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ऐसी भी बातें होती हैं — यतींद्र मिश्र / लता मंगेशकर | संपूर्ण अध्ययन सामग्री (Summary, Mind Map, Question Answers & MCQs)

ऐसी भी बातें होती हैं — यतींद्र मिश्र / लता मंगेशकर | संपूर्ण अध्ययन सामग्री
ऐसी भी बातें होती हैं
(लता मंगेशकर से साक्षात्कार — यतींद्र मिश्र) — संपूर्ण अध्ययन सामग्री
नोट: इस सामग्री में सभी प्रश्न काले रंग में तथा उनके उत्तर नीले रंग में दिए गए हैं। 25 वस्तुनिष्ठ, 20 अति लघु, 20 लघु तथा 10 महत्वपूर्ण प्रश्न पाठ्यपुस्तक के 'अभ्यास' खंड से अलग हैं।
लेखक परिचय
यतींद्र मिश्र

यतींद्र मिश्र

जन्म: सन् 1977, अयोध्या, उत्तर प्रदेश।

यतींद्र मिश्र का जन्म सन् 1977 में अयोध्या (उत्तर प्रदेश) में हुआ। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ से हिंदी में एम.ए. किया। कविता, संगीत व अन्य ललित कलाओं के साथ-साथ समाज और संस्कृति के विविध क्षेत्रों में भी उनकी गहरी रुचि है।

यतींद्र मिश्र के तीन काव्य-संग्रह प्रकाशित हुए हैं — यदा-कदा, अयोध्या तथा अन्य कविताएँ, ड्योढ़ी पर आलाप। इसके अलावा उन्होंने शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी के जीवन और संगीत-साधना पर एक पुस्तक 'गिरिजा' लिखी। रीतिकाल के अंतिम प्रतिनिधि कवि 'द्विजदेव' की ग्रंथावली (2000) का सह-संपादन किया। कुँवर नारायण पर केंद्रित दो पुस्तकों के अलावा स्पिक मैके के लिए विरासत-2001 के कार्यक्रम हेतु स्पंदन कलाओं पर केंद्रित 'थाती' का संपादन भी किया। वे आजकल स्वतंत्र लेखन के साथ अर्द्धवार्षिक पत्रिका 'सहित' का संपादन कर रहे हैं।

साक्षात्कारदाता परिचय
लता मंगेशकर

लता मंगेशकर

जन्म: इंदौर, मध्यप्रदेश।  सम्मान: भारत रत्न।

'मेरी आवाज ही पहचान है!' अपनी आवाज से भारत ही नहीं बल्कि विश्व के कोने-कोने में अपनी पहचान बनाने वाली 'भारत रत्न' लता मंगेशकर संगीत के संसार का वह नाम हैं जिनके विषय में यदि बात न हो तो भारतीय संगीत की बात अधूरी रह जाए। इंदौर, मध्यप्रदेश में जन्मीं लता मंगेशकर ने मात्र पाँच वर्ष की आयु में अपने पिता से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा ली और जीवनपर्यंत संगीत के प्रति समर्पित रहीं।

जीवन के अनेक उतार-चढ़ाव व संघर्षों के होते हुए भी लता मंगेशकर ने किस प्रकार संगीत और परिवार के प्रति अपने उत्तरदायित्व को निभाया — यही इस साक्षात्कार का केंद्रीय भाव है।

साक्षात्कार का माइंड मैप
  • ऐसी भी बातें होती हैं
    • साक्षात्कारकर्ता व साक्षात्कारदाता
      • यतींद्र मिश्र
      • लता मंगेशकर
      • पं. दीनानाथ मंगेशकर
    • संगीत-जीवन की यात्रा
      • पिताजी के संस्कार
      • बचपन की यादें
      • फिल्मी सफर
      • कोरस-सहयोगी
      • रिकॉर्डिंग की चुनौतियाँ
    • त्योहार व परंपराएँ
      • होली — गुड़वड़
      • गुड़ी पड़वा
      • दीवाली — नौशाद किस्सा
      • मंगलागौर
    • जीवन-दर्शन व मूल्य
      • स्वाभिमान
      • संगीत की अपार शक्ति
      • जीवन-मृत्यु दर्शन
      • कृतज्ञता
पाठ का सार एवं व्याख्या
भूमिका

'ऐसी भी बातें होती हैं' यतींद्र मिश्र द्वारा भारत रत्न लता मंगेशकर से लिया गया एक आत्मीय साक्षात्कार है। इस साक्षात्कार में यतींद्र मिश्र का प्रयास है कि वे संगीत में आकंठ डूबे हुए लता जी के महान जीवन की दुर्लभ छवियों से करोड़ों प्रशंसकों को परिचित करा सकें। लता जी सहजता से अपने संगीत-जीवन, परिवार और अनुभवों को साझा करती हैं।

पिताजी की स्मृतियाँ और अनुशासन

लता जी बताती हैं कि उनके पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर बच्चों को कभी डाँटते या मारते नहीं थे, बल्कि गंभीरता से देखते रहते थे, जिससे बच्चे स्वयं अपनी गलती समझ जाते थे। पिताजी की ड्रामा कंपनी के नाटक रात नौ बजे शुरू होकर देर रात दो-तीन बजे तक चलते थे, जिनमें लंबी रागदारी वाले गायन की परंपरा थी। पिताजी की विशेषता थी कि वे एक राग गाते हुए बीच में सुर बदलकर नए राग में चले जाते और फिर वापस मूल राग में लौट आते थे। वे पहली बार कर्नाटक और पंजाब का संगीत मराठी रंगमंच पर लाए।

पिताजी से मिले संस्कार और संघर्ष के दिन

पिताजी ने अपनी संतानों को स्वाभिमान से जीने और किसी के आगे न झुकने का संस्कार दिया, जो लता जी के संपूर्ण जीवन का आधार बना। पिताजी के निधन के बाद परिवार को बुरे हालात का सामना करना पड़ा। मात्र तेरह वर्ष की आयु में लता जी ने परिवार की जिम्मेदारी संभाली। माँ ने भी वही संस्कार दिए — स्वाभिमान के साथ जीना है, मगर किसी के आगे हाथ नहीं पसारना है।

बचपन की यादें और फिल्मों की नकल

लता जी और उनके भाई-बहन बचपन में फिल्में देखकर घर में उनकी नकल उतारते थे। 'संत तुकाराम' फिल्म की वे सबसे अधिक नकल करते — घर के गद्दे-तकिए ऊँचा स्वर्ग बनाकर, उस पर बैठकर गीत गाते। 'छत्रपति शिवाजी' फिल्म में उन्होंने अभिनय की इच्छा से दो पंक्तियाँ गाईं। पिताजी अपने कार्यक्रमों में मिले पदक कपड़ों पर सीने की बाईं तरफ लगाते थे, जिन्हें देखकर लता जी सोचतीं कि बड़ी होने पर उन्हें भी ऐसे मेडल मिलेंगे।

फिल्मी सफर और काम की चुनौतियाँ

लता जी को फिल्मों में अभिनय करना पसंद नहीं था — मेकअप, लाइट के सामने जाना और रोने-हँसने का अभिनय उन्हें अच्छा नहीं लगता था, हालाँकि उन्होंने छह-सात फिल्मों में अभिनय किया। उनकी रिकॉर्डिंग सुबह से रात तक चलती थी, एक स्टूडियो से दूसरे और तीसरे स्टूडियो के चक्कर में पूरा दिन बीत जाता था। पुराने समय में तकनीकी रूप से बहुत तरक्की नहीं हुई थी — गायकों को हॉल में दूर से चलकर दबे पाँव रेकॉर्डिंग वाले माइक तक आना पड़ता था। अनिल विश्वास, श्याम सुंदर, सज्जाद हुसैन, सलिल चौधरी और सी. रामचंद्र जैसे संगीतकारों ने कुछ नए और अजीबोगरीब टोटके आजमाकर गीतों में विशेष प्रभाव पैदा किए।

होली, दशहरा-दीवाली और नवरात्रि की पारिवारिक परंपराएँ

होली के एक दिन पहले होलिका जलाकर पूजा की जाती थी, प्रसाद की राख अगले दिन एक-दूसरे पर डाली जाती (इसे 'गुड़वड़' कहते हैं), और रंग-पंचमी पर माँ-पिताजी बच्चों पर केसर छिड़कते थे। दशहरा-दीवाली का सबसे अधिक महत्व था। नवरात्रि के पहले दिन 'गुड़ी पड़वा' मनाया जाता — घर के बाहर 'गुड़ी' (झंडी) बाँधी जाती और कलश-स्थापना की जाती। मान्यता है कि भगवान राम चौदह वर्ष बाद अयोध्या लौटे थे, तो हर घर में उनके स्वागत में 'गुड़ी' बाँधी गई थी। विवाह के बाद नई बहू के आगमन पर 'मंगलागौर' उत्सव मनाया जाता, जिसमें पास-पड़ोस की सारी औरतें आकर गीत गातीं और नाचतीं, यद्यपि यह परंपरा अब धीरे-धीरे कम होती जा रही है।

दीवाली पर नौशाद साहब का किस्सा और कोरस-सहयोगी

लता जी दीवाली के दिन सुबह साढ़े पाँच बजे मिठाई लेकर नौशाद साहब के घर पहुँच गईं। कॉलबेल बजाने पर नौशाद साहब चिंतित होकर बाहर आए, सोचा कोई मुसीबत आ पड़ी है। लता जी के बधाई देने पर वे हैरान हुए, फिर प्रेम से उन्हें अंदर बुलाकर चाय-मिठाई खिलाई और आशीर्वाद दिया। कोरस में गाने वाली लड़कियों (रेखा, कल्याणी, कविता, गांधारी, सुमन आदि) के साथ भी लता जी के अत्यंत आत्मीय संबंध थे — वे परिवार जैसी थीं, साथ बैठकर बातें करतीं।

संगीत की अपार शक्ति

लता जी मानती हैं कि संगीत में असीम व अप्रत्याशित शक्ति होती है। बाबा हरिदास व तानसेन की कथाओं (दीपक राग से दीप जलना, मेघ राग से वर्षा होना) का उल्लेख करते हुए वे कहती हैं कि महान संगीतकारों की कला में सच्चा सुर लगने पर कुछ अप्रत्याशित घट सकता है। उस्ताद अली अकबर खां के संगीत कार्यक्रम में सरोद का तार टूट जाने की घटना इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है — पूछने पर उन्होंने कहा, "बहन, जब बहुत सुर में तार लगता है, तो टूट जाता है।"

जीवन-दर्शन और समापन

लता जी स्पष्ट रूप से मानती हैं कि शरीर नश्वर है, पर कर्म व कला अमर रह सकते हैं — "मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।" वे मराठी कहावत 'गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन' का हवाला देकर कहती हैं कि नाम ही स्थायी रहता है। वे मृत्यु को सहजता व निर्भयता से स्वीकार करती हैं। साक्षात्कार के अंत में लता जी कहती हैं कि भगवान ने उन्हें बहुत कुछ दिया, इसकी उन्हें कोई शिकायत नहीं। उन्होंने प्रार्थना की कि जैसी ईश्वर की कृपा-छाया उन्हें मिली, वैसी ही छाया हर कलाकार और नेक इंसान पर बनी रहे।

निष्कर्ष

इस प्रकार 'ऐसी भी बातें होती हैं' साक्षात्कार लता मंगेशकर के संगीत-जीवन, पारिवारिक संस्कारों, त्योहारों की परंपराओं और गहन जीवन-दर्शन को अत्यंत आत्मीय व सहज शैली में प्रस्तुत करता है। यह साक्षात्कार स्वाभिमान, कर्तव्यनिष्ठा, सादगी और कृतज्ञता जैसे मूल्यों को उजागर करते हुए पाठक के लिए ज्ञानवर्धक व भावनात्मक रूप से समृद्ध अनुभव बन जाता है।

25 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (बहुविकल्पीय) उत्तर सहित

(ये प्रश्न पाठ्यपुस्तक के अभ्यास खंड से अलग हैं।)

1. 'ऐसी भी बातें होती हैं' पाठ किस विधा की रचना है?
(क) निबंध   (ख) कहानी   (ग) साक्षात्कार   (घ) संस्मरण
उत्तर: (ग) साक्षात्कार
2. यह साक्षात्कार किसके साथ लिया गया है?
(क) आशा भोसले   (ख) लता मंगेशकर   (ग) गिरिजा देवी   (घ) मीना मंगेशकर
उत्तर: (ख) लता मंगेशकर
3. यह साक्षात्कार किसने लिया है?
(क) यतींद्र मिश्र   (ख) रवींद्रनाथ टैगोर   (ग) प्रेमचंद   (घ) महादेवी वर्मा
उत्तर: (क) यतींद्र मिश्र
4. यतींद्र मिश्र का जन्म किस वर्ष हुआ?
(क) 1967   (ख) 1977   (ग) 1987   (घ) 1957
उत्तर: (ख) सन् 1977
5. यतींद्र मिश्र का जन्म-स्थान कौन-सा है?
(क) अयोध्या, उत्तर प्रदेश   (ख) इंदौर, मध्यप्रदेश   (ग) लखनऊ   (घ) वाराणसी
उत्तर: (क) अयोध्या, उत्तर प्रदेश
6. यतींद्र मिश्र ने किस विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. किया?
(क) दिल्ली विश्वविद्यालय   (ख) लखनऊ विश्वविद्यालय   (ग) बनारस हिंदू विश्वविद्यालय   (घ) इलाहाबाद विश्वविद्यालय
उत्तर: (ख) लखनऊ विश्वविद्यालय
7. यतींद्र मिश्र ने किस शास्त्रीय गायिका के जीवन पर 'गिरिजा' पुस्तक लिखी?
(क) गिरिजा देवी   (ख) किशोरी अमोणकर   (ग) एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी   (घ) गंगूबाई हंगल
उत्तर: (क) गिरिजा देवी
8. यतींद्र मिश्र किस पत्रिका का संपादन करते हैं?
(क) सरस्वती   (ख) सहित   (ग) हंस   (घ) कादंबिनी
उत्तर: (ख) सहित
9. लता मंगेशकर का जन्म कहाँ हुआ था?
(क) मुंबई   (ख) इंदौर, मध्यप्रदेश   (ग) पुणे   (घ) कोल्हापुर
उत्तर: (ख) इंदौर, मध्यप्रदेश
10. लता मंगेशकर को किस सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया है?
(क) पद्मश्री   (ख) भारत रत्न   (ग) ज्ञानपीठ   (घ) साहित्य अकादमी
उत्तर: (ख) भारत रत्न
11. लता मंगेशकर ने कितने वर्ष की आयु में अपने पिता से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा ली?
(क) तीन वर्ष   (ख) पाँच वर्ष   (ग) सात वर्ष   (घ) दस वर्ष
उत्तर: (ख) पाँच वर्ष
12. लता मंगेशकर के पिता का नाम क्या था?
(क) पं. दीनानाथ मंगेशकर   (ख) पं. रविशंकर   (ग) पं. भीमसेन जोशी   (घ) पं. ओंकारनाथ ठाकुर
उत्तर: (क) पं. दीनानाथ मंगेशकर
13. लता जी के पिताजी का व्यवसाय क्या था?
(क) चित्रकार   (ख) नाटक (ड्रामा) कंपनी चलाना   (ग) अध्यापक   (घ) पुजारी
उत्तर: (ख) नाटक (ड्रामा) कंपनी चलाना
14. पिताजी अपने गायन में एक राग को गाते हुए क्या विशेष तकनीक अपनाते थे?
(क) राग को बदलकर उसी सुर पर वापस लौट आते थे   (ख) हमेशा एक ही राग गाते थे   (ग) कभी सुर नहीं बदलते थे   (घ) केवल शास्त्रीय राग गाते थे
उत्तर: (क) राग को बदलकर उसी सुर पर वापस लौट आते थे
15. लता जी के पिताजी सबसे पहले किन क्षेत्रों का संगीत मराठी रंगमंच पर लाए?
(क) बंगाल और असम   (ख) कर्नाटक और पंजाब   (ग) राजस्थान और गुजरात   (घ) केरल और तमिलनाडु
उत्तर: (ख) कर्नाटक और पंजाब
16. लता जी ने पिताजी से संगीत के अलावा सबसे ज्यादा क्या सीखा?
(क) धन कमाने की कला   (ख) स्वाभिमान से जीने की प्रेरणा   (ग) राजनीति   (घ) अभिनय
उत्तर: (ख) स्वाभिमान से जीने की प्रेरणा
17. लता जी ने बचपन में भाई-बहनों के साथ किस फिल्म की सबसे अधिक नकल की थी?
(क) मदर इंडिया   (ख) संत तुकाराम   (ग) मुगल-ए-आजम   (घ) पाकीजा
उत्तर: (ख) संत तुकाराम
18. लता जी ने किस फिल्म में अभिनय की इच्छा जताते हुए दो पंक्तियाँ गाईं?
(क) छत्रपति शिवाजी   (ख) मदर इंडिया   (ग) महल   (घ) बरसात
उत्तर: (क) छत्रपति शिवाजी
19. 1949-50 के दशक में फिल्म संगीत के किन संगीत निर्देशकों का उल्लेख साक्षात्कार में हुआ है?
(क) ए.आर. रहमान, शंकर-एहसान-लॉय   (ख) खेमचंद प्रकाश, शंकर-जयकिशन, हुस्नलाल-भगतराम   (ग) जतिन-ललित   (घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (ख) खेमचंद प्रकाश, शंकर-जयकिशन, हुस्नलाल-भगतराम
20. लता जी ने रंगों से परहेज के विषय में क्या बताया?
(क) वे रंगों का बहुत प्रयोग करती हैं   (ख) वे सफेद रंग की साड़ी पहनना पसंद करती हैं   (ग) वे केवल काला रंग पहनती हैं   (घ) रंगों से उन्हें कोई परहेज नहीं
उत्तर: (ख) वे सफेद रंग की साड़ी पहनना पसंद करती हैं
21. होली के अगले दिन होलिका के प्रसाद की राख एक-दूसरे पर डालने की प्रथा को क्या कहा जाता है?
(क) रंग-पंचमी   (ख) गुड़वड़   (ग) गुड़ी पड़वा   (घ) मंगलागौर
उत्तर: (ख) गुड़वड़
22. गुड़ी पड़वा के अवसर पर महाराष्ट्र में घर के बाहर क्या बाँधा जाता है?
(क) तोरण   (ख) 'गुड़ी' (झंडी)   (ग) रंगोली   (घ) दीप
उत्तर: (ख) 'गुड़ी' (झंडी)
23. लता जी ने दीवाली के अवसर पर किस संगीतकार के घर सुबह मिठाई लेकर पहुँचने का किस्सा साझा किया?
(क) मदन मोहन   (ख) नौशाद साहब   (ग) शंकर-जयकिशन   (घ) आर.डी. बर्मन
उत्तर: (ख) नौशाद साहब
24. विवाह के बाद नई बहू के घर आने पर मनाए जाने वाले उत्सव को क्या कहा जाता है?
(क) गुड़ी पड़वा   (ख) मंगलागौर   (ग) रंग-पंचमी   (घ) सोहर
उत्तर: (ख) मंगलागौर
25. उस्ताद अली अकबर खां के संगीत कार्यक्रम में क्या घटना हुई थी, जिसका उल्लेख लता जी ने किया?
(क) उनका तानपुरा टूट गया   (ख) उनके सरोद का तार टूट गया   (ग) माइक खराब हो गया   (घ) बिजली चली गई
उत्तर: (ख) उनके सरोद का तार टूट गया
20 अति लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर सहित

(ये प्रश्न पाठ्यपुस्तक के अभ्यास खंड से अलग हैं।)

1. 'ऐसी भी बातें होती हैं' पाठ किस विधा की रचना है?
उत्तर: साक्षात्कार।
2. यह साक्षात्कार किसका लिया गया है?
उत्तर: लता मंगेशकर का।
3. साक्षात्कार लेने वाले का नाम बताइए।
उत्तर: यतींद्र मिश्र।
4. यतींद्र मिश्र का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर: सन् 1977 में अयोध्या, उत्तर प्रदेश में।
5. यतींद्र मिश्र के किन्हीं दो काव्य-संग्रहों के नाम लिखिए।
उत्तर: यदा-कदा तथा अयोध्या तथा अन्य कविताएँ।
6. यतींद्र मिश्र किस पत्रिका का संपादन करते हैं?
उत्तर: सहित (अर्द्धवार्षिक पत्रिका)।
7. लता मंगेशकर का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर: इंदौर, मध्यप्रदेश में।
8. लता मंगेशकर को किस सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया?
उत्तर: भारत रत्न।
9. लता जी के पिता का नाम बताइए।
उत्तर: पं. दीनानाथ मंगेशकर।
10. लता जी के पिताजी का व्यवसाय क्या था?
उत्तर: नाटक (ड्रामा) कंपनी चलाना।
11. लता जी ने कितने वर्ष की आयु में संगीत सीखना शुरू किया?
उत्तर: पाँच वर्ष की आयु में।
12. लता जी ने बचपन में किस फिल्म की सबसे अधिक नकल की?
उत्तर: संत तुकाराम की।
13. लता जी ने किस फिल्म में अभिनय की इच्छा से दो पंक्तियाँ गाईं?
उत्तर: छत्रपति शिवाजी में।
14. लता जी किस रंग की साड़ी पहनना पसंद करती हैं?
उत्तर: सफेद रंग की।
15. होली की राख आपस में डालने की प्रथा को क्या कहते हैं?
उत्तर: गुड़वड़।
16. महाराष्ट्र में घर के बाहर बाँधी जाने वाली झंडी को क्या कहते हैं?
उत्तर: 'गुड़ी'।
17. विवाह के बाद नई बहू के घर आने पर मनाया जाने वाला उत्सव क्या कहलाता है?
उत्तर: मंगलागौर।
18. लता जी ने किस संगीतकार को दीवाली पर मिठाई देने का किस्सा सुनाया?
उत्तर: नौशाद साहब को।
19. किस संगीत कार्यक्रम में सरोद का तार टूट गया था?
उत्तर: उस्ताद अली अकबर खां के कार्यक्रम में।
20. लता जी के अनुसार अमर क्या है और अमर क्या नहीं?
उत्तर: उनका गाना अमर है, पर शरीर अमर नहीं।
20 लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर सहित

(ये प्रश्न पाठ्यपुस्तक के अभ्यास खंड से अलग हैं।)

1. लता जी के पिताजी बच्चों को कैसे अनुशासित करते थे?
उत्तर: पिताजी डाँटते या मारते नहीं थे, बल्कि गंभीरता से देखते रहते थे, जिससे बच्चों का रोना शुरू हो जाता था और वे स्वयं अपनी गलती समझ जाते थे। समझ आने पर पिताजी 'अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो' कहकर उन्हें भेज देते थे।
2. लता जी के पिताजी के नाटकों की क्या विशेषताएँ थीं?
उत्तर: उनकी ड्रामा कंपनी के नाटक रात नौ बजे शुरू होकर देर रात दो-तीन बजे तक चलते थे। एक नाटक के पाँच अंक होते थे, लंबी-लंबी रागदारी वाले गायन की परंपरा थी, और वे पहली बार कर्नाटक व पंजाब का संगीत मराठी रंगमंच पर लाए।
3. पिताजी के गायन की विशेष शैली क्या थी?
उत्तर: पिताजी एक राग को गाते हुए बीच में सुर बदलकर उसे नए राग में बदल देते थे और फिर उसी समय वापस मूल राग व सुर में लौट आते थे, जिससे गायन में नयापन बना रहता था।
4. पिताजी के निधन के बाद लता जी के परिवार की स्थिति कैसी हो गई थी?
उत्तर: पिताजी के निधन के बाद परिवार को बुरे हालात का सामना करना पड़ा। लता जी की माँ ने भी वही संस्कार दिए कि स्वाभिमान के साथ जीना है, मगर किसी के आगे हाथ नहीं पसारना है। परिवार ने संघर्ष करते हुए स्वाभिमान बनाए रखा।
5. लता जी और उनके भाई-बहन बचपन में किस प्रकार फिल्मों की नकल करते थे?
उत्तर: वे फिल्में देखकर घर में उनकी नकल उतारते थे। 'संत तुकाराम' फिल्म की विशेष रूप से नकल करते — घर के गद्दे-तकिए ऊँचा स्वर्ग बनाकर, उस पर बैठकर गीत गाते और परिवार के अन्य सदस्य नीचे खड़े होकर साथ ले चलने की गुहार लगाते।
6. लता जी को फिल्मों में अभिनय करना पसंद क्यों नहीं था?
उत्तर: उन्हें मेकअप करना, लाइट के सामने जाना और लोगों के सामने रोने-हँसने का अभिनय करना अच्छा नहीं लगता था। हालाँकि उन्होंने कुल छह-सात फिल्मों में अभिनय किया था, पर बाद में यह काम पूरी तरह छोड़ दिया।
7. लता जी ने अपने काम की परिस्थितियों के विषय में क्या बताया?
उत्तर: उनकी रिकॉर्डिंग सुबह से रात तक चलती रहती थी, एक स्टूडियो से दूसरे और तीसरे स्टूडियो के चक्कर में पूरा दिन बीत जाता था। वे गाने और रिकॉर्डिंग के अलावा किसी और चीज की सुध नहीं रखतीं और पूरा ध्यान परिवार की जरूरतें पूरी करने पर केंद्रित रहता था।
8. लता जी के बचपन का कौन-सा सपना था?
उत्तर: उन्हें बचपन में यह देखकर अच्छा लगा था कि पिताजी अपने कार्यक्रमों में मिले पदक कपड़ों पर सीने के बाईं तरफ लगाते थे। पंडित कुमार गंधर्व को भी वे मेडल पहने देखतीं। उन्हें लगता था कि जब वे बड़ी होंगी, तब उन्हें भी ऐसे मेडल मिलेंगे।
9. टाइम मशीन के प्रश्न पर लता जी ने क्या उत्तर दिया?
उत्तर: लता जी ने कहा कि यह कहना मुश्किल है कि अगर ए.आर. रहमान, जतिन-ललित जैसे आधुनिक संगीतकार उस दौर में होते, तो गाने कैसे बनते। वे इसका सटीक आकलन नहीं कर सकतीं, पर मानती हैं कि परिणाम बहुत बढ़िया या बिल्कुल अलग अंदाज का होता।
10. पुराने समय में गीत रिकॉर्ड करने की तकनीक कैसी थी?
उत्तर: उस समय सिनेमा में तकनीकी रूप से बहुत तरक्की नहीं हुई थी। गायकों को हॉल में दूर से चलकर दबे पाँव रेकॉर्डिंग वाले माइक तक आना पड़ता था और उसी अनुपात में रेकॉर्डिंग के माइक पर स्वर का उतार-चढ़ाव कैद किया जाता था।
11. गीतों में विशेष प्रभाव देने के लिए किन संगीतकारों ने नए तरीके अपनाए?
उत्तर: अनिल विश्वास, श्याम सुंदर, सज्जाद हुसैन, सलिल चौधरी और सी. रामचंद्र ने कुछ नए और अजीबोगरीब टोटके आजमाकर गीतों में विशेष प्रभाव पैदा किए।
12. लता जी होली कैसे मनाती थीं और अब कैसे मनाती हैं?
उत्तर: पहले सारा दिन रंग खेलना, भीगना और शाम को देर से नहाना होता था। अब वे रंग खेलना बंद कर चुकी हैं। होली के एक दिन पहले होलिका जलाई जाती है, उसकी पूजा होती है, मिठाइयाँ होलिका में डाली जाती हैं, जिन्हें राख के रूप में अगले दिन एक-दूसरे पर डाला जाता है, इसे 'गुड़वड़' कहा जाता है।
13. रंग-पंचमी के दिन लता जी के घर में क्या होता था?
उत्तर: होली के बाद पाँचवें दिन रंग-पंचमी आती है। इस दिन माँ और पिताजी सभी भाई-बहनों पर केसर घोलकर थोड़ा छिड़कते थे। माँ घर में कुछ मीठा बनातीं, जो भगवान को चढ़ाकर प्रसाद रूप में खाने को मिलता था और सभी की आरतियाँ भी माँ उतारती थीं।
14. गुड़ी पड़वा क्या है और इसे कैसे मनाया जाता है?
उत्तर: नवरात्रि के पहले दिन 'गुड़ी पड़वा' मनाया जाता है। इस दिन घर के बाहर 'गुड़ी' (झंडी) बाँधी जाती है और कलश-स्थापना की जाती है। सूर्योदय के समय 'गुड़ी' पर बताशों की माला या हार बनाकर चढ़ाई जाती है, जिसे सूर्यास्त होने तक उतार लिया जाता है और प्रसाद रूप में घर के सभी सदस्य उसे लेते हैं।
15. महाराष्ट्र में नवरात्रि किस मान्यता के आधार पर मनाई जाती है?
उत्तर: मान्यता है कि भगवान राम चौदह वर्ष बाद जब अयोध्या लौटे थे, तो हर घर में उनके स्वागत में बताशों की लड़ी सजाकर 'गुड़ी' बाँधी गई थी। महाराष्ट्र में यह त्योहार राम-आगमन मानकर मनाया जाता है, जबकि अन्य स्थानों पर यह दुर्गा की आराधना में नवरात्र के रूप में मनाया जाता है।
16. दीवाली पर नौशाद साहब से जुड़ा किस्सा संक्षेप में लिखिए।
उत्तर: लता जी दीवाली के दिन सुबह साढ़े पाँच बजे मिठाई लेकर नौशाद साहब के घर पहुँच गईं। कॉलबेल बजाने पर नौशाद साहब चिंतित होकर बाहर आए, सोचा कोई मुसीबत आ पड़ी है। लता जी के बधाई देने पर वे हैरान हुए, फिर प्रेम से उन्हें अंदर बुलाकर चाय-मिठाई खिलाई और आशीर्वाद दिया।
17. 'मंगलागौर' उत्सव के विषय में लता जी ने क्या बताया?
उत्तर: विवाह के बाद जब नई बहू घर आती है, तब एक पूजा होती है जिसमें पास-पड़ोस की सारी औरतें आती हैं, गीत गाती और नाचती हैं, इसे 'मंगलागौर' कहते हैं। यह ठेठ गँवई अंदाज में मनाया जाता है, पर धीरे-धीरे यह परंपरा अब कम होती जा रही है।
18. कोरस में गाने वाली लड़कियों के साथ लता जी के कैसे संबंध थे?
उत्तर: कोरस की लड़कियों के साथ लता जी के बहुत अच्छे, आत्मीय संबंध थे — जितनी भी लड़कियाँ थीं, वे बिल्कुल उनके घर जैसी थीं। रिकॉर्डिंग के समय वे अक्सर जमीन पर बैठकर उनके साथ बातें करती थीं। मीना (लता जी की बहन) की शादी में भी सभी कोरस की लड़कियाँ-लड़के पहुँचे और खूब गाना-नाचना हुआ।
19. उस्ताद अली अकबर खां के संगीत कार्यक्रम में हुई घटना और उनकी मार्मिक बात का वर्णन कीजिए।
उत्तर: एक कंसर्ट में अली अकबर खां का सरोद बजाते समय तार टूट गया। बाद में मिलने पर लता जी के पूछने पर उन्होंने कहा — "बहन, जब बहुत सुर में तार लगता है, तो टूट जाता है।" इससे लता जी को लगा कि संगीत की सीमा इतनी अनंत है कि तार भी शुद्ध स्वर के आघात को सहन नहीं कर पाता।
20. साक्षात्कार के अंत में लता जी ने क्या प्रार्थना/संदेश दिया?
उत्तर: लता जी ने कहा कि भगवान ने उन्हें बहुत कुछ दिया है, इसकी उन्हें कोई शिकायत नहीं। उन्होंने अपने पिताजी का नाम थोड़ा ही सही, आगे बढ़ाया। अंत में उन्होंने प्रार्थना की कि जैसे ईश्वर की कृपा-छाया उन्हें मिली, वैसी ही छाया हर कलाकार और नेक इंसान पर भी बनी रहे।
10 महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित

(ये प्रश्न पाठ्यपुस्तक के अभ्यास खंड से अलग हैं।)

1. यतींद्र मिश्र का परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: यतींद्र मिश्र का जन्म सन् 1977 में अयोध्या, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. किया। कविता, संगीत व अन्य ललित कलाओं के साथ-साथ समाज व संस्कृति में उनकी गहरी रुचि है। उनके तीन काव्य-संग्रह — यदा-कदा, अयोध्या तथा अन्य कविताएँ, ड्योढ़ी पर आलाप — प्रकाशित हुए हैं। उन्होंने शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी के जीवन और संगीत-साधना पर 'गिरिजा' पुस्तक लिखी, कवि 'द्विजदेव' की ग्रंथावली का सह-संपादन किया, कुंवर नारायण पर केंद्रित पुस्तकें तथा स्पिक मैके के लिए 'थाती' का संपादन भी किया। वे आजकल स्वतंत्र लेखन के साथ अर्द्धवार्षिक पत्रिका 'सहित' का संपादन कर रहे हैं।
2. 'ऐसी भी बातें होती हैं' साक्षात्कार का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: यह साक्षात्कार यतींद्र मिश्र द्वारा स्वर-कोकिला भारत रत्न लता मंगेशकर से लिया गया है, जिसमें लता जी अपने संगीत-जीवन की यात्रा, पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर से मिले संस्कारों, बचपन की यादों, फिल्मी सफर, काम की चुनौतियों, त्योहारों की परंपराओं, सहयोगियों से संबंधों तथा संगीत की अपार शक्ति पर खुलकर बात करती हैं। साक्षात्कार में वे स्वाभिमान, कर्तव्यनिष्ठा, सादगी और कृतज्ञता जैसे मूल्यों को उजागर करती हुई अंततः ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सभी कलाकारों व नेक इंसानों के कल्याण की प्रार्थना करती हैं।
3. लता मंगेशकर के व्यक्तित्व की विशेषताएँ इस साक्षात्कार के आधार पर बताइए।
उत्तर: लता मंगेशकर सादगी, आत्मसम्मान, कर्तव्यनिष्ठा और कृतज्ञता की प्रतिमूर्ति हैं। वे स्वाभिमान से जीने में विश्वास रखती हैं, अपने सहयोगियों के साथ आत्मीय संबंध रखती हैं, परंपराओं व त्योहारों के प्रति श्रद्धा रखती हैं, तथा संगीत के प्रति गहन समर्पण व साधना का भाव रखती हैं। साथ ही वे स्पष्टवादी हैं और जीवन के यथार्थ (जैसे मृत्यु की अनिवार्यता) को दार्शनिक दृष्टिकोण से स्वीकार करती हैं।
4. लता जी के पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर के व्यक्तित्व व योगदान पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: पं. दीनानाथ मंगेशकर एक नाटक (ड्रामा) कंपनी चलाते थे और संगीत में गहरी रुचि रखते थे। वे शास्त्रीय रागदारी में पारंगत थे और गाते समय राग बदलकर पुनः मूल राग में लौट आने की विशेष शैली अपनाते थे। वे पहली बार कर्नाटक और पंजाब का संगीत मराठी रंगमंच पर लाए। अनुशासन में वे कठोर थे, पर स्नेहपूर्ण भी। उन्होंने अपनी संतानों को स्वाभिमान से जीने और किसी के आगे न झुकने का संस्कार दिया, जो लता जी के संपूर्ण जीवन का आधार बना।
5. साक्षात्कार में वर्णित होली, दशहरा-दीवाली व नवरात्रि से जुड़ी पारिवारिक परंपराओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: होली के एक दिन पहले होलिका जलाकर पूजा की जाती थी, प्रसाद की राख अगले दिन एक-दूसरे पर डाली जाती (गुड़वड़), और रंग-पंचमी पर माँ-पिताजी बच्चों पर केसर छिड़कते थे। दशहरा-दीवाली का सबसे अधिक महत्व था। नवरात्रि के पहले दिन 'गुड़ी पड़वा' मनाया जाता, घर के बाहर 'गुड़ी' बाँधी जाती और कलश-स्थापना होती। दीवाली पर लता जी संगीतकारों के घर मिठाई पहुँचाने जातीं। विवाह के बाद नई बहू के आगमन पर 'मंगलागौर' उत्सव मनाया जाता था।
6. संगीत की अपार शक्ति के विषय में लता जी के विचार स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: लता जी मानती हैं कि संगीत में असीम व अप्रत्याशित शक्ति होती है। बाबा हरिदास व तानसेन की कथाओं (दीपक राग से दीप जलना, मेघ राग से वर्षा होना) का उल्लेख करते हुए वे कहती हैं कि महान संगीतकारों की कला में सच्चा सुर या आत्मा की आवाज लगने पर कुछ अप्रत्याशित घट सकता है। उस्ताद अली अकबर खां के सरोद का तार टूटने की घटना इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है, जिससे उन्हें विश्वास है कि संगीत की सीमा अनंत है।
7. लता जी के जीवन में उनके सहयोगियों (कोरस गायिकाओं व संगीतकारों) का क्या स्थान था?
उत्तर: लता जी के सहयोगियों के साथ अत्यंत आत्मीय संबंध थे। कोरस में गाने वाली लड़कियाँ (रेखा, कल्याणी, कविता, गांधारी, सुमन आदि) उनके लिए परिवार जैसी थीं, वे साथ बैठकर बातें करतीं, खुशी के अवसरों में शामिल होतीं। संगीतकारों के प्रति भी उनका गहरा आदर था, जैसा नौशाद साहब को दीवाली पर मिठाई देने के प्रसंग से स्पष्ट होता है — यह दर्शाता है कि सफलता में सहयोगियों की भूमिका को वे कितना महत्व देती थीं।
8. लता जी के जीवन-दर्शन (जीवन व मृत्यु के प्रति दृष्टिकोण) को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: लता जी स्पष्ट रूप से मानती हैं कि शरीर नश्वर है, पर कर्म व कला अमर रह सकते हैं — "मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।" वे मराठी कहावत 'गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन' का हवाला देकर कहती हैं कि नाम ही स्थायी रहता है। वे मृत्यु को सहजता व निर्भयता से स्वीकार करती हैं और इसे कोई अफसोस की बात नहीं मानतीं।
9. साक्षात्कार विधा की दृष्टि से 'ऐसी भी बातें होती हैं' की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: यह साक्षात्कार आत्मीय, सहज व आत्मकथात्मक शैली में है, जिसमें प्रश्नोत्तर की स्वाभाविक शैली, भावनात्मक संकेत (हँसते हुए, खिलखिलाकर हँसती हैं), संस्मरण, उदाहरण व विचार सम्मिलित हैं। साक्षात्कारकर्ता यतींद्र मिश्र के सुगठित व सम्मानपूर्ण प्रश्न लता जी को खुलकर अपने अनुभव साझा करने का अवसर देते हैं, जिससे यह साक्षात्कार पाठक के लिए ज्ञानवर्धक व भावनात्मक रूप से समृद्ध अनुभव बन जाता है।
10. इस साक्षात्कार से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: यह साक्षात्कार हमें स्वाभिमान से जीने, कठिन परिस्थितियों में भी कर्तव्यनिष्ठा न छोड़ने, अपने सहयोगियों व परंपराओं का सम्मान करने, तथा जीवन के यथार्थ को सहजता से स्वीकार करने की शिक्षा देता है। यह यह भी सिखाता है कि सच्ची सफलता विनम्रता, परिश्रम व समर्पण से मिलती है, न कि केवल प्रतिभा से।

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