माँ, कह एक कहानी — कविता व्याख्या, कवि परिचय और प्रश्नोत्तर | कक्षा 7 मल्हार
कक्षा 7 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक 'मल्हार' का पहला पाठ 'माँ, कह एक कहानी' राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की काव्य-कृति 'यशोधरा' से लिया गया एक भावपूर्ण अंश है, जो माँ-बेटे के संवाद के रूप में रचा गया है। इस लेख में आपको कवि-परिचय, मूल कविता, सरल व्याख्या, कठिन शब्दों के अर्थ, पाठ्यपुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों के उत्तर तथा अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न (MCQ सहित) — सब कुछ एक ही जगह मिलेगा।
कवि परिचय
मैथिलीशरण गुप्त
जन्म: 3 अगस्त 1886 — निधन: 12 दिसंबर 1964'माँ, कह एक कहानी' के रचयिता मैथिलीशरण गुप्त हिंदी साहित्य के 'राष्ट्रकवि' के रूप में विख्यात हैं — यह उपाधि स्वयं महात्मा गांधी ने उन्हें प्रदान की थी। उनका जन्म चिरगाँव, झांसी (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। मात्र बारह वर्ष की आयु में ही उन्होंने 'कनकलता' उपनाम से ब्रजभाषा में कविता लिखना आरंभ कर दिया था। बाद में आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी के प्रोत्साहन से उन्होंने खड़ी बोली हिंदी में लिखना शुरू किया और खड़ी बोली के काव्य को नई पहचान दी। उनकी रचनाओं में भारत की धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और राष्ट्रीय चेतना के स्वर मुखर हैं। उन्हें 1954 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया तथा 1952 से आजीवन वे भारतीय राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी रहे।
- जन्म-स्थान चिरगाँव, झांसी (उत्तर प्रदेश)
- उपाधि 'राष्ट्रकवि' (महात्मा गांधी द्वारा प्रदत्त)
- भाषा-शैली प्रारंभ में ब्रजभाषा, बाद में खड़ी बोली हिंदी
- प्रमुख रचनाएँ भारत-भारती, साकेत, यशोधरा, पंचवटी, जयद्रथ-वध
- सम्मान पद्म भूषण (1954), राज्यसभा के मनोनीत सदस्य (1952 से)
- प्रस्तुत पाठ का स्रोत खंडकाव्य 'यशोधरा' का एक अंश
पाठ परिचय
'माँ, कह एक कहानी' मैथिलीशरण गुप्त के प्रसिद्ध खंडकाव्य 'यशोधरा' से लिया गया एक अंश है। यशोधरा गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) की पत्नी थीं, और इस काव्य में उनके मनोभावों का चित्रण किया गया है। प्रस्तुत कविता माँ (यशोधरा) और पुत्र (राहुल) के बीच एक सुंदर संवाद के रूप में रची गई है, जिसमें पुत्र बार-बार माँ से कहानी सुनाने की जिद करता है। माँ उसे एक घायल हंस की करुणा-भरी कहानी सुनाती है — कैसे एक हंस शिकारी (आखेटक) के तीर से घायल होकर गिर पड़ा, बालक सिद्धार्थ (राहुल के पिता, जो आगे चलकर गौतम बुद्ध बने) ने उसे बचाया, और फिर शिकारी व सिद्धार्थ के बीच उस पक्षी को लेकर विवाद हुआ जो अंततः न्यायालय तक पहुँचा। कहानी के अंत में माँ पुत्र से ही पूछती है कि इस विवाद में न्याय किसके पक्ष में होना चाहिए, और बालक बड़ी सहजता से उत्तर देता है कि रक्षक (बचाने वाला) का पक्ष लेना ही सच्चा न्याय है — क्योंकि न्याय में दया का समावेश होना चाहिए। यह कविता संवादात्मक शैली में रची गई है और बाल-मन की जिज्ञासा के साथ-साथ करुणा व न्याय जैसे गहन मूल्यों को बड़ी सरलता से प्रस्तुत करती है।
मूल पाठ
— मैथिलीशरण गुप्त
सरल व्याख्या
भाग 1 — कहानी सुनाने की जिद
भावार्थ — बालक (राहुल) अपनी माँ (यशोधरा) से एक कहानी सुनाने की जिद करता है। माँ हँसते हुए पूछती है कि क्या उसने उसे अपनी नानी समझ लिया है (अर्थात हर समय कहानी सुनाने वाली)। इस पर बालक चंचलता से कहता है कि दासी (चेटी) उसे चिढ़ाती है कि वह अपनी नानी का बेटा है, इसलिए माँ को लेटे-लेटे ही कहानी सुनानी चाहिए — चाहे वह राजा की हो या रानी की। यह भाग बाल-सुलभ हठ और माँ-बेटे के मधुर संबंध को दर्शाता है।
भाग 2 — उपवन का वर्णन
भावार्थ — माँ अपने हठी (जिद्दी) पुत्र को प्यार से 'मानधन' कहकर संबोधित करती है और कहानी आरंभ करती है — एक उपवन (बगीचा) में तुम्हारे पिता (तात) सुबह-सुबह टहला करते थे, जहाँ चारों ओर सुगंध मनचाहे ढंग से फैली रहती थी। वहाँ रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे, ओस की बूँदें (हिम-बिंदु) चमक रही थीं, हल्की हवा के झोंके चल रहे थे और पानी लहरा रहा था। यह प्रकृति का अत्यंत मनोरम और शांत चित्रण है, जो आगे आने वाली घटना के विपरीत वातावरण प्रस्तुत करता है।
भाग 3 — घायल हंस
भावार्थ — उस शांत उपवन में पक्षी मधुर स्वर में गा रहे थे, तभी अचानक एक हंस तेज धार वाले तीर (खर-शर) से बिंधकर आकाश से नीचे गिर पड़ा — उसके पंख को गहरी चोट लगी। यह देखकर बालक सिद्धार्थ (तात) चौंक उठे और उन्होंने तुरंत घायल हंस को उठा लिया, जिससे हंस को मानो नया जीवन मिल गया। इतने में वह शिकारी (आखेटक) वहाँ आ पहुँचा, जो अपने निशाने की सफलता (लक्ष्य-सिद्धि) पर गर्व कर रहा था और हंस को अपना शिकार मानता था।
भाग 4 — विवाद और न्यायालय
भावार्थ — शिकारी ने घायल पक्षी को अपना बताते हुए माँगा, परंतु सिद्धार्थ उस हंस के रक्षक (बचाने वाले) बन चुके थे और उसे देने को तैयार नहीं थे। तब पक्षियों का शिकार करने वाला वह व्यक्ति (खगभक्षी) भी अपनी बात पर अड़ गया। इस प्रकार दयालु सिद्धार्थ और निर्दयी शिकारी के बीच विवाद हो गया — दोनों ही अपनी-अपनी बात (स्वविषय) पर अड़े रहे। अंततः यह मामला न्यायालय (राजसभा) तक पहुँचा, जहाँ सभी ने इसे ध्यान से सुना और समझा।
भाग 5 — राहुल का न्याय
भावार्थ — कहानी सुनाते-सुनाते माँ अचानक पुत्र (राहुल) से ही पूछ बैठती है कि वह स्वयं बताए — इस विवाद में न्याय किसके पक्ष में जाना चाहिए, और निडर होकर अपना फैसला सुनाए। इस पर बालक राहुल बड़ी सहजता और गंभीरता से उत्तर देता है — यदि कोई निर्दोष प्राणी पर वार करे, तो दूसरों को उसे बचाना ही चाहिए। रक्षा करने वाले (रक्षक) को नष्ट करने वाले (भक्षक) पर वरीयता (प्राथमिकता) मिलनी चाहिए, क्योंकि सच्चा न्याय वही है जिसमें दया का समावेश हो। माँ प्रसन्न होकर कहती है कि पुत्र ने कहानी का सही मर्म (गूढ़ अर्थ) समझ लिया है। यही इस कविता का केंद्रीय संदेश है — न्याय और दया एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
शब्द-संपदा
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| चेटी | दासी, सेविका |
| हठी | जिद्दी |
| मानधन | प्रिय संबोधन (स्नेह से कहा गया शब्द) |
| उपवन | बगीचा |
| तात | पिता |
| सुरभि | सुगंध, खुशबू |
| हिम-बिंदु | ओस की बूँदें |
| खग | पक्षी |
| बिद्ध | बिंधा हुआ, घायल |
| खर-शर | तेज धार वाला तीर |
| पक्ष | पंख; (दूसरे अर्थ में) किसी की ओर समर्थन |
| आखेटक | शिकारी |
| लक्ष्य-सिद्धि | निशाने की सफलता |
| आहत | घायल |
| रक्षी | रक्षा करने वाला |
| खगभक्षी | पक्षियों का शिकार करने वाला |
| सदय-निर्दय | दयालु और निर्दयी |
| उभय | दोनों |
| स्वविषय | अपनी बात/अपना पक्ष |
| न्यायालय | न्याय की सभा, कचहरी |
| निरपराध | निर्दोष |
| उबारना | बचाना |
| रक्षक | बचाने वाला |
| भक्षक | नष्ट करने वाला, खा जाने वाला |
| वारना | न्योछावर करना, अर्पित करना |
| निर्भय | बिना डर के |
| बानी | वाणी, बोली |
पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे सही उत्तर कौन-सा है? उनके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
- (1) माँ अपने बेटे को करुणा और न्याय की कहानी क्यों सुनाती है?
- राजाओं की कहानियों से उसका मनोरंजन करने के लिए
- ★ उसमें सही और गलत की समझ विकसित करने के लिए
- उसे परिवार की विरासत और पूर्वजों के बारे में बताने के लिए
- उसे प्रकृति और जानवरों के बारे में जानकारी देने के लिए
- (2) कविता में घायल पक्षी की कहानी का उपयोग किस लिए किया गया है?
- निर्दोष पक्षी के प्रति आखेटक की क्रूरता दिखाने के लिए
- पिता की वीरता और साहस पर ध्यान दिलाने के लिए
- ★ करुणा और हिंसा के बीच के संघर्ष को दिखाने के लिए
- मित्रता और निष्ठा के महत्व को उजागर करने के लिए
- (3) कविता के अंत तक पहुँचते-पहुँचते बच्चे को क्या समझ में आने लगता है?
- ★ न्याय सदैव करुणा के साथ होना चाहिए
- निर्णय लेते समय सदैव निडर रहना चाहिए
- आखेटकों का सदैव विरोध करना चाहिए
- जानवरों की हर स्थिति में रक्षा करनी चाहिए
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
यह एक समूह-चर्चा गतिविधि है — विद्यार्थी कविता की पंक्तियों का हवाला देकर अपने चुने गए उत्तर के पक्ष में तर्क प्रस्तुत करें, जैसे "मैंने यह उत्तर चुना क्योंकि कविता की अंतिम पंक्तियों में सीधे यही भाव व्यक्त हुआ है — 'रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी'।"
इस पाठ में आपने माँ और पुत्र के बीच की बातचीत को एक कविता के रूप में पढ़ा है। इस कविता में माँ अपने पुत्र को उसके पिता की एक कहानी सुना रही है। क्या आप जानते हैं कि ये माँ, पुत्र और पिता कौन हैं? पहचानकर सुमेलित कीजिए।
| पात्र | ये शब्द किनके लिए आए हैं |
|---|---|
| बेटा | राहुल — सिद्धार्थ और यशोधरा के पुत्र |
| माँ | यशोधरा — एक राजकुमारी, सिद्धार्थ की पत्नी |
| तात (पिता) | सिद्धार्थ — एक राजकुमार जो बाद में गौतम बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हुए |
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए —
(क) "कोई निरपराध को मारे, तो क्यों अन्य उसे न उबारे? रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी!"
भावार्थ: यदि कोई निर्दोष प्राणी पर आघात करे तो दूसरों को उसे अवश्य बचाना चाहिए। बचाने वाले (रक्षक) को नष्ट करने वाले (भक्षक) से अधिक प्राथमिकता मिलनी चाहिए, क्योंकि सच्चा न्याय वही है जिसमें दया भी शामिल हो।
(ख) "हुआ विवाद सदय-निर्दय में, उभय आग्रही थे स्वविषय में, गई बात तब न्यायालय में, सुनी सभी ने जानी।"
भावार्थ: दयालु सिद्धार्थ और निर्दयी शिकारी के बीच विवाद हुआ; दोनों ही अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे, अंततः मामला न्यायसभा में गया, जहाँ सबने ध्यान से सुना और समझा।
कविता को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए —
- (क) आपके विचार से इस कविता में कौन-सी पंक्ति सबसे महत्वपूर्ण है? आप उसे ही सबसे महत्वपूर्ण क्यों मानते हैं?
"रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी!" — यह पंक्ति सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पूरी कविता का केंद्रीय संदेश स्पष्ट करती है कि सच्चे न्याय में दया का होना अनिवार्य है। - (ख) आखेटक और बच्चे के पिता के बीच तर्क-वितर्क क्यों हुआ था?
आखेटक ने हंस पर तीर चलाकर उसे घायल किया था और उसे अपना शिकार मानकर वापस माँगने आया, जबकि सिद्धार्थ ने उस घायल हंस को बचाया था और उसकी रक्षा करना चाहते थे — इसी कारण दोनों में विवाद हुआ। - (ग) माँ ने पुत्र से "राहुल, तू निर्णय कर इसका" क्यों कहा?
माँ चाहती थी कि पुत्र स्वयं सोच-समझकर न्याय और दया के बीच सही निर्णय लेना सीखे, इसीलिए उन्होंने कहानी का अंतिम फैसला स्वयं न सुनाकर पुत्र से ही पूछा। - (घ) यदि कहानी में आप उपवन में होते तो घायल हंस की सहायता के लिए क्या करते? आपके अनुसार न्याय कैसे किया जा सकता था?
मैं घायल हंस का तुरंत उपचार करता और उसे शिकारी को न सौंपकर उसकी रक्षा करने का प्रयास करता, क्योंकि जो प्राणी की रक्षा करे उसका अधिकार उसे मारने वाले से अधिक होना चाहिए (विद्यार्थी अपने विचार भी लिख सकते हैं)। - (ङ) कविता में माँ और बेटे के बीच बातचीत से उनके बारे में क्या-क्या पता चलता है?
माँ (यशोधरा) धैर्यवान, स्नेही व शिक्षाप्रद स्वभाव की हैं जो कहानी के माध्यम से पुत्र में नैतिक समझ विकसित करना चाहती हैं; पुत्र (राहुल) जिज्ञासु व हठी बालक है, जो कहानी सुनते-सुनते गंभीरता से सोचना और सही निर्णय देना भी सीख जाता है।
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए —
- (क) माँ ने अपने बेटे को कहानी सुनाते समय अंत में कहानी को स्वयं पूरा नहीं किया, बल्कि उसी से निर्णय करने के लिए कहा। यदि आप किसी को यह कहानी सुना रहे होते तो कहानी को आगे कैसे बढ़ाते?
यह एक रचनात्मक कल्पना-गतिविधि है — विद्यार्थी अपनी कल्पना से कहानी को आगे बढ़ाएँ, जैसे न्यायालय में सिद्धार्थ द्वारा प्रस्तुत तर्क, या हंस के आगे के जीवन का वर्णन। - (ख) मान लीजिए कि कहानी में हंस और तीर चलाने वाले के बीच बातचीत हो रही है। कल्पना से बताइए कि जब उसने हंस को तीर से घायल किया तो उसमें और हंस में क्या-क्या बातचीत हुई होगी?
यह भी एक कल्पना-आधारित गतिविधि है — विद्यार्थी संवाद के रूप में हंस की पीड़ा और शिकारी के तर्क को अपने शब्दों में लिखें। - (ग) मान लीजिए कि माँ ने जो कहानी सुनाई है, आप भी उसके एक पात्र हैं। आप कौन-सा पात्र बनना चाहेंगे? और क्यों? (तीर चलाने वाला/पक्षी/पक्षी को बचाने वाला व्यक्ति/न्यायाधीश/कोई अन्य पात्र)
यह व्यक्तिगत पसंद पर आधारित एक खुला प्रश्न है — विद्यार्थी अपनी पसंद और कारण अपने शब्दों में लिखें, जैसे "मैं पक्षी को बचाने वाला व्यक्ति बनना चाहूँगा क्योंकि करुणा दिखाना मुझे अच्छा लगता है।"
इस कविता में एक माँ और उसके पुत्र का संवाद दिया गया है, लेकिन कौन-सा कथन किसने कहा है, यह नहीं बताया गया है। कविता में दिए गए संवादों को पहचानिए कि कौन-सा कथन किसने कहा है और उसे दिए गए उचित स्थान पर लिखिए। उदाहरण के लिए माँ और पुत्र का एक-एक कथन दिया गया है।
| पुत्र द्वारा कहे गए कथन | माँ द्वारा कहे गए कथन |
|---|---|
| 1. "माँ, कह एक कहानी।" | 1. "बेटा, समझ लिया क्या तूने मुझको अपनी नानी?" |
| 2. "राजा था या रानी?" | 2. "कहती है मुझसे यह चेटी, तू मेरी नानी की बेटी! कह माँ, कह, लेटी ही लेटी..." |
| 3. "जहाँ सुरभि मनमानी?" | 3. "तू है हठी मानधन मेरे, सुन, उपवन में बड़े सबेरे, तात भ्रमण करते थे तेरे..." |
| 4. "लहराता था पानी?" | 4. "वर्ण वर्ण के फूल खिले थे, झलमल कर हिम-बिंदु झिले थे..." |
| 5. "हुई पक्ष की हानी?" | 5. "गाते थे खग कल कल स्वर से, सहसा एक हंस ऊपर से, गिरा, बिद्ध होकर खर-शर से..." |
| 6. "लक्ष्य-सिद्धि का मानी?" | 6. "चौंक उन्होंने उसे उठाया, नया जन्म-सा उसने पाया। इतने में आखेटक आया..." |
| 7. "हठ करने की ठानी?" | 7. "माँगा उसने आहत पक्षी, तेरे तात किंतु थे रक्षी..." |
| 8. "सुनी सभी ने जानी?" | 8. "हुआ विवाद सदय-निर्दय में, उभय आग्रही थे स्वविषय में..." |
| 9. "माँ, मेरी क्या बानी? मैं सुन रहा कहानी। कोई निरपराध को मारे... न्याय दया का दानी!" | 9. "राहुल, तू निर्णय कर इसका– न्याय पक्ष लेता है किसका? कह दे निर्भय, जय हो जिसका। सुन लूँ तेरी बानी।" |
| 10. "न्याय दया का दानी? तूने गुनी कहानी।" |
ध्यान दें: यह पाठ्यपुस्तक की एक खुली (मुक्त उत्तर वाली) गतिविधि है; ऊपर दिया गया वर्गीकरण एक सुझावित/नमूना उत्तर है। कक्षा-चर्चा में साथियों के बीच कुछ पंक्तियों के वक्ता को लेकर भिन्न राय भी हो सकती है।
नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में प्रकृति से जुड़े शब्द कविता में से चुनकर लिखिए —
उपवन/प्रकृति से जुड़े शब्द: फूल, हिम-बिंदु (ओस की बूँदें), झोंके (हवा), पानी, खग (पक्षी), हंस — ये सभी शब्द कविता में उपवन के वर्णन में प्रयुक्त हुए हैं।
नीचे स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलती-जुलती पंक्तियों को रेखा खींचकर मिलाइए —
| स्तंभ 1 (पंक्ति) | सही मिलान (स्तंभ 2) |
|---|---|
| 1. कहती है मुझसे यह चेटी | यह सेविका मुझसे यह कहती है। |
| 2. तू है हठी मानधन मेरे | हे मेरे पुत्र, तू बहुत हठ करता है। |
| 3. झलमल कर हिम-विंदु झिले थे | हिम-कण/ओस की बूँदें झिलमिला रही थीं। |
| 4. गिरा, बिद्ध होकर खर-शर से | तेज धार वाले तीर से घायल होकर गिर गया। |
| 5. हुआ विवाद सदय-निर्दय में | दयालु और निर्दयी व्यक्ति में झगड़ा हुआ। |
| 6. कह दे निर्भय, जय हो जिसका | तू बिना डरे कह दे कि जीत किसकी होनी चाहिए। |
| 7. तूने गुनी कहानी | तूने कहानी को समझ लिया। |
| 8. उभय आग्रही थे स्वविषय में | दोनों ही अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए थे। |
| 9. तब उसने, जो था खगभक्षी– हठ करने की ठानी | तब उस तीर चलाने वाले ने हठ करने का निश्चय कर लिया। |
| 10. रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी! | न्याय में दया सम्मिलित होती है; न्याय मारने वाले के स्थान पर बचाने वाले का पक्ष लेता है। |
"राजा था या रानी? राजा था या रानी? माँ, कह एक कहानी।" इन पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन पंक्तियों की तरह इस पूरी कविता में अनेक स्थानों पर कुछ पंक्तियाँ दो बार आई हैं। इस कारण कविता में पाठक को माँ-बेटे की बातचीत अच्छी तरह समझ में आ जाती है, इससे कविता के सौंदर्य में भी वृद्धि हुई है।
(क) इस कविता को एक बार पुनः पढ़िए और अपने समूह में मिलकर इस कविता की विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
यह एक समूह-गतिविधि है — विद्यार्थी संवाद-शैली, तुकांतता, पंक्ति-दोहराव, प्रकृति-वर्णन आदि विशेषताओं की सूची बनाएँ।
(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ दिखाई देती हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए।
1. संवाद दिए गए हैं — "बेटा, समझ लिया क्या तूने मुझको अपनी नानी?"
2. पंक्ति के अंतिम शब्द की ध्वनि आपस में मिलती-जुलती है (तुक) — "वर्ण वर्ण के फूल खिले थे, झलमल कर हिम-विंदु झिले थे, हलके झोंके हिले-मिले थे।"
3. कुछ शब्द/पंक्तियाँ दो बार व साथ-साथ आई हैं — "राजा था या रानी? राजा था या रानी?"
4. कुछ विपरीतार्थक शब्द साथ-साथ आए हैं — "सदय-निर्दय", "कोमल-कठिन"
5. प्रकृति का वर्णन किया गया है — "वर्ण वर्ण के फूल खिले थे, झलमल कर हिम-विंदु झिले थे, हलके झोंके हिले-मिले थे, लहराता था पानी।"
6. प्रश्न-उत्तर दिए गए हैं — "जहाँ सुरभि मनमानी?" "हाँ, माँ, यही कहानी।"
"सुन, उपवन में बड़े सबेरे, तात भ्रमण करते थे तेरे," कविता की इन पंक्तियों को निम्न प्रकार से बदलकर लिखा जा सकता है — "सुनो! आपके पिता एक उपवन में बहुत सवेरे भ्रमण किया करते थे..." अब आप भी पाठ के किसी एक पद को एक अनुच्छेद के रूप में लिखिए।
नमूना उत्तर: "एक बार एक हंस उपवन में उड़ रहे पक्षियों के साथ मधुर स्वर में गा रहा था। अचानक एक तेज धार वाला तीर उसे बींध गया और वह घायल होकर नीचे गिर पड़ा। उसका पंख बुरी तरह घायल हो गया।" (विद्यार्थी पाठ के किसी अन्य पद को भी इसी प्रकार गद्य-रूप में लिख सकते हैं)
"माँ, कह एक कहानी।" इस पंक्ति में आपको अनेक विराम चिह्न दिखाई दे रहे हैं, जैसे — अल्प विराम (,), पूर्ण विराम (।), उद्धरण चिह्न (" ")। इस कविता में विराम चिह्नों का बहुत अच्छा प्रयोग किया गया है।
(क) नीचे कविता का एक अंश बिना विराम चिह्नों के दिया गया है। इसमें उपयुक्त स्थानों पर विराम चिह्न लगाइए —
"राहुल, तू निर्णय कर इसका–
न्याय पक्ष लेता है किसका?
कह दे निर्भय, जय हो जिसका।
सुन लूँ तेरी बानी।"
"माँ, मेरी क्या बानी?
मैं सुन रहा कहानी।
कोई निरपराध को मारे,
तो क्यों अन्य उसे न उबारे?
रक्षक पर भक्षक को वारे,
न्याय दया का दानी!"
"न्याय दया का दानी?
तूने गुनी कहानी।"
(ख) अब विराम चिह्नों का ध्यान रखते हुए कविता को अपने समूह में सुनाइए।
यह एक मौखिक अभ्यास-गतिविधि है — विद्यार्थी उचित ठहराव व स्वराघात के साथ कविता का पाठ करें।
- (क) "सुन, उपवन में बड़े सबेरे, तात भ्रमण करते थे तेरे," आप या आपके परिजन भ्रमण के लिए कहाँ-कहाँ जाते हैं? और क्यों?
यह एक व्यक्तिगत अनुभव-आधारित प्रश्न है — विद्यार्थी अपने घर के भ्रमण-स्थलों (पार्क, बगीचा, नदी किनारा आदि) और उसके कारण (ताज़ी हवा, व्यायाम, प्रकृति-प्रेम) के बारे में लिखें। - (ख) इस पाठ में एक माँ अपने पुत्र को कहानी सुना रही है। आप किस-किस से कहानी सुनते हैं या सुनते थे? आप किसको और कौन-सी कहानी सुनाते हैं?
विद्यार्थी अपने अनुभव के आधार पर उत्तर दें, जैसे दादी-नानी से लोककथाएँ सुनना, या छोटे भाई-बहनों को कहानी सुनाना। - (ग) माँ ने कहानी सुनाने के बीच में एक प्रश्न पूछ लिया था। क्या कहानी सुनाने के बीच में प्रश्न पूछना सही है? क्यों?
हाँ, यह सही है, क्योंकि इससे सुनने वाले की समझ व सोच-विचार करने की क्षमता विकसित होती है और वह कहानी में सक्रिय रूप से भाग लेता है, न कि केवल निष्क्रिय श्रोता बना रहता है। - (घ) कविता में बालक अपनी माँ से बार-बार 'वही' कहानी सुनने की हठ करता है। क्या आपका भी कभी कोई कहानी बार-बार सुनने का मन करता है? अगर हाँ, तो वह कौन-सी कहानी है और क्यों?
यह व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित खुला प्रश्न है — विद्यार्थी अपनी पसंदीदा कहानी और उसके बार-बार सुनने का कारण (रोचकता, प्रेरणा, भावनात्मक जुड़ाव आदि) बताएँ।
"राहुल, तू निर्णय कर इसका–" नीचे कुछ स्थितियाँ दी गई हैं। बताइए कि इन स्थितियों में आप क्या करेंगे?
- 1. खेलते समय आप देखते हैं कि एक मित्र ने भूल से एक नियम तोड़ा है।
मैं मित्र को प्यार से बताऊँगा कि नियम टूट गया है और उसे सुधारने का अवसर दूँगा। - 2. एक सहपाठी को कक्षा में दूसरों द्वारा चिढ़ाया जा रहा है।
मैं सहपाठी का साथ दूँगा और चिढ़ाने वालों को समझाऊँगा कि यह गलत है, आवश्यकता होने पर शिक्षक को बताऊँगा। - 3. एक समूह परियोजना के बीच एक सहपाठी अपने भाग का कार्य नहीं कर रहा है।
मैं उससे बात करके कारण जानने का प्रयास करूँगा और आवश्यकता होने पर उसकी सहायता करूँगा। - 4. आपके दो मित्रों के बीच एक छोटी-सी बात पर तर्क-वितर्क हो रहा है।
मैं दोनों की बात शांति से सुनूँगा और उन्हें आपस में सुलह करने में मदद करूँगा। - 5. एक सहपाठी को कुछ ऐसा करने के लिए अनुचित रूप से दंडित किया जा रहा है जिसे उसने नहीं किया।
मैं सच्चाई बताने का साहस करूँगा ताकि निर्दोष सहपाठी को अनुचित दंड न मिले — जैसे कविता में सिखाया गया है कि न्याय दयापूर्ण होना चाहिए। - 6. एक सहपाठी प्रतियोगिता में हार जाने पर उदास है।
मैं उसे सांत्वना दूँगा और हार को सकारात्मक रूप से लेने के लिए प्रोत्साहित करूँगा। - 7. कक्षा में चर्चा के बीच एक सहपाठी संकोच कर रहा है और बोलने का अवसर नहीं पा रहा है।
मैं उसे बोलने का अवसर दूँगा और उसकी बात ध्यान से सुनूँगा। - 8. सहपाठी किसी विषय में संघर्ष कर रहा है और आपसे सहायता माँगता है।
मैं उसकी यथासंभव सहायता करूँगा और मिलकर विषय को समझने का प्रयास करूँगा।
यह एक रचनात्मक लेखन-गतिविधि है — विद्यार्थी अपने घर या आस-पास सुनी-सुनाई किसी लोककथा को अपनी भाषा में लिखकर कक्षा में सुनाएँ, तथा कक्षा के सभी समूहों की लोककथाओं को जोड़कर एक पुस्तिका बनाई जा सकती है।
नीचे कुछ पहेलियाँ दी गई हैं। इनके उत्तर आपको कविता में से मिल जाएँगे। पहेलियाँ बूझिए —
- पहेली 1 — नानी की बेटी है कौन? मामा की बहना है कौन? भार्या है पिता की कौन? भाभी है चाचा की कौन?
उत्तर: माँ। - पहेली 2 — आसमान में उड़-उड़ जाए, तरह-तरह के गाने गाए, पर फैलाकर करता सैर, दो हैं जिसके पर और पैर।
उत्तर: पक्षी/खग (कविता में हंस के संदर्भ में)। - पहेली 3 — बागों में जो सुगंध फैलाती, फूल-फूल में बसती गाती, हवा-हवा में घुल-मिल जाए, कौन है जो यह नाम बताए?
उत्तर: सुरभि (सुगंध) — कविता की पंक्ति "जहाँ सुरभि मनमानी" में प्रयुक्त।
अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न
(अ) वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ)
- 'माँ, कह एक कहानी' कविता के कवि कौन हैं?
- (क) सुमित्रानंदन पंत
- (ख) मैथिलीशरण गुप्त ✓
- (ग) रामधारी सिंह दिनकर
- (घ) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
- यह कविता किस काव्य-कृति से ली गई है?
- (क) साकेत
- (ख) यशोधरा ✓
- (ग) भारत-भारती
- (घ) पंचवटी
- मैथिलीशरण गुप्त का जन्म कहाँ हुआ था?
- (क) काशी
- (ख) चिरगाँव, झांसी ✓
- (ग) इलाहाबाद
- (घ) आगरा
- मैथिलीशरण गुप्त को 'राष्ट्रकवि' की उपाधि किसने दी थी?
- (क) जवाहरलाल नेहरू
- (ख) महात्मा गांधी ✓
- (ग) रवींद्रनाथ टैगोर
- (घ) सुभाषचंद्र बोस
- मैथिलीशरण गुप्त ने किस आयु में कविता लिखना आरंभ किया था?
- (क) 8 वर्ष
- (ख) 12 वर्ष ✓
- (ग) 18 वर्ष
- (घ) 20 वर्ष
- मैथिलीशरण गुप्त को किस वर्ष पद्म भूषण से सम्मानित किया गया?
- (क) 1950
- (ख) 1952
- (ग) 1954 ✓
- (घ) 1960
- कविता में 'बेटा' किस पात्र के लिए प्रयुक्त हुआ है?
- (क) सिद्धार्थ
- (ख) राहुल ✓
- (ग) देवदत्त
- (घ) आनंद
- कविता में 'माँ' किस पात्र के लिए प्रयुक्त हुआ है?
- (क) गौतमी
- (ख) यशोधरा ✓
- (ग) महामाया
- (घ) सुजाता
- कविता में 'तात' (पिता) किसके लिए प्रयुक्त हुआ है, जो आगे चलकर गौतम बुद्ध बने?
- (क) राहुल
- (ख) सिद्धार्थ ✓
- (ग) शुद्धोधन
- (घ) आनंद
- कहानी में हंस किससे घायल होकर गिरा था?
- (क) पत्थर से
- (ख) तीर (खर-शर) से ✓
- (ग) पेड़ से टकराकर
- (घ) आँधी से
- घायल हंस को किसने बचाया?
- (क) आखेटक ने
- (ख) सिद्धार्थ (तात) ने ✓
- (ग) यशोधरा ने
- (घ) राहुल ने
- 'आखेटक' शब्द का अर्थ क्या है?
- (क) चिकित्सक
- (ख) शिकारी ✓
- (ग) न्यायाधीश
- (घ) माली
- हंस को लेकर विवाद कहाँ तक पहुँचा?
- (क) राजमहल तक
- (ख) न्यायालय तक ✓
- (ग) मंदिर तक
- (घ) विद्यालय तक
- कहानी का अंतिम निर्णय किसने सुनाया?
- (क) यशोधरा ने
- (ख) राहुल ने ✓
- (ग) सिद्धार्थ ने
- (घ) आखेटक ने
- राहुल के अनुसार न्याय किसके पक्ष में होना चाहिए?
- (क) शिकारी के
- (ख) रक्षक (बचाने वाले) के ✓
- (ग) दोनों के बराबर
- (घ) किसी के भी नहीं
- कविता के अनुसार सच्चा न्याय किसके साथ होना चाहिए?
- (क) क्रोध के साथ
- (ख) दया के साथ ✓
- (ग) भय के साथ
- (घ) प्रतिशोध के साथ
- 'चेटी' शब्द का अर्थ क्या है?
- (क) रानी
- (ख) दासी ✓
- (ग) नानी
- (घ) सखी
- 'उपवन' शब्द का अर्थ क्या है?
- (क) महल
- (ख) बगीचा ✓
- (ग) नदी
- (घ) पर्वत
- 'हिम-बिंदु' शब्द का अर्थ क्या है?
- (क) बर्फ का पहाड़
- (ख) ओस की बूँदें ✓
- (ग) पानी की धारा
- (घ) बादल
- 'खगभक्षी' शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
- (क) पक्षी पालने वाला
- (ख) पक्षियों का शिकार करने वाला ✓
- (ग) पक्षी विशेषज्ञ
- (घ) पक्षी चित्रकार
- कविता की भाषा-शैली कैसी है?
- (क) एकालाप शैली
- (ख) संवादात्मक शैली ✓
- (ग) पत्र शैली
- (घ) नाटकीय शैली
- मैथिलीशरण गुप्त ने प्रारंभ में किस भाषा में कविताएँ लिखीं?
- (क) अवधी
- (ख) ब्रजभाषा ✓
- (ग) भोजपुरी
- (घ) मैथिली
- मैथिलीशरण गुप्त को खड़ी बोली में लिखने के लिए किसने प्रोत्साहित किया?
- (क) भारतेंदु हरिश्चंद्र
- (ख) महावीरप्रसाद द्विवेदी ✓
- (ग) प्रेमचंद
- (घ) जयशंकर प्रसाद
- मैथिलीशरण गुप्त कब तक राज्यसभा के मनोनीत सदस्य रहे?
- (क) आजीवन (1952 से निधन तक)
- (ख) आजीवन (1952 से निधन तक) ✓
- (ग) केवल 2 वर्ष
- (घ) कभी नहीं रहे
- 'निरपराध' शब्द का विलोम (उलटा अर्थ) क्या होगा?
- (क) निर्दोष
- (ख) अपराधी ✓
- (ग) दयालु
- (घ) साहसी
(ब) अति लघु उत्तरीय प्रश्न
- कविता का नाम क्या है?
माँ, कह एक कहानी। - कविता के कवि कौन हैं?
मैथिलीशरण गुप्त। - यह कविता किस खंडकाव्य का अंश है?
यशोधरा। - मैथिलीशरण गुप्त का जन्म किस वर्ष हुआ था?
3 अगस्त 1886। - मैथिलीशरण गुप्त का निधन किस वर्ष हुआ?
12 दिसंबर 1964। - कविता में पुत्र का नाम क्या है?
राहुल। - कविता में माँ का नाम क्या है?
यशोधरा। - हंस को किसने घायल किया?
आखेटक (शिकारी) ने। - घायल हंस को किसने बचाया?
सिद्धार्थ (तात) ने। - विवाद अंततः कहाँ पहुँचा?
न्यायालय में। - 'चेटी' का अर्थ बताइए।
दासी/सेविका। - 'उपवन' का अर्थ बताइए।
बगीचा। - 'तात' का अर्थ बताइए।
पिता। - 'रक्षक' और 'भक्षक' में क्या अंतर है?
रक्षक बचाने वाला होता है, भक्षक नष्ट/खा जाने वाला। - कविता किस शैली में लिखी गई है?
संवादात्मक शैली में। - मैथिलीशरण गुप्त को कौन-सी उपाधि प्राप्त थी?
राष्ट्रकवि। - मैथिलीशरण गुप्त को कौन-सा राष्ट्रीय सम्मान मिला?
पद्म भूषण (1954)। - कविता के अनुसार न्याय के साथ क्या होना चाहिए?
दया। - राहुल किसके पुत्र थे?
सिद्धार्थ और यशोधरा के। - 'खगभक्षी' शब्द का अर्थ बताइए।
पक्षियों का शिकार करने वाला।
(स) लघु उत्तरीय प्रश्न
- कविता का केंद्रीय भाव स्पष्ट कीजिए।
कविता का केंद्रीय भाव है कि सच्चा न्याय दया से जुड़ा होता है — जो प्राणी की रक्षा करता है, उसे नष्ट करने वाले से अधिक प्राथमिकता मिलनी चाहिए। यह भाव माँ-बेटे के संवाद के माध्यम से बड़ी सरलता से प्रस्तुत किया गया है। - कविता में उपवन का वर्णन किस प्रकार किया गया है?
कविता में उपवन को अत्यंत मनोरम रूप में दर्शाया गया है — जहाँ रंग-बिरंगे फूल खिले थे, ओस की बूँदें झिलमिला रही थीं, हल्की हवा के झोंके चल रहे थे और पानी लहरा रहा था तथा पक्षी मधुर स्वर में गा रहे थे। - हंस को लेकर विवाद क्यों हुआ?
शिकारी ने घायल हंस को अपना शिकार मानकर उसे वापस माँगा, जबकि सिद्धार्थ ने उस हंस को बचाया था और उसकी रक्षा करना चाहते थे — इसी कारण दोनों में विवाद हुआ। - राहुल ने कौन-सा निर्णय सुनाया और क्यों?
राहुल ने निर्णय दिया कि रक्षक (बचाने वाला) का पक्ष लिया जाना चाहिए, क्योंकि निर्दोष प्राणी पर आघात करने वाले से बढ़कर उसे बचाने वाले का अधिकार होता है, और सच्चा न्याय दया-सहित होना चाहिए। - कविता में माँ-बेटे के संवाद की क्या विशेषता है?
इस कविता में माँ एक कहानी सुनाती है और पुत्र बीच-बीच में प्रश्न पूछकर उसमें रुचि दिखाता है; पंक्तियों के अंत में शब्दों/पंक्तियों की पुनरावृत्ति से यह संवाद बहुत सजीव और रोचक बन गया है। - मैथिलीशरण गुप्त के जीवन-परिचय पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
मैथिलीशरण गुप्त (1886-1964) का जन्म चिरगाँव, झांसी में हुआ था। उन्होंने 12 वर्ष की आयु में ब्रजभाषा में लिखना शुरू किया, बाद में खड़ी बोली अपनाई। महात्मा गांधी ने उन्हें 'राष्ट्रकवि' की उपाधि दी। उन्हें पद्म भूषण (1954) से सम्मानित किया गया और वे राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी रहे। - यशोधरा खंडकाव्य के बारे में आप क्या जानते हैं?
यशोधरा मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित एक प्रसिद्ध खंडकाव्य है, जिसमें गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) की पत्नी यशोधरा के मनोभावों तथा उनके त्याग व वेदना का सजीव चित्रण किया गया है। - "रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी!" पंक्ति का भावार्थ लिखिए।
इस पंक्ति का भाव है कि बचाने वाले (रक्षक) को नष्ट करने वाले (भक्षक) पर प्राथमिकता मिलनी चाहिए, क्योंकि सच्चा न्याय दया से युक्त होता है, न कि केवल कठोर नियम-पालन से। - कविता से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
इस कविता से शिक्षा मिलती है कि हमें सदैव करुणा और न्याय दोनों का संतुलन बनाए रखना चाहिए, निर्दोष व असहाय प्राणियों की रक्षा करनी चाहिए, और निर्णय लेते समय निडरता व सच्चाई का साथ देना चाहिए। - कविता में प्रयुक्त संवाद-शैली को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
कविता में माँ एक बात कहती है और पुत्र उसी बात को प्रश्न के रूप में दोहराता है, जैसे — माँ: "जहाँ सुरभि मनमानी।" पुत्र: "जहाँ सुरभि मनमानी? हाँ, माँ, यही कहानी।" इस प्रकार पूरी कविता प्रश्नोत्तर व संवाद के माध्यम से आगे बढ़ती है।
(द) महत्वपूर्ण प्रश्न
- 'माँ, कह एक कहानी' कविता की संपूर्ण कथावस्तु अपने शब्दों में लिखिए।
बालक राहुल अपनी माँ यशोधरा से कहानी सुनाने की जिद करता है। माँ बताती है कि उपवन में उसके पिता (सिद्धार्थ) भ्रमण करते थे, जहाँ एक दिन एक हंस शिकारी के तीर से घायल होकर गिर पड़ा। सिद्धार्थ ने उसे बचाया, परंतु शिकारी उसे अपना शिकार मानकर माँगने आया। दोनों में विवाद हुआ जो न्यायालय तक पहुँचा। अंत में माँ पुत्र से ही न्याय पूछती है, और राहुल उत्तर देता है कि रक्षक का पक्ष लिया जाना चाहिए, क्योंकि सच्चा न्याय दया-सहित होता है। यही कहानी का सार है। - कविता में निहित 'न्याय और दया' के सिद्धांत पर विस्तार से प्रकाश डालिए।
कविता के अनुसार न्याय का अर्थ केवल नियमों का पालन करना नहीं, बल्कि करुणा व दया के साथ सही निर्णय लेना है। जब कोई निर्दोष प्राणी पर आघात करता है, तो उसे बचाने वाले का पक्ष लिया जाना चाहिए, न कि आघात करने वाले का। यही सिद्धांत बुद्ध के जीवन-दर्शन का भी आधार बना, जिसमें अहिंसा व करुणा को सर्वोपरि माना गया। - कविता की भाषा-शैली एवं शिल्पगत विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
कविता संवादात्मक शैली में लिखी गई है, जिसमें माँ-बेटे के बीच प्रश्नोत्तर का सुंदर प्रयोग हुआ है। पंक्तियों के अंतिम शब्दों की पुनरावृत्ति, तुकांतता, विपरीतार्थक शब्दों (सदय-निर्दय, कोमल-कठिन) का प्रयोग तथा प्रकृति का सजीव चित्रण इस कविता की प्रमुख शिल्पगत विशेषताएँ हैं, जो इसे बाल-मन के अनुकूल व रोचक बनाती हैं। - यशोधरा खंडकाव्य और इस पाठ के बीच क्या संबंध है, स्पष्ट कीजिए।
यह पाठ मैथिलीशरण गुप्त के खंडकाव्य 'यशोधरा' का एक अंश है, जिसमें सिद्धार्थ की पत्नी यशोधरा अपने पुत्र राहुल को सिद्धार्थ की करुणा व न्यायप्रियता से जुड़ी एक कहानी सुनाती है। यह अंश सिद्धार्थ के बुद्ध बनने से पहले के जीवन की एक झलक प्रस्तुत करता है, जो आगे चलकर उनके करुणा-प्रधान बौद्ध दर्शन की नींव का संकेत देती है। - मैथिलीशरण गुप्त के साहित्यिक योगदान का मूल्यांकन कीजिए।
मैथिलीशरण गुप्त हिंदी खड़ी बोली के अग्रणी कवियों में से एक हैं, जिन्हें महात्मा गांधी ने 'राष्ट्रकवि' की उपाधि दी। उनकी रचनाओं (भारत-भारती, साकेत, यशोधरा) में भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक व राष्ट्रीय चेतना के स्वर मुखर हैं। उन्होंने हिंदी काव्य को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया। - "कोई निरपराध को मारे, तो क्यों अन्य उसे न उबारे?" पंक्ति के आलोक में समाज में करुणा के महत्व पर अपने विचार लिखिए।
यह पंक्ति सिखाती है कि जब भी कोई निर्दोष व्यक्ति या प्राणी पर अन्याय होता है, तो अन्य लोगों को चुप नहीं रहना चाहिए बल्कि उसकी सहायता के लिए आगे आना चाहिए। समाज में करुणा और सहयोग की भावना ही एक न्यायपूर्ण व सुरक्षित समाज का निर्माण करती है। - कविता में प्रयुक्त प्रकृति-चित्रण का कविता के भाव पर क्या प्रभाव पड़ता है, स्पष्ट कीजिए।
कविता में उपवन के सुंदर, शांत वातावरण का वर्णन पाठक के मन में सुखद चित्र बनाता है, जिसके ठीक बाद हंस के घायल होने की घटना घटती है — इस विरोधाभास (शांति और हिंसा के बीच का अंतर) से कविता का करुणा-भाव और अधिक प्रभावशाली बन जाता है। - यदि आप राहुल के स्थान पर होते तो क्या निर्णय देते? तर्क सहित स्पष्ट कीजिए।
यह एक खुला/विचारपरक प्रश्न है — विद्यार्थी अपने तर्क सहित उत्तर दें। अधिकांश उत्तर राहुल के निर्णय (रक्षक का पक्ष लेना) से सहमत होंगे, क्योंकि निर्दोष प्राणी की रक्षा करना नैतिक रूप से उचित है; विद्यार्थी अपने तर्क विस्तार से लिखें। - कविता में संवाद-शैली के प्रयोग से कविता की प्रभावशीलता पर क्या प्रभाव पड़ता है?
संवाद-शैली के कारण कविता नाटकीय व जीवंत बन जाती है; पाठक स्वयं को माँ-बेटे की बातचीत में सम्मिलित महसूस करता है, जिससे कहानी में रुचि बनी रहती है और अंत में आने वाला न्याय-संबंधी संदेश अधिक प्रभावशाली ढंग से पाठक तक पहुँचता है। - इस पाठ के आधार पर बताइए कि बाल-साहित्य में नैतिक शिक्षा किस प्रकार दी जा सकती है।
इस पाठ से स्पष्ट होता है कि बाल-साहित्य में नैतिक शिक्षा को सीधे उपदेश के रूप में न देकर रोचक कहानी व संवाद के माध्यम से दिया जाना अधिक प्रभावी होता है। कहानी में बालक स्वयं प्रश्नों पर विचार करके निष्कर्ष तक पहुँचता है, जिससे सीख उसके मन में स्थायी रूप से बैठ जाती है — यही तकनीक इस कविता में अपनाई गई है।
माइंड मैप
कवि परिचय
- मैथिलीशरण गुप्त (1886-1964)
- राष्ट्रकवि
- यशोधरा से अंश
पात्र
- बेटा — राहुल
- माँ — यशोधरा
- तात — सिद्धार्थ
कथावस्तु
- उपवन में हंस घायल
- शिकारी से विवाद
- न्यायालय तक बात
केंद्रीय भाव
- न्याय व दया
- रक्षक का महत्व
शैली
- संवादात्मक शैली
- पंक्ति-पुनरावृत्ति
- प्रकृति-वर्णन
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
'माँ, कह एक कहानी' कविता किस कक्षा और पाठ्यपुस्तक की है?
यह कक्षा 7 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक 'मल्हार' का पहला पाठ है।
यह कविता किस काव्य-कृति से ली गई है?
यह मैथिलीशरण गुप्त के खंडकाव्य 'यशोधरा' से लिया गया एक अंश है।
कविता में माँ, बेटा और तात (पिता) कौन हैं?
माँ यशोधरा हैं, बेटा राहुल है, और तात (पिता) सिद्धार्थ हैं, जो आगे चलकर गौतम बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हुए।
कविता का केंद्रीय संदेश क्या है?
कविता का केंद्रीय संदेश है कि सच्चा न्याय दया से जुड़ा होता है — निर्दोष प्राणी की रक्षा करने वाले को उसे नष्ट करने वाले पर प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
मैथिलीशरण गुप्त को 'राष्ट्रकवि' की उपाधि किसने दी?
महात्मा गांधी ने उन्हें यह उपाधि प्रदान की थी।
परीक्षा की दृष्टि से इस पाठ के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु कौन-से हैं?
कवि-परिचय, कविता का सारांश (हंस-प्रसंग), पात्रों की पहचान (राहुल-यशोधरा-सिद्धार्थ), "रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी" पंक्ति का भावार्थ, तथा कठिन शब्दों के अर्थ — ये सभी बिंदु परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
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