प्रतिलिपि लेखन अवॉर्ड · सीज़न 3 🔱 त्रिनेत्र विज्ञान · धर्म · न्याय · एक शिक्षक का संकल्प 85 भाग · पूरी कहानी नमस्कार पाठकों! "आख़िरी घंटी" के बाद आज मैं आपके साथ अपनी दूसरी लंबी कहानी साझा कर रहा हूँ — "त्रिनेत्र" , एक साइंस-फ़िक्शन और सस्पेंस-थ्रिलर, जो 85 भागों में पूरी होकर प्रतिलिपि पर प्रकाशित हो चुकी है। कहानी किस बारे में है? हरियाणा के छोटे-से क़स्बे सरस्वतीपुर में डॉ. अनिरुद्ध शास्त्री दिन में एक साधारण भौतिकी शिक्षक हैं। कभी वे रक्षा अनुसंधान में वैज्ञानिक थे। कुरुक्षेत्र में गीता जयंती के मेले में हुए एक धमाके में उनकी पत्नी गायत्री की मृत्यु हो जाती है, और जाँच की फ़ाइलें धूल खाने लगती हैं। तब अनिरुद्ध विज्ञान को अपना शस्त्र बनाते हैं — ध्वनि-तरंगों से काम करने वाले यंत्र, छोटे उड़ने वाले "गरुड़", और एक नक़ाब, जिसके माथे पर तीसरी आँख का चिह्न है। रात में वे बनते हैं "त्रिनेत्र" — धर्म का एक अदृश्य प्रहरी, जो किसी की जान नहीं लेता, पर सच को अँधेरे से निकालकर रोशनी में ले आता है। और जैसे-जैसे परतें खुलती हैं, सामने आता ...