प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः — सरल अर्थ, व्याख्या और प्रश्नोत्तर | कक्षा 8 संस्कृत (दीपकम्) कक्षा 8 की एनसीईआरटी संस्कृत पाठ्यपुस्तक ‘दीपकम्’ का चतुर्थ पाठ ‘प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः’ ओडिशा के महान समाजसेवी, शिक्षक और स्वतन्त्रता-सेनानी उत्कलमणि गोपबन्धु दास के जीवन और त्याग की प्रेरक कथा है। इस लेख में लेखक-परिचय, पाठ परिचय, मूल संवाद व श्लोक, हिंदी अनुवाद, शब्द-संपदा, पूर्वरूप सन्धि आदि व्याकरण, पाठ्यपुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों के उत्तर तथा 75 अतिरिक्त प्रश्न (MCQ सहित) — सब कुछ एक ही जगह मिलेगा। इस लेख में: गोपबन्धु दास का परिचय • पाठ परिचय • मूल पाठ (संवाद, भोजन-प्रसंग व श्लोक) • सरल व्याख्या • शब्द-संपदा • भाषा-विशेष (पूर्वरूप सन्धि, क्तवतु, समास) • पाठ्यपुस्तक के अभ्यास • अतिरिक्त प्रश्न (MCQ/लघु/दीर्घ) • माइंड मैप • अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न परिचय : उत्कलमणि गोपबन्धु दास गो उत्कलमणिः गोपबन्धुदासः जन्म : ९ अक्टूबर १८७७ — स्वर्गारोहण : १७ जून १९२८ ‘प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः’ पाठ ओडिशा के महान् समाजसेवक, शिक्षाविद्, पत्र...