चेतक की वीरता
कवि: श्यामनारायण पाण्डेय (1907–1991) · काव्यकृति 'हल्दीघाटी' का एक अंश
✒️ कवि से परिचय
📜 मूल पाठ
रण-बीच चौकड़ी भर-भरकर
चेतक बन गया निराला था।
राणा प्रताप के घोड़े से
पड़ गया हवा को पाला था।
गिरता न कभी चेतक-तन पर
राणा प्रताप का कोड़ा था।
वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर
या आसमान पर घोड़ा था।
जो तनिक हवा से बाग हिली
लेकर सवार उड़ जाता था।
राणा की पुतली फिरी नहीं
तब तक चेतक मुड़ जाता था।
कौशल दिखलाया चालों में
उड़ गया भयानक भालों में।
निर्भीक गया वह ढालों में
सरपट दौड़ा करवालों में।
है यहीं रहा, अब यहाँ नहीं
वह वहीं रहा है वहाँ नहीं।
थी जगह न कोई जहाँ नहीं
किस अरि-मस्तक पर कहाँ नहीं।
बढ़ते नद-सा वह लहर गया
वह गया गया फिर ठहर गया।
विकराल बज्र-मय बादल-सा
अरि की सेना पर घहर गया।
भाला गिर गया, गिरा निषंग,
हय-टापों से खन गया अंग।
वैरी-समाज रह गया दंग
घोड़े का ऐसा देख रंग।
— श्यामनारायण पाण्डेय (काव्यकृति 'हल्दीघाटी' से)
💡 सरल व्याख्या (भावार्थ)
भाग 1 — रण-बीच चौकड़ी...पाला था
भावार्थ — रणभूमि के बीच बार-बार तेज़ छलांगें भरता हुआ चेतक अद्वितीय (निराला) हो गया था। महाराणा प्रताप के इस घोड़े की गति के आगे तेज़ हवा भी हार गई थी अर्थात् वह हवा से भी तेज़ दौड़ता था।
भाग 2 — गिरता न कभी...घोड़ा था
भावार्थ — चेतक इतनी फुर्ती से दौड़ता था कि राणा प्रताप को उसे कभी कोड़ा मारने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती थी। वह कभी शत्रुओं के सिर के ऊपर से दौड़ता प्रतीत होता, तो कभी लगता मानो वह आसमान में उड़ रहा हो।
भाग 3 — जो तनिक हवा से...मुड़ जाता था
भावार्थ — लगाम में हल्की-सी हलचल होते ही चेतक सवार को लेकर उड़ चलता था। उसकी समझ इतनी तीव्र थी कि राणा प्रताप की आँख की पुतली पूरी तरह घूमे उससे पहले ही वह उनका इशारा समझकर मुड़ जाता था।
भाग 4 — कौशल दिखलाया...करवालों में
भावार्थ — चेतक ने अपनी चालों में अद्भुत कौशल दिखाया — कभी वह भयानक भालों के बीच से निकल गया, तो कभी निडर होकर ढालों के बीच घुस गया और तलवारों के बीच से सरपट दौड़ गया।
भाग 5 — है यहीं रहा...कहाँ नहीं
भावार्थ — चेतक की गति इतनी तेज़ थी कि वह एक क्षण जहाँ दिखता, अगले ही क्षण वहाँ से गायब हो जाता। युद्धभूमि में शायद ही कोई ऐसी जगह बची हो जहाँ वह न पहुँचा हो, और शायद ही कोई शत्रु-मस्तक बचा हो जिस पर वह न दौड़ा हो।
भाग 6 — बढ़ते नद-सा...घहर गया
भावार्थ — चेतक कभी उमड़ती हुई नदी की तरह आगे बढ़ता, कभी रुक जाता। फिर वह एक भयंकर बिजली भरे काले बादल की तरह गरजता हुआ शत्रु-सेना पर टूट पड़ा।
भाग 7 — भाला गिर गया...देख रंग
भावार्थ — लड़ाई में शत्रुओं के भाले और तरकश गिर पड़े, घोड़े की टापों से धरती काँप उठी। चेतक के इस अद्भुत रंग-ढंग (पराक्रम) को देखकर शत्रु-समाज दंग रह गया।
📖 शब्द-संपदा
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| चौकड़ी भरना | तेज़ छलाँगें भरते हुए दौड़ना |
| निराला | अनोखा, अद्वितीय |
| अरि-मस्तक | शत्रु का सिर |
| कोड़ा | चाबुक |
| बाग | लगाम |
| पुतली | आँख का वह काला भाग जो देखने में सहायक है |
| कौशल | निपुणता, हुनर |
| भाला/निषंग | युद्ध का एक हथियार / तरकश (बाणों का थैला) |
| ढाल | वार रोकने का कवच |
| करवाल | तलवार |
| हय-टाप | घोड़े के पाँव पड़ने से उठी आवाज़ |
| दंग | चकित, हैरान |
| विकराल | भयंकर, डरावना |
| बज्र-मय | वज्र (बिजली) से भरा हुआ, कठोर व भीषण |
| घहरना | गरजना, बादल का गूँजना |
| वैरी | शत्रु |
| निर्भीक | निडर |
| नद | बड़ी नदी |
📝 पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
मेरी समझ से — (क) सटीक उत्तर चुनिए
- चेतक शत्रुओं की सेना पर किस प्रकार टूट पड़ता था? ✔ चेतक बादल की तरह शत्रु की सेना पर वज्रपात बनकर टूट पड़ता था। चेतक शत्रु की सेना को चारों ओर से घेरकर उस पर टूट पड़ता था। चेतक हाथियों के दल के समान बादल के रूप में शत्रु की सेना पर टूट पड़ता था। चेतक नदी के उफान के समान शत्रु की सेना पर टूट पड़ता था।
- 'लेकर सवार उड़ जाता था।' इस पंक्ति में 'सवार' शब्द किसके लिए आया है? चेतक ✔ महाराणा प्रताप कवि शत्रु
(ख) तर्कपूर्ण चर्चा — इन्हीं उत्तरों को क्यों चुना?
पहले प्रश्न में कविता की पंक्ति "विकराल बज्र-मय बादल-सा अरि की सेना पर घहर गया" स्पष्ट रूप से चेतक की तुलना बादल से करती है, इसलिए पहला विकल्प सही है। दूसरे प्रश्न में 'सवार' शब्द चेतक पर बैठने वाले व्यक्ति के लिए प्रयुक्त हुआ है, और पूरी कविता में सवार के रूप में केवल महाराणा प्रताप का ही उल्लेख है, इसलिए यही सही उत्तर है।
पंक्तियों पर चर्चा
(क) "निर्भीक गया वह ढालों में, सरपट दौड़ा करवालों में।"
अर्थ — चेतक बिना किसी भय के शत्रुओं की ढालों के बीच घुस गया और तलवारों (करवालों) के बीच से भी तेज़ी से दौड़ गया। यह पंक्ति चेतक की निडरता और युद्ध-कौशल को दर्शाती है।
(ख) "भाला गिर गया, गिरा निषंग, हय-टापों से खन गया अंग।"
अर्थ — युद्ध की भीषणता में शत्रुओं के भाले और तरकश छूटकर गिर पड़े और चेतक के तेज़ पदाघात (टापों) से धरती काँप उठी। यह पंक्ति युद्ध की भयंकरता और चेतक के प्रचंड वेग को दर्शाती है।
मिलकर करें मिलान — सही मिलान
| पंक्ति | सही भावार्थ |
|---|---|
| 1. राणा प्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा को पाला था। | चेतक हवा से भी तेज़ दौड़ता था, मानो हवा और चेतक में होड़ लगी हो। |
| 2. वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर, या आसमान पर घोड़ा था। | शत्रुओं के सिर के ऊपर से होता हुआ ऐसे दौड़ता जैसे आसमान में दौड़ रहा हो। |
| 3. जो तनिक हवा से बाग हिली लेकर सवार उड़ जाता था। | लगाम के थोड़ा-सा हिलते ही चेतक सरपट हवा में उड़ने लगता था। |
| 4. राणा की पुतली फिरी नहीं, तब तक चेतक मुड़ जाता था। | वह राणा की पूरी निगाह मुड़ने से पहले ही उस ओर मुड़ जाता, अर्थात् भाव समझ जाता था। |
| 5. विकराल बज्र-मय बादल-सा अरि की सेना पर घहर गया। | शत्रु की सेना पर भयानक बज्रमय बादल बनकर टूट पड़ता और शत्रुओं का नाश करता। |
ध्यान दें — पाठ्यपुस्तक में यह मिलान गतिविधि जान-बूझकर उलट-क्रम में दी गई है (ऊपर दी गई तालिका सही मिलान दिखाती है)।
शीर्षक
यह कविता 'हल्दीघाटी' शीर्षक काव्यकृति का एक अंश है। यहाँ इसका शीर्षक 'चेतक की वीरता' दिया गया है। आप इसे क्या शीर्षक देना चाहेंगे और क्यों?
इस कविता को 'स्वामिभक्त चेतक' या 'रणभूमि का घोड़ा' जैसा शीर्षक भी दिया जा सकता है, क्योंकि कविता में चेतक की स्वामिभक्ति (राणा का भाव तुरंत समझना) और युद्धभूमि में उसकी अद्भुत फुर्ती दोनों का वर्णन है। फिर भी 'चेतक की वीरता' शीर्षक सबसे उपयुक्त है क्योंकि पूरी कविता का केंद्रीय भाव चेतक का साहस और पराक्रम ही है।
कविता की रचना — तुकांत शब्द
कविता में प्रयुक्त कुछ प्रमुख तुकांत (एक-दूसरे से मिलते-जुलते) शब्द-युग्म:
- निराला — पाला
- कोड़ा — घोड़ा
- जाता था (हर पंक्ति में दोहराया बिंब)
- चालों — भालों — ढालों — करवालों
- यहाँ नहीं — वहाँ नहीं — जहाँ नहीं — कहाँ नहीं
- लहर गया — ठहर गया — घहर गया
- निषंग — अंग — दंग — रंग
शब्द के भीतर शब्द
उदाहरण: 'आसमान' के भीतर छिपे शब्द — आस, समान, मान, सम, आन, नस।
| कविता का शब्द | भीतर छिपे शब्द |
|---|---|
| चौकड़ी | चौ, कड़ी |
| भयानक | भय, यान, नक |
| मस्तक | मस, तक, स्त |
| सवार | स, वार, सवा |
| बादल | बा, दल, आदल |
आपकी बात
(क) "जो तनिक हवा से बाग हिली लेकर सवार उड़ जाता था" — कविता को प्रभावशाली बनाने वाले ऐसे प्रयोग खोजिए।
कविता में ऐसे कई अतिशयोक्तिपूर्ण (बढ़ा-चढ़ाकर कहे गए) प्रयोग हैं जो उसे प्रभावशाली बनाते हैं — जैसे "पड़ गया हवा को पाला था" (हवा से भी तेज़), "राणा की पुतली फिरी नहीं तब तक चेतक मुड़ जाता था" (आँख के इशारे से पहले ही समझ जाना), और "वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर, या आसमान पर घोड़ा था" (मानो आसमान में उड़ रहा हो)। ऐसे बिंब पाठक की कल्पना को गति देकर चेतक की असाधारण फुर्ती को जीवंत बना देते हैं।
(ख) कहीं भी, किसी भी तरह का युद्ध नहीं होना चाहिए — इस पर आपस में बात कीजिए।
युद्ध चाहे कितना भी वीरतापूर्ण क्यों न हो, वह विनाश, पीड़ा और जन-धन की हानि ही लाता है। यद्यपि चेतक और महाराणा प्रताप की वीरता प्रेरणादायक है, फिर भी यह विचार सही है कि विवादों को बातचीत और समझदारी से सुलझाना युद्ध से कहीं बेहतर है, ताकि निर्दोष लोगों की जान और संसाधनों की हानि न हो।
समानार्थी शब्द — जो समानार्थी न हों उस पर घेरा बनाइए
| शब्द-समूह | असंगत शब्द (उत्तर) |
|---|---|
| हवा, अनल, पवन, बयार | अनल (इसका अर्थ 'आग' है, शेष तीनों 'हवा' के पर्याय हैं) |
| रण, तुरंग, युद्ध, समर | तुरंग (इसका अर्थ 'घोड़ा' है, शेष तीनों 'युद्ध' के पर्याय हैं) |
| आसमान, आकाश, गगन, नभचर | नभचर (इसका अर्थ 'आकाश में विचरण करने वाला प्राणी' है, शेष तीनों 'आसमान' के पर्याय हैं) |
| नद, नाद, सरिता, तटिनी | नाद (इसका अर्थ 'ध्वनि' है, शेष तीनों 'नदी' के पर्याय हैं) |
| करवाल, तलवार, असि, ढाल | ढाल (यह वार रोकने का कवच है, शेष तीनों 'तलवार' के पर्याय हैं) |
आज की पहेली — बूझो तो जानें
खोजबीन के लिए
1. महाराणा प्रताप कौन थे? जानकारी प्राप्त करके लिखिए।
महाराणा प्रताप (1540–1597) मेवाड़ (राजस्थान) के वीर राजपूत शासक थे, जिन्होंने मुग़ल सम्राट अकबर की अधीनता स्वीकार करने से इनकार कर दिया। सन् 1576 में हल्दीघाटी के युद्ध में उन्होंने मानसिंह के नेतृत्व वाली विशाल मुग़ल सेना का डटकर सामना किया। इसी युद्ध में उनका प्रिय घोड़ा चेतक घायल होकर भी उन्हें सुरक्षित स्थान तक ले गया और अंततः वीरगति को प्राप्त हुआ। महाराणा प्रताप आज भी स्वाभिमान, साहस और देशभक्ति के प्रतीक माने जाते हैं।
2. पशु-पक्षियों पर आधारित पाँच रचनाएँ खोजकर कक्षा की दीवार-पत्रिका पर लगाइए।
कुछ सुझाव — (1) 'तोता' पर आधारित बाल-कविताएँ, (2) पंचतंत्र की पशु-कथाएँ, (3) 'चींटी और कबूतर' जैसी नैतिक कहानियाँ, (4) रवींद्रनाथ ठाकुर की पक्षी-कविताएँ, (5) जिम कॉर्बेट के वन्यजीव संस्मरण। छात्र इन्हें पुस्तकालय या इंटरनेट से खोजकर चित्रों सहित दीवार-पत्रिका पर लगा सकते हैं।
🧠 पाठ का सार — माइंड मैप
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्र. 'चेतक की वीरता' कविता किस काव्यकृति से ली गई है?
उ. यह कविता श्यामनारायण पाण्डेय की काव्यकृति 'हल्दीघाटी' (1939) से ली गई है।
प्र. चेतक किसका घोड़ा था?
उ. चेतक मेवाड़ के वीर शासक महाराणा प्रताप का प्रिय अश्व था।
प्र. कविता में चेतक की किन विशेषताओं का वर्णन है?
उ. उसकी असाधारण गति, फुर्ती, स्वामिभक्ति (सवार का इशारा तुरंत समझना) और युद्धभूमि में निडरता का वर्णन है।
प्र. इस कविता में कौन-सा रस प्रमुख है?
उ. इस कविता में वीर रस प्रमुख है।
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