सत्रिया और बिहू नृत्य
लंदन की एंजेला की असम-यात्रा — बिहू उत्सव, सत्रिया नृत्य और एक अनोखी दोस्ती की मनोरम कहानी
1लेखिका से परिचय
जया मेहता एक नृत्यांगना, लेखिका और शिक्षिका हैं। इनका जन्म 1977 में हुआ। यह पाठ उनकी भारतीय नृत्यों से जुड़ी पुस्तक 'नृत्य कथा' से लिया गया है, जिसका हिंदी अनुवाद शिवेंद्र कुमार सिंह ने किया है और चित्रांकन सुरभा नटालिया ने किया है। जया मेहता स्वयं भी ओडिसी नृत्य में पारंगत हैं और कई वर्षों से देश-विदेश में नृत्य प्रस्तुतियाँ दे रही हैं।
2पाठ परिचय
प्रस्तुत निबंध में लंदन में रहने वाली एक बच्ची एंजेला की कहानी है, जो अपनी माँ (एक डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म निर्माता) के साथ असम की यात्रा पर जाती है। वहाँ वह असम के दो प्रमुख नृत्य-रूपों — कृषि आधारित लोकोत्सव 'बिहू' और मठों की परंपरा से जुड़े शास्त्रीय 'सत्रिया नृत्य' — को नज़दीक से देखती और अनुभव करती है। इस यात्रा के दौरान उसकी असमिया लड़की अनु से गहरी दोस्ती भी होती है। यह पाठ भारत की सांस्कृतिक विविधता, नृत्य-परंपराओं के बदलते स्वरूप और आपसी मित्रता की सुंदर झलक प्रस्तुत करता है।
3मूल पाठ
भाग 1 — भारत एक विशाल देश है। इसकी रंग-बिरंगी, सुंदर, प्राचीन और जीवन से भरी संस्कृति पूरी दुनिया में अनोखी है। भारत के प्रत्येक स्थान का नृत्य, संगीत, कला, खान-पान, भाषा, पहनावा, रहन-सहन के तरीके, सब कुछ इतना मोहक है कि पूरी दुनिया से लोग भारत की ओर खिंचे चले आते हैं। इस पाठ में भी एक परिवार एक दूसरे देश से भारत में आया है। आइए, पढ़ते हैं कि वे कौन हैं, भारत में कहाँ आए हैं, और क्यों आए हैं?
एंजेला लंदन के जाने-माने इलाके केंजिंग्टन में रहती थी। उसका स्कूल घर से दूर नहीं था। उसका कोई सगा भाई-बहन भी नहीं था। उसे जेम्स और कीरा नाम के दोस्तों के साथ समय बिताना पसंद था। वे सब आपस में मिलकर कई काल्पनिक खेल खेला करते थे। उन्हें ऐसी कहानियों का पात्र बनने में मज़ा आता था, जिनमें दूर-दराज़ की दुनिया का ज़िक्र हो। एंजेला को हर उस कहानी से प्यार था, जिसमें उसे ताजमहल, एफ़िल टॉवर या कोलोज़ियम की यात्रा पर जाना हो। उसे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि जल्दी ही यात्राओं की उसकी ये कहानियाँ सच साबित होने वाली हैं।
एंजेला की माँ एलेसेंड्रा एक डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म निर्माता थीं। उन्हें लंदन की ब्रिटिश अकादमी से असम की नृत्य परंपरा पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए वित्तीय मदद दी गई थी। पेचीदा बात यह थी कि उनके पास इस काम को पूरा करने के लिए सिर्फ़ एक महीने का वक्त था।
भाग 2 — उन्होंने एंजेला के स्कूल से उसकी बसंत की छुट्टियों को एक हफ़्ते और बढ़ाने की अनुमति ले ली, जिससे एंजेला और उसके पिता ब्रायन भी उनके साथ जा सकें। एंजेला बहुत जल्दबाज़ी में बनाई गई इस यात्रा की योजना से हैरान थी, पर उसकी माँ समय से यह काम पूरा कर सकें, इसलिए वे सभी जल्दी ही तैयार हो गए।
जब तक एंजेला कुछ समझ पाती, तब तक वह लंदन से नई दिल्ली होते हुए गुवाहाटी की उड़ान पर थी। यात्रा के दौरान माँ ने एंजेला को असम की खूबसूरती के बारे में कुछ बातें बताईं। असम, भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में है, जिसे अपने वन्य-जीवन, रेशम और चाय के बागानों के लिए जाना जाता है। इसके साथ असम में नृत्य की भी एक समृद्ध परंपरा है। एलेसेंड्रा की डॉक्यूमेंट्री के केंद्र में असम के जनजीवन में नृत्य के महत्व को तलाशना था। वे जब यहाँ आ रहे थे तब अप्रैल का महीना चल रहा था। असम में यह नए साल का वक्त होता है, बसंत के आने की खुशी में वे सभी एक त्योहार मनाते हैं, जिसे 'बिहू' कहा जाता है। एंजेला उसी रात इसे देखने जाने वाली थी।
गुवाहाटी के एक होटल में सामान्य होने के बाद वे उसी शाम पास के एक गाँव मलंग में गए। गाँव पहुँचने पर माँ ने एंजेला को बताया कि बिहू एक कृषि आधारित त्योहार है। भारत में जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा किसानों का है। असम में बिहू साल में तीन बार मनाया जाता है। सबसे पहले जब किसान बीज बोते हैं, फिर जब वे धान रोपते हैं और फिर तब, जब खेतों में अनाज तैयार हो जाता है।
भाग 3 — एंजेला कार से उतरी, वहाँ आस-पास उत्सव जैसा माहौल देखकर वह हतप्रभ थी। वहाँ एक बड़े से बरगद के पेड़ के नीचे मंच बनाया गया था। वह जगह लोगों से भरी हुई थी। एंजेला ने एक पेड़ के नीचे एक साथ इतने लोगों को पहले कभी नहीं देखा था। वहाँ खुले आसमान के नीचे लोगों के बीच बैठकर उसे ऐसा लग रहा था, जैसे वह आश्चर्यजनक रूप से किसी टाइम-मशीन में आकर बैठ गई हो! या क्या वह उस वक्त किसी सपनों की दुनिया में थी? वह मंत्रमुग्ध होकर वहाँ लड़के-लड़कियों को बसंत ऋतु के आगमन पर नृत्य करते देख रही थी। एंजेला ने इस बात पर ध्यान दिया कि लड़कों ने वाद्ययंत्र ले रखे हैं और लड़कियों ने लाल और बादामी रंग की गहरी डिज़ाइन वाली खूबसूरत पोशाक पहन रखी है। वे सभी काफ़ी रंगीन और मस्त लग रहे थे। उनका हिलता-डुलता शरीर, हाथ-पैर की हलचल से समझ आ रहा था कि वे मौज-मस्ती के नृत्य में खोए हुए हैं। उसकी इच्छा हुई कि वह भी अपने घर पर बसंत के आगमन पर ऐसे ही नृत्य करेगी।
भाग 4 — बिहू नृत्य और इसके उत्सव से अचंभित एंजेला और उसके परिवार ने इसके साथ-साथ लज़ीज पकवानों का पूरा आनंद लिया। जब वे वापस लौटे, तब माँ ने एंजेला से पूछा कि 'उसे बिहू कैसा लगा?' एंजेला के मन में कई तरह के विचार चल रहे थे। उसे अच्छा लगा कि इस उत्सव और नृत्य दोनों को 'बिहू' कहा जाता है। उसने माँ से पूछा कि क्या संगीत और नृत्य सिर्फ़ त्योहारों पर ही होते हैं। माँ ने बताया, "पूरी दुनिया की संस्कृतियों में लोग नृत्य और संगीत से अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं। खासतौर से भारत में बहुतायत ऐसा होता है। असम का बिहू नृत्य ग्रामीण जनजीवन के साथ-साथ फ़सल लगाने से लेकर बसंत के आगमन तक से जुड़ा हुआ है।"
एंजेला की माँ अगले कुछ दिन डॉक्यूमेंट्री के तथ्य जुटाने और साक्षात्कार लेने में व्यस्त रहीं, एंजेला ने काफ़ी सारी बातों पर दूर से ही गौर किया। उसने महसूस किया कि लंदन के जीवन से यहाँ सब कुछ कितना अलग था! उसे अपनी माँ पर गर्व हुआ। वे एक वैज्ञानिक कहानीकार की तरह हैं, जो अपनी फ़िल्मों के द्वारा बहुत-सी चीज़ें एक साथ दिखाते हैं।
अगले दिन वे उत्तरी असम की तरफ़ रवाना हुए, जहाँ सभी 'सत्रों', अर्थात मठों की पीठ है। वे सभी एक सत्र के पास रहने के लिए जाने वाले थे और सत्रिया नृत्य का फ़िल्मांकन करने वाले थे। जब वे 'दक्षिणापथ सत्र' पहुँचे, तब वहाँ उनकी मुलाक़ात रीना सेन से हुई, जो असम की एक जानी-मानी लेखिका हैं। उस हफ़्ते उन लोगों को रीना सेन के घर पर ही रुकना था।
भाग 5 — रीना आंटी की एक बिटिया थी— अनु। अनु और एंजेला ने तुरंत एक-दूसरे की तरफ़ देखा। उन दोनों की ही उम्र दस साल थी, दोनों ने अंग्रेज़ी में बातचीत शुरू की। अनु ने एंजेला को कुछ असमिया शब्द भी सिखाए। एंजेला को अनु के खिलौने बहुत अच्छे लगे, जो थोड़े अलग तरह के थे। गुड़िया, लकड़ी के खिलौने और नारियल की जटा से बने घर! कितने अनोखे खिलौने! उसने लंदन में ऐसे खिलौने कभी नहीं देखे थे। अनु का पसंदीदा खिलौना लकड़ी का बना तीर-कमान था, जिसे लेकर उसे राम बनना बहुत अच्छा लग रहा था। एंजेला उसकी विरोधी बनी थी, शक्तिशाली रावण। वे एक साथ खेल रहे थे, उस कूद-फाँद और लड़ाई का कोई अंत नहीं था।
भाग 6 — एंजेला और अनु ने देखा कि एलेसेंड्रा ने वैष्णव मठ के सभागार में नृत्य कर रहे युवा साधुओं का फ़िल्मांकन किया। एंजेला आश्चर्य से सोच रही थी कि क्या सत्रिया नृत्य सिर्फ़ लड़कों और पुरुषों के लिए है? एंजेला और अनु सोच रहे थे कि काश वे भी इन युवा साधुओं की तरह गा सकते, नृत्य कर सकते और छद्म युद्ध लड़ सकते!
माँ ने एंजेला को बताया कि बीसवीं शताब्दी के मध्य में कुछ साधु मठों से बाहर आकर पुरुषों और महिलाओं को सत्रिया नृत्य सिखाने लगे। शुरू में ऐसे साधुओं को मठों से निकाल दिया गया, लेकिन आधुनिक दौर में महिला सत्रिया कलाकारों के लिए मंच पर नृत्य करना आम बात हो गई है। उस रात माँ महिला सत्रिया नृत्यांगनाओं का फ़िल्मांकन करने वाली थी।
भाग 7 — एंजेला बहुत उत्साहित थी, उसने रीना आंटी से आग्रह किया कि वे अनु को भी सत्रिया नृत्य में 'महिला-नृत्य' को देखने के लिए साथ आने दें। आंटी ने स्वीकृति दे दी, उस रात अनु और एंजेला सत्रिया नृत्य देखने गए, जिसमें भगवान विष्णु के दो द्वारपालों जय-विजय की कहानी थी। परदा उठा और एंजेला ने देखा कि सफ़ेद पगड़ीनुमा टोपी में दो महिलाएँ नृत्य और नाटक की शैली में कमाल का अभिनय कर रही हैं। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ी उन दोनों ने देखा कि किस तरह जय और विजय ने कई बड़े ऋषियों को भगवान विष्णु से मिलने नहीं दिया, क्योंकि उस वक्त भगवान विष्णु सो रहे थे। वे ऋषि नाराज़ हो गए। उन्होंने जय-विजय को असुर बनने का श्राप दे दिया। भगवान विष्णु की नींद जब टूटी, तब उन्हें अपने द्वारपालों को बचाने के लिए आना पड़ा। उन्होंने वचन दिया कि वे जय और विजय को मारकर उन्हें श्राप से बचा लेंगे। बाद में जय और विजय दोबारा भगवान विष्णु के द्वारपाल बने।
एंजेला को यह कहानी नाटकीय और दिलचस्प लगी। सत्रिया महिला नृत्यांगनाओं ने जिस प्रकार की शक्ति, बल और आकर्षण प्रदर्शित किया, वह अद्भुत था! एंजेला को लगा कि उन महिला कलाकारों की प्रस्तुति सत्रिया नृत्य करने वाले पुरुष कलाकारों से भी बेहतर थी।
इसके बाद के दिनों में अनु और एंजेला के ख्यालों में बस सत्रिया नृत्य ही घूम रहा था। उन दोनों ने स्वर्ग के द्वारपाल जय-विजय की तरह हथियार और तलवार चलाते हुए नृत्य किया। एलेसेंड्रा बच्चों की इस उत्सुकता को समझ गई और वे उन्हें सत्रिया कलाकारों के होने वाले साक्षात्कार में साथ लेकर गई।
भाग 8 — एंजेला और अनु बहुत खुश थीं! उन नृत्यांगनाओं के नाम प्रिया और रीता थे। वे लड़कियों को सत्रिया और बिहू की कुछ खूबसूरत मुद्राएँ और बारीकियाँ सिखा रही थीं। एंजेला अत्यधिक प्रसन्न थी। वापस लौटने के बाद भी वह चलने, खाना खाने और यहाँ तक कि खेलने के दौरान भी नृत्य करती रही। वापस लंदन जाने के बाद वह उन सभी रिकॉर्डिंग्स को देखती रही, जो उसकी माँ ने रिकॉर्ड की थी। पूरे उत्साह के साथ वह असम की समृद्ध नृत्य परंपरा को याद करती रही। रंग-बिरंगा सत्रिया और आनंदित करने वाला बिहू।
माँ उसकी गहरी रुचि को समझ गई और उन्होंने पापा के साथ मिलकर एंजेला के लिए असमी नृत्य पर एक शानदार योजना तैयार की। एंजेला ने लंदन में अपनी कक्षा में, स्वयं किए गए नृत्य की वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ उसका प्रदर्शन किया। उसके सहपाठियों और शिक्षकों को यह बहुत पसंद आया। एंजेला इस बात से बहुत रोमांचित थी कि वह असम के खूबसूरत नृत्यों की झलक उन सभी को दिखा पाई। उसे बहुत अच्छा लग रहा था। माँ को भी हर बार ऐसे ही अच्छा लगता होगा, जब वे कोई फ़िल्म बनाती होंगी। अब एंजेला के पास अपने लिए, असम के नृत्यों—बिहू और सत्रिया के साथ अपना खुद का मनोरंजन था।
लेखिका — जया मेहता
अनुवादक — शिवेंद्र कुमार सिंह
4सरल सारांश (भावार्थ)
भाग 1 — परिचय और यात्रा की योजना
भारत की विविध और समृद्ध संस्कृति के परिचय के साथ कहानी शुरू होती है। लंदन में रहने वाली एंजेला की माँ एलेसेंड्रा, जो एक डॉक्यूमेंट्री निर्माता हैं, को असम की नृत्य-परंपरा पर फ़िल्म बनाने के लिए ब्रिटिश अकादमी से आर्थिक सहायता मिलती है, परंतु काम पूरा करने के लिए केवल एक महीने का समय है।
भाग 2 — गुवाहाटी की उड़ान और बिहू की जानकारी
एंजेला के स्कूल से छुट्टी बढ़वाकर पूरा परिवार जल्दबाज़ी में असम (भारत के पूर्वोत्तर राज्य, जो वन्य-जीवन, रेशम और चाय-बागानों के लिए प्रसिद्ध है) की यात्रा पर निकल पड़ता है। रास्ते में माँ एंजेला को असम और वहाँ मनाए जाने वाले बसंत-आगमन त्योहार 'बिहू' के बारे में बताती हैं, और गाँव पहुँचकर यह भी बताती हैं कि बिहू एक कृषि आधारित त्योहार है जो साल में तीन बार मनाया जाता है।
भाग 3 — मलंग गाँव में बिहू नृत्य
मलंग गाँव में बरगद के पेड़ के नीचे खुले में हो रहे रंगारंग बिहू नृत्य को देखकर एंजेला मंत्रमुग्ध हो जाती है। वह ऐसा महसूस करती है जैसे किसी टाइम-मशीन या सपनों की दुनिया में पहुँच गई हो, और उसकी भी इच्छा होती है कि वह ऐसा ही नृत्य करे।
भाग 4 — नृत्य-संगीत पर चर्चा और असम की ओर यात्रा
माँ बताती हैं कि दुनिया भर की संस्कृतियों में लोग नृत्य-संगीत से अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हैं, और असम में बिहू नृत्य ग्रामीण जीवन तथा खेती से गहराई से जुड़ा है। इसके बाद परिवार उत्तरी असम की ओर रवाना होता है, जहाँ सत्रिया नृत्य के फिल्मांकन के लिए 'दक्षिणापथ सत्र' में असमिया लेखिका रीना सेन के घर ठहरते हैं।
भाग 5 — रीना आंटी का घर और अनु से दोस्ती
रीना आंटी की दस वर्षीय बेटी अनु से एंजेला की तुरंत दोस्ती हो जाती है। अनु एंजेला को असमिया शब्द सिखाती है और अपने अनोखे खिलौनों (गुड़िया, लकड़ी के खिलौने, नारियल की जटा से बने घर) से परिचित कराती है। वे दोनों राम-रावण बनकर खेलती हैं।
भाग 6 — सत्रिया नृत्य का फिल्मांकन
दोनों बच्चे मठ में युवा साधुओं द्वारा किए जा रहे सत्रिया नृत्य का फिल्मांकन देखते हैं। एंजेला को आश्चर्य होता है कि क्या यह नृत्य केवल पुरुषों के लिए है, तभी माँ बताती हैं कि बीसवीं सदी के मध्य से महिलाएँ भी सत्रिया नृत्य सीखने और मंच पर प्रस्तुत करने लगी हैं।
भाग 7 — जय-विजय की कथा और महिला सत्रिया नृत्य
उस रात एंजेला और अनु महिला सत्रिया कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भगवान विष्णु के द्वारपाल जय-विजय की कथा पर आधारित नृत्य देखती हैं। महिला कलाकारों के अद्भुत प्रदर्शन से प्रभावित होकर दोनों बच्चे स्वयं भी तलवार लिए नृत्य करने लगते हैं और नृत्यांगनाओं प्रिया व रीता से सत्रिया-बिहू की मुद्राएँ सीखते हैं।
भाग 8 — वापसी और एंजेला का नया शौक
लंदन लौटने के बाद भी एंजेला नृत्य करना जारी रखती है और असम की यादों में खोई रहती है। उसकी गहरी रुचि देखकर माता-पिता उसके लिए एक विशेष योजना बनाते हैं, और एंजेला अपनी कक्षा में असमी नृत्य की वीडियो के साथ प्रदर्शन करती है, जिसे सब बहुत पसंद करते हैं — अब उसके पास बिहू और सत्रिया के रूप में अपना खुद का मनोरंजन है।
5शब्द-संपदा
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| जाने-माने | प्रसिद्ध, मशहूर |
| पेचीदा | जटिल, उलझन भरा |
| वित्तीय मदद | आर्थिक/धन संबंधी सहायता |
| हतप्रभ | आश्चर्यचकित, हैरान |
| मंत्रमुग्ध | पूरी तरह मोहित/तल्लीन |
| वाद्ययंत्र | बाजा, संगीत का यंत्र |
| अचंभित | आश्चर्यचकित |
| लज़ीज | स्वादिष्ट |
| तथ्य | सत्य जानकारी, तथ्यपरक बात |
| सत्र | असम के वैष्णव मठ |
| द्वारपाल | द्वार/दरवाज़े की रक्षा करने वाला |
| श्राप | अभिशाप, कोसना |
| वचन | वादा, प्रतिज्ञा |
| दिलचस्प | रोचक |
| अद्भुत | अनोखा, आश्चर्यजनक |
| समृद्ध | संपन्न, भरपूर |
| रोमांचित | उत्साह और उमंग से भरा हुआ |
| सहपाठी | साथ पढ़ने वाले |
| मनोरंजन | मन बहलाव, आनंद |
| मुद्राएँ | नृत्य में हाथों-शरीर की भंगिमाएँ |
| बारीकियाँ | सूक्ष्म व विशेष बातें |
6पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
मेरी समझ से (क)
- माँ एलेसेंड्रा के बारे में कौन-सा कथन सत्य है?
- वे असम के जीवन के बारे में बहुत-कुछ जानती थीं ✔
- उन्हें असम, बिहू और सत्रिया नृत्य से बहुत प्रेम था
- उन्होंने एंजेला को कुछ असमिया शब्द भी सिखाए
- वे अपने कार्य में सहायता के लिए बेटी को लाई थीं
- "अनु और एंजेला ने तुरंत एक-दूसरे की तरफ़ देखा" — क्यों?
- अनु के पास खिलौने थे
- दोनों की आयु एक समान थी ✔
- दोनों को अंग्रेज़ी भाषा आती थी
- एंजेला अनु से असमिया भाषा सीखना चाहती थी
मिलकर करें मिलान
| शब्द | सही अर्थ या संदर्भ |
|---|---|
| सत्र | ये असम के मठ हैं। इनकी संख्या पाँच सौ से भी ज़्यादा है। ये पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों के स्थान हैं। सत्रिया नृत्य की उत्पत्ति इन्हीं सत्रों में हुई है। |
| बोहाग बिहू | असम में मनाया जाने वाला एक त्योहार। यह असम में नए साल की शुरुआत और बसंत के आगमन का प्रतीक है। |
| लंदन | 'यूनाइटेड किंगडम' और 'इंग्लैंड' की राजधानी। |
| गुवाहाटी | भारत के असम राज्य का एक प्राचीन और सबसे बड़ा नगर। |
| ब्रिटिश अकादमी | 'यूनाइटेड किंगडम' देश की एक सरकारी संस्था। |
| बीसवीं शताब्दी | ग्रेगरी कैलेंडर के अनुसार 1 जनवरी 1901 से 31 दिसंबर 2000 तक का समय। |
पंक्तियों पर चर्चा
(क) "असम, भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में है, जिसे अपने वन्य-जीवन, रेशम और चाय के बागानों के लिए जाना जाता है। इसके साथ असम में नृत्य की भी एक समृद्ध परंपरा है।"
अर्थ — असम भारत का एक पूर्वोत्तर राज्य है, जो अपने वन्य-जीवन (जैसे काज़ीरंगा के गैंडे), मूँगा रेशम और चाय के बागानों के लिए प्रसिद्ध है। इन प्राकृतिक व कृषि विशेषताओं के साथ-साथ असम की एक समृद्ध और प्राचीन नृत्य-परंपरा (जैसे बिहू और सत्रिया) भी है, जो वहाँ की संस्कृति को और भी खास बनाती है।
(ख) "पूरी दुनिया की संस्कृतियों में लोग नृत्य और संगीत से अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं।"
अर्थ — दुनिया भर की सभी संस्कृतियों में नृत्य और संगीत मनुष्य के लिए अपनी खुशी, दुख और अन्य भावनाओं को व्यक्त करने का एक सार्वभौमिक (universal) माध्यम है। भारत में, विशेषकर असम में, यह अभिव्यक्ति ग्रामीण जीवन, खेती और मौसमी त्योहारों से गहराई से जुड़ी हुई है।
सोच-विचार के लिए
(क) "एंजेला के मन में कई तरह के विचार चल रहे थे।" उसके मन में कौन-कौन से विचार चल रहे होंगे?
एंजेला शायद यह सोच रही होगी कि बिहू उत्सव और नृत्य इतने अनोखे और आनंददायक क्यों हैं, क्या यह उत्सव सिर्फ़ त्योहार के समय ही होता है, क्या वह भी ऐसा नृत्य सीख सकती है, और लंदन के अपने जीवन से यह सब कितना अलग और रोमांचक है।
(ख) "बिहू एक कृषि आधारित त्योहार है।" कैसे?
क्योंकि बिहू साल में तीन बार मनाया जाता है और तीनों बार का संबंध सीधे खेती के मौसमी चक्र से है — जब किसान बीज बोते हैं, तब जब वे धान रोपते हैं, और तब जब खेतों में अनाज (फ़सल) तैयार हो जाता है। इस तरह यह त्योहार पूरी तरह किसानों के कृषि-कार्यों पर आधारित है।
(ग) ऐसा लगता है कि भारत से जाने के बाद भी एंजेला के मन में असम ही छाया हुआ था। पाठ से इस कथन के समर्थन के लिए कुछ उदाहरण खोजकर लिखिए।
वापस लंदन जाने के बाद भी वह चलने, खाना खाने और यहाँ तक कि खेलने के दौरान भी नृत्य करती रही; वह अपनी माँ की रिकॉर्डिंग्स को बार-बार पूरे उत्साह से देखती रही; और उसने लंदन में अपनी कक्षा में स्वयं किए गए असमी नृत्य की वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ प्रदर्शन भी किया।
(घ) समय के बदलने के साथ-साथ सत्रिया नृत्य की परंपरा में क्या बदलाव आया है?
पहले सत्रिया नृत्य केवल मठों में पुरुष साधुओं द्वारा ही किया जाता था। बीसवीं शताब्दी के मध्य में कुछ साधु मठों से बाहर आकर पुरुषों और महिलाओं दोनों को यह नृत्य सिखाने लगे। शुरुआत में ऐसे साधुओं को मठों से निकाल दिया गया, लेकिन आधुनिक दौर में महिला सत्रिया कलाकारों का मंच पर नृत्य करना आम बात हो गई है।
निबंध की रचना
इस पाठ की विशेषताएँ पहचानिए और अपनी कक्षा में साझा कीजिए, जैसे इसमें लंदन से यात्रा शुरू करने से लेकर वापस लंदन पहुँचने तक के अनुभवों का वर्णन किया गया है।
इस निबंध की कुछ विशेषताएँ — (1) घटनाओं का वर्णन कालानुक्रम में (लंदन से यात्रा शुरू होकर, असम में बिहू व सत्रिया नृत्य देखने के बाद, वापस लंदन पहुँचने तक) किया गया है। (2) भाषा सरल और सहज है, जिसमें रोज़मर्रा के अनुभवों (जैसे खिलौनों से खेलना, नई दोस्ती करना) का वर्णन है। (3) स्थान (गुवाहाटी, मलंग गाँव, दक्षिणापथ सत्र), वस्तुएँ (पारंपरिक पोशाकें, वाद्ययंत्र, खिलौने) और घटनाएँ (बिहू उत्सव, सत्रिया नृत्य, जय-विजय की कथा) — तीनों का विस्तृत और सजीव चित्रण किया गया है। (4) एक काल्पनिक पात्र (एंजेला) की आँखों से भारत की वास्तविक संस्कृति और परंपराओं को प्रस्तुत किया गया है।
अनुमान या कल्पना से
(क) "बिहू नृत्य और इसके उत्सव से अचंभित एंजेला और उसके परिवार ने..." एंजेला और उसका परिवार बिहू नृत्य और उसके उत्सव को देखकर अचंभित क्यों हो गया?
क्योंकि उन्होंने पहले कभी इतने बड़े पैमाने पर, खुले आसमान के नीचे, इतने सारे लोगों को एक साथ पारंपरिक और रंगीन वेशभूषा में इतने उत्साह और मस्ती के साथ नृत्य करते हुए नहीं देखा था — यह दृश्य उनके लिए बिल्कुल नया, जीवंत और अद्भुत अनुभव था।
(ख) "जब तक एंजेला कुछ समझ पाती, तब तक वह लंदन से नई दिल्ली होते हुए गुवाहाटी की उड़ान पर थी।" एंजेला और उसकी माँ एलेसेंड्रा ने भारत की यात्रा से पहले कौन-कौन सी तैयारियाँ की होंगी?
उन्होंने वीज़ा और पासपोर्ट तैयार करवाया होगा, हवाई टिकट बुक किए होंगे, ज़रूरी सामान पैक किया होगा, यात्रा का पूरा कार्यक्रम (itinerary) बनाया होगा, ठहरने की व्यवस्था की होगी, डॉक्यूमेंट्री के लिए कैमरा व अन्य उपकरण तैयार किए होंगे, और स्कूल से छुट्टी की अनुमति ली होगी।
(ग) "वहाँ एक बड़े से बरगद के पेड़ के नीचे मंच बनाया गया था।" बिहू नृत्य के लिए बरगद के पेड़ के नीचे मंच क्यों बनाया गया होगा?
बरगद का पेड़ अपनी विशाल छाया, आकार और दीर्घायु के लिए जाना जाता है, और भारतीय गाँवों में परंपरागत रूप से यह सामुदायिक सभाओं व उत्सवों के केंद्र जैसा रहा है। इसकी घनी छाया में बहुत-से लोग एक साथ आराम से बैठ सकते हैं, इसलिए बिहू जैसे सामुदायिक उत्सव के लिए यह एक उपयुक्त और स्वाभाविक स्थान रहा होगा।
शब्दों की बात — असम से जुड़े शब्द
इस पाठ में अनेक शब्द ऐसे हैं जो असम से विशेष रूप से जुड़े हैं। अपने समूह में मिलकर उन शब्दों की पहचान कीजिए (संकेत — असम के नृत्य, त्योहार, भाषा आदि)।
पाठ में से असम से जुड़े शब्द खोजकर लिखिए।
बिहू, सत्रिया (नृत्य), सत्र (मठ), मूँगा सिल्क, असमिया (भाषा), बोहाग/रोंगाली बिहू, भोगाली/माघ बिहू, कोंगाली/काटी बिहू, गुवाहाटी, माजुली, दक्षिणापथ सत्र, वैष्णव मठ।
तीन बिहू
असम में बिहू साल में तीन बार मनाया जाता है — रोंगाली या बोहाग (वैसाख, सामान्यतया अप्रैल में), भोगाली या माघ (माघ, सामान्यतया जनवरी में) और कोंगाली या काटी (कार्तिक, सामान्यतया अक्तूबर में)।
(क) एंजेला और उसकी माँ एलेसेंड्रा कौन-से बिहू के अवसर पर भारत आए थे?
पाठ में बताया गया है कि वे अप्रैल के महीने में असम पहुँचे थे और वहाँ बसंत के आगमन की खुशी में त्योहार मनाया जा रहा था। अप्रैल वैसाख का महीना है, इसलिए वे 'रोंगाली' या 'बोहाग बिहू' के अवसर पर भारत आए थे, जो नए साल की शुरुआत और बसंत के आगमन का प्रतीक है।
(ख) तीनों बिहू के लिए लिखिए कि उस समय किसान खेतों में क्या कर रहे होते हैं।
रोंगाली/बोहाग बिहू (अप्रैल) के समय किसान अपने खेतों में नए साल की फ़सल के लिए बीज बोते हैं। कोंगाली/काटी बिहू (अक्तूबर) के समय खेतों में धान की रोपाई हो चुकी होती है और फ़सल अभी पकने की प्रतीक्षा में होती है, इसलिए घरों में अनाज की कमी हो सकती है। भोगाली/माघ बिहू (जनवरी) के समय खेतों में अनाज पककर तैयार हो जाता है और फ़सल की कटाई कर ली जाती है, इसलिए यह मुख्यतः फ़सल-कटाई और भरपूर अनाज के उत्सव का समय होता है।
पाठ से आगे — आपकी बात
(क) "रीना आंटी की एक बिटिया थी— अनु।" 'बिटिया' का अर्थ है 'बेटी'। आपके घर में आपको प्यार से किन-किन नामों से पुकारा जाता है?
(व्यक्तिगत उत्तर है) उदाहरण के लिए — मुझे घर में प्यार से मेरे नाम के छोटे रूप या किसी विशेष प्यार-भरे नाम (जैसे 'गुड़िया', 'बिट्टू', 'मुन्ना/मुन्नी') से पुकारा जाता है।
(ख) आपके नाम का क्या अर्थ है? आपका नाम किसने रखा? पता करके बताइए।
(व्यक्तिगत उत्तर है) विद्यार्थी अपने माता-पिता या दादा-दादी से पूछकर अपने नाम का अर्थ और उसे रखने वाले व्यक्ति के बारे में पता करके कक्षा में साझा करें।
(ग) "वे एक साथ खेल रहे थे।" आप कौन-कौन से खेल अपने मित्रों के साथ मिलकर खेलते हैं?
(व्यक्तिगत उत्तर है) उदाहरण के लिए — क्रिकेट, कबड्डी, लुका-छिपी, कैरम, पिट्ठू, रस्सी-कूद आदि।
(घ) "असम में नृत्य की भी एक समृद्ध परंपरा है।" आपने इस पाठ में बिहू और सत्रिया नृत्यों के बारे में तो पढ़ा है। आपके प्रांत में कौन-कौन से नृत्य प्रसिद्ध हैं? आपको कौन-सा नृत्य करना पसंद है?
(व्यक्तिगत उत्तर है) उदाहरण के लिए — हरियाणा में झूमर, फाग और धमाल जैसे लोकनृत्य प्रसिद्ध हैं। विद्यार्थी अपने प्रांत के प्रसिद्ध नृत्यों के नाम पता करके और अपनी पसंद बताकर कक्षा में साझा करें।
पूर्वोत्तर की यात्रा
टाइम मशीन
(क) यदि आपको टाइम-मशीन मिल जाए तो आप उसमें बैठकर कौन-से समय में और कौन-से स्थान पर जाना चाहेंगे? क्यों?
(व्यक्तिगत उत्तर है) उदाहरण के लिए — मैं प्राचीन भारत के समय में जाना चाहूँगा/चाहूँगी, ताकि उस समय के महान वैज्ञानिकों, कलाकारों और स्मारकों के निर्माण को अपनी आँखों से देख सकूँ।
(ख) आपको यदि कोई ऐसी वस्तु बनाने का अवसर मिले जो अभी तक नहीं बनाई गई है तो आप क्या बनाएँगे? क्यों बनाएँगे?
(व्यक्तिगत उत्तर है) उदाहरण के लिए — मैं एक ऐसा उपकरण बनाना चाहूँगा/चाहूँगी जो प्रदूषण को हवा से पूरी तरह साफ़ कर सके, ताकि सबको स्वच्छ हवा मिल सके।
(ग) क्या आपने कभी किसी संग्रहालय की यात्रा की है? उसके बारे में कक्षा में बताइए।
(व्यक्तिगत उत्तर है) विद्यार्थी अपने द्वारा देखे गए किसी संग्रहालय का अनुभव अपने शब्दों में साझा करें।
खिलौने विभिन्न प्रकार के
(क) अनु के खिलौने कैसे थे? लंदन में एंजेला के खिलौने कैसे रहे होंगे?
अनु के खिलौने गुड़िया, लकड़ी के खिलौने और नारियल की जटा से बने घर जैसे स्थानीय और हस्तनिर्मित थे। लंदन में एंजेला के खिलौने संभवतः आधुनिक, कारखानों में बने और प्लास्टिक/इलेक्ट्रॉनिक खिलौने (जैसे गुड़िया, खेल-सामग्री, वीडियो गेम) रहे होंगे।
(ख) आप घर पर कौन-कौन से खिलौनों से खेलते रहे हैं? उनके नाम बताइए।
(व्यक्तिगत उत्तर है) उदाहरण के लिए — गुड़िया, गेंद, ब्लॉक्स, कारें, बोर्ड-गेम आदि।
(ग) भारत के प्रत्येक प्रांत में हाथ से बच्चों के अनोखे खिलौने बनाए जाते हैं। आपके यहाँ बच्चों के लिए हाथ से बने कौन-कौन से खिलौने मिलते हैं?
(व्यक्तिगत उत्तर है) उदाहरण के लिए — मिट्टी के खिलौने, कपड़े की गुड़िया, लकड़ी के खिलौने, बाँस के खिलौने आदि।
(घ) भारत के बच्चे स्वयं भी अपने लिए अनोखे खिलौने बना लेते हैं। आप भी तो कागज़, मिट्टी आदि से कोई न कोई खिलौना बनाना जानते होंगे? अपने हाथों से बनाए किसी खिलौने को कक्षा में लाकर दिखाइए और उसे बनाने का तरीका सबको सिखाइए।
(व्यक्तिगत/व्यावहारिक गतिविधि है) उदाहरण के लिए — कागज़ की नाव, कागज़ का हवाई जहाज़, मिट्टी के छोटे बर्तन आदि बनाकर कक्षा में दिखाया जा सकता है।
पत्र
(क) मान लीजिए आप एंजेला हैं। आप लंदन लौट चुकी हैं और आपको भारत की बहुत याद आ रही है। अपनी सखी अनु को पत्र लिखकर बताइए कि आपको कैसा अनुभव हो रहा है।
प्रिय अनु,
बहुत सारा प्यार!
मैं लंदन वापस लौट आई हूँ, पर मेरा मन अभी भी असम में ही अटका हुआ है। मुझे बिहू का वह रंगारंग नृत्य, बरगद के पेड़ के नीचे का वह अद्भुत दृश्य, और सत्रिया नृत्य में जय-विजय की वह कहानी बार-बार याद आती है। तुम्हारे साथ राम-रावण बनकर खेलना और तुमसे असमिया शब्द सीखना मुझे बहुत याद आता है। मैंने अपनी कक्षा में सबको हमारा सीखा हुआ नृत्य दिखाया और सबको बहुत पसंद आया! मुझे उम्मीद है कि हम फिर मिलेंगे।
तुम्हारी सखी,
एंजेला
(ख) पत्र लिखने के लिए आवश्यक सामग्री (पोस्टकार्ड, अंतर्देशीय लिफाफे आदि) डाकघर से खरीदी जा सकती है। संभव हो तो आप भी अपने घर के पास के डाकघर जाकर एक पोस्टकार्ड खरीदकर पत्र लिखने के लिए उसका उपयोग कीजिए।
(व्यावहारिक गतिविधि है) विद्यार्थी अपने नज़दीकी डाकघर जाकर पोस्टकार्ड खरीदने और पत्र लिखने का प्रत्यक्ष अनुभव लें।
(ग) डाक-टिकटों के चित्र दिए गए हैं। (क) आपको इनमें से कौन-सा डाक-टिकट सबसे अच्छा लगा और क्यों? (ख) डाक-टिकटों पर लेखकों के बारे में कौन-कौन सी जानकारी दी गई है?
(क) (व्यक्तिगत उत्तर है) विद्यार्थी अपनी पसंद और कारण बताएँ। (ख) डाक-टिकटों पर भारत के विभिन्न प्रसिद्ध हिंदी व भारतीय लेखकों-कवियों (जैसे मुंशी प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, सुमित्रानंदन पंत, दुष्यंत कुमार, राहुल सांकृत्यायन, हज़ारी प्रसाद द्विवेदी आदि) के चित्र, उनका नाम, टिकट का मूल्य और जारी होने का वर्ष अंकित किया गया है। ये टिकट भारत सरकार द्वारा साहित्यकारों के योगदान को सम्मानित करने के लिए जारी किए गए हैं।
आज की पहेली
असम की कुछ रंग-बिरंगी असमिया पहेलियाँ यहाँ हिंदी अनुवाद और संकेत के साथ दी गई हैं—
| हिंदी पहेली | संकेत | उत्तर |
|---|---|---|
| हाथी के दाँत-सी, कदंब के पात-सी। | सफ़ेद मूली का चित्र | मूली |
| पानी है पर मछली नहीं, जंगल है पर बाघ नहीं। | जटा/रेशों जैसा चित्र | नारियल |
| लग-लग कहे तो ना लगे, बेलग कहे तो लग जाए। | होंठों का चित्र | होंठ |
| काला तन और छह हैं चरण, पेट कटे पर भी न मरण। | चींटी का चित्र | चींटी |
झरोखे से — असम का सुप्रसिद्ध मूँगा सिल्क
कुछ वर्ष पूर्व मेरी नियुक्ति गुवाहाटी हवाई अड्डे पर हुई थी। वहाँ पर प्रायः मैं महिलाओं को एक विशेष प्रकार की आकर्षक साड़ी पहने देखता था। यह साड़ी सदैव भूरे-सुनहरे रंग की झिलमिली-सी होती थी। उस पर अधिकतर पारंपरिक ढंग से लाल या काली बॉर्डर तथा हरे, लाल अथवा पीले रंग से बूटों आदि की कढ़ाई रहती थी। कुछ समय पश्चात जब मैं असम के एक विवाह समारोह में गया, तो वहाँ भी अधिकतर महिलाएँ उसी प्रकार की अन्य चमकीली-भूरी-सुनहरी साड़ियाँ पहन कर आई थीं। अनेक पुरुषों ने भी उसी प्रकार के भूरे-सुनहरे रंग के कुर्ते पहने हुए थे। बस केवल रंगों में हल्के या गहरे का अंतर था। मैंने अपने एक असमी मित्र से पूछा कि यह कैसा भूरा-चमकीला कपड़ा है।
मित्र ने बताया कि यह भूरा नहीं बल्कि सुनहरा है। यह असम का सुप्रसिद्ध मूँगा सिल्क है, जो सभी प्रकार के रेशमों में सबसे महँगा होता है। मूँगा का असमिया भाषा में अर्थ है पीला या गहरा भूरा। और इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सम्पूर्ण विश्व में यह केवल असम तथा देश के पूर्वोत्तर राज्यों में ही तैयार होता है। यह असम को प्रकृति द्वारा दिया गया अनमोल और अद्वितीय उपहार है।
मित्र ने यह भी बताया कि मूँगा सिल्क की साड़ियों की एक खूबी यह है कि अन्य रेशमी कपड़ों के विपरीत इनको 'ड्राई क्लीन' कराने की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि उन्हें घर पर ही धोया जा सकता है। हर धुलाई के बाद इनका निखार बढ़ता ही जाता है। एक साड़ी औसतन 50 वर्ष तक खराब नहीं होती है। ऐसा माना जाता है कि मूँगा रेशम सभी प्रकार के प्राकृतिक रूप से तैयार किए जाने वाले कपड़ों में सबसे मज़बूत होता है। इसके अलावा इसे गर्मी या सर्दी किसी भी मौसम में पहना जा सकता है। असम के लोगों का मानना है कि मूँगा सिल्क के कपड़ों में अनेक औषधीय गुण भी होते हैं।
— बिमल श्रीवास्तव, स्रोत पत्रिका, अप्रैल 2008
खोजबीन के लिए
7पाठ का सार — माइंड मैप
8अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
'सत्रिया और बिहू नृत्य' पाठ की लेखिका कौन हैं?
इस पाठ की लेखिका जया मेहता हैं, जो स्वयं एक नृत्यांगना, लेखिका व शिक्षिका हैं। इसका हिंदी अनुवाद शिवेंद्र कुमार सिंह ने किया है।
बिहू त्योहार साल में कितनी बार मनाया जाता है?
बिहू असम में साल में तीन बार मनाया जाता है — रोंगाली/बोहाग बिहू (अप्रैल), भोगाली/माघ बिहू (जनवरी) और कोंगाली/काटी बिहू (अक्तूबर) — यह कृषि-कार्यों के मौसमी चक्र से जुड़ा है।
सत्रिया नृत्य क्या है और यह कहाँ से जुड़ा है?
सत्रिया असम का एक शास्त्रीय नृत्य है, जिसकी उत्पत्ति असम के वैष्णव मठों (सत्रों) में हुई। पहले यह केवल पुरुष साधुओं द्वारा किया जाता था, पर अब महिला कलाकार भी इसे मंच पर प्रस्तुत करती हैं।
महिला सत्रिया नृत्यांगनाओं ने किस कथा पर आधारित नृत्य प्रस्तुत किया था?
उन्होंने भगवान विष्णु के दो द्वारपालों जय-विजय की कथा पर आधारित नृत्य प्रस्तुत किया था, जिसमें ऋषियों के श्राप और भगवान विष्णु द्वारा उन्हें बचाने की कहानी दिखाई गई।
पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
यह पाठ भारत की सांस्कृतिक विविधता, नृत्य-परंपराओं के बदलते और समावेशी स्वरूप (जैसे महिलाओं का सत्रिया नृत्य में आगे आना), और सीमाओं से परे बनने वाली सच्ची मित्रता का सुंदर संदेश देता है।
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सुझाया गया शीर्षक: सत्रिया और बिहू नृत्य — कक्षा 6 हिंदी मल्हार पाठ 8: सारांश, शब्दार्थ और संपूर्ण प्रश्नोत्तर
मेटा विवरण: कक्षा 6 मल्हार पाठ 8 'सत्रिया और बिहू नृत्य' का सरल सारांश, शब्द-संपदा, लेखिका परिचय, असमिया पहेली-हल, मूँगा सिल्क की जानकारी और सभी पाठ्यपुस्तक प्रश्नों के हल — एक ही स्थान पर।
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