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मैया मैं नहिं माखन खायो — कक्षा 6 हिंदी मल्हार पाठ 9: भावार्थ, शब्दार्थ और संपूर्ण प्रश्नोत्तर

मैया मैं नहिं माखन खायो — पाठ 9, कक्षा 6 हिंदी (मल्हार) : पूरी व्याख्या, अर्थ और प्रश्नोत्तर कक्षा 6 · हिंदी · मल्हार · पाठ 9 मैया मैं नहिं माखन खायो महाकवि सूरदास का ब्रजभाषा पद — बाल-कृष्ण की मासूम शरारत और यशोदा माँ का अपार वात्सल्य 1 कवि से परिचय 🖋️ सूरदास का जन्म 15वीं शताब्दी में हुआ माना जाता है। उन्होंने अपना अधिकांश जीवन मथुरा, गोवर्धन सहित ब्रज के क्षेत्रों में श्रीकृष्ण के गुणगान में भजन गाते हुए बिताया। उनकी रचनाएँ ब्रजभाषा में उपलब्ध हैं। ये रचनाएँ इतनी सुंदर हैं कि आज भी लोगों के बीच बहुत प्रचलित हैं। उनकी अधिकतर कविताओं में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का मनोहारी वर्णन है। ये कविताएँ अत्यंत लोकप्रिय हैं और देशभर में प्रेम से गायी जाती हैं। अपनी उत्कृष्ट रचनाओं के लिए वे महाकवि सूरदास कहलाते हैं। उनकी मृत्यु 16वीं शताब्दी में हुई थी। 2 पाठ परिचय प्रस्तुत पद में बाल-कृष्ण अपनी माँ यशोदा के सामने यह सिद्ध करने का प्रयास करते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया है। वे तर...

सत्रिया और बिहू नृत्य — कक्षा 6 हिंदी मल्हार पाठ 8: सारांश, शब्दार्थ और संपूर्ण प्रश्नोत्तर

सत्रिया और बिहू नृत्य — पाठ 8, कक्षा 6 हिंदी (मल्हार) : पूरी व्याख्या, अर्थ और प्रश्नोत्तर कक्षा 6 · हिंदी · मल्हार · पाठ 8 सत्रिया और बिहू नृत्य लंदन की एंजेला की असम-यात्रा — बिहू उत्सव, सत्रिया नृत्य और एक अनोखी दोस्ती की मनोरम कहानी 1 लेखिका से परिचय 💃 जया मेहता एक नृत्यांगना, लेखिका और शिक्षिका हैं। इनका जन्म 1977 में हुआ। यह पाठ उनकी भारतीय नृत्यों से जुड़ी पुस्तक 'नृत्य कथा' से लिया गया है, जिसका हिंदी अनुवाद शिवेंद्र कुमार सिंह ने किया है और चित्रांकन सुरभा नटालिया ने किया है। जया मेहता स्वयं भी ओडिसी नृत्य में पारंगत हैं और कई वर्षों से देश-विदेश में नृत्य प्रस्तुतियाँ दे रही हैं। 2 पाठ परिचय प्रस्तुत निबंध में लंदन में रहने वाली एक बच्ची एंजेला की कहानी है, जो अपनी माँ (एक डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म निर्माता) के साथ असम की यात्रा पर जाती है। वहाँ वह असम के दो प्रमुख नृत्य-रूपों — कृषि आधारित लोकोत्सव 'बिहू' और मठों की परंपरा से जुड़े शास्त्रीय 'सत्रिया नृत...

जलाते चलो — कक्षा 6 हिंदी मल्हार पाठ 7: भावार्थ, शब्दार्थ और संपूर्ण प्रश्नोत्तर

जलाते चलो — पाठ 7, कक्षा 6 हिंदी (मल्हार) : पूरी व्याख्या, अर्थ और प्रश्नोत्तर कक्षा 6 · हिंदी · मल्हार · पाठ 7 जलाते चलो द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी की प्रेरक कविता — आशा, प्रयास और स्नेह के दीये सदा जलाए रखने का संदेश 1 कवि से परिचय 🖋️ द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी (1916–1998) हिंदी के प्रसिद्ध कवि थे। बाल साहित्य के चर्चित रचनाकारों में उनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उन्होंने बच्चों के लिए बहुत-सी सुंदर रचनाएँ लिखीं। उनके द्वारा लिखित 'हम सब सुमन एक उपवन के' जैसे गीत आज भी बहुत लोकप्रिय हैं। 2 पाठ परिचय प्रस्तुत कविता 'जलाते चलो' में कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी मनुष्य को स्नेह और प्रेम से भरे दीये निरंतर जलाते रहने की प्रेरणा देते हैं। कवि के अनुसार भले ही विज्ञान अंधकार को दूर करने में सक्षम हो, परंतु असली अंधकार तो मन के अंदर के स्वार्थ और द्वेष का है, जिसे केवल सच्चे स्नेह और निःस्वार्थ प्रयास से ही दूर किया जा सकता है। कविता आशा और उत्साह से भरी है ...