मैया मैं नहिं माखन खायो — पाठ 9, कक्षा 6 हिंदी (मल्हार) : पूरी व्याख्या, अर्थ और प्रश्नोत्तर कक्षा 6 · हिंदी · मल्हार · पाठ 9 मैया मैं नहिं माखन खायो महाकवि सूरदास का ब्रजभाषा पद — बाल-कृष्ण की मासूम शरारत और यशोदा माँ का अपार वात्सल्य 1 कवि से परिचय 🖋️ सूरदास का जन्म 15वीं शताब्दी में हुआ माना जाता है। उन्होंने अपना अधिकांश जीवन मथुरा, गोवर्धन सहित ब्रज के क्षेत्रों में श्रीकृष्ण के गुणगान में भजन गाते हुए बिताया। उनकी रचनाएँ ब्रजभाषा में उपलब्ध हैं। ये रचनाएँ इतनी सुंदर हैं कि आज भी लोगों के बीच बहुत प्रचलित हैं। उनकी अधिकतर कविताओं में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का मनोहारी वर्णन है। ये कविताएँ अत्यंत लोकप्रिय हैं और देशभर में प्रेम से गायी जाती हैं। अपनी उत्कृष्ट रचनाओं के लिए वे महाकवि सूरदास कहलाते हैं। उनकी मृत्यु 16वीं शताब्दी में हुई थी। 2 पाठ परिचय प्रस्तुत पद में बाल-कृष्ण अपनी माँ यशोदा के सामने यह सिद्ध करने का प्रयास करते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया है। वे तर...