बनारस और दिशा — केदारनाथ सिंह (कक्षा 12 हिंदी अंतरा, पाठ 4) केदारनाथ सिंह की कविता बनारस प्राचीन शहर काशी की आस्था, मृत्यु-जीवन, धीमेपन और रहस्यमयता का दार्शनिक चित्र है, जबकि दिशा एक छोटी-सी कविता है जो पतंग उड़ाते बच्चे के उत्तर से बाल-मनोविज्ञान और यथार्थ की निजी दृष्टि दिखाती है। यहाँ दोनों कविताओं का भावार्थ, शिल्प-सौंदर्य, शब्दार्थ, प्रश्न-उत्तर और MCQ दिए गए हैं। कक्षा 12 अंतरा भाग 2 पाठ 4 केदारनाथ सिंह बनारस प्रश्न-उत्तर MCQ 📚 कक्षा 12 हिंदी — अंतरा भाग 2 (काव्य खंड) : सभी लेख पाठ 1 — देवसेना का गीत, कार्नेलिया का गीत (जयशंकर प्रसाद) पाठ 2 — सरोज स्मृति (सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला') पाठ 3 — यह दीप अकेला, मैंने देखा एक बूँद (अज्ञेय) पाठ 4 — बनारस, दिशा (केदारनाथ सिंह) — आप यही पढ़ रहे हैं पाठ 6 — वसंत आया, तोड़ो (रघुवीर सहाय) पाठ 7 — भरत-राम का प्रेम, पद (तुलसीदास) पाठ 8 — बारहमासा (मलिक मुहम्मद जायसी) 📖 संक्षिप्त परिचय विवरण जानकारी पाठ 4 — बनारस, दिशा कवि केदारनाथ सिंह (1934–2018) काव्यधारा नयी कविता / समकालीन कविता बनारस शहर की आस्था, धीमापन, आधा-अधूरापन, मिथक...