पाठ परिचय
“अहमस्मि भारतस्य संविधानम्” (मैं भारत का संविधान हूँ) NCERT की नई कक्षा 9 संस्कृत पाठ्यपुस्तक ऋषिकुल्या का पहला पाठ है। यह एक संवाद-शैली का पाठ है। विद्यार्थी — गार्गी, यशिका, अथर्व, श्रेया और पावनी — नई दिल्ली के संविधान-सदन (पुराने संसद भवन) के केन्द्रीय कक्ष (Central Hall) में घूमने आते हैं। वहाँ रखे संविधान-ग्रन्थ को देखकर उन्हें ऐसा अनुभव होता है मानो ग्रन्थ स्वयं बोल रहा हो। इसके बाद संविधान आत्मकथा शैली में अपना परिचय देता है।
पाठ में संविधान के चार आधार-स्तम्भ (न्याय, स्वतंत्रता, समता, बंधुता), तीन अंग (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका), मौलिक अधिकार, अनुच्छेद 32, अनुच्छेद 51(क) के 11 मूल कर्तव्य और संसदीय शासन-पद्धति का परिचय दिया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि संविधान के आदर्श हमारे प्राचीन वैदिक ग्रंथों की सूक्तियों — “सं गच्छध्वं सं वदध्वम्”, “वसुधैव कुटुम्बकम्”, “आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः”, “सर्वे भवन्तु सुखिनः” — से मेल खाते हैं।
📌 पाठ की विधा: संवाद + आत्मकथा | स्थान: संविधान-सदन का केन्द्रीय कक्ष | मुख्य संदेश: अधिकारों के साथ कर्तव्यों का पालन ही सच्चा नागरिक धर्म है।
मूल पाठ का सरलार्थ (हिंदी)
नीचे पाठ के प्रत्येक अंश का मुख्य वाक्य और उसका सरल हिंदी अर्थ दिया गया है। पूरा मूल पाठ अपनी पाठ्यपुस्तक में पढ़ें।
अंश 1 – संविधान-सदन में छात्र
गार्गी – सखि यशिके ! पश्य, एतदेव तत् पावनं ‘संविधान-सदनम्’।
सरलार्थ: गार्गी आश्चर्य से कहती है — सखी यशिका! देखो, यही वह पवित्र ‘संविधान-सदन’ है। यहीं हमारे राष्ट्र के भाग्य-विधाताओं (संविधान सभा) की सभा हुई थी, जहाँ भारत की ‘आत्मा’ ने संविधान के रूप में आकार पाया। यशिका कहती है — तुम सच कहती हो, सामने रखे ‘संविधान-ग्रन्थ’ को देखो। अथर्व कहता है — अरे! यह ग्रन्थ तो मानो अपने विषय में कुछ कहना चाहता है। श्रेया कहती है — आश्चर्य है, मैं भी ग्रन्थ की वाणी सुन रही हूँ। पावनी कहती है — सब चुप होकर सुनो!
अंश 2 – संविधान का परिचय
अहमस्मि संविधानम्, भारतस्य आत्मा, अस्य राष्ट्रस्य नियमसंहिता जीवनमार्गदर्शकः च।
सरलार्थ: हे बालको! मैं संविधान हूँ — भारत की आत्मा, इस राष्ट्र की नियम-संहिता और जीवन का मार्गदर्शक। न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता — इन चार आधार-स्तम्भों से मैं राष्ट्र के लोकतंत्र को सुदृढ़ करता हूँ। राष्ट्र की एकता, अखंडता, न्याय और शांति की स्थापना ही मेरा मूल लक्ष्य है। इसलिए मैं राष्ट्र-चेतना का प्रतिरूप हूँ। प्राचीन भारतीय ग्रन्थों के उदात्त विचार पग-पग पर मुझमें समाए हुए हैं।
ऋग्वेद का संज्ञान-सूक्त
सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनांसि जानताम् ।
देवा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते ॥ (ऋग्वेद 10.191.2)
अर्थ: तुम सब मिलकर चलो, मिलकर (एक स्वर से) बोलो, तुम्हारे मन एक-समान विचार वाले हों। जैसे प्राचीन देवता एक-मत होकर अपने-अपने कर्तव्य-भाग को श्रद्धापूर्वक निभाते थे, वैसे ही तुम भी करो। — यही संविधान की ‘बंधुता’ और ‘एकता’ की भावना है।
अंश 3 – संविधान के तीन अंग
विधायिका कार्यपालिका न्यायपालिका चेति मम त्रीणि अङ्गानि।
सरलार्थ: मैं लोकतांत्रिक भारत का आधार हूँ। विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका — ये मेरे तीन अंग हैं। विधायिका से मैं नीतियों (कानूनों) का निर्माण करवाता हूँ, कार्यपालिका से उन नीतियों का क्रियान्वयन (लागू करना) करवाता हूँ और न्यायपालिका से प्रजा के न्याय तथा अधिकारों की रक्षा करवाता हूँ। जिला न्यायालय, उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय — यह न्यायपालिका की संरचना है।
अंश 4 – संशोधन और समभाव
अहं विश्वस्य सुदृढं बृहत्तमं च लिखितसंविधानम् अस्मि। “सर्वमतसमभावः” इत्येव मम परमो भावः।
सरलार्थ: सबका हित और सबका सुख मेरा परम ध्येय है। मैं समय, परिस्थिति और आवश्यकता के अनुसार संशोधनों द्वारा सदा नया बना रहता हूँ। मैं विश्व का सबसे सुदृढ़ और सबसे बड़ा लिखित संविधान हूँ। ‘सभी मतों (धर्मों) के प्रति समान भाव’ ही मेरा परम भाव है। मेरी दृष्टि में सभी भारतीय समान हैं। सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय मेरा मन्त्र है। विचारों की अभिव्यक्ति और उपासना-पद्धति अपनाने की स्वतंत्रता का मैं पोषक हूँ। प्रतिष्ठा और अवसर की समता मेरी दृष्टि है। व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्रीय एकता मेरे हृदय में बसे दो भाव हैं।
अंश 5 – मौलिक अधिकार व संसदीय शासन
अहं संवैधानिक-उपचाराधिकारेण (अनु. ३२) प्रजाः रक्षामि।
सरलार्थ: मित्रो! मैं मौलिक अधिकारों का बोध भी कराता हूँ, जिनसे सब लोग सम्मानपूर्वक अपना जीवन बिताते हैं। संवैधानिक उपचारों के अधिकार (अनुच्छेद 32) से मैं प्रजा की रक्षा करता हूँ। ‘उदार चरित्र वालों के लिए तो पूरी पृथ्वी ही परिवार है’ — इस भावना से सभी नागरिकों की उन्नति मुझे अभीष्ट है। मैं ही केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों को अधिकार देता हूँ। मैं संसदीय शासन-पद्धति चलाता हूँ — जनता अपने प्रतिनिधि चुनकर संसद में भेजती है। इस व्यवस्था में प्रजा ही प्रमुख होती है। श्रेष्ठ नेताओं के चुनाव से ही उत्तम समाज का निर्माण हो सकता है, इसलिए जनमत का महत्त्व अत्यधिक है।
अंश 6 – मूल कर्तव्य
मम एकपञ्चाशत्तमे (क) अनुच्छेदे नागरिकाणाम् एकादश कर्तव्यानि उक्तानि सन्ति।
सरलार्थ: मेरे अनुच्छेद 51(क) में नागरिकों के ग्यारह कर्तव्य बताए गए हैं। राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता, पर्यावरण-संरक्षण, वैज्ञानिक दृष्टि आदि कर्तव्य मेरा हृदय हैं। उत्तम समाज के निर्माण और राष्ट्र की प्रगति के लिए सभी नागरिकों को अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। सच ही कहा गया है — ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ (जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है)। मैं विचार-स्वातंत्र्य और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक हूँ। ‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ (सब ओर से हमें कल्याणकारी विचार प्राप्त हों) — इस वेद-वाक्य का मैं अनुसरण करता हूँ। सभी निर्भय हों, सर्वत्र सुशासन हो — यही मेरी कामना है।
समापन मन्त्र
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत् ॥
अर्थ: सभी सुखी हों, सभी रोग-रहित हों, सभी कल्याण को देखें और कोई भी दुःख का भागी न बने। — अंत में छात्र जयघोष करते हैं: “जयतु भारतम् ! जयतु संविधानम् !”
व्याकरण विशेष
1. ‘सं गच्छध्वम्’ में आत्मनेपद क्यों?
‘गम्’ धातु मूलतः परस्मैपदी है। परन्तु ‘सम्’ उपसर्ग लगने पर अकर्मक प्रयोग में यह आत्मनेपदी हो जाती है; सकर्मक प्रयोग में परस्मैपदी ही रहती है।
| प्रयोग | उदाहरण | पद |
| अकर्मक | पिता पुत्रेण सह संगच्छते। | आत्मनेपद |
| सकर्मक | बालः ग्रामं सङ्गच्छति। | परस्मैपद |
‘संगच्छध्वम्’ अकर्मक प्रयोग है, इसलिए आत्मनेपद (लोट् लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन)।
2. ‘वद्’ धातु का नियम
उपसर्ग हो या न हो, ‘वद्’ धातु सकर्मक हो तो परस्मैपदी और अकर्मक हो तो आत्मनेपदी होती है।
| प्रयोग | उदाहरण |
| अकर्मक (आत्मनेपद) | अध्यापकः कक्षायां वदते। |
| सकर्मक (परस्मैपद) | अध्यापकः कक्षायां श्लोकं वदति। |
3. लोट् लकार (आत्मनेपद) – √गम् (सम्)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम | संगच्छताम् | संगच्छेताम् | संगच्छन्ताम् |
| मध्यम | संगच्छस्व | संगच्छेथाम् | संगच्छध्वम् |
| उत्तम | संगच्छै | संगच्छावहै | संगच्छामहै |
4. पाठ में आए प्रमुख सन्धि-पद
अहमस्मि = अहम् + अस्मि • अत्रैव = अत्र + एव (वृद्धि) • इत्येव = इति + एव (यण्) • सर्वेऽपि = सर्वे + अपि (पूर्वरूप) • राष्ट्रियैकता = राष्ट्रिया + एकता (वृद्धि) • मौलिकाधिकारान् = मौलिक + अधिकारान् (दीर्घ)
पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
प्रश्न 1. पूर्णवाक्येन उत्तरत
(क) संविधानस्य चत्वारः स्तम्भाः के सन्ति ?
न्यायः स्वतन्त्रता समता बन्धुता च इति संविधानस्य चत्वारः आधारस्तम्भाः सन्ति।
(ख) कार्यपालिका किं करोति ?
कार्यपालिका नीतीनां क्रियान्वयनं करोति।
(ग) कया भावनया नागरिकाणाम् उन्नतिः अभीष्टा ?
“उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्” इति भावनया सर्वेषां नागरिकाणाम् उन्नतिः अभीष्टा।
(घ) संविधानस्य एकपञ्चाशत्तमे (क) अनुच्छेदे कानि तत्त्वानि उक्तानि ?
संविधानस्य एकपञ्चाशत्तमे (क) अनुच्छेदे नागरिकाणाम् एकादश कर्तव्यानि — राष्ट्रभक्तिः, सामाजिकसमरसता, पर्यावरणसंरक्षणं, वैज्ञानिकदृष्टिः इत्यादीनि — उक्तानि सन्ति।
(ङ) संविधानस्य सङ्कल्पना का वर्तते ?
सर्वजनहितं सर्वजनसुखं च, राष्ट्रस्य एकतायाः अखण्डतायाः न्यायस्य शान्तेः च स्थापना एव संविधानस्य सङ्कल्पना वर्तते।
प्रश्न 2. रिक्तस्थानानि पूरयत
(क) अहमस्मि …… भारतस्य आत्मा ।
संविधानम्
(ख) विधायिका कार्यपालिका न्यायपालिका चेति मम त्रीणि …… ।
अङ्गानि
(ग) अहम् ‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ इति …… अनुसरामि ।
वेदोक्तिम्
(घ) संविधानस्य …… अनुच्छेदे नागरिकाणां कर्तव्यानि उक्तानि ।
एकपञ्चाशत्तमे
(ङ) सर्वे …… पश्यन्तु ।
भद्राणि
प्रश्न 3. समस्तपदानि लिखत
(क) जीवनस्य मार्गदर्शकः
जीवनमार्गदर्शकः
(ख) दिनं दिनं प्रति
प्रतिदिनम् (अव्ययीभाव)
(घ) धर्मस्य उपासना
धर्मोपासना
(ङ) हृदः मन्दिरम्
हृन्मन्दिरम्
(च) संविधानस्य संशोधनम्
संविधानसंशोधनम्
प्रश्न 4. रेखाङ्कितपदानि आश्रित्य प्रश्ननिर्माणम् (सम्भावित रेखाङ्कित पद मोटे अक्षरों में)
(क) अहमस्मि संविधानम्, भारतस्य आत्मा ।
अहमस्मि किम्, भारतस्य आत्मा ?
(ख) प्राचीनभारतीयग्रन्थेषु उक्ताः परमोत्कृष्टविचाराधाराः मयि समाहिताः ।
केषु उक्ताः परमोत्कृष्टविचाराधाराः मयि समाहिताः ?
(ग) संविधानम् अधिकारैः सह कर्तव्यानि अपि बोधयति ।
संविधानम् कैः सह कर्तव्यानि अपि बोधयति ?
(घ) अहं विशालराष्ट्रे न्यायस्य समतायाः बन्धुतायाः च पोषकः अस्मि ।
अहं कस्मिन् न्यायस्य समतायाः बन्धुतायाः च पोषकः अस्मि ?
प्रश्न 5. सन्धिविच्छेदं कुरुत
(क) भारतस्यात्मा
भारतस्य + आत्मा
(ख) राष्ट्रियैकता
राष्ट्रिया + एकता
(ग) मौलिकाधिकारान्
मौलिक + अधिकारान्
(घ) सर्वकारस्योपरि
सर्वकारस्य + उपरि
प्रश्न 6. उचितम् (✓) अनुचितं (✗) वा
(क) भारतस्य संविधानं विश्वस्मिन् बृहत्तमं लिखितसंविधानम् अस्ति ।
✓
(ख) विधीनां नीतीनां च निर्माणं विधायिका करोति ।
✓
(ग) संविधानं संसदीय-शासनपद्धतिं प्रवर्तयति ।
✓
(घ) भारतस्य संविधानं कदापि संशोधयितुं न शक्यते ।
✗ (संविधानं संशोधनैः नित्यनूतनं भवति)
(ङ) संविधाने जनमतस्य महत्त्वं न वर्तते ।
✗ (जनमतस्य महत्त्वम् अत्यधिकं वर्तते)
(च) संविधानं केवलं केन्द्रसर्वकाराय एव अधिकारान् प्रयच्छति न तु राज्यसर्वकारेभ्यः ।
✗ (केन्द्र-राज्यसर्वकारेभ्यः उभयेभ्यः)
प्रश्न 7. स्थिति-आधारित प्रश्न (नया छात्र – भिन्न राज्य, भिन्न मातृभाषा)
‘बन्धुता’ मूल्य के आधार पर आप क्या करेंगे ?
(ख) अहं तेन सह मित्रतां सम्पादयिष्यामि, मम मित्रैः सह अपि तस्य मैत्रीं कारयिष्यामि। — यही संविधान की ‘बंधुता’ भावना है।
25 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
1. ‘अहमस्मि भारतस्य संविधानम्’ पाठ किस पुस्तक से है?
- (क) दीपकम्
- (ख) ऋषिकुल्या
- (ग) शेमुषी
- (घ) रुचिरा
उत्तर देखें
(ख) ऋषिकुल्या2. पाठ की घटना किस स्थान पर होती है?
- (क) राष्ट्रपति भवन
- (ख) संविधान-सदन का केन्द्रीय कक्ष
- (ग) सर्वोच्च न्यायालय
- (घ) लाल किला
उत्तर देखें
(ख) संविधान-सदन का केन्द्रीय कक्ष3. संविधान स्वयं को किसकी ‘आत्मा’ कहता है?
- (क) संसद की
- (ख) भारत की
- (ग) न्यायालय की
- (घ) सरकार की
उत्तर देखें
(ख) भारत की4. संविधान के आधार-स्तम्भ कितने हैं?
- (क) दो
- (ख) तीन
- (ग) चार
- (घ) पाँच
उत्तर देखें
(ग) चार5. इनमें से कौन संविधान का आधार-स्तम्भ नहीं है?
- (क) न्यायः
- (ख) समता
- (ग) धनम्
- (घ) बन्धुता
उत्तर देखें
(ग) धनम्6. संविधान के कितने अंग बताए गए हैं?
- (क) त्रीणि
- (ख) चत्वारि
- (ग) पञ्च
- (घ) द्वे
उत्तर देखें
(क) त्रीणि7. नीतियों का निर्माण कौन करती है?
- (क) कार्यपालिका
- (ख) न्यायपालिका
- (ग) विधायिका
- (घ) प्रजा
उत्तर देखें
(ग) विधायिका8. नीतियों का क्रियान्वयन कौन करती है?
- (क) विधायिका
- (ख) कार्यपालिका
- (ग) न्यायपालिका
- (घ) सेना
उत्तर देखें
(ख) कार्यपालिका9. प्रजा के अधिकारों की रक्षा कौन कराती है?
- (क) न्यायपालिका
- (ख) विधायिका
- (ग) मन्त्रिपरिषद्
- (घ) राज्यसभा
उत्तर देखें
(क) न्यायपालिका10. संवैधानिक उपचारों का अधिकार किस अनुच्छेद में है?
- (क) 21
- (ख) 32
- (ग) 51(क)
- (घ) 370
उत्तर देखें
(ख) 3211. मूल कर्तव्य किस अनुच्छेद में हैं?
- (क) 32
- (ख) 14
- (ग) 51(क)
- (घ) 19
उत्तर देखें
(ग) 51(क)12. मूल कर्तव्यों की संख्या कितनी है?
- (क) दश
- (ख) एकादश
- (ग) द्वादश
- (घ) नव
उत्तर देखें
(ख) एकादश13. संविधान का ‘परम भाव’ क्या है?
- (क) सर्वमतसमभावः
- (ख) धनसञ्चयः
- (ग) युद्धम्
- (घ) एकमतवादः
उत्तर देखें
(क) सर्वमतसमभावः14. ‘सं गच्छध्वं सं वदध्वम्’ मन्त्र किस वेद का है?
- (क) सामवेद
- (ख) यजुर्वेद
- (ग) ऋग्वेद
- (घ) अथर्ववेद
उत्तर देखें
(ग) ऋग्वेद15. ‘संगच्छध्वम्’ में कौन-सा लकार है?
- (क) लट्
- (ख) लोट्
- (ग) लङ्
- (घ) विधिलिङ्
उत्तर देखें
(ख) लोट्16. ‘निरामयाः’ का अर्थ है —
- (क) रोगमुक्त
- (ख) भयभीत
- (ग) धनवान्
- (घ) विद्वान्
उत्तर देखें
(क) रोगमुक्त17. ‘धर्मो रक्षति …’ — रिक्त स्थान भरें।
- (क) रक्षितः
- (ख) धार्मिकः
- (ग) राजा
- (घ) सत्यम्
उत्तर देखें
(क) रक्षितः18. ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ किनके लिए कहा गया है?
- (क) लघुचेतसाम्
- (ख) उदारचरितानाम्
- (ग) राज्ञाम्
- (घ) मूर्खाणाम्
उत्तर देखें
(ख) उदारचरितानाम्19. ‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ का भाव है —
- (क) सब ओर से कल्याणकारी विचार आएँ
- (ख) युद्ध करो
- (ग) धन कमाओ
- (घ) मौन रहो
उत्तर देखें
(क) सब ओर से कल्याणकारी विचार आएँ20. भारतीय संविधान विश्व का कैसा संविधान है?
- (क) सबसे छोटा
- (ख) सबसे बड़ा लिखित
- (ग) अलिखित
- (घ) सबसे पुराना
उत्तर देखें
(ख) सबसे बड़ा लिखित21. ‘सर्वेऽपि’ का सन्धि-विच्छेद है —
- (क) सर्वे + अपि
- (ख) सर्व + अपि
- (ग) सर्वे + ऽपि
- (घ) सर्वः + अपि
उत्तर देखें
(क) सर्वे + अपि22. ‘निरामयाः’ में कौन-सा समास है?
- (क) तत्पुरुष
- (ख) बहुव्रीहि
- (ग) द्वन्द्व
- (घ) अव्ययीभाव
उत्तर देखें
(ख) बहुव्रीहि23. ‘मनांसि’ किस विभक्ति-वचन में है?
- (क) प्रथमा एकवचन
- (ख) द्वितीया बहुवचन
- (ग) तृतीया बहुवचन
- (घ) षष्ठी एकवचन
उत्तर देखें
(ख) द्वितीया बहुवचन24. संसदीय पद्धति में जनता क्या करती है?
- (क) राजा को चुनती है
- (ख) अपने प्रतिनिधि चुनकर संसद भेजती है
- (ग) कर नहीं देती
- (घ) कुछ नहीं
उत्तर देखें
(ख) अपने प्रतिनिधि चुनकर संसद भेजती है25. पाठ के अंत में छात्र क्या जयघोष करते हैं?
- (क) जयतु संस्कृतम्
- (ख) जयतु भारतम्! जयतु संविधानम्!
- (ग) वन्दे मातरम्
- (घ) सत्यमेव जयते
उत्तर देखें
(ख) जयतु भारतम्! जयतु संविधानम्!
20 अति लघु उत्तरीय प्रश्न
1. संविधान-सदन का पुराना नाम क्या है?
पुराना संसद भवन (पुरातन-संसद्-भवनम्)।
2. पाठ में किस छात्रा ने सबसे पहले संविधान-सदन की ओर ध्यान दिलाया?
गार्गी ने।
3. ‘सर्वे तूष्णीं स्थित्वा शृण्वन्तु’ किसने कहा?
पावनी ने।
4. संविधान स्वयं को किसका प्रतिरूप कहता है?
राष्ट्रचेतनायाः (राष्ट्र-चेतना का)।
5. संविधान का मूल लक्ष्य क्या है?
राष्ट्र की एकता, अखंडता, न्याय और शांति की स्थापना।
6. न्यायपालिका की संरचना लिखिए।
जनपद (जिला) न्यायालय, उच्च न्यायालय, उच्चतम न्यायालय।
7. संविधान का परम ध्येय क्या है?
सर्वजनहितं सर्वजनसुखं च।
8. संविधान नित्य नया कैसे बना रहता है?
संशोधनों द्वारा।
9. संविधान की दृष्टि में कौन समान हैं?
सभी भारतीय।
10. संविधान का ‘मन्त्र’ क्या है?
सामाजिक-आर्थिक-राजनैतिक न्याय।
11. संविधान के हृदय में कौन-से दो भाव हैं?
व्यक्ति-गरिमा और राष्ट्रीय एकता।
12. अनुच्छेद 32 किससे सम्बन्धित है?
संवैधानिक उपचारों के अधिकार से।
13. संविधान किन्हें अधिकार देता है?
केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों को।
14. संसदीय व्यवस्था में प्रमुख कौन होता है?
प्रजा (जनता)।
15. उत्तम समाज का निर्माण किससे होता है?
श्रेष्ठ नेताओं के चयन से।
16. किन्हीं दो मूल कर्तव्यों के नाम लिखिए।
पर्यावरण-संरक्षण, वैज्ञानिक दृष्टि।
17. ‘मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्’ का अर्थ लिखिए।
कोई भी दुःख का भागी न बने।
18. विधायिका के अंतर्गत कौन आते हैं?
लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति।
19. ‘संजानानाः’ में कौन-सा प्रत्यय है?
शानच्।
20. ‘उपासते’ में कौन-सा धातु और लकार है?
उप + √आस्, लट् लकार।
20 लघु उत्तरीय प्रश्न
1. संविधान स्वयं को ‘भारत की आत्मा’ क्यों कहता है?
क्योंकि राष्ट्र के सारे नियम, मूल्य और लक्ष्य संविधान में निहित हैं। जैसे आत्मा शरीर को जीवन देती है, वैसे ही संविधान राष्ट्र को दिशा और जीवन देता है। वह नियम-संहिता और जीवन-मार्गदर्शक दोनों है।
2. संविधान के चार आधार-स्तम्भों का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
न्याय – सबको सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक न्याय; स्वतंत्रता – विचार, अभिव्यक्ति और उपासना की स्वतंत्रता; समता – प्रतिष्ठा और अवसर की बराबरी; बंधुता – सब नागरिकों में भाईचारा, जिससे राष्ट्र की एकता बनी रहे।
3. संविधान के तीन अंगों का कार्य लिखिए।
विधायिका नीतियों/कानूनों का निर्माण करती है, कार्यपालिका उन्हें लागू करती है और न्यायपालिका प्रजा के न्याय व अधिकारों की रक्षा करती है।
4. ‘सं गच्छध्वं सं वदध्वम्’ मन्त्र का संविधान से क्या सम्बन्ध है?
यह मन्त्र सबको मिलकर चलने, एक स्वर में बोलने और समान विचार रखने का संदेश देता है। संविधान का ‘बंधुता’ और ‘एकता’ का आदर्श इसी वैदिक भावना से मेल खाता है।
5. संविधान को ‘नित्यनूतन’ क्यों कहा गया है?
क्योंकि समय, संदर्भ और आवश्यकता के अनुसार उसमें संशोधन किए जाते हैं। इस प्रकार वह हर युग की जरूरतों के अनुरूप नया बना रहता है।
6. ‘सर्वमतसमभावः’ से क्या तात्पर्य है?
इसका अर्थ है सभी मतों, धर्मों और उपासना-पद्धतियों के प्रति समान भाव रखना। संविधान की दृष्टि में सभी भारतीय समान हैं, किसी के साथ भेदभाव नहीं।
7. मौलिक अधिकारों का महत्त्व पाठ के आधार पर बताइए।
मौलिक अधिकारों से सभी नागरिक सम्मानपूर्वक जीवन जीते हैं। यदि इनका हनन हो तो अनुच्छेद 32 के संवैधानिक उपचार द्वारा नागरिक न्यायालय से रक्षा प्राप्त कर सकते हैं।
8. संसदीय शासन-पद्धति में जनमत का महत्त्व क्यों है?
जनता अपने प्रतिनिधि चुनकर संसद में भेजती है, अतः प्रजा ही प्रमुख है। श्रेष्ठ नेताओं के चयन से ही उत्तम समाज बनता है, इसलिए जनमत का महत्त्व अत्यधिक है।
9. ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ को कर्तव्यों से जोड़कर समझाइए।
जो धर्म (कर्तव्य) की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। यदि नागरिक अपने मूल कर्तव्यों का पालन करेंगे तो समाज और राष्ट्र सुरक्षित रहेंगे और बदले में नागरिकों के अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे।
10. ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना पाठ में किस संदर्भ में आई है?
संविधान कहता है कि ‘उदार चरित्र वालों के लिए पृथ्वी ही परिवार है’ — इसी भावना से वह सभी नागरिकों की उन्नति चाहता है, बिना किसी भेदभाव के।
11. पाठ में आए प्रमुख मूल कर्तव्यों का उल्लेख कीजिए।
राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता, पर्यावरण-संरक्षण, वैज्ञानिक दृष्टि, संविधान का आदर, एकता-अखंडता की रक्षा, देश-रक्षा, भ्रातृत्व भावना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा आदि।
12. ‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ का अर्थ और संदेश लिखिए।
अर्थ — सब ओर से हमें कल्याणकारी विचार प्राप्त हों। संदेश — हमें खुले मन से हर दिशा से अच्छे विचार ग्रहण करने चाहिए; यही संविधान का विचार-स्वातंत्र्य है।
13. संविधान की क्या कामना है?
सभी निर्भय हों, सर्वत्र सुशासन हो, सब सुखी और निरोगी हों तथा कोई भी दुःखी न हो।
14. पाठ की संवाद-शैली की विशेषता बताइए।
पाठ छात्रों के संवाद से आरम्भ होता है, फिर संविधान आत्मकथा शैली में बोलता है। इससे नीरस विषय भी रोचक और सजीव बन जाता है।
15. ‘संगच्छध्वम्’ आत्मनेपद में क्यों है?
‘गम्’ धातु परस्मैपदी है, किन्तु ‘सम्’ उपसर्ग के साथ अकर्मक प्रयोग में आत्मनेपदी हो जाती है। अतः ‘संगच्छध्वम्’ (लोट्, मध्यम पुरुष, बहुवचन) आत्मनेपद में है।
16. ‘वदते’ और ‘वदति’ में अन्तर उदाहरण सहित लिखिए।
‘वद्’ अकर्मक हो तो आत्मनेपदी — अध्यापकः कक्षायां वदते। सकर्मक हो तो परस्मैपदी — अध्यापकः श्लोकं वदति।
17. ‘निरामयाः’ और ‘लोकतन्त्रात्मकस्य’ का समास-विग्रह लिखिए।
निरामयाः – निर्गताः आमयाः येभ्यः ते (बहुव्रीहि); लोकतन्त्रात्मकस्य – लोकतन्त्रम् आत्मा यस्य तस्य (बहुव्रीहि)।
18. नए छात्र के प्रति बंधुता कैसे दिखाएँगे?
उससे मित्रता करेंगे, उसे अपने मित्रों से मिलाएँगे, उसकी भाषा व संस्कृति का सम्मान करेंगे और विद्यालय में घुलने-मिलने में उसकी सहायता करेंगे।
19. विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका में कौन-कौन आते हैं?
विधायिका – लोकसभा, राज्यसभा, राष्ट्रपति; कार्यपालिका – राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद्; न्यायपालिका – सर्वोच्च, उच्च व अधीनस्थ न्यायालय।
20. ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ मन्त्र का अर्थ लिखिए।
सभी सुखी हों, सभी रोगमुक्त हों, सभी कल्याण देखें और कोई भी दुःख का भागी न हो।
10 महत्त्वपूर्ण / दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. ‘अहमस्मि भारतस्य संविधानम्’ पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
छात्र संविधान-सदन में संविधान-ग्रन्थ देखते हैं और उन्हें उसकी वाणी सुनाई देती है। संविधान बताता है कि वह भारत की आत्मा, नियम-संहिता और मार्गदर्शक है। न्याय, स्वतंत्रता, समता, बंधुता उसके चार स्तम्भ हैं; विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका तीन अंग। वह विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, संशोधनों से नित्य नया रहता है, सभी मतों के प्रति समभाव रखता है, मौलिक अधिकार देता है (अनु. 32), 11 मूल कर्तव्य बताता है (अनु. 51क) और संसदीय पद्धति चलाता है। अंत में वह ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की कामना करता है और छात्र ‘जयतु संविधानम्’ का घोष करते हैं।
2. संविधान के आदर्श और वैदिक सूक्तियों में क्या समानता है? उदाहरण सहित लिखिए।
‘सं गच्छध्वम्…’ – बंधुता व एकता; ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ – विश्व-बंधुत्व; ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ – कर्तव्य-पालन; ‘आ नो भद्राः क्रतवो…’ – विचार-स्वातंत्र्य; ‘समानो मन्त्रः समितिः समानी’ – समता; ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ – सर्वजन-हित। इस प्रकार संविधान के मूल्य भारत की प्राचीन ज्ञान-परम्परा की ही आधुनिक अभिव्यक्ति हैं।
3. मौलिक अधिकार और मूल कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक कैसे हैं?
अधिकार हमें सम्मान व स्वतंत्रता से जीने का अवसर देते हैं, जबकि कर्तव्य हमसे राष्ट्र व समाज के प्रति जिम्मेदारी की अपेक्षा करते हैं। यदि सब केवल अधिकार माँगें और कर्तव्य न निभाएँ तो व्यवस्था टूट जाएगी। इसलिए पाठ कहता है कि उत्तम समाज और राष्ट्र-प्रगति के लिए सभी अपने कर्तव्यों का पालन करें — ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’।
4. भारतीय लोकतंत्र में संविधान की भूमिका पर निबन्धात्मक उत्तर लिखिए।
संविधान लोकतंत्र की नींव है। वह शासन के तीनों अंगों की शक्तियाँ तय करता है, केन्द्र-राज्य संबंध निर्धारित करता है, नागरिकों को अधिकार देता है और उनकी रक्षा का उपाय बताता है। वह संसदीय व्यवस्था में जनता को सर्वोच्च बनाता है। समता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुता के मूल्यों से विविधता भरे भारत को एक सूत्र में बाँधता है।
5. पाठ में वर्णित न्यायपालिका का महत्त्व और संरचना समझाइए।
न्यायपालिका प्रजा के न्याय और अधिकारों की रक्षा करती है तथा संविधान की संरक्षक है। इसकी संरचना है — जिला (अधीनस्थ) न्यायालय, उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय। अनुच्छेद 32 के अनुसार नागरिक मौलिक अधिकार-हनन पर सीधे उच्चतम न्यायालय जा सकते हैं।
6. ‘संगच्छध्वं संवदध्वं…’ मन्त्र का पदच्छेद, अन्वय और भावार्थ लिखिए।
पदच्छेद – सम् गच्छध्वम् सम् वदध्वम् सम् वः मनांसि जानताम्, देवाः भागं यथा पूर्वे संजानानाः उपासते। अन्वय – (यूयं) संगच्छध्वं, संवदध्वं, वः मनांसि संजानताम्; यथा पूर्वे देवाः संजानानाः भागम् उपासते। भावार्थ – मिलकर चलो, मिलकर बोलो, मन एक हों; जैसे प्राचीन देवता एकमत होकर अपना कर्तव्य निभाते थे वैसे तुम भी निभाओ।
7. संविधान की ‘सर्वमतसमभाव’ और ‘समता’ की भावना को आज के समाज के लिए क्यों आवश्यक मानते हैं?
भारत में अनेक धर्म, भाषाएँ और संस्कृतियाँ हैं। यदि सबको समान सम्मान और अवसर न मिले तो भेदभाव और संघर्ष बढ़ेंगे। सर्वमतसमभाव से सामाजिक समरसता आती है, समता से हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है — यही राष्ट्रीय एकता का आधार है।
8. एक विद्यार्थी के रूप में आप संविधान के मूल कर्तव्यों का पालन कैसे करेंगे?
राष्ट्रगान-ध्वज का सम्मान, पेड़ लगाना व पानी-बिजली बचाना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा, अंधविश्वास छोड़कर वैज्ञानिक दृष्टि अपनाना, सबसे भाईचारा रखना, ईमानदारी से पढ़कर उत्कृष्टता का प्रयास करना और दूसरों को शिक्षा के लिए प्रेरित करना।
9. पाठ के आधार पर संविधान की प्रमुख विशेषताएँ बिंदुवार लिखिए।
(1) भारत की आत्मा व नियम-संहिता (2) चार आधार-स्तम्भ (3) तीन अंग (4) विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान (5) संशोधनीय/नित्यनूतन (6) सर्वमतसमभाव (7) मौलिक अधिकार व अनु. 32 (8) अनु. 51(क) में 11 कर्तव्य (9) संसदीय शासन (10) केन्द्र-राज्य को अधिकार।
10. ‘अहमस्मि भारतस्य संविधानम्’ शीर्षक की सार्थकता सिद्ध कीजिए।
पूरा पाठ संविधान की आत्मकथा है जिसमें वह ‘अहम्’ (मैं) कहकर अपना परिचय, कार्य, मूल्य और कामनाएँ बताता है। अतः ‘मैं भारत का संविधान हूँ’ शीर्षक विषय-वस्तु के पूर्णतः अनुरूप, संक्षिप्त और आकर्षक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘अहमस्मि भारतस्य संविधानम्’ किस कक्षा का पाठ है?
यह NCERT कक्षा 9 की नई संस्कृत पाठ्यपुस्तक ‘ऋषिकुल्या’ का प्रथम पाठ है।
इस पाठ की विधा क्या है?
संवाद और आत्मकथा शैली — संविधान स्वयं अपनी बात कहता है।
संविधान के चार आधार-स्तम्भ कौन-से हैं?
न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता।
मूल कर्तव्य किस अनुच्छेद में हैं और कितने हैं?
अनुच्छेद 51(क) में, कुल 11।
परीक्षा के लिए इस पाठ का सबसे महत्त्वपूर्ण व्याकरण बिंदु क्या है?
‘संगच्छध्वम्/संवदध्वम्’ का आत्मनेपद-नियम, लोट् लकार, तथा सन्धि-समास के प्रश्न।
✍️ प्रस्तुति: मनोज शर्मा (हिंदी-संस्कृत शिक्षक) — यह लेख NCERT कक्षा 9 संस्कृत पाठ्यपुस्तक “ऋषिकुल्या” पर आधारित अध्ययन-सामग्री है। मूल पाठ के लिए पाठ्यपुस्तक अवश्य पढ़ें।
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