बड़े भाई साहब (प्रेमचंद) — कक्षा 10 हिंदी स्पर्श: पात्र-चार्ट, व्याख्या, प्रश्नोत्तर और MCQ
कक्षा 10 हिंदी (स्पर्श भाग-2) की कहानी 'बड़े भाई साहब' की संपूर्ण अध्ययन सामग्री — लेखक परिचय, कहानी का सार, पात्रों का चार्ट, पात्रों से जुड़ी घटनाएँ, प्रसंग-वार व्याख्या, NCERT प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, 20 वस्तुनिष्ठ, 20 लघु-उत्तरीय, 10 दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न तथा परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न।
1. पाठ परिचय
'बड़े भाई साहब' प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी है। इसमें एक बड़ा भाई अपने छोटे भाई के लिए आदर्श बने रहने की कोशिश में अपना बचपन खो देता है। कहानी रटंत शिक्षा-प्रणाली पर व्यंग्य करती है और बताती है कि जीवन की समझ किताबों से नहीं, अनुभव से आती है।
लेखक परिचय — प्रेमचंद (1880–1936)
प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को बनारस के पास लमही गाँव में हुआ। उनका असली नाम धनपत राय था; उर्दू में वे नवाब राय और हिंदी में प्रेमचंद नाम से लिखते थे। उनका पहला कहानी-संग्रह 'सोज़े-वतन' अंग्रेज़ सरकार ने ज़ब्त कर लिया था। उन्होंने 'हंस' और 'माधुरी' पत्रिकाओं का संपादन किया। उन्हें 'कथा सम्राट' और 'उपन्यास सम्राट' कहा जाता है। उनकी सभी कहानियाँ 'मानसरोवर' के आठ खंडों में संकलित हैं। प्रमुख उपन्यास — गोदान, गबन, प्रेमाश्रम, सेवासदन, निर्मला, कर्मभूमि, रंगभूमि, कायाकल्प, प्रतिज्ञा और मंगलसूत्र (अपूर्ण)। 8 अक्तूबर 1936 को उनका देहावसान हुआ।
साहित्यिक विशेषताएँ — आम आदमी के दुख-दर्द का यथार्थ चित्रण, सरल-सहज और मुहावरेदार भाषा, हिंदी-उर्दू मिश्रित शब्दावली, सामाजिक बुराइयों पर तीखा व्यंग्य।
कहानी का सार
- बड़े भाई साहब छोटे भाई से पाँच साल बड़े थे, पर केवल तीन दरजे आगे। वे एक-एक दरजे में दो-तीन साल लगाते थे — "बुनियाद ही पुख्ता न हो, तो मकान कैसे पायेदार बने।"
- छोटा भाई (कथावाचक) नौ साल का था और खेल-कूद में मस्त रहता था। भाई साहब उसे हमेशा डाँटते — "कहाँ थे?" — और लंबे उपदेश देते।
- डाँट से घबराकर छोटा भाई कड़ा टाइम-टेबिल बनाता, पर पहले ही दिन मैदान की हरियाली और खेल उसे खींच ले जाते।
- सालाना इम्तिहान में भाई साहब फ़ेल हो गए और छोटा भाई दरजे में प्रथम आया। फिर भी भाई साहब ने घमंड न करने का उपदेश दिया और रावण, शैतान, शाहेरूम के उदाहरण दिए।
- अगले साल फिर यही हुआ — भाई साहब प्राणांतक परिश्रम करके भी फ़ेल हुए, छोटा भाई बिना मेहनत के अव्वल आया। अब दोनों में एक ही दरजे का अंतर रह गया।
- भाई साहब नरम पड़ गए; छोटा भाई पतंगबाज़ी में डूब गया। एक दिन कनकौआ लूटते समय भाई साहब ने उसे पकड़ा और समझाया कि जीवन का अनुभव किताबी ज्ञान से बड़ा है; अम्माँ-दादा और हेडमास्टर की माँ के उदाहरण दिए।
- छोटे भाई के मन में श्रद्धा जागी। भाई साहब ने स्वीकार किया कि उनका भी पतंग उड़ाने को जी ललचाता है, पर कर्तव्य के कारण वे बेराह नहीं चल सकते।
- उसी समय एक कटा कनकौआ ऊपर से गुज़रा — भाई साहब ने उछलकर उसकी डोर पकड़ ली और होस्टल की ओर दौड़ पड़े। उनके भीतर का बच्चा जाग उठा।
2. पात्रों का चार्ट
कहानी के दो मुख्य पात्र हैं — बड़े भाई साहब और छोटा भाई (कथावाचक); बाकी पात्र केवल उदाहरण या प्रसंग के रूप में आते हैं।
| पात्र | परिचय | चारित्रिक विशेषताएँ |
|---|---|---|
| बड़े भाई साहब | उम्र 14 वर्ष, नौवीं जमात में; छोटे भाई से 5 साल बड़े, पर 3 दरजे आगे | अध्ययनशील, परिश्रमी पर रटने वाले, उपदेश-कला में निपुण, कर्तव्यनिष्ठ, अनुशासनप्रिय, अनुभव को महत्त्व देने वाले, छोटे भाई के हितैषी; भीतर से बालसुलभ इच्छाएँ दबाने वाले |
| छोटा भाई (कथावाचक) | उम्र 9 वर्ष, पाँचवीं जमात में; कहानी का 'मैं' | खेल-प्रेमी, चंचल, कुशाग्र बुद्धि, संवेदनशील, बड़े भाई का आदर करने वाला, सफलता पर थोड़ा अभिमानी पर अंत में विनम्र |
| अम्माँ और दादा | दोनों भाइयों के माता-पिता (उल्लेख मात्र) | कम पढ़े-लिखे पर जीवन-अनुभव से समृद्ध; दादा ने कम खर्च में नौ लोगों का परिवार इज़्ज़त से चलाया |
| हेडमास्टर साहब | ऑक्सफ़ोर्ड से एम.ए., एक हज़ार रुपये वेतन (उदाहरण) | बड़ी डिग्री के बावजूद घर का प्रबंध न सँभाल सके |
| हेडमास्टर की बूढ़ी माँ | (उदाहरण) | बिना डिग्री के कुशल गृह-प्रबंधक; उनके आने से घर में "लक्ष्मी आ गई" |
| रावण, शैतान, शाहेरूम | उपदेश में दिए गए उदाहरण | घमंड के कारण पतन के प्रतीक |
3. पात्रों से जुड़ी घटनाएँ
| पात्र | घटना | घटना से पता चलता है |
|---|---|---|
| बड़े भाई साहब | कॉपी पर चिड़ियों-बिल्लियों के चित्र बनाना, 'स्पेशल, अमीना, भाइयों-भाइयों' जैसी बेतुकी इबारत लिखना | पढ़ाई का बोझ और दिमाग को आराम देने का तरीका |
| बड़े भाई साहब | हर बार पूछना — "कहाँ थे?" और अंग्रेज़ी की कठिनाई पर लंबा भाषण | छोटे भाई पर कठोर निगरानी, उपदेश-कुशलता |
| छोटा भाई | सुबह छह बजे से रात ग्यारह बजे तक का टाइम-टेबिल बनाना, पर पालन न कर पाना | खेल का स्वाभाविक आकर्षण |
| दोनों | पहली परीक्षा — भाई साहब फ़ेल, छोटा भाई प्रथम | रटंत पढ़ाई बनाम सहज बुद्धि |
| बड़े भाई साहब | गुल्ली-डंडा खेलकर लौटे भाई पर "तलवार खींचकर" टूट पड़ना; रावण-शैतान-शाहेरूम के उदाहरण | घमंड से बचाने की चिंता |
| बड़े भाई साहब | अलजबरा, जामेट्री, इतिहास और 'समय की पाबंदी' निबंध की कठिनाई गिनाना | शिक्षा-प्रणाली पर व्यंग्य |
| दोनों | दूसरी परीक्षा — भाई साहब फिर फ़ेल होकर रो पड़े, छोटा भाई भी रोने लगा | भाइयों का आपसी स्नेह |
| छोटा भाई | मन में कुटिल विचार आना कि भाई साहब फिर फ़ेल हो जाएँ, फिर उसे दिल से निकाल देना | बालमन की ईर्ष्या और विवेक |
| छोटा भाई | पतंगबाज़ी का शौक, भाई साहब की नज़र बचाकर कनकौए उड़ाना | आदर बनाए रखते हुए स्वच्छंदता |
| बड़े भाई साहब | बाज़ार से लौटते हुए कनकौआ लूटते भाई को पकड़कर अनुभव का महत्त्व समझाना | जीवन-अनुभव, आत्मगौरव और कर्तव्यबोध |
| बड़े भाई साहब | अंत में कटे कनकौए की डोर उछलकर पकड़ना और होस्टल की ओर दौड़ना | उनके भीतर छिपा बच्चा |
4. पाठ की मुख्य बातें
- विधा — कहानी; पुस्तक — स्पर्श भाग-2।
- मुख्य विषय — रटंत शिक्षा-प्रणाली पर व्यंग्य और अनुभव बनाम किताबी ज्ञान।
- उम्र और कक्षा — छोटा भाई 9 वर्ष (पाँचवीं), बड़ा भाई 14 वर्ष (नौवीं)।
- प्रसिद्ध पंक्ति — "इम्तिहान पास कर लेना कोई चीज़ नहीं, असल चीज़ है बुद्धि का विकास।"
- घमंड के उदाहरण — रावण (चक्रवर्ती राजा), शैतान, शाहेरूम।
- कठिन विषय — अलजबरा, जामेट्री, इंगलिस्तान का इतिहास (आठ हेनरी, दर्जनों जेम्स-विलियम, कोड़ियों चार्ल्स)।
- निबंध का विषय — 'समय की पाबंदी', चार पन्नों से कम न हो।
- अनुभव का महत्त्व — अम्माँ-दादा और हेडमास्टर की माँ के उदाहरण।
- पाँच साल का अंतर — "उसे तुम क्या, खुदा भी नहीं मिटा सकता।"
- मुहावरों की भरमार — सिर पर नंगी तलवार लटकना, आड़े हाथों लेना, अंधे के हाथ बटेर लगना, लोहे के चने चबाना, दाँतों पसीना आना, ऐरा-गैरा नत्थू खैरा, पापड़ बेलना, आटे-दाल का भाव मालूम होना, गिरह बाँधना।
- अंत — भाई साहब का कनकौए की डोर पकड़कर दौड़ना; कर्तव्य के पीछे दबा बचपन।
5. पाठ की व्याख्या (प्रसंग-क्रम से)
प्रसंग 1 — बड़े भाई साहब की पढ़ाई
भाई साहब मानते थे कि शिक्षा की बुनियाद मज़बूत होनी चाहिए, इसलिए एक साल का काम दो-तीन साल में करते थे। लेखक यहाँ व्यंग्य करता है — असल में वे बार-बार फ़ेल होते थे। वे दिनभर किताब खोले बैठे रहते, पर ध्यान बँटाने के लिए हाशियों पर चित्र बनाते और बेमतलब शब्द लिखते रहते। उनकी इन 'रचनाओं' को समझना छोटे भाई के लिए "छोटा मुँह बड़ी बात" थी।
प्रसंग 2 — छोटे भाई का खेल-प्रेम और डाँट
छोटे भाई के लिए एक घंटा पढ़ना पहाड़ था। वह कंकरियाँ उछालता, कागज़ की तितलियाँ उड़ाता, चारदीवारी पर चढ़कर कूदता। कमरे में लौटते ही भाई साहब का "रुद्र-रूप" और सवाल — "कहाँ थे?" उसका मौन अपराध की स्वीकृति था। भाई साहब कहते कि अंग्रेज़ी पढ़ना हँसी-खेल नहीं, नहीं तो "ऐरा-गैरा नत्थू-खैरा" सभी विद्वान हो जाते; दादा की गाढ़ी कमाई क्यों बर्बाद करते हो।
प्रसंग 3 — टाइम-टेबिल और उसकी अवहेलना
लताड़ सुनकर छोटा भाई रोता, घर लौटने की सोचता, फिर निराशा के बादल छँटते ही नया टाइम-टेबिल बनाता जिसमें खेल का नाम तक न होता। पर मैदान की हरियाली, फुटबॉल-वॉलीबॉल की उछल-कूद उसे खींच ले जाती। भाई साहब से वह ऐसे बचता जैसे सिर पर "नंगी तलवार" लटक रही हो, फिर भी खेल न छोड़ पाता — जैसे मौत के बीच भी आदमी मोह-माया में जकड़ा रहता है।
प्रसंग 4 — पहली परीक्षा और घमंड पर उपदेश
भाई साहब फ़ेल हुए, छोटा भाई प्रथम आया। उसके मन में भाई साहब को "आड़े हाथों" लेने की इच्छा जागी, पर उनकी उदासी देखकर "घाव पर नमक छिड़कना" उसे लज्जास्पद लगा। उसका रौब कम हुआ तो भाई साहब ने भाँप लिया। गुल्ली-डंडा खेलकर लौटने पर वे टूट पड़े — रावण, शैतान और शाहेरूम का उदाहरण देकर समझाया कि घमंड का अंत बुरा होता है; उसकी सफलता "अंधे के हाथ बटेर" है।
प्रसंग 5 — शिक्षा-प्रणाली पर व्यंग्य
भाई साहब ने अपने दरजे का डरावना चित्र खींचा — अलजबरा-जामेट्री के "लोहे के चने", आठ-आठ हेनरी के नाम, 'अ ब ज' की जगह 'अ ज ब' लिखने पर नंबर कटना, 'समय की पाबंदी' पर चार पन्ने का निबंध "संक्षेप में"। इन बातों से प्रेमचंद रटंत विद्या और परीक्षकों की संकीर्ण सोच पर व्यंग्य करते हैं। भाई साहब कहते हैं — मेरे दरजे में आओगे तो "पापड़ बेलने" पड़ेंगे और "आटे-दाल का भाव" मालूम होगा।
प्रसंग 6 — दूसरी परीक्षा और नरमी
फिर वही हुआ — भाई साहब ने कोर्स "चाट" लिया पर फ़ेल हो गए और रो पड़े; छोटा भाई भी रोने लगा। अब एक दरजे का अंतर बचा। छोटे भाई के मन में कुटिल विचार आया, पर उसने उसे निकाल दिया — भाई साहब की डाँट उसके हित में ही थी। भाई साहब नरम पड़ गए और छोटा भाई पतंगबाज़ी में डूब गया, हालाँकि उनकी नज़र बचाकर।
प्रसंग 7 — कनकौआ और अनुभव का पाठ
एक शाम कनकौआ लूटते समय भाई साहब ने उसे पकड़ लिया। उन्होंने याद दिलाया कि अब वह आठवीं में है और "बाज़ारी लौंडों" के साथ दौड़ना शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि पाँच साल का अंतर खुदा भी नहीं मिटा सकता; समझ किताबें पढ़ने से नहीं, दुनिया देखने से आती है। अम्माँ-दादा और हेडमास्टर की माँ के उदाहरण से उन्होंने अनुभव की श्रेष्ठता सिद्ध की।
प्रसंग 8 — श्रद्धा और भीतर का बच्चा
छोटे भाई ने अपनी लघुता महसूस की और श्रद्धा से नतमस्तक हो गया। भाई साहब ने उसे गले लगाया और स्वीकार किया कि उनका भी पतंग उड़ाने को जी ललचाता है, पर बड़े होने का कर्तव्य रोकता है। तभी एक कटा कनकौआ ऊपर से गुज़रा — लंबे भाई साहब ने उछलकर डोर पकड़ी और होस्टल की ओर दौड़ पड़े। यह अंत दिखाता है कि आदर्श के बोझ तले उनका बचपन दबा हुआ था।
6. प्रश्न-अभ्यास (NCERT)
मौखिक — एक-दो पंक्तियों में
1. कथा नायक की रुचि किन कार्यों में थी?
कथा नायक की रुचि खेल-कूद में थी — कंकरियाँ उछालना, कागज़ की तितलियाँ उड़ाना, गुल्ली-डंडा, फुटबॉल, वॉलीबॉल और पतंगबाज़ी (कनकौए उड़ाना)।
2. बड़े भाई साहब छोटे भाई से हर समय पहला सवाल क्या पूछते थे?
वे हर समय पहला सवाल यही पूछते थे — "कहाँ थे?"
3. दूसरी बार पास होने पर छोटे भाई के व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?
वह स्वच्छंद हो गया और भाई साहब की सहनशीलता का अनुचित लाभ उठाने लगा। उसे लगा वह पढ़े या न पढ़े, पास हो ही जाएगा, इसलिए पढ़ना छोड़कर पतंगबाज़ी में समय बिताने लगा।
4. बड़े भाई साहब छोटे भाई से उम्र में कितने बड़े थे और वे कौन-सी कक्षा में पढ़ते थे?
बड़े भाई साहब छोटे भाई से पाँच साल बड़े थे और नौवीं कक्षा में पढ़ते थे।
5. बड़े भाई साहब दिमाग को आराम देने के लिए क्या करते थे?
वे कॉपी और किताब के हाशियों पर चिड़ियों, कुत्तों, बिल्लियों के चित्र बनाते, एक ही शब्द या वाक्य दस-बीस बार लिखते, शेर को सुंदर अक्षरों में नकल करते और बेमतलब शब्द-रचना करते।
लिखित (क) — 25-30 शब्दों में
1. छोटे भाई ने अपनी पढ़ाई का टाइम-टेबिल बनाते समय क्या-क्या सोचा और फिर उसका पालन क्यों नहीं कर पाया?
उसने सोचा कि अब खूब जी लगाकर पढ़ेगा और सुबह छह बजे से रात ग्यारह बजे तक हर विषय का समय तय कर दिया, खेल का नाम तक नहीं रखा। पर मैदान की हरियाली, हवा के झोंके और खेलों का आकर्षण उसे खींच ले जाता, इसलिए पालन नहीं हो पाया।
2. एक दिन जब गुल्ली-डंडा खेलने के बाद छोटा भाई बड़े भाई साहब के सामने पहुँचा तो उनकी क्या प्रतिक्रिया हुई?
भाई साहब मानो तलवार खींचकर उस पर टूट पड़े। उन्होंने कहा कि पास होने से उसका दिमाग फिर गया है, घमंड तो बड़े-बड़ों का नहीं रहा। रावण, शैतान और शाहेरूम के उदाहरण देकर समझाया कि उसकी सफलता अंधे के हाथ बटेर है।
3. बड़े भाई साहब को अपने मन की इच्छाएँ क्यों दबानी पड़ती थीं?
वे बड़े थे और छोटे भाई के सामने आदर्श बने रहना चाहते थे। उनका मानना था कि यदि वे स्वयं बेराह चलेंगे तो छोटे भाई की रक्षा कैसे करेंगे। इसी कर्तव्य-बोध के कारण उन्हें खेल-कूद और पतंगबाज़ी की इच्छाएँ दबानी पड़ती थीं।
4. बड़े भाई साहब छोटे भाई को क्या सलाह देते थे और क्यों?
वे सलाह देते थे कि खेल-कूद में समय न गँवाकर मन लगाकर पढ़ो, घमंड मत करो और अपनी पोज़ीशन का खयाल रखो। वे ऐसा इसलिए कहते थे क्योंकि वे उसका भला चाहते थे और दादा की गाढ़ी कमाई बर्बाद नहीं होने देना चाहते थे।
5. छोटे भाई ने बड़े भाई साहब के नरम व्यवहार का क्या फ़ायदा उठाया?
उसने पढ़ना लगभग बंद कर दिया और सारा समय पतंगबाज़ी में बिताने लगा। मांझा देना, कन्ने बाँधना, पतंग टूर्नामेंट की तैयारी — सब भाई साहब की नज़र बचाकर करता रहा।
लिखित (ख) — 50-60 शब्दों में
1. बड़े भाई की डाँट-फटकार अगर न मिलती, तो क्या छोटा भाई कक्षा में अव्वल आता? अपने विचार प्रकट कीजिए।
शायद नहीं। छोटा भाई स्वभाव से खेल-प्रेमी था। भाई साहब की डाँट के डर से ही वह थोड़ा-बहुत पढ़ लेता था और रोज़ का टास्क पूरा करता था। स्वयं लेखक मानता है कि "यह शायद उनके उपदेशों का ही असर है कि मैं दनादन पास हो जाता हूँ।" डाँट न मिलती तो वह पूरा समय खेल में गँवा देता और अव्वल आना कठिन होता।
2. इस पाठ में लेखक ने समूची शिक्षा के किन तौर-तरीकों पर व्यंग्य किया है? क्या आप उनके विचार से सहमत हैं?
लेखक ने रटंत विद्या पर व्यंग्य किया है — परीक्षक केवल वही देखते हैं जो किताब में लिखा है; 'अ ब ज' की जगह 'अ ज ब' लिखने पर नंबर कट जाते हैं; बादशाहों के नाम रटने पड़ते हैं; 'समय की पाबंदी' जैसे छोटे विषय पर चार पन्ने "संक्षेप में" लिखने पड़ते हैं। व्यावहारिक ज्ञान और समझ पर ध्यान नहीं दिया जाता। मैं इन विचारों से सहमत हूँ — शिक्षा का उद्देश्य बुद्धि का विकास होना चाहिए, रटना नहीं।
3. बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ कैसे आती है?
भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ किताबें पढ़ने से नहीं, दुनिया देखने और अनुभव से आती है। अम्माँ और दादा कम पढ़े-लिखे होकर भी घर-परिवार, बीमारी और खर्च सँभालना जानते हैं, जबकि ऑक्सफ़ोर्ड से एम.ए. हेडमास्टर अपना घर नहीं चला पाए; उनकी बूढ़ी माँ ने ही घर सँभाला।
4. छोटे भाई के मन में बड़े भाई साहब के प्रति श्रद्धा क्यों उत्पन्न हुई?
कनकौआ लूटने की घटना के बाद भाई साहब ने बिना क्रोध के, अपनेपन से अनुभव का महत्त्व समझाया और बताया कि वे उसका भला चाहते हैं। उनकी बातों में सच्चाई और त्याग देखकर छोटे भाई को अपनी लघुता का अनुभव हुआ। उसे समझ आया कि उनकी डाँट उसके हित के लिए थी, इसलिए श्रद्धा उत्पन्न हुई।
5. बड़े भाई की स्वभावगत विशेषताएँ बताइए।
बड़े भाई साहब अध्ययनशील और परिश्रमी थे, यद्यपि रटने पर ज़ोर देते थे। वे उपदेश देने की कला में निपुण, कर्तव्यपरायण और अनुशासनप्रिय थे। वे छोटे भाई के सच्चे हितैषी थे और उसके लिए आदर्श बने रहने हेतु अपनी इच्छाएँ दबाते थे। वे अनुभव को महत्त्व देते थे और विनम्रता व आत्मगौरव का पाठ पढ़ाते थे।
6. बड़े भाई साहब ने ज़िंदगी के अनुभव और किताबी ज्ञान में से किसे और क्यों महत्त्वपूर्ण कहा है?
उन्होंने ज़िंदगी के अनुभव को अधिक महत्त्वपूर्ण कहा, क्योंकि किताबी ज्ञान से परीक्षा तो पास की जा सकती है, पर जीवन की समस्याएँ — बीमारी, खर्च का प्रबंध, परिवार का पालन — अनुभव से ही सुलझती हैं। दादा ने कम पैसों में नौ लोगों का परिवार इज़्ज़त से चलाया, जबकि डिग्रीधारी हेडमास्टर कर्ज़दार रहे।
7. बताइए पाठ के किन अंशों से पता चलता है कि—
(क) छोटा भाई अपने भाई साहब का आदर करता है — "फिर भी मैं भाई साहब का अदब करता था और उनकी नज़र बचाकर कनकौए उड़ाता था"; वह उनकी डाँट का कभी उत्तर नहीं देता था।
(ख) भाई साहब को ज़िंदगी का अच्छा अनुभव है — "समझ किताबें पढ़ने से नहीं आती, दुनिया देखने से आती है"; अम्माँ-दादा और हेडमास्टर की माँ के उदाहरण।
(ग) भाई साहब के भीतर भी एक बच्चा है — "मेरा भी जी ललचाता है" और अंत में कटे कनकौए की डोर पकड़कर होस्टल की ओर दौड़ना।
(घ) भाई साहब छोटे भाई का भला चाहते हैं — "खुद बेराह चलूँ, तो तुम्हारी रक्षा कैसे करूँ? यह कर्तव्य भी तो मेरे सिर है।"
लिखित (ग) — आशय स्पष्ट कीजिए
1. इम्तिहान पास कर लेना कोई चीज़ नहीं, असल चीज़ है बुद्धि का विकास।
आशय — केवल परीक्षा पास करना शिक्षा का लक्ष्य नहीं है। जो कुछ पढ़ा जाए, उसका अर्थ और सीख समझना ज़रूरी है। रावण की कहानी पढ़कर घमंड न करने का उपदेश लेना ही बुद्धि का विकास है।
2. फिर भी जैसे मौत और विपत्ति के बीच भी आदमी मोह और माया के बंधन में जकड़ा रहता है, मैं फटकार और घुड़कियाँ खाकर भी खेल-कूद का तिरस्कार न कर सकता था।
आशय — जिस प्रकार मृत्यु और संकट सामने होने पर भी मनुष्य मोह-माया नहीं छोड़ पाता, उसी प्रकार भाई साहब की डाँट-फटकार के बावजूद छोटा भाई खेल-कूद का आकर्षण नहीं छोड़ पाता था। खेल उसके स्वभाव का अंग था।
3. बुनियाद ही पुख्ता न हो, तो मकान कैसे पायेदार बने?
आशय — जैसे मज़बूत नींव के बिना टिकाऊ भवन नहीं बनता, वैसे ही शिक्षा की नींव मज़बूत न हो तो आगे की पढ़ाई टिकती नहीं। लेखक इसमें व्यंग्य भी करता है — भाई साहब बार-बार फ़ेल होने को "बुनियाद मज़बूत करना" कहते थे।
4. आँखें आसमान की ओर थीं और मन उस आकाशगामी पथिक की ओर, जो मंद गति से झूमता पतन की ओर चला आ रहा था, मानो कोई आत्मा स्वर्ग से निकलकर विरक्त मन से नए संस्कार ग्रहण करने जा रही हो।
आशय — कटा हुआ कनकौआ (आकाशगामी पथिक) धीरे-धीरे झूमता हुआ नीचे आ रहा था और लेखक की आँखें व मन उसी पर टिके थे। लेखक ने इसकी तुलना उस आत्मा से की है जो स्वर्ग छोड़कर, उदासीन मन से नया जन्म लेने धरती की ओर आ रही हो।
भाषा अध्ययन
1. पर्यायवाची शब्द लिखिए — नसीहत, रोष, आज़ादी, राजा, ताज्जुब
नसीहत — सलाह, सीख; रोष — क्रोध, गुस्सा; आज़ादी — स्वतंत्रता, स्वाधीनता; राजा — नृप, भूपति (महीप); ताज्जुब — आश्चर्य, हैरानी।
2. मुहावरों का वाक्य-प्रयोग कीजिए।
सिर पर नंगी तलवार लटकना (हर समय खतरा) — परीक्षा पास आते ही विद्यार्थियों के सिर पर नंगी तलवार लटकने लगती है।
आड़े हाथों लेना (खरी-खोटी सुनाना) — देर से आने पर पिताजी ने बेटे को आड़े हाथों लिया।
अंधे के हाथ बटेर लगना (अयोग्य को संयोग से सफलता) — बिना पढ़े पास होना तो अंधे के हाथ बटेर लगने जैसा है।
लोहे के चने चबाना (बहुत कठिन काम करना) — पहाड़ पर सड़क बनाना लोहे के चने चबाना है।
दाँतों पसीना आना (बहुत परिश्रम करना) — भारी सामान उठाते समय मज़दूर को दाँतों पसीना आ गया।
ऐरा-गैरा नत्थू खैरा (मामूली व्यक्ति) — इस गोष्ठी में हर ऐरे-गैरे नत्थू खैरे को नहीं बुलाया गया।
3. तत्सम, तद्भव, देशज, आगत शब्द छाँटिए।
तत्सम — जन्मसिद्ध, चेष्टा, सूक्तिबाण, आधिपत्य, प्रातःकाल, विद्वान, निपुण, अवहेलना
तद्भव — आँख, जानलेवा, आँखफोड़, पन्ना, मेला-तमाशा, भाई साहब, फटकार
देशज — दाल-भात, घुड़कियाँ
आगत (अंग्रेज़ी) — पोज़ीशन, स्पेशल, स्कीम, टाइम-टेबिल; (अरबी-फ़ारसी) — फ़जीहत, तालीम, जल्दबाज़ी, पुख्ता, हाशिया, जमात, हर्फ़, मसलन
4. सकर्मक या अकर्मक क्रिया लिखिए।
(क) उन्होंने वहीं हाथ पकड़ लिया — सकर्मक
(ख) फिर चोरों-सा जीवन कटने लगा — अकर्मक
(ग) शैतान का हाल भी पढ़ा ही होगा — सकर्मक
(घ) मैं यह लताड़ सुनकर आँसू बहाने लगता — सकर्मक
(ङ) समय की पाबंदी पर एक निबंध लिखो — सकर्मक
(च) मैं पीछे-पीछे दौड़ रहा था — अकर्मक
5. 'इक' प्रत्यय लगाकर शब्द बनाइए — विचार, इतिहास, संसार, दिन, नीति, प्रयोग, अधिकार
वैचारिक, ऐतिहासिक, सांसारिक, दैनिक, नैतिक, प्रायोगिक, आधिकारिक।
7. अतिरिक्त प्रश्न — 20 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
- 'बड़े भाई साहब' कहानी के लेखक हैं— (क) गुरदयाल सिंह (ख) मिथिलेश्वर (ग) प्रेमचंद (घ) हबीब तनवीर
- प्रेमचंद का असली नाम था— (क) नवाब राय (ख) धनपत राय (ग) लमही राय (घ) अमृत राय
- प्रेमचंद का कौन-सा कहानी-संग्रह अंग्रेज़ सरकार ने ज़ब्त कर लिया? (क) मानसरोवर (ख) गोदान (ग) निर्मला (घ) सोज़े-वतन
- बड़े भाई साहब छोटे भाई से कितने दरजे आगे थे? (क) दो (ख) तीन (ग) चार (घ) पाँच
- कहानी के आरंभ में छोटे भाई की उम्र थी— (क) सात वर्ष (ख) नौ वर्ष (ग) दस वर्ष (घ) चौदह वर्ष
- भाई साहब एक साल का काम कितने साल में करते थे? (क) एक (ख) तीन-चार (ग) दो (घ) छह
- "बुनियाद ही पुख्ता न हो, तो मकान कैसे पायेदार बने" — यहाँ 'पुख्ता' का अर्थ है— (क) कमज़ोर (ख) ऊँचा (ग) पुराना (घ) मज़बूत
- छोटे भाई के लिए एक घंटा किताब लेकर बैठना कैसा था? (क) आसान (ख) मनोरंजन (ग) पहाड़ (घ) आदत
- भाई साहब ने घमंड के उदाहरण में किस राजा का नाम लिया? (क) रावण (ख) अशोक (ग) अकबर (घ) हरिश्चंद्र
- भाई साहब के अनुसार इंगलिस्तान में कितने हेनरी हो गुज़रे थे? (क) चार (ख) छह (ग) आठ (घ) दस
- निबंध का विषय क्या था? (क) परिश्रम का महत्त्व (ख) अनुशासन (ग) मेरा विद्यालय (घ) समय की पाबंदी
- निबंध कितने पन्नों से कम नहीं होना चाहिए था? (क) दो (ख) चार (ग) तीन (घ) छह
- हेडमास्टर साहब ने एम.ए. कहाँ से किया था? (क) कैम्ब्रिज (ख) बनारस (ग) लाहौर (घ) ऑक्सफ़ोर्ड
- हेडमास्टर के घर का प्रबंध कौन करता था? (क) उनकी बूढ़ी माँ (ख) उनकी पत्नी (ग) नौकर (घ) वे स्वयं
- दादा ने कितने लोगों के परिवार का पालन किया था? (क) पाँच (ख) सात (ग) नौ (घ) ग्यारह
- दूसरी बार पास होने के बाद छोटे भाई को किसका शौक लगा? (क) गुल्ली-डंडा (ख) क्रिकेट (ग) कनकौए उड़ाने का (घ) तैराकी
- 'कनकौआ' का अर्थ है— (क) पतंग (ख) कौआ (ग) गेंद (घ) लट्टू
- भाई साहब के अनुसार समझ कैसे आती है? (क) किताबें पढ़ने से (ख) परीक्षा देने से (ग) रटने से (घ) दुनिया देखने से
- 'अंधे के हाथ बटेर लगना' का अर्थ है— (क) अंधे की मदद करना (ख) अयोग्य को संयोग से सफलता मिलना (ग) शिकार करना (घ) मेहनत का फल
- कहानी के अंत में भाई साहब ने क्या किया? (क) छोटे भाई को पीटा (ख) घर चले गए (ग) पढ़ने बैठ गए (घ) कनकौए की डोर पकड़कर होस्टल की ओर दौड़े
उत्तर — 1-ग, 2-ख, 3-घ, 4-ख, 5-ख, 6-ग, 7-घ, 8-ग, 9-क, 10-ग, 11-घ, 12-ख, 13-घ, 14-क, 15-ग, 16-ग, 17-क, 18-घ, 19-ख, 20-घ
8. अतिरिक्त प्रश्न — 20 लघु-उत्तरीय प्रश्न
1. बड़े भाई साहब तालीम के मामले में कैसे थे?
वे तालीम जैसे महत्त्वपूर्ण मामले में जल्दबाज़ी नहीं करते थे। शिक्षा की बुनियाद मज़बूत करने के नाम पर एक साल का काम दो-तीन साल में करते थे।
2. भाई साहब की कॉपी पर लेखक ने कौन-सी इबारत देखी?
"स्पेशल, अमीना, भाइयों-भाइयों, दरअसल, भाई-भाई, राधेश्याम, श्रीयुत राधेश्याम, एक घंटे तक" — इसके बाद एक आदमी का चेहरा बना हुआ था।
3. छोटे भाई का मौन क्या कह देता था?
उसका मौन यह कह देता था कि उसे अपना अपराध स्वीकार है, और भाई साहब के पास स्नेह और रोष भरे शब्दों से उसका "सत्कार" करने के सिवा कोई इलाज न था।
4. अंग्रेज़ी पढ़ने के बारे में भाई साहब क्या कहते थे?
वे कहते थे कि अंग्रेज़ी पढ़ना हँसी-खेल नहीं है; इसके लिए रात-दिन आँखें फोड़नी पड़ती हैं और खून जलाना पड़ता है। बड़े-बड़े विद्वान भी शुद्ध अंग्रेज़ी नहीं लिख पाते।
5. लताड़ सुनकर छोटा भाई क्या सोचता था?
वह आँसू बहाने लगता और सोचता कि क्यों न घर लौट जाए; जो काम बूते के बाहर है उसमें हाथ डालकर ज़िंदगी क्यों खराब करे। पर कुछ देर बाद फिर पढ़ने का इरादा करता।
6. छोटा भाई भाई साहब से कैसे बचता था?
वह उनके साये से भागता, उनकी आँखों से दूर रहने की चेष्टा करता और कमरे में दबे पाँव आता ताकि उन्हें खबर न हो।
7. पहली बार फ़ेल होने पर भाई साहब की दशा देखकर छोटे भाई ने क्या अनुभव किया?
भाई साहब इतने दुखी और उदास थे कि छोटे भाई को उनसे दिली हमदर्दी हुई और उनके घाव पर नमक छिड़कने का विचार उसे लज्जास्पद लगा।
8. भाई साहब ने शैतान का उदाहरण क्यों दिया?
शैतान को अभिमान था कि ईश्वर का उससे बड़ा भक्त कोई नहीं, इसलिए उसे स्वर्ग से नरक में ढकेल दिया गया। यह उदाहरण घमंड के बुरे परिणाम बताने के लिए दिया।
9. भाई साहब के अनुसार सफल खिलाड़ी कौन है?
सफल खिलाड़ी वह है जिसका कोई निशाना खाली न जाए। कभी-कभी अंधा-चोट निशाना लग जाने से कोई सफल खिलाड़ी नहीं बन जाता।
10. जामेट्री के बारे में भाई साहब ने क्या शिकायत की?
'अ ब ज' की जगह 'अ ज ब' लिख देने पर सारे नंबर कट जाते हैं; परीक्षक यह नहीं समझते कि दोनों में कोई अंतर नहीं, बस वही चाहते हैं जो किताब में लिखा है।
11. 'समय की पाबंदी' निबंध पर भाई साहब ने क्या व्यंग्य किया?
एक वाक्य की बात को चार पन्नों में लिखवाना समय की किफ़ायत नहीं, दुरुपयोग है। ऊपर से कहा जाता है "संक्षेप में लिखो" — यह तेज़ भी दौड़ने और धीरे भी चलने जैसी उलटी बात है।
12. दूसरी बार फ़ेल होने पर भाई साहब की क्या दशा हुई?
उन्होंने प्राणांतक परिश्रम किया था, कोर्स का एक-एक शब्द चाट गए थे, चेहरा कांतिहीन हो गया था, फिर भी फ़ेल हो गए और नतीजा सुनकर रो पड़े।
13. छोटे भाई के मन में कौन-सी कुटिल भावना उठी?
उसने सोचा कि भाई साहब एक साल और फ़ेल हो जाएँ तो वह उनके बराबर हो जाएगा और फिर वे उसकी फ़जीहत नहीं कर सकेंगे। पर उसने यह विचार दिल से निकाल दिया।
14. कनकौए को लेखक ने 'आकाशगामी पथिक' क्यों कहा?
क्योंकि कटा हुआ कनकौआ आकाश में किसी यात्री की तरह धीरे-धीरे झूमता हुआ धरती की ओर आ रहा था।
15. भाई साहब ने 'मिडिलचियों' का उदाहरण क्यों दिया?
यह बताने के लिए कि एक ज़माने में आठवाँ दरजा पास करके लोग नायब तहसीलदार, डिप्टी मैजिस्ट्रेट और संपादक बन जाते थे, इसलिए आठवीं के विद्यार्थी को अपनी पोज़ीशन का खयाल रखना चाहिए।
16. "पाँच साल का अंतर खुदा भी नहीं मिटा सकता" — भाई साहब ने ऐसा क्यों कहा?
वे बताना चाहते थे कि छोटा भाई कक्षा में भले बराबर या आगे हो जाए, पर उम्र और जीवन-अनुभव में वे हमेशा बड़े रहेंगे।
17. बीमारी के उदाहरण से भाई साहब ने क्या समझाया?
यदि वे बीमार हो जाएँ तो छोटे भाई के हाथ-पाँव फूल जाएँगे और वह केवल दादा को तार देगा; जबकि दादा घबराए बिना खुद मर्ज़ पहचानकर इलाज करेंगे — यही अनुभव की शक्ति है।
18. महीने के खर्च के बारे में भाई साहब ने क्या कहा?
दोनों भाई दादा का भेजा पैसा बीस-बाईस तारीख तक खर्च कर देते हैं और फिर पैसे-पैसे को मोहताज हो जाते हैं, जबकि दादा ने उससे आधे में नौ लोगों का परिवार चलाया।
19. भाई साहब ने स्वयं पतंग न उड़ाने का क्या कारण बताया?
उन्होंने कहा कि उनका भी जी ललचाता है, पर यदि वे खुद बेराह चलेंगे तो छोटे भाई की रक्षा कैसे करेंगे; यह कर्तव्य उनके सिर है।
20. कहानी का अंत किस बात की ओर संकेत करता है?
अंत में भाई साहब का कनकौए की डोर पकड़कर दौड़ना बताता है कि उनके भीतर भी एक बच्चा था, जिसे बड़े होने के दायित्व ने दबा रखा था।
9. अतिरिक्त प्रश्न — 10 दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न
1. बड़े भाई साहब और छोटे भाई के चरित्र की तुलना कीजिए।
उत्तर — बड़े भाई साहब गंभीर, परिश्रमी, अध्ययनशील और कर्तव्यनिष्ठ हैं, पर उनकी पढ़ाई रटंत पर आधारित है, इसलिए बार-बार फ़ेल होते हैं। वे उपदेश देने में निपुण हैं और छोटे भाई के लिए आदर्श बने रहने हेतु अपनी इच्छाएँ दबाते हैं। छोटा भाई चंचल, खेल-प्रेमी और सहज बुद्धि वाला है; कम पढ़कर भी अव्वल आता है। सफलता से उसमें थोड़ा अभिमान आता है, पर अंत में वह विनम्र होकर भाई साहब के प्रति श्रद्धा से भर उठता है। दोनों में गहरा स्नेह है।
2. 'बड़े भाई साहब' कहानी के माध्यम से प्रेमचंद क्या संदेश देना चाहते हैं?
उत्तर — कहानी बताती है कि रटंत विद्या से बुद्धि का विकास नहीं होता; शिक्षा का उद्देश्य समझ पैदा करना है। जीवन का अनुभव किताबी ज्ञान से अधिक काम आता है। सफलता पर घमंड नहीं करना चाहिए। बड़ों की डाँट में भी हित छिपा होता है। साथ ही कहानी यह भी दिखाती है कि बच्चों पर आदर्श का बोझ डालकर उनका बचपन छीन लेना ठीक नहीं; पढ़ाई और खेल में संतुलन ज़रूरी है।
3. कहानी में शिक्षा-प्रणाली की किन कमियों पर व्यंग्य है? उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर — परीक्षक केवल रटा हुआ उत्तर चाहते हैं — 'अ ब ज' की जगह 'अ ज ब' लिखने पर पूरे नंबर कट जाते हैं। इतिहास में बादशाहों के नाम और क्रम रटने पर ज़ोर है — हेनरी सातवें की जगह आठवाँ लिखा तो सिफ़र। निबंध को अनावश्यक रूप से लंबा लिखवाया जाता है — 'समय की पाबंदी' पर चार पन्ने, फिर भी "संक्षेप में"। व्यावहारिक जीवन से जुड़ा ज्ञान नहीं दिया जाता। प्रेमचंद इन सबको "रटंत का नाम शिक्षा" कहकर व्यंग्य करते हैं।
4. बड़े भाई साहब ने छोटे भाई को घमंड से बचाने के लिए कौन-कौन से उदाहरण दिए?
उत्तर — उन्होंने रावण का उदाहरण दिया जो चक्रवर्ती राजा था, देवता उसकी गुलामी करते थे, पर घमंड ने उसका नाम-निशान मिटा दिया। शैतान को सबसे बड़ा भक्त होने का घमंड था, इसलिए उसे नरक में ढकेल दिया गया। शाहेरूम ने अहंकार किया और भीख माँगकर मरा। उन्होंने कहा कि एक दरजा पास करके सिर फिर जाना ठीक नहीं; यह सफलता अंधे के हाथ बटेर है, जो बार-बार नहीं लगती।
5. "समझ किताबें पढ़ने से नहीं आती, दुनिया देखने से आती है" — कहानी के आधार पर इस कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर — भाई साहब बताते हैं कि अम्माँ ने कोई दरजा पास नहीं किया और दादा पाँचवीं-छठी तक पढ़े, फिर भी वे बीमारी में बिना घबराए इलाज कर सकते हैं और कम पैसों में नौ लोगों का परिवार चला सकते हैं। ऑक्सफ़ोर्ड से एम.ए. हेडमास्टर एक हज़ार रुपये पाकर भी कर्ज़दार रहते थे, जबकि उनकी अनपढ़ बूढ़ी माँ ने घर सँभालते ही "लक्ष्मी" ला दी। इससे सिद्ध होता है कि व्यावहारिक समझ अनुभव से आती है।
6. छोटे भाई के व्यवहार में कहानी के आरंभ से अंत तक क्या-क्या परिवर्तन आए?
उत्तर — आरंभ में वह भाई साहब से डरता था, उनकी डाँट पर रोता और टाइम-टेबिल बनाता था। पहली बार अव्वल आने पर उसमें आत्मसम्मान और थोड़ा अभिमान आया; भाई साहब का रौब कम हुआ। दूसरी बार अव्वल आने पर वह स्वच्छंद होकर पतंगबाज़ी में डूब गया, यद्यपि आदर बनाए रखा। अंत में भाई साहब की अनुभवपूर्ण बातें सुनकर उसे अपनी लघुता का बोध हुआ और उसके मन में श्रद्धा उत्पन्न हुई।
7. "मेरे दरजे में आओगे लाला, तो ये सारे पापड़ बेलने पड़ेंगे" — इस कथन के आधार पर भाई साहब की मनःस्थिति स्पष्ट कीजिए।
उत्तर — फ़ेल होने के बाद भाई साहब हीनभावना और झुँझलाहट में थे। अपनी असफलता का कारण वे कठिन पाठ्यक्रम और परीक्षकों की संकीर्णता को बताते हैं। छोटे भाई की सफलता को कमतर दिखाकर वे अपना बड़प्पन बनाए रखना चाहते हैं और उसे आगे की कठिनाइयों से डराते हैं। साथ ही उनकी चिंता सच्ची भी है कि छोटा भाई घमंड में पढ़ाई न छोड़ दे।
8. कहानी में मुहावरों का प्रयोग किस प्रकार भाषा को प्रभावशाली बनाता है?
उत्तर — प्रेमचंद की भाषा मुहावरेदार है; लगभग हर अनुच्छेद में दो-तीन मुहावरे हैं। "एक घंटा किताब लेकर बैठना पहाड़ था" से अरुचि, "जिगर के टुकड़े-टुकड़े होना" से पीड़ा, "सिर पर नंगी तलवार लटकना" से भय, "लोहे के चने चबाना" और "दाँतों पसीना आना" से कठिनाई, "आटे-दाल का भाव मालूम होना" से वास्तविकता का बोध व्यक्त होता है। मुहावरे भावों को चित्रात्मक, रोचक और संक्षिप्त बना देते हैं।
9. क्या पढ़ाई और खेल-कूद साथ-साथ चल सकते हैं? कहानी के आधार पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर — हाँ, चल सकते हैं। छोटा भाई खेलते-कूदते भी अव्वल आया, जबकि केवल किताबों में डूबे भाई साहब फ़ेल होते रहे। इससे पता चलता है कि खेल से मन तरोताज़ा रहता है और समझ बढ़ती है। पर संतुलन ज़रूरी है — छोटा भाई जब पढ़ाई बिलकुल छोड़कर केवल पतंगबाज़ी में लग गया, तब भाई साहब की सीख आवश्यक हो गई। उचित समय-सारणी से दोनों साथ चल सकते हैं।
10. कहानी के शीर्षक 'बड़े भाई साहब' की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर — पूरी कहानी बड़े भाई साहब के इर्द-गिर्द घूमती है — उनकी पढ़ाई, उपदेश, असफलताएँ, अनुभव की बातें और अंत में उनका भीतर का बच्चा। 'साहब' शब्द उनके बड़प्पन, रौब और ज़िम्मेदारी को भी दर्शाता है। छोटा भाई कथावाचक है, पर केंद्र में बड़े भाई साहब ही हैं। इसलिए शीर्षक पूर्णतः सार्थक है।
10. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
बोर्ड परीक्षा में इस पाठ से प्रायः 25-30 और 50-60 शब्दों के प्रश्न तथा आशय-स्पष्टीकरण पूछे जाते हैं।
⭐ सबसे महत्वपूर्ण (अवश्य तैयार करें)
- बड़े भाई साहब की स्वभावगत विशेषताएँ लिखिए।
- पाठ में शिक्षा-प्रणाली के किन तौर-तरीकों पर व्यंग्य किया गया है?
- बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ कैसे आती है?
- छोटे भाई के मन में भाई साहब के प्रति श्रद्धा क्यों उत्पन्न हुई?
- "इम्तिहान पास कर लेना कोई चीज़ नहीं, असल चीज़ है बुद्धि का विकास" — आशय स्पष्ट कीजिए।
महत्वपूर्ण
- बड़े भाई साहब को अपने मन की इच्छाएँ क्यों दबानी पड़ती थीं?
- छोटे भाई ने टाइम-टेबिल बनाते समय क्या सोचा और उसका पालन क्यों न कर सका?
- बड़े भाई की डाँट-फटकार न मिलती तो क्या छोटा भाई अव्वल आता?
- पाठ के किन अंशों से पता चलता है कि भाई साहब के भीतर भी एक बच्चा है?
- ज़िंदगी के अनुभव और किताबी ज्ञान में भाई साहब ने किसे महत्त्वपूर्ण माना और क्यों?
व्याकरण / मूल्यपरक
- पाठ के मुहावरों (सिर पर नंगी तलवार लटकना, आड़े हाथों लेना, अंधे के हाथ बटेर लगना आदि) का वाक्य-प्रयोग।
- सकर्मक-अकर्मक क्रिया पहचानिए; 'इक' प्रत्यय से शब्द बनाइए।
- क्या परीक्षा पास कर लेना ही योग्यता का आधार है? अपने विचार लिखिए।
- छात्रावास में रहने वाले छोटे भाई/बहन को पढ़ाई के संबंध में पत्र लिखिए।
🔗 कक्षा 10 हिंदी — स्पर्श व संचयन के सभी पाठ आपस में जुड़े हुए
- बड़े भाई साहब — प्रेमचंद (स्पर्श) (आप यही पढ़ रहे हैं)
- डायरी का एक पन्ना — सीताराम सेकसरिया (स्पर्श)
- अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले — निदा फ़ाज़ली (स्पर्श)
- कारतूस — हबीब तनवीर (स्पर्श)
- हरिहर काका — मिथिलेश्वर (संचयन)
- सपनों के-से दिन — गुरदयाल सिंह (संचयन)
— मनोज शर्मा, हिंदी शिक्षक | HINDI GYAN —
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