती हैं, और उनकी साड़ी के पल्लू पर टँके छोटे-छोटे सितारे धूप में चमकते हैं — ये छोटी बातें ही उन्हें मेरे लिए और खास बना देती हैं।
विशेषताएँ
"मोहनि मूरति साँवरि सूरति, नैना बने विशाल।"
(क) इस पंक्ति में कवयित्री ने श्रीकृष्ण की मोहनी मूर्त, साँवरी सूरत और विशाल नैनों की बात की है। आपको श्रीकृष्ण की कौन-कौन सी बातों ने सबसे अधिक आकर्षित किया?
(व्यक्तिगत उत्तर) मुझे श्रीकृष्ण की मुरली और उनकी मोहक मुस्कान की बात सबसे अधिक आकर्षित करती है, क्योंकि इनसे उनके सरल और आनंदमय स्वभाव का पता चलता है।
(ख) किसी व्यक्ति या वस्तु का कौन-सा गुण आपको सबसे अधिक आकर्षित करता है? क्यों? अपने जीवन से जुड़े किसी व्यक्ति या वस्तु के उदाहरण से बताइए।
(व्यक्तिगत उत्तर) उदाहरण — मुझे अपने मित्र का ईमानदार स्वभाव सबसे अधिक आकर्षित करता है, क्योंकि वह हमेशा सच बोलता है और मुश्किल समय में भी साथ देता है।
(ग) हम सबकी कुछ विशेषताएँ बाह्य तो कुछ आंतरिक होती हैं। बाह्य विशेषताएँ तो हमें दिखाई दे जाती हैं, लेकिन आंतरिक विशेषताएँ व्यक्ति के व्यवहार से पता चलती हैं। आप अपनी दोनों प्रकार की विशेषताओं के दो-दो उदाहरण दीजिए।
(व्यक्तिगत उत्तर) बाह्य विशेषताएँ — मेरे बाल घुँघराले हैं, मेरा कद औसत है। आंतरिक विशेषताएँ — मैं ईमानदार हूँ और मुश्किल में पड़े दोस्तों की सहायता करना पसंद करता हूँ।
मधुर ध्वनियाँ
"अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल। क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल॥" इन पंक्तियों में तीन ऐसी वस्तुओं के नाम आए हैं, जिनसे मधुर ध्वनियाँ उत्पन्न होती हैं — मुरली (बाँसुरी), घंटिका (छोटी घंटियाँ) और नूपुर (पायल)। आगे मधुर ध्वनियाँ उत्पन्न करने वाले कुछ अन्य वाद्ययंत्रों के विषय में पहेलियाँ दी गई हैं। इन्हें पहचानकर सही वाद्ययंत्र से मिलाइए—
"हवा से बोलती है, सुर में गीत सुनाती है, होठों से छू जाए, तो मन को लुभाती है।"
उत्तर — बाँसुरी"दो साथियों का जोड़ा, हाथों से है बजता, ताल मिलाए ताल से, हर संगत में सजता।"
उत्तर — मजीरा"शाहों में शामिल होती, फूँकों से संगीत सुनाती, सुख के सारे काम सजाती, दुख में भी ये साथ निभाती।"
उत्तर — शहनाई"तारों में छिपा संगीत, माँ सरस्वती का गहना, छेड़े जब अँगुलियाँ, बहे रागों का झरना।"
उत्तर — वीणा"दो हाथों से बजती है ये, ताल से थिरकें पैर, हर उत्सव की है ये साथी, लटक गले ये करती सैर।"
उत्तर — ढोलक"नागिन-सी लहराती है जो, बड़ी खास आवाज है जिसकी, तीन, चीन, रंगीन, हीन से मिली-जुली पहचान है इसकी।"
उत्तर — बीन"सौ तारों का जादू, डंडियों से जो गाए, कश्मीर की वादियों जैसा मधुर संगीत लाए।"
उत्तर — संतूर"छोटा-सा यंत्र है, हाथों से बजता जाए, घर-मंदिर का साथी, झंकार से मन बहलाए।"
उत्तर — तबलाचित्र करते हैं बातें
यह मीरा का काँगड़ा शैली में बना चित्र है। इस चित्र के आधार पर मीरा के संबंध में एक अनुच्छेद लिखिए:
उदाहरण अनुच्छेद — काँगड़ा शैली के इस सुंदर चित्र में मीरा को एकतारा बजाते हुए, भक्ति में लीन दिखाया गया है। उनके चेहरे पर गहरी शांति और समर्पण का भाव झलकता है, मानो वे अपने प्रभु गिरधरनागर के ध्यान में पूरी तरह डूबी हों। उनकी वेशभूषा सरल है, जो दर्शाती है कि राजकुमारी होते हुए भी उन्होंने भौतिक सुखों से अधिक भक्ति को महत्व दिया। यह चित्र मीरा के त्याग, समर्पण और अटूट कृष्ण-भक्ति को बहुत सुंदर ढंग से व्यक्त करता है।
सावन से जुड़े गीत
अपने परिजनों, मित्रों, शिक्षकों, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से सावन में गाए जाने वाले गीतों को ढूँढ़िए और किसी एक गीत को अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। आप सावन से जुड़ा कोई भी लोकगीत, खेलगीत, कविता आदि लिख सकते हैं। कक्षा के सभी समूहों द्वारा एकत्रित गीतों को जोड़कर एक पुस्तिका बनाइए और कक्षा के पुस्तकालय में उसे सम्मिलित कीजिए।
खोजबीन
आपने पढ़ा कि मीरा श्रीकृष्ण की आराधना करती थीं। आपने कक्षा 6 की पुस्तक मल्हार में पढ़ा था कि सूरदास भी श्रीकृष्ण के भक्त थे। अपने समूह के साथ मिलकर सूरदास की कुछ रचनाएँ ढूँढ़कर कक्षा में सुनाइए। इसके लिए आप पुस्तकालय और इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं।
आज की पहेली
पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इनकी अंतिम ध्वनि से मिलती-जुलती ध्वनि वाले शब्द वर्ग में से खोजिए और लिखिए (उदाहरण के लिए, 1. मूरति → सूरति दिया गया है):
| शब्द | समान ध्वनि वाला शब्द |
|---|---|
| 1. मूरति | सूरति (उदाहरण-स्वरूप दिया गया) |
| 2. सावन | आवन |
| 3. उमड़ | घुमड़ |
| 4. नागर | नगर |
| 5. नंदलाल | गोपाल |
खोजबीन के लिए
शिक्षक/अभिभावक की अनुमति से नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग करके आप कवयित्री मीरा के बारे में और जान-समझ सकते हैं — मीरा; मीरा के भजन; मीराबाई; मीरा के भजन (एम एस सुब्बुलक्ष्मी); मीरा फिल्म 1945 भाग एक; मेरे तो गिरधर गोपाल — जैसे शीर्षकों के वीडियो देखे जा सकते हैं।
7पढ़ने के लिए — स्वामिभक्त सुमुख
स्वामिभक्त सुमुख
पुराने समय में, महिंसक राज्य में जब सकुल नामक राजा का शासन था, चित्रकूट पर्वत पर एक गुफा में हंसों का बहुत बड़ा झुंड निवास करता था। एक दिन कुछ हंस आहार की तलाश में निकल पड़े और उन्हें दूर नगर के पास एक भव्य कमल-सरोवर दिखाई दिया, जिसे मानुसिय कहा जाता था। उसमें पाँच प्रकार के कमल उगते थे और वह चुगने के लिए बहुत आदर्श स्थान लग रहा था।
हंसों के राजा मरालदेव को इस पर तनिक संदेह था — उनका मानना था कि चित्रकूट का अपना क्षेत्र छोड़ना ठीक नहीं होगा। उनके मंत्री सुमुख भी सहमत थे कि जिस स्थान का उपयोग मनुष्य करते हों, वहाँ जाना सुरक्षित नहीं है — फिर भी उन्होंने कहा, "एक बार जगह तो देख लें!" जब हंसों की पूरी टोली ने आग्रह किया, तो राजा मान गए और सब मानुसिय सरोवर की ओर उड़ चले।
चूँकि अनेक पक्षी उस सरोवर पर आते-जाते रहते थे, इसलिए वह शिकारियों का मनपसंद स्थान बन गया था। जैसे ही हंस-टोली सरोवर पर उतरी, राजा मरालदेव के पाँव एक आखेटक (शिकारी) के बिछाए जाल में फँस गए। वे चुपचाप अपने पाँव छुड़ाने का प्रयास करने लगे, पर जितना खींचते, जाल की रस्सी उतनी ही अधिक कसती जाती। उन्होंने सोचा कि यदि अभी चिल्ला पड़े, तो उनके साथी बिना कुछ चुगे ही डरकर उड़ जाएँगे — इसलिए उन्होंने शांति से प्रतीक्षा की, जब तक बाकी हंस पेट भरकर जल-क्रीड़ा नहीं कर चुके।
तभी हंसों को संकट का संकेत सुनाई दिया और सब चिल्लाकर बोले, "खतरे का संकेत! चलो, जल्दी वापस चित्रकूट चलते हैं!" किसी ने पूछा कि पुकार किसने लगाई और महाराज मरालदेव कहीं घायल तो नहीं हो गए, पर बाकी हंसों ने कहा कि प्राण बचाने के लिए तुरंत उड़ जाना ही ठीक होगा। पूरी टोली में केवल एक हंस ऐसा था जो साथ छोड़कर उड़ने को तैयार न था — वह थे मंत्री सुमुख। चिंताग्रस्त सुमुख सरोवर पर लौट आए और उन्होंने अपने राजा को घायल व लहूलुहान अवस्था में जाल में फँसा हुआ पाया।
सुमुख ने कहा, "चिंता न करें, महाराज! मैं अपनी जान देकर भी आपको इस बंधन से छुड़ाऊँगा।" राजा ने पूछा कि जब बाकी सब उड़ गए हैं, तो उनके जैसे फँसे हुए पक्षी के लिए आशा ही क्या बचती है, फिर सुमुख उन्हें छोड़कर क्यों नहीं जाता। सुमुख ने उत्तर दिया, "मैं आपको इस स्थिति में छोड़ने की अपेक्षा आपके साथ मर जाना अधिक पसंद करूँगा। हे पक्षियों में श्रेष्ठ, संकट की इस घड़ी में आपके साथ रहना ही मेरा परम कर्तव्य है।"
ठीक तभी आखेटक वहाँ आ पहुँचा और यह देखकर बहुत प्रसन्न हुआ कि उसके जाल में एक साथ दो हंस फँसे हैं। उसने सुमुख से पूछा कि वह मुक्त होते हुए भी दूसरे हंसों की तरह उड़ क्यों नहीं गया। सुमुख ने विनम्रता से पर दृढ़ता से कहा, "मैं इन्हें नहीं छोड़ सकता। ये मेरे राजा होने के साथ-साथ मेरे प्रिय मित्र भी हैं। इन्हें मुक्त कर दो और हमें जाने दो। मैं तुमसे विनती करता हूँ, महाराज को छोड़ दो और बदले में मुझे पकड़ लो — मैं आकार में इनके ही समान बड़ा और मोटा-ताजा हूँ, मुझे पकड़ने से तुम्हें कोई हानि नहीं होगी।"
सुमुख की इस सौम्य किंतु दृढ़तापूर्ण बातचीत ने आखेटक का हृदय परिवर्तित कर दिया। उसने बड़ी कोमलता से हंस के फँसे पाँव को जाल से मुक्त किया और उसके घावों को धोकर साफ किया। सुमुख ने कृतज्ञता से कहा, "धन्यवाद! तुम भी सदा सुखी रहो।"
हंसों ने अपने राजा से कहा कि इस आखेटक ने उन पर बहुत बड़ा उपकार किया है — वह चाहता तो उन्हें पकड़कर वहाँ के राजा को भेंट कर पुरस्कार पा सकता था, या उन्हें मारकर माँस बेच सकता था। राजा मरालदेव ने पहले सोचा कि ऐसा करना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि दूसरे राज्य का राजा उन्हें बंधन में भी डाल सकता है — पर अंततः वे आखेटक के साथ मानुसिय के राजा सकुल के पास गए। आखेटक ने राजा सकुल को सारा किस्सा सुनाया। राजा ने हंसों का बड़ा सम्मान किया और आखेटक की स्वामिभक्ति व सुमुख के त्याग की प्रशंसा करते हुए उसे घर, रथ, भरपूर सोना और एक लाख की वार्षिक आय देने की घोषणा की।
राजा सकुल की अनुमति लेकर हंसों के राजा मरालदेव और मंत्री सुमुख अपने झुंड में सकुशल वापस लौट आए। जब साथियों ने पूछा कि वे कैसे मुक्त हुए, तो मरालदेव ने कहा, "यह सब मेरे सेनापति सुमुख की समझदारी और स्वामिभक्ति के कारण संभव हुआ। उसने मुझे बचाने के लिए अपने प्राणों की बाज़ी लगा दी।"
8पढ़ने के लिए — विजयी विश्व तिरंगा प्यारा
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा।
झंडा ऊँचा रहे हमारा॥
सदा शक्ति बरसाने वाला, प्रेम सुधा सरसाने वाला।
वीरों को हरसाने वाला, मातृभूमि का तन मन सारा॥
झंडा ऊँचा रहे हमारा। विजयी विश्व तिरंगा प्यारा॥
स्वतंत्रता के भीषण रण में, लख कर जोश बढ़े क्षण-क्षण में।
काँपें शत्रु देख कर मन में, मिट जावे भय संकट सारा॥
झंडा ऊँचा रहे हमारा। विजयी विश्व तिरंगा प्यारा॥
इस झंडे के नीचे निर्भय, ले स्वराज्य यह अविचल निश्चय।
बोलो भारत-माता की जय, स्वतंत्रता है ध्येय हमारा॥
झंडा ऊँचा रहे हमारा। विजयी विश्व तिरंगा प्यारा॥
आओ प्यारे वीरो आओ, देश धर्म पर बलि बलि जाओ।
एक साथ सब मिल कर गाओ, प्यारा भारत देश हमारा॥
झंडा ऊँचा रहे हमारा। विजयी विश्व तिरंगा प्यारा॥
इसकी शान न जाने पाये, चाहे जान भले ही जाये।
विश्व विजय करके दिखलाये, तब होवे प्रण पूर्ण हमारा॥
झंडा ऊँचा रहे हमारा। विजयी विश्व तिरंगा प्यारा॥
— श्यामलाल गुप्त 'पार्षद'
9पाठ का सार — माइंड मैप
10अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
मीराबाई कौन थीं?
मीराबाई हिंदी की महान भक्ति-कालीन कवयित्री और कृष्ण-भक्त संत थीं, जिन्होंने आज से लगभग 500 वर्ष पहले रचनाएँ कीं। एक राजकुमारी होते हुए भी उन्होंने महलों को त्यागकर संतों का जीवन चुना और भजन-कीर्तन को अपनाया।
दोनों पदों का मुख्य भाव क्या है?
पहला पद श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन करते हुए उन्हें सदा नैनों में बसाए रखने की विनती है, जबकि दूसरा पद सावन ऋतु में बादलों की वर्षा और श्रीकृष्ण (गिरधरनागर) के आगमन की आहट सुनकर उठी उमंग को व्यक्त करता है।
पदों में कवयित्री ने अपने नाम का उल्लेख कहाँ किया है?
दोनों पदों के अंत में — "मीरा के प्रभु संतन सुखदाई..." और "मीरा के प्रभु गिरधरनागर..." पंक्तियों में मीरा ने अपना नाम (छाप/भणीता) दिया है, जो उस समय के कवियों की एक सामान्य परंपरा थी।
'गिरधरनागर' और 'नंदलाल' किसके नाम हैं?
दोनों ही श्रीकृष्ण के नाम हैं — 'गिरधरनागर' का अर्थ है गोवर्धन पर्वत को धारण करने वाले चतुर नागर, और 'नंदलाल' का अर्थ है नंद के पुत्र, अर्थात श्रीकृष्ण।
इस पाठ में कौन-सा अलंकार/काव्य-सौंदर्य दिखाया गया है?
"बरसे बदरिया सावन की" जैसी पंक्तियों में 'ब' वर्ण की आवृत्ति (अनुप्रास अलंकार) से पंक्ति की सुंदरता बढ़ी है।
पाठ में कौन-सी दो अतिरिक्त 'पढ़ने के लिए' रचनाएँ दी गई हैं?
पाठ में 'स्वामिभक्त सुमुख' — एक हंस-मंत्री के त्याग और स्वामिभक्ति की कथा, और 'विजयी विश्व तिरंगा प्यारा' — श्यामलाल गुप्त 'पार्षद' द्वारा रचित राष्ट्रीय झंडे पर देशभक्ति कविता, दी गई हैं।
Blogger प्रकाशन हेतु सुझाव (SEO)
शीर्षक (Title): मीरा के पद — पाठ 10, कक्षा 7 हिंदी मल्हार : सम्पूर्ण व्याख्या व प्रश्नोत्तर
मेटा विवरण (Meta description): कक्षा 7 हिंदी मल्हार पाठ 10 'मीरा के पद' (मीराबाई) का सरल भावार्थ, शब्द-संपदा, कवयित्री परिचय, मुहावरे और पाठ्यपुस्तक के सभी प्रश्नों के उत्तर एक ही लेख में।
परमालिंक (Permalink): meera-ke-pad-class-7-hindi
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