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घर में वापसी (धूमिल) कक्षा 11 हिंदी अंतरा — सम्पूर्ण व्याख्या, प्रश्न-उत्तर, MCQ और Quick Revision

कक्षा 11 हिंदी · अंतरा भाग 1 · काव्य-खंड · पाठ 16

घर में वापसी (धूमिल) — सम्पूर्ण व्याख्या, प्रश्न-उत्तर और परीक्षा तैयारी

कवि परिचय, सरल व्याख्या, शब्दार्थ, Mind Map, पाठ्यपुस्तक व अतिरिक्त प्रश्न-उत्तर, MCQ और Quick Revision — एक ही जगह

(NCERT कक्षा 11 हिंदी पाठ्यपुस्तक "अंतरा" भाग-1, काव्य-खंड पर आधारित अध्ययन सामग्री)

घर में वापसी धूमिल की एक मार्मिक कविता है, जिसमें गरीबी से संघर्षरत एक परिवार की व्यथा-कथा को अत्यंत संवेदनशील ढंग से चित्रित किया गया है। कक्षा 11 की हिंदी पाठ्यपुस्तक "अंतरा" (भाग-1) के काव्य-खंड के इस अंतिम पाठ में आपको कविता का सार व भावार्थ, कवि परिचय, महत्वपूर्ण शब्दार्थ, Mind Map, पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-उत्तर, अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न, MCQ और परीक्षा-उपयोगी Quick Revision — सब कुछ एक ही जगह मिलेगा।

📌 कॉपीराइट सूचना: 'घर में वापसी' कविता धूमिल (सुदामा पांडेय) की मौलिक व सर्वाधिकार-सुरक्षित (copyrighted) रचना है, इसलिए यहाँ कविता की मूल पंक्तियाँ पूर्ण रूप से न देकर उसका सार, भावार्थ व बिंब-विश्लेषण अपने शब्दों में प्रस्तुत किया गया है (कहीं-कहीं पाठ्यपुस्तक के प्रश्नों में दिए गए अत्यंत लघु पंक्ति-अंश ही उद्धृत हैं)। कविता का मूल पाठ पढ़ने के लिए कृपया NCERT की "अंतरा" (भाग-1) पाठ्यपुस्तक देखें।

📖 संक्षिप्त परिचय

'घर में वापसी' धूमिल की एक प्रमुख कविता है, जिसमें गरीबी से जूझते एक परिवार की मार्मिक व्यथा-कथा प्रस्तुत की गई है। कविता में घर के पाँच सदस्यों — माँ, पिता, बेटी और पत्नी — को "पाँच जोड़ी आँखें" कहकर संबोधित किया गया है, और यह दिखाया गया है कि किस प्रकार गरीबी, आत्मीय रिश्तों के बीच भी एक अदृश्य दीवार बनकर खड़ी हो जाती है, जिसे तोड़ पाना परिवार के लिए संभव नहीं हो पाता।

✍️ कवि परिचय — धूमिल

जन्मसन् 1936, खेवली गाँव, वाराणसी के पास
निधनसन् 1975 (असमय, ब्रेन ट्यूमर से)
मूल नामसुदामा पांडेय 'धूमिल'
प्रमुख सम्मानसाहित्य अकादमी पुरस्कार (मरणोपरांत)

सुदामा पांडेय 'धूमिल' का जन्म वाराणसी के पास खेवली नामक गाँव में हुआ। हाई स्कूल पास करके वे रोज़ी की फ़िक्र में पड़ गए। सन् 1958 में आई.टी.आई. वाराणसी से विद्युत डिप्लोमा किया और वहीं पर अनुदेशक (instructor) के पद पर नियुक्त हो गए। असमय ही ब्रेन ट्यूमर से धूमिल की मृत्यु हो गई। धूमिल की अनेक कविताएँ समकालीन पत्र-पत्रिकाओं में बिखरी पड़ी हैं, कुछ अभी तक अप्रकाशित भी हैं। संसद से सड़क तक, कल सुनना मुझे और सुदामा पांडेय का प्रजातंत्र उनके काव्य-संग्रह हैं। धूमिल को मरणोपरांत साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

धूमिल के काव्य-संस्कारों के भीतर एक ख़ास प्रकार का गँवईपन है, एक भदेसपन, जो उनके व्यंग्य को धारदार और कविता को असरदार बनाता है। उन्होंने अपनी कविता में समकालीन राजनीतिक परिवेश में जी रहे जागरूक 'व्यक्ति' की तस्वीर पेश की है और 1960 के बाद के मोहभंग को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया है। संघर्षरत मनुष्यों के प्रति धूमिल के मन में अगाध करुणा है। उन्हें ऐसा लगता है कि समकालीन परिवेश इस करुणा का शत्रु है। इसीलिए उनकी कविता में यह करुणा कहीं आक्रोश का रूप धारण कर लेती है तो कहीं व्यंग्य और चुटकुलेबाज़ी का। साठोत्तरी कविता के इसी आक्रोश और ज़मीन से जुड़ी मुहावरेदार भाषा के कारण धूमिल की कविताएँ अलग से पहचानी जा सकती हैं। धूमिल की काव्य-भाषा व काव्य-शिल्प में एक ज़बरदस्त गरमाहट है — ऐसी गरमाहट जो बिजली के ताप से नहीं, जेठ की दुपहरी से आती है।

प्रमुख कृतियाँ — संसद से सड़क तक कल सुनना मुझे सुदामा पांडेय का प्रजातंत्र

🎭 पाठ की विधा

'घर में वापसी' विधा की दृष्टि से एक भावात्मक-यथार्थवादी कविता है, जिसमें साठोत्तरी कविता की विशिष्ट मुहावरेदार, ज़मीन से जुड़ी भाषा तथा प्रतीकात्मक बिंब-योजना (जैसे आँखों को अलग-अलग वस्तुओं के रूप में चित्रित करना) के माध्यम से पारिवारिक जीवन में व्याप्त गरीबी की त्रासदी को अत्यंत मार्मिक ढंग से व्यक्त किया गया है।

🎯 पाठ का मुख्य विषय

  • गरीबी से संघर्षरत परिवार की व्यथा-कथा: घर के पाँच सदस्यों की स्थिति व मनोदशा का मार्मिक चित्रण।
  • आँखों का प्रतीकात्मक चित्रण: माँ, पिता, बेटी और पत्नी की आँखों को अलग-अलग बिंबों (पंचर पहिए, ठंडी शलाखें, जलते दिए, थामे हुए हाथ) के रूप में चित्रित करना।
  • गरीबी की दीवार: गरीबी किस प्रकार आत्मीय रिश्तों के बीच भी एक अदृश्य दीवार बनकर खड़ी हो जाती है।
  • रिश्तों का न खुल पाना: निकट होते हुए भी परिवार के सदस्यों के बीच भावनात्मक संवाद व स्नेह की खुली अभिव्यक्ति का अभाव।
  • एक सुखी घर की आकांक्षा: कविता के अंत में एक ऐसे घर की कल्पना, जहाँ गरीबी बाधक न हो और रिश्तों में प्रेम खुलकर व्यक्त हो सके।

📝 सरल भाषा में पाठ की व्याख्या (सार एवं भावार्थ)

भाग 1 — पाँच जोड़ी आँखें: माँ और पिता

कविता के आरंभ में कवि कहते हैं कि उनके घर में पाँच सदस्य नहीं, बल्कि "पाँच जोड़ी आँखें" हैं — यह असामान्य कथन ही कविता की मार्मिकता का संकेत देता है। माँ की आँखों की तुलना कवि तीर्थ-यात्रा पर निकली किसी बस के उन दो पंचर पहियों से करते हैं, जो अपने पड़ाव (मंज़िल) तक पहुँचने से पहले ही रास्ते में रुक गए हों — यानी माँ की आशाएँ व इच्छाएँ जीवन के संघर्ष में अधूरी रह गई हैं। पिता की आँखों की तुलना लोहसाँय (लोहार की भट्टी) की उन ठंडी शलाखों (छड़ों) से की गई है, जो कभी तपकर आकार लेती थीं, पर अब जीवन-भर की मेहनत के बाद बुझी व निस्तेज हो चुकी हैं।

भाग 2 — बेटी और पत्नी की आँखें

बेटी की आँखों की तुलना मंदिर में दीवट (दीया रखने के स्थान) पर जलते हुए घी के दो दियों से की गई है — इसमें मासूमियत, आस्था व एक कोमल आशा की झलक है, जो अब तक गरीबी की कठोरता से अछूती है। पत्नी की आँखों का चित्रण सबसे भिन्न ढंग से हुआ है — कवि कहते हैं कि पत्नी की आँखें, आँखें नहीं बल्कि हाथ हैं, जो उन्हें थामे हुए हैं। यह दिखाता है कि पति-पत्नी के बीच रोमानी दृष्टि-संपर्क की जगह अब जीवन-संघर्ष में एक-दूसरे को सम्बल देने वाला व्यावहारिक साथ शेष रह गया है।

भाग 3 — गरीबी की दीवार और "पेशेवर गरीब"

इसके बाद कवि गहरी वेदना के साथ कहते हैं कि वे सब आपस में स्वजन हैं, करीब हैं, परंतु फिर भी मानो एक दीवार के दोनों ओर खड़े हों। इसका कारण वे बताते हैं — "क्योंकि हम पेशेवर गरीब हैं", यानी गरीबी अब उनके जीवन की स्थायी व लगभग आदतन पहचान बन चुकी है। रिश्ते होते हुए भी वे खुल नहीं पाते, क्योंकि उनके भीतर इतनी भी शक्ति (जिसे कवि "लोहा" कहते हैं) शेष नहीं बची कि वे उससे एक चाबी बनवा सकें और भाषा व भावनाओं के जटिल, उलझे हुए ताले को खोल सकें।

भाग 4 — एक सुखी घर की अधूरी आकांक्षा

कविता के अंत में कवि एक भावुक कल्पना करते हैं — काश वे सब रिश्तों के बारे में सोचते हुए आपस में प्रेम से बोल पाते, कह पाते कि "ये पिता हैं", "यह प्यारी माँ है", "यह मेरी बेटी है", और पत्नी को थोड़ा अलग करके कह पाते "तू मेरी हमसफ़र है।" काश वे थोड़ा जोखिम उठाकर, दीवार पर हाथ रखकर गर्व से कह पाते "यह मेरा घर है।" परंतु यह इच्छा कविता में अधूरी ही रह जाती है — यही कविता की सबसे मार्मिक विडंबना है कि गरीबी ने न केवल भौतिक सुविधाओं को, बल्कि परिवार के भीतर के भावनात्मक खुलेपन को भी छीन लिया है।

📚 महत्वपूर्ण शब्दार्थ

शब्दअर्थ
पड़ावफ़ेज़, चरण, मंज़िल तक पहुँचने का एक विश्राम-स्थल
लोहसाँयलोहे के औज़ार बनानेवाली भट्टी
शलाखें (सलाखें)लोहे की छड़ें
दीवटदीया रखने के लिए बनाया गया स्थान
भुन्ना-सीजटिल, उलझा हुआ
हमसफ़रजीवनसाथी, यात्रा में साथ देने वाला/वाली
पेशेवरव्यवसाय-संबंधी; यहाँ आदतन/स्थायी रूप से जुड़ा हुआ
स्वजनअपने लोग, परिवारजन
जोखिमख़तरा, साहस भरा कदम

🔑 पाठ के मुख्य बिंदु

  • कवि अपने घर के पाँच सदस्यों को "पाँच जोड़ी आँखें" कहकर संबोधित करते हैं, जो कविता का केंद्रीय व मार्मिक बिंब है।
  • माँ की आँखें — अधूरी रह गई आशाओं का प्रतीक (तीर्थ-यात्रा की बस के पंचर पहिए)।
  • पिता की आँखें — जीवन-भर की मेहनत से बुझी, निस्तेज आँखें (लोहसाँय की ठंडी शलाखें)।
  • बेटी की आँखें — मासूम आशा व आस्था का प्रतीक (मंदिर में जलते दिए)।
  • पत्नी की आँखें — रोमानी दृष्टि नहीं, जीवन-संघर्ष का व्यावहारिक सम्बल (थामे हुए हाथ)।
  • गरीबी परिवार के आत्मीय रिश्तों के बीच भी एक अदृश्य दीवार बनकर खड़ी हो जाती है — वे "पेशेवर गरीब" हैं।
  • रिश्ते होते हुए भी भावनाओं व भाषा के जटिल ताले को खोलने की शक्ति (ऊर्जा/लोहा) शेष नहीं बची।
  • कविता के अंत में एक सुखी, प्रेम से भरे घर की आकांक्षा है, जो अधूरी ही रह जाती है — यही कविता की मार्मिक विडंबना है।

🧠 Mind Map

घर में वापसी
कविधूमिल (सुदामा पांडेय, 1936-1975)
विधाभावात्मक-यथार्थवादी कविता
केंद्रीय बिंबपाँच जोड़ी आँखें (परिवार के पाँच सदस्य)
मुख्य विषयगरीबी से संघर्षरत परिवार की व्यथा
मुख्य प्रतीकगरीबी की दीवार, भाषा का जटिल ताला
भावनात्मक स्वरकरुणा, विडंबना, अधूरी आकांक्षा
अंतिम भाव"यह मेरा घर है" कहने की अधूरी इच्छा
परीक्षा उपयोगिताबिंब-विश्लेषण व काव्य-सौंदर्य आधारित प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण

📗 पाठ्यपुस्तक प्रश्न-उत्तर

1. घर एक परिवार है, परिवार में पाँच सदस्य हैं, किंतु कवि पाँच सदस्य नहीं उन्हें पाँच जोड़ी आँखें क्यों मानता है?
कवि परिवार के सदस्यों को केवल संख्या के रूप में न देखकर उनकी आँखों में झलकने वाली भावनाओं, संघर्षों व आशाओं के माध्यम से देखते हैं। हर सदस्य की आँखें उसके जीवन की अलग कहानी कहती हैं — माँ की अधूरी आशाएँ, पिता की थकी हुई मेहनत, बेटी की मासूम आस्था और पत्नी का मूक सम्बल। इसीलिए कवि उन्हें "पाँच जोड़ी आँखें" कहकर परिवार के भीतर की गहरी भावनात्मक स्थिति को उजागर करते हैं, न कि केवल पाँच व्यक्तियों की उपस्थिति को।
2. 'पत्नी की आँखें आँखें नहीं हाथ हैं, जो मुझे थामे हुए हैं' से कवि का क्या अभिप्राय है?
इस पंक्ति से कवि का अभिप्राय यह है कि गरीबी और जीवन-संघर्ष के दबाव में पति-पत्नी के बीच रोमानी दृष्टि-संपर्क या भावुक निकटता की जगह अब एक व्यावहारिक, ठोस सहारे ने ले ली है। पत्नी अब आँखों से नहीं, बल्कि अपने साथ व सम्बल से — यानी "हाथ" पकड़कर — कवि को जीवन के संघर्ष में थामे हुए है। यह दांपत्य जीवन में गरीबी के कारण आए भावनात्मक बदलाव को दर्शाता है।
3. 'वैसे हम स्वजन हैं, करीब हैं…क्योंकि हम पेशेवर गरीब हैं' से कवि का क्या आशय है? अगर अमीर होते तो क्या स्वजन और करीब नहीं होते?
कवि का आशय यह है कि परिवार के सदस्य रिश्ते की दृष्टि से आपस में स्वजन व करीब हैं, परंतु गरीबी ने उनके बीच एक अदृश्य दीवार खड़ी कर दी है, जिससे वे भावनात्मक रूप से खुलकर एक-दूसरे के करीब नहीं आ पाते। "पेशेवर गरीब" होने का अर्थ है कि गरीबी अब उनके जीवन की स्थायी, आदतन स्थिति बन चुकी है। यदि वे अमीर होते, तो संभवतः वे स्वजन व करीब तो फिर भी होते, परंतु जीवन-संघर्ष का यह दबाव व थकान कम होने से शायद वे अपने प्रेम व आत्मीयता को अधिक खुलकर व्यक्त कर पाते — कविता यही संकेत देती है कि गरीबी भावनाओं की अभिव्यक्ति को भी दबा देती है।
4. 'रिश्ते हैं; लेकिन खुलते नहीं' — कवि के सामने ऐसी कौन सी विवशता है जिससे आपसी रिश्ते भी नहीं खुलते हैं?
कवि के सामने गरीबी और जीवन-संघर्ष की विवशता है। उनके अनुसार, उनके रक्त में इतना भी "लोहा" (यानी शक्ति, ऊर्जा, साहस) शेष नहीं बचा कि वे उससे एक चाबी बनवा सकें और रिश्तों व भाषा के जटिल, उलझे हुए ताले को खोल सकें। निरंतर आर्थिक संघर्ष ने उन्हें इतना थका व निढाल कर दिया है कि भावनाओं को खुलकर व्यक्त करने की शक्ति भी शेष नहीं रही — यही उनकी सबसे बड़ी विवशता है।
5. निम्नलिखित का काव्य सौंदर्य स्पष्ट कीजिए — (क) माँ की आँखें पड़ाव से पहले ही तीर्थ-यात्रा की बस के दो पंचर पहिए हैं। (ख) पिता की आँखें लोहसाँय की ठंडी शलाखें हैं।
(क) इस पंक्ति में माँ की आँखों की तुलना पंचर पहियों से करके कवि ने एक अत्यंत मौलिक व मार्मिक बिंब रचा है — जिस प्रकार बस अपनी मंज़िल तक पहुँचने से पहले ही रास्ते में रुक जाती है, उसी प्रकार माँ की जीवन-आशाएँ व इच्छाएँ भी संघर्ष के बीच अधूरी रह गई हैं। यह उपमा अत्यंत अप्रत्याशित व यथार्थवादी होने के कारण गहरा भावनात्मक प्रभाव उत्पन्न करती है। (ख) इस पंक्ति में पिता की आँखों की तुलना भट्टी की ठंडी शलाखों से करके कवि ने जीवन-भर की कठोर मेहनत के बाद आई थकान, निस्तेजता व भावशून्यता को अत्यंत प्रभावी ढंग से व्यक्त किया है — "ठंडी" शब्द विशेष रूप से पिता के भीतर की ऊर्जा व उत्साह के बुझ जाने का बिंब रचता है।

योग्यता-विस्तार (मार्गदर्शन)

1. घर में रहनेवालों से ही घर, घर कहलाता है। पारिवारिक रिश्ते खून के रिश्ते हैं फिर भी उन रिश्तों को न खोल पाना कैसी विवशता है! अपनी राय लिखिए।
विद्यार्थी अपनी राय में लिख सकते हैं कि आर्थिक तंगी, समय की कमी, थकान व निरंतर संघर्ष के कारण अक्सर परिवार के सदस्य आपस में भावनाओं को खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते, भले ही उनके बीच का प्रेम व अपनत्व वास्तविक हो। यह विवशता व्यक्तिगत न होकर सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों से उपजी होती है, और इसे समझने व संवाद बढ़ाने का प्रयास हर परिवार को करना चाहिए।
2. आप अपने पारिवारिक रिश्तों-संबंधों के बारे में एक निबंध लिखिए।
विद्यार्थी अपने परिवार के सदस्यों के साथ अपने अनुभवों, आपसी स्नेह, ज़िम्मेदारियों व भावनात्मक जुड़ाव के आधार पर एक व्यक्तिगत निबंध लिख सकते हैं, जिसमें वे यह भी बता सकते हैं कि परिवार उनके जीवन में किस प्रकार सुरक्षा व सम्बल का स्रोत है।
3. 'यह मेरा घर है' के आधार पर सिद्ध कीजिए कि आपका अपना घर है।
विद्यार्थी अपने घर से जुड़ी भावनात्मक अनुभूतियों, अपनेपन, सुरक्षा-भाव व परिवार के साथ बिताए पलों का वर्णन करते हुए यह स्पष्ट कर सकते हैं कि घर केवल एक भौतिक संरचना नहीं, बल्कि अपनेपन व स्नेह से बना एक भावनात्मक आश्रय है, जिसे वे गर्व से "अपना घर" कह सकते हैं।

💡 महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रश्न

1. धूमिल की काव्य-भाषा की क्या विशेषताएँ हैं?
धूमिल की काव्य-भाषा में एक ख़ास प्रकार का गँवईपन व भदेसपन है, जो उनके व्यंग्य को धारदार बनाता है। उनकी भाषा साठोत्तरी कविता के आक्रोश व ज़मीन से जुड़ी मुहावरेदार शैली से युक्त है, जिसमें बोलचाल के सहज शब्दों व यथार्थवादी बिंबों का प्रयोग हुआ है।
2. 'घर में वापसी' शीर्षक कविता के भाव के अनुरूप किस प्रकार सार्थक है?
शीर्षक 'घर में वापसी' कविता के भाव को सटीकता से व्यक्त करता है — यह केवल भौतिक रूप से घर लौटने की बात नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से परिवार के करीब आने, रिश्तों को फिर से खोलने और एक सच्चे, प्रेमपूर्ण घर की स्थापना की आकांक्षा को दर्शाता है, जो कविता में अंततः अधूरी ही रह जाती है।
3. कविता में गरीबी को किस प्रकार चित्रित किया गया है — केवल आर्थिक अभाव के रूप में या उससे भी आगे?
कविता में गरीबी को केवल आर्थिक अभाव के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसी शक्ति के रूप में चित्रित किया गया है जो भावनात्मक संबंधों, संवाद व स्नेह की खुली अभिव्यक्ति को भी छीन लेती है। यह गरीबी परिवार के सदस्यों के बीच एक अदृश्य दीवार बनकर खड़ी हो जाती है, जो आर्थिक अभाव से कहीं अधिक गहरी क्षति पहुँचाती है।
4. धूमिल के जीवन की किन परिस्थितियों का प्रभाव इस कविता में दिखाई देता है?
धूमिल स्वयं एक साधारण परिवार से थे और आई.टी.आई. में अनुदेशक जैसे सीमित आय वाले पद पर कार्यरत थे। उनके जीवन के आर्थिक संघर्ष व साधारण पारिवारिक जीवन का यथार्थवादी अनुभव इस कविता में स्पष्ट रूप से झलकता है, जिससे कविता की संवेदनशीलता व प्रामाणिकता और बढ़ जाती है।
5. कविता का अंत आशावादी है या निराशावादी? स्पष्ट कीजिए।
कविता का अंत जटिल है — यह पूर्णतः निराशावादी नहीं है, क्योंकि कवि एक सुंदर, प्रेमपूर्ण घर की कल्पना व आकांक्षा व्यक्त करते हैं। परंतु यह आकांक्षा वर्तमान में अधूरी व अवास्तविक रह जाती है, इसलिए इसमें एक गहरी वेदना व विडंबना भी है। इस प्रकार कविता का अंत आशा व निराशा के बीच का एक मार्मिक संतुलन प्रस्तुत करता है।

✅ MCQ / वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. धूमिल का मूल नाम क्या था?
  1. वैद्यनाथ मिश्र
  2. सुदामा पांडेय
  3. रामवृक्ष बेनीपुरी
  4. त्रिलोचन शास्त्री
उत्तर: (B) सुदामा पांडेय
2. धूमिल का जन्म कहाँ हुआ था?
  1. खेवली गाँव, वाराणसी के पास
  2. बिलासपुर, मध्य प्रदेश
  3. इलाहाबाद
  4. पटना
उत्तर: (A) खेवली गाँव, वाराणसी के पास
3. धूमिल का निधन किस कारण और किस वर्ष हुआ?
  1. 1975, ब्रेन ट्यूमर से
  2. 1986, हृदयाघात से
  3. 1990, दुर्घटना में
  4. 1980, बीमारी से
उत्तर: (A) 1975, ब्रेन ट्यूमर से
4. धूमिल ने आई.टी.आई. वाराणसी से किस क्षेत्र में डिप्लोमा किया था?
  1. यांत्रिकी (मैकेनिकल)
  2. विद्युत (इलेक्ट्रिकल)
  3. सिविल
  4. कंप्यूटर
उत्तर: (B) विद्युत (इलेक्ट्रिकल)
5. धूमिल को साहित्य अकादमी पुरस्कार कब मिला?
  1. जीवनकाल में
  2. मरणोपरांत
  3. उन्हें कभी नहीं मिला
  4. सेवानिवृत्ति पर
उत्तर: (B) मरणोपरांत
6. कविता में कवि अपने परिवार के पाँच सदस्यों को क्या कहते हैं?
  1. पाँच सितारे
  2. पाँच जोड़ी आँखें
  3. पाँच दीपक
  4. पाँच पहिए
उत्तर: (B) पाँच जोड़ी आँखें
7. माँ की आँखों की तुलना किससे की गई है?
  1. जलते दियों से
  2. तीर्थ-यात्रा की बस के पंचर पहियों से
  3. ठंडी शलाखों से
  4. थामे हुए हाथों से
उत्तर: (B) तीर्थ-यात्रा की बस के पंचर पहियों से
8. पिता की आँखों की तुलना किससे की गई है?
  1. लोहसाँय की ठंडी शलाखों से
  2. जलते घी के दियों से
  3. पंचर पहियों से
  4. नीलकमल से
उत्तर: (A) लोहसाँय की ठंडी शलाखों से
9. बेटी की आँखों की तुलना किससे की गई है?
  1. तीर्थ-यात्रा की बस के पहियों से
  2. मंदिर में जलते घी के दो दियों से
  3. ठंडी शलाखों से
  4. हाथों से
उत्तर: (B) मंदिर में जलते घी के दो दियों से
10. पत्नी की आँखों को कवि किसके समान बताते हैं?
  1. आँखें ही आँखें
  2. हाथ, जो उन्हें थामे हुए हैं
  3. ठंडी शलाखें
  4. पंचर पहिए
उत्तर: (B) हाथ, जो उन्हें थामे हुए हैं
11. परिवार के सदस्य आपस में करीब होते हुए भी एक-दूसरे से क्यों दूर महसूस करते हैं?
  1. वे अलग-अलग शहरों में रहते हैं
  2. वे "पेशेवर गरीब" हैं
  3. वे आपस में लड़ते हैं
  4. वे एक-दूसरे को पसंद नहीं करते
उत्तर: (B) वे "पेशेवर गरीब" हैं
12. कवि के अनुसार भाषा के जटिल ताले को खोलने के लिए किस चीज़ की कमी है?
  1. समय की
  2. लोहे (शक्ति/ऊर्जा) की
  3. पैसे की
  4. शब्दों की
उत्तर: (B) लोहे (शक्ति/ऊर्जा) की
13. कविता के अंत में कवि पत्नी को क्या कहना चाहते हैं?
  1. तू मेरी हमसफ़र है
  2. तू मेरी दुश्मन है
  3. तू यहाँ से जा
  4. तू मेरी बेटी है
उत्तर: (A) तू मेरी हमसफ़र है
14. धूमिल की कविता की भाषा-शैली किस प्रकार की मानी जाती है?
  1. अत्यंत संस्कृतनिष्ठ
  2. गँवईपन व भदेसपन लिए मुहावरेदार
  3. पूर्णतः अंग्रेज़ीमिश्रित
  4. छायावादी
उत्तर: (B) गँवईपन व भदेसपन लिए मुहावरेदार
15. निम्नलिखित में से धूमिल की रचना नहीं है —
  1. संसद से सड़क तक
  2. कल सुनना मुझे
  3. सुदामा पांडेय का प्रजातंत्र
  4. मगध
उत्तर: (D) मगध (यह श्रीकांत वर्मा की रचना है)

🎯 परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

  • कवि परिचय (जन्म-स्थान, मूल नाम, शिक्षा, निधन का कारण, प्रमुख कृतियाँ, साहित्य अकादमी पुरस्कार) याद रखें — प्रायः 1-2 अंक के प्रश्न में पूछा जाता है।
  • चारों सदस्यों (माँ, पिता, बेटी, पत्नी) की आँखों से जुड़े बिंबों को क्रमबद्ध रूप से व सही उपमाओं के साथ याद रखें — यह प्रश्नों में बार-बार पूछा जाता है।
  • "पेशेवर गरीब" व "रिश्ते हैं; लेकिन खुलते नहीं" जैसी पंक्तियों का भावार्थ स्पष्ट रूप से समझें व लिखने का अभ्यास करें।
  • काव्य-सौंदर्य वाले प्रश्नों (उपमाओं व बिंबों की विशिष्टता) के उत्तर विस्तार से लिखने का अभ्यास करें।
  • कविता के केंद्रीय भाव — गरीबी व भावनात्मक अभिव्यक्ति के बीच के संबंध — पर आधारित मत/राय वाले प्रश्नों की तैयारी अवश्य करें।

✏️ अभ्यास प्रश्न

  1. 'घर में वापसी' कविता में परिवार के सदस्यों की आँखों का चित्रण किस प्रकार किया गया है?
  2. गरीबी किस प्रकार आत्मीय रिश्तों के बीच एक दीवार बन जाती है, कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
  3. "पेशेवर गरीब" होने का क्या अर्थ है, अपने शब्दों में समझाइए।
  4. कविता के अंत में व्यक्त की गई आकांक्षा का वर्णन कीजिए।
  5. धूमिल की काव्य-भाषा व शैली की विशेषताएँ लिखिए।
  6. 'घर में वापसी' शीर्षक की सार्थकता पर टिप्पणी कीजिए।

⚡ Quick Revision

  • कवि: धूमिल (मूल नाम सुदामा पांडेय, सन् 1936-1975)
  • जन्म-स्थान: खेवली गाँव, वाराणसी के पास
  • शिक्षा/करियर: आई.टी.आई. वाराणसी से विद्युत डिप्लोमा; अनुदेशक के पद पर कार्यरत
  • सम्मान: साहित्य अकादमी पुरस्कार (मरणोपरांत)
  • प्रमुख काव्य-संग्रह: संसद से सड़क तक, कल सुनना मुझे, सुदामा पांडेय का प्रजातंत्र
  • कविता का विषय: गरीबी से संघर्षरत परिवार, पाँच जोड़ी आँखें, भावनात्मक दूरी
  • केंद्रीय बिंब: माँ (पंचर पहिए), पिता (ठंडी शलाखें), बेटी (जलते दिए), पत्नी (थामे हुए हाथ)
  • विशेषता: गँवईपन व भदेसपन लिए मुहावरेदार भाषा, आक्रोश व करुणा का सम्मिश्रण

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❓ Frequently Asked Questions (FAQ)

प्र. 'घर में वापसी' कविता किस कक्षा की पाठ्यपुस्तक में है?
उ. 'घर में वापसी' NCERT कक्षा 11 की हिंदी पाठ्यपुस्तक "अंतरा" (भाग-1) के काव्य-खंड का सोलहवाँ व अंतिम पाठ है।
प्र. 'घर में वापसी' कविता के रचयिता कौन हैं?
उ. इस कविता के रचयिता धूमिल हैं, जिनका मूल नाम सुदामा पांडेय था।
प्र. कविता में परिवार के सदस्यों को "पाँच जोड़ी आँखें" क्यों कहा गया है?
उ. कवि परिवार के हर सदस्य की आँखों में झलकने वाली भावनाओं व जीवन-संघर्ष के माध्यम से उनका चित्रण करते हैं, इसीलिए वे उन्हें केवल पाँच व्यक्ति न कहकर "पाँच जोड़ी आँखें" कहते हैं।
प्र. कविता का केंद्रीय संदेश क्या है?
उ. कविता का केंद्रीय संदेश यह है कि गरीबी केवल आर्थिक अभाव नहीं है, बल्कि यह परिवार के आत्मीय रिश्तों के बीच भी एक अदृश्य दीवार बनकर खड़ी हो जाती है, जिससे भावनाओं की खुली अभिव्यक्ति कठिन हो जाती है।
प्र. "पेशेवर गरीब" का क्या अर्थ है?
उ. "पेशेवर गरीब" का अर्थ है कि गरीबी अब परिवार के जीवन की स्थायी व लगभग आदतन स्थिति बन चुकी है, जिससे वे उसे अपनी पहचान के रूप में स्वीकार कर चुके हैं।
प्र. धूमिल को कौन-सा प्रमुख सम्मान मिला था?
उ. धूमिल को मरणोपरांत साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

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