नमस्कार पाठकों! इस ब्लॉग पर आप अब तक हिंदी व्याकरण और पाठ्यपुस्तकों के लेख पढ़ते आए हैं। आज मैं आपके साथ कुछ अलग साझा कर रहा हूँ — मेरी अपनी लिखी एक लंबी कहानी "आख़िरी घंटी", जो 100 भागों में पूरी होकर प्रतिलिपि पर प्रकाशित हो चुकी है।
कहानी किस बारे में है?
"आख़िरी घंटी" दिल्ली के एक स्कूल की बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों की कहानी है। आर्यन अपने परिवार की आर्थिक परेशानियों के बीच फुटबॉल के सपने और पढ़ाई — दोनों को संभालने की कोशिश कर रहा है। इसी साल स्कूल में इशिता की एंट्री होती है, और आर्यन की ज़िंदगी में पहली बार कुछ ऐसा आता है जिसे वो समझ नहीं पाता।
लेकिन बारहवीं का यह आख़िरी साल आसान नहीं है। दोस्तों की टोली, पुराने ज़ख्म, घर की चुप्पी, और एक दोस्त जो धीरे-धीरे नशे की गिरफ़्त में जा रहा है — आर्यन के सामने हर मोड़ पर एक नई परीक्षा है।
अपनी दोस्ती, प्यार, परिवार और सपना — सब बचा पाएगा?
आपको यह कहानी क्यों पढ़नी चाहिए?
- अगर आपने कभी स्कूल की आख़िरी घंटी का इंतज़ार किया है — तो यह कहानी आपकी यादें ताज़ा कर देगी।
- दोस्ती, पहला आकर्षण, परिवार का दबाव और करियर की उलझन — आज के विद्यार्थियों की असली दुनिया।
- हर भाग केवल 5–7 मिनट का — सफ़र में, चाय के साथ या सोने से पहले आराम से पढ़ें।
- दोस्ती के साथ-साथ नशे जैसे गंभीर विषय को भी कहानी छूती है।
भाग 1 की एक झलक
जुलाई की एक धूप भरी सुबह थी, जब दिल्ली के राजधानी पब्लिक स्कूल के गेट पर बच्चों की भीड़ उमड़ रही थी…
कुछ भागों के नाम — नई सुबह, नई शुरुआत · इशिता की एंट्री · पहली टक्कर, पहला आकर्षण · घर की चुप्पी · मैदान पर आग · टूटती दोस्ती · अनदेखा तूफ़ान …
कहानी पढ़कर अपनी राय प्रतिलिपि पर रेटिंग/समीक्षा के रूप में या नीचे कमेंट में ज़रूर दीजिए। आपकी एक समीक्षा मेरे लिए बहुत मायने रखती है — और अगर कहानी पसंद आए तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें। 🙏
— मनोज शर्मा
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