समर्थेन कृषिः कार्या लोकानां हितकाम्यया – कक्षा 9 संस्कृत पाठ 6 (ऋषिकुल्या) श्लोकार्थ, प्रश्नोत्तर, MCQ
ऋषिकुल्या (कक्षा 9 संस्कृत) • पाठ 6 समर्थेन कृषिः कार्या लोकानां हितकाम्यया प्राचीन भारतीय कृषि-विज्ञान: अन्न का महत्त्व, कृषक के गुण और मृदा-परीक्षण 📖 सरलार्थ 📝 अभ्यास उत्तर ✅ 25 MCQ ❓ 50 प्रश्नोत्तर 🧠 माइंड मैप 📑 इस लेख में पाठ परिचय मूल पाठ का सरलार्थ (हिंदी) पाठ का सारांश व मुख्य बिंदु शब्दार्थ (शब्द-संपदा) व्याकरण विशेष पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्नों के उत्तर 25 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) 20 अति लघु उत्तरीय प्रश्न 20 लघु उत्तरीय प्रश्न 10 महत्त्वपूर्ण / दीर्घ उत्तरीय प्रश्न माइंड मैप अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) पाठ परिचय यह पाठ आचार्या और छात्रों — दिनेश, रश्मि, कविता, प्रकाश, विवेक — के संवाद से आरम्भ होता है। दिनेश बताता है कि भारत प्राचीन काल से कृषि-प्रधान देश है, और रश्मि पूछती है कि ‘ तस्मात् सर्वं परित्यज्य कृषिं यत्नेन कारयेत् ’ का क्या अभिप्राय है। आचार्या समझाती हैं कि कृषि से ही अन्न, फल, वनस्पति, दूध आदि की उत्पत्ति होती है, जिनके बिना जीवन सम्भव नहीं। आचार्या बताती हैं कि पराशर आदि प्राचीन महर्षियों ने कृषि पर सूक्ष्म चिन्तन किया और आचार्य कौटिल्य ने कृ...