पाठ परिचय
यह पाठ अन्ताराष्ट्रिय महिला दिवस (8 मार्च) के एक समारोह पर आधारित है, जिसका आयोजन स्वयंप्रभा महिला संघ ने किया है। मंच-संचालिका मेधा हैं, मुख्य अतिथि जिलाधिकारी युगन्धरा हैं और अध्यक्षता उच्च न्यायालय की भूतपूर्व न्यायाधीश अन्वीक्षा कर रही हैं।
युगन्धरा अपने भाषण में बताती हैं कि नारी के सच्चे आभूषण सोने-चाँदी के गहने नहीं, बल्कि बुद्धि, उत्साह, स्मृति, प्रज्ञा, कला, धैर्य और सहिष्णुता हैं। वे ऋग्वेद-काल की वीराङ्गना विश्पला (जिन्हें अश्विनीकुमारों ने लोहे का पैर लगाया) और कारगिल-युद्ध की वीराङ्गना गुंजन सक्सेना की प्रेरक कथा सुनाती हैं। अन्त में अन्वीक्षा अपने अध्यक्षीय भाषण में भारत की पुण्यश्लोक नारियों का स्मरण करती हैं।
📌 शीर्षक का स्रोत: “या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता” — दुर्गासप्तशती (देवीमाहात्म्य) | विधा: भाषण/कार्यक्रम-संवाद | संदेश: नारी शक्ति का सम्मान और समान अवसर
मूल पाठ का सरलार्थ (हिंदी)
पाठ के प्रत्येक अंश का मुख्य वाक्य और उसका सरल हिंदी अर्थ नीचे दिया गया है। पूरा पाठ पाठ्यपुस्तक में पढ़ें।
अंश 1 – स्वागत (मेधा)
अद्य वयम् अत्र अन्ताराष्ट्रियमहिलादिवसकार्यक्रमस्य निमित्तेन समुपस्थिताः स्मः।
सरलार्थ: नमस्ते! स्वयंप्रभा-महिला-स्वयंसेविका संस्था की ओर से मैं सबका हार्दिक स्वागत करती हूँ। आज हम अन्ताराष्ट्रिय महिला दिवस कार्यक्रम के निमित्त यहाँ उपस्थित हैं। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि हैं इस जनपद की प्रशासनाधिकारी (जिलाधिकारी) युगन्धरा महोदया, और अध्यक्षता कर रही हैं उच्च न्यायालय की भूतपूर्व न्यायाधीश अन्वीक्षा महोदया — जिन्होंने अपने कर्तृत्व से अपना नाम सार्थक किया है। हम तुलसी के पौधे और पुस्तक भेंट करके उनका स्वागत करते हैं।
अंश 2 – नारी के आभूषण (युगन्धरा)
बुद्ध्युत्साह-स्मृति-प्रज्ञा-कला-धृति-सहिष्णुताः ।
नारीणां भूषणान्येवं न मात्रं रूपचारुता ॥
सरलार्थ: युगन्धरा कहती हैं — मेरे सामने शक्ति-रूप में उपस्थित नारी-शक्ति को प्रणाम। यह 8 मार्च पूरे विश्व में महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। मेरे मन में प्रश्न उठता है — नारियों के आभूषण क्या हैं? क्या महँगे सोने-चाँदी के हार-कुण्डल ही असली आभूषण हैं? नहीं! बुद्धि, उत्साह, स्मृति, प्रज्ञा (विवेक), विविध कलाएँ, धैर्य और सहिष्णुता — यही नारियों के वास्तविक आभूषण हैं, केवल रूप की सुन्दरता नहीं। इन आभूषणों से शोभित महिलाएँ आज हर क्षेत्र में आगे हैं।
अंश 3 – वीराङ्गना विश्पला की कथा
राज्ञी विश्पला अपि युद्धरङ्गं प्रविश्य देशरक्षायै युद्धम् अकरोत्।
सरलार्थ: वैदिक युग में एक राजा थे जो खेलों में अत्यन्त निपुण थे, इसलिए उनका नाम ‘खेलराज’ प्रसिद्ध हुआ। उनकी पत्नी थी विश्पला। एक बार देश में युद्ध छिड़ गया। रानी विश्पला भी रणभूमि में उतरकर देश-रक्षा के लिए लड़ीं। पराक्रम से लड़ते हुए वे शत्रुओं से घिर गईं और शत्रुओं के शस्त्रों से उनका पैर कट गया। भारी पीड़ा सहते हुए भी वे हतोत्साहित नहीं हुईं — उनका युद्ध जारी रखने और शत्रुओं को जीतने का निश्चय अटूट था। उनका ऐसा मनोबल, धैर्य और वीरोचित भाव देखकर राजा के मार्गदर्शक महर्षि अगस्त्य चकित हो गए।
अंश 4 – लोहे का पैर
तस्याः अक्षय्यं निर्धारं विज्ञाय तौ तस्यै लोहनिर्मितपादञ्च अकल्पयताम्।
सरलार्थ: महर्षि अगस्त्य ने उसी रात देवताओं के चिकित्सक अश्विनीकुमारों को बुलाया। उन्होंने विश्पला के पैर का उपचार किया और उसके अटूट निश्चय को जानकर उसके लिए लोहे का बना पैर लगाया। फिर सबकी अनुमति लेकर वह नए उत्साह से युद्ध में उतरी और विजय-लक्ष्मी प्राप्त की। कृत्रिम पैर से युक्त होकर भी विश्पला ने युद्ध में अपूर्व पराक्रम दिखाया। भारतीय महिलाओं में रानी विश्पला इच्छाशक्ति की प्रतिमा के समान सबको प्रेरित करती हैं। गार्गी, मैत्रेयी, लोपामुद्रा जैसी विदुषियों की उज्ज्वल श्रेणी में वे माणिक्य के समान शोभित स्त्रीरत्न हैं।
अंश 5 – कारगिल-वीराङ्गना गुंजन सक्सेना
कारगिलयुद्धकाले युद्धविमानम् उड्डाययन्ती सा उपसहस्रं व्रणितान् आपद्ग्रस्तान् च सैनिकान् युद्धभूमितः सुरक्षितं स्थानं प्रति आनयत्।
सरलार्थ: वीराङ्गनाओं की यह परम्परा इस देश में निरन्तर चल रही है। यहाँ विश्पला के समान क्षात्र-तेज से युक्त गुंजन सक्सेना भी स्मरणीय हैं। उत्तर प्रदेश के लखनऊ की निवासी गुंजन भारतीय वायुसेना का वैमानिक प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करके प्रथम महिला युद्ध-वैमानिकी (कॉम्बैट पायलट) बनीं। कारगिल-युद्ध के समय युद्ध-विमान (हेलीकॉप्टर) उड़ाते हुए उन्होंने लगभग एक हजार घायल और संकटग्रस्त सैनिकों को युद्धभूमि से सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया। उन्होंने युद्धरत सैनिकों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी की। युद्धक्षेत्र की संकटपूर्ण स्थिति में उनके शौर्य और धैर्य के लिए भारत सरकार ने उन्हें शौर्यचक्र पुरस्कार से सम्मानित किया।
अंश 6 – प्रेरणा और संकल्प
पुरुषाणामिव स्त्रीणां सर्वाङ्गीणा समुन्नतिः ।
यत्र स्यात् तत्र राष्ट्रे हि स्वर्गः प्रावतरिष्यति ॥ (ग्रामगीतामृतम् 20.36)
सरलार्थ: वायुसेना में गुंजन का प्रवेश और प्रशिक्षण आसान नहीं था, पर सब विघ्नों की परवाह न करते हुए उन्होंने निर्भय मन से देशसेवा की। इन दोनों महिलाओं की इच्छाशक्ति महान थी। यदि महिला दिवस पर समाज महिलाओं को प्रेरित करे और यथाशक्ति सहयोग दे तो परिवारों में सुख-शान्ति और देश का विकास तीव्र होगा। श्लोकार्थ: जिस राष्ट्र में पुरुषों के समान स्त्रियों की भी सर्वाङ्गीण उन्नति होती है, उस राष्ट्र में निश्चय ही स्वर्ग उतर आता है।
अंश 7 – अध्यक्षीय भाषण (अन्वीक्षा)
महिलागुणशक्तीनां प्राकृतानां विकासनम् ।
सुशिक्षणैः सुसंस्कारैर्भूयो भवतु भारते ॥ (ग्रामगीतामृतम् 20.18)
सरलार्थ: अन्वीक्षा कहती हैं — ‘स्वयंप्रभा’ आपकी संस्था का नाम है। इस प्रसंग पर मुझे रानी लक्ष्मीबाई, जीजाबाई, अहल्यादेवी, भगिनी निवेदिता, शारदादेवी और सावित्री (बाई फुले) याद आती हैं। ये पुण्यश्लोक (पवित्र चरित्र वाली) और जगत्-प्रसिद्ध नारियाँ अपने कर्तृत्व से स्वयं-प्रकाशित (स्वयंप्रभा) हैं। आज हम संकल्प करें कि अपनी इस गौरवशाली परम्परा का निर्वाह करेंगे। श्लोकार्थ: भारत में अच्छी शिक्षा और अच्छे संस्कारों द्वारा महिलाओं की स्वाभाविक गुण-शक्तियों का बार-बार (भरपूर) विकास हो।
पाठ का सारांश व मुख्य बिंदु
महिला दिवस समारोह में जिलाधिकारी युगन्धरा बताती हैं कि नारी के सच्चे आभूषण उसके गुण हैं — बुद्धि, उत्साह, स्मृति, प्रज्ञा, कला, धैर्य, सहिष्णुता। वैदिक वीराङ्गना विश्पला ने पैर कटने पर भी हार नहीं मानी, अश्विनीकुमारों द्वारा लगाए लोहे के पैर से युद्ध जीता। आधुनिक वीराङ्गना गुंजन सक्सेना ने कारगिल युद्ध में लगभग 1000 घायल सैनिकों को बचाया और शौर्यचक्र पाया। अध्यक्षा अन्वीक्षा लक्ष्मीबाई, जीजाबाई आदि पुण्यश्लोक नारियों का स्मरण कर गौरवशाली परम्परा निभाने का संकल्प कराती हैं।
- अवसर: अन्ताराष्ट्रिय महिला दिवस, 8 मार्च; आयोजक: स्वयंप्रभा महिला संघ।
- पात्र: मेधा (संचालिका), युगन्धरा (मुख्य अतिथि, जिलाधिकारी), अन्वीक्षा (अध्यक्षा, भूतपूर्व न्यायाधीश)।
- स्वागत: तुलसी के पौधे और पुस्तक से।
- नारी के आभूषण: बुद्धि, उत्साह, स्मृति, प्रज्ञा, कला, धृति, सहिष्णुता।
- विश्पला: राजा खेलराज की पत्नी; मार्गदर्शक अगस्त्य; अश्विनीकुमारों ने लोहे का पैर लगाया; इच्छाशक्ति की प्रतिमा।
- गुंजन सक्सेना: लखनऊ निवासी, प्रथम महिला युद्ध-वैमानिकी; कारगिल में ~1000 घायल सैनिक बचाए; शौर्यचक्र।
- पुण्यश्लोक नारियाँ: लक्ष्मीबाई, जीजाबाई, अहल्यादेवी, भगिनी निवेदिता, शारदादेवी, सावित्री।
- श्लोक-स्रोत: ग्रामगीतामृतम् (20.36, 20.18)।
व्याकरण विशेष
1. विशेषण-विशेष्य (पाठ से)
| विशेषण | विशेष्य |
| अक्षय्यम् | निर्धारम् |
| लोहनिर्मितम् | पादम् |
| कृत्रिमपादयुता | विश्पला |
| अपूर्वम् | पराक्रमम् |
| निर्भयेन | मनसा |
| प्रेरक | वचनैः |
| महतीम् | ऊर्जाम् |
नियम: विशेषण का लिङ्ग, विभक्ति और वचन विशेष्य के अनुसार होता है — जैसे महतीम् ऊर्जाम् (स्त्री., द्वितीया, एक.)।
2. प्रत्यय
मयट् (से बना) — स्वर्णमयानि, रजतमयानि • तल् (भाव) — सहिष्णुता, रूपचारुता • ल्यप् — अविगणय्य, प्रविश्य, विज्ञाय • शतृ (स्त्री.) — कुर्वती, उड्डाययन्ती, जनयन्ती • शानच् — सहमाना, शोभमाना, विराजमाना
3. सन्धि
हतोत्साहा = हत + उत्साहा (गुण) • वीरोचित = वीर + उचित (गुण) • महार्घाणि = महा + अर्घाणि (दीर्घ) • भूषणान्येवम् = भूषणानि + एवम् (यण्) • सुसंस्कारैर्भूयः = सुसंस्कारैः + भूयः (विसर्ग → र्)
पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
प्रश्न 1. उत्तराणि लिखत
(क) अन्ताराष्ट्रियमहिलादिवसः कदा आचर्यते ?
अन्ताराष्ट्रियमहिलादिवसः प्रतिवर्षं मार्चमासस्य अष्टमे दिनाङ्के आचर्यते।
(ख) खेलराजस्य मार्गदर्शकः कः आसीत् ?
खेलराजस्य मार्गदर्शकः महर्षिः अगस्त्यः आसीत्।
(ग) अश्विनीकुमारौ केन निर्मितं पादं विश्पलायाः कृते अकल्पयताम् ?
अश्विनीकुमारौ लोहेन निर्मितं पादं विश्पलायाः कृते अकल्पयताम्।
(घ) भारतसर्वकारेण गुञ्जनसक्सेना कथं सम्मानिता ?
भारतसर्वकारेण गुञ्जनसक्सेना शौर्यचक्रपुरस्कारेण सम्मानिता।
(ङ) नारीणां भूषणानि कानि ?
बुद्धिः, उत्साहः, स्मृतिः, प्रज्ञा, कला, धृतिः, सहिष्णुता च नारीणां भूषणानि सन्ति।
(च) भारतीयमहिलासु विश्पला कस्याः प्रतिरूपमिव सर्वान् प्रेरयति ?
भारतीयमहिलासु विश्पला इच्छाशक्तेः प्रतिरूपमिव सर्वान् प्रेरयति।
(छ) कारगिलयुद्धे गुञ्जनसक्सेना कं पराक्रमं कृतवती ?
कारगिलयुद्धे गुञ्जनसक्सेना युद्धविमानम् उड्डाययन्ती उपसहस्रं व्रणितान् आपद्ग्रस्तान् च सैनिकान् युद्धभूमितः सुरक्षितं स्थानम् आनयत्, सैनिकेभ्यः अपेक्षितवस्तूनाम् आपूर्तिम् अपि अकरोत्।
(ज) काः महिलाः पुण्यश्लोकाः स्वयंप्रभाः च सन्ति ?
राज्ञी लक्ष्मीबाई, जिजाबाई, अहल्यादेवी, भगिनी निवेदिता, शारदादेवी, सावित्री च पुण्यश्लोकाः स्वयंप्रभाः च सन्ति।
प्रश्न 2. प्रश्ननिर्माणम् (सम्भावित रेखाङ्कित पद मोटे अक्षरों में)
(क) अद्य वयम् अत्र अन्ताराष्ट्रियमहिलादिवसकार्यक्रमस्य निमित्तेन समुपस्थिताः स्मः ।
अद्य वयम् अत्र कस्य निमित्तेन समुपस्थिताः स्मः ?
(ख) सः तस्यामेव रात्रौ देवचिकित्सकौ अश्विनीकुमारौ समाहूतवान् ।
सः तस्यामेव रात्रौ देवचिकित्सकौ कौ समाहूतवान् ?
(ग) युद्धरतेभ्यः सैनिकेभ्यः अपेक्षितवस्तूनाम् आपूर्तिं विमानेन कृतवती ।
केभ्यः सैनिकेभ्यः अपेक्षितवस्तूनाम् आपूर्तिं विमानेन कृतवती ?
(घ) स्वयंप्रभा इति भवतीनां संस्थायाः नाम ।
स्वयंप्रभा इति कासां संस्थायाः नाम ?
(ङ) सा युद्धम् अनुवर्तयितुं शत्रून् जेतुं च ऐच्छत् ।
सा युद्धम् अनुवर्तयितुं कान् जेतुं च ऐच्छत् ?
प्रश्न 3. विशेषणं विशेष्यं च चिनुत
(क) तस्याः अक्षय्यं निर्धारं विज्ञाय तौ तस्यै लोहनिर्मितपादञ्च अकल्पयताम् ।
अक्षय्यम् – निर्धारम्; लोहनिर्मितम् – पादम्
(ख) कृत्रिमपादयुता अपि विश्पला रणे अपूर्वं पराक्रमं प्रदर्शितवती ।
कृत्रिमपादयुता – विश्पला; अपूर्वम् – पराक्रमम्
(ग) …निर्भयेन मनसा युद्धक्षेत्रं प्रविश्य… सा देशसेवां निरवहत् ।
निर्भयेन – मनसा
(घ) भवत्याः प्रेरकवचनैः वयं सर्वे महतीम् ऊर्जां प्राप्तवन्तः ।
प्रेरक – वचनैः; महतीम् – ऊर्जाम्; सर्वे – वयम्
प्रश्न 4. विग्रहं लिखत
(क) युद्धनिपुणा
युद्धे निपुणा (सप्तमी तत्पुरुष)
(ख) प्रेरकप्रसङ्गः
प्रेरकः प्रसङ्गः (कर्मधारय)
(ग) वीरोचितभावः
वीराय उचितः, वीरोचितः च असौ भावः (तत्पुरुष + कर्मधारय)
(घ) अपूर्वं पराक्रमम्
न पूर्वम् इति अपूर्वम् (नञ् तत्पुरुष), अपूर्वं पराक्रमम्
(ङ) महार्घाणि आभूषणानि
महान्ति अर्घाणि येषां तानि (बहुव्रीहि) आभूषणानि
प्रश्न 5. पाठक्रमानुसारं वाक्यानि
सही क्रम
(1) कदाचित् देशे युद्धम् आरब्धम् । (2) पराक्रमेण युद्धं कुर्वती सा शत्रुभिः परिवेष्टिता जाता । (3) तस्याः पादः शत्रूणां शस्त्रैः छिन्नः अभवत् । (4) अश्विनीकुमारौ विश्पलायाः पादोपचारं कृतवन्तौ । (5) कृत्रिमपादयुता अपि विश्पला रणे अपूर्वं पराक्रमं प्रदर्शितवती ।
25 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
1. अन्ताराष्ट्रिय महिला दिवस कब मनाया जाता है?
- (क) 8 मार्च
- (ख) 15 अगस्त
- (ग) 5 सितम्बर
- (घ) 26 जनवरी
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(क) 8 मार्च2. कार्यक्रम की आयोजक संस्था का नाम है —
- (क) शक्ति संघ
- (ख) स्वयंप्रभा महिला संघ
- (ग) नारी मंच
- (घ) दुर्गा वाहिनी
उत्तर देखें
(ख) स्वयंप्रभा महिला संघ3. कार्यक्रम की संचालिका कौन है?
- (क) युगन्धरा
- (ख) अन्वीक्षा
- (ग) मेधा
- (घ) विश्पला
उत्तर देखें
(ग) मेधा4. मुख्य अतिथि युगन्धरा का पद क्या है?
- (क) न्यायाधीश
- (ख) जिलाधिकारी
- (ग) प्राचार्या
- (घ) सेनापति
उत्तर देखें
(ख) जिलाधिकारी5. कार्यक्रम की अध्यक्षा कौन हैं?
- (क) मेधा
- (ख) अन्वीक्षा
- (ग) गार्गी
- (घ) सावित्री
उत्तर देखें
(ख) अन्वीक्षा6. अतिथियों का स्वागत किससे किया गया?
- (क) पुष्पमाला
- (ख) तुलसी के पौधे और पुस्तक
- (ग) शॉल
- (घ) मिठाई
उत्तर देखें
(ख) तुलसी के पौधे और पुस्तक7. नारी का वास्तविक आभूषण क्या नहीं है?
- (क) बुद्धि
- (ख) धृति
- (ग) स्वर्णहार
- (घ) सहिष्णुता
उत्तर देखें
(ग) स्वर्णहार8. विश्पला किस राजा की पत्नी थी?
- (क) खेलराज
- (ख) दशरथ
- (ग) जनक
- (घ) अशोक
उत्तर देखें
(क) खेलराज9. खेलराज का मार्गदर्शक कौन था?
- (क) वसिष्ठ
- (ख) अगस्त्य
- (ग) विश्वामित्र
- (घ) भरद्वाज
उत्तर देखें
(ख) अगस्त्य10. विश्पला का पैर किसने लगाया?
- (क) धन्वन्तरि
- (ख) अश्विनीकुमार
- (ग) सुश्रुत
- (घ) चरक
उत्तर देखें
(ख) अश्विनीकुमार11. विश्पला का नया पैर किससे बना था?
- (क) लकड़ी
- (ख) सोना
- (ग) लोहा
- (घ) चाँदी
उत्तर देखें
(ग) लोहा12. विश्पला किसकी प्रतिमा मानी गई?
- (क) इच्छाशक्ति
- (ख) सौन्दर्य
- (ग) धन
- (घ) भक्ति
उत्तर देखें
(क) इच्छाशक्ति13. गुंजन सक्सेना कहाँ की निवासी थीं?
- (क) कानपुर
- (ख) लखनऊ
- (ग) दिल्ली
- (घ) जयपुर
उत्तर देखें
(ख) लखनऊ14. गुंजन सक्सेना किस युद्ध से जुड़ी हैं?
- (क) 1965
- (ख) 1971
- (ग) कारगिल
- (घ) 1962
उत्तर देखें
(ग) कारगिल15. गुंजन ने लगभग कितने घायल सैनिकों को बचाया?
- (क) सौ
- (ख) पाँच सौ
- (ग) एक हजार
- (घ) दस
उत्तर देखें
(ग) एक हजार16. गुंजन सक्सेना को कौन-सा पुरस्कार मिला?
- (क) परमवीर चक्र
- (ख) शौर्यचक्र
- (ग) भारत रत्न
- (घ) पद्मश्री
उत्तर देखें
(ख) शौर्यचक्र17. ‘पुरुषाणामिव स्त्रीणां…’ श्लोक किस ग्रन्थ से है?
- (क) रामायण
- (ख) ग्रामगीतामृतम्
- (ग) हितोपदेश
- (घ) मनुस्मृति
उत्तर देखें
(ख) ग्रामगीतामृतम्18. ‘व्रणितान्’ का अर्थ है —
- (क) घायलों को
- (ख) वीरों को
- (ग) शत्रुओं को
- (घ) बच्चों को
उत्तर देखें
(क) घायलों को19. ‘हतोत्साहा’ में कौन-सा समास है?
- (क) बहुव्रीहि
- (ख) द्वन्द्व
- (ग) द्विगु
- (घ) अव्ययीभाव
उत्तर देखें
(क) बहुव्रीहि20. ‘स्वर्णमयानि’ में कौन-सा प्रत्यय है?
- (क) तल्
- (ख) मयट्
- (ग) ल्यप्
- (घ) क्त
उत्तर देखें
(ख) मयट्21. ‘सहिष्णुता’ में प्रत्यय है —
- (क) तल्
- (ख) मतुप्
- (ग) त्व
- (घ) ष्यञ्
उत्तर देखें
(क) तल्22. ‘अविगणय्य’ का अर्थ है —
- (क) गिनकर
- (ख) परवाह न करके
- (ग) भागकर
- (घ) रोकर
उत्तर देखें
(ख) परवाह न करके23. ‘महतीम् ऊर्जाम्’ में विशेष्य है —
- (क) महतीम्
- (ख) ऊर्जाम्
- (ग) दोनों
- (घ) कोई नहीं
उत्तर देखें
(ख) ऊर्जाम्24. इनमें से पुण्यश्लोक नारियों में किसका नाम है?
- (क) लक्ष्मीबाई
- (ख) मेधा
- (ग) युगन्धरा
- (घ) अन्वीक्षा
उत्तर देखें
(क) लक्ष्मीबाई25. ‘स्वयंप्रभा’ का अर्थ है —
- (क) अपने तेज से चमकने वाली
- (ख) दूसरों पर निर्भर
- (ग) छाया
- (घ) अंधकार
उत्तर देखें
(क) अपने तेज से चमकने वाली
20 अति लघु उत्तरीय प्रश्न
1. युगन्धरा के मन में कौन-सा प्रश्न उठता है?
नारियों के आभूषण क्या हैं?
2. ‘स्वनाम अन्वर्थं कुर्वाणा’ किसके लिए कहा गया?
अध्यक्षा अन्वीक्षा के लिए।
3. ‘रूपचारुता’ का अर्थ लिखिए।
रूप की सुन्दरता।
4. विश्पला किस युग की वीराङ्गना थीं?
वैदिक युग की।
5. राजा का नाम ‘खेलराज’ क्यों पड़ा?
क्योंकि वह खेलों में अत्यन्त निपुण था।
6. विश्पला का पैर कैसे कटा?
शत्रुओं के शस्त्रों से।
7. अश्विनीकुमार कौन थे?
देवताओं के चिकित्सक।
8. विश्पला के निश्चय को कैसा बताया गया है?
अक्षय्य (अटूट)।
9. विश्पला की तुलना किन विदुषियों से की गई?
गार्गी, मैत्रेयी, लोपामुद्रा।
10. गुंजन सक्सेना किस सेना में थीं?
भारतीय वायुसेना।
11. गुंजन सक्सेना की विशेष उपलब्धि क्या है?
प्रथम महिला युद्ध-वैमानिकी (कॉम्बैट पायलट) बनीं।
12. गुंजन ने युद्धरत सैनिकों के लिए क्या किया?
विमान से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की।
13. महिलाओं की उन्नति से देश को क्या लाभ होगा?
देश का विकास तीव्र होगा और परिवारों में सुख-शान्ति आएगी।
14. स्त्रियों की सर्वाङ्गीण उन्नति वाले राष्ट्र में क्या होगा?
वहाँ स्वर्ग उतर आएगा।
15. महिलाओं की गुण-शक्तियों का विकास कैसे हो?
सुशिक्षा और सुसंस्कारों से।
16. ‘पुण्यश्लोकाः’ का अर्थ लिखिए।
पवित्र चरित्र/यश वाली।
17. ‘अक्षय्यम्’ का विग्रह लिखिए।
न क्षय्यम् (नञ् तत्पुरुष)।
18. पाठ का शीर्षक किस ग्रन्थ की पंक्ति पर आधारित है?
दुर्गासप्तशती (देवीमाहात्म्य)।
19. ‘झञ्झावातवत्’ का अर्थ लिखिए।
तूफान की तरह।
20. ‘उड्डाययन्ती’ में कौन-सा प्रत्यय है?
शतृ (स्त्रीलिङ्ग)।
20 लघु उत्तरीय प्रश्न
1. युगन्धरा के अनुसार नारी के वास्तविक आभूषण कौन-से हैं?
सोने-चाँदी के महँगे हार-कुण्डल नहीं, बल्कि बुद्धि, उत्साह, स्मृति, प्रज्ञा (विवेक), विविध कलाएँ, धैर्य और सहिष्णुता — यही नारियों के अमूल्य आभूषण हैं; केवल रूप की सुन्दरता नहीं।
2. विश्पला के साहस का वर्णन कीजिए।
युद्ध में पैर कट जाने और भारी पीड़ा के बावजूद विश्पला हतोत्साहित नहीं हुईं। उनका युद्ध जारी रखने का निश्चय अटूट था। लोहे का पैर लगवाकर उन्होंने फिर युद्ध किया और विजय प्राप्त की।
3. अगस्त्य ऋषि ने विश्पला की सहायता कैसे की?
विश्पला का मनोबल और वीरोचित भाव देखकर अगस्त्य चकित हुए और उसी रात देव-चिकित्सक अश्विनीकुमारों को बुलाया, जिन्होंने उपचार करके लोहे का पैर लगाया।
4. विश्पला-कथा आधुनिक चिकित्सा के किस विषय से जुड़ती है?
कृत्रिम अंग (Prosthetic limb) से। यह विश्व के प्राचीनतम कृत्रिम अंग-प्रत्यारोपण के उल्लेखों में माना जाता है, जो ऋग्वेद में वर्णित है।
5. गुंजन सक्सेना के योगदान को संक्षेप में लिखिए।
लखनऊ की गुंजन सक्सेना भारतीय वायुसेना की प्रथम महिला युद्ध-वैमानिकी बनीं। कारगिल युद्ध में उन्होंने लगभग 1000 घायल सैनिकों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया और रसद आपूर्ति की, जिसके लिए उन्हें शौर्यचक्र मिला।
6. गुंजन सक्सेना के मार्ग में कौन-सी कठिनाइयाँ थीं?
वायुसेना में महिला का प्रवेश और प्रशिक्षण आसान व सुलभ नहीं था, पर उन्होंने सभी विघ्नों की परवाह न करते हुए निर्भय मन से युद्धक्षेत्र में देशसेवा की।
7. विश्पला और गुंजन सक्सेना में क्या समानता है?
दोनों में महान इच्छाशक्ति, क्षात्र-तेज, धैर्य और देशभक्ति थी। दोनों ने संकट की स्थिति में भी हार नहीं मानी और युद्धभूमि में अद्भुत पराक्रम दिखाया।
8. महिला दिवस मनाने की सार्थकता युगन्धरा ने क्या बताई?
यदि इस दिन समाज महिलाओं को प्रेरित करे और यथाशक्ति सहयोग दे, जिससे वे अपने लक्ष्य के शिखर तक पहुँचें, तभी महिला दिवस सफल है।
9. ‘पुरुषाणामिव स्त्रीणां…’ श्लोक का भावार्थ लिखिए।
स्त्री और पुरुष समाज रूपी रथ के दो पहिए हैं। जिस राष्ट्र में पुरुषों के समान स्त्रियों की भी सर्वाङ्गीण उन्नति होती है, वहाँ विकास तीव्र होता है और स्वर्ग उतर आता है।
10. अन्वीक्षा ने किन नारियों का स्मरण किया और क्यों?
रानी लक्ष्मीबाई, जीजाबाई, अहल्यादेवी, भगिनी निवेदिता, शारदादेवी, सावित्री — क्योंकि ये अपने कर्तृत्व से स्वयं प्रकाशित (स्वयंप्रभा), पुण्यश्लोक और विश्वविख्यात नारियाँ थीं।
11. संस्था का नाम ‘स्वयंप्रभा’ क्यों सार्थक है?
स्वयंप्रभा अर्थात् अपने तेज से चमकने वाली। संस्था नारियों को आत्मनिर्भर और स्वयं-प्रकाशित बनाना चाहती है, जैसे इतिहास की महान नारियाँ थीं।
12. ‘महिलागुणशक्तीनां…’ श्लोक का भाव लिखिए।
भारत की महिलाएँ स्वाभाविक रूप से गुणशालिनी हैं; केवल उनके गुणों का विकास करना है। अच्छी शिक्षा और अच्छे संस्कारों से यदि उनकी गुण-शक्तियाँ विकसित हों तो वे शीघ्र ही विकसित होंगी।
13. ‘हतोत्साहा’ और ‘महार्घाणि’ का समास-विग्रह लिखिए।
हतोत्साहा – हतः उत्साहः यस्याः सा (बहुव्रीहि); महार्घाणि – महान्ति अर्घाणि येषां तानि (बहुव्रीहि)।
14. ‘सा देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता’ शीर्षक का अर्थ और सार्थकता लिखिए।
अर्थ — वह देवी सब प्राणियों में शक्ति रूप से स्थित है। पाठ में नारी को शक्ति का साक्षात् रूप बताया गया है — विश्पला और गुंजन सक्सेना जैसी वीराङ्गनाएँ इसका प्रमाण हैं, अतः शीर्षक सार्थक है।
15. पाठ में आए दो विशेषण-विशेष्य युग्म और उनका नियम लिखिए।
अक्षय्यं निर्धारम्, महतीम् ऊर्जाम्। विशेषण का लिङ्ग, विभक्ति, वचन विशेष्य के अनुसार होता है।
16. विद्यालय में महिला दिवस निमन्त्रण-पत्र में किन बिंदुओं का ध्यान रखें?
कार्यक्रम का नाम, स्थान, दिनांक, समय; अध्यक्ष, अतिथि, वक्ता के नाम; मुख्य आकर्षण (भाषण, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सम्मान-समारोह); अन्त में आमन्त्रित करने वालों के नाम।
17. जीजाबाई का परिचय पाठ के संदर्भ में दीजिए।
जीजाबाई ने दासता से मुक्ति का स्वप्न देखा और अपने पुत्र शिवाजी को उत्तम संस्कार देकर स्वराज्य स्थापना के लिए प्रेरित किया — इसलिए वे पुण्यश्लोक नारी हैं।
18. ‘अविगणय्य’ और ‘विज्ञाय’ में प्रत्यय पहचानिए।
दोनों में ल्यप् प्रत्यय — अविगणय्य (वि+√गण्+णिच्+ल्यप्), विज्ञाय (वि+√ज्ञा+ल्यप्)।
19. आज की किन्हीं दो प्रेरक भारतीय महिलाओं के नाम और योगदान लिखिए।
कल्पना चावला – अंतरिक्ष यात्री; मैरी कॉम – विश्व चैंपियन मुक्केबाज़ (उदाहरण)।
20. पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
नारी का सम्मान करना चाहिए, उसे समान अवसर, शिक्षा और सहयोग देना चाहिए; गुण ही सच्चा आभूषण है; दृढ़ इच्छाशक्ति से हर बाधा पार की जा सकती है।
10 महत्त्वपूर्ण / दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. ‘सा देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता’ पाठ का सारांश लिखिए।
8 मार्च को स्वयंप्रभा महिला संघ के कार्यक्रम में मेधा अतिथियों का स्वागत करती हैं। मुख्य अतिथि जिलाधिकारी युगन्धरा कहती हैं कि नारी के आभूषण उसके गुण हैं। वे वैदिक वीराङ्गना विश्पला की कथा सुनाती हैं, जिसका पैर युद्ध में कटा, अगस्त्य के कहने पर अश्विनीकुमारों ने लोहे का पैर लगाया और उसने विजय पाई। फिर कारगिल-वीराङ्गना गुंजन सक्सेना का वर्णन है जिसने लगभग हजार घायल सैनिक बचाए और शौर्यचक्र पाया। अन्त में अध्यक्षा अन्वीक्षा पुण्यश्लोक नारियों का स्मरण कर गौरवशाली परम्परा निभाने का संकल्प कराती हैं।
2. विश्पला की कथा विस्तार से लिखिए।
वैदिक युग में खेलों में निपुण राजा खेलराज की पत्नी विश्पला थी। युद्ध छिड़ने पर वह देश-रक्षा के लिए रणभूमि में उतरी। शत्रुओं से घिरने पर उसका पैर कट गया, पर वह हतोत्साहित नहीं हुई। उसका मनोबल देखकर महर्षि अगस्त्य ने उसी रात अश्विनीकुमारों को बुलाया जिन्होंने उसके लिए लोहे का पैर बनाया। नए उत्साह से वह फिर युद्ध में उतरी और विजय पाई। वह इच्छाशक्ति की प्रतिमा के रूप में सदा प्रेरणा देती है।
3. नारी-सशक्तिकरण पर पाठ के आधार पर निबन्ध लिखिए।
पाठ बताता है कि नारी शक्ति का स्वरूप है। उसके सच्चे आभूषण बुद्धि, उत्साह, प्रज्ञा, धैर्य जैसे गुण हैं। वैदिक काल की विश्पला से लेकर आधुनिक गुंजन सक्सेना तक भारतीय नारी ने हर युग में पराक्रम दिखाया है। यदि पुरुषों के समान स्त्रियों की भी सर्वाङ्गीण उन्नति हो, उन्हें सुशिक्षा, सुसंस्कार और अवसर मिलें तो परिवार सुखी और राष्ट्र तीव्र गति से विकसित होगा। नारी-सशक्तिकरण ही राष्ट्र-सशक्तिकरण है।
4. ‘बुद्ध्युत्साह…’ श्लोक का पदच्छेद, अन्वय और भावार्थ लिखिए।
पदच्छेद — बुद्धि-उत्साह-स्मृति-प्रज्ञा-कला-धृति-सहिष्णुताः नारीणां भूषणानि एवं न मात्रं रूपचारुता। अन्वय — बुद्धिः, उत्साहः, स्मृतिः, प्रज्ञा, कला, धृतिः, सहिष्णुता (एतानि) नारीणां भूषणानि सन्ति, रूपचारुता मात्रं (भूषणं) न। भावार्थ — रूप-सौन्दर्य भी एक आभूषण है, पर बुद्धि, उत्साह, स्मृति (समय पर ज्ञान की उपस्थिति), प्रज्ञा (विवेक), गीत-वाद्य आदि कलाएँ, धैर्य और सहनशीलता नारियों के अमूल्य आभूषण हैं।
5. गुंजन सक्सेना के जीवन से युवाओं को क्या प्रेरणा मिलती है? विस्तार से लिखिए।
गुंजन सक्सेना ने ऐसे क्षेत्र में प्रवेश किया जहाँ महिलाओं के लिए राह कठिन थी। उन्होंने प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया, कारगिल युद्ध के कठिन पहाड़ी क्षेत्र में हेलीकॉप्टर उड़ाकर घायल सैनिकों को बचाया और रसद पहुँचाई। उनसे प्रेरणा मिलती है कि लक्ष्य के प्रति समर्पण, साहस और निर्भयता से कोई भी बाधा पार की जा सकती है और देशसेवा सर्वोपरि है।
6. पाठ में आए दोनों ‘ग्रामगीतामृतम्’ श्लोकों का भावार्थ लिखकर उनका संदेश बताइए।
1. ‘पुरुषाणामिव स्त्रीणां सर्वाङ्गीणा समुन्नतिः…’ — जिस राष्ट्र में पुरुषों के समान स्त्रियों की भी सर्वाङ्गीण उन्नति होती है वहाँ स्वर्ग उतर आता है। 2. ‘महिलागुणशक्तीनां प्राकृतानां विकासनम्…’ — भारत में सुशिक्षा व सुसंस्कारों से महिलाओं की स्वाभाविक गुण-शक्तियों का विकास हो। संदेश — लैंगिक समानता और महिला-शिक्षा राष्ट्र-विकास की कुंजी हैं।
7. कार्यक्रम के तीनों प्रमुख पात्रों का परिचय और उनकी भूमिका लिखिए।
मेधा — स्वयंप्रभा संस्था की संस्थापिका/संचालिका, जो स्वागत व संचालन करती हैं। युगन्धरा — जिलाधिकारी, मुख्य अतिथि, जो नारी-आभूषण, विश्पला व गुंजन सक्सेना की प्रेरक कथा सुनाती हैं। अन्वीक्षा — उच्च न्यायालय की भूतपूर्व न्यायाधीश, अध्यक्षा, जो पुण्यश्लोक नारियों का स्मरण कर संकल्प कराती हैं। तीनों स्वयं भी सशक्त नारी के उदाहरण हैं।
8. भारतीय इतिहास की किन्हीं चार पुण्यश्लोक नारियों का परिचय दीजिए।
रानी लक्ष्मीबाई — 1857 में अंग्रेजों से वीरतापूर्वक लड़ीं। जीजाबाई — शिवाजी की माता, स्वराज्य की प्रेरणा। अहल्याबाई होल्कर — कुशल, धर्मपरायण प्रशासक। सावित्रीबाई फुले — प्रथम महिला शिक्षिका, स्त्री-शिक्षा की अग्रदूत। (भगिनी निवेदिता — शिक्षा व सेवा; शारदादेवी — आध्यात्मिक माता)।
9. अपने विद्यालय में महिला दिवस कार्यक्रम का निमन्त्रण-पत्र संस्कृत में लिखिए।
॥ निमन्त्रणपत्रम् ॥ अन्ताराष्ट्रियमहिलादिवससमारोहः। स्थानम् – विद्यालयसभागारः। दिनाङ्कः – 08-03-2027, समयः – प्रातः दशवादने। अध्यक्षः – विद्यालयप्रबन्धनसमितेः अध्यक्षः; मुख्यातिथिः – जनपदप्रशासनाधिकारिणी; वक्ता – प्राचार्या। मुख्याकर्षणानि – भाषणानि, सांस्कृतिककार्यक्रमः, सम्मानसमारोहः च। भवतां सपरिवारम् उपस्थितिः प्रार्थ्यते। निवेदकाः – प्राचार्यः, शिक्षकवृन्दं छात्राः च।
10. ‘नारी के गुण ही उसके सच्चे आभूषण हैं’ — पाठ के आधार पर इस कथन की पुष्टि कीजिए।
विश्पला के पास न तो सोना काम आया न रूप — उसका धैर्य, उत्साह और अटूट निश्चय ही उसे विजयी बना सका। गुंजन सक्सेना को शौर्यचक्र उनकी बुद्धि, साहस और कौशल के कारण मिला। लक्ष्मीबाई, अहल्याबाई जैसी नारियाँ अपने गुणों से अमर हुईं। अतः श्लोक का कथन सत्य है कि बुद्धि, उत्साह, स्मृति, प्रज्ञा, कला, धृति और सहिष्णुता ही नारी के वास्तविक आभूषण हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
इस पाठ का शीर्षक कहाँ से लिया गया है?
दुर्गासप्तशती की प्रसिद्ध पंक्ति ‘या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता’ से।
विश्पला को लोहे का पैर किसने लगाया?
देव-चिकित्सक अश्विनीकुमारों ने, महर्षि अगस्त्य के कहने पर।
गुंजन सक्सेना को कौन-सा सम्मान मिला?
भारत सरकार द्वारा शौर्यचक्र।
नारी के सात आभूषण कौन-से हैं?
बुद्धि, उत्साह, स्मृति, प्रज्ञा, कला, धृति और सहिष्णुता।
पाठ के श्लोक किस ग्रन्थ से हैं?
‘ग्रामगीतामृतम्’ (अध्याय 20) से तथा एक सुभाषित।
✍️ प्रस्तुति: मनोज शर्मा (हिंदी-संस्कृत शिक्षक) — यह लेख NCERT कक्षा 9 संस्कृत पाठ्यपुस्तक “ऋषिकुल्या” पर आधारित अध्ययन-सामग्री है। मूल पाठ के लिए पाठ्यपुस्तक अवश्य पढ़ें।
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