प्रिय पाठकों और विद्यार्थियों, कक्षा में पढ़ाते हुए सालों से जो देखा-सुना, उसी से मैंने एक धारावाहिक कहानी लिखी है — "आख़िरी घंटी" । यह दिल्ली के एक स्कूल की बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों की कहानी है: उनकी दोस्ती, सपने, पहला प्यार, घर-परिवार का दबाव, आपसी झगड़े और वे मुश्किल मोड़ जिनसे हर किशोर कभी न कभी गुज़रता है। कहानी 100 भागों में पूरी हो चुकी है और प्रतिलिपि पर "प्रतिलिपि लेखन अवॉर्ड - सीज़न 3" का हिस्सा है। अगर आपको अपने स्कूल के दिन याद करने हैं, या आप जानना चाहते हैं कि आज के किशोर क्या सोचते और महसूस करते हैं, तो यह कहानी ज़रूर पढ़िए। 👉 "आख़िरी घंटी" प्रतिलिपि पर पढ़ें पढ़ने के बाद प्रतिलिपि पर समीक्षा और रेटिंग देना न भूलें। आपकी राय मेरे लिए बहुत मायने रखती है। 🙏 — मनोज शर्मा