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संज्ञा (Noun) — पूरी जानकारी सरल भाषा में (कक्षा 6, 7 और 8 के विद्यार्थियों के लिए • उदाहरण, चित्र और माइंड मैप सहित)

  संज्ञा (Noun) — पूरी जानकारी सरल भाषा में कक्षा 6, 7 और 8 के विद्यार्थियों के लिए • उदाहरण, चित्र और माइंड मैप सहित ज़रा सोचिए — जब आप बोलते हैं "राम स्कूल जाता है", तो इस वाक्य में राम और स्कूल — ये दोनों शब्द किसी न किसी नाम को बता रहे हैं। हिंदी व्याकरण में ऐसे ही शब्दों को संज्ञा कहा जाता है। आज हम इसे बहुत आसान तरीके से, ढेर सारे उदाहरणों के साथ समझेंगे। 1. संज्ञा किसे कहते हैं? किसी भी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, भाव या गुण के नाम को "संज्ञा" कहते हैं। सरल शब्दों में — दुनिया की हर चीज़ का एक नाम होता है, और वह नाम ही संज्ञा है। संज्ञा = किसी भी नाम का बोध कराने वाला शब्द व्यक्ति (राम, सीता) वस्तु (किताब, कुर्सी) स्थान (दिल्ली, स्कूल) भाव / गुण (ख़ुशी, ईमानदारी) कुछ आसान उदाहरण वाक्यों में: मोहन बाज़ार से आम लाया। (व्यक्ति + वस्तु) दिल्ली भारत की राजधानी है। (स्थान) उसकी ईमानदारी सबको पसंद है। (गुण) गंगा एक पवित्र नदी है। (स्थान/वस्तु का नाम) ✻ ✻ ✻ 2. संज्ञा के भेद (प्रकार) — माइंड मैप संज्ञा मुख्यतः पाँच प्रकार की होती है। नीचे दिया गया माइंड मैप इसे ...

VAKYA VICHAR (ARTH KE AADHAR PAR) वाक्य-विचार (अर्थ के आधार पर)

सा विद्या या विमुक्तये-शिक्षा का उद्देश्य-संस्कारयुक्त शिक्षा

 ‘सा विद्या या विमुक्तये‘ अर्थात् विद्या वह है, जो हमें मुक्ति प्रदान करती है। और मुक्ति किससे? अज्ञान से। और जब मनुष्य की अज्ञानता दूर हो जाती है, तब वह विकास करता है। तब उसका बौद्धिक, सामाजिक, तथा आर्थिक प्रत्येक प्रकार से विकास होता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान के आधार पर अंक बटोरना नहीं है, बल्कि ज्ञान प्राप्त करना है, जिसके आधार पर वह समाज में अपना एक अलग स्थान बना सके। अपने व्यक्तित्व का निर्माण कर सके। और हमारा यही उद्देश्य है कि हम बच्चों को संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान करें, जिससे बच्चों का चहुँमुखी विकास हो और वे पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान भी प्राप्त कर सकें।

kanya bhroon hatya

  मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और वह समाज में मिल-जुलकर एक परिवार के रूप में रहता है। परिवार स्त्री व पुरुषों का वह समूह होता है जिसमें बालक , युवा व वृद्ध सभी सम्मिलित होकर अपने-अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं। स्त्री व पुरुष परिवार रूपी गाड़ी के दो पहिये हैं , जिनपर परिवार का भार बराबर-बराबर मात्रा में बँटा होता है , यदि इस गाड़ी का एक भी पहिया कमजोर या कार्य करना बंद कर दे तो सामाजिक ढाँचा चरमराकर टूट जाएगा। वर्तमान समय में जैसे-जैसे हम विकास के मार्ग पर आगे बढ्ते जा रहे हैं , वैसे-वैसे प्राकृतिक संसाधनों का अभाव हमारे जीवन को और अधिक मुश्किल कर रहा है। इन परिस्थितियों में लोग पहले बालक के रूप में लड़के को वरीयता देते हैं। तकनीक का प्रयोग कर लिंग परीक्षण द्वारा लडकी होने पर गर्भ में ही उसे मार डालते हैं। कन्या भ्रूण हत्या आमतौर पर मानवता और विशेष रूप से समूची स्त्री जाति के विरुद्ध सबसे जघन्य अपराध है। बेटे की इच्छा   परिवार नियोजन के छोटे परिवार की संकल्पना के साथ जुडती है और दहेज़ की प्रथा ने ऐसी स्थिति को जन्म दिया है जहाँ बेटी का जन्म किसी भी कीमत पर रोका जाता है। इसलिए स...

विकास: कंक्रीट का जंगल

  विकास: कांक्रीट का जंगल “ परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है। “ और हम जिस समाज में रहते है , वह निरंतर विकास और प्रगति की ओर बढ़ रहा है। कांक्रीट के जंगल , यानी शहरीकरण और आधुनिक बुनियादी ढाँचे का विकास , इस प्रगति का ही प्रतीक है। मैं आपका ध्यान इस ओर विशेष रूप से आकर्षित करना चाहती हूँ कि वर्तमान समय में कांक्रीट के जंगल ही विकास का आधार है। शहरो में इमारतें , सड़के , पुल और अन्य बुनियादी ढाँचे बनाकर हम रोजगार के अनेक रास्ते खोलते हैं। यह न केवल निर्माण क्षेत्र में नौकरियाँ प्रदान करते हैं , बल्कि व्यापार , शिक्षा , स्वास्थ्य जैसी और अन्य सेवाओं के लिए भी संभावनाओं के विभिन्न द्वार खोलते हैं। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज की संरचना एक-दूसरे के सहयोग पर टिकी होती है। तो  शहरीकरण इस सामाजिक परिभाषा को पूर्णतया परिभाषित करता है। आज शहरों में लोग एक-दूसरे के साथ अपने संसाधनों को प्रेम से बांटते हैं। साथ मिल नई तकनीक खोजकर अपना व दूसरो का जीवन आसान बनाते हैं। ध्यान दीजिएगा , ये विकास के मार्ग ही आधुनिक जीवन की सुविधाएँ प्रदान करते हैं। शहरी क्षेत्रों में हमे शिक्...

विकास: 'कंकरीट के जंगल’ VIKAAS: CONCRETE KE JANGAL (LAABH)

      ‘ विकास: ' कंकरीट के जंगल ’   प्रकृति हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। सदियों से अनेक विद्वान इसकी महिमा का गुणगान करते आए हैं। परंतु मेरी मित्र ने पुरजोर ' कंकरीट के जंगल को सभ्यता एवं विकास का प्रतीक बताया है। निर्णायक मंडल , कृपया ध्यान दीजिएगा। यह विकास आखिर किस शर्त पर ? शुद्ध हवा के स्थान पर दूषित हवा पाकर , चिड़ियों की चहचहाहट के स्थान पर कानफोडू ट्रैफिक सुनकर , सूर्योदय व सूर्यास्त देखने के स्थान पर टीवी देखकर ? आखिर कहाँ है विकास ? महोदया , मेरी मित्र ने शहरीकरण को ही विकास का दूसरा नाम दिया है तो मैं उनसे कहना चाहूँगी कि इस भारत वर्ष के गौरवशाली इतिहास पर भी नज़र डालें , क्या इस शहरीकरण से पहले मेरा भारत सोने की चिड़िया और विश्वगुरु नहीं था ?   क्या सभ्यताओं में सबसे विकसित सभ्यता हमारी नहीं थी ? क्या शिक्षा और तकनीकी का ज्ञान प्राप्त करने दूर देशों से लोग भारत नहीं आते थे ?   मेरी मित्र शहरी सामाजिक संरचना को उत्तम बता रहीं है ? मैं पूछना चाहती हूँ कि वे किस शहरी समाज को परोपकारी और मिलनसार बता रहीं हैं ? उसे जिसमें लोग अपने पड़ौसी ...