हरिहर काका (मिथिलेश्वर) — कक्षा 10 हिंदी संचयन: पात्र-चार्ट, व्याख्या, प्रश्नोत्तर और MCQ
कक्षा 10 हिंदी (संचयन भाग-2) की कहानी 'हरिहर काका' की संपूर्ण अध्ययन सामग्री — लेखक परिचय, कहानी का सार, पात्रों का चार्ट, पात्रों से जुड़ी घटनाएँ, प्रसंग-वार व्याख्या, NCERT बोध-प्रश्नों के उत्तर, 20 वस्तुनिष्ठ, 20 लघु-उत्तरीय, 10 दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न तथा परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न।
1. पाठ परिचय
'हरिहर काका' मिथिलेश्वर की कहानी है, जिसमें एक निःसंतान, अनपढ़ किसान की पंद्रह बीघे ज़मीन के लिए उसके सगे भाई और ठाकुरबारी का महंत — दोनों ही उस पर अत्याचार करते हैं। कहानी धर्म के नाम पर पलने वाले पाखंड, स्वार्थ पर टिके पारिवारिक रिश्तों और वृद्धों की असुरक्षा को उजागर करती है।
लेखक परिचय — मिथिलेश्वर
मिथिलेश्वर (जन्म 1950, बैसाडीह, भोजपुर, बिहार) हिंदी के प्रसिद्ध कथाकार हैं। उनकी कहानियों में ग्रामीण जीवन, गाँव की राजनीति, बदलते सामाजिक मूल्य और आम आदमी के संघर्ष का यथार्थ चित्रण मिलता है। प्रमुख रचनाएँ — बाबूजी, बंद रास्तों के बीच, दूसरा महाभारत, मेघना का निर्णय, तिरिया जनम, हरिहर काका (कहानी-संग्रह); झुनिया, युद्धस्थल, प्रेम न बाड़ी उपजे, यह अंत नहीं (उपन्यास)।
साहित्यिक विशेषताएँ — गाँव की बोली-बानी से युक्त सहज भाषा, व्यंग्यात्मकता, मनोवैज्ञानिक चित्रण और सामाजिक विसंगतियों पर तीखी दृष्टि।
कहानी का सार
- कथावाचक हरिहर काका का पड़ोसी और उनका सबसे गहरा मित्र है। आजकल काका गूँगेपन का शिकार हो गए हैं — किसी से बात नहीं करते।
- गाँव (आरा से 40 किमी, हसनबाज़ार बस स्टैंड के पास) की पहचान विशाल ठाकुरबारी से है, जिसके नाम बीस बीघे खेत हैं। लोग मनौती पूरी होने पर उसे ज़मीन तक दान कर देते हैं।
- हरिहर काका चार भाइयों में दूसरे हैं। दो विवाह के बाद भी निःसंतान रहे; दोनों पत्नियाँ चल बसीं। परिवार के पास साठ बीघे खेत हैं, काका के हिस्से पंद्रह बीघे।
- भाइयों की पत्नियाँ धीरे-धीरे उनकी उपेक्षा करने लगीं। एक दिन भतीजे के दोस्त के लिए बने अच्छे भोजन के बजाय उन्हें भात, मट्ठा और अचार परोसा गया — काका ने थाली आँगन में फेंक दी।
- मौका देखकर महंत जी उन्हें ठाकुरबारी ले गए, स्वार्थी रिश्तों की बातें समझाईं और ज़मीन ठाकुरजी के नाम लिखने को उकसाया; खूब आवभगत की। भाई माफ़ी माँगकर उन्हें घर ले आए और अब उनकी खूब सेवा होने लगी।
- काका ने कथावाचक से सलाह कर निश्चय किया कि जीते-जी ज़मीन किसी को नहीं लिखेंगे। तब महंत ने आधी रात को उनका अपहरण कराया और जबरन कागज़ों पर अँगूठे के निशान लिए। पुलिस आई, काका बँधे हुए, मुँह में कपड़ा ठूँसे एक कमरे में मिले।
- बाद में सगे भाइयों ने भी वही रूप धर लिया — हथियार लेकर अँगूठे के निशान लिए, मारा-पीटा। महंत पुलिस लेकर पहुँचा और काका बचाए गए।
- अब काका परिवार से अलग, चार पुलिसवालों की सुरक्षा में, एक नौकर के साथ मौन रहते हैं। नेता जी स्कूल खोलने का प्रस्ताव लाते हैं, गाँव में अफ़वाहें फैलती हैं, और पुलिस वाले उन्हीं के खर्च पर मौज करते हैं — "जिसका धन वह रहे उपास, खाने वाले करें विलास।"
2. पात्रों का चार्ट
कहानी हरिहर काका के इर्द-गिर्द घूमती है; उनके भाई और महंत दोनों उनकी ज़मीन के लिए विरोधी पक्ष बनकर सामने आते हैं।
| पात्र | परिचय | चारित्रिक विशेषताएँ |
|---|---|---|
| हरिहर काका | चार भाइयों में दूसरे; निःसंतान, विधुर, अनपढ़ किसान; हिस्से में 15 बीघे खेत | सीधे-सादे, धार्मिक, स्नेही; अनुभव से समझदार बने; दृढ़ निश्चयी (जीते-जी ज़मीन न लिखने का संकल्प); अंत में मौन और विरक्त |
| कथावाचक (मैं) | हरिहर काका का पड़ोसी और मित्र | संवेदनशील, विचारशील; काका का एकमात्र राज़दार और सलाहकार |
| महंत जी | ठाकुरबारी के प्रमुख | चालाक, लोभी, वाक्पटु, लड़ाकू-दबंग; धर्म की आड़ में स्वार्थ साधने वाला; अपहरण और ज़ोर-ज़बरदस्ती करने वाला |
| पुजारी जी | ठाकुरबारी के पुजारी | महंत का सहयोगी; काका के घर का झगड़ा देखकर महंत को खबर दी |
| हरिहर काका के तीनों भाई | संयुक्त परिवार के सदस्य | स्वार्थी, अवसरवादी; ज़मीन के लिए सेवा का दिखावा, फिर हिंसा और अत्याचार |
| भाइयों की पत्नियाँ | — | आरंभ में उपेक्षा करने वाली; बाद में स्वार्थवश सेवा का दिखावा |
| साधु-संत | ठाकुरबारी के | कामचोर, भोजन-भट्ट; अपहरण में महंत के साथी |
| वृद्ध साधु | 80 वर्ष से अधिक आयु | पुलिस के पूछने पर भी कुछ न बताने वाला — "मुझे कुछ मालूम नहीं" |
| पुलिस इंचार्ज (दरोगा) | कस्बे के थाने से | तलाशी लेकर काका को छुड़ाया |
| नेता जी | गाँव के नेता | बिना काम-धंधे के मौज करने वाले, अवसरवादी; 'हरिहर उच्च विद्यालय' का प्रस्ताव |
| रमेसर की विधवा | उदाहरण-पात्र | ज़मीन लिखने के बाद दुर्गति — चेतावनी का प्रतीक |
| बुटन सिंह | इलाके का मशहूर डाकू (अफ़वाह में) | भय और अपराध का प्रतीक |
3. पात्रों से जुड़ी घटनाएँ
| पात्र | घटना | घटना से पता चलता है |
|---|---|---|
| भाइयों की पत्नियाँ | कुछ दिन सेवा, फिर बचा-खुचा और रूखा-सूखा खाना देना; बीमारी में पानी तक न पूछना | वृद्ध और निःसंतान व्यक्ति की उपेक्षा |
| हरिहर काका | भात-मट्ठा-अचार की थाली आँगन में फेंककर गरजना — "मेरे हिस्से के खेत की पैदावार इसी घर में आती है" | आत्मसम्मान और सहनशक्ति का अंत |
| पुजारी, महंत | पुजारी का खबर देना; महंत का रास्ते में काका को ठाकुरबारी ले जाकर "सब स्वार्थ के साथी हैं" समझाना | अवसर की तलाश में बैठा धार्मिक पाखंड |
| महंत | मालपुए, रसबुनिया, खीर आदि से आवभगत; भाइयों को लौटा देना | लालच देकर फँसाने की चाल |
| तीनों भाई | सुबह पाँव पकड़कर रोना, माफ़ी माँगना; फिर घर में खूब सेवा | सेवा के पीछे ज़मीन का स्वार्थ |
| गाँव वाले | दो वर्गों में बँटना — ठाकुरबारी समर्थक बनाम परिवार समर्थक | गाँव की धार्मिक और प्रगतिशील सोच का टकराव |
| हरिहर काका, कथावाचक | सलाह — जीते-जी जायदाद किसी के नाम न लिखना | अनुभव से उपजी समझदारी |
| महंत व साधु | आधी रात भाला-गँड़ासा-बंदूक लेकर अपहरण; छत से रोड़े, गोलीबारी; जबरन अँगूठे के निशान; कमरे में बाँधकर गुप्त दरवाज़े से भागना | धर्म की आड़ में अपराध |
| तीनों भाई | पुलिस लाकर काका को छुड़ाना; फिर घर में पहरे में रखना | जायदाद की सुरक्षा के लिए सुरक्षा |
| तीनों भाई | एक रात हथियार लेकर धमकाना — "मारकर घर में गाड़ देंगे"; मारपीट, मुँह में कपड़ा ठूँसना | खून के रिश्तों का पतन |
| महंत | पुलिस की जीप लेकर पहुँचना; काका की रिहाई | अपने स्वार्थ के लिए "रक्षक" बनना |
| नेता जी | 'हरिहर उच्च विद्यालय' का प्रस्ताव | हर पक्ष की नज़र ज़मीन पर |
| पुलिस के जवान | काका के खर्च पर मौज-मस्ती | व्यवस्था का शोषण — "जिसका धन वह रहे उपास" |
4. पाठ की मुख्य बातें
- विधा — कहानी; पुस्तक — संचयन भाग-2; लेखक — मिथिलेश्वर।
- गाँव — कस्बाई शहर आरा से 40 किमी, हसनबाज़ार बस स्टैंड के पास; आबादी ढाई-तीन हज़ार।
- गाँव के तीन प्रमुख स्थान — पश्चिम में बड़ा तालाब, बीच में पुराना बरगद, पूरब में ठाकुरबारी।
- ठाकुरबारी — 20 बीघे खेत; समिति हर तीन साल पर महंत और पुजारी नियुक्त करती है।
- ज़मीन — परिवार के 60 बीघे, काका के हिस्से 15 बीघे (दो लाख से अधिक की संपत्ति)।
- थाली फेंकने की घटना — भात, मट्ठा और अचार।
- महंत का प्रलोभन — बैकुंठ, कीर्ति, "एक माँगोगे तो चार हाज़िर", "ईश्वर को एक भर दोगे तो दस भर पाओगे"।
- महत्वपूर्ण कथन — "अज्ञान की स्थिति में ही मनुष्य मृत्यु से डरते हैं। ज्ञान होने के बाद... मृत्यु को वरण करने के लिए तैयार हो जाता है।"
- चेतावनी का उदाहरण — रमेसर की विधवा।
- अंतिम स्थिति — चार राइफलधारी पुलिस जवान, एक नौकर, परिवार से अलग, मौन।
- अफ़वाहें — अग्नि देने पर खूनी लड़ाई, डाकू बुटन सिंह से सौदा (5 बीघे), देशभर के साधु-नागा बुलाना।
- मुहावरे — फूटी आँखों न सुहाना, कान खड़े होना, सिर-आँखों पर उठाना, दूध की मक्खी होना, नमक-मिर्च मिलाना, तूती बोलना, रँगे हाथों पकड़ना, खून खौल उठना।
5. पाठ की व्याख्या (प्रसंग-क्रम से)
प्रसंग 1 — मौन हरिहर काका
कथावाचक दो दिन से काका के पास जा रहा है, पर वे बात नहीं करते; केवल एक नज़र में बहुत कुछ कह जाते हैं। कथावाचक उनकी स्थिति की तुलना मझधार में फँसी नाव से करता है, जिसके यात्री चिल्लाकर भी बच नहीं सकते — यानी काका गहरी निराशा और असहायता में हैं। काका बचपन में उसे कंधों पर घुमाते थे, इसलिए दोनों का संबंध गहरा है।
प्रसंग 2 — गाँव और ठाकुरबारी
एक संत की झोंपड़ी से शुरू हुई ठाकुरबारी लोगों की आस्था और चढ़ावे से गाँव की सबसे विशाल संस्था बन गई। लोग मानते हैं कि फसल, मुकदमा, शादी सब ठाकुरजी की कृपा से होता है; इसलिए ठाकुरबारी का विकास गाँव से "हज़ार गुना" अधिक हुआ। पर कथावाचक को वहाँ के साधु-संत फूटी आँखों नहीं सुहाते — वे काम नहीं करते, हलवा-पूड़ी खाते और बातें बनाते हैं। यहाँ अंधश्रद्धा पर व्यंग्य है।
प्रसंग 3 — परिवार में उपेक्षा
निःसंतान काका ने तीसरी शादी से इनकार किया और भाइयों के परिवार के साथ रहने लगे। भाइयों ने पत्नियों से सेवा करने को कहा, पर कुछ दिनों बाद काका को बचा-खुचा खाना मिलने लगा और बीमारी में कोई पानी तक नहीं पूछता था। भतीजे के दोस्त के आने पर अच्छा भोजन बना, पर काका को भात-मट्ठा-अचार दिया गया। अपमानित काका ने थाली फेंक दी और कहा कि उनकी ज़मीन की पैदावार पर ही सब मौज कर रहे हैं।
प्रसंग 4 — महंत की चाल
यह सब पुजारी ने सुना और महंत को बताया — "उनके कान खड़े हो गए।" महंत तुरंत आए, काका को ठाकुरबारी ले गए और समझाया कि संसार माया है, सब स्वार्थ के साथी हैं; ज़मीन ठाकुरजी के नाम लिख दो तो बैकुंठ मिलेगा, कीर्ति अमर होगी। उनके पिछले जन्म के पापों का डर भी दिखाया। फिर मालपुए, रसबुनिया, खीर से ऐसी आवभगत की जैसी काका ने कभी न देखी थी।
प्रसंग 5 — भाइयों का पश्चाताप और सेवा
पंद्रह बीघे ज़मीन हाथ से जाने के डर से भाई रात-भर सो न सके। सुबह पाँव पकड़कर रोए, पत्नियों की गलती की माफ़ी माँगी और काका को घर ले आए। अब घर में उनकी असाधारण सेवा होने लगी — पाँच महिलाएँ हाज़िर रहतीं। काका समझ गए कि यह महंत जी के कारण है। गाँव में चर्चा फैल गई और लोग दो वर्गों में बँट गए।
प्रसंग 6 — समझदारी भरा निर्णय
भाई भी ज़मीन अपने नाम लिखवाना चाहते थे और महंत भी। काका ने कथावाचक से सलाह की। रमेसर की विधवा जैसे लोगों के उदाहरण याद आए, जिन्होंने जीते-जी ज़मीन लिख दी और फिर कुत्ते जैसा जीवन जिया। अनपढ़ काका ने निश्चय किया कि जीते-जी किसी को ज़मीन नहीं लिखेंगे — "मर जाऊँगा तो अपने आप मेरी ज़मीन तुम्हें मिल जाएगी।"
प्रसंग 7 — अपहरण
महंत ने इसे "धर्म-संकट" कहकर अपहरण की योजना बनाई। आधी रात साधु-संत हथियारों के साथ काका को पीठ पर लादकर ले गए। भाई ठाकुरबारी पहुँचे तो छत से रोड़े और खिड़कियों से गोलियाँ चलीं। भीतर काका से जबरन सादे और लिखे कागज़ों पर अँगूठे लगवाए गए। पुलिस आई तो महंत गुप्त दरवाज़े से भाग गया; काका एक बंद कमरे में हाथ-पाँव बँधे, मुँह में कपड़ा ठूँसे मिले। महंत का असली रूप देखकर काका को अपना परिवार "पवित्र" लगने लगा।
प्रसंग 8 — भाइयों का असली रूप
घर में काका को किसी कीमती वस्तु की तरह पहरे में रखा गया, पर अब वे समझ गए थे कि यह आदर ज़मीन के कारण है। जब उन्होंने ज़मीन लिखने से इनकार किया तो एक रात भाइयों ने भी हथियार उठा लिए और धमकाया। काका ने कहा — "मुझे मार दो... जीते-जी एक धूर ज़मीन भी तुम्हें नहीं लिखूँगा।" भाइयों ने मारपीट कर अँगूठे लगवाए। महंत पुलिस लेकर आया और काका छुड़ाए गए। अब काका को महंत और भाई एक ही श्रेणी के लगने लगे।
प्रसंग 9 — वर्तमान स्थिति
काका अब परिवार से अलग, चार पुलिस जवानों की सुरक्षा में रहते हैं — विडंबना यह कि यह सुरक्षा भी भाइयों और महंत की पैरवी से मिली है, क्योंकि दोनों डरते हैं कि दूसरा पक्ष उन्हें न उठा ले जाए। नेता जी स्कूल खोलने का प्रस्ताव लाते हैं, गाँव में डरावनी अफ़वाहें फैलती हैं। काका गूँगेपन के शिकार होकर आकाश निहारते रहते हैं, जबकि पुलिस वाले उन्हीं के खर्च पर मौज करते हैं। कहानी समाज के स्वार्थ, धार्मिक पाखंड और वृद्धों की असहायता का करुण चित्र छोड़ती है।
6. बोध-प्रश्न (NCERT)
1. कथावाचक और हरिहर काका के बीच क्या संबंध है और इसके क्या कारण हैं?
कथावाचक और हरिहर काका के बीच गहरी आत्मीयता और मित्रता का संबंध है। इसके दो प्रमुख कारण हैं — पहला, हरिहर काका उसके पड़ोसी हैं; दूसरा, बचपन में काका उसे बहुत दुलार करते थे, कंधों पर बैठाकर घुमाते थे और पिता से भी अधिक प्यार करते थे। बड़े होने पर कथावाचक की पहली दोस्ती काका से ही हुई और काका उससे कुछ नहीं छिपाते थे।
2. हरिहर काका को महंत और अपने भाई एक ही श्रेणी के क्यों लगने लगे?
क्योंकि दोनों का उद्देश्य एक ही था — काका की पंद्रह बीघे ज़मीन हड़पना। महंत ने धर्म के नाम पर फुसलाया, फिर अपहरण कर जबरन अँगूठे के निशान लिए। भाइयों ने पहले सेवा का दिखावा किया, फिर हथियारों से धमकाकर मारपीट की और जबरन अँगूठे लगवाए। दोनों ने ही स्वार्थ के लिए हिंसा का सहारा लिया, इसलिए काका को दोनों एक जैसे लगे।
3. ठाकुरबारी के प्रति गाँव वालों के मन में अपार श्रद्धा के जो भाव हैं उससे उनकी किस मनोवृत्ति का पता चलता है?
इससे गाँव वालों की धार्मिक आस्था, अंधविश्वास और भाग्यवादी मनोवृत्ति का पता चलता है। वे मानते हैं कि अच्छी फसल, मुकदमे में जीत, शादी, नौकरी सब ठाकुरजी की कृपा से होता है, अपने परिश्रम से नहीं। वे मनौती पूरी होने पर रुपये, ज़ेवर, अनाज और ज़मीन तक चढ़ा देते हैं। उनकी इसी सरलता और अंधश्रद्धा का लाभ महंत और साधु उठाते हैं।
4. अनपढ़ होते हुए भी हरिहर काका दुनिया की बेहतर समझ रखते हैं? कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
हाँ। काका ने अनुभव से समझ लिया कि भाइयों का आदर और महंत की मीठी बातें उनकी ज़मीन के कारण हैं। उन्होंने देखा कि जिन लोगों ने जीते-जी अपनी जायदाद दूसरों को लिख दी, उनका जीवन नरक बन गया — जैसे रमेसर की विधवा। इसलिए उन्होंने दृढ़ निश्चय किया कि जीते-जी ज़मीन किसी को नहीं लिखेंगे, चाहे भाई हों या महंत। धमकी और मार भी उनका निर्णय नहीं बदल सकी।
5. हरिहर काका को जबरन उठा ले जाने वाले कौन थे? उन्होंने उनके साथ कैसा बर्ताव किया?
उन्हें ठाकुरबारी के महंत के इशारे पर साधु-संत और उनके पक्षधर उठा ले गए थे। आधी रात भाला, गँड़ासा और बंदूक से लैस होकर वे काका को पीठ पर लादकर ले गए। ठाकुरबारी में उनसे जबरन सादे और लिखे कागज़ों पर अँगूठे के निशान लिए गए, फिर हाथ-पाँव बाँधकर, मुँह में कपड़ा ठूँसकर एक कमरे में बंद कर दिया गया और साधु गुप्त दरवाज़े से भाग गए।
6. हरिहर काका के मामले में गाँव वालों की क्या राय थी और उसके क्या कारण थे?
गाँव वाले दो वर्गों में बँट गए थे। एक वर्ग चाहता था कि काका ज़मीन ठाकुरजी के नाम लिख दें — इससे ठाकुरबारी राज्य की सबसे बड़ी बन जाएगी और काका की कीर्ति अमर होगी; ये धार्मिक संस्कारों वाले और प्रसाद के लालची लोग थे। दूसरा वर्ग चाहता था कि ज़मीन भाइयों को मिले, क्योंकि परिवार अपना होता है; ये प्रगतिशील विचारों वाले लोग और ऐसे किसान थे जिनके घर हरिहर जैसे लोग पल रहे थे।
7. लेखक ने यह क्यों कहा, "अज्ञान की स्थिति में ही मनुष्य मृत्यु से डरते हैं। ज्ञान होने के बाद तो आदमी आवश्यकता पड़ने पर मृत्यु को वरण करने के लिए तैयार हो जाता है"?
जब भाइयों ने हथियार लेकर काका को मारने की धमकी दी, तब काका नहीं डरे, क्योंकि अब उन्हें रिश्तों और महंत की असलियत का ज्ञान हो चुका था। वे समझ गए थे कि ज़मीन लिखकर रमेसर की विधवा की तरह घुट-घुटकर मरने से एक बार मर जाना बेहतर है। इसी ज्ञान ने उन्हें निडर बना दिया और वे मृत्यु स्वीकार करने को तैयार हो गए, पर ज़मीन लिखने को नहीं।
8. समाज में रिश्तों की क्या अहमियत है? इस विषय पर अपने विचार प्रकट कीजिए।
रिश्ते समाज की नींव हैं; वे प्रेम, सुरक्षा, सहयोग और भावनात्मक सहारा देते हैं। सुख-दुख में परिवार ही सबसे पहले साथ देता है। पर जब रिश्ते स्वार्थ और धन पर टिक जाते हैं, तब वे खोखले हो जाते हैं — जैसा हरिहर काका के साथ हुआ। हमें रिश्तों को निःस्वार्थ प्रेम और सम्मान से निभाना चाहिए, विशेषकर बुज़ुर्गों का ध्यान रखना चाहिए।
9. यदि आपके आसपास हरिहर काका जैसी हालत में कोई हो तो आप उसकी किस प्रकार मदद करेंगे?
मैं उनसे नियमित मिलकर बातें करूँगा ताकि वे अकेलापन महसूस न करें। उनके भोजन, दवा और स्वास्थ्य का ध्यान रखने में मदद करूँगा। उन्हें कानूनी अधिकारों की जानकारी दूँगा और ज़रूरत पड़ने पर वकील, पंचायत, पुलिस या वरिष्ठ नागरिक हेल्पलाइन से मदद दिलाऊँगा। उन्हें किसी के दबाव में संपत्ति न लिखने और सही निर्णय लेने की सलाह दूँगा।
10. हरिहर काका के गाँव में यदि मीडिया की पहुँच होती तो उनकी क्या स्थिति होती? अपने शब्दों में लिखिए।
मीडिया होता तो महंत और भाइयों के अत्याचार की खबर तुरंत पूरे देश में फैल जाती। अपहरण, गोलीबारी और जबरन अँगूठे लगवाने जैसे अपराधों पर प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ती; दोषी जेल जाते। जनमत के दबाव में काका को न्याय और सुरक्षा मिलती तथा ठाकुरबारी के पाखंड का पर्दाफ़ाश होता। संभवतः उन्हें इतना मानसिक कष्ट न झेलना पड़ता।
7. अतिरिक्त प्रश्न — 20 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
- 'हरिहर काका' कहानी के लेखक हैं— (क) गुरदयाल सिंह (ख) मिथिलेश्वर (ग) प्रेमचंद (घ) हबीब तनवीर
- कथावाचक का गाँव किस कस्बाई शहर से 40 किमी दूर है? (क) पटना (ख) बक्सर (ग) आरा (घ) गया
- गाँव किस बस स्टैंड के पास है? (क) आरा (ख) भोजपुर (ग) हसनबाज़ार (घ) बिहटा
- ठाकुरबारी के नाम कितने बीघे खेत हैं? (क) बीस (ख) दस (ग) पंद्रह (घ) साठ
- समिति महंत और पुजारी की नियुक्ति कितने वर्ष पर करती है? (क) एक (ख) तीन (ग) दो (घ) पाँच
- हरिहर काका कितने भाई हैं? (क) दो (ख) चार (ग) तीन (घ) पाँच
- भाइयों में हरिहर काका का क्रम है— (क) पहला (ख) दूसरा (ग) तीसरा (घ) चौथा
- हरिहर काका के हिस्से में कितने बीघे खेत हैं? (क) दस (ख) पंद्रह (ग) बीस (घ) साठ
- हरिहर काका ने औलाद के लिए कितनी शादियाँ कीं? (क) दो (ख) एक (ग) तीन (घ) चार
- थाली फेंकने के दिन काका को क्या परोसा गया था? (क) भात, मट्ठा और अचार (ख) पूड़ी-सब्ज़ी (ग) खीर (घ) रोटी-दाल
- काका के घर का झगड़ा किसने महंत को बताया? (क) कथावाचक (ख) भतीजे (ग) नेता जी (घ) पुजारी जी
- पुजारी जी काका के दालान पर क्या लेने आए थे? (क) अनाज (ख) पैसे (ग) फूल (घ) घी और शकील (हुमाध के लिए)
- 'दूध की मक्खी होना' का अर्थ है— (क) बेकार समझकर निकाल दिया जाना (ख) बहुत प्रिय होना (ग) मीठा खाना (घ) चालाक होना
- ज़मीन लिखने के बाद किसकी दुर्गति का उदाहरण दिया गया है? (क) बुटन सिंह (ख) नेता जी (ग) रमेसर की विधवा (घ) वृद्ध साधु
- ठाकुरबारी में पुलिस को केवल कौन मिला? (क) महंत (ख) पुजारी (ग) कोई नहीं (घ) एक वृद्ध साधु
- वृद्ध साधु की उम्र लगभग कितनी थी? (क) 60 वर्ष (ख) 70 वर्ष (ग) 100 वर्ष (घ) 80 वर्ष से अधिक
- बंद कमरे के बारे में वृद्ध साधु ने क्या बताया? (क) पूजा-सामग्री है (ख) खाली है (ग) महंत का कमरा है (घ) अनाज है
- हरिहर काका की सुरक्षा के लिए कितने पुलिस जवान मिले? (क) चार (ख) दो (ग) तीन (घ) आठ
- नेता जी ने काका की ज़मीन पर क्या खोलने का प्रस्ताव रखा? (क) अस्पताल (ख) मंदिर (ग) 'हरिहर उच्च विद्यालय' (घ) धर्मशाला
- इलाके के मशहूर डाकू का नाम था— (क) रमेसर (ख) हरबंस (ग) बुटन सिंह (घ) ओमा
उत्तर — 1-ख, 2-ग, 3-ग, 4-क, 5-ख, 6-ख, 7-ख, 8-ख, 9-क, 10-क, 11-घ, 12-घ, 13-क, 14-ग, 15-घ, 16-घ, 17-घ, 18-क, 19-ग, 20-ग
8. अतिरिक्त प्रश्न — 20 लघु-उत्तरीय प्रश्न
1. कथावाचक ने हरिहर काका की स्थिति की तुलना किससे की है?
मझधार में फँसी उस नाव से, जिसके यात्री चिल्लाकर भी अपनी रक्षा नहीं कर पाते और मौन होकर जल-समाधि लेने के सिवा कोई विकल्प नहीं बचता।
2. ठाकुरबारी की स्थापना के बारे में गाँव में कौन-सी कहानी प्रचलित है?
वर्षों पहले एक संत ने यहाँ झोंपड़ी बनाकर ठाकुरजी की पूजा शुरू की; बाद में लोगों ने चंदा करके छोटा मंदिर बनवाया, जो गाँव के साथ बढ़ता गया।
3. गाँव के लोग ठाकुरजी से कैसी मनौतियाँ मानते थे?
पुत्र होने, मुकदमे में जीत, लड़की की अच्छे घर शादी और लड़के को नौकरी मिलने जैसी मनौतियाँ।
4. गाँव के पर्व-त्योहारों में ठाकुरबारी की क्या भूमिका थी?
होली का पहला गुलाल ठाकुरजी को चढ़ता, दीवाली का पहला दीप ठाकुरबारी में जलता, जन्म-शादी-जनेऊ पर पहली भेंट ठाकुरजी के नाम होती और फसल का 'अगउम' पहले निकाला जाता।
5. कथावाचक को ठाकुरबारी के साधु-संत क्यों पसंद नहीं थे?
वे काम-धाम नहीं करते, भोग के नाम पर दोनों जून हलवा-पूड़ी खाकर आराम करते और केवल बातें बनाना जानते थे।
6. हरिहर काका ने तीसरी शादी क्यों नहीं की?
अपनी ढलती उम्र और धार्मिक संस्कारों के कारण उन्होंने तीसरी शादी से इनकार कर दिया और भाइयों के परिवार के साथ रहने लगे।
7. भाइयों के परिवार से काका का मोहभंग कब शुरू हुआ?
जब बीमारी में भी कोई उन्हें पानी तक देने नहीं आता था और उन्हें स्वयं उठकर अपनी ज़रूरतें पूरी करनी पड़ती थीं; तब पत्नियों को याद कर उनकी आँखें भर आतीं।
8. थाली फेंकते समय काका ने क्या कहा?
कि यह न समझो कि मुफ़्त में खिलाती हो; मेरे हिस्से के खेत की पैदावार इसी घर में आती है, मैं अनाथ-बेसहारा नहीं हूँ, मेरे धन पर तुम सब मौज कर रही हो।
9. महंत जी के अनुसार भाई काका को क्यों पकड़े हुए हैं?
काका के हिस्से के पंद्रह बीघे खेत के कारण; जिस दिन वे ज़मीन किसी और को लिखने की बात कहेंगे, उस दिन भाई बोलना बंद कर देंगे।
10. ठाकुरबारी में काका की कैसी आवभगत हुई?
साफ़-सुथरे कमरे में पलंग पर बिस्तर लगाया गया और रात में घी टपकते मालपुए, रसबुनिया, लड्डू, छेने की तरकारी, दही, खीर परोसे गए; पुजारी ने स्वयं परोसा।
11. घर लौटने पर काका ने क्या बदलाव देखा?
घर के छोटे-बड़े सब उन्हें सिर-आँखों पर बिठाने लगे; बहुओं ने पैर छूकर माफ़ी माँगी और पाँच महिलाएँ उनकी सेवा में तैयार रहतीं।
12. "घटनाओं की ज़ुबान लोगों की ज़ुबान से ज़्यादा पैनी होती है" — इसका क्या अर्थ है?
किसी के बताए बिना ही घटनाएँ स्वयं सच्चाई प्रकट कर देती हैं; काका के मामले में भी किसी ने कुछ नहीं कहा, फिर भी पूरा गाँव असलियत जान गया।
13. महंत ने अपहरण को किस बहाने से उचित ठहराया?
महंत के अनुसार हरिहर धर्म-संकट में था — मन से ठाकुरजी को ज़मीन देना चाहता था पर भाइयों के मोह में बँधा था; उसे उबारने का यही एकमात्र रास्ता था।
14. ठाकुरबारी पहुँचे भाइयों पर कैसे हमला हुआ?
छत से रोड़े और पत्थर बरसाए गए और खिड़कियों से गोलियाँ चलाई गईं; एक नौजवान के पैर में गोली लगी और भाइयों के पक्षधर भाग गए।
15. ठाकुरबारी में काका किस हालत में मिले?
एक बंद कमरे में उनके हाथ-पाँव बँधे थे और मुँह में कपड़ा ठूँसकर बाँधा गया था; वे लुढ़कते हुए दरवाज़े तक आए और पैर से धक्का दे रहे थे।
16. ठाकुरबारी से लौटने के बाद काका की सुरक्षा कैसे की गई?
उन्हें घर के अंदर रखा गया, रिश्ते के 'सूरमा' बुलाए गए, हथियार जुटाए गए और चौबीसों घंटे पहरा दिया जाने लगा; बाहर निकलने पर हथियारबंद लोग साथ चलते।
17. भाइयों ने काका को क्या धमकी दी?
कि सीधे मन से कागज़ों पर अँगूठे के निशान लगाओ, अन्यथा मारकर घर के अंदर गाड़ देंगे और गाँव को खबर तक नहीं होगी।
18. भाइयों के अत्याचार से काका को किसने बचाया?
काका की चीख गाँव तक पहुँची और खबर महंत तक गई; महंत पुलिस की जीप लेकर आ धमके और पुलिस ने घर की तलाशी लेकर काका को बरामद किया।
19. गाँव में कौन-कौन सी अफ़वाहें फैलीं?
कि महंत और भाई अफ़सोस कर रहे हैं कि काका को खत्म क्यों नहीं किया; उनकी मृत्यु पर अग्नि देने के लिए खून की नदी बहेगी; भाइयों ने डाकू बुटन सिंह से सौदा किया है; महंत देशभर के साधु-नागा बुलाएँगे।
20. "जिसका धन वह रहे उपास, खाने वाले करें विलास" — किस संदर्भ में कहा गया है?
काका की सुरक्षा में लगे पुलिस जवान उन्हीं के खर्च पर मौज कर रहे हैं, जबकि धन के मालिक काका स्वयं दुखी और मौन जीवन जी रहे हैं।
9. अतिरिक्त प्रश्न — 10 दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न
1. हरिहर काका के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर — हरिहर काका सीधे-सादे, धार्मिक और स्नेही ग्रामीण किसान हैं, जो कथावाचक को बचपन से पिता से बढ़कर प्यार करते थे। वे आत्मसम्मानी हैं — उपेक्षा सहन न कर थाली फेंक देते हैं। अनपढ़ होकर भी अनुभव से समझदार बन जाते हैं और महंत व भाइयों दोनों की असलियत पहचान लेते हैं। वे दृढ़ निश्चयी और निडर हैं — मौत की धमकी के बावजूद ज़मीन नहीं लिखते। अंत में बार-बार के विश्वासघात से टूटकर मौन हो जाते हैं।
2. महंत जी का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर — महंत जी धर्म का चोला ओढ़े लोभी और पाखंडी व्यक्ति हैं। वे वाक्पटु और मनोविज्ञान के जानकार हैं — सही अवसर पर काका को माया-मोह और स्वर्ग का लालच देकर फँसाते हैं। वे चालाक हैं — आवभगत से काका का मन जीतते हैं। ज़मीन न मिलने पर वे लड़ाकू और दबंग रूप दिखाते हैं — अपहरण, गोलीबारी, जबरन अँगूठे के निशान। फिर स्वार्थवश पुलिस लाकर "रक्षक" भी बन जाते हैं। वे धार्मिक पाखंड के प्रतीक हैं।
3. 'हरिहर काका' कहानी में धर्म के नाम पर होने वाले पाखंड का किस प्रकार पर्दाफ़ाश हुआ है?
उत्तर — ठाकुरबारी लोगों की श्रद्धा और चढ़ावे से समृद्ध हुई, पर वहाँ के साधु-संत कामचोर और भोजन-भट्ट हैं। महंत धर्म, बैकुंठ और कीर्ति का लालच देकर काका की ज़मीन हड़पना चाहता है। ज़मीन न मिलने पर वह साधुओं के साथ हथियार उठाता है, अपहरण करता है, गोलियाँ चलवाता है और अनपढ़ व्यक्ति से जबरन अँगूठे लगवाता है। कहानी दिखाती है कि धर्म का उपयोग स्वार्थ और अपराध की ढाल के रूप में हो रहा है।
4. कहानी के आधार पर संयुक्त परिवार में बुज़ुर्गों और निःसंतान व्यक्तियों की स्थिति पर प्रकाश डालिए।
उत्तर — कहानी बताती है कि संयुक्त परिवार में भी निःसंतान वृद्ध की उपेक्षा होती है। हरिहर काका को बचा-खुचा खाना मिलता था, बीमारी में कोई पानी तक नहीं पूछता था, जबकि उनके हिस्से की पैदावार उसी घर में जाती थी। जब ज़मीन हाथ से जाने का डर हुआ तब परिवार ने सेवा का दिखावा किया, और न मिलने पर हिंसा की। इससे पता चलता है कि रिश्ते संपत्ति पर टिके हैं और बुज़ुर्ग असुरक्षित हैं।
5. हरिहर काका ने जीते-जी अपनी ज़मीन किसी के नाम न लिखने का निर्णय क्यों लिया?
उत्तर — काका ने देखा कि भाइयों का आदर और महंत की कृपा दोनों उनकी ज़मीन के कारण हैं। गाँव और इलाके में ऐसे लोग थे जिन्होंने जीते-जी जायदाद लिख दी और फिर उनका जीवन कुत्ते जैसा हो गया — जैसे रमेसर की विधवा, जिसका पहले आदर हुआ और बाद में ऐसी दुर्गति हुई कि लोग सिहर जाते। काका जानते थे कि ज़मीन लिखते ही वे "दूध की मक्खी" बन जाएँगे। इसलिए उन्होंने तय किया कि मरने के बाद ज़मीन अपने आप भाइयों को मिल जाएगी, लिखने की ज़रूरत नहीं।
6. कहानी में गाँव के लोगों की मानसिकता का चित्रण कीजिए।
उत्तर — गाँव के लोग धर्मभीरु और अंधविश्वासी हैं; हर सफलता को ठाकुरजी की कृपा मानते हैं। हरिहर काका के मामले में वे दो वर्गों में बँट जाते हैं और बैठकों में तू-तू मैं-मैं करते हैं। कुछ लोग प्रसाद के लालच में ठाकुरबारी के पक्ष में हैं। अफ़वाहें फैलाने में उनकी रुचि है — "नमक-मिर्च मिलाकर" खबर आगे बढ़ाते हैं। अत्याचार देखकर भी अधिकांश लोग छतों से "आहट" लेते हैं, खुलकर विरोध नहीं करते।
7. हरिहर काका की वर्तमान स्थिति की विडंबना स्पष्ट कीजिए।
उत्तर — काका के पास पंद्रह बीघे ज़मीन है, जिसकी फसल से वे मौज की ज़िंदगी जी सकते थे, पर वे मौन होकर आकाश निहारते रहते हैं। उनकी सुरक्षा के लिए चार पुलिस जवान हैं, पर यह सुरक्षा उन्हीं भाइयों और महंत की पैरवी से मिली है जिनसे उन्हें खतरा है — दोनों एक-दूसरे से डरकर उनकी "रक्षा" कर रहे हैं। पुलिस वाले उन्हीं के खर्च पर मौज कर रहे हैं। जिसका धन है वह उपवास में है और खाने वाले विलास में — यही विडंबना है।
8. महंत और भाइयों के व्यवहार की तुलना कीजिए।
उत्तर — दोनों का लक्ष्य काका की ज़मीन था। महंत ने धर्म और स्वर्ग का लालच दिया, आवभगत की, फिर अपहरण कर जबरन अँगूठे लगवाए। भाइयों ने पहले उपेक्षा की, फिर ज़मीन जाने के डर से माफ़ी माँगकर सेवा की, और न लिखने पर हथियार उठाकर मारपीट की और जबरन अँगूठे लगवाए। एक ने धर्म की आड़ ली, दूसरे ने खून के रिश्ते की। अंततः दोनों ही स्वार्थी और हिंसक निकले, इसलिए काका को एक जैसे लगे।
9. 'हरिहर काका' कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर — पूरी कहानी हरिहर काका के जीवन, उनकी ज़मीन और उसके लिए हुए संघर्ष पर केंद्रित है। आरंभ उनके मौन से होता है और अंत भी उनके मौन पर। सभी पात्र — भाई, महंत, गाँव वाले, नेता जी, पुलिस — काका के इर्द-गिर्द ही सक्रिय हैं। 'काका' संबोधन कथावाचक की आत्मीयता भी दर्शाता है। इसलिए शीर्षक संक्षिप्त, केंद्रित और पूर्णतः सार्थक है।
10. 'हरिहर काका' कहानी से हमें क्या संदेश मिलता है?
उत्तर — कहानी संदेश देती है कि धर्म के नाम पर होने वाले पाखंड से सावधान रहना चाहिए और अंधश्रद्धा छोड़नी चाहिए। रिश्ते प्रेम और कर्तव्य पर टिकने चाहिए, धन पर नहीं। परिवार और समाज को बुज़ुर्गों और असहाय लोगों का सम्मान और देखभाल करनी चाहिए। साथ ही व्यक्ति को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और किसी के दबाव या लालच में आकर संपत्ति जैसे निर्णय नहीं लेने चाहिए।
10. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
संचयन से बोर्ड परीक्षा में प्रायः 50–60 शब्दों के विचारात्मक प्रश्न आते हैं; यह कहानी सबसे अधिक पूछी जाने वाली कहानियों में है।
⭐ सबसे महत्वपूर्ण (अवश्य तैयार करें)
- हरिहर काका को महंत और अपने भाई एक ही श्रेणी के क्यों लगने लगे?
- अनपढ़ होते हुए भी हरिहर काका दुनिया की बेहतर समझ रखते हैं — स्पष्ट कीजिए।
- ठाकुरबारी के प्रति गाँव वालों की श्रद्धा से उनकी किस मनोवृत्ति का पता चलता है?
- "अज्ञान की स्थिति में ही मनुष्य मृत्यु से डरते हैं" — लेखक ने ऐसा क्यों कहा?
- हरिहर काका के मामले में गाँव वालों की क्या राय थी और क्यों?
महत्वपूर्ण
- कथावाचक और हरिहर काका के बीच क्या संबंध है और इसके क्या कारण हैं?
- हरिहर काका को जबरन उठा ले जाने वाले कौन थे? उन्होंने कैसा बर्ताव किया?
- महंत का चरित्र-चित्रण कीजिए।
- हरिहर काका ने जीते-जी ज़मीन किसी के नाम न लिखने का निर्णय क्यों लिया?
- हरिहर काका की वर्तमान स्थिति की विडंबना स्पष्ट कीजिए।
मूल्यपरक / स्वयं विचार वाले प्रश्न
- समाज में रिश्तों की क्या अहमियत है?
- हरिहर काका जैसी हालत वाले व्यक्ति की आप कैसे मदद करेंगे?
- यदि गाँव में मीडिया की पहुँच होती तो काका की क्या स्थिति होती?
- धर्म के नाम पर होने वाले शोषण को रोकने के उपाय सुझाइए।
🔗 कक्षा 10 हिंदी — स्पर्श व संचयन के सभी पाठ आपस में जुड़े हुए
- बड़े भाई साहब — प्रेमचंद (स्पर्श)
- डायरी का एक पन्ना — सीताराम सेकसरिया (स्पर्श)
- अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले — निदा फ़ाज़ली (स्पर्श)
- कारतूस — हबीब तनवीर (स्पर्श)
- हरिहर काका — मिथिलेश्वर (संचयन) (आप यही पढ़ रहे हैं)
- सपनों के-से दिन — गुरदयाल सिंह (संचयन)
— मनोज शर्मा, हिंदी शिक्षक | HINDI GYAN —
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