पाठ परिचय
यह पाठ एक शैक्षिक भ्रमण के संवाद से आरम्भ होता है। छात्र साँची स्तूप देखने गए हैं। वसुधारा, मैत्रेय, तेञ्जिन, अरुणा, लावण्या और अध्यापिका के बीच बातचीत होती है। अध्यापिका बताती हैं कि साँची का स्तूप बौद्ध धर्म का प्रसिद्ध स्मारक है, जिसका निर्माण सम्राट अशोक ने कराया और जिसे यूनेस्को ने विश्व-धरोहर घोषित किया है।
फिर अध्यापिका आर्यशूर की जातकमाला के व्याघ्री-जातक से बोधिसत्त्व की करुणा-पूर्ण कथा सुनाती हैं, जिसमें बोधिसत्त्व एक भूखी बाघिन और उसके बच्चों को बचाने के लिए अपना शरीर दे देते हैं। इसके बाद भगवान बुद्ध द्वारा गृहस्थों के लिए उपदिष्ट पञ्चशील (पालि भाषा में), चार आर्यसत्य, अष्टाङ्गिक मार्ग, शरणत्रय और विपश्यना का परिचय दिया गया है।
📌 स्रोत: जातकमाला (आर्यशूर) – व्याघ्री-जातक | भाषा-विशेष: पञ्चशील पालि भाषा में | संदेश: करुणा, अहिंसा, सत्य और संयम से आदर्श समाज
मूल पाठ का सरलार्थ (हिंदी)
पाठ के प्रत्येक अंश का मुख्य वाक्य और उसका सरल हिंदी अर्थ नीचे दिया गया है। पूरा पाठ पाठ्यपुस्तक में पढ़ें।
अंश 1 – साँची स्तूप पर संवाद
ननु बौद्धधर्मस्य प्रसिद्धः स्मारकः भवति साञ्चीस्तूपः।
सरलार्थ: वसुधारा पूछती है — मैत्रेय! साँची स्तूप क्यों प्रसिद्ध है? मैत्रेय — यह बौद्ध धर्म का प्रसिद्ध स्मारक है, सम्राट अशोक ने इसका निर्माण कराया। अध्यापिका — यूनेस्को ने भी इसे विश्व-धरोहर माना है; बौद्ध धर्म के सिद्धान्तों और भगवान बुद्ध के उपदेशों के प्रचार के लिए यह स्तूप बना। तेञ्जिन — क्या बुद्ध के उपदेश आधुनिक काल में भी उपयोगी हैं? अध्यापिका — हाँ, बुद्ध के उपदेश सार्वकालिक और सार्वभौमिक हैं। सिद्धार्थ ने सांसारिक मोह-माया की परवाह न कर घोर तपस्या से बोध (ज्ञान) पाया और भगवान बुद्ध बने; वे करुणा की प्रतिमा थे। अरुणा के आग्रह पर अध्यापिका जातकमाला की व्याघ्री-जातक कथा सुनाती हैं और सब पेड़ के नीचे बैठकर सुनते हैं।
अंश 2 – बोधिसत्त्व का जन्म और विद्या
बोधिसत्त्वः… अचिरेण अष्टादशविद्यास्थानेषु सकलासु कलासु च पारङ्गतिं लब्धवान्।
सरलार्थ: करुणामय बोधिसत्त्व अपने सत्कर्मों के बल से एक कुलीन परिवार में जन्मे। जातकर्म आदि संस्कारों के साथ बढ़ते हुए, स्वाभाविक बुद्धिमत्ता, ज्ञान की जिज्ञासा और आलस्य न होने के कारण वे शीघ्र ही अठारह विद्या-स्थानों और सभी कलाओं में पारंगत हो गए। धर्म के अभ्यास से उनकी बुद्धि पवित्र थी और वे संन्यास से परिचित थे। एक बार वे वन में घूम रहे थे — उनके स्नेह और करुणा के प्रभाव से हिंसक जन्तु भी आपस में कलह के बिना प्रेम से विचरते थे।
अंश 3 – भूखी बाघिन
…काचिद् व्याघ्री अवलोकिता, या पर्वतगुहायां प्रसवपीडया क्लान्ता बुभुक्षया कृशोदरा दुर्बलनेत्रा च आसीत्।
सरलार्थ: एक दिन अपने शिष्य अजित के साथ वन-प्रान्त में घूमते हुए बोधिसत्त्व ने एक बाघिन देखी, जो पर्वत की गुफा में प्रसव-पीड़ा से थकी, भूख से पतले पेट और कमजोर आँखों वाली थी। कोई और उपाय न देखकर वह अपनी भूख मिटाने के लिए अपने ही बच्चों को मारने को उद्यत थी।
अंश 4 – बोधिसत्त्व का आत्म-बलिदान
परोपकारार्थमिदं शरीरम् इति तर्कयन्… योगबलेन प्राणान् अत्यजत्।
सरलार्थ: करुणासागर बोधिसत्त्व ने यह देखकर घबराहट में शिष्य से कहा — जल्दी कहीं से इसकी भूख मिटाने का उपाय खोजो, इससे पहले कि यह अपने बच्चों और स्वयं को मार डाले। अजित के जाने के बाद बोधिसत्त्व ने सोचा — मेरे पूरे शरीर के रहते मैं दूसरे प्राणी का मांस क्यों खोजूँ? दूसरे प्राणी का मांस मिलेगा, यह भी निश्चित नहीं; तब तक बाघिन बच्चों को खा ले या मर जाए। मेरी आत्मा अमर है, शरीर अनित्य और जड़ है। ‘यह शरीर परोपकार के लिए है’ — ऐसा विचार कर उन्होंने निश्चय किया कि अपने प्राण-रहित शरीर से बाघिन को पुत्र-वध रूपी पाप से बचाऊँगा, और योगबल से प्राण त्याग दिए। उनका शरीर गुफा की भूमि पर धम्म से गिरा।
अंश 5 – बुद्ध और उनके उपदेश
सः जनानां दुःखनिवारणाय चत्वारि आर्यसत्यानि अष्टाङ्गमार्गं च उपदिष्टवान्।
सरलार्थ: अपने पुत्रों की हिंसा के प्रयास से रुकी बाघिन ने बोधिसत्त्व का जड़ शरीर खा लिया। ऐसे जीव-मात्र पर दयालु बोधिसत्त्व ही अगले जन्म में करुणा-मूर्ति भगवान बुद्ध के रूप में जगत् का कल्याण करते रहे। भगवान बुद्ध ही बौद्ध धर्म के प्रवर्तक हैं। उन्होंने लोगों के दुःख-निवारण के लिए चार आर्यसत्य और अष्टाङ्गिक मार्ग का उपदेश दिया।
पञ्चशील (पालि मूल + संस्कृत भाव)
पाणातिपाता वेरमणिसिक्खापदं समादियामि ।
अदिन्नादाना वेरमणिसिक्खापदं समादियामि ।
कामेसु मिच्छाचारा वेरमणिसिक्खापदं समादियामि ।
मुसावादा वेरमणिसिक्खापदं समादियामि ।
सुरामेरय-मज्ज-पमादट्ठाना वेरमणिसिक्खापदं समादियामि ॥
अर्थ: बुद्ध ने गृहस्थों के नैतिक जीवन के लिए पाँच शील बताए — (1) मैं किसी भी जीव का वध नहीं करूँगा (अहिंसा); (2) मैं चोरी नहीं करूँगा (बिना दी वस्तु नहीं लूँगा); (3) मैं व्यभिचार/दुराचार नहीं करूँगा; (4) मैं झूठ नहीं बोलूँगा; (5) मैं मद्य, मादक द्रव्यों और प्रमाद के साधनों का सेवन नहीं करूँगा। — संसार में शान्तिमय जीवन के लिए हम पञ्चशील का आचरण करें और आदर्श समाज की रचना करें।
पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
प्रश्न 1. एकपदेन उत्तरत
(क) जातककथासु बुद्धस्य नाम किमासीत् ?
बोधिसत्त्वः
(ख) का बुभुक्षिता आसीत् ?
व्याघ्री
(ग) बोधिसत्त्वः कथं प्राणान् अत्यजत् ?
योगबलेन
(घ) बौद्धधर्मस्य प्रवर्तकः कः ?
गौतमबुद्धः
(ङ) बौद्धधर्मस्य प्रचाराय कस्याः भाषायाः उपयोगः जातः ?
पालिभाषायाः
प्रश्न 2. पूर्णवाक्येन उत्तरत
(क) हिंस्राः जन्तवः कथं चरन्ति स्म ?
बोधिसत्त्वस्य स्नेहकरुणादिभावनाभिः हिंस्राः अपि जन्तवः कलहेन विना स्नेहेन चरन्ति स्म।
(ख) बोधिसत्त्वेन व्याघ्री कदा अवलोकिता ?
यदा स्वशिष्येण अजितेन सह वनप्रान्ते भ्रमति स्म तदा बोधिसत्त्वेन व्याघ्री अवलोकिता।
(ग) बोधिसत्त्वः किं निश्चित्य योगबलेन प्राणान् अत्यजत् ?
‘अहं स्वप्राणरहितेन गात्रेण पुत्रवधरूपात् पापात् व्याघ्र्याः संरक्षणं करोमि’ इति निश्चित्य बोधिसत्त्वः योगबलेन प्राणान् अत्यजत्।
(घ) जनानां दुःखनिवारणाय किम् उपदिष्टवान् ?
जनानां दुःखनिवारणाय भगवान् बुद्धः चत्वारि आर्यसत्यानि अष्टाङ्गमार्गं च उपदिष्टवान्।
(ङ) पञ्चशीलानि किमर्थम् उपदिष्टवान् ?
गृहस्थानां नैतिकजीवनस्य निर्वाहणाय बुद्धः पञ्चशीलानि उपदिष्टवान्।
प्रश्न 3. घोषवाक्यानि रचयत
(क) सम्यक् दृष्टिः – सम्यक् ……
सृष्टिः
(ख) शुद्धः …… – सर्वहितविचारः
सङ्कल्पः (मञ्जूषा के अनुसार उपयुक्त पद)
(ग) सम्यक् स्मृतिः – परीक्षायां नश्यति ……
भीतिः
(घ) सत्यं वचनम् – दृढतायाः ……
साधनम्
(ङ) सम्यक् …… – स्वास्थ्यरक्षानियमः
आहारः / व्यायामः
प्रश्न 4. प्रश्ननिर्माणम् (सम्भावित रेखाङ्कित पद मोटे अक्षरों में)
(क) अहं जीवस्य वधं न करिष्यामि ।
अहं कस्य वधं न करिष्यामि ?
(ख) छात्रः चौर्यं न करिष्यति ।
कः चौर्यं न करिष्यति ?
(ग) सामाजिकः व्यभिचारं न करिष्यति ।
सामाजिकः किं न करिष्यति ?
(घ) शिशवः असत्यं न वदिष्यन्ति ।
के असत्यं न वदिष्यन्ति ?
(ङ) अहं मद्य-मादक-द्रव्याणां प्रमादसाधनानां च सेवनं न करिष्यामि ।
अहं केषां प्रमादसाधनानां च सेवनं न करिष्यामि ?
प्रश्न 5. सन्धिविच्छेदं कुरुत
(ख) आधुनिककालेऽपि
आधुनिककाले + अपि
(ग) परोपकारार्थम्
परोपकार + अर्थम् (पर + उपकार)
प्रश्न 6. विग्रहं लिखत
(क) मधुरव्यवहारः
मधुरः व्यवहारः (कर्मधारय)
(ख) धर्मसम्मतः
धर्मेण सम्मतः (तृतीया तत्पुरुष)
(ग) असत्यम्
न सत्यम् (नञ् तत्पुरुष)
(घ) कृतप्रव्रज्यापरिचयः
कृतः प्रव्रज्यापरिचयः येन सः (बहुव्रीहि)
(ङ) परोपकारार्थम्
परेषाम् उपकारः परोपकारः, तस्मै इदम् (चतुर्थी तत्पुरुष / अर्थ-योग)
परियोजना – बुद्ध के चार तीर्थ-स्थान
जन्मस्थान (नेपाल)
लुम्बिनी
ज्ञान-प्राप्ति (बिहार)
बोधगया
प्रथम धर्मोपदेश – धर्मचक्र-प्रवर्तन (उ.प्र.)
सारनाथ
महापरिनिर्वाण (उ.प्र.)
कुशीनगर
25 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
1. साँची स्तूप का निर्माण किसने कराया?
- (क) चन्द्रगुप्त
- (ख) अशोक
- (ग) हर्ष
- (घ) कनिष्क
उत्तर देखें
(ख) अशोक2. साँची स्तूप को विश्व-धरोहर किसने घोषित किया?
- (क) यूनेस्को
- (ख) यूनिसेफ
- (ग) WHO
- (घ) भारत सरकार
उत्तर देखें
(क) यूनेस्को3. व्याघ्री-जातक किस ग्रन्थ में है?
- (क) पञ्चतन्त्र
- (ख) जातकमाला
- (ग) हितोपदेश
- (घ) बुद्धचरित
उत्तर देखें
(ख) जातकमाला4. जातकमाला के रचयिता कौन हैं?
- (क) अश्वघोष
- (ख) आर्यशूर
- (ग) नागार्जुन
- (घ) कालिदास
उत्तर देखें
(ख) आर्यशूर5. जातक कथाओं में बुद्ध का नाम क्या है?
- (क) सिद्धार्थ
- (ख) बोधिसत्त्व
- (ग) तथागत
- (घ) अजित
उत्तर देखें
(ख) बोधिसत्त्व6. बोधिसत्त्व के शिष्य का नाम था —
- (क) आनन्द
- (ख) अजित
- (ग) मैत्रेय
- (घ) तेञ्जिन
उत्तर देखें
(ख) अजित7. बोधिसत्त्व कितने विद्या-स्थानों में पारंगत थे?
- (क) 14
- (ख) 18
- (ग) 32
- (घ) 64
उत्तर देखें
(ख) 188. बाघिन कहाँ थी?
- (क) नदी किनारे
- (ख) पर्वत-गुफा में
- (ग) गाँव में
- (घ) पेड़ पर
उत्तर देखें
(ख) पर्वत-गुफा में9. बाघिन किसे खाने को उद्यत थी?
- (क) बोधिसत्त्व
- (ख) अपने बच्चों
- (ग) अजित
- (घ) हिरण
उत्तर देखें
(ख) अपने बच्चों10. बोधिसत्त्व ने प्राण कैसे त्यागे?
- (क) अग्नि से
- (ख) योगबल से
- (ग) जल में कूदकर
- (घ) शस्त्र से
उत्तर देखें
(ख) योगबल से11. ‘परोपकारार्थमिदं शरीरम्’ किसका विचार है?
- (क) अजित
- (ख) बोधिसत्त्व
- (ग) अशोक
- (घ) अध्यापिका
उत्तर देखें
(ख) बोधिसत्त्व12. बौद्ध धर्म के प्रवर्तक कौन हैं?
- (क) महावीर
- (ख) गौतम बुद्ध
- (ग) अशोक
- (घ) शंकराचार्य
उत्तर देखें
(ख) गौतम बुद्ध13. बुद्ध ने धर्म-प्रचार के लिए किस भाषा का उपयोग किया?
- (क) संस्कृत
- (ख) पालि
- (ग) प्राकृत
- (घ) अर्धमागधी
उत्तर देखें
(ख) पालि14. पञ्चशील किनके लिए हैं?
- (क) भिक्षुओं
- (ख) गृहस्थों
- (ग) राजाओं
- (घ) पशुओं
उत्तर देखें
(ख) गृहस्थों15. ‘मुसावादा वेरमणि’ का भाव है —
- (क) चोरी न करना
- (ख) झूठ न बोलना
- (ग) हिंसा न करना
- (घ) नशा न करना
उत्तर देखें
(ख) झूठ न बोलना16. ‘अदिन्नादाना वेरमणि’ का भाव है —
- (क) चोरी न करना
- (ख) झूठ न बोलना
- (ग) दान देना
- (घ) व्यभिचार न करना
उत्तर देखें
(क) चोरी न करना17. ‘पाणातिपाता वेरमणि’ का भाव है —
- (क) जीव-हत्या न करना
- (ख) झूठ न बोलना
- (ग) चोरी न करना
- (घ) नशा न करना
उत्तर देखें
(क) जीव-हत्या न करना18. आर्यसत्य कितने हैं?
- (क) तीन
- (ख) चार
- (ग) पाँच
- (घ) आठ
उत्तर देखें
(ख) चार19. दुःख का मूल कारण क्या है?
- (क) तृष्णा
- (ख) भाग्य
- (ग) ईश्वर
- (घ) कर्म
उत्तर देखें
(क) तृष्णा20. अष्टाङ्गिक मार्ग में कितने अंग हैं?
- (क) छह
- (ख) आठ
- (ग) दस
- (घ) बारह
उत्तर देखें
(ख) आठ21. ‘सम्मावाचा’ का अर्थ है —
- (क) सम्यक् वाक्
- (ख) सम्यक् दृष्टि
- (ग) सम्यक् समाधि
- (घ) सम्यक् कर्म
उत्तर देखें
(क) सम्यक् वाक्22. बौद्धों का प्रमुख धर्मग्रन्थ है —
- (क) वेद
- (ख) त्रिपिटक
- (ग) गीता
- (घ) आगम
उत्तर देखें
(ख) त्रिपिटक23. बुद्ध को ज्ञान कहाँ प्राप्त हुआ?
- (क) सारनाथ
- (ख) बोधगया
- (ग) लुम्बिनी
- (घ) कुशीनगर
उत्तर देखें
(ख) बोधगया24. बुद्ध का प्रथम उपदेश कहाँ हुआ?
- (क) सारनाथ
- (ख) साँची
- (ग) कुशीनगर
- (घ) राजगृह
उत्तर देखें
(क) सारनाथ25. ‘असत्यम्’ में कौन-सा समास है?
- (क) नञ् तत्पुरुष
- (ख) बहुव्रीहि
- (ग) द्वन्द्व
- (घ) कर्मधारय
उत्तर देखें
(क) नञ् तत्पुरुष
20 अति लघु उत्तरीय प्रश्न
1. साँची स्तूप किस धर्म का स्मारक है?
बौद्ध धर्म का।
2. बुद्ध के उपदेश कैसे हैं?
सार्वकालिक और सार्वभौमिक।
3. बुद्ध को किसकी प्रतिमा कहा गया है?
करुणा की।
4. अध्यापिका ने कथा कहाँ बैठकर सुनाई?
पेड़ के नीचे (तरुतले)।
5. बोधिसत्त्व किसके बल से कुलीन परिवार में जन्मे?
अपने सत्कर्मों के बल से।
6. बोधिसत्त्व शीघ्र पारंगत क्यों हुए?
स्वाभाविक बुद्धिमत्ता, ज्ञान-जिज्ञासा और आलस्य न होने से।
7. बाघिन की दशा कैसी थी?
प्रसव-पीड़ा से थकी, भूख से कृश पेट वाली और दुर्बल नेत्रों वाली।
8. बोधिसत्त्व ने अजित को क्या आदेश दिया?
शीघ्र कहीं से बाघिन की भूख मिटाने का उपाय खोजो।
9. बोधिसत्त्व के अनुसार आत्मा और शरीर कैसे हैं?
आत्मा अमर है, शरीर अनित्य और जड़ है।
10. बाघिन ने अन्त में क्या किया?
पुत्र-हिंसा से रुककर बोधिसत्त्व का जड़ शरीर खा लिया।
11. पञ्चशील का पाँचवाँ शील क्या है?
मद्य, मादक द्रव्य और प्रमाद के साधनों का सेवन न करना।
12. ‘निर्वाण’ किसे कहते हैं?
तृष्णा के नाश से दुःख का पूर्ण निरोध (मोक्ष)।
13. शरणत्रय के तीन वाक्य लिखिए।
बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, संघं शरणं गच्छामि।
14. त्रिपिटक के तीन भाग कौन-से हैं?
सुत्तपिटक, विनयपिटक, अभिधम्मपिटक।
15. सुत्तपिटक में क्या है?
बुद्ध के उपदेश।
16. विनयपिटक में क्या है?
भिक्षुओं के आचरण और मठों के नियम।
17. ‘बुद्धचरितम्’ के रचयिता कौन हैं?
अश्वघोष।
18. ‘विपश्यना’ का शाब्दिक अर्थ क्या है?
वस्तुओं को यथार्थ रूप में देखना।
19. ‘सम्मासमाधि’ का अर्थ लिखिए।
ध्यान द्वारा चित्त की एकाग्रता।
20. बुद्ध का जन्म कहाँ हुआ?
लुम्बिनी (नेपाल)।
20 लघु उत्तरीय प्रश्न
1. साँची स्तूप का परिचय पाठ के आधार पर दीजिए।
साँची स्तूप बौद्ध धर्म का प्रसिद्ध स्मारक है जिसे सम्राट अशोक ने बनवाया। बुद्ध के सिद्धान्तों और उपदेशों के प्रचार के लिए बना यह स्तूप यूनेस्को द्वारा विश्व-धरोहर माना गया है।
2. बुद्ध के उपदेश आज भी प्रासंगिक क्यों हैं?
क्योंकि वे सार्वकालिक और सार्वभौमिक हैं — अहिंसा, सत्य, करुणा, संयम और मध्यम मार्ग की आवश्यकता हर युग और हर देश के मनुष्य को है।
3. बोधिसत्त्व के प्रभाव से वन का वातावरण कैसा था?
उनकी स्नेह और करुणा की भावनाओं के प्रभाव से हिंसक जन्तु भी आपस में कलह किए बिना प्रेमपूर्वक विचरते थे।
4. बाघिन को देखकर बोधिसत्त्व ने क्या सोचा?
उन्होंने सोचा कि मेरे शरीर के रहते दूसरे प्राणी का मांस क्यों खोजूँ; वह मिले न मिले, तब तक बाघिन बच्चों को खा लेगी या मर जाएगी। आत्मा अमर है, शरीर नश्वर — यह परोपकार के लिए है।
5. बोधिसत्त्व के आत्म-बलिदान का क्या परिणाम हुआ?
बाघिन अपने बच्चों को मारने के पाप से बच गई, बच्चों की जान बची और उसकी भूख भी मिटी। यही करुणा का सर्वोच्च उदाहरण है।
6. पञ्चशील का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
(1) जीव-हिंसा न करना, (2) चोरी न करना, (3) व्यभिचार न करना, (4) झूठ न बोलना, (5) मद्य व मादक पदार्थों का सेवन न करना — ये पाँच नैतिक नियम गृहस्थों के लिए हैं।
7. चार आर्यसत्यों को समझाइए।
(1) संसार दुःखमय है; (2) दुःख का कारण तृष्णा है; (3) तृष्णा के नाश से दुःख का निरोध (निर्वाण) सम्भव है; (4) उस तक पहुँचने का मार्ग अष्टाङ्गिक मार्ग है।
8. अष्टाङ्गिक मार्ग के आठ अंग लिखिए।
सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाक्, सम्यक् कर्मान्त, सम्यक् आजीव, सम्यक् व्यायाम, सम्यक् स्मृति, सम्यक् समाधि।
9. पालि भाषा की दो विशेषताएँ लिखिए।
(1) पालि में हलन्त पद नहीं होते — आर्यसत्यम् → अरियसच्चं; (2) वाक्य के अन्त में विसर्ग का ‘ओ’ होता है — सम्यक् सङ्कल्पः → सम्मासङ्कप्पो।
10. विपश्यना ध्यान-पद्धति क्या है?
यह बुद्ध द्वारा आविष्कृत प्राचीन ध्यान-पद्धति है, जिसका मूल आत्म-निरीक्षण है। इसमें साधक अपनी श्वास-प्रश्वास और शरीर की संवेदनाओं का तटस्थ भाव से निरीक्षण करता है।
11. बौद्ध धर्म का विश्व में प्रसार बताइए।
अनुयायियों की संख्या की दृष्टि से यह विश्व का चौथा बड़ा धर्म है; चीन, जापान, वियतनाम, दक्षिण कोरिया, कंबोडिया, थाईलैंड, म्यांमार, भूटान, श्रीलंका आदि में इसका व्यापक प्रसार है।
12. बौद्ध धर्म ने किन मानव-मूल्यों के विकास में योगदान दिया?
सत्य, अहिंसा, करुणा, परोपकार, सद्व्यवहार, सामाजिकता और निर्वाण पर सबका समान अधिकार।
13. ‘बोधिसत्त्वः’ और ‘कृतप्रव्रज्यापरिचयः’ का विग्रह लिखिए।
बोधिसत्त्वः – बोधिः सत्त्वं यस्य सः (बहुव्रीहि); कृतप्रव्रज्यापरिचयः – कृतः प्रव्रज्यापरिचयः येन सः (बहुव्रीहि)।
14. बुद्ध से जुड़े चार तीर्थ-स्थानों का महत्त्व लिखिए।
लुम्बिनी (नेपाल) – जन्म; बोधगया (बिहार) – ज्ञान-प्राप्ति; सारनाथ (उ.प्र.) – प्रथम उपदेश (धर्मचक्र-प्रवर्तन); कुशीनगर (उ.प्र.) – महापरिनिर्वाण।
15. पञ्चशील से आदर्श समाज कैसे बनेगा?
जब लोग हिंसा, चोरी, दुराचार, झूठ और नशे से दूर रहेंगे तो अपराध घटेंगे, विश्वास बढ़ेगा, परिवार सुखी होंगे और समाज शान्त व आदर्श बनेगा।
16. जातकमाला की कुछ कथाओं के नाम लिखिए।
व्याघ्रीजातकम्, शिबिजातकम्, कुल्माषपिण्डिजातकम्, शतपत्रजातकम् आदि।
17. ‘सम्यक् आजीव’ से क्या तात्पर्य है?
धर्मसम्मत, ईमानदार साधनों से जीविका कमाना; किसी को हानि पहुँचाने वाले व्यवसाय से दूर रहना।
18. ‘सार्वकालिकाः’ और ‘सार्वभौमिकाः’ में अन्तर बताइए।
सार्वकालिक — जो हर समय उपयोगी हो; सार्वभौमिक — जो हर स्थान/समाज पर समान रूप से लागू हो।
19. पाठ से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
जीव-मात्र पर दया करनी चाहिए, परोपकार के लिए त्याग करना चाहिए और पञ्चशील का पालन कर शान्त व नैतिक जीवन जीना चाहिए।
20. ‘अकौसीद्यात्’ का अर्थ और विग्रह लिखिए।
आलस्य न होने के कारण; न कौसीद्यम् अकौसीद्यम्, तस्मात् (नञ् तत्पुरुष)।
10 महत्त्वपूर्ण / दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. ‘पञ्च शीलानि आचरेम, आदर्शसमाजं रचयेम’ पाठ का सारांश लिखिए।
छात्र अध्यापिका के साथ साँची स्तूप देखने जाते हैं, जो अशोक-निर्मित बौद्ध स्मारक और विश्व-धरोहर है। अध्यापिका बताती हैं कि बुद्ध के उपदेश सार्वकालिक हैं और जातकमाला की व्याघ्री-जातक कथा सुनाती हैं — बोधिसत्त्व एक भूखी बाघिन को अपने बच्चों को खाने के पाप से बचाने हेतु योगबल से प्राण त्यागकर अपना शरीर दे देते हैं। वही बोधिसत्त्व अगले जन्म में बुद्ध बने, जिन्होंने चार आर्यसत्य, अष्टाङ्गिक मार्ग और गृहस्थों के लिए पञ्चशील का उपदेश दिया। पञ्चशील के पालन से ही आदर्श समाज बनता है।
2. व्याघ्री-जातक की कथा अपने शब्दों में लिखिए।
करुणामय बोधिसत्त्व सत्कर्मों के बल से कुलीन घर में जन्मे और शीघ्र 18 विद्याओं व सभी कलाओं में पारंगत हुए। एक दिन शिष्य अजित के साथ वन में घूमते हुए उन्होंने पर्वत-गुफा में प्रसव से थकी, भूखी बाघिन देखी जो अपने ही बच्चों को खाने वाली थी। उन्होंने अजित को भोजन खोजने भेजा और सोचा कि शरीर नश्वर है, परोपकार के लिए है। उन्होंने योगबल से प्राण त्याग दिए; उनका शरीर गुफा में गिरा और बाघिन ने उसे खाकर अपने बच्चों को नहीं मारा। यही बोधिसत्त्व अगले जन्म में भगवान बुद्ध बने।
3. पञ्चशील का विस्तार से वर्णन कीजिए और आज के समाज में उनकी उपयोगिता बताइए।
1. पाणातिपाता वेरमणि — जीव-हिंसा से विरति; 2. अदिन्नादाना वेरमणि — बिना दी वस्तु न लेना (चोरी न करना); 3. कामेसु मिच्छाचारा वेरमणि — दुराचार से विरति; 4. मुसावादा वेरमणि — झूठ से विरति; 5. सुरामेरय-मज्ज-पमादट्ठाना वेरमणि — नशे से विरति। आज हिंसा, भ्रष्टाचार, झूठी खबरें और नशे की समस्या बढ़ रही है; पञ्चशील इन सबका नैतिक समाधान है और व्यक्ति व समाज दोनों को स्वस्थ बनाता है।
4. चार आर्यसत्य और अष्टाङ्गिक मार्ग का परस्पर सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
चार आर्यसत्य रोग-निदान की तरह हैं — दुःख (रोग), तृष्णा (कारण), निर्वाण (आरोग्य) और मार्ग (औषधि)। चौथा आर्यसत्य ही अष्टाङ्गिक मार्ग है — सम्यक् दृष्टि, संकल्प, वाक्, कर्मान्त, आजीव, व्यायाम, स्मृति, समाधि। इस मार्ग पर चलकर तृष्णा नष्ट होती है और दुःख का निरोध होता है। ये आठ अंग प्रज्ञा, शील और समाधि — तीनों को पुष्ट करते हैं।
5. बोधिसत्त्व के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए।
1. करुणासागर — जीव-मात्र पर दया; 2. विद्वान् — 18 विद्याओं व सभी कलाओं में पारंगत; 3. परिश्रमी — आलस्य-रहित, जिज्ञासु; 4. धर्मनिष्ठ — धर्माभ्यास से पवित्र बुद्धि; 5. त्यागी — परोपकार के लिए प्राण तक दे दिए; 6. विवेकी — आत्मा-शरीर के भेद को समझने वाले; 7. प्रभावशाली — उनके प्रभाव से हिंसक जन्तु भी अहिंसक हो जाते थे।
6. बौद्ध धर्म का परिचय पाठ के आधार पर विस्तार से दीजिए।
प्रवर्तक गौतम बुद्ध ने पालि भाषा में धर्म-प्रचार किया। मूल सिद्धान्त — चार आर्यसत्य, अष्टाङ्गिक मार्ग, पञ्चशील, शरणत्रय। सत्य, अहिंसा, करुणा, परोपकार, सामाजिकता के विकास में इसका बड़ा योगदान है। यह विश्व का चौथा बड़ा धर्म है और एशिया के अनेक देशों में फैला है। प्रमुख ग्रन्थ त्रिपिटक (सुत्त, विनय, अभिधम्म) है। आर्यशूर की जातकमाला, अश्वघोष के बुद्धचरित-सौन्दरानन्द संस्कृत में प्रसिद्ध बौद्ध ग्रन्थ हैं। विपश्यना इसकी प्रमुख ध्यान-पद्धति है।
7. ‘जीव-कारुण्य’ विषय पर एक लघु नाटिका (संवाद) की रूपरेखा लिखिए।
पात्र — रोहन, सीमा, अध्यापक। दृश्य — विद्यालय के बाहर एक घायल कुत्ता। रोहन उसे पत्थर मारना चाहता है; सीमा रोकती है — ‘अयं जीवः अपि वेदनाम् अनुभवति।’ अध्यापक आकर व्याघ्री-जातक की कथा सुनाते हैं। दोनों मिलकर कुत्ते को पानी पिलाते हैं और पशु-चिकित्सक के पास ले जाते हैं। अन्त में सब संकल्प लेते हैं — ‘वयं सर्वेषु जीवेषु करुणां करिष्यामः।’
8. पालि भाषा और संस्कृत की तुलना पाठ के आधार पर कीजिए।
पालि संस्कृत से निकली सरल लोकभाषा है। अन्तर — (1) पालि में हलन्त पद नहीं: आर्यसत्यम् → अरियसच्चं; (2) स्वर से पूर्व अनुस्वार सम्भव: दुक्खं अरियसच्चं; (3) अन्त में विसर्ग का ओ: सङ्कल्पः → सङ्कप्पो; (4) संयुक्ताक्षर सरल: धर्म → धम्म, सत्य → सच्च, शिक्षा → सिक्खा, प्राण → पाण। लोकभाषा होने से बुद्ध ने इसे जन-जन तक संदेश पहुँचाने के लिए चुना।
9. ‘परोपकारार्थमिदं शरीरम्’ — इस सूक्ति की व्याख्या पाठ के आधार पर कीजिए।
यह शरीर परोपकार के लिए है। बोधिसत्त्व मानते थे कि आत्मा अमर और शरीर नश्वर-जड़ है; इसलिए इसे किसी के प्राण बचाने में लगा देना ही इसका सर्वोत्तम उपयोग है। उन्होंने बाघिन व उसके बच्चों के लिए शरीर त्यागकर इसे सिद्ध किया। भारतीय परम्परा में दधीचि, शिबि आदि भी इसके उदाहरण हैं। आज रक्तदान, अंगदान, सेवा-कार्य इसी भावना के रूप हैं।
10. बुद्ध के जीवन से जुड़े चार तीर्थ-स्थानों और प्रसिद्ध बौद्ध शिक्षा-केन्द्रों पर टिप्पणी लिखिए।
लुम्बिनी (नेपाल) — जन्मस्थान; बोधगया (बिहार) — बोधिवृक्ष के नीचे ज्ञान-प्राप्ति; सारनाथ (उ.प्र.) — प्रथम धर्मोपदेश (धर्मचक्र-प्रवर्तन); कुशीनगर (उ.प्र.) — महापरिनिर्वाण। प्राचीन बौद्ध शिक्षा-केन्द्र — नालन्दा, विक्रमशिला, तक्षशिला, वलभी; प्रसिद्ध मठ/स्तूप — साँची, अजन्ता, तवांग, हेमिस आदि।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
पञ्चशील क्या हैं?
बुद्ध द्वारा गृहस्थों के लिए बताए पाँच नैतिक नियम — अहिंसा, चोरी न करना, दुराचार न करना, झूठ न बोलना, नशा न करना।
व्याघ्री-जातक किस ग्रन्थ से है?
आर्यशूर की जातकमाला से।
बौद्ध धर्म का प्रमुख ग्रन्थ कौन-सा है?
त्रिपिटक — सुत्तपिटक, विनयपिटक, अभिधम्मपिटक।
पञ्चशील किस भाषा में दिए गए हैं?
पालि भाषा में।
अष्टाङ्गिक मार्ग का पहला अंग क्या है?
सम्यक् दृष्टि (सम्मादिट्ठि) — वस्तुओं का यथार्थ ज्ञान।
✍️ प्रस्तुति: मनोज शर्मा (हिंदी-संस्कृत शिक्षक) — यह लेख NCERT कक्षा 9 संस्कृत पाठ्यपुस्तक “ऋषिकुल्या” पर आधारित अध्ययन-सामग्री है। मूल पाठ के लिए पाठ्यपुस्तक अवश्य पढ़ें।
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