नमस्कार पाठकों! "आख़िरी घंटी" के बाद आज मैं आपके साथ अपनी दूसरी लंबी कहानी साझा कर रहा हूँ — "त्रिनेत्र", एक साइंस-फ़िक्शन और सस्पेंस-थ्रिलर, जो 85 भागों में पूरी होकर प्रतिलिपि पर प्रकाशित हो चुकी है।
कहानी किस बारे में है?
हरियाणा के छोटे-से क़स्बे सरस्वतीपुर में डॉ. अनिरुद्ध शास्त्री दिन में एक साधारण भौतिकी शिक्षक हैं। कभी वे रक्षा अनुसंधान में वैज्ञानिक थे। कुरुक्षेत्र में गीता जयंती के मेले में हुए एक धमाके में उनकी पत्नी गायत्री की मृत्यु हो जाती है, और जाँच की फ़ाइलें धूल खाने लगती हैं।
तब अनिरुद्ध विज्ञान को अपना शस्त्र बनाते हैं — ध्वनि-तरंगों से काम करने वाले यंत्र, छोटे उड़ने वाले "गरुड़", और एक नक़ाब, जिसके माथे पर तीसरी आँख का चिह्न है। रात में वे बनते हैं "त्रिनेत्र" — धर्म का एक अदृश्य प्रहरी, जो किसी की जान नहीं लेता, पर सच को अँधेरे से निकालकर रोशनी में ले आता है।
और जैसे-जैसे परतें खुलती हैं, सामने आता है मंदिरों से चोरी हुई प्राचीन मूर्तियों का एक ऐसा जाल, जिसकी जड़ें एक बहुत बड़े, बहुत सम्मानित घर तक जाती हैं।
न्याय को अदालत की रोशनी तक पहुँचा पाएगा?
आपको यह कहानी क्यों पढ़नी चाहिए?
- भारतीय संस्कृति, मंदिरों की धरोहर और विज्ञान का अनोखा संगम — एक देसी सुपरहीरो, जिसकी ताक़त उसका ज्ञान है।
- हर भाग में रहस्य, रोमांच और एक नया मोड़ — एक बार शुरू करेंगे तो रुकना मुश्किल होगा।
- बदले और न्याय, क्षमा और कर्तव्य जैसे सवालों पर गीता की सीख के साथ एक गहरी कहानी।
- महंत रामेश्वर दास, एसपी मीरा राठौड़, सलीम चाचा, छात्र कुणाल और रहस्यमय "नाग" जैसे यादगार किरदार।
- हर भाग केवल 5–7 मिनट का — सफ़र में, चाय के साथ या सोने से पहले आराम से पढ़ें।
कुछ भागों के नाम
मेले की शाम · राख और फ़ाइल · इस्तीफ़ा · तहख़ाना · गरुड़ · सूना गर्भगृह · अमावस की रात · नाद-चक्र · काला सूरज · सुरंग का रहस्य · शंखनाद · मुरलीधर · बेनक़ाब · अग्नि-वलय · तीसरी आँख …
अगर आपने मेरी पिछली कहानी नहीं पढ़ी है, तो "आख़िरी घंटी" के बारे में यहाँ पढ़ें।
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— मनोज शर्मा
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