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गूँगे (रांगेय राघव) कक्षा 11 हिंदी अंतरा — सम्पूर्ण व्याख्या, प्रश्न-उत्तर और नोट्स

कक्षा 11 हिंदी · अंतरा भाग 1 · गद्य-खंड · पाठ 4

गूँगे (रांगेय राघव) — सम्पूर्ण व्याख्या, प्रश्न-उत्तर और परीक्षा तैयारी

लेखक परिचय, सारांश, शब्दार्थ, Mind Map, पाठ्यपुस्तक व अतिरिक्त प्रश्नोत्तर, MCQ और Quick Revision

(NCERT कक्षा 11 हिंदी पाठ्यपुस्तक "अंतरा" भाग-1 पर आधारित प्रामाणिक अध्ययन सामग्री)

गूँगे प्रगतिशील व यथार्थवादी कथाकार रांगेय राघव द्वारा रचित एक अत्यंत संवेदनशील व मार्मिक कहानी है। यह रचना कक्षा 11 की पाठ्यपुस्तक "अंतरा" (भाग-1) के गद्य-खंड में संकलित है[cite: 3]। इस कहानी में लेखक ने जन्म से मूक-बधिर एक अनाथ किशोर के माध्यम से समाज में दिव्यांगों के प्रति व्याप्त संवेदनहीनता, शोषण और उपहास पर गहरी चोट की है[cite: 3]। शारीरिक रूप से अक्षम होने के बावजूद गूँगा स्वाभिमानी है और भीख मांगने के बजाय मेहनत की रोटी खाना चाहता है[cite: 3]। यह कहानी यह सिद्ध करती है कि वास्तव में गूँगा-बहरा वह नहीं जो बोल-सुन नहीं सकता, बल्कि वह संवेदनहीन समाज है जो दूसरों की पीड़ा देखकर भी चुप और उदासीन रहता है[cite: 3]!

📖 गूँगे : संक्षिप्त सारांश

कहानी की शुरुआत एक घर के दृश्य से होती है जहाँ शकुंतला, सुशीला और चमेली बैठी हैं[cite: 3]। वहाँ एक गूँगा किशोर आता है, जिसे देखकर स्त्रियाँ कौतूहल और विनोद का अनुभव करती हैं[cite: 3]। जन्म से वज्र-बहरा होने के कारण वह बोल भी नहीं पाता[cite: 3]। वह इशारों से अपनी व्यथा बताता है कि बचपन में ही उसके मूँछों वाले पिता की मृत्यु हो गई थी और घूँघट काढ़ने वाली माँ उसे छोड़कर भाग गई थी[cite: 3]। उसे पालने वाले बुआ-फूफा उस पर अत्याचार करते थे और चाहते थे कि वह दिनभर पल्लेदारी करके पैसे लाकर दे[cite: 3]।

गूँगा अत्यंत स्वाभिमानी है[cite: 3]। वह छाती पीटकर इशारा करता है कि उसने हलवाई के यहाँ रात-रात भर काम किया, कड़ाही माँजी, कपड़े धोए, लेकिन कभी हाथ फैलाकर भीख नहीं माँगी—वह मेहनत का खाता है[cite: 3]। उसकी दशा देखकर चमेली का हृदय पिघल जाता है और वह उसे चार रुपये महीने और भोजन पर अपने यहाँ घरेलू नौकर रख लेती है[cite: 3]। गूँगा चमेली के घर के काम (दूध लाना, तरकारी लाना आदि) बहुत समझदारी से करता है[cite: 3]। परंतु चमेली के बच्चे और समाज उसे केवल कौतूहल का खिलौना समझते हैं[cite: 3]। जब कभी वह आक्रोश दिखाता है या अपनी भावनाएँ व्यक्त करना चाहता है, तो उसे उपहास, पिटाई और चोरी के झूठे लांछन का सामना करना पड़ता है[cite: 3]। यह कहानी एक शोषित मानव के स्वाभिमान, असहायता और सामाजिक क्रूरता का सजीव दस्तावेज़ है[cite: 3]।

✍️ लेखक परिचय — रांगेय राघव

मूल नामतिरुमल्लै नंबाकम वीर राघव आचार्य[cite: 3]
जन्म व स्थान17 जनवरी 1923, आगरा (उत्तर प्रदेश)[cite: 3]
शिक्षाआगरा विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. एवं पी-एच.डी.[cite: 3]
जीवन काल1923 – 1962 (मात्र 39 वर्ष की अल्पायु में निधन)[cite: 3]

रांगेय राघव के पूर्वज मूलतः दक्षिण आरकाट (तमिलनाडु) के निवासी थे, जो जयपुर-नरेश के निमंत्रण पर उत्तर भारत आए और बाद में आगरा में बस गए[cite: 3]। रांगेय राघव विलक्षण प्रतिभा के धनी थे[cite: 3]। उन्होंने मात्र 39 वर्ष की छोटी उम्र में उपन्यास, कहानी, कविता और आलोचना विधाओं में विपुल साहित्य की रचना की[cite: 3]। उन्होंने 1936 से ही कहानियाँ लिखना शुरू कर दिया था और 80 से अधिक कहानियाँ लिखीं[cite: 3]। सन् 1961 में उन्हें राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत किया गया[cite: 3]। उनका समग्र साहित्य 'रांगेय राघव ग्रंथावली' नाम से दस खंडों में प्रकाशित है[cite: 3]।

प्रमुख कृतियाँ —
कहानी-संग्रह: रामराज्य का वैभव, देवदासी, समुद्र के फेन, अधूरी मूरत, जीवन के दाने, अंगारे न बुझे, ऐयाश मुर्दे, इंसान पैदा हुआ[cite: 3] उपन्यास: घरौंदा, विषाद-मठ, मुर्दों का टीला, सीधा-सादा रास्ता, अँधेरे के जुगनू, बोलते खंडहर, कब तक पुकारूँ[cite: 3]

🎭 पाठ की विधा एवं उद्देश्य

विधा: यह एक यथार्थवादी एवं मनोवैज्ञानिक सामाजिक कहानी है[cite: 3]।

उद्देश्य एवं मूल संदेश:

  • दिव्यांगों के प्रति संवेदनशीलता: शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को उपहास, दया या कौतूहल का पात्र न मानकर उन्हें सामान्य मनुष्य की तरह आदर और अवसर देना[cite: 3]।
  • स्वाभिमान की प्रतिष्ठा: गूँगा लाचार होकर भी भीख नहीं मांगता, बल्कि श्रम और स्वाभिमान का जीवन जीता है[cite: 3]।
  • समाज का प्रतीकात्मक गूँगापन: लेखक ने स्पष्ट किया है कि असली गूँगा-बहरा वह नहीं जिसकी वाणी नहीं है, बल्कि वह संवेदनहीन समाज है जो पीड़ितों के दुख-दर्द देखकर भी मूक दर्शक बना रहता है और अपने सामाजिक दायित्वों से विमुख है[cite: 3]।

📝 सरल भाषा में पाठ की व्याख्या

भाग 1 — कौतूहल का पात्र बना गूँगा

कहानी की शुरुआत चमेली, सुशीला और शकुंतला के बीच के संवाद से होती है[cite: 3]। जब शकुंतला गूँगे को बुलाने के लिए आवाज़ देती है, तो वह नहीं सुनता क्योंकि वह जन्म से बहरा है[cite: 3]। इस पर स्त्रियाँ खिलखिलाकर हँस पड़ती हैं[cite: 3]। गूँगे के प्रति उनका दृष्टिकोण किसी पिंजरे के तोते जैसा है जिसे देखकर लोग मन बहलाते हैं[cite: 3]। इशारों-इशारों में गूँगा अपनी अनाथ स्थिति समझाता है कि पिता मर गए और माँ उसे अनाथ छोड़कर किसी अन्य के साथ चली गई[cite: 3]। बुआ और फूफा ने उसे पाला तो सही, लेकिन केवल पशुओं की तरह पीटने और उससे मजदूरी कराने के लिए[cite: 3]।

भाग 2 — स्वाभिमान की गर्जना और अस्फुट ध्वनियाँ

गूँगा बोलने की भरसक कोशिश करता है, परंतु उसके मुँह से केवल कर्कश और अस्फुट ध्वनियाँ निकलती हैं, जैसे कोई आदिम मानव अभी भाषा सीखने के संघर्ष में लगा हो[cite: 3]। जब सुशीला पूछती है कि वह खाता क्या है, तो गूँगा आक्रोश और गौरव से भरकर अपनी छाती और भुजाओं पर हाथ मारता है[cite: 3]। वह बताता है कि उसने हलवाई के यहाँ रात-रात भर पसीना बहाया, बरतन माँजे, पर कभी भीख नहीं माँगी[cite: 3]। वह मेहनत का खाता है[cite: 3]। उसकी इस आत्म-गरिमा को देखकर चमेली द्रवित हो जाती है[cite: 3]।

भाग 3 — चमेली के घर आश्रय और काम

सुशीला के मना करने के बावजूद चमेली दयावश गूँगे को चार रुपये मासिक वेतन और भोजन पर रख लेती है[cite: 3]। गूँगा बहुत चतुर और समझदार है—दूध का प्रकार (कच्चा या औंटा हुआ), सब्ज़ी आदि वह इशारों से बखूबी समझकर बाज़ार से ले आता है[cite: 3]। वह बुआ-फूफा के घर की मार से बचकर यहाँ मेहनत से काम करने लगता है[cite: 3]। चमेली के पति सीधे हैं, पर समाज और बच्चे गूँगे को केवल चिढ़ाने और अपना मनोरंजन करने का साधन समझते हैं[cite: 3]।

भाग 4 — संवेदनहीनता का दंश और पलायन

एक दिन गूँगा अचानक गायब हो जाता है[cite: 3]। चमेली उसे ढूँढ़ती है और न पाकर उसे मन ही मन 'नाली का कीड़ा' और अहसान-फरामोश मान लेती है[cite: 3]। परंतु रात को जब सब खा-पीकर सो जाते हैं, तो गूँगा चौखट पर आकर खड़ा होता है और इशारे से कहता है कि वह भूखा है[cite: 3]। समाज की दया भी वास्तव में एक अहंकार है, जहाँ थोड़ा सा आश्रय देकर इंसान यह अपेक्षा करता है कि सामने वाला उसका आजीवन गुलाम बनकर रहे[cite: 3]। गूँगे का यह द्वंद्व पूरे समाज की क्रूरता को बेनकाब करता है[cite: 3]।

📚 महत्वपूर्ण शब्दार्थ

शब्दअर्थ
वज्र बहरापूरी तरह से बहरा, जिसे बिल्कुल भी सुनाई न दे[cite: 3]
कुतूहलजिज्ञासा, नयापन देखकर मन में होने वाला अचरज[cite: 3]
अस्फुटजो स्पष्ट न हो, अस्पष्ट ध्वनि या आवाज़[cite: 3]
वमनउगलना (यहाँ प्रयुक्त: आवाज़ों को बाहर फेंकना)[cite: 3]
काकलगले की घंटी या स्वर-तंत्री (Uvula/Voice box)[cite: 3]
चीत्कारपीड़ा भरी तीखी चीख या पुकार[cite: 3]
पल्लेदारीबोझ ढोने की मज़दूरी, हमाली[cite: 3]
अजायबघरसंग्रहालय (यहाँ व्यंग्य: तमाशे की जगह जहाँ अजीब चीज़ें रखी हों)[cite: 3]
इंगितइशारा, संकेत[cite: 3]
प्रतिच्छायापरछाईं, अक्स[cite: 3]

🔑 पाठ के मुख्य बिंदु

  • गूँगा जन्म से मूक-बधिर है, जिसके पिता का देहांत हो चुका है और माँ उसे बचपन में छोड़ गई थी[cite: 3]।
  • रिश्तेदारों (बुआ-फूफा) ने उसे केवल शोषण और मारपीट के लिए रखा था[cite: 3]।
  • शारीरिक अक्षमता के बावजूद गूँगे में अत्यधिक स्वाभिमान है; वह भीख मांगने से सख्त नफ़रत करता है[cite: 3]।
  • चमेली उसे दयावश चार रुपये और भोजन पर अपने घर में काम पर रख लेती है[cite: 3]।
  • गूँगा अत्यंत बुद्धिमान है और इशारों से कठिन से कठिन घरेलू कार्य भी भली-भाँति समझ लेता है[cite: 3]।
  • सामान्य समाज दिव्यांगों के प्रति संवेदनशील होने के बजाय उनका मज़ाक उड़ाता है या उन पर दया का दिखावा करता है[cite: 3]।
  • कहानी का मूल व्यंग्य यह है कि असली गूँगा शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्ति नहीं, बल्कि वह समाज है जो संवेदनहीन होकर मूक बना रहता है[cite: 3]।

🧠 Mind Map

गूँगे (रांगेय राघव)[cite: 3]
लेखकरांगेय राघव[cite: 3]
विधायथार्थवादी सामाजिक कहानी[cite: 3]
मुख्य पात्रगूँगा (अनाथ किशोर), चमेली, सुशीला, बसंता[cite: 3]
चरित्र की शक्तिगूँगे का स्वाभिमान व श्रम के प्रति निष्ठा[cite: 3]
सामाजिक समस्यादिव्यांगों के प्रति उपहास व शोषण की प्रवृत्ति[cite: 3]
प्रतीकार्थसंवेदनहीन समाज ही वास्तव में गूँगा-बहरा है[cite: 3]
मानवीय द्वंद्वझूठी दया बनाम वास्तविक आदर व संवेदना[cite: 3]
भाषा-शैलीसंवादात्मक, मनोवैज्ञानिक व अत्यंत मार्मिक[cite: 3]

📗 पाठ्यपुस्तक प्रश्न-उत्तर (NCERT अभ्यास)

1. 'गूँगे' कहानी में गूँगे के शारीरिक व मानसिक लक्षणों का वर्णन कीजिए।
गूँगा जन्म से 'वज्र बहरा' है जिसके कारण वह बोलने में भी असमर्थ है[cite: 3]। जब वह बोलने की कोशिश करता है, तो उसके मुँह से केवल कर्कश 'काँय-काँय' जैसी अस्फुट ध्वनियाँ निकलती हैं, मानो कोई आदिम मानव भाषा बनाने के लिए संघर्ष कर रहा हो[cite: 3]। मानसिक रूप से वह अत्यंत तीक्ष्ण बुद्धि (कुशाग्र), संवेदनशील और स्वाभिमानी है[cite: 3]। वह कठिन इशारे तुरंत समझ लेता है और कभी किसी के आगे हाथ फैलाकर भीख नहीं माँगता, बल्कि मेहनत की रोटी खाना चाहता है[cite: 3]।
2. गूँगे ने अपने अतीत और पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में क्या बताया?
गूँगे ने अपने हाथों के संकेतों द्वारा बताया कि बचपन में ही उसके बड़ी-बड़ी मूँछों वाले पिता की मृत्यु हो गई थी[cite: 3]। इसके बाद घूँघट काढ़ने वाली उसकी माँ उसे असहाय छोड़कर भाग गई[cite: 3]। उसका पालन-पोषण उसकी बुआ और फूफा ने किया, जो उस पर बहुत अत्याचार करते थे, उसे बेरहमी से मारते-पीटते थे और उससे बाज़ार में पल्लेदारी करवाकर उसकी सारी कमाई छीन लेते थे[cite: 3]।
3. गूँगा भीख क्यों नहीं लेता था? इससे उसके चरित्र की किस विशेषता का पता चलता है?
गूँगा स्वाभिमानी और आत्म-सम्मान से युक्त बालक है[cite: 3]। उसने इशारों में अपनी छाती और भुजाओं पर हाथ मारकर स्पष्ट किया कि वह पसीना बहाकर, हलवाई के यहाँ रात-रात भर काम करके, बरतन माँजकर कमाता है[cite: 3]। वह मुफ्त या भीख की रोटी को अपनी गरिमा के विरुद्ध समझता है[cite: 3]। इससे उसके चरित्र की दृढ़ता, आत्मसम्मान, कर्मठता और पराधीनता से घृणा करने की प्रवृत्ति का पता चलता है[cite: 3]।
4. चमेली ने गूँगे को अपने घर क्यों रखा और सुशीला ने इस पर क्या चेतावनी दी थी?
चमेली का हृदय स्वभाव से कोमल और दयालु था[cite: 3]। अनाथालय के बच्चों और गूँगे की अनाथ व शोषित स्थिति को देखकर उसकी आँखों में आँसू आ गए, इसलिए दयावश उसने उसे चार रुपये महीने और खाने पर घरेलू काम के लिए रख लिया[cite: 3]। दूसरी ओर, सुशीला ने व्यावहारिक दृष्टि से चेतावनी देते हुए कहा था कि—"पछताओगी, भला यह क्या काम करेगा? इसे नौकर नहीं रखा जा सकता"[cite: 3]।
5. "मनुष्य की करुणा की भावना उसके भीतर गूँगेपन की प्रतिच्छाया है" — इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
इस कथन का आशय है कि मनुष्य के मन में दूसरों के प्रति दया और करुणा तो उठती है, परंतु वह प्रायः केवल भावनाओं और दिखावे तक ही सीमित रह जाती है[cite: 3]। वह समाज के शोषितों और पीड़ितों के वास्तविक कष्ट को पूरी तरह दूर करने के लिए ठोस कर्म नहीं कर पाता[cite: 3]। मनुष्य अपनी लाचारी और सामाजिक बंधनों के कारण बहुत कुछ करना चाहकर भी मूक-बधिर बना रहता है[cite: 3]। अतः हमारी करुणा केवल हमारे आंतरिक गूँगेपन और असमर्थता का ही दूसरा रूप है[cite: 3]।
6. गूँगे के भाग जाने पर चमेली के मन में क्या विचार आए?
गूँगे के बिना बताए चले जाने पर चमेली को गहरा धक्का लगा और उसका अहं आहत हुआ[cite: 3]। उसने सोचा कि उसने गूँगे को छत दी, सहारा दिया, फिर भी वह टिक नहीं पाया[cite: 3]। उसने क्षुब्ध होकर उसे 'नाली का कीड़ा' समझा और सोचा कि दुनिया उसके घर को अजायबघर कहकर हँसती है, फिर भी इस अनाथ को कद्र नहीं है[cite: 3]। परंतु जब रात को गूँगा भूखा चौखट पर लौटा, तो चमेली की सोच के अंतर्विरोध उजागर हो गए[cite: 3]।
7. कहानी के शीर्षक 'गूँगे' की सार्थकता पर प्रकाश डालिए।
कहानी का शीर्षक 'गूँगे' बहुवचन में प्रयुक्त हुआ है, जो अत्यंत प्रतीकात्मक और सार्थक है[cite: 3]। यह शीर्षक केवल उस शारीरिक रूप से मूक-बधिर अनाथ बालक की ओर संकेत नहीं करता, बल्कि समाज के उन तमाम संवेदनहीन लोगों की ओर संकेत करता है जो शोषितों पर हो रहे अत्याचारों को देखकर भी चुप रहते हैं और अपने सामाजिक दायित्वों के प्रति गूँगे-बहरे बने हुए हैं[cite: 3]। अतः यह शीर्षक कथावस्तु और व्यंग्य दोनों की दृष्टि से पूर्णतः सार्थक है[cite: 3]।

💡 महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रश्न (परीक्षा उपयोगी)

1. स्त्रियों द्वारा गूँगे का मज़ाक उड़ाना समाज की किस मानसिकता को दर्शाता है?
यह समाज की उस विकृत, क्रूर और संवेदनहीन मानसिकता को दर्शाता है जहाँ किसी दिव्यांग या असहाय व्यक्ति की शारीरिक विवशता को लोग अपने मनोरंजन और खिलवाड़ का साधन समझ लेते हैं[cite: 3]। वे यह भूल जाते हैं कि दिव्यांग भी एक संवेदनशील मनुष्य है जिसका अपना आत्मसम्मान होता है[cite: 3]।
2. गूँगा दूध और तरकारी लाने की बात किस प्रकार समझाता था?
गूँगा दूध का प्रकार समझाने के लिए थन से दूध दुहने (कच्चा दूध) या एक बर्तन से दूसरे बर्तन में उछालने (औंटा हुआ दूध) का अभिनय करता था[cite: 3]। तरकारी के लिए वह गोल-गोल या लंबी उँगली बनाकर सब्ज़ी के आकार का संकेत करता था[cite: 3]। इससे उसकी बौद्धिक सजगता का प्रमाण मिलता है[cite: 3]।
3. 'गूँगे' कहानी हमें क्या मानवीय सीख देती है?
यह कहानी सीख देती है कि दिव्यांगों के प्रति केवल थोथी दया या अहसान जताने के बजाय उनके प्रति वास्तविक मानवीय संवेदना रखनी चाहिए[cite: 3]। उन्हें समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक अवसर और बराबरी का स्थान मिलना चाहिए ताकि वे हीनभावना से मुक्त रह सकें[cite: 3]।

✅ MCQ / वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. 'गूँगे' कहानी के रचनाकार कौन हैं?
  1. मुंशी प्रेमचंद
  2. रांगेय राघव
  3. हरिशंकर परसाई
  4. अमरकांत
उत्तर: (B) रांगेय राघव[cite: 3]
2. रांगेय राघव जी का मूल नाम क्या था?
  1. राघवेंद्र शर्मा
  2. तिरुमल्लै नंबाकम वीर राघव आचार्य
  3. वीर राघव अयंगर
  4. राघवेंद्र राव
उत्तर: (B) तिरुमल्लै नंबाकम वीर राघव आचार्य[cite: 3]
3. रांगेय राघव जी का देहावसान कितनी आयु में हुआ था?
  1. 39 वर्ष
  2. 45 वर्ष
  3. 52 वर्ष
  4. 60 वर्ष
उत्तर: (A) 39 वर्ष[cite: 3]
4. कहानी में गूँगा गूँगा क्यों था?
  1. बीमारी के कारण
  2. जन्म से वज्र बहरा होने के कारण
  3. दुर्घटना के कारण
  4. दवा के असर से
उत्तर: (B) जन्म से वज्र बहरा होने के कारण[cite: 3]
5. गूँगे के माता-पिता के संबंध में क्या सत्य है?
  1. दोनों जीवित थे
  2. पिता मर गए थे और माँ छोड़ गई थी
  3. माता-पिता दोनों खो गए थे
  4. वह अनाथालय से आया था
उत्तर: (B) पिता मर गए थे और माँ छोड़ गई थी[cite: 3]
6. चमेली ने गूँगे को कितने रुपये मासिक तय करके अपने यहाँ रखा था?
  1. दो रुपये
  2. चार रुपये
  3. छः रुपये
  4. दस रुपये
उत्तर: (B) चार रुपये[cite: 3]
7. गूँगे का पालन-पोषण किसने किया था?
  1. मामा-मामी ने
  2. चाचा-चाची ने
  3. बुआ-फूफा ने
  4. नाना-नानी ने
उत्तर: (C) बुआ-फूफा ने[cite: 3]
8. रांगेय राघव की संपूर्ण रचनाओं का संग्रह कितने खंडों में प्रकाशित है?
  1. पाँच खंडों में
  2. आठ खंडों में
  3. दस खंडों में
  4. बारह खंडों में
उत्तर: (C) दस खंडों में ('रांगेय राघव ग्रंथावली')[cite: 3]
9. कहानी के अनुसार समाज के कौन से लोग वास्तव में गूँगे-बहरे हैं?
  1. जो बोल नहीं सकते
  2. जो संवेदनहीन हैं और सामाजिक दायित्व नहीं निभाते
  3. जो अनपढ़ हैं
  4. जो गरीब हैं
उत्तर: (B) जो संवेदनहीन हैं और सामाजिक दायित्व नहीं निभाते[cite: 3]
10. 'कब तक पुकारूँ' किस विधा की प्रसिद्ध रचना है?
  1. नाटक
  2. कहानी
  3. उपन्यास
  4. कविता
उत्तर: (C) उपन्यास (रांगेय राघव)[cite: 3]

🎯 परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण टिप्स

  • गूँगे का चरित्र-चित्रण: गूँगे के स्वाभिमान, कार्यकुशलता और भावुकता पर 5 अंकों का प्रश्न अक्सर पूछा जाता है; उसके भीख न मांगने वाले प्रसंग को अवश्य उद्धृत करें[cite: 3]।
  • प्रतीकात्मक अर्थ: यह प्रश्न अनिवार्य रूप से तैयार करें कि पाठ का नाम 'गूँगा' न होकर 'गूँगे' (बहुवचन) क्यों रखा गया है[cite: 3]।
  • लेखक परिचय: रांगेय राघव का मूल नाम, जन्म स्थान (आगरा), उनकी अल्पायु (39 वर्ष) तथा उनके प्रसिद्ध उपन्यासों (मुर्दों का टीला, कब तक पुकारूँ) के नाम याद रखें[cite: 3]।
  • चमेली का अंतर्द्वंद्व: चमेली की दयालुता और बाद में उसके अहम् की भावना (गूँगे को नाली का कीड़ा समझना) के द्वंद्व पर ध्यान दें[cite: 3]।

⚡ Quick Revision (स्मरण बिंदु)

  • रचनाकार: रांगेय राघव (1923 – 1962)[cite: 3]
  • विधा: यथार्थवादी सामाजिक कहानी[cite: 3]
  • मुख्य पात्र: गूँगा (मूक-बधिर किशोर), चमेली, सुशीला, शकुंतला, बसंता[cite: 3]
  • गूँगे की विशेषता: जन्म से वज्र-बहरा, कुशाग्र बुद्धि, स्वाभिमानी, भीख न लेने वाला[cite: 3]
  • पृष्ठभूमि: अनाथ बालक जिसे रिश्तेदारों (बुआ-फूफा) ने प्रताड़ित किया[cite: 3]
  • केंद्रीय संघर्ष: दया की आड़ में होने वाला शोषण बनाम आत्मसम्मान[cite: 3]
  • व्यंग्य: सामाजिक विसंगतियों और संवेदनहीन समाज पर तीखा कटाक्ष[cite: 3]

❓ Frequently Asked Questions (FAQ)

प्र. 'गूँगे' कहानी किस कक्षा और पुस्तक में संकलित है?
उ. यह NCERT कक्षा 11 की हिंदी पाठ्यपुस्तक "अंतरा" (भाग-1) के गद्य-खंड का अध्याय 4 है[cite: 3]।
प्र. गूँगा स्वाभिमानी कैसे सिद्ध होता है?
उ. गूँगा पेट पालने के लिए कठिन श्रम करता है (बरतन माँजना, कड़ाही साफ़ करना), लेकिन कभी किसी के आगे भीख के लिए हाथ नहीं फैलाता[cite: 3]।
प्र. लेखक ने समाज को गूँगा क्यों कहा है?
उ. क्योंकि समाज शोषितों, गरीबों और दिव्यांगों के दुख-दर्द को देखकर भी चुपचाप अनदेखा कर देता है और अपनी संवेदना व्यक्त नहीं करता[cite: 3]।

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  संज्ञा (Noun) — पूरी जानकारी सरल भाषा में कक्षा 6, 7 और 8 के विद्यार्थियों के लिए • उदाहरण, चित्र और माइंड मैप सहित ज़रा सोचिए — जब आप बोलते हैं "राम स्कूल जाता है", तो इस वाक्य में राम और स्कूल — ये दोनों शब्द किसी न किसी नाम को बता रहे हैं। हिंदी व्याकरण में ऐसे ही शब्दों को संज्ञा कहा जाता है। आज हम इसे बहुत आसान तरीके से, ढेर सारे उदाहरणों के साथ समझेंगे। 1. संज्ञा किसे कहते हैं? किसी भी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, भाव या गुण के नाम को "संज्ञा" कहते हैं। सरल शब्दों में — दुनिया की हर चीज़ का एक नाम होता है, और वह नाम ही संज्ञा है। संज्ञा = किसी भी नाम का बोध कराने वाला शब्द व्यक्ति (राम, सीता) वस्तु (किताब, कुर्सी) स्थान (दिल्ली, स्कूल) भाव / गुण (ख़ुशी, ईमानदारी) कुछ आसान उदाहरण वाक्यों में: मोहन बाज़ार से आम लाया। (व्यक्ति + वस्तु) दिल्ली भारत की राजधानी है। (स्थान) उसकी ईमानदारी सबको पसंद है। (गुण) गंगा एक पवित्र नदी है। (स्थान/वस्तु का नाम) ✻ ✻ ✻ 2. संज्ञा के भेद (प्रकार) — माइंड मैप संज्ञा मुख्यतः पाँच प्रकार की होती है। नीचे दिया गया माइंड मैप इसे ...

क्रिया (Verb) की परिभाषा, भेद, उदाहरण, पहचान, नियम, MCQ, Worksheet | हिंदी व्याकरण

  🌈 क्रिया क्या है? कक्षा 6–8 हिंदी व्याकरण परिभाषा, भेद, उदाहरण, माइंड मैप, अभ्यास और महत्वपूर्ण प्रश्न 📚 क्रिया का परिचय हिंदी भाषा में वाक्य को पूरा अर्थ देने के लिए कई प्रकार के शब्दों का प्रयोग किया जाता है। इनमें क्रिया का विशेष महत्व है। क्रिया से हमें किसी काम के करने, होने या किसी अवस्था का पता चलता है। जैसे—राम पढ़ता है, सीता गाना गाती है, बच्चे मैदान में खेलते हैं और पक्षी आकाश में उड़ते हैं। इन सभी वाक्यों में पढ़ता, गाती, खेलते और उड़ते शब्द किसी न किसी काम का बोध कराते हैं। इसलिए ये सभी क्रिया शब्द हैं। उदाहरण: मोहन पुस्तक पढ़ता है। बच्चे मैदान में खेलते हैं। माँ खाना बनाती हैं। चिड़िया आकाश में उड़ती है। दादाजी कुर्सी पर बैठे हैं। चित्र: विद्यार्थी पढ़ते और सीखते हुए। ✅ क्रिया की परिभाषा जिस शब्द से किसी का...