संवादहीन
(शेखर जोशी) — संपूर्ण अध्ययन सामग्री
नोट: इस सामग्री में सभी प्रश्न काले रंग में तथा उनके उत्तर नीले रंग में दिए गए हैं। 25 वस्तुनिष्ठ, 20 अति लघु, 20 लघु तथा 10 महत्वपूर्ण प्रश्न पाठ्यपुस्तक के 'अभ्यास' खंड से अलग हैं।
लेखक परिचय
शेखर जोशी
जन्म: सन् 1932, अल्मोड़ा, उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश)। निधन: सन् 2022।
शेखर जोशी का जन्म सन् 1932 में अल्मोड़ा, उत्तराखंड में हुआ था। उनका पहला कहानी-संग्रह कोसी का घटवार सन् 1958 में प्रकाशित हुआ।
उनकी अन्य प्रमुख रचनाएँ हैं — साथ के लोग, दाज्यू, हलवाहा, नौरंगी बीमार है, आदमी का डर, डांगरी वाले (कहानी-संग्रह); एक पेड़ की याद (शब्दचित्र-संग्रह); स्मृति में रहें वे (संस्मरण); न रोको उन्हें शुभ्रा (कविता-संग्रह); मेरा ओलिया गाँव (आत्मवृत्त)। उनकी कहानियों का संग्रह शेखर जोशी कथा समग्र शीर्षक से प्रकाशित है।
शेखर जोशी ने ग्रामीण-शहरी मध्यवर्गीय समाज के जीवन-मूल्यों तथा कारखानों में काम करने वाले मजदूरों के जीवन-संघर्षों को अपनी कहानियों में प्रमुखता से उभारा है। उन्हें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा 'महावीर प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार' तथा 'साहित्य भूषण सम्मान', मध्य प्रदेश शासन द्वारा 'अखिल भारतीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान' तथा 'श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।
साहित्यिक विशेषताएँ: शेखर जोशी की कहानी-शैली यथार्थवादी, संवेदनशील और लोकधर्मी है। वे साधारण पात्रों — ग्रामीण वृद्धजन, मजदूर, आम मध्यवर्गीय व्यक्ति — के माध्यम से समकालीन सामाजिक यथार्थ, मानवीय संबंधों और भावनाओं को अत्यंत मार्मिकता से उकेरते हैं।
कहानी का माइंड मैप
पाठ का सार एवं व्याख्या
भूमिका
'संवादहीन' शेखर जोशी द्वारा रचित एक संवेदनशील कहानी है, जो ग्रामीण वृद्ध स्त्री ताई के अकेलेपन को केंद्र में रखकर लिखी गई है। कहानी के दो मुख्य पात्र ताई और उनका पाला हुआ पहाड़ी तोता मिट्ठू हैं। मिट्ठू ताई के लिए केवल एक पालतू पक्षी नहीं, बल्कि संवाद का माध्यम और ममता का केंद्र बन जाता है।
ताई का अकेलापन और मिट्ठू का आगमन
गाँव के बीच स्थित बड़े घर के सूने खंडहर में ताई अकेली रह गई थीं। कभी उनके जीवन में पुत्र-परिवार, बहू-बेटियाँ, नौकर-चाकर, गाय-ढोर सब कुछ था, परंतु बहू-बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहर के होकर रह गए। खेती-बाड़ी, कारोबार पराए हाथों में चला गया, नौकर-चाकर भी टिक न सके। अपनी अकेली जान के लिए ताई दो जून का एक जून चूल्हा फूँकतीं, व्रत-उपवास के बहाने चौका-चूल्हा टाल जातीं। पेट की समस्या उनके लिए कभी समस्या नहीं रही, पर सूने घर की भाँय-भाँय उन्हें काटने को दौड़ती थी। गनपत द्वारा लाए गए प्यारे पहाड़ी तोते मिट्ठू पर ताई की सारी ममता बरस पड़ी। वे अब नियमपूर्वक मिट्ठू के लिए भोजन जुटातीं और आस-पड़ोस की हर हलचल पर उनकी नजर रहने लगी।
ताई-मिट्ठू का प्रगाढ़ संबंध
कुशाग्र बुद्धि मिट्ठू ताई के पढ़ाए पाठ को न केवल दोहराता, बल्कि सटीक उत्तर भी देता। सुबह पौ फटते ही मिट्ठू 'हर हर गंगे! सीताराम बोल!' कहकर ताई को जगाता, और ताई लाड़ से आशीष देतीं। थककर ताई जब पूछतीं 'मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?' तो मिट्ठू भरोसा दिलाता 'कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!!' और ताई उसे अपने वैभवशाली अतीत (जमींदारी) की गाथाएँ सुनातीं। यद्यपि यह संबंध सदैव प्रेमपूर्ण नहीं रहता — कभी-कभी खीझकर ताई और मिट्ठू एक-दूसरे को 'मर जा! मर जा!!' भी कह बैठते, पर शीघ्र ही मान-मनौवल के बाद प्रेम पुनः लौट आता। ताई को मिट्ठू का घड़ी-भर का वियोग भी सहन नहीं होता था।
कुंभ-स्नान और मिट्ठू की जिम्मेदारी
जीवन में बहुत ऊँच-नीच देख चुकी ताई को अब परलोक की चिंता सताने लगी। गाँव के कई लोग प्रयागराज कुंभ-स्नान जा रहे थे, और ताई भी जाना चाहती थीं, पर मिट्ठू की सुरक्षा की चिंता उन्हें रोक रही थी। अंततः जगन मास्टर की घरवाली (मास्टराइन) ने ताई की वापसी तक मिट्ठू को अपने पास रखने की जिम्मेदारी ली। विदा के समय ताई की आँसुओं की धार थमती न थी, और मिट्ठू भी 'हर हर गंगे', 'राम राम सीताराम' कहकर उन्हें भरोसा देता रहा।
जगन मास्टर और मिट्ठू का उड़ जाना
जगन मास्टर स्वतंत्र विचारों के, नियम-सिद्धांतवादी आदमी थे, जो दूसरों की स्वतंत्रता में बाधा डालना पसंद नहीं करते थे। पिंजरे में बंद मिट्ठू को देखकर उन्हें बेचैनी होती और वे स्वयं को दोषी अनुभव करते। जब यह पीड़ा असह्य हो गई, तो उन्होंने एक दिन कमरा बंद कर पिंजरे का दरवाजा खोल दिया, ताकि मिट्ठू कुछ देर खुली हवा में रह सके। शुरू में पिंजरे का आदी मिट्ठू बाहर नहीं आया, पर अनाज के प्रलोभन से बाहर आ गया। यह क्रम कुछ दिन चला। एक दिन मिट्ठू की नजर खुले रोशनदान पर पड़ी, वह वहाँ जा पहुँचा और तिरछी नजर से बाहर की दुनिया देखकर सदा के लिए उड़ गया। जगन मास्टर बदहवास होकर बाग में उसे ढूँढ़ते रहे, पर मिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर अपने पंख तौलने में मगन रहा।
गाँववालों की चिंता और एवजी तोता
ताई की वापसी का दिन निकट आ रहा था, और मिट्ठू के गुम होने की खबर से पूरे गाँव में गहरी आशंका छा गई। ताई के तेज स्वभाव और मिट्ठू के प्रति उनके गहरे लगाव को सब जानते थे। बहुत सोच-विचार के बाद गनपत के सुझाव पर मिट्ठू जैसी सूरत-शक्ल का एक दूसरा तोता लाया गया, ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके। जगन मास्टर उसे पढ़ाने लगे, यह सोचकर कि ताई के आने तक वह भी कुछ अक्षर सीख ले — क्योंकि उन्होंने असली मिट्ठू को गीता के दो-चार श्लोक रटाने की योजना बनाई थी, ताकि कुंभ-स्नान से लौटी ताई अपने मिट्ठू के मुँह से गीता सुन सकें। यह योजना अब अधूरी रह गई थी, और चिंतित जगन मास्टर घंटों पिंजरे के सामने बैठकर स्वयं रटते रहते।
मार्मिक अंत
कुंभ-स्नान से लौटकर सभी तीर्थयात्री अपने-अपने घरों को चल दिए, पर ताई सीधे जगन मास्टर के दरवाजे पहुँचीं। उन्हें विश्वास था कि मिट्ठू उन्हें देखते ही 'राम राम सीताराम' की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा, परंतु वहाँ बैठे एवजी मिट्ठू ने कोई हरकत नहीं की, वह केवल इधर-उधर ताकता रहा। ताई अपने मिट्ठू को गुहार कर थक गईं, पर उनके सूनेपन का साथी न जाने किन अमराइयों में घूम रहा होगा — इसी अनिश्चित व मार्मिक क्षण पर कहानी समाप्त होती है।
निष्कर्ष
इस प्रकार 'संवादहीन' कहानी मनुष्य और पशु-पक्षी के गहरे भावनात्मक संबंध, वृद्धावस्था के अकेलेपन, ग्रामीण जीवन से पलायन, तथा आदर्श और यथार्थ के द्वंद्व को अत्यंत संवेदनशीलता से चित्रित करती है। कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' असली मिट्ठू के अभाव में पुनः लौट आई चुप्पी और अकेलेपन का सजीव प्रतीक बन जाता है।
पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
रचना से संवाद — मेरे उत्तर मेरे तर्क
1. कहानी में ताई और मिट्ठू का संबंध किस भाव को दर्शाता है?
उत्तर: (ख) ममता और स्नेह। तर्क — ताई ने अपने अकेलेपन में मिट्ठू को अपनी संतान समान स्नेह दिया, उसकी देखभाल में अपनी समस्त ममता उड़ेल दी।
2. जगन मास्टर द्वारा मिट्ठू को पिंजरे से बाहर निकालना किस भावना या मूल्य का संकेत देता है?
उत्तर: (घ) करुणा और नैतिकता। तर्क — जगन मास्टर स्वतंत्र विचारों के व्यक्ति थे, पिंजरे में बंद मिट्ठू को देखकर उन्हें पीड़ा होती थी, इसलिए करुणावश व नैतिक दायित्व समझकर उन्होंने उसे कुछ देर के लिए बाहर निकाला।
3. मिट्ठू का उड़ जाना किस विचार को प्रस्तुत करता है?
उत्तर: (ग) स्वतंत्रता की चाह। तर्क — हर प्राणी में स्वाभाविक रूप से स्वतंत्रता की चाह होती है, अवसर मिलते ही मिट्ठू ने उड़कर अपनी मूल प्रवृत्ति (स्वच्छंदता) को अपना लिया।
4. ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: (ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव। तर्क — बहू-बेटे शहर जाकर बस गए, ताई अकेली सूने घर में रह गईं, यही उनके दुख का मूल कारण था।
5. कहानी में मानव-समाज में व्याप्त किस विसंगति को उजागर किया गया है?
उत्तर: (ग) अकेलापन। तर्क — कहानी वृद्धावस्था में बच्चों के शहर पलायन कर जाने से उत्पन्न अकेलेपन की विसंगति को प्रमुखता से उजागर करती है।
मेरी समझ मेरे विचार
1. "भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?" ताई इस वाक्य में किस 'नैया' की बात कर रही हैं? वे यह बात क्यों कह रही हैं?
उत्तर: यहाँ 'नैया' जीवन-रूपी नाव का प्रतीक है। ताई अपने शेष जीवन को अकेले और कठिनाई से किस प्रकार व्यतीत करेंगी, इसकी चिंता में यह बात कह रही हैं क्योंकि परिवार के सभी सदस्य उन्हें छोड़कर शहर चले गए थे और वे बिल्कुल अकेली रह गई थीं।
2. "धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया" इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत किया गया है?
उत्तर: इस वाक्य में संकेत है कि ताई के बेटे-बहू शहर जाकर बस गए, खेती-बाड़ी और कारोबार संभालने वाला घर में कोई न बचा, जिस कारण घर की खेती, कारोबार और संपत्ति धीरे-धीरे दूसरों के हाथों में चली गई।
3. "ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी" क्यों?
उत्तर: क्योंकि परिवार से दूर, अकेली ताई को अपनी ममता व स्नेह उड़ेलने के लिए कोई अपना नहीं बचा था। गनपत द्वारा लाए गए प्यारे पहाड़ी तोते मिट्ठू ने उनके सूने जीवन में संतान जैसा स्थान ले लिया, इसलिए उनकी सारी ममता उस पर केंद्रित हो गई।
4. "अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं" इस वाक्य से ताई के व्यक्तित्व में आए परिवर्तनों के विषय में क्या पता चलता है?
उत्तर: इस वाक्य से पता चलता है कि मिट्ठू के आने के बाद ताई का जीवन फिर से सक्रिय, उद्देश्यपूर्ण और ध्यान-केंद्रित हो गया था। मिट्ठू की देखभाल व भोजन जुटाने के लिए वे अब आस-पड़ोस की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखने लगीं — यह उनके भीतर जागी नई जीवंतता और जिम्मेदारी की भावना को दर्शाता है।
5. "जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे" जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था? कहानी में से उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: जगन मास्टर स्वतंत्र विचारों के, नियम-सिद्धांतवादी, संवेदनशील और नैतिक व्यक्ति थे। वे अपने कारण किसी को कष्ट न पहुँचे इसकी पूरी कोशिश करते थे और दूसरों की स्वतंत्रता में बाधा डालना पसंद नहीं करते थे। उदाहरण के लिए, पिंजरे में बंद मिट्ठू को देखकर उन्हें बेचैनी होती थी, और अंततः उन्होंने अपनी पत्नी की 'भूल' का प्रायश्चित करने के लिए मिट्ठू को कुछ देर के लिए पिंजरे से बाहर निकाला — जो उनकी करुणा व आदर्शवादिता को दर्शाता है।
6. कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है — ताई, जगन मास्टर, मिट्ठू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: शीर्षक 'संवादहीन' नए (एवजी) तोते के लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है, क्योंकि वह ताई से कोई संवाद स्थापित नहीं कर पाता — न वह 'राम-राम सीताराम' कहता है, न ताई की पुकार का उत्तर देता है, वह केवल इधर-उधर ताकता रहता है। यह शीर्षक ताई के जीवन में पुनः लौट आए सन्नाटे और असली मिट्ठू के अभाव में उपजी अकेलेपन-भरी चुप्पी को भी दर्शाता है।
7. "अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे" ताई के बड़े से घर को सूना खंडहर क्यों कहा गया होगा?
उत्तर: क्योंकि कभी वैभवशाली रहा वह घर — जहाँ पुत्र-परिवार, बहू-बेटियाँ, नौकर-चाकर, गाय-ढोर सब कुछ था — अब बच्चों के शहर पलायन कर जाने से बिल्कुल खाली और वीरान हो गया था। रौनक और चहल-पहल से भरा घर अब सन्नाटे और उजाड़पन के कारण खंडहर जैसा प्रतीत होने लगा था।
मेरे प्रश्न
नीचे कुछ उत्तर और उनके दो-दो प्रश्न दिए गए हैं। इनमें से कौन-सा प्रश्न उस उत्तर के लिए उपयुक्त है, यह कारण सहित बताया गया है —
1. उत्तर: ताई के अकेलेपन को मिट्ठू ने सहारा दिया।
प्रश्न क: ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?
प्रश्न ख: ताई को मिट्ठू किसने भेंट में दिया था?
सही प्रश्न व कारण: प्रश्न क सही है, क्योंकि उत्तर में "किसने सहारा दिया" का उल्लेख है, न कि "किसने भेंट दिया"।
2. उत्तर: ताई के लौटने से पहले मिट्ठू उड़ गया था।
प्रश्न क: ताई के लौटने के बाद मिट्ठू कहाँ चला गया था?
प्रश्न ख: ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?
सही प्रश्न व कारण: प्रश्न ख सही है, क्योंकि उत्तर "लौटने से पहले" की घटना बता रहा है, जबकि प्रश्न क "लौटने के बाद" पूछ रहा है, जो असंगत है।
3. उत्तर: गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा।
प्रश्न क: गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?
प्रश्न ख: गाँववाले मिट्ठू के उड़ने से खुश क्यों थे?
सही प्रश्न व कारण: प्रश्न क सही है, क्योंकि उत्तर ताई की वापसी को लेकर गाँववालों की चिंता के कारण को स्पष्ट कर रहा है।
4. उत्तर: कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' जीवन के मौन का प्रतीक है।
प्रश्न क: कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' क्यों उपयुक्त नहीं है?
प्रश्न ख: शीर्षक 'संवादहीन' का क्या भावार्थ है?
सही प्रश्न व कारण: प्रश्न ख सही है, क्योंकि उत्तर शीर्षक के भावार्थ/अर्थ को स्पष्ट कर रहा है, न कि उसकी अनुपयुक्तता को।
मेरे अनुभव मेरे विचार
1. "कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए भी न्यौते-बुलावे में जातीं, तो दस बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं..." ताई की तरह जब आप अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी वस्तु या व्यक्ति की चिंता आपको भीतर से कैसे परेशान करती है?
उत्तर: यह एक व्यक्तिगत अनुभव आधारित प्रश्न है। विद्यार्थी अपने अनुभव के आधार पर लिख सकते हैं — जैसे घर से बाहर जाने पर बार-बार दरवाजा बंद है या नहीं, पालतू जानवर को खाना मिला या नहीं, जैसी चिंता मन को बेचैन करती है।
2. "आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है।" क्या आप मानते हैं कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं? किसी अनुभव का वर्णन करते हुए लिखिए।
उत्तर: हाँ, पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं। वे प्रेम, भय, खुशी और दुख जैसी भावनाएँ व्यक्त करते हैं। उदाहरण के लिए घर में पले कुत्ते या तोते अपने मालिक को पहचानते हैं, उनके आने पर खुशी जताते हैं और दूर जाने पर उदास हो जाते हैं। (विद्यार्थी अपने निजी अनुभव के आधार पर लिखें।)
3. "गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्ठू की ही सूरत-शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके..." ताई को भ्रम में रखना उचित था या नहीं? तर्क सहित अपने विचार लिखिए।
उत्तर: एक दृष्टिकोण से यह उचित लगता है क्योंकि गाँववाले ताई को अचानक सदमे व दुख से बचाना चाहते थे। दूसरी ओर यह अनुचित भी कहा जा सकता है क्योंकि सत्य को छुपाना दीर्घकाल में समस्या को और अधिक कठिन बना सकता है, तथा ताई को सच्चाई जानने का अधिकार था। (विद्यार्थी अपने तर्क सहित कोई भी दृष्टिकोण चुन सकते हैं।)
4. "ताई सोच रही थीं कि उन्हें देखते ही मिट्ठू 'राम राम सीताराम' की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा।" क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने सोचा कुछ और, और हुआ कुछ और? उस अनुभव को लिखिए।
उत्तर: यह व्यक्तिगत अनुभव आधारित प्रश्न है। विद्यार्थी अपनी वास्तविक घटना (जैसे परीक्षा-परिणाम, किसी से मिलने की अपेक्षा आदि) का वर्णन कर सकते हैं, जहाँ अपेक्षा और वास्तविकता में अंतर आया हो।
5. "मिट्ठू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की।" क्या प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं?
उत्तर: हाँ, लंबे समय तक बंधन में रहने पर प्राणी परिस्थितियों के अनुकूल स्वयं को ढाल लेते हैं, यद्यपि उनकी मूल प्रवृत्ति (स्वतंत्रता की चाह) समाप्त नहीं होती और अवसर मिलते ही वह प्रकट हो जाती है, जैसा मिट्ठू के रोशनदान से उड़ जाने की घटना में देखा गया।
विधा से संवाद — कहानी का सौंदर्य
| विशेष बिंदु | उदाहरण |
| चित्रात्मकता (दृश्य बिंब) | गहरी साँस लेकर ताई कहतीं, 'भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?' और बंद पिंजड़े में अपने पंखों को फड़फड़ाता मिट्ठू उत्तर देता। |
| संवादात्मकता | "मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?" — "कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!!" |
| पुनरुक्ति | "जीते रहो! जीते रहो!!" तथा "खुश रहो! खुश रहो!!" |
| अतिशयोक्ति | "आदर्शवादी जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते उड़ गए।" |
| लोकधर्मी भाषा | "मर जा! मर जा!!" तथा "जगन मास्टर की घरवाली ने उनकी चिंता दूर कर दी।" |
| प्रश्नोत्तर शैली | "ताई! मिट्ठू अब कैसे कटेगी?" — "कटेगी!! कटेगी!!!" |
कहानी का अंत — 'संवादहीन' कहानी के अंत को किस श्रेणी में रखा जा सकता है?
उत्तर: यह कहानी 'मुक्त अंत' (Open Ending) की श्रेणी में रखी जा सकती है, क्योंकि यह अनिश्चित छोड़ दिया जाता है कि असली मिट्ठू वापस आएगा या नहीं। इसे 'दुखांत' की श्रेणी में भी रखा जा सकता है, क्योंकि ताई अंत में अपने सच्चे साथी मिट्ठू को न पाकर पुनः अकेलेपन का अनुभव करती हैं।
विषयों से संवाद
1. कहानी में रेखांकित पात्र (जगन मास्टर की पत्नी) का नाम नहीं दिया गया — कहीं 'मास्टराइन', तो कहीं 'जगन मास्टर की घरवाली' कहा गया है। ऐसा क्यों किया गया होगा?
उत्तर: यह उस समय की ग्रामीण सामाजिक परंपरा को दर्शाता है, जहाँ विवाहित स्त्रियों को प्रायः उनके पति के नाम या पद से जोड़कर संबोधित किया जाता था, स्वतंत्र पहचान के रूप में उनका नाम कम लिया जाता था।
2. 'कुंभ-स्नान' एक सुप्रसिद्ध आयोजन है — इसका आयोजन क्यों किया जाता है? पिछली व अगली बार यह कब-कहाँ हुआ/होगा?
उत्तर: कुंभ मेला हिंदू धर्म का एक पवित्र स्नान-पर्व है, जो ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति के अनुसार प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में बारी-बारी से आयोजित होता है। (विद्यार्थी नवीनतम तिथियाँ स्वयं खोजकर भरें।)
3. मान लीजिए ताई आपके मोहल्ले में रहती हैं। वे कुंभ-स्नान के लिए कैसे गई होंगी? उनकी यात्रा का वर्णन लिखिए।
उत्तर: यह रचनात्मक प्रश्न है — विद्यार्थी यात्रा, टिकट, साधन, संगी-साथी, खान-पान, ठहरना आदि के आधार पर स्वयं वर्णन लिखें।
4. आपके गाँव या नगर में कौन-सा मेला, उत्सव या पर्व मनाया जाता है? वर्णन कीजिए।
उत्तर: व्यक्तिगत/रचनात्मक प्रश्न — विद्यार्थी पाँच ज्ञानेंद्रियों के आधार पर स्वयं वर्णन लिखें।
सृजन
1. "बहू-बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहरों के होकर रह गए।" उन्होंने गाँव क्यों छोड़ा होगा?
उत्तर: यह रचनात्मक प्रश्न है — विद्यार्थी कल्पना के आधार पर बेहतर शिक्षा-रोजगार की तलाश, आधुनिक सुविधाओं का आकर्षण, अपराधबोध आदि पर लिखें।
2. कल्पना कीजिए कि एक दिन असली मिट्ठू वापस आ गया। आगे की कहानी लिखिए। (संकेत — "एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके...")
उत्तर: रचनात्मक कहानी-लेखन गतिविधि — विद्यार्थी संकेत पंक्ति से आगे बढ़ाकर अपनी कल्पना से कहानी पूरी करें।
3. आज घर जाकर अपने किसी बड़े-बुजुर्ग से बात कीजिए — "आप जब मेरी आयु के थे, तब समय कैसे बिताया करते थे?" उनके अनुभव लिखिए।
उत्तर: व्यक्तिगत गतिविधि — विद्यार्थी घर के बुजुर्गों से बातचीत कर अनुभव अपनी पुस्तिका में लिखें।
4. मान लीजिए जगन मास्टर ने मिट्ठू की खोज के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित किया है। अपनी कल्पना से वह विज्ञापन बनाइए।
उत्तर: "सूचना/तलाश — एक हरे रंग का पहाड़ी तोता (नाम मिट्ठू) घर से उड़कर लापता हो गया है। यह 'राम राम सीताराम', 'हर हर गंगे' बोलना जानता है। सूचना देने वाले को उचित पुरस्कार दिया जाएगा।"
भाषा से संवाद — व्याकरण की बात
मुहावरा — 'अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना'
उत्तर: अर्थ — अपनी प्रशंसा स्वयं करना। अन्य पशु-पक्षी संबंधी मुहावरे — ऊँट के मुँह में जीरा, बिल्ली के भाग्य से छींका टूटना, कुत्ते की दुम टेढ़ी होना, शेर का जिगर होना।
ध्वन्यात्मकता शब्द — 'फड़फड़ाहट' जैसे अन्य शब्द
उत्तर: सरसराहट (पत्तों की), खड़खड़ाहट (बर्तन/दरवाजे की), गुड़गुड़ाहट, चरमराहट।
| शब्द-युग्म | अर्थ व वाक्य-प्रयोग |
| वक्त-बेवक्त | हर समय। वाक्य: वक्त-बेवक्त मुसीबत में काम आने वाला ही सच्चा मित्र होता है। |
| नियम-सिद्धांत | आचार-संहिता। वाक्य: जगन मास्टर अपने नियम-सिद्धांतों के पक्के आदमी थे। |
| शादी-ब्याह | विवाह से जुड़े कार्यक्रम। वाक्य: गाँव में शादी-ब्याह पर पूरा परिवार इकट्ठा होता है। |
| तीज-त्योहार | विभिन्न पर्व-उत्सव। वाक्य: तीज-त्योहार पर घर में रौनक बढ़ जाती है। |
| वाक्य-भेद | पाठ से उदाहरण |
| विधानवाचक | जगन मास्टर ने पिंजरे का दरवाजा खोल दिया। |
| निषेधवाचक | मिट्ठू ने कोई हरकत नहीं की। |
| प्रश्नवाचक | मिट्ठू! अब कैसे कटेगी? |
| विस्मयादिबोधक | वो गए! वो गए!! |
| आज्ञावाचक | राम-राम कहो, सीताराम कहो। |
| इच्छावाचक | जीते रहो बेटा, जुग-जुग जियो! |
| संदेहवाचक | ताई के सूनेपन का साथी न जाने किन अमराइयों में घूम रहा होगा। |
| संकेतवाचक | जब खेती-बाड़ी नहीं, कारोबार नहीं, तो नौकर-चाकर किस दम पर टिकते! |
मेरी पहेली
1. तोता
मैं हरे रंग का होता हूँ, इंसानों की बोली बोल सकता हूँ, पेड़ों पर रहना पसंद करता हूँ — बताओ मैं कौन हूँ? (उत्तर: तोता)
2. कुंभ
मैं बारह वर्षों में एक बार लगने वाला विशाल धार्मिक मेला हूँ — बताओ मैं कौन हूँ? (उत्तर: कुंभ)
3. पिंजरा
मैं लोहे या बाँस की सलाखों से बना होता हूँ, पक्षियों को मुझमें बंद रखा जाता है — बताओ मैं क्या हूँ? (उत्तर: पिंजरा)
25 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (बहुविकल्पीय) उत्तर सहित
(ये प्रश्न पाठ्यपुस्तक के अभ्यास खंड से अलग हैं।)
1. 'संवादहीन' कहानी के लेखक कौन हैं?
(क) प्रेमचंद (ख) शेखर जोशी (ग) महादेवी वर्मा (घ) फणीश्वरनाथ रेणु
उत्तर: (ख) शेखर जोशी
2. शेखर जोशी का जन्म किस वर्ष हुआ?
(क) 1922 (ख) 1932 (ग) 1942 (घ) 1952
उत्तर: (ख) सन् 1932
3. शेखर जोशी का जन्म-स्थान कौन-सा है?
(क) अल्मोड़ा, उत्तराखंड (ख) रायपुर (ग) इंदौर (घ) पटना
उत्तर: (क) अल्मोड़ा, उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश)
4. शेखर जोशी का पहला कहानी-संग्रह कौन-सा है और कब प्रकाशित हुआ?
(क) कोसी का घटवार, सन् 1958 (ख) साथ के लोग, सन् 1960 (ग) दाज्यू, सन् 1965 (घ) मेरा ओलिया गाँव, सन् 1970
उत्तर: (क) कोसी का घटवार, सन् 1958
5. निम्नलिखित में से शेखर जोशी की रचना कौन-सी नहीं है?
(क) साथ के लोग (ख) दाज्यू (ग) गोदान (घ) डांगरी वाले
उत्तर: (ग) गोदान (यह प्रेमचंद की रचना है)
6. 'एक पेड़ की याद' शेखर जोशी की किस विधा की रचना है?
(क) कहानी-संग्रह (ख) शब्दचित्र-संग्रह (ग) कविता-संग्रह (घ) आत्मवृत्त
उत्तर: (ख) शब्दचित्र-संग्रह
7. शेखर जोशी का आत्मवृत्त (आत्मकथा) किस नाम से प्रकाशित है?
(क) मेरा ओलिया गाँव (ख) न रोको उन्हें शुभ्रा (ग) स्मृति में रहें वे (घ) कोसी का घटवार
उत्तर: (क) मेरा ओलिया गाँव
8. शेखर जोशी की समग्र कहानियों का संग्रह किस शीर्षक से प्रकाशित है?
(क) शेखर जोशी रचनावली (ख) शेखर जोशी कथा समग्र (ग) शेखर जोशी संचयन (घ) शेखर जोशी की कहानियाँ
उत्तर: (ख) शेखर जोशी कथा समग्र
9. शेखर जोशी ने अपनी कहानियों में मुख्यतः किनके जीवन-संघर्षों को उभारा है?
(क) राजा-महाराजा (ख) ग्रामीण-शहरी मध्यवर्गीय समाज और कारखाना-मजदूर (ग) फिल्मी जगत (घ) राजनेता
उत्तर: (ख) ग्रामीण-शहरी मध्यवर्गीय समाज और कारखाना-मजदूर
10. शेखर जोशी को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा कौन-सा सम्मान दिया गया?
(क) ज्ञानपीठ पुरस्कार (ख) महावीर प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार (ग) साहित्य अकादमी पुरस्कार (घ) पद्मश्री
उत्तर: (ख) महावीर प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार (तथा साहित्य भूषण सम्मान)
11. शेखर जोशी का निधन किस वर्ष हुआ?
(क) 2012 (ख) 2017 (ग) 2022 (घ) 2020
उत्तर: (ग) सन् 2022
12. 'संवादहीन' कहानी के दो मुख्य पात्र कौन हैं?
(क) ताई और मिट्ठू (ख) ताई और जगन मास्टर (ग) गनपत और मिट्ठू (घ) मास्टराइन और मिट्ठू
उत्तर: (क) ताई और मिट्ठू
13. ताई मिट्ठू को क्या मानती थीं?
(क) केवल एक पालतू पक्षी (ख) संवाद का माध्यम और ममता का केंद्र (ग) व्यापार की वस्तु (घ) बोझ
उत्तर: (ख) संवाद का माध्यम और ममता का केंद्र
14. मिट्ठू को ताई के पास कौन लाया था?
(क) जगन मास्टर (ख) गनपत (ग) मास्टराइन (घ) कोई तीर्थयात्री
उत्तर: (ख) गनपत
15. ताई के बहू-बेटे गाँव छोड़कर कहाँ जाकर बस गए?
(क) विदेश (ख) शहर (ग) दूसरे गाँव (घ) पहाड़ों में
उत्तर: (ख) शहर
16. मिट्ठू सुबह-सुबह ताई को किन शब्दों से जगाता था?
(क) उठो-उठो (ख) हर हर गंगे, सीताराम बोल (ग) चाय लाओ (घ) सुप्रभात
उत्तर: (ख) हर हर गंगे, सीताराम बोल
17. जब ताई थककर मिट्ठू से पूछतीं 'अब कैसे कटेगी?', तो मिट्ठू क्या उत्तर देता था?
(क) कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!! (ख) चुप रहता (ग) रोने लगता (घ) उड़ जाता
उत्तर: (क) कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!!
18. ताई मिट्ठू को किसकी गाथा सुनाया करती थीं?
(क) रामायण की (ख) अपने वैभवशाली अतीत (जमींदारी) की (ग) पंचतंत्र की (घ) महाभारत की
उत्तर: (ख) अपने वैभवशाली अतीत (जमींदारी) की
19. ताई कुंभ-स्नान के लिए कहाँ गई थीं?
(क) हरिद्वार (ख) उज्जैन (ग) प्रयागराज (घ) नासिक
उत्तर: (ग) प्रयागराज
20. ताई के प्रयाण के समय मिट्ठू की देखभाल की जिम्मेदारी किसने ली?
(क) गनपत ने (ख) जगन मास्टर की घरवाली (मास्टराइन) ने (ग) पड़ोसी ने (घ) किसी ने नहीं
उत्तर: (ख) जगन मास्टर की घरवाली (मास्टराइन) ने
21. जगन मास्टर ने मिट्ठू को पिंजरे से बाहर क्यों निकाला?
(क) उसे बेचने के लिए (ख) उसे कुछ देर स्वतंत्रता व खुली हवा देने के लिए (ग) पिंजरा साफ करने के लिए (घ) उसे खाना खिलाने के लिए
उत्तर: (ख) उसे कुछ देर स्वतंत्रता व खुली हवा देने के लिए
22. मिट्ठू अंततः किस रास्ते से उड़कर गायब हो गया?
(क) दरवाजे से (ख) खिड़की से (ग) रोशनदान से (घ) पिंजरे के दरवाजे से
उत्तर: (ग) रोशनदान से
23. मिट्ठू के उड़ जाने पर गाँववालों ने क्या सुझाव दिया?
(क) ताई को सच बता दिया जाए (ख) मिट्ठू जैसा दूसरा तोता लाकर ताई को भ्रम में रखा जाए (ग) पुलिस में शिकायत की जाए (घ) कुछ न किया जाए
उत्तर: (ख) मिट्ठू जैसा दूसरा तोता लाकर ताई को भ्रम में रखा जाए
24. मिट्ठू को कौन-सी बात सिखाने की योजना जगन मास्टर ने बनाई थी?
(क) अंग्रेजी बोलना (ख) गीता के दो-चार श्लोक (ग) गाना गाना (घ) नाचना
उत्तर: (ख) गीता के दो-चार श्लोक
25. कहानी के अंत में ताई को घर लौटने पर क्या अनुभव होता है?
(क) मिट्ठू पहले जैसा ही व्यवहार करता है (ख) नया (एवजी) तोता कोई प्रतिक्रिया नहीं देता और असली मिट्ठू का पता नहीं चलता (ग) मिट्ठू उन्हें देखकर उड़ जाता है (घ) ताई मिट्ठू को पहचान नहीं पातीं
उत्तर: (ख) नया (एवजी) तोता कोई प्रतिक्रिया नहीं देता और असली मिट्ठू का पता नहीं चलता
20 अति लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर सहित
(ये प्रश्न पाठ्यपुस्तक के अभ्यास खंड से अलग हैं।)
1. 'संवादहीन' कहानी के लेखक कौन हैं?
उत्तर: शेखर जोशी।
2. शेखर जोशी का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर: सन् 1932 में अल्मोड़ा, उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) में।
3. शेखर जोशी का निधन कब हुआ?
उत्तर: सन् 2022 में।
4. शेखर जोशी के पहले कहानी-संग्रह का नाम बताइए।
उत्तर: कोसी का घटवार (सन् 1958)।
5. शेखर जोशी के किन्हीं दो कहानी-संग्रहों के नाम लिखिए।
उत्तर: साथ के लोग और दाज्यू।
6. शेखर जोशी के आत्मवृत्त का नाम बताइए।
उत्तर: मेरा ओलिया गाँव।
7. शेखर जोशी की समस्त कहानियों का संग्रह किस नाम से प्रकाशित है?
उत्तर: शेखर जोशी कथा समग्र।
8. 'संवादहीन' कहानी के दो मुख्य पात्रों के नाम लिखिए।
उत्तर: ताई और मिट्ठू।
9. मिट्ठू को ताई के पास कौन लेकर आया था?
उत्तर: गनपत।
10. ताई के बहू-बेटे कहाँ जाकर बस गए थे?
उत्तर: शहर में।
11. मिट्ठू सुबह ताई को जगाने के लिए क्या बोलता था?
उत्तर: "हर हर गंगे! सीताराम बोल!"
12. जगन मास्टर के स्वभाव को कैसा बताया गया है?
उत्तर: स्वतंत्र विचारों वाला।
13. ताई किस तीर्थ-स्नान के लिए गई थीं?
उत्तर: प्रयागराज के कुंभ-स्नान के लिए।
14. ताई के जाने के बाद मिट्ठू की देखभाल किसने की?
उत्तर: जगन मास्टर की घरवाली (मास्टराइन) ने।
15. मिट्ठू किस रास्ते से उड़कर गायब हुआ?
उत्तर: रोशनदान से।
16. मिट्ठू के गायब होने पर गाँववालों ने क्या उपाय सोचा?
उत्तर: मिट्ठू जैसा दूसरा तोता लाकर रख दिया।
17. दूसरे (एवजी) तोते को कौन लाया था?
उत्तर: गनपत।
18. जगन मास्टर नए तोते को क्या सिखाना चाहते थे?
उत्तर: गीता के दो-चार श्लोक।
19. कहानी के अंत में नया तोता ताई को देखकर क्या करता है?
उत्तर: कोई प्रतिक्रिया नहीं करता, केवल इधर-उधर ताकता रहता है।
20. 'संवादहीन' कहानी किस विषय पर केंद्रित है?
उत्तर: वृद्धावस्था के अकेलेपन और मानवीय संवेदना पर।
20 लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर सहित
(ये प्रश्न पाठ्यपुस्तक के अभ्यास खंड से अलग हैं।)
1. ताई अपने जीवन में अकेली क्यों रह गईं?
उत्तर: ताई के बेटे-बहू गाँव का मोह छोड़कर शहर जाकर बस गए। बेटियाँ भी अपने-अपने घर-गृहस्थी में रम गईं। खेती-बाड़ी और कारोबार संभालने वाला कोई न रहा, इसलिए धीरे-धीरे सब पराए हाथों में चला गया और ताई अकेली रह गईं।
2. ताई का मिट्ठू के प्रति स्नेह किस प्रकार व्यक्त हुआ है?
उत्तर: ताई मिट्ठू की खातिर नियमपूर्वक दाल-भात बनातीं, उसके लिए बे-वक्त की तकाजों हेतु रोटी बचाकर रखतीं। उन्हें यह भी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में मिर्चें तैयार हैं और किस पेड़ में आखिरी अमरूद बचे हैं।
3. मिट्ठू की बुद्धिमत्ता का वर्णन कीजिए।
उत्तर: मिट्ठू कुशाग्र बुद्धि छात्र की तरह ताई के पढ़ाए पाठ को न केवल हू-ब-हू दोहराता, बल्कि एक-दो बार सुनकर याद भी रख लेता था और मौके-बेमौके ताई के सवालों का सटीक उत्तर दे देता था।
4. मिट्ठू के आने से ताई के सूने घर में क्या परिवर्तन आया?
उत्तर: मिट्ठू के आने से बड़े घर का सूनापन धीरे-धीरे रौनक में बदल गया। आस-पड़ोस की बहू-बेटियाँ बच्चों को गोदी में उठाकर मिट्ठू से उनका मन बहलाने के लिए आ जुटतीं और घर गुलजार हो जाता।
5. ताई और मिट्ठू के बीच सुबह की दिनचर्या का वर्णन कीजिए।
उत्तर: सुबह पौ फटते ही मिट्ठू ताई को भोर की झपकी से जगाने के लिए अपना पाठ शुरू कर देता — "हर हर गंगे! सीताराम बोल!" ताई अचकचाकर उठ बैठतीं, आशीष देतीं — "जीते रहो बेटा, जुग-जुग जियो" और मिट्ठू भी बदले में "खुश रहो! खुश रहो!!" कहता।
6. ताई मिट्ठू को अपनी कौन-सी गाथा सुनाया करती थीं?
उत्तर: ताई मिट्ठू को अपने वैभव और सत्ता के बीते दिनों की गाथा सुनातीं — जमींदार साहब का रोबीला चेहरा, हाथी-घोड़े, ब्याह-शादियाँ, तीज-त्योहार, दरबार की रौनक आदि से जुड़े प्रसंग।
7. ताई और मिट्ठू के संबंध में नोक-झोंक कैसे होती थी?
उत्तर: कभी-कभी थकी-माँदी ताई खीझकर कोसतीं "मेरी जान खाने को आ गया है, मर जा!" और मिट्ठू भी उतनी ही खीझ के साथ जवाब देता "मर जा! मर जा! मर जा!!" फिर मान-मनौवल के बाद दोनों का प्रेम पहले जैसा हो जाता।
8. ताई को मिट्ठू से अलग होने में क्या कठिनाई होती थी?
उत्तर: ताई को घड़ी-भर के लिए भी मिट्ठू का वियोग सहन नहीं होता था। कभी न्यौते-बुलावे में जातीं तो दस बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं और जल्दी लौट आने का दिलासा देकर बाहर निकलतीं।
9. ताई को कुंभ-स्नान जाने में किस पशोपेश का सामना करना पड़ा?
उत्तर: ताई को परलोक की चिंता कुंभ-स्नान की ओर खींच रही थी, पर मिट्ठू की चिंता भी उन्हें अपनी ओर खींच रही थी — मेले की भीड़-भाड़ में उसकी सुरक्षा को लेकर उन्हें भरोसा नहीं था, इसी उलझन में वे पशोपेश में पड़ गईं।
10. ताई ने मिट्ठू को किसकी देखरेख में छोड़ा और क्यों?
उत्तर: ताई ने मिट्ठू को जगन मास्टर की घरवाली (मास्टराइन) की देखरेख में छोड़ा, क्योंकि मेले की भीड़-भाड़ में मिट्ठू को साथ ले जाना असुरक्षित था।
11. जगन मास्टर का स्वभाव कैसा था? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: जगन मास्टर दूसरे मिजाज के, स्वतंत्र विचारों के आदमी थे। उन्होंने अपने कुछ नियम-सिद्धांत बना रखे थे और भरसक कोशिश करते थे कि उनके कारण किसी को कष्ट न पहुँचे।
12. जगन मास्टर को मिट्ठू को देखकर बेचैनी क्यों होती थी?
उत्तर: स्वतंत्र विचारों के जगन मास्टर पिंजरे में बंद मिट्ठू को देखकर बेचैन हो जाते थे, क्योंकि यह उनके स्वतंत्रता संबंधी सिद्धांतों के विपरीत था।
13. जगन मास्टर ने मिट्ठू को पिंजरे से बाहर निकालने का निर्णय क्यों लिया?
उत्तर: जब मिट्ठू की यातना असह्य हो गई, तो उन्होंने कमरा बंद कर पिंजरे का दरवाजा खोल दिया, ताकि वह कुछ देर खुली हवा में आ सके और वे प्रायश्चित कर सकें।
14. मिट्ठू शुरू में पिंजरे से बाहर आने में क्यों हिचकिचाया?
उत्तर: मिट्ठू पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा प्रकट नहीं की, इसलिए जगन मास्टर को अनाज बिखेरकर प्रलोभन देना पड़ा।
15. मिट्ठू अंततः किस प्रकार पिंजरे से उड़कर गायब हो गया?
उत्तर: एक दिन मिट्ठू की नजर खुले रोशनदान पर पड़ी, वह पिंजरे की छत से रोशनदान पर पहुँच गया और तिरछी नजर से बाहर की दुनिया देखकर उड़ गया।
16. मिट्ठू के उड़ जाने पर जगन मास्टर की क्या दशा हुई?
उत्तर: जगन मास्टर बदहवास होकर बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास 'मिट्ठू आ! मिट्ठू आ!!' पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे।
17. गाँववालों ने ताई की वापसी से पहले क्या समाधान निकाला?
उत्तर: बहुत सोच-विचार के बाद गनपत के सुझाव पर मिट्ठू जैसी सूरत-शक्ल का एक दूसरा तोता लाया गया, ताकि ताई को न पाकर होने वाली उनकी दशा से बचाया जा सके।
18. जगन मास्टर ने नए तोते को लेकर क्या योजना बनाई?
उत्तर: जगन मास्टर नए तोते को पढ़ाने लगे, ताकि ताई के आने तक वह भी कुछ अक्षर सीख ले, क्योंकि असली मिट्ठू को गीता के श्लोक रटाने की उनकी योजना अधूरी रह गई थी।
19. ताई के लौटने पर नए तोते ने कैसी प्रतिक्रिया दी?
उत्तर: वहाँ बैठे एवजी मिट्ठू ने ताई को देखकर कोई हरकत नहीं की, वह केवल इधर-उधर ताकता रहा।
20. कहानी का अंत किस प्रकार का है और यह पाठक पर क्या प्रभाव छोड़ता है?
उत्तर: कहानी का अंत खुला (मुक्त) और मार्मिक है — ताई गुहार कर थक जाती हैं, पर उनका साथी न जाने किन अमराइयों में घूम रहा होता है। यह पाठक के मन में करुणा व अकेलेपन की गहरी संवेदना छोड़ता है।
10 महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित
(ये प्रश्न पाठ्यपुस्तक के अभ्यास खंड से अलग हैं।)
1. 'संवादहीन' कहानी का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: 'संवादहीन' कहानी शेखर जोशी द्वारा रचित एक मार्मिक कहानी है, जिसकी नायिका ताई एक वृद्ध ग्रामीण स्त्री हैं। कभी वैभवशाली रहे जमींदार परिवार की ताई अब अपने बहू-बेटों के शहर पलायन कर जाने से अकेली रह गई हैं। गनपत द्वारा लाया गया पहाड़ी तोता मिट्ठू उनके जीवन का सहारा बन जाता है। जब ताई कुंभ-स्नान के लिए प्रयागराज जाती हैं, तो मिट्ठू की देखभाल जगन मास्टर की घरवाली को सौंपी जाती है। स्वतंत्र विचारों के जगन मास्टर मिट्ठू को कुछ देर के लिए बाहर निकालते हैं, जिस दौरान वह रोशनदान से उड़कर सदा के लिए गायब हो जाता है। गाँववाले ताई को सदमे से बचाने के लिए मिट्ठू जैसा दिखने वाला दूसरा तोता लाकर रख देते हैं, परंतु वह ताई से कोई संवाद स्थापित नहीं कर पाता — कहानी इसी मार्मिक क्षण पर समाप्त होती है।
2. 'संवादहीन' कहानी के आधार पर वृद्धावस्था के अकेलेपन की समस्या को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: कहानी वृद्धावस्था में उपजे अकेलेपन की मार्मिक अभिव्यक्ति है। ताई का वैभवशाली परिवार धीरे-धीरे बिखर गया — बहू-बेटे शहर जाकर बस गए, नौकर-चाकर भी पराए हाथों में चले गए। इस सूनेपन को उन्होंने मिट्ठू के प्रति अपनी समस्त ममता उड़ेलकर भरने का प्रयास किया। यह कहानी आज के समाज में वृद्धजनों की भावनात्मक आवश्यकताओं की उपेक्षा की ओर ध्यान आकर्षित करती है।
3. ताई के चरित्र की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: ताई एक भावुक, स्नेहिल परंतु अकेली वृद्ध स्त्री हैं। वे तेज स्वभाव की भी हैं, परंतु उनका हृदय ममता से परिपूर्ण है। वे धार्मिक प्रवृत्ति की भी हैं। मिट्ठू के प्रति उनका लगाव इतना गहरा है कि वे घड़ी-भर के वियोग को भी सहन नहीं कर पातीं।
4. जगन मास्टर का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर: जगन मास्टर स्वतंत्र विचारों, सिद्धांतवादी और संवेदनशील व्यक्ति हैं। पिंजरे में बंद मिट्ठू को देखकर उन्हें बेचैनी होती है, जो उनकी करुणा दर्शाती है। परंतु उनका यही आदर्शवाद अंततः मिट्ठू के उड़ जाने का कारण बनता है।
5. कहानी में मानव और पशु-पक्षी के संबंधों को किस प्रकार चित्रित किया गया है?
उत्तर: ताई और मिट्ठू का संबंध मानव और पशु-पक्षी के बीच गहरे भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है। मिट्ठू ताई के लिए संतान-तुल्य साथी है। साथ ही जगन मास्टर का चरित्र यह भी उजागर करता है कि पशु-पक्षियों को बंधन में रखना नैतिक रूप से कैसा प्रश्न खड़ा करता है।
6. 'संवादहीन' शीर्षक की सार्थकता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: जहाँ ताई और असली मिट्ठू के बीच सजीव संवाद था, वहीं एवजी तोता ताई से किसी प्रकार का संवाद स्थापित नहीं कर पाता। यह शीर्षक ताई के जीवन में लौट आए सन्नाटे का प्रतीक है, और व्यापक अर्थ में आधुनिक समाज में घटते संवाद की ओर भी संकेत करता है।
7. कहानी में प्रयुक्त प्रतीकों के माध्यम से लेखक क्या संदेश देना चाहते हैं?
उत्तर: मिट्ठू स्नेह व संवाद का प्रतीक है; पिंजरा बंधन का प्रतीक है; मिट्ठू का उड़ जाना स्वतंत्रता की अदम्य चाह का प्रतीक है। लेखक यह संदेश देते हैं कि स्वतंत्रता की चाह को पूर्णतः नहीं दबाया जा सकता, और सच्चे रिश्तों का स्थान कोई कृत्रिम विकल्प नहीं ले सकता।
8. 'संवादहीन' कहानी में ग्रामीण जीवन और आधुनिक पलायन की समस्या को कैसे उजागर किया गया है?
उत्तर: ताई का वैभवशाली घर बेटों-बहुओं के शहर पलायन कर जाने से सूना खंडहर बन गया है। यह पलायन ग्रामीण भारत की एक बड़ी सामाजिक समस्या को दर्शाता है, जिसके कारण गाँवों में वृद्धजन अकेले रह जाते हैं।
9. कहानी की भाषा-शैली की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: कहानी की भाषा-शैली सरल, सजीव और लोकधर्मी है। चित्रात्मकता, संवादात्मकता, पुनरुक्ति, अतिशयोक्ति, लोकोक्तियों व मुहावरों तथा प्रश्नोत्तर शैली का कुशल प्रयोग कहानी को अत्यंत जीवंत बनाता है।
10. 'संवादहीन' कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: यह कहानी सिखाती है कि वृद्धजनों के प्रति संवेदनशील रहना कितना आवश्यक है। यह यह भी सिखाती है कि किसी भी प्राणी की स्वतंत्रता की चाह को नकारा नहीं जा सकता, और सच्चे रिश्तों का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं हो सकता।
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