पहली बूँद
गोपालकृष्ण कौल की सुंदर वर्षा-कविता — वर्षा की पहली बूँद से धरती के पुनर्जीवित होने का मनोरम चित्रण
1कवि से परिचय — गोपालकृष्ण कौल
धरती के सूखे अधरों पर 'पहली बूँद' के गिरने का अद्भुत दृश्य रचने वाले बाल साहित्यकार गोपालकृष्ण कौल जी (1923–2007) ने बच्चों के लिए देश-प्रेम, प्रकृति और जीव-जंतुओं से जुड़ी बहुत-सी मनोरम कविताएँ लिखी हैं।
अपनी एक अन्य कविता 'हम कुछ सीखें' में वे कहते हैं— "देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें।"
2पाठ परिचय
प्रस्तुत कविता में कवि गोपालकृष्ण कौल ने वर्षा ऋतु की पहली बूँद के धरती पर गिरने का बड़ा ही सजीव और काव्यात्मक वर्णन किया है। सूखी धरती पर जब पहली बूँद गिरती है तो मानो अमृत बरस पड़ता है — अंकुर फूट पड़ते हैं, हरी दूब खिल उठती है। कवि आसमान और बादलों की तुलना समुद्र, नीली आँखों और काली पुतलियों से करते हुए बताते हैं कि किस तरह करुणा से भरे बादल अपने आँसुओं (वर्षा) से धरती की चिर-प्यास बुझाते हैं और बूढ़ी धरती को फिर से हरा-भरा (शस्य-श्यामला) बनाने का वादा करते हैं।
3मूल पाठ
वह पावस का प्रथम दिवस जब,
पहली बूँद धरा पर आई।
अंकुर फूट पड़ा धरती से,
नव-जीवन की ले अँगड़ाई।
धरती के सूखे अधरों पर,
गिरी बूँद अमृत-सी आकर।
वसुंधरा की रोमावलि-सी,
हरी दूब पुलकी-मुसकाई।
पहली बूँद धरा पर आई।।
आसमान में उड़ता सागर,
लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर।
बजा नगाड़े जगा रहे हैं,
बादल धरती की तरुणाई।
पहली बूँद धरा पर आई।।
नीले नयनों-सा यह अंबर,
काली पुतली-से ये जलधर।
करुणा-विगलित अश्रु बहाकर,
धरती की चिर-प्यास बुझाई।
बूढ़ी धरती शस्य-श्यामला
बनने को फिर से ललचाई।
पहली बूँद धरा पर आई।।
— गोपालकृष्ण कौल
4सरल व्याख्या (भावार्थ)
भाग 1 — वर्षा की पहली बूँद और नव-जीवन
कवि कहते हैं कि वह वर्षा ऋतु का पहला दिन था जब पहली बूँद धरती पर गिरी। उस बूँद के गिरते ही धरती से अंकुर फूट पड़ा, मानो धरती नए जीवन की अँगड़ाई ले रही हो। धरती के सूखे होंठों (अधरों) पर जब वह बूँद अमृत की तरह गिरी, तो वसुंधरा (धरती) की रोमावलि जैसी हरी दूब पुलकित होकर मुसकरा उठी।
भाग 2 — आसमान में उड़ता सागर और नगाड़ों की गूँज
कवि कल्पना करते हैं कि आसमान में उड़ता हुआ सागर (यानी बादल) बिजलियों के सुनहरे पंख लगाकर उड़ रहा है। बादल मानो नगाड़े बजाकर धरती की तरुणाई (जवानी) को जगा रहे हैं, यानी गरज-गरज कर वर्षा के आगमन की सूचना दे रहे हैं।
भाग 3 — करुणामय बादल और धरती की तृप्ति
कवि आकाश की तुलना नीली आँखों से और काले बादलों की तुलना काली पुतलियों से करते हैं। ये बादल मानो करुणा से पिघलकर आँसू (वर्षा) बहा रहे हैं, जिससे धरती की चिरकालीन प्यास बुझ जाती है। बूढ़ी हो चुकी धरती एक बार फिर से शस्य-श्यामला (फसलों से हरी-भरी) बनने को लालायित हो उठती है।
5शब्द-संपदा
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| पावस | वर्षा ऋतु |
| धरा | धरती, पृथ्वी |
| अंकुर फूटना | बीज से पौधे का अंकुरण होना, नया अंकुर निकलना |
| अँगड़ाई लेना | आलस्य के बाद शरीर को खींचकर सक्रिय होना |
| अधर | होंठ |
| अमृत | देवताओं का पेय जिससे अमरता मिलती है, अत्यंत मूल्यवान पदार्थ |
| वसुंधरा | धरती, पृथ्वी |
| रोमावलि | रोओं की पंक्ति, रोमों की कतार |
| दूब | एक प्रकार की हरी घास |
| पुलकी | पुलकित, हर्षित, रोमांचित |
| सागर | समुद्र |
| स्वर्णिम | सोने जैसा, सुनहरा |
| नगाड़ा | चोट करके बजाया जाने वाला एक पारंपरिक वाद्ययंत्र |
| तरुणाई | यौवन, जवानी |
| नयन | आँख |
| अंबर | आकाश |
| पुतली | आँख की पुतली (काला भाग) |
| जलधर | जल को धारण करने वाला — बादल या समुद्र |
| करुणा-विगलित | करुणा से पिघला हुआ |
| अश्रु | आँसू |
| चिर-प्यास | बहुत पुरानी/लंबे समय की प्यास |
| शस्य-श्यामला | फसलों से हरी-भरी |
| ललचाना | लालायित होना, कुछ पाने की इच्छा करना |
6पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
मेरी समझ से (क)
- कविता में 'नव-जीवन की ले अँगड़ाई' किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
- बादल
- बूँद
- अंकुर ✔
- पावस
- 'नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर' में 'काली पुतली' है—
- बारिश की बूँदें
- वृद्ध धरती
- नगाड़ा
- बादल ✔
मिलकर करें मिलान
| कविता की पंक्तियाँ | भावार्थ |
|---|---|
| 1. आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर | 4. आकाश |
| 2. बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई | 1. मेघ-गर्जना |
| 3. नीले नयनों सा यह अम्बर, काली पुतली-से ये जलधर। | 2. बादल |
| 4. वसुंधरा की रोमावलि-सी, हरी दूब पुलकी-मुसकाई। | 3. हरी दूब |
पंक्तियों पर चर्चा
(क) "आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर, बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई।"
अर्थ — कवि कल्पना करते हैं कि जैसे समुद्र बिजलियों के सुनहरे पंख लगाकर आकाश में उड़ रहा हो। बादलों की गड़गड़ाहट मानो नगाड़ों की ध्वनि है, जो धरती को वर्षा के आगमन के लिए जगा रही है।
(ख) "नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर। करुणा-विगलित अश्रु बहाकर, धरती की चिर-प्यास बुझाई।"
अर्थ — नीला आकाश मानो किसी की नीली आँखें हैं और उनमें तैरते काले बादल मानो आँखों की काली पुतलियाँ हैं। ये बादल करुणा से भरकर आँसुओं (वर्षा) के रूप में बरसते हैं और धरती की बहुत पुरानी प्यास को बुझा देते हैं।
सोच-विचार के लिए
बारिश की पहली बूँद से धरती का हर्ष कैसे प्रकट होता है?
पहली बूँद गिरते ही धरती से अंकुर फूट पड़ता है, हरी दूब पुलकित होकर मुसकराने लगती है, और बूढ़ी धरती फिर से हरी-भरी (शस्य-श्यामला) बनने के लिए ललचा उठती है — इन सभी बिंबों से धरती का हर्ष व्यक्त होता है।
कविता में आकाश और बादलों को किनके समान बताया गया है?
आकाश को नीली आँखों (नीले नयनों) के समान और बादलों को आँख की काली पुतलियों के समान बताया गया है। इसके अलावा आकाश में उड़ते बादलों की तुलना उड़ते हुए सागर से भी की गई है।
कविता की रचना
'आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर' — इस पंक्ति का सामान्य अर्थ देखें तो समुद्र का आकाश में उड़ना असंभव होता है, लेकिन भावार्थ में यह कविता की सुंदरता और आनंद बढ़ाने वाला काव्यात्मक प्रयोग (कल्पना/अलंकार) है।
इस कविता में ऐसे और दृश्यों को पहचानें और उन पर चर्चा करें।
कुछ और उदाहरण — 1) "नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर" — आकाश की तुलना आँखों से करना; 2) "करुणा-विगलित अश्रु बहाकर" — बादलों के बरसने को आँसू बहाना बताना; 3) "धरती के सूखे अधरों पर, गिरी बूँद अमृत-सी आकर" — धरती को प्यासे होंठों वाला बताना; 4) "वसुंधरा की रोमावलि-सी, हरी दूब पुलकी-मुसकाई" — धरती को मुसकराता हुआ सजीव प्राणी बताना। ये सभी उदाहरण मानवीकरण (मानव जैसे गुण देना) अलंकार के हैं।
शब्द एक अर्थ अनेक
'अंकुर फूट पड़ा धरती से, नव-जीवन की ले अँगड़ाई' में 'फूटने' का अर्थ है पौधे का अंकुरण। 'फूट' शब्द अलग-अलग अर्थों में प्रयोग होता है:
'फूट' शब्द के भिन्न-भिन्न अर्थों में वाक्य-प्रयोग कीजिए।
1) अंकुरण के अर्थ में — बीज से अंकुर फूट पड़ा। 2) फूट डालना (मतभेद कराना) के अर्थ में — अंग्रेज़ों की नीति थी फूट डालो और राज करो। 3) टूटना/फूटना के अर्थ में — मटका ज़मीन पर गिरकर फूट गया। 4) उभरना/निकलना के अर्थ में — बच्चे के मुँह से पहला शब्द फूट पड़ा। 5) फसल के अर्थ में — 'फूट' एक प्रकार का खरबूजा-जैसा फल भी होता है।
अनेक शब्दों के लिए एक शब्द
'जलधर' शब्द 'जल' और 'धर' से मिलकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है 'जल को धारण करने वाला' — यह बादल और समुद्र दोनों के लिए प्रयोग होता है।
'धर' से मिलकर बने कुछ और शब्द और उनके अर्थ ढूँढ़कर लिखिए।
कुछ उदाहरण — गिरिधर (पर्वत को धारण करने वाला, श्रीकृष्ण का एक नाम), धरणीधर (पृथ्वी को धारण करने वाला), वसुंधर (धन/पृथ्वी को धारण करने वाला), हलधर (हल को धारण करने वाला, बलराम का एक नाम), शेषधर (शेषनाग द्वारा पृथ्वी को धारण करना — शेष के अर्थ में प्रयुक्त)।
शब्द पहेली
दिए गए शब्द-जाल में प्रश्नों के उत्तर खोजें—
| न | य | न | ल |
| गा | दू | ब | अं |
| ड़ा | अ | श्रु | ब |
| ज | ल | ध | र |
क. एक प्रकार का वाद्य यंत्र
नगाड़ा — पहले कॉलम को ऊपर से नीचे पढ़ने पर 'न + गा + ड़ा' = नगाड़ा बनता है।
ख. आँख के लिए एक अन्य शब्द
नयन — पहली पंक्ति के पहले तीन अक्षरों 'न + य + न' से बनता है।
ग. जल को धारण करने वाला
जलधर — सबसे नीचे वाली पंक्ति 'ज + ल + ध + र' से बनता है।
घ. एक प्रकार की घास
दूब — दूसरी पंक्ति के बीच के दो अक्षरों 'दू + ब' से बनता है।
ङ. आँसू का समानार्थी
अश्रु — तीसरी पंक्ति के बीच के दो अक्षरों 'अ + श्रु' से बनता है।
च. आसमान का समानार्थी शब्द
अंबर — चौथे कॉलम की दूसरी से चौथी पंक्ति तक 'अं + ब + र' से बनता है।
आपकी बात
बारिश को लेकर हर व्यक्ति का अनुभव भिन्न होता है। बारिश आने पर आपको कैसा लगता है? बताइए।
(व्यक्तिगत उत्तर है।) उदाहरण — मुझे बारिश आने पर बहुत खुशी होती है। मिट्टी की सोंधी खुशबू, ठंडी हवा और कागज़ की नाव तैराना मुझे बहुत पसंद है।
आपको कौन-सी ऋतु सबसे अधिक प्रिय है और क्यों? बताइए।
(व्यक्तिगत उत्तर है।) उदाहरण — मुझे वर्षा ऋतु सबसे अधिक प्रिय है क्योंकि इस मौसम में चारों ओर हरियाली छा जाती है और गर्मी से राहत मिलती है।
समाचार माध्यमों से
सृजन
7इन्हें भी जानें — नगाड़ा
इस कविता में नगाड़े की ध्वनि का उल्लेख है— "बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई।" नगाड़ा भारत का एक पारंपरिक वाद्ययंत्र है। कुछ वाद्ययंत्रों को उन पर चोट करके बजाया जाता है, जैसे— ढोलक, नगाड़ा, डमरू, डफली आदि। नगाड़ा प्रायः लोक उत्सवों के अवसर पर बजाया जाता है। होली जैसे लोकपर्व के अवसर पर गाए जाने वाले गीतों में इसका प्रयोग होता है। नगाड़ों को जोड़े में भी बजाया जाता है, जिसमें एक की ध्वनि पतली तथा दूसरे की मोटी होती है।
8खोजबीन
आपके यहाँ उत्सवों में कौन-से वाद्ययंत्र बजाए जाते हैं? उनके बारे में जानकारी एकत्र करें और अपने समूह में उस पर चर्चा करें।
(व्यक्तिगत/स्थानीय उत्तर है।) उदाहरण — हरियाणा-पंजाब क्षेत्र में ढोल, नगाड़ा, डफली और शहनाई जैसे वाद्ययंत्र त्योहारों, विवाह-समारोहों और लोक-उत्सवों में बजाए जाते हैं।
9आइए इंद्रधनुष बनाएँ
10झरोखे से — एक बूँद
एक बूँद
ज्यों निकल कर बादलों की गोद से
थी अभी एक बूँद कुछ आगे बढ़ी
सोचने फिर-फिर यही मन में लगी
आह! क्यों घर छोड़कर मैं यों बढ़ी।
— अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
11पाठ का सार — माइंड मैप
12अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
'पहली बूँद' कविता के कवि कौन हैं?
इस कविता के कवि गोपालकृष्ण कौल (1923–2007) हैं, जिन्होंने बच्चों के लिए देश-प्रेम, प्रकृति और जीव-जंतुओं से जुड़ी अनेक कविताएँ लिखी हैं।
कविता में आकाश की तुलना किससे की गई है?
आकाश की तुलना नीली आँखों से और बादलों की तुलना काली पुतलियों से की गई है।
'जलधर' शब्द का क्या अर्थ है?
'जलधर' का शाब्दिक अर्थ है 'जल को धारण करने वाला' — इसका प्रयोग बादल और समुद्र दोनों के लिए किया जाता है।
वर्षा की पहली बूँद से धरती पर क्या प्रभाव पड़ता है?
पहली बूँद गिरते ही धरती से अंकुर फूट पड़ता है, हरी दूब पुलकित हो उठती है, और बूढ़ी धरती फिर से हरी-भरी बनने को ललचाने लगती है।
नगाड़ा किस प्रकार का वाद्ययंत्र है?
नगाड़ा एक पारंपरिक भारतीय वाद्ययंत्र है, जिसे चोट करके बजाया जाता है और यह प्रायः लोक-उत्सवों के अवसर पर बजाया जाता है।
ब्लॉगर SEO सुझाव
सुझाया गया शीर्षक: पहली बूँद (गोपालकृष्ण कौल) — कक्षा 6 हिंदी मल्हार पाठ 3: भावार्थ, शब्दार्थ और संपूर्ण प्रश्नोत्तर
मेटा विवरण: कक्षा 6 मल्हार पाठ 3 'पहली बूँद' का सरल भावार्थ, शब्द-संपदा, कवि परिचय (गोपालकृष्ण कौल), शब्द पहेली-हल और सभी पाठ्यपुस्तक प्रश्नों के हल — एक ही स्थान पर।
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