चिड़िया
आरसी प्रसाद सिंह की कविता — स्वतंत्रता, प्रेम और मिल-जुलकर रहने का संदेश देती एक चिड़िया की कहानी
1कवि से परिचय — आरसी प्रसाद सिंह
आरसी प्रसाद सिंह (1911–1996) प्रकृति और जीवन-संघर्षों को अपनी रचनाओं में प्रमुखता से चित्रित करने वाले कवि हैं। वे अपनी रचनाओं में प्रेम, करुणा, त्याग-बलिदान, मुक्ति और मिल-जुलकर एक सुंदर संसार रचने की कल्पना करते रहे हैं।
'चिड़िया' कविता में भी यही भाव देखने को मिलता है — उन्होंने चिड़िया के माध्यम से कितनी सुंदर बात कही है: "चिड़िया बैठी प्रेम-प्रीति की रीति हमें सिखलाती है! वह जग के बंदी मानव को मुक्ति-मंत्र बतलाती है!" कलापी और आरसी उनके चर्चित कविता संग्रह हैं।
2पाठ परिचय
प्रस्तुत कविता में कवि आरसी प्रसाद सिंह ने पीपल की डाली पर बैठी एक चिड़िया के माध्यम से मानव जीवन के लिए एक गहरा संदेश दिया है। कवि दिखाते हैं कि पक्षी आपस में मिल-जुलकर रहते हैं, प्रेमपूर्वक बँटवारा करते हैं, अपनी आवश्यकता भर ही संचय करते हैं और आकाश में निर्भय विचरण करते हैं। इसके विपरीत मनुष्य लोभ में पड़कर स्वयं को बंधनों (सोने की बेड़ियों) में जकड़ लेता है। चिड़िया मनुष्य को स्वतंत्रता, प्रेम, संतोष और सहयोग की सीख देते हुए मानवता से द्रोह-भावना त्यागने का आह्वान करती है।
3मूल पाठ
पीपल की ऊँची डाली पर
बैठी चिड़िया गाती है!
तुम्हें ज्ञात क्या अपनी
बोली में संदेश सुनाती है?
चिड़िया बैठी प्रेम-प्रीति की
रीति हमें सिखलाती है!
वह जग के बंदी मानव को
मुक्ति-मंत्र बतलाती है!
वन में जितने पंछी हैं, खंजन,
कपोत, चातक, कोकिल;
काक, हंस, शुक आदि वास
करते सब आपस में हिलमिल!
सब मिल-जुलकर रहते हैं वे,
सब मिल-जुलकर खाते हैं;
आसमान ही उनका घर है;
जहाँ चाहते, जाते हैं!
रहते जहाँ, वहाँ वे अपनी
दुनिया एक बसाते हैं;
दिन भर करते काम, रात में
पेड़ों पर सो जाते हैं!
उनके मन में लोभ नहीं है,
पाप नहीं, परवाह नहीं;
जग का सारा माल हड़पकर
जाने की भी चाह नहीं।
जो मिलता है अपने श्रम से,
उतना भर ले लेते हैं;
बच जाता जो, औरों के हित,
उसे छोड़ वे देते हैं!
सीमा-हीन गगन में उड़ते,
निर्भय विचरण करते हैं;
नहीं कमाई से औरों की
अपना घर वे भरते हैं!
वे कहते हैं, मानव! सीखो
तुम हमसे जीना जग में;
हम स्वच्छंद और क्यों तुमने
डाली है बेड़ी पग में?
तुम देखो हमको, फिर अपनी
सोने की कड़ियाँ तोड़ो;
ओ मानव! तुम मानवता से
द्रोह-भावना को छोड़ो!
पीपल की डाली पर चिड़िया
यही सुनाने आती है
बैठ घड़ी भर, हमें चकित कर,
गा-कर फिर उड़ जाती है।
— आरसी प्रसाद सिंह
4सरल व्याख्या (भावार्थ)
भाग 1 — चिड़िया का परिचय और उसका संदेश
पीपल की ऊँची डाली पर एक चिड़िया बैठी गा रही है। कवि पूछते हैं कि क्या तुम्हें पता है कि वह अपनी बोली में क्या संदेश सुना रही है? चिड़िया अपने गीत से हमें प्रेम-प्रीति की रीति सिखाती है, और संसार के बंधनों में जकड़े हुए मनुष्य को मुक्ति का मंत्र बताती है।
भाग 2 — पक्षियों की एकता और स्वतंत्रता
वन में खंजन, कबूतर, चातक, कोयल, कौआ, हंस, तोता जैसे जितने भी पक्षी हैं, वे सब आपस में मिल-जुलकर, प्रेमपूर्वक रहते हैं। वे सब साथ रहते हैं, साथ खाते हैं — पूरा आसमान ही उनका घर है, और वे जहाँ चाहें वहाँ स्वतंत्र होकर जा सकते हैं। जहाँ भी रहते हैं, वहीं अपनी छोटी-सी दुनिया बसा लेते हैं — दिन भर काम करते हैं और रात में पेड़ों पर सो जाते हैं।
भाग 3 — पक्षियों की निर्लोभता
पक्षियों के मन में न तो लोभ है, न पाप और न ही किसी बात की परवाह। संसार का सारा धन हड़पकर ले जाने की उनमें कोई चाह नहीं होती। वे अपने परिश्रम से जितना मिलता है, बस उतना ही लेते हैं — और जो बच जाता है, उसे दूसरों की भलाई के लिए छोड़ देते हैं।
भाग 4 — निर्भय विचरण और मनुष्य को सीख
पक्षी असीम आकाश में बिना किसी डर के स्वतंत्र होकर उड़ते-फिरते हैं। वे कभी दूसरों की कमाई छीनकर अपना घर नहीं भरते। इसीलिए वे मनुष्य से कहते हैं — "हमसे जीना सीखो! हम तो स्वच्छंद हैं, फिर तुमने अपने ही पैरों में बेड़ी (बंधन) क्यों डाल रखी है?"
भाग 5 — पक्षियों का अंतिम संदेश
पक्षी मनुष्य से कहते हैं कि हमें देखो और फिर अपनी सोने की जंजीरें (लोभ के बंधन) तोड़ दो। हे मानव! तुम मानवता के प्रति द्रोह की भावना छोड़ दो। कवि कहते हैं कि पीपल की डाली पर बैठी चिड़िया बस यही संदेश सुनाने आती है — घड़ी भर बैठकर, हमें चकित करके, वह अपना गीत गाकर फिर उड़ जाती है।
5शब्द-संपदा
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| पीपल | एक बड़ा छायादार वृक्ष |
| डाली | टहनी, शाखा |
| ज्ञात | जाना हुआ, मालूम |
| बोली | भाषा, बोलने का ढंग |
| प्रीति | प्रेम, स्नेह |
| रीति | तरीका, परंपरा |
| बंदी | कैदी, बंधन में बँधा हुआ |
| मुक्ति-मंत्र | आजादी दिलाने वाला सूत्र/उपाय |
| पंछी | पक्षी |
| खंजन | एक छोटी चिड़िया, जिसकी आँखें कविता में सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं |
| कपोत | कबूतर |
| चातक | पपीहा — मान्यता है कि यह केवल स्वाति नक्षत्र की बूँद ही पीता है |
| कोकिल | कोयल |
| काक | कौआ |
| शुक | तोता |
| हिलमिल | आपस में मिल-जुलकर, प्रेमपूर्वक |
| लोभ | लालच |
| परवाह | चिंता, फिक्र |
| हड़पकर | अनुचित रूप से छीनकर |
| श्रम | मेहनत, परिश्रम |
| हित | भलाई |
| सीमा-हीन | जिसकी कोई सीमा न हो, असीम |
| गगन | आकाश |
| निर्भय | बिना डर के |
| विचरण | घूमना-फिरना |
| स्वच्छंद | स्वतंत्र, अपनी इच्छा से चलने वाला |
| बेड़ी | पैरों में पहनाई जाने वाली जंजीर, बंधन |
| पग | पैर |
| कड़ियाँ | जंजीर की कड़ियाँ, बंधन |
| द्रोह-भावना | विरोध या शत्रुता की भावना |
| चकित | आश्चर्यचकित, हैरान |
6पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
मेरी समझ से (क)
- कविता के आधार पर बताइए कि इनमें से कौन-सा गुण पक्षियों के जीवन में नहीं पाया जाता है?
- प्रेम-प्रीति
- मिल-जुलकर रहना
- लोभ और पाप ✔
- निर्भय विचरण
- "सब मिल-जुलकर रहते हैं वे, सब मिल-जुलकर खाते हैं" कविता की यह पंक्ति किन भावों की ओर संकेत करती है?
- असमानता और विभाजन
- प्रतिस्पर्धा और संघर्ष
- समानता और एकता ✔
- स्वार्थ और ईर्ष्या
- "वे कहते हैं, मानव! सीखो, तुम हमसे जीना जग में" कविता में पक्षी मनुष्य से कैसा जीवन जीने के लिए कहते हैं?
- आकाश में उड़ते रहना
- बंधन में रहना
- स्वच्छंद रहना ✔
- संचय करना
मिलकर करें मिलान
| संदर्भ | मिलान — भाव |
|---|---|
| 1. चिड़िया की बोली | 5. प्रेम और स्वतंत्रता का संदेश |
| 2. सोने की कड़ियाँ | 1. बंधन और लालच |
| 3. निर्भय विचरण | 4. स्वतंत्रता और निर्बाध जीवन |
| 4. मुक्ति-मंत्र | 3. बंधन से मुक्ति |
| 5. दिनभर काम | 2. श्रम और संतोष |
पंक्तियों पर चर्चा
(क) "चिड़िया बैठी प्रेम-प्रीति की रीति हमें सिखलाती है!"
अर्थ — चिड़िया का जीवन हमें सिखाता है कि प्रेम और आपसी स्नेह से रहना ही सबसे अच्छी जीवन-रीति है। यह पंक्ति मानवता को आपसी प्रेम अपनाने की सीख देती है।
(ख) "उनके मन में लोभ नहीं है, पाप नहीं, परवाह नहीं"
अर्थ — पक्षियों का जीवन लालच, बुराई और अनावश्यक चिंता से मुक्त है। यह पंक्ति मनुष्य के लोभी स्वभाव के विपरीत, संतोषी जीवन का आदर्श प्रस्तुत करती है।
(ग) "सीमा-हीन गगन में उड़ते, निर्भय विचरण करते हैं"
अर्थ — पक्षी असीम आकाश में बिना किसी भय के स्वतंत्र होकर उड़ते हैं। यह पंक्ति स्वतंत्रता और निडरता के भाव को दर्शाती है, जो मनुष्य के आत्म-निर्मित बंधनों के ठीक विपरीत है।
सोच-विचार के लिए
(क) "सब मिल-जुलकर रहते हैं वे, सब मिल-जुलकर खाते हैं" पक्षियों के आपसी सहयोग की यह भावना हमारे लिए किस प्रकार उपयोगी है? स्पष्ट कीजिए।
यह भावना हमें सिखाती है कि यदि हम भी परिवार, समाज और देश में मिल-जुलकर रहें और संसाधनों को आपस में बाँटकर उपयोग करें, तो असमानता, ईर्ष्या और संघर्ष कम होंगे तथा सब मिलकर सुखी जीवन जी सकेंगे।
(ख) "जो मिलता है, अपने श्रम से उतना भर ले लेते हैं" पक्षी अपनी आवश्यकता भर ही संचय करते हैं। मनुष्य का स्वभाव इससे भिन्न कैसे है?
मनुष्य प्रायः आवश्यकता से कहीं अधिक धन और वस्तुएँ इकट्ठा करने का प्रयास करता है, भले ही वह दूसरों का हिस्सा छीनकर हो। जबकि पक्षी संतोषी होते हैं — वे अपनी जरूरत भर ही लेते हैं और शेष दूसरों के लिए छोड़ देते हैं।
(ग) "हम स्वच्छंद और क्यों तुमने, डाली है बेड़ी पग में?" पक्षी को स्वच्छंद और मनुष्य को बेड़ियों में क्यों बताया गया है?
पक्षी प्रकृति में स्वतंत्र होकर जीते हैं, न किसी का बंधन मानते हैं न किसी की गुलामी करते हैं। मनुष्य ने स्वयं लोभ, स्वार्थ और सामाजिक बुराइयों की 'सोने की बेड़ियाँ' गढ़ ली हैं, जिनमें वह स्वयं बंधा हुआ है — इसलिए कवि इसे आत्म-निर्मित बंधन कहते हैं।
अनुमान और कल्पना से
1. चिड़िया मनुष्य को स्वतंत्रता का संदेश देती है, आपके अनुसार मनुष्य के पास किन कार्यों को करने की स्वतंत्रता है और किन कार्यों को करने की स्वतंत्रता नहीं है?
मनुष्य को अपनी राय रखने, पढ़ाई-लिखाई करने, अपना पेशा चुनने और अपने विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता है। परंतु दूसरों को हानि पहुँचाने, कानून तोड़ने, या समाज-विरोधी कार्य करने की स्वतंत्रता उसे नहीं है — क्योंकि इससे दूसरों की स्वतंत्रता प्रभावित होती है।
2. चिड़िया और मनुष्य का जीवन एक-दूसरे से कैसे भिन्न है?
चिड़िया का जीवन सरल, संतोषी, निर्लोभी और बंधनरहित है — वह अपनी जरूरत भर ही लेती है और स्वतंत्र विचरण करती है। मनुष्य का जीवन जटिल है — वह संचय, प्रतिस्पर्धा और सामाजिक बंधनों से घिरा रहता है।
3. चिड़िया कहीं भी अपना घर बना सकती है, यदि आपके पास चिड़िया जैसी सुविधा हो तो आप अपना घर कहाँ बनाना चाहेंगे और क्यों?
(यह विद्यार्थी की कल्पनाशीलता पर आधारित व्यक्तिगत उत्तर है।) उदाहरण — किसी पहाड़ी या नदी किनारे हरे-भरे स्थान पर, क्योंकि वहाँ शांति और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद मिलेगा।
4. यदि आप चिड़िया की भाषा समझ सकते तो आप चिड़िया से क्या बातें करते?
(यह भी एक कल्पनाशील व्यक्तिगत उत्तर है।) उदाहरण — मैं चिड़िया से पूछता कि वह बिना थके इतनी दूर कैसे उड़ती है, और उससे यह भी जानना चाहता कि इंसानों को खुश और स्वतंत्र रहने के लिए और क्या करना चाहिए।
कविता की रचना
दी गई पंक्तियों — "सब मिल-जुलकर रहते हैं वे / सब मिल-जुलकर खाते हैं" में रेखांकित शब्द 'मिल-जुलकर' लिखने-बोलने में एक जैसे हैं। इसी शैली में कविता को आगे बढ़ाने का संकेत दिया गया है — "सब मिल-जुलकर हँसते हैं वे / सब मिल-जुलकर गाते हैं......"
सब मिल-जुलकर हँसते हैं वे,
सब मिल-जुलकर गाते हैं;
दुख-सुख आपस में बाँटें वे,
साथ सदा वे रहते हैं!
(यह एक उदाहरण-मात्र पूर्ति है — विद्यार्थी मूल कविता की लय और भाव के अनुरूप अपनी पंक्तियाँ स्वयं भी रच सकते हैं।)
भाषा की बात
"पीपल की ऊँची डाली पर बैठी चिड़िया गाती है! तुम्हें ज्ञात क्या अपनी बोली में संदेश सुनाती है?" — रेखांकित शब्द 'गाती' और 'सुनाती' से चिड़िया के गाने और सुनाने के कार्य का बोध होता है। जिन शब्दों से किसी कार्य के करने या होने का बोध होता है, उन्हें क्रिया कहते हैं। कविता में आए कुछ अन्य क्रिया-शब्द:
| क्रिया शब्द | नया वाक्य |
|---|---|
| सिखलाती है | चिड़िया अपने व्यवहार से हमें मिल-जुलकर रहना सिखलाती है। |
| बतलाती है | माँ मुझे रोज़ नई-नई बातें बतलाती है। |
| हड़पकर | लालची व्यक्ति दूसरों का हिस्सा हड़पकर भी संतुष्ट नहीं होता। |
| विचरण करते हैं | पक्षी खुले आकाश में स्वतंत्र होकर विचरण करते हैं। |
| तोड़ो | अपने मन के डर को तोड़ो और आत्मविश्वास से आगे बढ़ो। |
भावों की बात
(क) नीचे दिए गए दृश्यों को पढ़कर आपको कैसा महसूस होता है, यह बताते हुए शब्द-बैंक में से उपयुक्त भाव चुनिए (एक से अधिक भाव भी चुने जा सकते हैं):
| दृश्य | भाव (उदाहरण उत्तर) |
|---|---|
| 1. किसी पक्षी के चहचहाने की आवाज़ सुनाई देती है। | आनंद, सुख |
| 2. शाम को किसी पेड़ पर अनगिनत पक्षी एक साथ चहचहा रहे हैं। | आश्चर्य, आनंद |
| 3. कोई गाय अपने बच्चे को दूध पिला रही है। | ममता, प्रेम |
| 4. कोई व्यक्ति वाहन की खिड़की से कूड़ा बाहर फेंक देता है। | क्रोध, घृणा |
| 5. कोई बच्चा व्यर्थ कागज को कूड़ेदान में डाल देता है। | गर्व, आनंद |
| 6. कोई व्यक्ति बिना हेलमेट तेज बाइक चला रहा है। | डर, चिंता |
| 7. दो प्राणी किसी कारण से लड़ रहे हैं। | क्रोध, दुख |
| 8. बिना पैरों वाला व्यक्ति विशेष तिपहिया गाड़ी पर यात्रा कर रहा है। | करुणा, सहानुभूति |
| 9. नेत्रहीनों के लिए ब्रेल लिपि में सूचना-बोर्ड लगे हैं। | गर्व, सहानुभूति |
| 10. कोई व्यक्ति किसी को अपशब्द कह रहा है। | क्रोध, घृणा |
| 11. कोई व्यक्ति जरूरतमंद भूखे को भोजन दे रहा है। | दया, करुणा |
| 12. कोई लड़का स्वादिष्ट भोजन बनाकर बहन को खिला रहा है। | प्रेम, ममता |
(ख) आप इनमें से जो भाव कब-कब अनुभव करते हैं, उनके नाम लिखकर एक-एक वाक्य बनाइए — जैसे संकेत में दिया गया है: आत्मविश्वास — जब मैं अकेले पड़ोस की दुकान से कुछ खरीदकर ले आता हूँ। इसी तरह — उत्साह — जब मैं किसी नई खेल-प्रतियोगिता में भाग लेता हूँ। शांति — जब मैं शाम को बगीचे में अकेला बैठता हूँ।
आज की पहेली
कविता में आपने कई पक्षियों के नाम पढ़े। अब पक्षियों से जुड़ी कुछ पहेलियाँ दी गई हैं। पहेली पढ़कर सही पक्षी पहचानिए (पाठ्यपुस्तक की आधिकारिक उत्तर-कुंजी के अनुसार):
"दिखने में हूँ हरा-हरा, कहता हूँ सब खरा-खरा, खाता हूँ मैं मिर्ची लाल, कहते सब मुझे मिट्ठूलाल।"
उत्तर — तोता"रहता है घर के आस-पास, रंग है उसका काला खास, जो भी दे उसे खाता है वो, झुंड में आ जाता है वो।"
उत्तर — कौआ"सुंदर काले मेरे नैन, श्वेत श्याम है मेरे डैन, उड़ता रहता हूँ दिन-रैन, खेलूँ पानी में तो आए चैन।"
उत्तर — खंजन"कूह कूह मधुर आवाज सुनाती, घर अपना मैं कहाँ बनाती, काली हूँ पर काक नहीं, बतलाओ मैं क्या कहलाती।"
उत्तर — कोयल"संदेश पहुँचाना मेरा काम, देता हूँ शांति का पैगाम, करता हूँ मैं गुटर-गूँ, आओगे पास तो हो जाऊँगा छू।"
उत्तर — कबूतर"पीता हूँ बारिश की बूँदें, रखता हूँ फिर आँखें मूँदें, देखो चकोर है मेरी साथी, बिन उसके घूमूँ ऊँघे ऊँघे।"
उत्तर — चातक"तन मेरा सफेद, गर्दन मेरी लंबी, नाम बताओ सच्ची-सच्ची, कहलाता हूँ मैं जलपक्षी।"
उत्तर — हंसचित्र की बात
इन तीनों चित्रों को ध्यान से देखिए और बताइए — आप पक्षियों को इनमें से कहाँ देखना पसंद करेंगे और क्यों? (चित्र: 1) शहर की इमारतों के ऊपर उड़ते पक्षी, 2) पिंजरे में बंद एक अकेला पक्षी, 3) पेड़ पर घोंसले में स्वतंत्र पक्षी)
मैं पक्षियों को पेड़ पर घोंसले में देखना पसंद करूँगा, क्योंकि वहाँ वे अपने प्राकृतिक वातावरण में स्वतंत्र और सुरक्षित रहते हैं। पिंजरे में बंद पक्षी को देखकर दुख होता है, क्योंकि वहाँ उसकी स्वतंत्रता छिन जाती है, जबकि कविता में पक्षियों को सीमा-हीन गगन में निर्भय विचरण करने वाला बताया गया है।
निर्भय विचरण
"सीमा-हीन गगन में उड़ते, निर्भय विचरण करते हैं" — कविता की इन पंक्तियों को पढ़िए और दिए गए चित्रों (जंगल-सफारी में खुले घूमते वन्य-जीव, और चिड़ियाघर में पिंजरे में बंद शेर) को देखकर बताइए कि इनमें कौन निर्भय विचरण कर रहा है?
जंगल-सफारी वाले चित्र में वन्य-जीव खुले वातावरण में स्वतंत्र होकर घूम रहे हैं — यही निर्भय विचरण है। जबकि चिड़ियाघर के पिंजरे में बंद शेर स्वतंत्र नहीं है, इसलिए वह निर्भय विचरण नहीं कर पा रहा — ठीक वैसे ही जैसे कविता में मनुष्य को बंधनों में जकड़ा हुआ बताया गया है।
साथ-साथ
1. वन में सारे पक्षी एक साथ रह रहे हैं, हमारे परिवेश में भी पशु-पक्षी साथ रहते हैं। आप विचार कीजिए कि हमारे परिवेश में उनका रहना क्यों आवश्यक है।
पशु-पक्षी पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखते हैं — जैसे पक्षी कीट-पतंगों को खाकर फसलों की रक्षा करते हैं, बीज फैलाकर पेड़-पौधे उगाने में सहायक होते हैं, और पर्यावरण को स्वच्छ व संतुलित रखते हैं। इनके बिना प्रकृति का चक्र बिगड़ जाएगा।
2. हम अपने आस-पास रहने वाले पशु-पक्षियों की सहायता कैसे कर सकते हैं?
घर की छत या आँगन में पानी और दाने के बर्तन रखकर, पेड़ों की कटाई रोककर, घायल पक्षियों की देखभाल करके, और उन्हें परेशान या शिकार न करके हम उनकी सहायता कर सकते हैं।
शब्द एक अर्थ अनेक
"उनके मन में लोभ नहीं है" — इस पंक्ति में 'मन' का अर्थ 'चित्त' (बुद्धि) है, किंतु 'मन' शब्द के अन्य अर्थ भी होते हैं — जैसे "आज मेरा मन पहाड़ों पर जाने का कर रहा है" (मन = चित्त/इच्छा) और "व्यापारी ने किसान से 10 मन अनाज खरीदा" (मन = तौल की एक इकाई)। इसी तरह "मंगल ने मंगल से कहा कि मंगल को मंगल पर मंगल होगा" में 'मंगल' शब्द क्रमशः व्यक्ति का नाम, दिन, ग्रह और शुभ कार्य के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है। नीचे कुछ और ऐसे ही शब्दों के अलग-अलग अर्थों में प्रयोग दिए गए हैं:
| शब्द | अर्थ 1 (वाक्य) | अर्थ 2 (वाक्य) |
|---|---|---|
| कर | हाथ — बालक ने अपने कर से माँ को फूल दिया। | टैक्स — सरकार व्यापारियों से कर वसूलती है। |
| जल | पानी — नदी का जल स्वच्छ है। | जलना — दीपक रातभर जल रहा था। |
| अर्थ | मतलब — इस शब्द का अर्थ बताइए। | धन — अर्थ के बिना जीवन कठिन होता है। |
| फल | परिणाम — मेहनत का फल मीठा होता है। | फल (खाने योग्य) — बाज़ार में ताज़े फल मिलते हैं। |
| आम | साधारण — यह एक आम बात है। | फल — गर्मियों में आम बहुत पसंद किया जाता है। |
रचनात्मकता
(क) खुले आसमान में, पेड़ों की टहनियों, छतों और भवनों पर बैठे या उड़ते पक्षी बहुत मनमोहक लगते हैं। अपनी पसंद के ऐसे कुछ दृश्यों का कोलाज बनाकर कक्षा में प्रदर्शित कीजिए।
(यह एक कक्षा-गतिविधि है — विद्यार्थी पत्रिकाओं या समाचार-पत्रों से पक्षियों के चित्र काटकर एक सुंदर कोलाज तैयार कर सकते हैं।)
(ख) "स्वतंत्रता और प्रेम" का संदेश देने वाला एक पोस्टर बनाइए। इसमें इस कविता की कोई पंक्ति या संदेश भी सम्मिलित कीजिए।
(यह भी एक रचनात्मक गतिविधि है।) उदाहरण — पोस्टर में खुले आकाश में उड़ते पक्षियों का चित्र बनाकर उसके नीचे पंक्ति लिखी जा सकती है: "सीमा-हीन गगन में उड़ते, निर्भय विचरण करते हैं!"
हमारा पर्यावरण
मनुष्य बिना सोचे-समझे जंगलों की लगातार कटाई कर रहा है, जिससे पशु-पक्षियों का जीवन प्रभावित हो रहा है। मनुष्य द्वारा किए जा रहे ऐसे कार्यों की सूची बनाइए, जिनसे पर्यावरण व पशु-पक्षियों के लिए संकट उत्पन्न हो रहा है, और बताइए कि इससे बचने के लिए क्या-क्या उपाय किए जा सकते हैं।
संकट उत्पन्न करने वाले कार्य — जंगलों की कटाई, ऊँचे भवनों का निर्माण, कारखानों का धुआँ, नदी-तालाबों में प्रदूषण, प्लास्टिक कचरे का फैलाव। उपाय — अधिक से अधिक पेड़ लगाना, वनों की कटाई पर रोक, कारखानों में प्रदूषण-नियंत्रण उपकरण लगाना, प्लास्टिक का उपयोग घटाना और जल स्रोतों को स्वच्छ रखना।
परियोजना कार्य
(क) अपने विद्यालय, आस-पास और घरों में देखिए कि किन-किन कार्यों में प्लास्टिक के थैले का प्रयोग किया जाता है? उन कार्यों की सूची बनाइए और प्लास्टिक थैलों के विकल्पों पर विचार कीजिए।
प्रयोग के स्थान — सब्जी-फल खरीदना, किराने का सामान लाना, कचरा फेंकना, टिफिन पैक करना। विकल्प — कपड़े के थैले, जूट के बैग, कागज़ के लिफाफे, और पुनः उपयोग होने वाले डिब्बे उपयोग किए जा सकते हैं।
(ख) सभी विद्यार्थी 'पर्यावरण बचाओ' विषय पर एक नुक्कड़ नाटक तैयार करें और उसकी प्रस्तुति विद्यालय प्रांगण में करें।
(यह एक समूह-प्रस्तुति गतिविधि है — विद्यार्थी मिलकर संवाद लिखें और अभिनय द्वारा पर्यावरण-संरक्षण का संदेश दें।)
झरोखे से
कविता में पक्षियों के 'सीमा-हीन गगन में उड़ने' की बात कही गई है। पक्षियों की उड़ान का यह विस्तार अकसर उद्देश्यपूर्ण होता है — पक्षियों की प्रवास यात्राओं से जुड़ी यह रोचक जानकारी पढ़िए:
पक्षियों की प्रवास यात्राएँ
पक्षियों की प्रवास यात्राएँ सब से विचित्र और रहस्यपूर्ण होती हैं। हर साल शरद ऋतु और शुरू जाड़ों में अनेक पक्षी एशिया, यूरोप तथा अमरीका के उत्तरी भागों में स्थित अपने स्थानों से चलकर गरम देशों में आ जाते हैं। वसंत तथा गरमियों में वे फिर वापस उत्तर में पहुँच जाते हैं।
वे समय के इतने पक्के होते हैं कि इनके आने-जाने के एक-एक दिन की ठीक गणना की जा सकती है। हाँ, प्रतिकूल मौसम के कारण कभी देर हो जाए तो बात दूसरी है।
कुछ प्रजातियों के पक्षी थोड़ी ही दूरी पर जाते हैं। हर पक्षी थोड़ा बहुत तो इधर-उधर जाता-आता ही है। कभी रहन-सहन के कष्टों के कारण तो कभी खाना कम हो जाने के कारण इस प्रकार का आवागमन मुख्यतः उत्तर भारत में देखने को मिलता है, जहाँ मौसम भिन्न-भिन्न और तीव्रता लिए हुए होते हैं।
जो पक्षी ऊँचे पहाड़ों पर गरमियाँ बिताते हैं वे जाड़ों में निचली पहाड़ियों, तराई अथवा मैदानों में चले आते हैं। इस प्रकार का आवागमन भारत में बहुत अधिक पाया जाता है, जहाँ गंगा के क्षेत्र के बराबर में ही विशाल हिमालय है।
इन छोटे-छोटे वीर यात्रियों को अपनी समस्त लंबी-लंबी यात्राओं के बीच भारी कष्ट झेलने पड़ते हैं और बड़े-बड़े संकटों का सामना करना पड़ता है। कभी जंगलों, कभी मैदानों और कभी समुद्र के ऊपर से गुज़रना होता है। कभी भयंकर तूफ़ान आ जाता है और वे अपने मार्ग से भटक जाते हैं। बहुधा वे आँधियों के थपेड़ों से समुद्र की ओर पहुँच जाते हैं और फिर एकदम नीचे पठारों में समा जाते हैं। रात को नगर का तीव्र प्रकाश इन्हें भटका देता है।
कुछ पक्षी बीच में रुक-रुक कर यात्रा करते हैं ताकि थकान न हो। कुछ ऐसे पक्षी भी हैं जो खाने और आराम करने के लिए बिना रुके लगातार बहुत लंबी-लंबी यात्राएँ पूरी कर लेते हैं। कुछ पक्षी केवल दिन में उड़ते हैं तो कुछ दिन और रात दोनों समय। किंतु अधिकतर पक्षी सूर्यास्त के बाद अपनी यात्रा पर बढ़ते जाते हैं।
पक्षी प्रायः दल बनाकर उड़ते हैं। सारस और हंस जब आकाश में 'वी' (V) की आकृति में उड़ते जाते हैं तब तुरंत हमारा ध्यान उधर खिंचा चला जाता है। अबाबील, चकदिल, फुदकी, समुद्रतटीय पक्षी तथा जलपक्षी दलों में इकट्ठे हो जाते हैं। प्रत्येक दल में एक ही प्रकार के पक्षी होते हैं। हर दल में परों की तेज फड़फड़ाहट और चहचहाहट होती है। उसके बाद वे धरती से हवा में उठ जाते हैं और आकाश को चीरते हुए आगे ही आगे बढ़ते जाते हैं।
—पक्षी-जगत, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, दिल्ली
साझी समझ
आप इंटरनेट या किसी अन्य माध्यम की सहायता से अन्य प्रवासी पक्षियों के बारे में रोचक जानकारी एकत्रित कीजिए और प्रवासी पक्षियों पर एक लेख लिखिए।
खोजबीन के लिए
शिक्षक/अभिभावक की अनुमति से नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग करके आप जीव-जगत के बारे में और भी जान-समझ सकते हैं — "हमारा पर्यावरण" तथा "वह चिड़िया जो" शीर्षक के वीडियो देखे जा सकते हैं।
7पाठ का सार — माइंड मैप
8अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
आरसी प्रसाद सिंह कौन थे?
आरसी प्रसाद सिंह (1911–1996) प्रकृति और जीवन-संघर्षों को अपनी रचनाओं में चित्रित करने वाले हिंदी कवि थे। वे अपनी कविताओं में प्रेम, त्याग, मुक्ति और मिल-जुलकर रहने के भाव व्यक्त करते थे। 'कलापी' और 'आरसी' उनके प्रसिद्ध कविता-संग्रह हैं।
'चिड़िया' कविता का मुख्य संदेश क्या है?
यह कविता चिड़िया के माध्यम से मनुष्य को प्रेम, एकता, संतोष, निर्भयता और स्वतंत्रता का संदेश देती है, तथा लोभ और बंधनों को त्यागकर पक्षियों जैसा सरल, निश्छल जीवन जीने की प्रेरणा देती है।
कविता में किन-किन पक्षियों का नाम आया है?
कविता में खंजन, कपोत (कबूतर), चातक, कोकिल (कोयल), काक (कौआ), हंस और शुक (तोता) — इन सात पक्षियों के नाम आए हैं, जो सब आपस में मिल-जुलकर रहते हैं।
"सोने की कड़ियाँ" से कवि का क्या अभिप्राय है?
'सोने की कड़ियाँ' लोभ, स्वार्थ और भौतिक बंधनों का प्रतीक हैं, जिनमें मनुष्य स्वयं फँसा हुआ है। कवि चाहते हैं कि मनुष्य इन आत्म-निर्मित बंधनों को तोड़कर स्वतंत्र और निर्लोभी जीवन अपनाए।
पक्षी मनुष्य से क्या सीखने की सलाह देते हैं?
पक्षी मनुष्य को स्वच्छंद, निर्भय और संतोषी जीवन जीने की सलाह देते हैं — अपनी आवश्यकता भर लेने, दूसरों का हिस्सा न छीनने, और मानवता के प्रति द्रोह-भावना त्यागने का संदेश देते हैं।
चातक पक्षी के बारे में क्या मान्यता है?
पारंपरिक मान्यता है कि चातक पक्षी केवल स्वाति नक्षत्र में बरसने वाली वर्षा की बूँद ही पीता है और किसी अन्य जल को स्पर्श नहीं करता — यह उसकी विशिष्ट पहचान मानी जाती है।
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शीर्षक (Title): चिड़िया — पाठ 9, कक्षा 7 हिंदी मल्हार : सम्पूर्ण व्याख्या व प्रश्नोत्तर
मेटा विवरण (Meta description): कक्षा 7 हिंदी मल्हार पाठ 9 'चिड़िया' (आरसी प्रसाद सिंह) का सरल भावार्थ, शब्द-संपदा, कवि परिचय और पाठ्यपुस्तक के सभी प्रश्नों के उत्तर एक ही लेख में।
परमालिंक (Permalink): chidiya-class-7-hindi
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