अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले (निदा फ़ाज़ली) कक्षा 10 हिंदी स्पर्श — पात्र-चार्ट, व्याख्या, प्रश्नोत्तर और MCQ
अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले (निदा फ़ाज़ली) — कक्षा 10 हिंदी स्पर्श: पात्र-चार्ट, व्याख्या, प्रश्नोत्तर और MCQ
कक्षा 10 हिंदी (स्पर्श भाग-2) के पाठ 'अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले' की संपूर्ण अध्ययन सामग्री — लेखक परिचय, पाठ का सार, पात्रों का चार्ट, पात्रों से जुड़ी घटनाएँ, प्रसंग-वार व्याख्या, NCERT प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, 20 वस्तुनिष्ठ, 20 लघु-उत्तरीय, 10 दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न तथा परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न।
1. पाठ परिचय
यह पाठ निदा फ़ाज़ली की पुस्तक 'तमाशा मेरे आगे' से लिया गया अंश है। लेखक बताते हैं कि धरती सभी जीवधारियों की साझी है, पर मनुष्य ने इसे अपनी जागीर बना लिया है। पहले लोग पशु-पक्षियों के दुख से भी दुखी हो जाते थे; आज मनुष्य इतना स्वार्थी हो गया है कि दूसरों के दुख की उसे कोई परवाह नहीं। पाठ पर्यावरण-असंतुलन और घटती संवेदनशीलता पर चिंता प्रकट करता है।
लेखक परिचय — निदा फ़ाज़ली (1938–2016)
निदा फ़ाज़ली का जन्म 12 अक्तूबर 1938 को दिल्ली में हुआ और बचपन ग्वालियर में बीता। वे उर्दू की साठोत्तरी पीढ़ी के महत्त्वपूर्ण कवि माने जाते हैं। आम बोलचाल की भाषा में सरलता से दिल में उतर जाने वाली कविता लिखने में उन्हें महारत थी। गद्य में शेर-ओ-शायरी पिरोकर थोड़े में बहुत कुछ कह देना उनकी विशेषता है। वे फ़िल्म उद्योग से भी जुड़े रहे। 8 फ़रवरी 2016 को उनका निधन हुआ।
प्रमुख कृतियाँ — लफ़्ज़ों का पुल (पहली कविता-पुस्तक), खोया हुआ सा कुछ (1999 का साहित्य अकादेमी पुरस्कार), आत्मकथा — दीवारों के बीच, दीवारों के पार; गद्य — तमाशा मेरे आगे।
पाठ का सार
- बादशाह सुलेमान (सोलोमेन) सभी पशु-पक्षियों की भाषा जानते थे। उनकी फ़ौज से डरी चींटियों से उन्होंने कहा — "मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं हूँ, सबके लिए मुहब्बत हूँ।"
- सिंधी कवि शेख अयाज़ के पिता ने बाजू पर रेंगते च्योंटे को देखा तो भोजन छोड़कर उसे कुएँ पर उसके घर छोड़ने चल पड़े।
- पैगंबर नूह (असली नाम लशकर) ने एक घायल कुत्ते को दुत्कारा; कुत्ते के उत्तर — "बनाने वाला सबका एक है" — से दुखी होकर वे उम्र भर रोते रहे।
- धरती पर पशु, पक्षी, नदी, पर्वत, समंदर सबका बराबर हक है, पर मनुष्य ने दीवारें खड़ी कर दीं। बढ़ती आबादी, कटते पेड़, प्रदूषण और बारूद से प्रकृति का संतुलन बिगड़ा — गरमी, बेवक्त बरसात, भूकंप, बाढ़, तूफ़ान, नए रोग।
- बंबई में बिल्डरों ने समंदर को पीछे धकेला तो गुस्साए समंदर ने तीन जहाज़ों को गेंद की तरह उछाल फेंका — वर्ली, बांद्रा (कार्टर रोड) और गेटवे ऑफ़ इंडिया पर।
- लेखक की माँ पेड़-पौधों, दरिया, कबूतरों और मुर्गों के प्रति संवेदनशील थीं। कबूतर का अंडा अपने हाथ से टूट जाने पर उन्होंने पूरे दिन रोज़ा रखा और माफ़ी माँगती रहीं।
- वर्सोवा (बंबई) में लेखक के फ़्लैट में कबूतरों ने घोंसला बनाया; परेशानी से तंग आकर पत्नी ने जाली लगवा दी। अब कबूतर रात-भर खिड़की के बाहर उदास बैठे रहते हैं — न सुलेमान है, न लेखक की माँ, जो उनका दुख समझे।
2. पात्रों का चार्ट
पाठ में कोई एक कथा नहीं, बल्कि कई प्रसंग हैं; हर पात्र मनुष्य और अन्य जीवों के संबंध का एक पहलू दिखाता है।
| पात्र | परिचय | विशेषता / प्रतीक |
|---|---|---|
| लेखक (निदा फ़ाज़ली) | कथावाचक; ग्वालियर में बचपन, अब बंबई के वर्सोवा में निवास | संवेदनशील, प्रकृति-प्रेमी, बदलते समय पर चिंतित |
| सुलेमान (सोलोमेन) | ईसा से 1025 वर्ष पूर्व के बादशाह; मनुष्यों और पशु-पक्षियों के हाकिम | सब जीवों की भाषा समझने वाले, दयालु — "सबके लिए मुहब्बत" |
| चींटियाँ | सुलेमान के रास्ते में | छोटे जीवों का भय; सुलेमान के लिए दुआ करने वाली |
| शेख अयाज़ | सिंधी भाषा के महाकवि | पिता की करुणा की घटना के वर्णनकर्ता |
| शेख अयाज़ के पिता | — | अत्यंत संवेदनशील; च्योंटे को उसके घर छोड़ने भोजन छोड़कर उठे |
| नूह (लशकर) | पैगंबर; 'नूह' उपाधि (लकब) | घायल कुत्ते को दुत्कारने पर पश्चाताप में उम्र भर रोते रहे |
| घायल कुत्ता | नूह के सामने से गुज़रा | "बनाने वाला सबका एक है" — समानता का संदेश |
| युधिष्ठिर का कुत्ता | महाभारत | अंत तक साथ निभाने वाला, वफ़ादारी का प्रतीक |
| लेखक की माँ | ग्वालियर में | करुणामयी, धार्मिक; पेड़, फूल, दरिया, कबूतर, मुर्गे सबके प्रति आदर; अंडा टूटने पर रोज़ा रखा |
| लेखक की पत्नी | वर्सोवा, बंबई में | व्यावहारिक, आधुनिक सोच; परेशानी से बचने के लिए जाली लगवाई |
| कबूतर (ग्वालियर और बंबई) | घोंसला बनाने वाले जोड़े | बेघर होते पशु-पक्षियों के प्रतीक |
| समंदर | बंबई का समुद्र (मानवीकरण) | प्रकृति की सहनशक्ति और उसके गुस्से का प्रतीक |
| बिल्डर | बंबई | मनुष्य के लालच और प्रकृति के शोषण के प्रतीक |
3. पात्रों से जुड़ी घटनाएँ
| पात्र | घटना | घटना का संदेश |
|---|---|---|
| सुलेमान | लश्कर की आहट से डरी चींटियों को आश्वासन देना | शक्तिशाली होकर भी कमज़ोरों के प्रति दया |
| शेख अयाज़ के पिता | बाजू पर काला च्योंटा देखकर भोजन छोड़ उसे कुएँ पर छोड़ने जाना | "घर वाले को बेघर करना" भी पाप; हर जीव का घर होता है |
| नूह | घायल कुत्ते को "गंदे कुत्ते" कहकर दुत्कारना; कुत्ते का उत्तर सुनकर उम्र भर रोना | सभी जीव एक ही ईश्वर की रचना; किसी का अपमान नहीं |
| युधिष्ठिर | सबके साथ छोड़ देने पर कुत्ते का अंत तक साथ देना | पशुओं की वफ़ादारी |
| समंदर | बिल्डरों द्वारा ज़मीन छीने जाने पर तीन जहाज़ उछाल फेंकना | प्रकृति की सहनशक्ति की सीमा |
| लेखक की माँ | सूरज ढले पत्ते न तोड़ने, दीया-बत्ती के समय फूल न तोड़ने, दरिया को सलाम करने की सीख | प्रकृति के प्रति आदर की परंपरा |
| लेखक की माँ | कबूतर का दूसरा अंडा बचाने के प्रयास में हाथ से गिरकर टूटना; पूरे दिन का रोज़ा | अनजाने अपराध पर भी गहरा पश्चाताप |
| लेखक की पत्नी | कबूतरों के घोंसले पर जाली लगवाना, खिड़की बंद करना | आज के मनुष्य की सुविधा-केंद्रित, संवेदनहीन सोच |
| कबूतर (बंबई) | रात-भर खिड़की के बाहर खामोश और उदास बैठे रहना | बेघर होते जीवों का दुख, जिसे अब कोई नहीं समझता |
4. पाठ की मुख्य बातें
- स्रोत — निदा फ़ाज़ली की पुस्तक 'तमाशा मेरे आगे'; पुस्तक — स्पर्श भाग-2।
- मुख्य विचार — धरती सबकी साझी है; मनुष्य की स्वार्थ-भरी भूख ने अन्य जीवों को बेघर कर दिया।
- सुलेमान — ईसा से 1025 वर्ष पूर्व; कुरआन में 'सुलेमान', बाइबिल में 'सोलोमेन'।
- नूह — असली नाम लशकर; 'नूह' लकब इसलिए कि वे सारी उम्र रोते रहे।
- दोहे — "मिट्टी से मिट्टी मिले..."; "सब की पूजा एक-सी, अलग-अलग है रीत..."; "नदिया सींचे खेत को, तोता कुतरे आम..."
- प्रकृति का असंतुलन — ज़्यादा गरमी, बेवक्त बरसात, ज़लज़ले (भूकंप), सैलाब (बाढ़), तूफ़ान, नित नए रोग।
- समंदर का गुस्सा — तीन जहाज़: वर्ली के किनारे, बांद्रा में कार्टर रोड के सामने औंधे मुँह, गेटवे ऑफ़ इंडिया पर टूटे-फूटे।
- महत्वपूर्ण पंक्ति — "जो जितना बड़ा होता है उसे उतना ही कम गुस्सा आता है।"
- माँ की सीखें — कबूतर हज़रत मुहम्मद को अज़ीज़ हैं; मुर्गा मुल्ला जी से पहले अज़ान देता है।
- शीर्षक — आज ऐसे लोग नहीं रहे जो दूसरों (पशु-पक्षियों सहित) के दुख से दुखी हों।
5. पाठ की व्याख्या (प्रसंग-क्रम से)
प्रसंग 1 — सुलेमान और चींटियाँ
सुलेमान केवल मनुष्यों के नहीं, सभी पशु-पक्षियों के भी राजा थे और उनकी भाषा जानते थे। उनकी फ़ौज के घोड़ों की आवाज़ से डरकर चींटियाँ बिलों में भागने लगीं। सुलेमान रुके और बोले कि खुदा ने उन्हें सबका रखवाला बनाया है; वे मुसीबत नहीं, मुहब्बत हैं। यह प्रसंग बताता है कि सच्ची शक्ति कमज़ोरों की रक्षा में है।
प्रसंग 2 — शेख अयाज़ के पिता
नहाकर लौटे पिता ने रोटी का कौर तोड़ा ही था कि बाजू पर काला च्योंटा दिखा। वे भोजन छोड़कर उठ गए, क्योंकि उन्होंने "एक घर वाले को बेघर" कर दिया था और उसे कुएँ पर उसके घर छोड़ने जाना था। एक छोटे-से कीड़े के प्रति भी ऐसी करुणा पुराने समय की संवेदनशीलता दिखाती है।
प्रसंग 3 — नूह और घायल कुत्ता
नूह ने घायल कुत्ते को "गंदा" कहकर दुत्कारा। कुत्ते ने उत्तर दिया कि न वह अपनी मर्ज़ी से कुत्ता है, न नूह अपनी पसंद से इनसान; बनाने वाला सबका एक है। दोहा "मिट्टी से मिट्टी मिले..." बताता है कि मरने के बाद सब मिट्टी में मिल जाते हैं, फिर ऊँच-नीच कैसा। नूह इतने दुखी हुए कि मुद्दत तक रोते रहे। युधिष्ठिर के कुत्ते का उदाहरण पशुओं की वफ़ादारी दिखाता है।
प्रसंग 4 — धरती सबकी, पर दीवारें मनुष्य की
संसार कैसे बना, इस पर विज्ञान और धर्मग्रंथ अलग-अलग उत्तर देते हैं, पर धरती किसी एक की नहीं। मनुष्य ने अपनी बुद्धि से दीवारें खड़ी कर दीं — पहले संसार एक परिवार था, अब टुकड़ों में बँट गया; बड़े आँगनों की जगह डिब्बे जैसे घर आ गए। बढ़ती आबादी ने समंदर पीछे धकेला, पेड़ काटे, प्रदूषण ने पंछी भगाए और बारूद ने वातावरण बिगाड़ा। परिणाम है — गरमी, बेवक्त बरसात, भूकंप, बाढ़, तूफ़ान और नए रोग।
प्रसंग 5 — समंदर का गुस्सा
लेखक ने समंदर का मानवीकरण किया है। बिल्डरों ने उसकी ज़मीन हथियाई तो वह टाँगें समेटकर बैठा, फिर उकड़ूँ बैठा, फिर खड़ा हुआ; जगह न बची तो गुस्सा आ गया। "जो जितना बड़ा होता है उसे उतना ही कम गुस्सा आता है", पर आता है तो रोकना कठिन होता है। एक रात उसने तीन जहाज़ों को गेंद की तरह तीन दिशाओं में फेंक दिया। संदेश — प्रकृति की सहनशक्ति की सीमा है।
प्रसंग 6 — माँ की सीखें
लेखक की माँ कहती थीं — सूरज ढले पत्ते मत तोड़ो, पेड़ रोएँगे; दीया-बत्ती के समय फूल मत तोड़ो, बद्दुआ देते हैं; दरिया को सलाम करो; कबूतरों को मत सताओ, वे हज़रत मुहम्मद को प्यारे हैं; मुर्गा सबको अज़ान देकर जगाता है। दोहा "सब की पूजा एक-सी..." बताता है कि हर जीव अपने ढंग से ईश्वर की उपासना करता है।
प्रसंग 7 — कबूतर का अंडा और माँ का रोज़ा
ग्वालियर के घर में बिल्ली ने कबूतर का एक अंडा तोड़ दिया। माँ ने दूसरे को बचाने की कोशिश की, पर वह उनके हाथ से गिरकर टूट गया। कबूतरों का दुख देखकर माँ रो पड़ीं और इस "गुनाह" की माफ़ी के लिए पूरे दिन का रोज़ा रखा — बिना खाए-पिए नमाज़ पढ़ती और दुआ माँगती रहीं।
प्रसंग 8 — वर्सोवा के कबूतर
ग्वालियर से बंबई आने तक संसार बदल गया। वर्सोवा में जहाँ जंगल था, वहाँ बस्ती बस गई और परिंदे-चरिंदे बेघर हो गए। लेखक के फ़्लैट में कबूतरों ने घोंसला बनाया, पर चीज़ें गिराने और लाइब्रेरी में घुसने से तंग आकर पत्नी ने जाली लगवा दी। अब कबूतर रात-भर बाहर उदास बैठे रहते हैं। लेखक कहते हैं — अब न सुलेमान है, न मेरी माँ, जो इनका दुख बाँटे। यही पाठ के शीर्षक का मर्म है।
6. प्रश्न-अभ्यास (NCERT)
मौखिक — एक-दो पंक्तियों में
1. बड़े-बड़े बिल्डर समुद्र को पीछे क्यों धकेल रहे थे?
समुद्र की ज़मीन हथियाकर उस पर इमारतें और बस्तियाँ बनाने के लिए, क्योंकि बढ़ती आबादी के लिए जगह कम पड़ रही थी।
2. लेखक का घर किस शहर में था?
लेखक का घर पहले ग्वालियर में था; अब वे बंबई (मुंबई) के वर्सोवा में रहते हैं।
3. जीवन कैसे घरों में सिमटने लगा है?
पहले लोग बड़े-बड़े दालानों और आँगनों वाले घरों में मिल-जुलकर रहते थे; अब जीवन छोटे-छोटे डिब्बे जैसे घरों (फ़्लैटों) में सिमटने लगा है।
4. कबूतर परेशानी में इधर-उधर क्यों फड़फड़ा रहे थे?
क्योंकि उनके दोनों अंडे टूट गए थे — एक बिल्ली ने तोड़ दिया और दूसरा लेखक की माँ के हाथ से गिरकर टूट गया।
लिखित (क) — 25-30 शब्दों में
1. अरब में लशकर को नूह के नाम से क्यों याद करते हैं?
लशकर ने एक घायल कुत्ते को दुत्कारा था। कुत्ते के यह कहने पर कि सबको बनाने वाला एक ही है, वे इतने दुखी हुए कि सारी उम्र रोते रहे। रोने (नूह/नौहा) के कारण अरब उन्हें 'नूह' के लकब से याद करते हैं।
2. लेखक की माँ किस समय पेड़ों के पत्ते तोड़ने के लिए मना करती थीं और क्यों?
वे सूरज ढलने के बाद पत्ते तोड़ने से मना करती थीं, क्योंकि उनका मानना था कि उस समय पत्ते तोड़ने से पेड़ रोते हैं। यह उनकी प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता थी।
3. प्रकृति में आए असंतुलन का क्या परिणाम हुआ?
प्रकृति में असंतुलन से गरमी में अधिक गरमी, बेवक्त की बरसात, भूकंप, बाढ़, तूफ़ान और नित नए रोग फैलने लगे। बंबई में समुद्र का प्रकोप भी इसी का परिणाम था।
4. लेखक की माँ ने पूरे दिन का रोज़ा क्यों रखा?
कबूतर का दूसरा अंडा बचाने की कोशिश में वह उनके हाथ से गिरकर टूट गया। कबूतरों को दुखी देखकर उन्होंने इसे अपना गुनाह माना और खुदा से माफ़ी माँगने के लिए पूरे दिन का रोज़ा रखा।
5. लेखक ने ग्वालियर से बंबई तक किन बदलावों को महसूस किया?
ग्वालियर में लोग पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशील थे और बड़े घर थे। बंबई के वर्सोवा में जहाँ जंगल, पेड़ और परिंदे थे, वहाँ बस्तियाँ बस गईं; पशु-पक्षी बेघर हो गए और लोग उनके प्रति संवेदनहीन हो गए।
6. 'डेरा डालने' से आप क्या समझते हैं?
'डेरा डालना' का अर्थ है — कुछ समय के लिए कहीं अस्थायी रूप से ठहर जाना। पाठ में बेघर हुए पक्षियों ने जहाँ-तहाँ अस्थायी ठिकाने बना लिए हैं।
7. शेख अयाज़ के पिता बाजू पर काला च्योंटा रेंगता देख भोजन छोड़कर क्यों उठ खड़े हुए?
उन्हें लगा कि वह च्योंटा कुएँ पर उनके साथ आ गया है और उन्होंने उसे उसके घर से बेघर कर दिया है। इसलिए वे भोजन छोड़कर उसे वापस कुएँ पर उसके घर छोड़ने चल पड़े।
लिखित (ख) — 50-60 शब्दों में
1. बढ़ती हुई आबादी का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ा?
बढ़ती आबादी के लिए जगह बनाने हेतु समंदर को पीछे धकेला गया, पेड़ काटे गए और जंगलों की जगह बस्तियाँ बसीं। इससे पशु-पक्षी बेघर हुए। प्रदूषण ने पंछियों को बस्तियों से भगा दिया। प्रकृति का संतुलन बिगड़ने से अधिक गरमी, बेवक्त बरसात, भूकंप, बाढ़, तूफ़ान और नए-नए रोग बढ़ गए।
2. लेखक की पत्नी को खिड़की में जाली क्यों लगवानी पड़ी?
लेखक के फ़्लैट के मचान में कबूतरों ने घोंसला बना लिया था। वे दिन में कई बार आते-जाते, चीज़ें गिराकर तोड़ देते और लाइब्रेरी में घुसकर कबीर व ग़ालिब की किताबों को "सताने" लगते। इस रोज़-रोज़ की परेशानी से तंग आकर पत्नी ने जाली लगवाई और बच्चों को दूसरी जगह कर दिया।
3. समुद्र के गुस्से की क्या वजह थी? उसने अपना गुस्सा कैसे निकाला?
बड़े-बड़े बिल्डर वर्षों से समुद्र को पीछे धकेलकर उसकी ज़मीन हथिया रहे थे; वह सिमटते-सिमटते खड़ा होने तक की जगह खो बैठा — यही गुस्से की वजह थी। एक रात उसने अपनी लहरों पर तीन जहाज़ों को उठाकर बच्चों की गेंद की तरह तीन दिशाओं में फेंक दिया — एक वर्ली, दूसरा बांद्रा के कार्टर रोड और तीसरा गेटवे ऑफ़ इंडिया पर जा गिरा।
4. 'मिट्टी से मिट्टी मिले, खो के सभी निशान, किसमें कितना कौन है, कैसे हो पहचान' — लेखक क्या कहना चाहता है?
लेखक कहना चाहता है कि सभी जीव एक ही मिट्टी (पंचतत्व) से बने हैं और मरने पर उसी में मिल जाते हैं। तब यह पहचानना असंभव है कि कौन मनुष्य था और कौन पशु। अतः किसी को ऊँचा-नीचा या गंदा मानना व्यर्थ है; सब एक ही ईश्वर की रचना हैं और सम्मान के अधिकारी हैं।
लिखित (ग) — आशय स्पष्ट कीजिए
1. नेचर की सहनशक्ति की एक सीमा होती है। नेचर के गुस्से का एक नमूना कुछ साल पहले बंबई में देखने को मिला था।
आशय — प्रकृति मनुष्य के अत्याचार एक सीमा तक सहती है; सीमा पार होने पर वह विनाशकारी रूप ले लेती है। बंबई में समंदर द्वारा जहाज़ों को उछाल फेंकना इसका उदाहरण है।
2. जो जितना बड़ा होता है उसे उतना ही कम गुस्सा आता है।
आशय — महान व्यक्ति (या प्रकृति) सहनशील होते हैं और जल्दी क्रोधित नहीं होते; पर जब उन्हें गुस्सा आता है तो उसे रोकना बहुत कठिन हो जाता है।
3. इस बस्ती ने न जाने कितने परिंदों-चरिंदों से उनका घर छीन लिया है...
आशय — जंगल काटकर बस्ती बसाने से अनेक पक्षी और पशु बेघर हो गए। कुछ शहर छोड़कर चले गए और जो नहीं जा सके, वे इधर-उधर अस्थायी ठिकानों में किसी तरह रह रहे हैं।
4. शेख अयाज़ के पिता बोले, 'मैंने एक घरवाले को बेघर कर दिया है...' — इनमें छिपी भावना स्पष्ट कीजिए।
आशय — इसमें सभी जीवों के प्रति करुणा और ज़िम्मेदारी की भावना है। वे मानते थे कि छोटे-से च्योंटे का भी घर होता है और उसे अनजाने में बेघर करना भी अपराध है, जिसे सुधारना ज़रूरी है।
भाषा अध्ययन
1. कारक चिह्न पहचानिए।
(क) माँ ने भोजन परोसा — कर्ता कारक
(ख) मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं हूँ — संप्रदान कारक
(ग) मैंने एक घर वाले को बेघर कर दिया — कर्म कारक
(घ) कबूतर परेशानी में इधर-उधर फड़फड़ा रहे थे — अधिकरण कारक
(ङ) दरिया पर जाओ तो उसे सलाम किया करो — अधिकरण कारक
2. बहुवचन रूप लिखिए।
चींटी — चींटियाँ; घोड़ा — घोड़े; आवाज़ — आवाज़ें; बिल — बिलों/बिल; फ़ौज — फ़ौजें; रोटी — रोटियाँ; बिंदु — बिंदु/बिंदुओं; दीवार — दीवारें; टुकड़ा — टुकड़े।
3. उचित शब्द (नुक्ता सहित/रहित) भरिए।
(क) आजकल ज़माना बहुत खराब है। (ख) पूरे कमरे को सजा दो। (ग) ज़रा चीनी तो देना। (घ) माँ दही जमाना भूल गई। (ङ) दोषी को सज़ा दी गई। (च) महात्मा के चेहरे पर तेज था।
7. अतिरिक्त प्रश्न — 20 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
- पाठ के लेखक हैं— (क) निदा फ़ाज़ली (ख) सीताराम सेकसरिया (ग) प्रेमचंद (घ) हबीब तनवीर
- निदा फ़ाज़ली का बचपन कहाँ बीता? (क) दिल्ली (ख) बंबई (ग) लखनऊ (घ) ग्वालियर
- यह पाठ किस पुस्तक से लिया गया है? (क) दीवारों के बीच (ख) लफ़्ज़ों का पुल (ग) खोया हुआ सा कुछ (घ) तमाशा मेरे आगे
- 'खोया हुआ सा कुछ' के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार कब मिला? (क) 1989 (ख) 1999 (ग) 2009 (घ) 2016
- सुलेमान ईसा से कितने वर्ष पूर्व बादशाह थे? (क) 1250 (ख) 525 (ग) 1025 (घ) 2025
- सुलेमान की फ़ौज की आहट से कौन डर गए? (क) कबूतर (ख) चींटियाँ (ग) कुत्ते (घ) मुर्गे
- शेख अयाज़ किस भाषा के महाकवि थे? (क) उर्दू (ख) पंजाबी (ग) फ़ारसी (घ) सिंधी
- शेख अयाज़ के पिता की बाजू पर क्या रेंग रहा था? (क) बिच्छू (ख) मकड़ी (ग) काला च्योंटा (घ) तितली
- नूह का असली नाम था— (क) सुलेमान (ख) अयाज़ (ग) लशकर (घ) सोलोमेन
- नूह सारी उम्र क्यों रोते रहे? (क) बीमारी के कारण (ख) घायल कुत्ते को दुत्कारने के पश्चाताप में (ग) बेटे की मृत्यु पर (घ) गरीबी के कारण
- महाभारत में युधिष्ठिर का अंत तक साथ किसने निभाया? (क) कुत्ते ने (ख) भीम (ग) द्रौपदी (घ) कृष्ण
- समंदर ने कितने जहाज़ उछाल फेंके? (क) दो (ख) चार (ग) पाँच (घ) तीन
- इनमें से कौन-सा स्थान जहाज़ गिरने वाला नहीं है? (क) वर्ली (ख) बांद्रा कार्टर रोड (ग) जुहू (घ) गेटवे ऑफ़ इंडिया
- माँ के अनुसार दीया-बत्ती के समय फूल तोड़ने से क्या होता है? (क) पेड़ रोते हैं (ख) फूल बद्दुआ देते हैं (ग) दरिया नाराज़ होता है (घ) कुछ नहीं
- माँ के अनुसार कबूतर किसे अज़ीज़ हैं? (क) सुलेमान (ख) नूह (ग) हज़रत मुहम्मद (घ) मुल्ला जी
- मुल्ला जी से पहले अज़ान कौन देता है? (क) मुर्गा (ख) कबूतर (ग) कोयल (घ) तोता
- कबूतर का पहला अंडा किसने तोड़ा? (क) माँ ने (ख) लेखक ने (ग) बिल्ली ने (घ) कौए ने
- लेखक का वर्तमान घर बंबई में कहाँ है? (क) वर्सोवा (ख) वर्ली (ग) बांद्रा (घ) कोलाबा
- लेखक की पत्नी ने कबूतरों के घोंसले की जगह क्या लगवाया? (क) पर्दा (ख) शीशा (ग) दरवाज़ा (घ) जाली
- 'ज़लज़ला' का अर्थ है— (क) बाढ़ (ख) भूकंप (ग) तूफ़ान (घ) सूखा
उत्तर — 1-क, 2-घ, 3-घ, 4-ख, 5-ग, 6-ख, 7-घ, 8-ग, 9-ग, 10-ख, 11-क, 12-घ, 13-ग, 14-ख, 15-ग, 16-क, 17-ग, 18-क, 19-घ, 20-ख
8. अतिरिक्त प्रश्न — 20 लघु-उत्तरीय प्रश्न
1. पाठ-प्रवेश के अनुसार कुदरत ने धरती किसके लिए बनाई थी?
कुदरत ने धरती उन सभी जीवधारियों के लिए बनाई थी जिन्हें उसने स्वयं जन्म दिया — केवल मनुष्य के लिए नहीं।
2. मनुष्य ने धरती के साथ क्या किया?
मनुष्य ने धीरे-धीरे पूरी धरती को अपनी जागीर बना लिया और अन्य जीवधारियों को दरबदर कर दिया; अब वह अपनी ही जाति को भी बेदखल करने से नहीं हिचकता।
3. सुलेमान ने चींटियों से क्या कहा?
"घबराओ नहीं, सुलेमान को खुदा ने सबका रखवाला बनाया है। मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं हूँ, सबके लिए मुहब्बत हूँ।"
4. चींटियों ने सुलेमान के लिए क्या किया?
चींटियों ने सुलेमान के लिए ईश्वर से दुआ की।
5. घायल कुत्ते ने नूह को क्या उत्तर दिया?
"न मैं अपनी मर्ज़ी से कुत्ता हूँ, न तुम अपनी पसंद से इनसान हो। बनाने वाला सबका तो वही एक है।"
6. मानव जाति ने धरती की हिस्सेदारी में क्या किया?
धरती में सबकी बराबर हिस्सेदारी थी, पर मनुष्य ने अपनी बुद्धि से बड़ी-बड़ी दीवारें खड़ी कर दीं और संसार को टुकड़ों में बाँट दिया।
7. प्रदूषण और बारूद का पर्यावरण पर क्या असर पड़ा?
प्रदूषण ने पंछियों को बस्तियों से भगा दिया और बारूद की विनाशलीलाओं ने वातावरण को दूषित कर दिया।
8. बंबई निवासी डरकर क्या करने लगे?
समंदर का भयानक गुस्सा देखकर बंबई निवासी अपने-अपने पूजा-स्थलों में अपने खुदाओं से प्रार्थना करने लगे।
9. समंदर के सिमटने का वर्णन लेखक ने कैसे किया है?
पहले उसने फैली टाँगें समेटीं, फिर सिमटकर बैठा, फिर उकड़ूँ बैठा, फिर खड़ा हो गया; खड़े रहने की जगह भी कम पड़ी तो उसे गुस्सा आ गया।
10. गेटवे ऑफ़ इंडिया पर गिरे जहाज़ का क्या हुआ?
वह टूट-फूटकर सैलानियों के लिए नज़ारा बन गया और कोशिश के बावजूद फिर चलने लायक नहीं हो सका।
11. माँ दरिया के बारे में क्या कहती थीं?
दरिया पर जाओ तो उसे सलाम किया करो, वह खुश होता है।
12. कबूतरों को न सताने का क्या कारण माँ बताती थीं?
कबूतर हज़रत मुहम्मद को अज़ीज़ हैं; उन्होंने उन्हें अपनी मज़ार के नीले गुंबद पर घोंसले बनाने की इजाज़त दे रखी है।
13. "मस्जिद जाए मौलवी, कोयल गाए गीत" — इसका भाव क्या है?
सबकी पूजा एक-सी है, केवल रीत अलग है; मौलवी मस्जिद में इबादत करता है और कोयल गीत गाकर ईश्वर की उपासना करती है।
14. ग्वालियर वाले घर में कबूतरों ने घोंसला कहाँ बनाया था?
मकान के दालान के दो रोशनदानों में से एक में कबूतर के जोड़े ने घोंसला बनाया था।
15. रोज़े के दिन माँ ने क्या किया?
दिन-भर कुछ खाया-पिया नहीं, रोती रहीं और बार-बार नमाज़ पढ़कर खुदा से गलती माफ़ करने की दुआ माँगती रहीं।
16. वर्सोवा पहले कैसा था और अब कैसा है?
पहले वहाँ दूर तक जंगल, पेड़, परिंदे और जानवर थे; अब समंदर के किनारे लंबी-चौड़ी बस्ती बन गई है।
17. कबूतर लेखक की लाइब्रेरी में क्या करते थे?
वे लाइब्रेरी में घुसकर कबीर और मिर्ज़ा ग़ालिब (की किताबों) को "सताने" लगते थे, यानी किताबें गिराते-बिखेरते थे।
18. जाली लगने के बाद कबूतरों की क्या दशा हुई?
दोनों कबूतर रात-भर खिड़की के बाहर खामोश और उदास बैठे रहते हैं।
19. "नदिया सींचे खेत को, तोता कुतरे आम" — दोहे का भाव लिखिए।
प्रकृति में सबका अपना काम है — नदी खेत सींचती है, तोता आम खाता है; सूरज ठेकेदार की तरह सबको काम बाँटता है। हर जीव का प्रकृति में स्थान और अधिकार है।
20. पाठ के शीर्षक का क्या अर्थ है?
आज ऐसे लोग नहीं रहे जो सुलेमान, शेख अयाज़ के पिता या लेखक की माँ की तरह दूसरे जीवों के दुख से दुखी हों; मनुष्य संवेदनहीन हो गया है।
9. अतिरिक्त प्रश्न — 10 दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न
1. पाठ में वर्णित किन्हीं तीन घटनाओं के आधार पर सिद्ध कीजिए कि पहले लोग दूसरे जीवों के दुख से दुखी होते थे।
उत्तर — (1) बादशाह सुलेमान ने डरी हुई चींटियों को देखकर अपनी फ़ौज रोक दी और उन्हें आश्वस्त किया कि वे सबके लिए मुहब्बत हैं। (2) शेख अयाज़ के पिता ने बाजू पर च्योंटा देखकर भोजन छोड़ दिया और उसे कुएँ पर उसके घर छोड़ने चल पड़े। (3) लेखक की माँ के हाथ से कबूतर का अंडा टूट गया तो उन्होंने पूरे दिन रोज़ा रखकर माफ़ी माँगी। ये घटनाएँ पुराने समय की गहरी करुणा दिखाती हैं।
2. आज के मनुष्य के स्वभाव में आए परिवर्तन को पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर — आज का मनुष्य स्वार्थी और सुविधा-प्रेमी हो गया है। उसने धरती को अपनी जागीर बना लिया, जंगल काटकर बस्तियाँ बसाईं, समंदर की ज़मीन हथियाई। लेखक की पत्नी ने अपनी परेशानी से बचने के लिए कबूतरों के घोंसले पर जाली लगवा दी और उन्हें बेघर कर दिया। अब मनुष्य को न दूसरों के सुख-दुख की चिंता है, न सहयोग की इच्छा — वह अपनी ही जाति को भी बेदखल करने से नहीं हिचकता।
3. प्रकृति के असंतुलन के कारणों और परिणामों का वर्णन कीजिए।
उत्तर — कारण: बढ़ती आबादी, पेड़ों की कटाई, समुद्र को पीछे धकेलकर निर्माण, प्रदूषण और बारूद की विनाशलीला। मनुष्य ने संसार को टुकड़ों में बाँट दिया और बड़े आँगनों की जगह डिब्बे जैसे घर बना लिए। परिणाम: अत्यधिक गरमी, बेवक्त बरसात, भूकंप, बाढ़, तूफ़ान, नए-नए रोग, पक्षियों का बस्तियों से पलायन और बंबई में समंदर का प्रकोप।
4. "धरती किसी एक की नहीं है" — पाठ के आधार पर इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर — लेखक के अनुसार धरती पर पंछी, मानव, पशु, नदी, पर्वत, समंदर सबकी बराबर हिस्सेदारी है, क्योंकि कुदरत ने इसे अपने सभी जीवों के लिए बनाया। पर मनुष्य ने बुद्धि के बल पर दीवारें खड़ी कर दीं और दूसरों को बेदखल किया। यदि हम सबके अधिकार का सम्मान न करें तो प्रकृति का संतुलन बिगड़ता है और उसका दुष्परिणाम मनुष्य को भी भोगना पड़ता है।
5. लेखक की माँ के व्यक्तित्व की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर — लेखक की माँ करुणामयी, धार्मिक और प्रकृति-प्रेमी थीं। वे पेड़ों, फूलों, दरिया, कबूतरों और मुर्गों को भी भावनाओं वाला मानती थीं — सूरज ढले पत्ते न तोड़ना, दरिया को सलाम करना जैसी सीखें देती थीं। कबूतर का अंडा अनजाने में टूटने पर वे रो पड़ीं और पूरे दिन रोज़ा रखकर खुदा से माफ़ी माँगती रहीं। उनमें गहरी संवेदनशीलता और अपराध-बोध था।
6. समुद्र के गुस्से वाले प्रसंग में लेखक ने किस प्रकार मानवीकरण का प्रयोग किया है?
उत्तर — लेखक ने समुद्र को मनुष्य की तरह व्यवहार करते दिखाया है — वह पहले टाँगें समेटता है, फिर सिमटकर बैठता है, उकड़ूँ बैठता है, फिर खड़ा हो जाता है और जगह न मिलने पर गुस्सा हो जाता है। फिर बच्चों की गेंद की तरह जहाज़ उछाल फेंकता है। इस मानवीकरण से प्रकृति की पीड़ा और उसका प्रतिशोध बहुत सजीव और प्रभावशाली बन गया है।
7. नूह और कुत्ते के प्रसंग से क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर — यह प्रसंग सिखाता है कि कोई भी जीव अपनी इच्छा से अपना रूप नहीं चुनता; सबको एक ही ईश्वर ने बनाया है। इसलिए किसी को गंदा या नीचा समझकर दुत्कारना गलत है। नूह को अपनी भूल का इतना पश्चाताप हुआ कि वे उम्र भर रोते रहे — यानी सच्चा मनुष्य अपनी गलती स्वीकार कर उसका प्रायश्चित्त करता है। सभी जीवों के प्रति समानता और सम्मान का भाव रखना चाहिए।
8. लेखक की पत्नी और लेखक की माँ के दृष्टिकोण की तुलना कीजिए।
उत्तर — माँ के लिए कबूतरों का दुख अपना दुख था; अनजाने में अंडा टूटने पर भी उन्होंने रोज़ा रखकर प्रायश्चित्त किया। पत्नी व्यावहारिक हैं — कबूतरों से होने वाली परेशानी (चीज़ें गिरना, लाइब्रेरी में घुसना) से बचने के लिए उन्होंने जाली लगवाई और उन्हें बेघर कर दिया। यह तुलना पुरानी पीढ़ी की करुणा और नई पीढ़ी की सुविधा-केंद्रित सोच का अंतर दिखाती है।
9. पाठ में दोहों का प्रयोग किस उद्देश्य से किया गया है?
उत्तर — निदा फ़ाज़ली गद्य में शेर-ओ-शायरी पिरोकर थोड़े में बहुत कहते हैं। "मिट्टी से मिट्टी मिले" सब जीवों की समानता बताता है; "सब की पूजा एक-सी" बताता है कि हर जीव अपने ढंग से ईश्वर की उपासना करता है; "नदिया सींचे खेत को" बताता है कि प्रकृति में सबका स्थान और काम तय है। दोहे पाठ के संदेश को संक्षिप्त, रोचक और स्मरणीय बना देते हैं।
10. पर्यावरण-संरक्षण के लिए हम क्या कर सकते हैं? पाठ के संदर्भ में लिखिए।
उत्तर — हर वर्ष पेड़ लगाएँ और उनकी देखभाल करें; पेड़ों की अनावश्यक कटाई रोकें। पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी और घोंसले की जगह छोड़ें, उन्हें बेघर न करें। प्लास्टिक और प्रदूषण कम करें, जल-स्रोतों और समुद्र-तटों पर अतिक्रमण न करें। सबसे ज़रूरी है — लेखक की माँ जैसी संवेदनशीलता अपनाना और यह मानना कि धरती पर सभी जीवों का बराबर अधिकार है।
10. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
इस पाठ से पर्यावरण और संवेदनशीलता से जुड़े विचारात्मक प्रश्न अधिक पूछे जाते हैं।
⭐ सबसे महत्वपूर्ण (अवश्य तैयार करें)
- बढ़ती हुई आबादी का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ा?
- समुद्र के गुस्से की क्या वजह थी? उसने गुस्सा कैसे निकाला?
- लेखक की माँ ने पूरे दिन का रोज़ा क्यों रखा?
- अरब में लशकर को नूह के नाम से क्यों याद करते हैं?
- 'मिट्टी से मिट्टी मिले...' — इन पंक्तियों से लेखक क्या कहना चाहता है?
महत्वपूर्ण
- शेख अयाज़ के पिता भोजन छोड़कर क्यों उठ खड़े हुए?
- लेखक की पत्नी को खिड़की में जाली क्यों लगवानी पड़ी?
- ग्वालियर से बंबई तक लेखक ने कौन-से बदलाव महसूस किए?
- "जो जितना बड़ा होता है उसे उतना ही कम गुस्सा आता है" — आशय स्पष्ट कीजिए।
- पाठ के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
व्याकरण / मूल्यपरक
- कारक चिह्न पहचानिए; बहुवचन रूप; नुक्ता से अर्थ-परिवर्तन (सजा-सज़ा, जरा-ज़रा, तेज-तेज़, जमाना-ज़माना)।
- पर्यावरण-संरक्षण में विद्यार्थियों की भूमिका पर अपने विचार लिखिए।
- मनोरंजन के लिए पशु-पक्षियों के उपयोग की किसी घटना का वर्णन कीजिए।
🔗 कक्षा 10 हिंदी — स्पर्श व संचयन के सभी पाठ आपस में जुड़े हुए
- बड़े भाई साहब — प्रेमचंद (स्पर्श)
- डायरी का एक पन्ना — सीताराम सेकसरिया (स्पर्श)
- अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले — निदा फ़ाज़ली (स्पर्श) (आप यही पढ़ रहे हैं)
- कारतूस — हबीब तनवीर (स्पर्श)
- हरिहर काका — मिथिलेश्वर (संचयन)
- सपनों के-से दिन — गुरदयाल सिंह (संचयन)
— मनोज शर्मा, हिंदी शिक्षक | HINDI GYAN —
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