कारतूस (हबीब तनवीर) — कक्षा 10 हिंदी स्पर्श: पात्र-चार्ट, व्याख्या, प्रश्नोत्तर और MCQ
कक्षा 10 हिंदी (स्पर्श भाग-2) की एकांकी 'कारतूस' की संपूर्ण अध्ययन सामग्री — लेखक परिचय, एकांकी का सार, पात्रों का चार्ट, पात्रों से जुड़ी घटनाएँ, दृश्य-वार व्याख्या, NCERT प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, 20 वस्तुनिष्ठ, 20 लघु-उत्तरीय, 10 दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न तथा परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न।
1. पाठ परिचय
'कारतूस' हबीब तनवीर की ऐतिहासिक एकांकी है। इसमें अवध के नवाब वज़ीर अली की वीरता का चित्रण है, जिसका एकमात्र लक्ष्य अंग्रेज़ों को देश से बाहर निकालना था। वह अकेला ही अंग्रेज़ कर्नल के खेमे में पहुँचकर उसी से कारतूस ले जाता है और कर्नल के मुँह से अपने लिए "जाँबाज़ सिपाही" शब्द निकलवा देता है।
लेखक परिचय — हबीब तनवीर (1923–2009)
हबीब तनवीर का जन्म 1923 में छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुआ। 1944 में नागपुर से स्नातक करने के बाद उन्होंने ब्रिटेन की नाटक अकादमी से नाट्य-लेखन का अध्ययन किया और दिल्ली लौटकर पेशेवर नाट्यमंच की स्थापना की। वे नाटककार, कवि, पत्रकार, नाट्य-निर्देशक और अभिनेता थे; लोकनाट्य के क्षेत्र में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान है। उन्हें कई पुरस्कार, फ़ेलोशिप और पद्मश्री मिले।
प्रमुख नाटक — आगरा बाज़ार, चरनदास चोर, देख रहे हैं नैन, हिरमा की अमर कहानी। आधुनिक रूपांतर — बसंत ऋतु का सपना, शाजापुर की शांति बाई, मिट्टी की गाड़ी, मुद्राराक्षस।
| पात्र | अवधि | ज़माना | समय | स्थान |
|---|---|---|---|---|
| कर्नल, लेफ़्टीनेंट, सिपाही, सवार | 5 मिनट | सन् 1799 | रात्रि | गोरखपुर के जंगल में कर्नल कालिंज के खेमे का अंदरूनी हिस्सा |
एकांकी का सार
- चाँदनी रात में कर्नल कालिंज और एक लेफ़्टीनेंट खेमे में बैठे वज़ीर अली के बारे में बातें कर रहे हैं। हफ़्तों से डेरा डाले सिपाही तंग आ चुके हैं — वज़ीर अली हाथ ही नहीं आता।
- कर्नल बताते हैं कि वज़ीर अली के कारनामे रॉबिनहुड जैसे हैं; केवल पाँच महीने के शासन में उसने अवध के दरबार को अंग्रेज़ी प्रभाव से लगभग मुक्त कर दिया था।
- अंग्रेज़ों ने वज़ीर अली को हटाकर उसके चाचा सआदत अली (आसिफ़उद्दौला का भाई) को नवाब बनाया, जिसने बदले में आधी जायदाद और दस लाख रुपये दिए।
- वज़ीर अली, टीपू सुल्तान और शमसुद्दौला ने अफ़गानिस्तान के बादशाह शाहे-ज़मा को हिंदुस्तान पर हमले का न्योता दिया था — देश में कंपनी के खिलाफ़ लहर दौड़ गई थी।
- हटाए जाने के बाद वज़ीर अली को बनारस भेजा गया; कलकत्ता तलब किए जाने की शिकायत पर कंपनी के वकील ने उसे बुरा-भला कहा तो उसने खंजर से उसका काम तमाम कर दिया और आज़मगढ़ होते हुए जंगलों में आ गया। उसकी योजना नेपाल पहुँचकर ताकत बढ़ाने और अंग्रेज़ों को निकालने की थी।
- तभी एक सवार तेज़ी से खेमे तक आता है और कर्नल से तन्हाई में मिलता है। वह गिरफ़्तारी में मदद के नाम पर कर्नल से दस कारतूस ले लेता है।
- जाते-जाते वह अपना नाम बताता है — "वज़ीर अली। आपने मुझे कारतूस दिए इसलिए आपकी जान बख्शी करता हूँ।" कर्नल हक्का-बक्का रह जाता है और दबी ज़बान से कहता है — "एक जाँबाज़ सिपाही।"
2. पात्रों का चार्ट
एकांकी में मंच पर चार पात्र आते हैं — कर्नल, लेफ़्टीनेंट, सिपाही और सवार (वज़ीर अली); बाकी ऐतिहासिक पात्रों का केवल उल्लेख होता है।
| पात्र | परिचय | चारित्रिक विशेषताएँ |
|---|---|---|
| वज़ीर अली (सवार) | अवध के अपदस्थ नवाब, आसिफ़उद्दौला के पुत्र | जाँबाज़, निडर, साहसी, चतुर, स्वाभिमानी, अंग्रेज़ों का कट्टर विरोधी, देशभक्त, उदार (कर्नल की जान बख्शी) |
| कर्नल कालिंज | अंग्रेज़ी फ़ौज का अधिकारी, वज़ीर अली का पीछा कर रहा | अनुभवी, कूटनीतिज्ञ, शत्रु की वीरता का भी सम्मान करने वाला; पर अंत में धोखा खा गया |
| लेफ़्टीनेंट | कर्नल का सहायक | जिज्ञासु, जल्दबाज़, अनुमान लगाने वाला; सवार को वज़ीर अली का मुखबिर समझ बैठा |
| सिपाही (गोरा) | पहरेदार | आज्ञाकारी; सूचनाएँ देता है |
| सआदत अली | आसिफ़उद्दौला का भाई, वज़ीर अली का चाचा (उल्लेख) | ऐश-पसंद, अंग्रेज़ों का मित्र, वज़ीर अली का दुश्मन |
| आसिफ़उद्दौला | अवध के नवाब, वज़ीर अली के पिता (उल्लेख) | — |
| टीपू सुल्तान, शमसुद्दौला | अंग्रेज़-विरोधी (उल्लेख) | अफ़गानिस्तान को हमले का न्योता देने वाले |
| शाहे-ज़मा | अफ़गानिस्तान का बादशाह (उल्लेख) | जिसे हिंदुस्तान पर हमले की दावत दी गई |
| कंपनी का वकील | बनारस में रहने वाला (उल्लेख) | अहंकारी; वज़ीर अली को बुरा-भला कहा, मारा गया |
| लॉर्ड क्लाइव, लॉर्ड वेल्ज़ली | अंग्रेज़ गवर्नर (उल्लेख) | कंपनी की सत्ता के प्रतीक |
3. पात्रों से जुड़ी घटनाएँ
| पात्र | घटना | घटना से पता चलता है |
|---|---|---|
| वज़ीर अली | पाँच महीने के शासन में अवध के दरबार को अंग्रेज़ी असर से लगभग पाक करना | दृढ़ देशभक्ति |
| सआदत अली | वज़ीर अली के जन्म को अपनी मौत समझना; नवाब बनकर अंग्रेज़ों को आधी जायदाद और दस लाख रुपये देना | सत्ता-लोभ और अंग्रेज़ों से साँठगाँठ |
| वज़ीर अली, टीपू सुल्तान, शमसुद्दौला | शाहे-ज़मा को हिंदुस्तान पर हमले की दावत | कंपनी के खिलाफ़ देशव्यापी लहर |
| वज़ीर अली | कलकत्ता तलब किए जाने की शिकायत पर अपमान होने से कंपनी के वकील का खंजर से कत्ल | स्वाभिमान और अंग्रेज़ों से नफ़रत |
| वज़ीर अली | जानिसारों सहित आज़मगढ़, फिर घाघरा तक और जंगलों में भटकना | संघर्ष जारी रखने का संकल्प |
| कर्नल कालिंज | पूरी फ़ौज लेकर बरसों से पीछा, फिर भी असफल | वज़ीर अली की चतुराई — "आँखों में धूल झोंकना" |
| सिपाही / लेफ़्टीनेंट | दूर से गर्द उठती देखना — लगता काफ़िला, पर दिखा एक ही सवार | सवार की तेज़ी और जोश |
| सवार (वज़ीर अली) | "तन्हाई! तन्हाई!" — "दीवार हमगोश दारद" कहकर कर्नल से अकेले में मिलना | सावधानी और चतुराई |
| सवार (वज़ीर अली) | गिरफ़्तारी में मदद के बहाने कर्नल से दस कारतूस लेना | अदम्य साहस — शेर की माँद में घुसकर शिकार |
| वज़ीर अली | नाम बताकर कर्नल की जान बख्शना और चले जाना | उदारता और वीरता |
| कर्नल कालिंज | हक्का-बक्का होकर कहना — "एक जाँबाज़ सिपाही" | शत्रु की वीरता की स्वीकृति |
4. पाठ की मुख्य बातें
- विधा — एकांकी (ऐतिहासिक); पुस्तक — स्पर्श भाग-2।
- समय व स्थान — सन् 1799, रात्रि; गोरखपुर के जंगल में कर्नल कालिंज का खेमा; अवधि 5 मिनट।
- रॉबिनहुड से तुलना — वज़ीर अली के अफ़साने रॉबिनहुड के कारनामों की याद दिलाते हैं।
- सआदत अली का सौदा — आधी मुमलिकत (जायदाद, दौलत) और दस लाख रुपये नकद।
- वज़ीफ़ा — वज़ीर अली को बनारस भेजकर तीन लाख रुपये सालाना वज़ीफ़ा तय किया गया।
- ऐतिहासिक संदर्भ — बक्सर और प्लासी की लड़ाइयाँ; लॉर्ड क्लाइव ने जो जीता, लॉर्ड वेल्ज़ली के हाथों खो जाने का डर।
- वज़ीर अली की स्कीम — नेपाल पहुँचना, अफ़गानी हमले का इंतज़ार, ताकत बढ़ाना, सआदत अली को हटाकर अवध पर कब्ज़ा, अंग्रेज़ों को निकालना।
- प्रसिद्ध संवाद — "दीवार हमगोश दारद" (दीवारों के भी कान होते हैं); "मुट्ठी भर आदमी मगर ये दमखम"; "आपने मुझे कारतूस दिए इसलिए आपकी जान बख्शी करता हूँ।"
- कारतूस — कर्नल ने सवार को दस कारतूस दिए।
- शीर्षक — कारतूस लेने की घटना ही एकांकी का चरमोत्कर्ष है, इसलिए शीर्षक सार्थक है।
5. पाठ की व्याख्या (दृश्य-क्रम से)
दृश्य 1 — खेमे का वातावरण
चाँदनी रात, अंदर लैंप जल रहा है। कर्नल कहता है कि जंगल की ज़िंदगी खतरनाक होती है; लेफ़्टीनेंट बताता है कि हफ़्तों से डेरा डाले सिपाही तंग आ गए हैं — "वज़ीर अली आदमी है या भूत, हाथ ही नहीं लगता।" आरंभ से ही वज़ीर अली का रहस्यमय और भयकारी व्यक्तित्व उभरने लगता है।
दृश्य 2 — वज़ीर अली का इतिहास
कर्नल शत्रु होकर भी वज़ीर अली की प्रशंसा करता है — उसके कारनामे रॉबिनहुड जैसे हैं; पाँच महीने में उसने अवध के दरबार को अंग्रेज़ी असर से लगभग पाक कर दिया। सआदत अली ने वज़ीर अली के जन्म को अपनी मौत समझा, क्योंकि उसके पैदा होने से सआदत अली के नवाब बनने की संभावना खत्म हो गई थी। अंग्रेज़ों ने ऐश-पसंद सआदत अली को तख्त दिलाया और बदले में आधी दौलत व दस लाख रुपये पाए — "अब वो भी मज़े करता है और हम भी।"
दृश्य 3 — देशव्यापी लहर
टीपू सुल्तान, वज़ीर अली और शमसुद्दौला ने अफ़गानिस्तान के शाहे-ज़मा को हमले का न्योता दिया। लेफ़्टीनेंट को लगता है कि कंपनी के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में लहर दौड़ गई है। कर्नल डरता है कि यह सफल हुई तो बक्सर और प्लासी की जीत धरी रह जाएगी — अर्थात कंपनी का राज खतरे में है।
दृश्य 4 — वकील का कत्ल और फ़रारी
पद से हटाकर वज़ीर अली को बनारस भेजा गया और तीन लाख सालाना वज़ीफ़ा दिया गया। गवर्नर जनरल ने कलकत्ता बुलाया तो उसने कंपनी के वकील से शिकायत की; वकील ने उलटे उसे बुरा-भला कहा। अंग्रेज़ों से नफ़रत और अपमान से भरे वज़ीर अली ने खंजर से उसका काम तमाम कर दिया और जानिसारों के साथ आज़मगढ़ भाग गया, जहाँ से उसे घाघरा तक हिफ़ाज़त से पहुँचाया गया। कर्नल मानता है — "मुट्ठी भर आदमी मगर ये दमखम।"
दृश्य 5 — रहस्यमय सवार का आगमन
सिपाही दूर उठती गर्द की सूचना देता है। लेफ़्टीनेंट को लगता है जैसे पूरा काफ़िला आ रहा हो, पर दिखता एक ही सवार है — यह उसकी तेज़ी और जोश का संकेत है। सवार सीधे खेमे तक आकर कर्नल से मिलने की माँग करता है। लेफ़्टीनेंट समझता है कि यह वज़ीर अली का कोई आदमी है जो उसे पकड़वाना चाहता है — यही भ्रम नाटकीय व्यंग्य (dramatic irony) पैदा करता है।
दृश्य 6 — "दीवार हमगोश दारद"
सवार "तन्हाई! तन्हाई!" कहकर एकांत माँगता है और कहता है "दीवार हमगोश दारद" (दीवारों के भी कान होते हैं)। कर्नल लेफ़्टीनेंट और सिपाही को बाहर भेज देता है। अब संवाद छोटे-छोटे और तनावपूर्ण हो जाते हैं — सवार खेमा डालने का कारण पूछता है और कहता है कि वज़ीर अली की गिरफ़्तारी मुश्किल है, क्योंकि वह जाँबाज़ सिपाही है।
दृश्य 7 — कारतूस और चरमोत्कर्ष
सवार गिरफ़्तारी के लिए "चंद कारतूस" माँगता है; कर्नल दस कारतूस दे देता है। सवार मुस्कराकर धन्यवाद देता है और नाम पूछने पर कहता है — "वज़ीर अली। आपने मुझे कारतूस दिए इसलिए आपकी जान बख्शी करता हूँ।" और चला जाता है। कर्नल सन्नाटे में हक्का-बक्का खड़ा रह जाता है। लेफ़्टीनेंट के पूछने पर वह दबी ज़बान से कहता है — "एक जाँबाज़ सिपाही।" शत्रु के मुँह से निकली यह प्रशंसा वज़ीर अली की वीरता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
6. प्रश्न-अभ्यास (NCERT)
मौखिक — एक-दो पंक्तियों में
1. कर्नल कालिंज का खेमा जंगल में क्यों लगा हुआ था?
कंपनी के हुक्म से वज़ीर अली को गिरफ़्तार करने के लिए, क्योंकि वह इन्हीं जंगलों में छिपा हुआ था।
2. वज़ीर अली से सिपाही क्यों तंग आ चुके थे?
हफ़्तों से जंगल में खेमा डाले रहने पर भी वज़ीर अली पकड़ में नहीं आ रहा था; वह बरसों से सबकी आँखों में धूल झोंक रहा था।
3. कर्नल ने सवार पर नज़र रखने के लिए क्यों कहा?
एक अकेला सवार तेज़ी से खेमे की ओर आ रहा था; कर्नल जानना चाहता था कि वह कौन है और किस तरफ़ जा रहा है, ताकि कोई खतरा न हो।
4. सवार ने क्यों कहा कि वज़ीर अली की गिरफ़्तारी बहुत मुश्किल है?
क्योंकि वज़ीर अली एक जाँबाज़ सिपाही है — निडर, चतुर और अपनी जान की बाज़ी लगाने वाला।
लिखित (क) — 25-30 शब्दों में
1. वज़ीर अली के अफ़साने सुनकर कर्नल को रॉबिनहुड की याद क्यों आ जाती थी?
रॉबिनहुड की तरह वज़ीर अली भी साहसी, निडर और चतुर था। वह शक्तिशाली अंग्रेज़ी सत्ता से अकेले लोहा लेता था, बार-बार उन्हें चकमा देता था और पकड़ में नहीं आता था।
2. सआदत अली कौन था? उसने वज़ीर अली की पैदाइश को अपनी मौत क्यों समझा?
सआदत अली अवध के नवाब आसिफ़उद्दौला का भाई और वज़ीर अली का चाचा था। आसिफ़उद्दौला के यहाँ बेटे की उम्मीद नहीं थी, इसलिए वह गद्दी का दावेदार था; वज़ीर अली के जन्म से उसकी यह आशा खत्म हो गई।
3. सआदत अली को अवध के तख्त पर बिठाने के पीछे कर्नल का क्या मकसद था?
सआदत अली अंग्रेज़ों का दोस्त और ऐश-पसंद था। उसे नवाब बनाकर अंग्रेज़ों ने उससे आधी जायदाद-दौलत और दस लाख रुपये नकद लिए और अवध पर अपना प्रभाव बनाए रखा।
4. कंपनी के वकील का कत्ल करने के बाद वज़ीर अली ने अपनी हिफ़ाज़त कैसे की?
वह अपने जानिसारों के साथ आज़मगढ़ भाग गया। वहाँ के शासक ने उन्हें अपनी सुरक्षा में घाघरा तक पहुँचा दिया, फिर वे वर्षों तक जंगलों में छिपकर रहे।
5. सवार के जाने के बाद कर्नल क्यों हक्का-बक्का रह गया?
क्योंकि जिस वज़ीर अली को वह पूरी फ़ौज लेकर पकड़ना चाहता था, वही अकेला उसके खेमे में आकर उससे कारतूस ले गया और उसकी जान बख्शकर चला गया — कर्नल को इसकी कल्पना भी नहीं थी।
लिखित (ख) — 50-60 शब्दों में
1. लेफ़्टीनेंट को ऐसा क्यों लगा कि कंपनी के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई है?
कर्नल ने बताया कि अफ़गानिस्तान के बादशाह शाहे-ज़मा को हिंदुस्तान पर हमले की दावत पहले टीपू सुल्तान (दक्षिण) ने, फिर वज़ीर अली (अवध) ने और फिर शमसुद्दौला (बंगाल) ने दी। देश के अलग-अलग हिस्सों के शासक एक साथ अंग्रेज़ों के विरुद्ध खड़े हो रहे थे, इसलिए लेफ़्टीनेंट को लगा कि कंपनी के खिलाफ़ पूरे देश में लहर दौड़ गई है।
2. वज़ीर अली ने कंपनी के वकील का कत्ल क्यों किया?
पद से हटाकर बनारस भेजे गए वज़ीर अली को गवर्नर जनरल ने कलकत्ता तलब किया। उसने बनारस में रहने वाले कंपनी के वकील से इसकी शिकायत की, पर वकील ने परवाह करने के बजाय उसे बुरा-भला सुना दिया। अंग्रेज़ों के प्रति पहले से नफ़रत से भरे और स्वाभिमानी वज़ीर अली ने यह अपमान सहन न कर खंजर से वकील का काम तमाम कर दिया।
3. सवार ने कर्नल से कारतूस कैसे हासिल किए?
सवार ने एकांत में कर्नल से पूछा कि वह यहाँ इतने लावलश्कर के साथ क्यों है। कर्नल ने बताया कि वज़ीर अली को पकड़ने के लिए। सवार ने कहा कि वज़ीर अली जाँबाज़ है, उसकी गिरफ़्तारी मुश्किल है, और उसे पकड़ने के लिए चंद कारतूस माँगे। कर्नल ने उसे मददगार समझकर दस कारतूस दे दिए। इस प्रकार चतुराई और साहस से उसने कारतूस हासिल किए।
4. वज़ीर अली एक जाँबाज़ सिपाही था, कैसे? स्पष्ट कीजिए।
वज़ीर अली ने पाँच महीने में अवध को अंग्रेज़ी असर से मुक्त करने का प्रयास किया, अपमान करने वाले वकील को मार डाला, मुट्ठी भर साथियों के साथ बरसों पूरी अंग्रेज़ी फ़ौज को चकमा दिया और अंत में अकेले दुश्मन के खेमे में घुसकर कर्नल से ही कारतूस ले आया। उसने कर्नल की जान भी बख्श दी। स्वयं शत्रु कर्नल ने उसे "जाँबाज़ सिपाही" कहा।
लिखित (ग) — आशय स्पष्ट कीजिए
1. मुट्ठी भर आदमी और ये दमखम।
आशय — वज़ीर अली के साथ बहुत थोड़े साथी हैं, फिर भी उनमें इतनी शक्ति, साहस और दृढ़ता है कि अंग्रेज़ों की पूरी फ़ौज बरसों से उन्हें पकड़ नहीं पा रही। कर्नल यहाँ आश्चर्य और प्रशंसा दोनों व्यक्त करता है।
2. गर्द तो ऐसे उड़ रही है जैसे कि पूरा एक काफ़िला चला आ रहा हो मगर मुझे तो एक ही सवार नज़र आता है।
आशय — सवार इतनी तेज़ी से घोड़ा दौड़ा रहा था कि उससे उड़ने वाली धूल किसी पूरे काफ़िले जितनी लग रही थी। इससे सवार की तेज़ी, जोश और असाधारण व्यक्तित्व का संकेत मिलता है।
भाषा अध्ययन
1. एक-एक पर्याय लिखिए।
खिलाफ़ — विरुद्ध; पाक — पवित्र/शुद्ध; उम्मीद — आशा; हासिल — प्राप्त; कामयाब — सफल; वज़ीफ़ा — छात्रवृत्ति/भत्ता; नफ़रत — घृणा; हमला — आक्रमण; इंतज़ार — प्रतीक्षा; मुमकिन — संभव।
2. मुहावरों का वाक्य-प्रयोग कीजिए।
आँखों में धूल झोंकना (धोखा देना) — चोर पुलिस की आँखों में धूल झोंककर भाग निकला।
कूट-कूट कर भरना (पूरी तरह भरा होना) — भगत सिंह में देशभक्ति कूट-कूट कर भरी थी।
काम तमाम कर देना (मार डालना) — शिकारी ने एक ही गोली में भेड़िये का काम तमाम कर दिया।
जान बख्श देना (प्राण छोड़ देना) — राजा ने हार मान चुके शत्रु की जान बख्श दी।
हक्का-बक्का रह जाना (हैरान रह जाना) — अचानक पुरस्कार की घोषणा सुनकर वह हक्का-बक्का रह गया।
3. कारक पहचानिए।
(क) जंगल की ज़िंदगी — संबंध कारक
(ख) कंपनी के खिलाफ़ — संबंध कारक; हिंदुस्तान में — अधिकरण कारक
(ग) वज़ीर को — कर्म कारक; पद से — अपादान कारक
(घ) फ़ौज के लिए — संप्रदान कारक; कारतूस की — संबंध कारक
(ङ) घोड़े पर — अधिकरण कारक
4. 'ने' लगाकर दोबारा लिखिए।
(क) घोड़े ने पानी पिया। (ख) बच्चों ने दशहरे का मेला देखा। (ग) रॉबिनहुड ने गरीबों की मदद की। (घ) देशभर के लोगों ने उसकी प्रशंसा की।
5. उचित विराम-चिह्न लगाइए।
(क) कर्नल ने कहा, "सिपाहियो! इस पर नज़र रखो, ये किस तरफ़ जा रहा है।"
(ख) सवार ने पूछा, "आपने इस मुकाम पर क्यों खेमा डाला है? इतने लावलश्कर की क्या ज़रूरत है?"
(ग) खेमे के अंदर दो व्यक्ति बैठे बातें कर रहे थे। चाँदनी छिटकी हुई थी और बाहर सिपाही पहरा दे रहे थे। एक व्यक्ति कह रहा था, "दुश्मन कभी भी हमला कर सकता है।"
7. अतिरिक्त प्रश्न — 20 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
- 'कारतूस' की विधा है— (क) एकांकी (ख) कहानी (ग) संस्मरण (घ) डायरी
- 'कारतूस' के लेखक हैं— (क) हबीब तनवीर (ख) प्रेमचंद (ग) मिथिलेश्वर (घ) निदा फ़ाज़ली
- हबीब तनवीर का जन्म कहाँ हुआ? (क) रायपुर (ख) नागपुर (ग) दिल्ली (घ) भोपाल
- एकांकी की घटना किस वर्ष की है? (क) 1757 (ख) 1764 (ग) 1799 (घ) 1857
- कर्नल का खेमा कहाँ लगा था? (क) बनारस (ख) गोरखपुर के जंगल (ग) आज़मगढ़ (घ) नेपाल
- कर्नल का नाम क्या था? (क) वेल्ज़ली (ख) क्लाइव (ग) कालिंज (घ) डलहौज़ी
- वज़ीर अली के कारनामे सुनकर किसकी याद आती थी? (क) शिवाजी (ख) टीपू सुल्तान (ग) रॉबिनहुड (घ) नेपोलियन
- वज़ीर अली ने लगभग कितने महीने शासन किया? (क) तीन (ख) सात (ग) बारह (घ) पाँच
- सआदत अली कौन था? (क) वज़ीर अली का भाई (ख) आसिफ़उद्दौला का भाई (ग) बंगाल का नवाब (घ) अफ़गान बादशाह
- सआदत अली ने अंग्रेज़ों को कितने रुपये नकद दिए? (क) पाँच लाख (ख) दस लाख (ग) तीन लाख (घ) बीस लाख
- शाहे-ज़मा कहाँ का बादशाह था? (क) अफ़गानिस्तान (ख) ईरान (ग) नेपाल (घ) तुर्की
- शमसुद्दौला कौन था? (क) नवाब बंगाल का निस्बती भाई (ख) अवध का नवाब (ग) मैसूर का राजा (घ) अंग्रेज़ अफ़सर
- वज़ीर अली को कितना सालाना वज़ीफ़ा मिला? (क) एक लाख (ख) दस लाख (ग) पाँच लाख (घ) तीन लाख
- वज़ीर अली ने कंपनी के वकील को किससे मारा? (क) खंजर (ख) तलवार (ग) बंदूक (घ) भाला
- वकील का कत्ल करके वज़ीर अली किस ओर भागा? (क) नेपाल (ख) कलकत्ता (ग) दिल्ली (घ) आज़मगढ़
- वज़ीर अली की योजना कहाँ पहुँचने की थी? (क) नेपाल (ख) अफ़गानिस्तान (ग) बंगाल (घ) मैसूर
- 'दीवार हमगोश दारद' का अर्थ है— (क) दीवार ऊँची है (ख) दीवार टूट गई (ग) दीवारों के भी कान होते हैं (घ) दीवार के पार कोई है
- कर्नल ने सवार को कितने कारतूस दिए? (क) पाँच (ख) दस (ग) बीस (घ) पचास
- सवार ने कर्नल की जान क्यों बख्शी? (क) डर के कारण (ख) दोस्ती के कारण (ग) कारतूस देने के कारण (घ) पैसे के कारण
- अंत में कर्नल ने सवार को क्या कहा? (क) एक जाँबाज़ सिपाही (ख) गद्दार (ग) चोर (घ) दोस्त
उत्तर — 1-क, 2-क, 3-क, 4-ग, 5-ख, 6-ग, 7-ग, 8-घ, 9-ख, 10-ख, 11-क, 12-क, 13-घ, 14-क, 15-घ, 16-क, 17-ग, 18-ख, 19-ग, 20-क
8. अतिरिक्त प्रश्न — 20 लघु-उत्तरीय प्रश्न
1. एकांकी के आरंभ में खेमे का वातावरण कैसा है?
रात का समय है, बाहर चाँदनी छिटकी हुई है, खेमे के अंदर लैंप जल रहा है और कर्नल-लेफ़्टीनेंट वज़ीर अली के बारे में बातें कर रहे हैं।
2. लेफ़्टीनेंट वज़ीर अली को 'भूत' क्यों कहता है?
क्योंकि हफ़्तों से पीछा करने पर भी वह हाथ नहीं आता, अचानक प्रकट होता और गायब हो जाता है।
3. वज़ीर अली ने अवध के दरबार के लिए क्या किया?
लगभग पाँच महीने के शासन में उसने अवध के दरबार को अंग्रेज़ी प्रभाव से लगभग पूरी तरह मुक्त कर दिया।
4. "अब वो भी मज़े करता है और हम भी" — कर्नल के इस कथन का क्या अर्थ है?
सआदत अली नवाब बनकर ऐश कर रहा है और अंग्रेज़ों को आधी जायदाद व दस लाख रुपये मिल गए — दोनों का स्वार्थ पूरा हो रहा है।
5. अफ़गानिस्तान को हिंदुस्तान पर हमले की दावत किसने-किसने दी?
सबसे पहले टीपू सुल्तान ने, फिर वज़ीर अली ने और फिर शमसुद्दौला ने।
6. कर्नल को किस बात का डर था?
कि यदि देशव्यापी लहर सफल हो गई तो बक्सर और प्लासी की जीत धरी रह जाएगी और लॉर्ड क्लाइव ने जो हासिल किया, वह लॉर्ड वेल्ज़ली के हाथों खो जाएगा।
7. वज़ीर अली को पद से हटाने के बाद अंग्रेज़ों ने क्या किया?
उसे बनारस पहुँचा दिया और तीन लाख रुपये सालाना वज़ीफ़ा तय कर दिया।
8. आज़मगढ़ के शासक ने वज़ीर अली की कैसे मदद की?
उसने वज़ीर अली और उसके जानिसारों को अपनी सुरक्षा में घाघरा तक पहुँचा दिया।
9. वज़ीर अली की योजना क्या थी?
नेपाल पहुँचना, अफ़गानी हमले की प्रतीक्षा करना, ताकत बढ़ाना, सआदत अली को हटाकर अवध पर कब्ज़ा करना और अंग्रेज़ों को हिंदुस्तान से निकालना।
10. वज़ीर अली को पकड़ने के लिए कौन-कौन पीछा कर रहे थे?
अंग्रेज़ों की फ़ौजें और नवाब सआदत अली खाँ के सिपाही बड़ी सख्ती से उसका पीछा कर रहे थे।
11. सिपाही ने कर्नल को क्या सूचना दी?
कि दूर से गर्द उठती दिखाई दे रही है, यानी कोई तेज़ी से इस ओर आ रहा है।
12. लेफ़्टीनेंट ने सवार के बारे में क्या अनुमान लगाया?
कि वह वज़ीर अली का कोई आदमी होगा जो अंग्रेज़ों से मिलकर उसे गिरफ़्तार करवाना चाहता है।
13. सवार ने आते ही 'तन्हाई! तन्हाई!' क्यों कहा?
वह कर्नल से अकेले में बात करना चाहता था, ताकि उसकी पहचान और योजना किसी और को पता न चले।
14. कर्नल ने लेफ़्टीनेंट और सिपाही को बाहर क्यों भेजा?
सवार के आग्रह पर, ताकि वह खुलकर राज़ की बात कह सके; कर्नल को लगा कि वह कोई गुप्त सूचना देने आया है।
15. सवार ने कर्नल से कौन-कौन से प्रश्न पूछे?
उसने पूछा कि कर्नल ने इस मुकाम पर खेमा क्यों डाला है और इतने लावलश्कर का क्या मतलब है।
16. सवार ने कारतूस माँगने का क्या कारण बताया?
उसने कहा कि उसे वज़ीर अली को गिरफ़्तार करने के लिए कारतूस चाहिए।
17. सवार ने अपना परिचय कब और कैसे दिया?
कारतूस मिलने के बाद कर्नल के नाम पूछने पर उसने कहा — "वज़ीर अली। आपने मुझे कारतूस दिए इसलिए आपकी जान बख्शी करता हूँ।"
18. वज़ीर अली के जाने के बाद कर्नल की क्या दशा थी?
कर्नल सन्नाटे में आ गया और हक्का-बक्का खड़ा रह गया; उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि वज़ीर अली स्वयं आकर चला गया।
19. कर्नल ने 'दबी ज़बान से' "एक जाँबाज़ सिपाही" क्यों कहा?
वह शत्रु की वीरता से प्रभावित था, पर अपनी हार और शर्मिंदगी के कारण खुलकर नहीं कह पा रहा था।
20. एकांकी का शीर्षक 'कारतूस' क्यों रखा गया है?
पूरी एकांकी का चरम-बिंदु वह क्षण है जब वज़ीर अली दुश्मन से ही कारतूस ले जाता है; यही घटना उसके साहस को उजागर करती है।
9. अतिरिक्त प्रश्न — 10 दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न
1. वज़ीर अली के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर — वज़ीर अली सच्चा देशभक्त था; उसका एकमात्र लक्ष्य अंग्रेज़ों को देश से निकालना था। वह निडर और साहसी था — अकेले दुश्मन के खेमे में चला गया। वह चतुर था — बरसों अंग्रेज़ों को चकमा देता रहा और बातों में फँसाकर कर्नल से ही कारतूस ले आया। वह स्वाभिमानी था — अपमान करने वाले वकील को नहीं छोड़ा। वह उदार भी था — कारतूस के बदले कर्नल की जान बख्श दी। सचमुच वह "जाँबाज़ सिपाही" था।
2. कर्नल कालिंज के चरित्र पर प्रकाश डालिए।
उत्तर — कर्नल कालिंज अनुभवी अंग्रेज़ सैन्य अधिकारी है, जो कंपनी के प्रति वफ़ादार है और वर्षों से वज़ीर अली का पीछा कर रहा है। वह इतिहास और राजनीति का जानकार है और अंग्रेज़ों की स्वार्थी कूटनीति को स्पष्ट स्वीकार करता है। वह शत्रु की वीरता का सम्मान करता है — उसे रॉबिनहुड से तुलना करता है और अंत में "जाँबाज़ सिपाही" कहता है। पर अति-आत्मविश्वास के कारण वह सवार को पहचान नहीं पाता और धोखा खा जाता है।
3. 'कारतूस' एकांकी में अंग्रेज़ों की कूटनीति का किस प्रकार पर्दाफ़ाश हुआ है?
उत्तर — अंग्रेज़ व्यापारी बनकर आए पर रियासतों पर कब्ज़ा करने लगे। उन्होंने देशभक्त वज़ीर अली को हटाकर ऐश-पसंद सआदत अली को नवाब बनाया और बदले में आधी जायदाद व दस लाख रुपये लिए। वज़ीर अली को वज़ीफ़ा देकर बनारस भेज दिया और फिर कलकत्ता तलब करके नियंत्रण में रखना चाहा। उनके वकील ने नवाब तक का अपमान किया। "फूट डालो और राज करो" की यही नीति कर्नल के संवादों से उजागर होती है।
4. एकांकी के अंत में कर्नल के हक्का-बक्का रह जाने के कारणों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर — कर्नल पूरी फ़ौज के साथ जिस व्यक्ति को पकड़ने आया था, वह बिना किसी डर के अकेला उसके खेमे में आया, उससे बातें कीं, कारतूस लिए और नाम बताकर सुरक्षित चला गया। कर्नल उसे पहचान तक नहीं पाया। ऊपर से वज़ीर अली ने उसकी जान बख्शने की बात कहकर उस पर एहसान किया। इस अप्रत्याशित घटना से कर्नल का अहंकार टूट गया, उसे अपनी असफलता और शत्रु की श्रेष्ठता का एहसास हुआ — इसलिए वह स्तब्ध रह गया।
5. 'कारतूस' एकांकी की रंगमंचीय विशेषताएँ बताइए।
उत्तर — एकांकी में एक ही दृश्य है, अवधि केवल 5 मिनट, स्थान एक (कर्नल का खेमा) और पात्र केवल चार — इसलिए इसका मंचन सरल है। आरंभ में पात्र, अवधि, ज़माना, समय और स्थान दिए गए हैं। कोष्ठकों में रंग-निर्देश (चाँदनी, लैंप, टापों की आवाज़, सिपाही का आना-जाना) हैं। संवाद छोटे, चुस्त और उर्दू-मिश्रित हैं; अंत में संवाद एक-एक पंक्ति के होकर तनाव बढ़ाते हैं। रहस्य अंत तक बना रहता है, जो इसे प्रभावशाली बनाता है।
6. "शेर की माँद में पहुँचकर उससे दो-दो हाथ करना" — यह कथन वज़ीर अली पर कैसे सटीक बैठता है?
उत्तर — कर्नल का खेमा, जहाँ पूरी फ़ौज थी, वज़ीर अली के लिए 'शेर की माँद' था। जिस शत्रु से वह बरसों से छिप रहा था, उसी के खेमे में वह अकेला, बिना डरे पहुँचा, कर्नल से आमने-सामने बात की, उसकी योजना जानी और उसी से हथियार (कारतूस) लेकर निकल आया। यह अदम्य साहस, आत्मविश्वास और चतुराई का उदाहरण है, इसलिए कथन पूरी तरह सटीक है।
7. वज़ीर अली और सआदत अली की तुलना कीजिए।
उत्तर — वज़ीर अली देशभक्त, स्वाभिमानी और अंग्रेज़-विरोधी था; उसने सत्ता खोकर भी संघर्ष नहीं छोड़ा। सआदत अली सत्ता-लोभी, ऐश-पसंद और अंग्रेज़ों का मित्र था; उसने नवाबी पाने के लिए राज्य की आधी दौलत और दस लाख रुपये अंग्रेज़ों को दे दिए। वज़ीर अली के जन्म को उसने अपनी मौत समझा। एक देश के लिए जीता था, दूसरा अपने स्वार्थ के लिए — यही दोनों का अंतर है।
8. एकांकी में ऐतिहासिक तथ्यों का प्रयोग किस प्रकार हुआ है?
उत्तर — एकांकी सन् 1799 की है और इसमें अवध के नवाब आसिफ़उद्दौला, सआदत अली, वज़ीर अली, टीपू सुल्तान, शमसुद्दौला, अफ़गान बादशाह शाहे-ज़मा, लॉर्ड क्लाइव और लॉर्ड वेल्ज़ली जैसे ऐतिहासिक व्यक्तियों का उल्लेख है। बक्सर और प्लासी की लड़ाइयों, ईस्ट इंडिया कंपनी की रियासतें हड़पने की नीति और वज़ीफ़ा व्यवस्था का भी संकेत है। इन तथ्यों से कथा विश्वसनीय और प्रामाणिक बनती है।
9. इस एकांकी में नाटकीयता और रहस्य कैसे बना रहता है?
उत्तर — पूरी एकांकी में वज़ीर अली की चर्चा होती है, पर वह कौन है, यह अंत तक पता नहीं चलता। गर्द उड़ने, अकेले सवार के आने और "तन्हाई" माँगने से रहस्य गहराता है। लेफ़्टीनेंट उसे मुखबिर समझता है, जिससे दर्शक भी भ्रम में रहते हैं। अंतिम संवाद "वज़ीर अली" से अचानक रहस्य खुलता है और कर्नल के हक्का-बक्का रहने से नाटकीय चरमोत्कर्ष बनता है।
10. 'कारतूस' एकांकी से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर — एकांकी देश के लिए निडर होकर संघर्ष करने की प्रेरणा देती है। वज़ीर अली दिखाता है कि साधन कम हों तब भी साहस, चतुराई और दृढ़ संकल्प से बड़े शत्रु का सामना किया जा सकता है। स्वाभिमान से समझौता नहीं करना चाहिए, पर उदारता भी नहीं छोड़नी चाहिए। साथ ही यह स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले गुमनाम वीरों के प्रति सम्मान जगाती है।
10. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
इस एकांकी से चरित्र-चित्रण और घटना-आधारित प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं।
⭐ सबसे महत्वपूर्ण (अवश्य तैयार करें)
- वज़ीर अली एक जाँबाज़ सिपाही था, कैसे? स्पष्ट कीजिए।
- सवार ने कर्नल से कारतूस कैसे हासिल किए?
- वज़ीर अली ने कंपनी के वकील का कत्ल क्यों किया?
- सवार के जाने के बाद कर्नल क्यों हक्का-बक्का रह गया?
- सआदत अली कौन था? उसने वज़ीर अली की पैदाइश को अपनी मौत क्यों समझा?
महत्वपूर्ण
- लेफ़्टीनेंट को क्यों लगा कि कंपनी के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में लहर दौड़ गई है?
- वज़ीर अली के अफ़साने सुनकर कर्नल को रॉबिनहुड की याद क्यों आती थी?
- सआदत अली को अवध के तख्त पर बिठाने के पीछे अंग्रेज़ों का क्या मकसद था?
- "मुट्ठी भर आदमी और ये दमखम" — आशय स्पष्ट कीजिए।
- एकांकी के शीर्षक 'कारतूस' की सार्थकता।
व्याकरण / मूल्यपरक
- मुहावरे — आँखों में धूल झोंकना, कूट-कूट कर भरना, काम तमाम कर देना, जान बख्श देना, हक्का-बक्का रह जाना।
- कारक पहचानना; 'ने' लगाकर वाक्य बदलना; विराम-चिह्न।
- 'एकांकी' और 'नाटक' में अंतर लिखिए।
🔗 कक्षा 10 हिंदी — स्पर्श व संचयन के सभी पाठ आपस में जुड़े हुए
- बड़े भाई साहब — प्रेमचंद (स्पर्श)
- डायरी का एक पन्ना — सीताराम सेकसरिया (स्पर्श)
- अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले — निदा फ़ाज़ली (स्पर्श)
- कारतूस — हबीब तनवीर (स्पर्श) (आप यही पढ़ रहे हैं)
- हरिहर काका — मिथिलेश्वर (संचयन)
- सपनों के-से दिन — गुरदयाल सिंह (संचयन)
— मनोज शर्मा, हिंदी शिक्षक | HINDI GYAN —
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें