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मैं और मेरा देश — कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' | संपूर्ण अध्ययन सामग्री (व्याख्या, अभ्यास उत्तर, प्रश्नोत्तरी)

मैं और मेरा देश — कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' | संपूर्ण अध्ययन सामग्री (व्याख्या, अभ्यास उत्तर, प्रश्नोत्तरी)

मैं और मेरा देश

(निबंध — कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर') — संपूर्ण अध्ययन सामग्री
नोट: इस सामग्री में सभी प्रश्न काले रंग में तथा उनके उत्तर नीले रंग में दिए गए हैं। 25 वस्तुनिष्ठ, 20 अति लघु, 20 लघु तथा 10 महत्वपूर्ण प्रश्न पाठ्यपुस्तक के 'अभ्यास' खंड से अलग हैं।

लेखक परिचय

कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर'

कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर'

जन्म: सन् 1906 ई., सहारनपुर, उत्तर प्रदेश।  निधन: सन् 1995।

हिंदी के प्रसिद्ध निबंधकार कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' का जन्म सन् 1906 ई. में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हुआ था। कन्हैयालाल मिश्र का मुख्य कार्यक्षेत्र पत्रकारिता था। उन्होंने 'नया जीवन' और 'विकास' पत्रों का संपादन किया।

वे प्रारंभ से ही स्वतंत्रता संग्राम एवं सामाजिक कार्यों में भाग लेने के कारण उन्हें अनेक बार जेल-यात्रा भी करनी पड़ी। उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक जीवन से संबंध रखने वाले अनेक निबंध लिखे। अपनी उत्कृष्ट साहित्यिक रचनाओं के लिए उन्हें 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया।

उनके संस्मरणात्मक निबंध-संग्रह — दीप जले शंख बजे, जिंदगी मुसकराई, बाजे पायलिया के घुँघरू, जिंदगी लहलहाई, क्षण बोले कण मुसकाए, कारवाँ आगे बढ़े, माटी हो गई सोना, महके आँगन चहके द्वार और आकाश के तारे — धरती के फूल गहन मानवतावादी दृष्टिकोण और जीवन-दर्शन के परिचायक हैं। सन् 1995 में उनका निधन हो गया।

साहित्यिक विशेषताएँ: कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' की निबंध-शैली संवादात्मक, तर्कपूर्ण और भावप्रवण है। वे प्रश्नोत्तर शैली में पाठक से सीधा संवाद स्थापित करते हुए गूढ़ विचारों को भी सरल, रोचक व उदाहरण-सहित प्रस्तुत करने में सिद्धहस्त थे। उनके निबंधों में देशभक्ति, मानवतावाद और सामाजिक सरोकार की गहरी छाप मिलती है।

निबंध का माइंड मैप

  • मैं और मेरा देश
    • लेखक व विधा
      • कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर'
      • निबंध
      • प्रश्नोत्तर शैली
      • संस्मरणात्मकता
    • मुख्य विचार
      • व्यक्ति-राष्ट्र का अटूट संबंध
      • सम्मान-अपमान का साझा फल
      • अधिकार व कर्तव्य
      • शक्ति-बोध व सौंदर्य-बोध
    • प्रमुख प्रसंग
      • लाला लाजपत राय
      • स्वामी रामतीर्थ व जापानी युवक
      • जापानी विद्यार्थी
      • कमालपाशा व बूढ़ा किसान
      • नेहरू व किसान की खाट
      • कर्ण-शल्य
    • संदेश
      • सुयोग्य मतदान
      • स्वच्छता व सुरुचि
      • निःस्वार्थ योगदान
      • देश का सम्मान

पाठ का सार एवं व्याख्या

भूमिका

'मैं और मेरा देश' एक ऐसी रचना है जो व्यक्ति और राष्ट्र के अविभाज्य संबंध को गहराई से स्थापित करती है। इस निबंध के अनुसार व्यक्ति की पूर्णता उसकी निजता में ही नहीं होती, बल्कि उसके परिवार, क्षेत्र विशेष और राष्ट्र की पहचान तक से जुड़ी होती है। व्यक्ति द्वारा किया गया हर कार्य उसकी पहचान के साथ-साथ उसके परिवार, क्षेत्र और राष्ट्र से भी जुड़ा होता है। इसी विचार से लेखक यह निष्कर्ष निकालता है कि देश का सम्मान और नागरिक का सम्मान एक-दूसरे से अटूट रूप से जुड़े होते हैं।

"मैं" की पूर्णता का भाव

लेखक बताते हैं कि वे अपने घर में जन्मे, पले-बढ़े; अपने पड़ोस में खेलकर पड़ोसियों का ममता-दुलार पाया; अपने नगर में घूम-फिरकर वहाँ के विशाल समाज का संपर्क पाया और उसकी सेवाओं का सहारा पाया। इस तरह एक मनुष्य से भरा-पूरा नगर बनकर वे खड़े हुए। वे अपने नगर के लोगों का सम्मान करते और लोग भी उनका सम्मान करते थे। इस प्रकार वे समझने लगे कि वे अपने-आप में पूरा फैल गए हैं, पूरा मनुष्य हो गए हैं और उनकी मनुष्यता में अब कोई अपूर्णता नहीं रही।

दीवार में दरार

एक दिन आनंद की इस दीवार में एक दरार पड़ गई और तब लेखक को सोचना पड़ा कि घर, पड़ोस और नगर की सीमाओं में ममता, सहारा, ज्ञान और आनंद के उपहार पाकर भी उनकी स्थिति एकदम हीन है — इतनी हीन कि एक मामूली अपराधी की तरह कोई भी उनका अपमान कर सकता है, और उसका बदला लेना तो दूर, वे उसके लिए अपील या दया-प्रार्थना भी नहीं कर सकते। लेखक पूछते हैं कि क्या कोई भूकंप आया था, जिससे यह दीवार में दरार पड़ गई — और उत्तर देते हैं कि यह भूकंप किसी प्रांत या प्रदेश में नहीं, उनके मानस में ही उठा था।

लाला लाजपत राय का भूकंप जैसा अनुभव

यह भूकंप था स्वर्गीय पंजाब-केसरी लाला लाजपत राय के जीवन का एक अनुभव, जिसने लेखक को हिला दिया। लाला जी अपने महान राष्ट्र की पराधीनता के दिनों में उन थोड़े-से लोगों में थे जिन्होंने अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए। वे संसार भर घूमे थे — अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस गए — पर जहाँ भी गए, भारतवर्ष की गुलामी की लज्जा का कलंक उनके माथे पर लगा रहा। इस अनुभव ने लेखक को यह समझाया कि यदि किसी मनुष्य के पास स्वर्ग के भी सब उपहार व साधन हों, पर उसका देश गुलाम हो या किसी भी दूसरे रूप में हीन हो, तो वे सारे उपहार व साधन उसे गौरव नहीं दे सकते।

देश व नागरिक का अन्योन्याश्रित संबंध

इस अनुभव की छाया में लेखक सोचते हैं कि उनका कर्तव्य है कि वे कोई ऐसा काम न करें जिससे उनके देश की स्वतंत्रता या सम्मान को धक्का पहुँचे। साथ ही उनका यह अधिकार भी है कि देश के सम्मान का पूरा भाग उन्हें मिले और उसकी शक्तियों से अपने सम्मान की रक्षा का उन्हें भरोसा रहे। लेखक स्पष्ट करते हैं कि जैसे वे अपने लाभ व सम्मान के लिए हर छोटी बात पर ध्यान देते हैं, वैसे ही देश के लाभ व सम्मान के लिए भी ध्यान देना उनका कर्तव्य है — और यह उनका अधिकार भी है कि देश के सम्मान व साधनों से उन्हें सहारा मिले। इस प्रकार 'मैं' और 'मेरा देश' दो अलग चीजें हैं ही नहीं।

साधारण नागरिक का महत्व

लेखक इस शंका का समाधान करते हैं कि एक साधारण आदमी अपने बड़े देश के लिए क्या कर सकता है। वे कहते हैं कि जीवन एक युद्ध है, पर युद्ध में केवल लड़ना ही तो काम नहीं होता — रसद पहुँचाने वाले, जय बोलने वाले सबका महत्व है। जिस तरह मैच में दर्शकों की तालियों से खिलाड़ियों के पैरों में बिजली आ जाती है और गिरते खिलाड़ी उभर आते हैं, वैसे ही देश के सम्मान की रक्षा के लिए हर साधारण नागरिक भी बहुत कुछ कर सकता है। 'अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता' कहावत को इतिहास कई बार झुठला चुका है।

स्वामी रामतीर्थ और जापानी युवक

स्वामी रामतीर्थ एक बार जापान यात्रा के दौरान रेल में जा रहे थे, जब उन्हें भोजन के लिए फल नहीं मिले और उनके मुँह से निकला कि जापान में शायद अच्छे फल नहीं मिलते। यह सुनकर एक जापानी युवक ताजे फल लेकर दौड़ा आया और उन्हें भेंट में दिए। दाम पूछने पर उसने कहा कि यदि आप मूल्य देना ही चाहते हैं, तो अपने देश जाकर किसी से यह न कहिएगा कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते। इस उत्तर ने स्वामी जी को मुग्ध कर दिया — इस साधारण युवक ने अपने एक कार्य से अपने देश का गौरव कितना बढ़ा दिया।

जापानी विद्यार्थी का प्रसंग

इसके विपरीत, एक दूसरे देश का निवासी युवक शिक्षा लेने जापान आया। एक दिन वह सरकारी पुस्तकालय से एक दुर्लभ चित्रों वाली पुस्तक लाया और उसमें से कुछ चित्र निकालकर पुस्तक वापस कर आया। किसी जापानी विद्यार्थी ने यह देख लिया और पुलिस को सूचना दी। तलाशी में चित्र बरामद हुए और उस विद्यार्थी को जापान से निकाल दिया गया। बात यहीं तक न रुकी — पुस्तकालय के बाहर बोर्ड पर लिख दिया गया कि उस देश (जिसका वह विद्यार्थी था) का कोई भी निवासी इस पुस्तकालय में प्रवेश नहीं कर सकता। एक युवक के अपराध ने पूरे देश के मस्तक पर वर्षों तक कलंक का टीका लगा दिया।

कमालपाशा और देहाती बूढ़े का प्रसंग

महान कमालपाशा तुर्की के राष्ट्रपति थे। अपनी वर्षगाँठ का उत्सव समाप्त कर जब वे अपने भवन में ऊपर चले गए, तब एक देहाती बूढ़ा तीस मील पैदल चलकर वर्षगाँठ का उपहार भेंट करने आया। कमालपाशा ने विश्राम के वस्त्र बदलकर भी नीचे आकर बूढ़े किसान का उपहार स्वीकार किया — मिट्टी की छोटी हँडिया में पाव-भर शहद, जिसे बूढ़ा स्वयं तोड़कर लाया था। उन्होंने स्वयं हँडिया खोलकर शहद चखा और कहा — आज का सर्वोत्तम उपहार यही है, क्योंकि इसमें उसके हृदय का शुद्ध प्यार है। उन्होंने राष्ट्रपति की शाही कार से बूढ़े को सम्मानपूर्वक गाँव तक पहुँचाने का आदेश दिया।

नेहरू जी और किसान की खाट

इसी प्रकार की घटना हमारे देश में भी घटी। एक किसान ने रंगीन सुतलियों से एक खाट बुनी और उसे रेल में लेकर दिल्ली आया, फिर अपने कंधे पर रखकर प्रधानमंत्री पंडित नेहरू की कोठी पहुँचा। पंडितजी कोठी से बाहर आए तो वह खाट उन्हें भेंट कर दी। पंडितजी को देखकर वह इतना भाव-विभोर हो गया कि मुँह से कुछ कह न सका। पंडितजी ने पूछा कि क्या चाहते हो, तो उसने कहा कि केवल यही कि आप इसे स्वीकार करें। प्रधानमंत्री ने उपहार स्वीकार कर अपना एक दस्तखती फोटो स्वयं उसे दिया — यह उस मामूली खाट के बदले नहीं, बल्कि खाट लाने वाले की भावना का सम्मान था।

शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध

लेखक स्पष्ट करते हैं कि हम अपने कार्यों को देश के अनुकूल होने की कसौटी पर कसकर चलने की आदत तभी सफलतापूर्वक डाल सकते हैं, जब हम अपने देश की भीतरी दशा को ठीक से समझें और उसे सदैव अपने सामने रखें। हमारे देश को सबसे पहले और सबसे ज्यादा जरूरत दो बातों की है — एक शक्ति-बोध और दूसरा सौंदर्य-बोध। हमें बस यह समझ लेना है कि हमारा कोई भी कार्य ऐसा न हो जो देश में कमजोरी की भावना को बल दे या कुरुचि की भावना को।

कर्ण-शल्य का उदाहरण

लेखक शल्य की बात का उदाहरण देते हैं, जो महाबली कर्ण का सारथी था। जब भी कर्ण अपने पक्ष के विजय की घोषणा करता, हुंकार भरता, शल्य अर्जुन की अजेयता का एक हल्का-सा उल्लेख कर देता। बार-बार के इस उल्लेख ने कर्ण के सघन आत्मविश्वास में संदेह की तरेड़ डाल दी, जो उसके मन में भावी पराजय की नींव रखने में सफल हो गई। इसी तरह, यदि हम स्वयं अपने देश की तुलना दूसरे देशों से करके अपने देश को हीन व दूसरे को श्रेष्ठ सिद्ध करते हैं, तो हम अपने ही हाथों देश के शक्ति-बोध को भयंकर चोट पहुँचाते हैं।

निष्कर्ष

लेखक अंत में एक कसौटी सुझाते हैं, जिससे देश के नागरिकों की उच्चता व हीनता को तोला जा सकता है — यह कसौटी है चुनाव। जिस देश के नागरिक यह समझते हैं कि चुनाव में किसे मत देना चाहिए और किसे नहीं, वह देश उच्च है; जहाँ के नागरिक गलत लोगों के उत्तेजक नारों या व्यक्तित्वों के गलत प्रभाव में आकर मत देते हैं, वह देश हीन है। इसलिए लेखक कहते हैं कि हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह जब भी चुनाव हो, ठीक मनुष्य को अपना मत दे, और उसका यह अधिकार है कि उसका मत लिए बिना कोई भी व्यक्ति, चाहे वह संसार का सर्वश्रेष्ठ महापुरुष ही क्यों न हो, किसी अधिकार की कुरसी पर न बैठ सके।

पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर

रचना से संवाद — मेरे उत्तर मेरे तर्क

1. "एक दिन आनंद की इस दीवार में दरार पड़ गई", इस पंक्ति में रेखांकित शब्द 'दरार' किस ओर संकेत करता है?
उत्तर: (ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार। तर्क — लेखक अपनी मनुष्यता में पूर्णता महसूस कर रहा था, तभी एक अपमान की घटना ने इस भाव पर गहरा आघात पहुँचाया, जिसे उसने 'दरार' कहा है।
2. निबंध में कहा गया है कि "ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है।" लेखक को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद की अनुभूति होती है?
उत्तर: (क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का। तर्क — लेखक स्वयं कहते हैं कि सही समय पर पूछा गया प्रश्न बात को खिलने और आगे बढ़ने का अवसर देता है, अर्थात वह बात को विस्तार देता है।
3. "अपने महान राष्ट्र की पराधीनता के दीन दिनों में जिन लोगों ने अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए", इस वाक्य में पराधीनता के दिनों को दीन कहा गया है क्योंकि पराधीन भारत में—
उत्तर: (ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था। तर्क — निबंध में पराधीनता को देश के गौरव और सम्मान की हानि के रूप में दर्शाया गया है, अतः यह दीनता भौतिक अभाव से नहीं, आत्मसम्मान के दमन से जुड़ी है।
4. निबंध के अनुसार मनुष्य साधन-संपन्न होते हुए भी गौरव का अनुभव नहीं कर सकते यदि—
उत्तर: (ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो। तर्क — लाला लाजपत राय के अनुभव के अनुसार, स्वर्ग के सभी उपहार व साधन होने पर भी यदि देश गुलाम हो तो वे उपहार व साधन गौरव नहीं दे सकते।
5. "पर उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी साफ है", इस वाक्य में रेखांकित शब्द 'गाँठ' किन दो बातों को साथ बाँधती है?
उत्तर: (क) देश और नागरिक। तर्क — स्वामी रामतीर्थ व जापानी विद्यार्थी की दोनों घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि नागरिक के आचरण से देश का सम्मान या अपमान सीधे जुड़ा होता है।
6. प्रस्तुत निबंध में मुख्यतः कौन-सा भाव व्यक्त हुआ है?
उत्तर: (ग) व्यक्ति और देश का अंतर्सबंध। तर्क — पूरा निबंध इसी केंद्रीय भाव पर आधारित है कि व्यक्ति और उसका देश एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़े हुए हैं।

मेरी समझ मेरे विचार

1. स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध क्यों हो गए?
उत्तर: क्योंकि उस युवक ने फलों का मूल्य पैसों में न माँगकर यह माँगा कि स्वामी जी अपने देश जाकर किसी से यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते — इस देशभक्ति व स्वाभिमान भरे उत्तर से स्वामी जी अभिभूत हो गए।
2. जापान के युवक ने स्वामी रामतीर्थ को दिए गए फलों के मूल्य के रूप में क्या माँगा? आपके मन में उस युवक के व्यक्तित्व की कौन-सी छवि उभरती है, यह भी लिखिए।
उत्तर: उसने केवल यह माँगा कि स्वामी जी किसी से यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते। इस उत्तर से युवक के व्यक्तित्व की एक देशभक्त, स्वाभिमानी व अपने राष्ट्र के सम्मान के प्रति अत्यंत सजग व्यक्ति की छवि उभरती है, जो एक साधारण-सी घटना से भी देश के गौरव की रक्षा करना जानता है।
3. "बात यह है कि मैं और मेरा देश दो अलग चीजें तो हैं ही नहीं" स्वयं को देश से अलग न मानने के पीछे क्या तर्क हो सकते हैं, उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: लेखक के अनुसार प्रत्येक नागरिक का सम्मान व अपमान सीधे उसके देश के सम्मान व अपमान से जुड़ा होता है — जैसे स्वामी रामतीर्थ के अनुभव में एक युवक के देशभक्तिपूर्ण शब्दों ने पूरे जापान को गौरव दिया, वहीं जापानी विद्यार्थी की चोरी से उसके पूरे देश के नागरिकों को पुस्तकालय-प्रवेश से वंचित कर दिया गया। इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि व्यक्ति व देश को अलग नहीं माना जा सकता।

मेरे अनुभव मेरे विचार

1. "देश की हीनता और गौरव का ही फल उसे नहीं मिलता, उसकी हीनता और गौरव का फल भी उसके देश को मिलता है", अपने आस-पास के विभिन्न उदाहरणों के द्वारा इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: यह व्यक्तिगत/उदाहरण-आधारित प्रश्न है। जैसे यदि कोई भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीतता है, तो इससे पूरे भारत को गौरव मिलता है; इसके विपरीत किसी नागरिक के विदेश में गलत आचरण से पूरे देश की छवि धूमिल होती है। (विद्यार्थी अपने अनुभवों के आधार पर उदाहरण जोड़ें।)
2. "मुझे बहुतों की अपने लिए जरूरत पड़ती थी। मैं भी बहुतों की जरूरत का उनके लिए जवाब था।" (क) प्रातःकाल से लेकर रात्रि तक आप अपने किन-किन कार्यों में किस-किसका क्या सहयोग लेते हैं और आप दूसरों को किस तरह का सहयोग देते हैं? अपने अनुभव लिखिए।
उत्तर: व्यक्तिगत अनुभव आधारित प्रश्न — विद्यार्थी अपने दैनिक जीवन के उदाहरण (जैसे माता-पिता से भोजन व देखभाल, शिक्षकों से ज्ञान, मित्रों का सहयोग लेना, तथा बदले में घर के छोटे कार्यों व सहपाठियों की पढ़ाई में मदद देना) लिखें।
(ख) उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द 'बहुतों' में कौन-कौन सम्मिलित होंगे, अनुमान के आधार पर लिखिए।
उत्तर: 'बहुतों' में परिवार के सदस्य, पड़ोसी, मित्र, शिक्षक, दुकानदार, डॉक्टर, सफाई कर्मचारी, किसान, यातायात कर्मी आदि समाज के वे सभी लोग सम्मिलित हो सकते हैं, जिनसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हमारा जीवन जुड़ा है।
(ग) रचनाकार को स्वयं के लिए दूसरे लोगों से किस प्रकार के सहयोग की आवश्यकता पड़ती होगी और वह दूसरों को किस प्रकार का सहयोग देता होगा, अनुमान के आधार पर लिखिए।
उत्तर: एक रचनाकार को समाज से विचार, अनुभव, ज्ञान-भंडार तथा पाठकों का स्नेह व सम्मान चाहिए होगा। बदले में वह अपने लेखन के माध्यम से समाज को जागरूक करने, प्रेरणा देने तथा मार्गदर्शन का सहयोग देता होगा।
3. "सुना नहीं आपने कि जीवन एक युद्ध है और युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता।" (क) उपर्युक्त वाक्य के रेखांकित अंश के आधार पर लिखिए कि देश की प्रगति, विकास एवं सुरक्षा के प्रति हम सभी के क्या-क्या दायित्व हैं?
उत्तर: देश की प्रगति व सुरक्षा केवल सैनिकों के युद्ध लड़ने से ही सुनिश्चित नहीं होती — किसान अन्न उगाकर, श्रमिक निर्माण-कार्यों से, वैज्ञानिक आविष्कारों से, शिक्षक ज्ञान देकर तथा हर नागरिक ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाकर देश की प्रगति में योगदान देता है। (विद्यार्थी घर/पड़ोस के बड़ों व अध्यापक से चर्चा कर विस्तृत उत्तर लिखें।)
(ख) अपने पास-पड़ोस में विचरने वाले पशु-पक्षियों की जीवनचर्या का अवलोकन कीजिए और लिखिए कि आप उनके संघर्षों को किस रूप में देखते हैं?
उत्तर: यह अवलोकन-आधारित व्यक्तिगत प्रश्न है — विद्यार्थी अपने आस-पास के पशु-पक्षियों के भोजन, आश्रय व सुरक्षा हेतु किए जाने वाले संघर्षों का वर्णन करें और 'दो बैलों की कथा' के हीरा-मोती जैसे पात्रों के धैर्य व संघर्षशीलता से इसकी तुलना करें।
(ग) इस निबंध में जीवन को युद्ध क्यों कहा गया है? आप अपने घर के बड़ों से इस विषय पर चर्चा करके उनके और अपने विचार लिखिए।
उत्तर: जीवन को युद्ध इसलिए कहा गया है क्योंकि जीवन में निरंतर चुनौतियों व संघर्षों का सामना करना पड़ता है, ठीक वैसे ही जैसे युद्ध में विभिन्न मोर्चों पर लड़ना पड़ता है, जिसमें हर व्यक्ति की अपनी भूमिका होती है। (विद्यार्थी घर के बड़ों से चर्चा कर अपने विचार जोड़ें।)
(घ) देश की भौगोलिक सीमाओं की रक्षा सैनिक करते हैं। इसी तरह हमारे आस-पास हमारा जीवन बेहतर बनाने के लिए अनेक लोग कार्यरत हैं। ये कौन-कौन लोग हैं और उनके लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर: डॉक्टर, शिक्षक, सफाई कर्मचारी, पुलिसकर्मी, किसान, दुकानदार, डाकिया, बिजली-पानी के कर्मचारी आदि हमारे जीवन को बेहतर बनाने में योगदान देते हैं। इनका सम्मान करके, इनके कार्यों की सराहना करके तथा इनके प्रति विनम्र व्यवहार करके हम अपना आभार व्यक्त कर सकते हैं।
4. "अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।" (क) पास-पड़ोस के लोगों में किस तरह के पारस्परिक संबंध रहते होंगे। वर्तमान समय में ऐसे संबंधों में किस तरह के परिवर्तन आए हैं और इनके क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर: पहले पड़ोसियों में आत्मीयता, सहयोग व स्नेह का संबंध होता था, वे एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होते थे। वर्तमान में शहरीकरण, व्यस्त जीवनशैली, एकल परिवार व्यवस्था व तकनीकी दूरी के कारण यह आत्मीयता कम होती जा रही है।
(ख) आप अपने पड़ोसियों के साथ किस तरह के संबंध रखना पसंद करते हैं? लिखिए।
उत्तर: व्यक्तिगत प्रश्न — विद्यार्थी अपने पड़ोसियों के साथ स्नेह, सम्मान व सहयोग पर आधारित आत्मीय संबंध रखने की अपनी इच्छा के अनुभव लिखें।
5. "क्या सुरुचि और सौंदर्य को आपके किसी काम से ठेस लगती है?" अपने घर/विद्यालय के आस-पास, सार्वजनिक संसाधनों और ऐतिहासिक महत्व के स्थानों की स्वच्छता एवं सौंदर्य को बनाए रखने के लिए आप और आपके सहपाठी, संबंधी क्या-क्या करते हैं?
उत्तर: हम कूड़ा कूड़ेदान में डालते हैं, दीवारों पर गंदगी या लिखावट नहीं करते, सार्वजनिक स्थलों व ऐतिहासिक इमारतों को साफ-सुथरा रखने में सहयोग करते हैं तथा दूसरों को भी स्वच्छता बनाए रखने हेतु प्रेरित करते हैं।
6. "मैं कोई ऐसा काम न करूँ जिससे मेरे देश की स्वतंत्रता को, दूसरे शब्दों में, उसके सम्मान को धक्का पहुँचे" देश के सम्मान को धक्का न पहुँचे, इसके लिए क्या करें और क्या न करें? अपने-अपने समूह में इसकी चर्चा कीजिए और चर्चा से उभरे बिंदुओं को प्रातःकालीन सभा में पढ़कर सुनाइए।
उत्तर: करें — देश के नियमों-कानूनों का पालन करें, ईमानदारी व स्वच्छता बनाए रखें, राष्ट्रीय संपत्ति की रक्षा करें, विदेशों में उचित आचरण करें। न करें — सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी न फैलाएँ, नियम न तोड़ें, देश की छवि खराब करने वाला कोई कार्य न करें। (विद्यार्थी समूह-चर्चा कर बिंदु सभा में प्रस्तुत करें।)

मेरे प्रश्न

इस निबंध के आलोक में नीचे दी गई सामग्री को पढ़कर तीन प्रश्न बनाइए और लिखिए —

यह सोचना एकदम निराधार है कि केवल संपन्न व्यक्ति ही देश की प्रगति और विकास में योगदान दे सकते हैं। देश की सुरक्षा का विषय हो अथवा ऐश्वर्य व संपन्नता का, सभी नागरिकों का अपनी-अपनी तरह से योगदान होता है। हम सब नागरिक अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। हम यदि कुछ भी गलत करते हैं तो उससे अपनी छवि ही धूमिल नहीं होती अपितु अपने देश की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
1. देश की प्रगति और विकास में योगदान देने के बारे में एक सामान्य लेकिन गलत धारणा क्या है?
उत्तर: यह गलत धारणा है कि केवल संपन्न व्यक्ति ही देश की प्रगति और विकास में योगदान दे सकते हैं।
2. देश की सुरक्षा और समृद्धि में किनका योगदान होता है?
उत्तर: देश की सुरक्षा व समृद्धि दोनों में सभी नागरिकों का अपनी-अपनी तरह से योगदान होता है, न कि केवल संपन्न व्यक्तियों का।
3. यदि कोई नागरिक कोई गलत कार्य करता है, तो इसका प्रभाव किस-किस पर पड़ता है?
उत्तर: इसका नकारात्मक प्रभाव न केवल उस व्यक्ति की अपनी छवि पर, बल्कि पूरे देश की छवि पर भी पड़ता है, क्योंकि हर नागरिक अपने देश का प्रतिनिधित्व करता है।

विधा से संवाद

1. 'निबंध' का शाब्दिक अर्थ है 'बाँधना'। निबंध विधा की विशेषताओं (वैयक्तिकता, विषय-केंद्रियता, साहित्यिक सौंदर्य, संक्षिप्तता व स्पष्टता, प्रेरणात्मकता, तार्किकता, सजीवता/चित्रात्मकता, विचार प्रधानता व भावनात्मकता) से संबंधित संदर्भ 'मैं और मेरा देश' निबंध से खोजकर लिखिए।
उत्तर: वैयक्तिकता — लेखक अपने स्वयं के अनुभवों ("मैं अपने घर में जनमा था...") से विषय प्रस्तुत करता है। विषय-केंद्रियता — पूरा निबंध व्यक्ति-राष्ट्र संबंध पर केंद्रित है। साहित्यिक सौंदर्य — "अकेला चना क्या भाड़ फोड़े" जैसी लोकोक्तियों का सुंदर प्रयोग। संक्षिप्तता व स्पष्टता — स्वामी रामतीर्थ, कमालपाशा जैसे छोटे उदाहरणों से जटिल भाव स्पष्ट किए गए हैं। प्रेरणात्मकता — नागरिक कर्तव्यों के प्रति प्रेरित करता है। तार्किकता — प्रश्नोत्तर शैली में तर्कपूर्ण विचार प्रस्तुत हैं। सजीवता/चित्रात्मकता — कमालपाशा व नेहरू के प्रसंग सजीव चित्र प्रस्तुत करते हैं। विचार प्रधानता व भावनात्मकता — देश-प्रेम व नागरिक कर्तव्य जैसे भावनात्मक विचार प्रधान हैं।
2. निबंध का "क्या कोई भूकंप आया था..." वाला अंश प्रश्नोत्तर/संवादात्मक शैली में लिखा गया है। इसी तरह की और भी अन्य विशेषताएँ इस निबंध में से छाँटकर लिखिए।
उत्तर: निबंध में अन्य विशेषताएँ भी हैं — संस्मरणात्मकता (लेखक अपने अनुभव व सुनी-सुनाई कहानियाँ प्रस्तुत करता है), उदाहरण-प्रधान शैली (स्वामी रामतीर्थ, कमालपाशा, नेहरू जैसे वास्तविक प्रसंगों का प्रयोग), मुहावरेदार व लोकोक्तिपूर्ण भाषा तथा तार्किक निष्कर्ष प्रस्तुत करने की शैली।
3. दिए गए विषयों (मेरा भारत मेरा गौरव, चाँद के साथ गपशप, जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि, गागर में सागर, यथा नाम तथा गुण, दूध का दूध और पानी का पानी) में से आप किन विषयों पर निबंध लिखना चाहेंगे, कारण सहित लिखिए।
उत्तर: यह व्यक्तिगत/रचनात्मक प्रश्न है — विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार कोई एक विषय चुनकर कारण सहित लिखें (उदाहरण के लिए, 'मेरा भारत मेरा गौरव' विषय इसलिए रुचिकर है क्योंकि इसमें देशभक्ति की भावना व्यक्त करने का अवसर मिलता है)।

विषयों से संवाद — चुनाव एवं आपके अनुभव

1. जब कोई चुनाव प्रक्रिया आपके क्षेत्र में शुरू होती है तो किस तरह की गतिविधियाँ होती हैं?
उत्तर: चुनाव प्रचार, रैलियाँ, नुक्कड़ सभाएँ, मतदाता जागरूकता अभियान, पोस्टर-बैनर लगाना, घर-घर जाकर प्रचार करना, मतदान केंद्रों की तैयारी जैसी गतिविधियाँ होती हैं।
2. "जब भी कोई चुनाव हो, ठीक मनुष्य को अपना मत दें", आपके विचार से एक अच्छे उम्मीदवार में क्या-क्या गुण होने चाहिए?
उत्तर: एक अच्छे उम्मीदवार में ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा, जनसेवा की भावना, शिक्षा, नेतृत्व क्षमता, निष्पक्षता तथा समाज के प्रति संवेदनशीलता जैसे गुण होने चाहिए।
3. चुनाव से जुड़ा अपना कोई अनुभव लिखिए। (संकेत — विद्यालय में कक्षा प्रतिनिधि का चुनाव)
उत्तर: व्यक्तिगत अनुभव आधारित प्रश्न — विद्यार्थी अपने विद्यालय में हुए कक्षा प्रतिनिधि या मॉनिटर के चुनाव का अनुभव (उम्मीदवारों का भाषण, मतदान प्रक्रिया, परिणाम आदि) लिखें।
4. यदि आप किसी सभा, क्लब आदि के चुनाव में उम्मीदवार हों तो आपके क्या-क्या मुद्दे होंगे?
उत्तर: व्यक्तिगत/रचनात्मक प्रश्न — विद्यार्थी अपनी रुचि अनुसार मुद्दे (जैसे स्वच्छता, अनुशासन, सभी सदस्यों की भागीदारी बढ़ाना आदि) लिखें।

अधिकार और कर्तव्य

इस निबंध में किसी भी स्वतंत्र देश में नागरिक के अधिकार और उसके कर्तव्य की बात की गई है। अपनी पाठ्यपुस्तक के प्रारंभिक पृष्ठ पर भारतीय संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकार व कर्तव्य पढ़कर अपनी कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर: यह गतिविधि-आधारित प्रश्न है — विद्यार्थी अपनी पाठ्यपुस्तक में दिए गए मौलिक अधिकारों (समानता, स्वतंत्रता, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता, शिक्षा व संस्कृति संबंधी अधिकार, संवैधानिक उपचारों का अधिकार) व मूल कर्तव्यों को पढ़कर कक्षा में चर्चा करें।

सृजन

हमारा पुस्तकालय
आप अपने विद्यालय एवं सार्वजनिक पुस्तकालय में जाते हैं। हो सकता है, आपको कभी कोई पुस्तक फटी हुई मिली हो या उसमें से कुछ पृष्ठ गायब हों अथवा उसमें पेन से निशान लगे हों — (क) ऐसा होने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं? (ख) ऐसा न हो, इसके लिए क्या किया जा सकता है? (ग) आप पुस्तकालय में किन नियमों का पालन करते हैं, उन नियमों का पालन करना क्यों अनिवार्य है?
उत्तर: (क) लापरवाही, पुस्तकों के प्रति असावधानी और नियमों का पालन न करना इसके कारण हो सकते हैं। (ख) पुस्तकों को सावधानी से पढ़ना, समय पर लौटाना, नियमों का पालन करना और क्षति होने पर सूचित करना इसके उपाय हैं। (ग) शांति बनाए रखना, समय पर पुस्तक लौटाना, पुस्तकों को साफ-सुथरा रखना जैसे नियमों का पालन करते हैं, ताकि पुस्तकें सुरक्षित रहें और सभी विद्यार्थी उनका लाभ उठा सकें।
ब्रेल लिपि में पुस्तकें
आपके विद्यालय में रोचक पुस्तकों का भंडार है परंतु आपके 'दृष्टिबाधित' सहपाठी स्वयं पढ़कर इनका आनंद नहीं उठा पाते हैं। प्रधानाध्यापक को ब्रेल लिपि में पुस्तकें मँगवाने के संदर्भ में पत्र लिखिए।
उत्तर: यह पत्र-लेखन गतिविधि है — विद्यार्थी औपचारिक प्रारूप में प्रधानाध्यापक को संबोधित पत्र लिखें, जिसमें दृष्टिबाधित सहपाठियों के लिए ब्रेल लिपि में पुस्तकें मँगवाने का विनम्र अनुरोध किया गया हो, साथ ही इसके लाभ भी बताए गए हों।
कृतज्ञता ज्ञापन
देश के विकास में सभी का सहयोग होता है — जो सीमा पर तैनात हैं और जो देश के भीतर हैं, जैसे अध्यापक, किसान, श्रमिक, कलाकार, वैज्ञानिक, अभियंता आदि। इन सभी के अमूल्य योगदान के लिए कृतज्ञता ज्ञापन तैयार करके लिखिए।
उत्तर: यह रचनात्मक लेखन गतिविधि है — विद्यार्थी सैनिकों, किसानों, अध्यापकों, श्रमिकों, वैज्ञानिकों आदि के प्रति आभार व्यक्त करते हुए एक संक्षिप्त कृतज्ञता ज्ञापन तैयार करें, जिसमें प्रत्येक के योगदान का उल्लेख हो।
विज्ञापन
"ठीक मनुष्य को अपना मत दें" — इस पंक्ति के माध्यम से चुनाव में योग्य उम्मीदवार को चुनने का संदेश दिया गया है। आप भी चुनाव में योग्य उम्मीदवार को चुनने के लिए एक आकर्षक विज्ञापन तैयार कीजिए।
उत्तर: यह रचनात्मक गतिविधि है — विद्यार्थी स्लोगन, चित्र व आकर्षक शब्दों का प्रयोग करके मतदाता जागरूकता का विज्ञापन तैयार करें, जैसे — "सोच-समझकर करें मतदान, यही है देश का सम्मान।"
स्वच्छता और आचरण
"क्या आप कभी केला खाकर छिलका रास्ते में फेंकते हैं..." निबंध के इस अंश को पुनः पढ़िए। इस प्रकार के और कौन-कौन से आचरण हो सकते हैं जिनसे देश के सौंदर्य को आघात लगता है? इस विषय पर अपने अभिभावकों, सहपाठियों और शिक्षकों के साथ चर्चा कीजिए।
उत्तर: सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा फेंकना, दीवारों पर गंदगी या नाम लिखना, थूकना, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना जैसे आचरण देश के सौंदर्य को आघात पहुँचाते हैं। (विद्यार्थी चर्चा कर अपने विचार लिखें।)

भाषा से संवाद — व्याकरण की बात

संदर्भ में शब्द
'दरार', 'गाँठ' व 'पानी' शब्द निबंध में भिन्न-भिन्न संदर्भों में प्रयुक्त हुए हैं। अपनी पाठ्यपुस्तक में से ऐसे अन्य शब्द छाँटकर लिखिए जो संदर्भ के अनुसार भिन्न-भिन्न अर्थ देते हों।
उत्तर: उदाहरण के लिए 'हाथ' शब्द — "मुझे उसका हाथ चाहिए" (सहयोग के अर्थ में), "उसने अपना हाथ बढ़ाया" (शारीरिक अंग के अर्थ में)। इसी प्रकार 'आँख', 'सिर', 'मुँह' जैसे शब्द भी संदर्भानुसार भिन्न-भिन्न अर्थ देते हैं। (विद्यार्थी अपनी पाठ्यपुस्तक से अन्य उदाहरण भी खोजकर लिखें।)
मिलते-जुलते भाव वाले 'शब्द-युग्म'
आप इस निबंध में से मिलते-जुलते अर्थ वाले और पुनरुक्त (एक ही शब्द को फिर से कहना) शब्द-युग्म छाँटकर लिखिए।
उत्तर: मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द-युग्म — ममता-दुलार, भरा-पूरा आदि। पुनरुक्त शब्द-युग्म — बड़ी-बड़ी (बातें), छोटी-छोटी (बात), दूर-दूर, बार-बार आदि।
शब्दों की कड़ियाँ/शृंखला — उपसर्ग-प्रत्यय
"मैं सोचा करता था कि मेरी मनुष्यता में अब कोई अपूर्णता नहीं रही।" रेखांकित शब्द 'अपूर्णता' में उपसर्ग व प्रत्यय दोनों का प्रयोग है। इसी प्रकार नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग व प्रत्यय पहचानकर लिखिए — अलौकिक, निरक्षरता, सम्मानित, अनावश्यक, अपमानित, अभिमानी
शब्दउपसर्गमूल शब्दप्रत्यय
अपूर्णता (उदाहरण)पूर्णता
अलौकिकलोकइक
निरक्षरतानिर्अक्षरता
सम्मानितसम्मानइत
अनावश्यकअन्आवश्यक
अपमानितअपमानइत
अभिमानीअभिमान

गतिविधियाँ

'देश मात्र एक भौगोलिक सीमा क्षेत्र नहीं है' इस विषय पर परिचर्चा का आयोजन कीजिए और परिचर्चा में उभरकर आए बिंदुओं की रिपोर्ट तैयार कीजिए। रिपोर्ट को पावर प्वाइंट प्रस्तुतीकरण या चार्ट के माध्यम से कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: यह कक्षा-गतिविधि है — विद्यार्थी समूह में परिचर्चा करें कि देश केवल भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि इसकी संस्कृति, इतिहास, भाषा, परंपराएँ व नागरिकों की भावनाएँ भी इसका हिस्सा हैं, तथा इन बिंदुओं को रिपोर्ट के रूप में प्रस्तुत करें।

भाषा संगम

"मैं अपने देश का नागरिक हूँ" — 'देश' शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित विभिन्न भारतीय भाषाओं में शब्दों की सूची दी गई है। इनके अतिरिक्त यदि आप 'देश' शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए। उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
उत्तर: यह व्यक्तिगत/भाषा-आधारित गतिविधि है — विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में "मैं अपने देश का नागरिक हूँ" वाक्य लिखें तथा 'देश' शब्द के लिए अपनी भाषा में प्रचलित शब्द बताएँ (उदाहरण के लिए, अंग्रेज़ी में 'Country/Nation')।

झरोखे से

इस निबंध में स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय का उल्लेख किया गया है। इसमें नागरिक के कर्तव्य एवं अधिकारों की बात की गई है। लाला लाजपत राय के नीचे दिए गए कुछ विचार पढ़िए —

आत्मनिर्भरता: प्रगति का तात्पर्य है स्वतंत्रता की ओर प्रस्थान। तुम्हारे पूर्वजों ने तुम्हें यही सिखाया है कि जैसे ही तुममें पर-निर्भरता पनपती है, स्वतंत्रता पलायन कर जाती है। आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की आदत डालो, किसी को नाराज करने के इरादे से नहीं, वरन पुरुषार्थ की भावना से ऐसा करो। — यूरोप से भारत वापसी पर स्वागत के अवसर पर (बंबई, 20 फरवरी 1920)
अधिकारों की रक्षा: हर एक का नैतिक कर्तव्य है कि तन-मन-धन से अपने जन्मसिद्ध अधिकारों की रक्षा करे। मेरी राय में जो ऐसा नहीं करता, अपने नैतिक कर्तव्य से हट जाता है। — जेल जाते समय देशवासियों के नाम संदेश (7 जनवरी 1922)

खोजबीन

निबंध में स्वामी रामतीर्थ के अनुभव का उल्लेख किया गया है। आप अपने पुस्तकालय या इंटरनेट से उनके विषय में सामग्री खोजकर पढ़िए और सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।
उत्तर: यह खोजपरक गतिविधि है — विद्यार्थी स्वामी रामतीर्थ (भारतीय संत व दार्शनिक, जिन्होंने वेदांत दर्शन का प्रचार-प्रसार विश्वभर में किया) के विषय में जानकारी एकत्र करके कक्षा में साझा करें।

शब्द-संपदा

शब्दअर्थ
संचितइकट्ठा किया हुआ, जमा किया हुआ, ढेर लगाया हुआ
मानसमन, चित्त, मन से उत्पन्न, मानसरोवर, रामचरितमानस
तेजस्वीतेजवाला, प्रतापी, शक्तिशाली, प्रभावशाली
ठसकचाल-ढाल का बनावटीपन, जिससे रूप, धन आदि का गर्व सूचित होता हो; ऐंठ, शान, नखरा
धनिकधनवान, धनी, स्वामी
रसदअनाज, खाने का सामान, भत्ता, राशन
दाद देनान्यायोचित प्रशंसा करना, न्याय करना
साक्षीगवाही, गवाह का बयान
लांछितदोषयुक्त, कलंकित
हँडियाएक प्रकार का मिट्टी का बर्तन
सुतलीसन या पटसन के रेशों से बटकर बनाई हुई डोरी
चौपालखुली या छायी हुई मंडपाकार बैठक जहाँ गाँव के लोग बैठकर पंचायत आदि करते हों; छायादार बड़ा चबूतरा या दालान
सघनघना, गझिन, ठोस
तरेड़दरार
जीनासीढ़ी, सोपान

25 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (बहुविकल्पीय) उत्तर सहित

(ये प्रश्न पाठ्यपुस्तक के अभ्यास खंड से अलग हैं।)

1. 'मैं और मेरा देश' निबंध के लेखक कौन हैं?
(क) प्रेमचंद   (ख) कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर'   (ग) महादेवी वर्मा   (घ) रवींद्रनाथ टैगोर
उत्तर: (ख) कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर'
2. कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' का जन्म किस वर्ष हुआ?
(क) 1896   (ख) 1906   (ग) 1916   (घ) 1926
उत्तर: (ख) सन् 1906
3. कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' का जन्म-स्थान कौन-सा है?
(क) सहारनपुर, उत्तर प्रदेश   (ख) इंदौर, मध्यप्रदेश   (ग) लखनऊ   (घ) आगरा
उत्तर: (क) सहारनपुर, उत्तर प्रदेश
4. कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' का मुख्य कार्यक्षेत्र क्या था?
(क) चिकित्सा   (ख) पत्रकारिता   (ग) राजनीति   (घ) अभिनय
उत्तर: (ख) पत्रकारिता
5. कन्हैयालाल मिश्र ने किन पत्रों का संपादन किया?
(क) हंस और सरस्वती   (ख) 'नया जीवन' और 'विकास'   (ग) कादंबिनी और धर्मयुग   (घ) आजकल और नवनीत
उत्तर: (ख) 'नया जीवन' और 'विकास'
6. कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' को किस सम्मान से सम्मानित किया गया?
(क) भारत रत्न   (ख) ज्ञानपीठ पुरस्कार   (ग) पद्म श्री   (घ) साहित्य अकादमी पुरस्कार
उत्तर: (ग) पद्म श्री
7. कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' का निधन किस वर्ष हुआ?
(क) 1985   (ख) 1990   (ग) 1995   (घ) 2000
उत्तर: (ग) सन् 1995
8. निम्नलिखित में से कौन-सा कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' का संस्मरणात्मक निबंध-संग्रह है?
(क) दीप जले शंख बजे   (ख) गोदान   (ग) कोसी का घटवार   (घ) मेरा ओलिया गाँव
उत्तर: (क) दीप जले शंख बजे
9. 'मैं और मेरा देश' किस विधा की रचना है?
(क) कहानी   (ख) निबंध   (ग) साक्षात्कार   (घ) एकांकी
उत्तर: (ख) निबंध
10. यह निबंध मुख्यतः किस शैली में लिखा गया है?
(क) वर्णनात्मक शैली   (ख) प्रश्नोत्तर/संवादात्मक शैली   (ग) पत्र शैली   (घ) नाटकीय शैली
उत्तर: (ख) प्रश्नोत्तर/संवादात्मक शैली
11. लेखक के मन में 'भूकंप' बनकर किसका अनुभव आया?
(क) महात्मा गांधी का   (ख) लाला लाजपत राय का   (ग) सुभाषचंद्र बोस का   (घ) स्वामी रामतीर्थ का
उत्तर: (ख) लाला लाजपत राय का
12. लाला लाजपत राय को किस उपाधि से जाना जाता है?
(क) पंजाब-केसरी   (ख) लोकमान्य   (ग) महामना   (घ) देशरत्न
उत्तर: (क) पंजाब-केसरी
13. लाला लाजपत राय ने अपने भ्रमण में किन-किन देशों का उल्लेख किया?
(क) जापान, चीन, रूस   (ख) अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस   (ग) जर्मनी, इटली, स्पेन   (घ) मिस्र, ईरान, तुर्की
उत्तर: (ख) अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस
14. स्वामी रामतीर्थ किस देश की यात्रा के दौरान भूखे रह गए थे?
(क) चीन   (ख) जापान   (ग) नेपाल   (घ) श्रीलंका
उत्तर: (ख) जापान
15. जापानी युवक ने स्वामी रामतीर्थ को दिए गए फलों के मूल्य के रूप में क्या माँगा?
(क) धन   (ख) आशीर्वाद   (ग) यह न कहने का वचन कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते   (घ) कोई पुस्तक
उत्तर: (ग) यह न कहने का वचन कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते
16. दूसरे प्रसंग में जापान गए विदेशी विद्यार्थी ने पुस्तकालय से क्या चुराया?
(क) पैसे   (ख) दुर्लभ चित्र   (ग) पेन   (घ) एक पूरी पुस्तक
उत्तर: (ख) दुर्लभ चित्र
17. उस विद्यार्थी के अपराध के बाद पुस्तकालय के बाहर क्या लिख दिया गया?
(क) पुस्तकालय बंद है   (ख) उस देश का कोई भी निवासी पुस्तकालय में प्रवेश नहीं कर सकता   (ग) प्रवेश शुल्क बढ़ा दिया गया   (घ) कुछ नहीं लिखा गया
उत्तर: (ख) उस देश का कोई भी निवासी पुस्तकालय में प्रवेश नहीं कर सकता
18. महान कमालपाशा किस देश के राष्ट्रपति थे?
(क) मिस्र   (ख) ईरान   (ग) तुर्की   (घ) इराक
उत्तर: (ग) तुर्की
19. देहाती बूढ़े ने कमालपाशा को वर्षगाँठ पर क्या उपहार भेंट किया?
(क) सोने का सिक्का   (ख) मिट्टी की हँडिया में शहद   (ग) एक कंबल   (घ) एक पुस्तक
उत्तर: (ख) मिट्टी की हँडिया में शहद
20. भारतीय किसान ने प्रधानमंत्री नेहरू को क्या भेंट की?
(क) रंगीन सुतलियों से बुनी खाट   (ख) एक टोकरी फल   (ग) हाथ से बुना कंबल   (घ) मिट्टी का घड़ा
उत्तर: (क) रंगीन सुतलियों से बुनी खाट
21. पंडित नेहरू ने किसान के उपहार के बदले उसे क्या दिया?
(क) धन   (ख) अपना दस्तखती फोटो   (ग) पदक   (घ) प्रमाण-पत्र
उत्तर: (ख) अपना दस्तखती फोटो
22. लेखक के अनुसार देश को सबसे पहले किन दो बातों की जरूरत है?
(क) धन और सेना   (ख) शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध   (ग) शिक्षा और तकनीक   (घ) कृषि और उद्योग
उत्तर: (ख) शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध
23. महाबली कर्ण का सारथी कौन था?
(क) कृष्ण   (ख) शल्य   (ग) संजय   (घ) भीष्म
उत्तर: (ख) शल्य
24. शल्य ने कर्ण के आत्मविश्वास में संदेह की तरेड़ किस प्रकार डाली?
(क) युद्ध से भागकर   (ख) बार-बार अर्जुन की अजेयता का उल्लेख करके   (ग) हथियार छिपाकर   (घ) कृष्ण की प्रशंसा करके
उत्तर: (ख) बार-बार अर्जुन की अजेयता का उल्लेख करके
25. लेखक के अनुसार देश की उच्चता-हीनता को तोलने की कसौटी क्या है?
(क) राष्ट्रीय आय   (ख) चुनाव में सही मतदान   (ग) सैन्य शक्ति   (घ) साक्षरता दर
उत्तर: (ख) चुनाव में सही मतदान

20 अति लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर सहित

(ये प्रश्न पाठ्यपुस्तक के अभ्यास खंड से अलग हैं।)

1. 'मैं और मेरा देश' निबंध के लेखक कौन हैं?
उत्तर: कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर'।
2. लेखक का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर: सन् 1906 में सहारनपुर, उत्तर प्रदेश में।
3. लेखक का मुख्य कार्यक्षेत्र क्या था?
उत्तर: पत्रकारिता।
4. लेखक ने किन पत्रों का संपादन किया?
उत्तर: 'नया जीवन' और 'विकास'।
5. लेखक को किस सम्मान से सम्मानित किया गया?
उत्तर: 'पद्म श्री'।
6. लेखक का निधन कब हुआ?
उत्तर: सन् 1995 में।
7. 'मैं और मेरा देश' किस विधा की रचना है?
उत्तर: निबंध।
8. लेखक के किसी एक निबंध-संग्रह का नाम लिखिए।
उत्तर: दीप जले शंख बजे।
9. लेखक के मन में भूकंप बनकर किसका अनुभव आया?
उत्तर: लाला लाजपत राय का।
10. लाला लाजपत राय को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर: पंजाब-केसरी।
11. स्वामी रामतीर्थ को फल किसने भेंट किए?
उत्तर: एक जापानी युवक ने।
12. जापानी विद्यार्थी ने पुस्तकालय से क्या चुराया?
उत्तर: दुर्लभ चित्र।
13. कमालपाशा किस देश के राष्ट्रपति थे?
उत्तर: तुर्की।
14. देहाती बूढ़े ने कमालपाशा को क्या भेंट किया?
उत्तर: शहद से भरी मिट्टी की हँडिया।
15. भारतीय किसान ने नेहरू जी को क्या भेंट की?
उत्तर: रंगीन सुतली से बुनी खाट।
16. लेखक के अनुसार देश को किन दो बोधों की सबसे अधिक जरूरत है?
उत्तर: शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध।
17. कर्ण का सारथी कौन था?
उत्तर: शल्य।
18. निबंध के अनुसार देश की उच्चता-हीनता की कसौटी क्या है?
उत्तर: चुनाव में सही मतदान।
19. लेखक के अनुसार 'मैं' और 'मेरा देश' का संबंध कैसा है?
उत्तर: अभिन्न — दोनों एक-दूसरे से अटूट रूप से जुड़े हैं।
20. यह निबंध किस शैली में लिखा गया है?
उत्तर: प्रश्नोत्तर/संवादात्मक शैली में।

20 लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर सहित

(ये प्रश्न पाठ्यपुस्तक के अभ्यास खंड से अलग हैं।)

1. लेखक अपने घर, पड़ोस और नगर के प्रति कैसा भाव रखता था?
उत्तर: लेखक अपने घर, पड़ोस और नगर से गहरा जुड़ाव महसूस करता था। उसने वहाँ के लोगों का सम्मान किया और बदले में सम्मान पाया, जिससे उसे लगने लगा कि वह पूर्ण मनुष्य बन गया है, उसकी मनुष्यता में अब कोई अपूर्णता नहीं रही।
2. लेखक को अपनी पूर्णता के भाव में दरार का अनुभव कब और कैसे हुआ?
उत्तर: जब लेखक ने महसूस किया कि घर, पड़ोस व नगर से मिली ममता, सहारा व ज्ञान के बावजूद उसकी स्थिति इतनी हीन है कि कोई भी उसका अपमान कर सकता है और वह उसका बदला भी नहीं ले सकता, तब उसे अपनी पूर्णता के भाव में दरार का अनुभव हुआ।
3. लाला लाजपत राय के व्यक्तित्व की क्या विशेषताएँ थीं?
उत्तर: लाला लाजपत राय एक तेजस्वी पुरुष थे, जिन्होंने पराधीनता के दिनों में अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए और अंधकार व भयंकर बवंडरों में भी वे दीपक बुझने से बचाए रखे। उनकी कलम और वाणी दोनों में तेजस्विता की अद्भुत किरणें थीं।
4. लाला लाजपत राय के जीवन का वह कौन-सा अनुभव था, जिसने लेखक को झकझोर दिया?
उत्तर: लाला लाजपत राय विश्व-भ्रमण पर गए, पर जहाँ भी गए, भारतवर्ष की गुलामी की लज्जा का कलंक उनके माथे पर लगा रहा। यह अनुभव लेखक के मन में भूकंप की भाँति उठा, जिसने उन्हें समझाया कि देश गुलाम हो तो कोई भी उपहार व साधन गौरव नहीं दे सकते।
5. स्वामी रामतीर्थ और जापानी युवक की कहानी के माध्यम से लेखक क्या संदेश देना चाहते हैं?
उत्तर: इस कहानी से लेखक यह संदेश देना चाहते हैं कि एक साधारण नागरिक भी अपने छोटे-से कार्य या शब्दों से अपने देश का गौरव बढ़ा सकता है। जापानी युवक ने फलों के बदले धन नहीं, बल्कि अपने देश के सम्मान की रक्षा माँगी, जो सच्ची देशभक्ति का उदाहरण है।
6. जापानी विद्यार्थी की घटना से देश के सम्मान संबंधी क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: इस घटना से शिक्षा मिलती है कि एक व्यक्ति का गलत आचरण पूरे देश की छवि को धूमिल कर सकता है। एक विद्यार्थी की चोरी के कारण उसके पूरे देश के नागरिकों को पुस्तकालय-प्रवेश से वंचित कर दिया गया, जो दर्शाता है कि व्यक्ति और देश का सम्मान एक-दूसरे से जुड़ा होता है।
7. कमालपाशा और देहाती बूढ़े किसान की घटना का सार लिखिए।
उत्तर: एक देहाती बूढ़ा तीस मील पैदल चलकर कमालपाशा को वर्षगाँठ पर शहद से भरी मिट्टी की हँडिया भेंट करने आया। कमालपाशा ने विश्राम त्यागकर स्वयं नीचे आकर यह उपहार स्वीकार किया और कहा कि यह उपहार सर्वोत्तम है, क्योंकि इसमें उसके हृदय का शुद्ध प्यार है।
8. भारतीय किसान व नेहरू जी की खाट वाली घटना क्या दर्शाती है?
उत्तर: यह घटना दर्शाती है कि उपहार का महत्व उसकी कीमत में नहीं, बल्कि देने वाले की भावना में होता है। किसान द्वारा भेंट की गई साधारण खाट को नेहरू जी ने सहर्ष स्वीकार किया और बदले में अपना दस्तखती फोटो देकर उस भावना का सम्मान किया।
9. लेखक के अनुसार शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध क्या हैं और इनकी आवश्यकता क्यों है?
उत्तर: शक्ति-बोध का अर्थ है देश की शक्ति व सामर्थ्य के प्रति जागरूकता, और सौंदर्य-बोध का अर्थ है देश की स्वच्छता व सुरुचि के प्रति संवेदनशीलता। लेखक के अनुसार हमारा कोई भी कार्य ऐसा नहीं होना चाहिए जो देश में कमजोरी या कुरुचि की भावना को बल दे, इसलिए इन दोनों बोधों की आवश्यकता है।
10. कर्ण और शल्य के उदाहरण से लेखक क्या स्पष्ट करना चाहते हैं?
उत्तर: शल्य द्वारा बार-बार अर्जुन की अजेयता का उल्लेख करने से कर्ण के आत्मविश्वास में संदेह की तरेड़ पड़ गई, जिसने उसकी भावी पराजय की नींव रखी। इसी तरह अपने देश की तुलना दूसरे देशों से करके उसे हीन सिद्ध करना देश के शक्ति-बोध को चोट पहुँचाता है।
11. निबंध के अनुसार एक साधारण नागरिक अपने देश के लिए क्या कर सकता है?
उत्तर: लेखक के अनुसार जीवन एक युद्ध है, जिसमें केवल लड़ने वालों का ही नहीं, बल्कि रसद पहुँचाने वालों और जय बोलने वालों का भी महत्व है। इसी तरह हर साधारण नागरिक अपने आचरण, कार्य और सहयोग से देश के सम्मान की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
12. लेखक स्वच्छता और सुरुचि को देश के सौंदर्य से कैसे जोड़ते हैं?
उत्तर: लेखक बताते हैं कि केला खाकर छिलका रास्ते में फेंकना, गंदे शब्दों का प्रयोग करना, सार्वजनिक स्थानों को गंदा रखना जैसे आचरण देश की स्वच्छता व सुरुचि को गहरी चोट पहुँचाते हैं। इसलिए इन आदतों से बचना देश के सौंदर्य-बोध की रक्षा करना है।
13. निबंध के अनुसार नागरिक का अधिकार और कर्तव्य क्या है?
उत्तर: लेखक के अनुसार नागरिक का कर्तव्य है कि वह कोई ऐसा काम न करे जिससे देश के सम्मान व स्वतंत्रता को धक्का पहुँचे, और उसका यह अधिकार है कि देश के सम्मान व साधनों का पूरा भाग उसे मिले तथा उसकी शक्तियों से अपने सम्मान की रक्षा का भरोसा रहे।
14. लेखक के अनुसार देश की उच्चता-हीनता को किस कसौटी पर परखा जा सकता है और क्यों?
उत्तर: लेखक के अनुसार चुनाव इसकी कसौटी है। जिस देश के नागरिक यह समझते हैं कि किसे मत देना चाहिए, वह देश उच्च है; जहाँ के नागरिक गलत नारों या व्यक्तित्वों के प्रभाव में मत देते हैं, वह देश हीन है, क्योंकि सही मतदान से ही योग्य नेतृत्व मिलता है।
15. 'जीवन एक युद्ध है' — इस कथन का लेखक ने क्या अभिप्राय बताया है?
उत्तर: लेखक के अनुसार जीवन में निरंतर संघर्ष व चुनौतियाँ होती हैं, ठीक युद्ध की भाँति। पर युद्ध में केवल लड़ना ही काम नहीं होता — रसद पहुँचाने वाले, जय बोलने वाले सभी का महत्व होता है, अर्थात हर व्यक्ति की अपनी भूमिका होती है।
16. निबंध की भाषा-शैली की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: निबंध की भाषा-शैली सरल, तर्कपूर्ण व संवादात्मक है। इसमें प्रश्नोत्तर शैली, मुहावरों व लोकोक्तियों का सुंदर प्रयोग, वास्तविक ऐतिहासिक उदाहरण तथा भावनात्मक व प्रेरक स्वर एक साथ मिलते हैं, जो निबंध को रोचक व प्रभावी बनाते हैं।
17. निबंध का शीर्षक 'मैं और मेरा देश' कितना सार्थक है, स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: शीर्षक पूर्णतः सार्थक है, क्योंकि पूरा निबंध इसी भाव पर आधारित है कि व्यक्ति और उसका देश दो अलग चीजें नहीं हैं — नागरिक का सम्मान-अपमान देश से और देश का सम्मान-अपमान नागरिक से जुड़ा है, यही शीर्षक का मूल भाव है।
18. लेखक कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' के साहित्यिक व्यक्तित्व की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' पत्रकारिता से जुड़े रहे और राजनीतिक-सामाजिक विषयों पर अनेक निबंध लिखे। उनकी संस्मरणात्मक शैली गहन मानवतावादी दृष्टिकोण व जीवन-दर्शन की परिचायक है। उन्हें 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया।
19. निबंध में प्रयुक्त प्रश्नोत्तर शैली की क्या विशेषता है?
उत्तर: प्रश्नोत्तर शैली में लेखक पहले एक प्रश्न उठाते हैं, फिर उसका विस्तृत व तर्कपूर्ण उत्तर देते हैं। इससे पाठक और लेखक के बीच एक सजीव संवाद जैसा वातावरण बनता है, जिससे निबंध रोचक व प्रभावशाली बन जाता है।
20. निबंध से हमें नागरिक कर्तव्य के विषय में क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: यह निबंध हमें सिखाता है कि हर नागरिक को अपने आचरण से देश के सम्मान की रक्षा करनी चाहिए, चुनाव में सोच-समझकर मतदान करना चाहिए, स्वच्छता व सुरुचि बनाए रखनी चाहिए तथा अपने साधारण-से कार्यों से भी देश के गौरव में योगदान देना चाहिए।

10 महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित

(ये प्रश्न पाठ्यपुस्तक के अभ्यास खंड से अलग हैं।)

1. 'मैं और मेरा देश' निबंध का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: 'मैं और मेरा देश' कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' द्वारा रचित एक प्रश्नोत्तर शैली में लिखा गया निबंध है, जिसमें लेखक व्यक्ति और राष्ट्र के अविभाज्य संबंध को स्थापित करते हैं। लेखक अपने घर-पड़ोस-नगर से मिली पूर्णता के भाव का वर्णन करते हुए बताते हैं कि लाला लाजपत राय के अनुभव ने उन्हें झकझोर दिया कि देश गुलाम हो तो कोई भी साधन गौरव नहीं दे सकता। स्वामी रामतीर्थ, जापानी विद्यार्थी, कमालपाशा व नेहरू जी से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से लेखक यह स्पष्ट करते हैं कि व्यक्ति का हर कार्य देश के सम्मान से जुड़ा है। अंत में लेखक कहते हैं कि सुयोग्य मतदान ही देश की उच्चता-हीनता की सच्ची कसौटी है।
2. लेखक कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' का साहित्यिक परिचय दीजिए।
उत्तर: कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' का जन्म सन् 1906 में सहारनपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ। उनका मुख्य कार्यक्षेत्र पत्रकारिता था, उन्होंने 'नया जीवन' और 'विकास' पत्रों का संपादन किया। स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के कारण उन्हें कई बार जेल-यात्रा करनी पड़ी। उन्होंने राजनीतिक-सामाजिक विषयों पर अनेक निबंध लिखे और अपनी उत्कृष्ट रचनाओं के लिए 'पद्म श्री' से सम्मानित हुए। उनके संस्मरणात्मक निबंध-संग्रह — दीप जले शंख बजे, जिंदगी मुसकराई, बाजे पायलिया के घुँघरू आदि — गहन मानवतावादी दृष्टिकोण के परिचायक हैं। सन् 1995 में उनका निधन हुआ।
3. निबंध में वर्णित लाला लाजपत राय के अनुभव का वर्णन कीजिए और यह निबंध के मूल भाव को किस प्रकार स्पष्ट करता है?
उत्तर: लाला लाजपत राय ने अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस सहित कई देशों की यात्रा की, पर जहाँ भी गए, भारत की पराधीनता का कलंक उनके माथे पर लगा रहा। इस अनुभव ने लेखक को झकझोर दिया कि यदि देश गुलाम हो, तो स्वर्ग के भी सब उपहार व साधन व्यक्ति को गौरव नहीं दे सकते। यह प्रसंग निबंध के मूल भाव — व्यक्ति और देश के अटूट संबंध — को प्रभावी ढंग से स्थापित करता है।
4. स्वामी रामतीर्थ व जापानी युवक की तथा जापानी विद्यार्थी की घटनाओं की तुलना करते हुए इनसे मिलने वाली शिक्षा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: पहली घटना में जापानी युवक ने फलों के बदले धन नहीं, बल्कि अपने देश के सम्मान की रक्षा माँगकर देश का गौरव बढ़ाया। दूसरी घटना में एक विदेशी विद्यार्थी की चोरी से उसके पूरे देश के नागरिकों को पुस्तकालय-प्रवेश से वंचित कर दिया गया। दोनों घटनाओं की तुलना से यह शिक्षा मिलती है कि व्यक्ति का प्रत्येक अच्छा या बुरा कार्य सीधे उसके देश की छवि से जुड़ा होता है।
5. कमालपाशा और नेहरू जी से जुड़े प्रसंगों के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि उपहार में भावना का क्या महत्व है।
उत्तर: देहाती बूढ़े ने कमालपाशा को साधारण-सी शहद की हँडिया भेंट की, जिसे कमालपाशा ने सर्वोत्तम उपहार कहा क्योंकि उसमें शुद्ध प्रेम था। इसी तरह किसान की साधारण खाट को नेहरू जी ने सहर्ष स्वीकार कर अपना दस्तखती फोटो भेंट किया। दोनों प्रसंग स्पष्ट करते हैं कि उपहार का वास्तविक मूल्य उसकी कीमत में नहीं, बल्कि देने वाले की सच्ची भावना में होता है।
6. निबंध के आधार पर नागरिक के अधिकार और कर्तव्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: निबंध के अनुसार नागरिक का कर्तव्य है कि वह कोई ऐसा कार्य न करे जिससे देश के सम्मान व स्वतंत्रता को धक्का पहुँचे, तथा अपने लाभ-सम्मान की भाँति देश के लाभ-सम्मान पर भी ध्यान दे। साथ ही उसका यह अधिकार है कि देश के सम्मान व साधनों का लाभ व सहारा उसे भी मिले। लेखक स्पष्ट करते हैं कि 'मैं' और 'मेरा देश' अलग-अलग चीजें नहीं हैं।
7. 'शक्ति-बोध' और 'सौंदर्य-बोध' क्या हैं? इनका देश के प्रति क्या महत्व है?
उत्तर: शक्ति-बोध का अर्थ है देश की आंतरिक शक्ति व सामर्थ्य के प्रति सजगता, और सौंदर्य-बोध का अर्थ है स्वच्छता व सुरुचि के प्रति संवेदनशीलता। लेखक के अनुसार हमारा कोई भी कार्य ऐसा नहीं होना चाहिए जो देश में कमजोरी या कुरुचि की भावना को बल दे, क्योंकि इन दोनों बोधों से ही देश की उन्नति व गौरव सुनिश्चित होता है।
8. निबंध विधा की दृष्टि से 'मैं और मेरा देश' की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: यह निबंध वैयक्तिकता, विषय-केंद्रियता, तार्किकता, प्रेरणात्मकता तथा साहित्यिक सौंदर्य जैसी सभी निबंध-विशेषताओं से युक्त है। प्रश्नोत्तर व संवादात्मक शैली, वास्तविक ऐतिहासिक उदाहरण (स्वामी रामतीर्थ, कमालपाशा, नेहरू), तथा मुहावरेदार भाषा इस निबंध को विशेष रूप से सजीव व प्रभावशाली बनाती है।
9. निबंध के अनुसार साधारण नागरिक भी देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान कैसे दे सकता है, उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: लेखक के अनुसार जीवन एक युद्ध है, जिसमें रसद पहुँचाने वालों व जय बोलने वालों का भी उतना ही महत्व है जितना लड़ने वालों का। जापानी युवक के उदाहरण से स्पष्ट है कि एक साधारण नागरिक भी अपने छोटे-से कार्य या शब्दों से देश का गौरव बढ़ा सकता है, इसलिए 'अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता' कहावत सदैव सत्य नहीं होती।
10. इस निबंध से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: यह निबंध हमें सिखाता है कि व्यक्ति और देश अभिन्न रूप से जुड़े हैं, इसलिए हमें अपने आचरण से सदैव देश के सम्मान की रक्षा करनी चाहिए। यह यह भी सिखाता है कि स्वच्छता, सुरुचि व सुयोग्य मतदान के माध्यम से हर साधारण नागरिक भी देश की उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

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