सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

KHUSHI, ख़ुशी की समझ मेरे लिए, happiness, DHARM OR KHUSHI,

ख़ुशी की समझ मेरे लिए

इस संसार में प्रत्येक कार्य-व्यापार केवल और केवल ख़ुशी के लिए ही होता है| इसे पाने के लिए मनुष्य जन्म से मृत्यु पर्यंत प्रयास करता रहता है, परंतु यह ख़ुशी मृगतृष्णा की तरह और अधिक बढ़ती ही जाती है|

खुशी वास्तव में खुश और संतुष्ट होने की स्थिति है। कई दार्शनिकों ने इस विषय पर अलग-अलग विचार दिये हैं, हालांकि सबसे प्रभावशाली तथ्य यह है कि सुख को भीतर से महसूस किया जा सकता है और बाहरी दुनिया में इसकी खोज नहीं की जानी चाहिए। वास्तव में ख़ुशी कस्तूरी के समान होती है, जो मनुष्य के अन्दर ही होती है, परंतु मनुष्य अज्ञानी मृग के समान उसे सम्पूर्ण वन में ढूंढता रहता है | मनुष्य अपनी ख़ुशी के लिए दूसरों पर निर्भर रहता है, जो उसके दुःख का कारण बनता है | यदि भूख मुझे लगी है, तो भोजन भी मुझे ही ग्रहण करना पड़ेगा, तब ही क्षुधा शांत होगी | वैसे ही ख़ुशी मुझे चाहिए तो उसके लिए कर्म मुझे ही करना पड़ेगा| जब तक हम दूसरों से ख़ुशी की अपेक्षा करते रहेंगे, तब तक हमें उपेक्षा ही मिलेगी| जब हम ख़ुशी को परिभाषित करने का प्रयास करते हैं तो विभिन्न विद्वानों के मत भिन्न हैं| भारतीय दर्शन ख़ुशी को नैतिकता से जोड़कर देखता है, तो पाश्चात्य दार्शनिक अरस्तु ने माना कि इस संसार में ख़ुशी ही एकमात्र चीज है, जिसे मानव अपने लिए चाहता है| बौद्ध धर्म में ख़ुशी शिक्षाओं का केंद्रीय विषय है, वो कहता है कि तृष्णा पर विजय ही परम सुख है| पाश्चात्य संस्कृति केवल व्यक्तिगत ख़ुशी को ही वरीयता देती है, परंतु भारतीय संस्कृति की विशाल व तीक्ष्ण दृष्टि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना स्वयं में संजोये दूसरों की ख़ुशी में ही मनुष्य की ख़ुशी का उपदेश देती है| कोई ख़ुशी को केवल धन से जोड़ता है, तो कोई स्वास्थ्य से| कोई प्रेम से, तो कोई दोस्ती से| कोई नौकरी से, तो कोई निश्चित इच्छा की पूर्ति को ख़ुशी मानता है| कुछ लोग पंच इंद्रियों की संतुष्टि को ख़ुशी का नाम देते हैं, तो कुछ का कहना है कि एक अच्छी भावना, आनंद या मित्रों व सगे-संबंधियों के साथ समय बिताना ही ख़ुशी है| सुखवाद तो ख़ुशी को मानव जीवन का एकमात्र लक्ष्य मानता है| परंतु मेरे अनुसार तो ख़ुशी इन सब क्षणिक अहसासों व भावनाओं से बहुत दूर की बात है| इन सब उपरोक्त बातों से मिलने वाली ख़ुशी तो नश्वर है| यह शारीरिक प्रक्रिया नहीं, जो कुछ हार्मोन्स परिवर्तन के कारण जनित हो| यह तो ईश्वर प्रदत्त वह अनुभूति है, जो शाश्वत है| लेकिन केवल तब ही यह शाश्वत होगी, जब यह बाह्य कारकों द्वारा उत्पन्न न होकर आंतरिक कारकों द्वारा उत्पन्न हो| मैं अक्सर देखता हूँ कि लोग अनेक छोटे-बड़े अवसरों पर स्वयं को खुश कहते, परंतु कुछ पलों बाद वही व्यक्ति स्वयं को संसार का सबसे दुखी मनुष्य बताने लगता है| और इसका कारण कोई छोटी सी घटना या किसी व्यक्ति द्वारा कुछ शब्द मात्र कह देना होता है| तो आखिर यह कैसी ख़ुशी है? जो कुछ मिनटों में ही समाप्त हों गई ? इसका सीधा सा यह अर्थ है कि शाश्वत ख़ुशी के लिए कारण भी शाश्वत चाहिए| क्षणिक कारण तो क्षणिक ख़ुशी ही प्रदान कर सकते है| अब प्रश्न यह उठता है कि शाश्वत कारण क्या है? मुझे तो प्रसन्नता के लिए केवल एक ही शाश्वत कारण दिखाई देता है-परोपकार| बिना किसी अपेक्षा के किया गया परोपकार| यह ही हमें सच्ची ख़ुशी प्रदान कर सकता है, जो शाश्वत होगी| जिसे कोई बाहरी कारण नष्ट नहीं कर सकेगा| मुझे लगता है, और अधिक ख़ुशी पाने का प्रयास ही हमें ख़ुशी से दूर रखता है| हमें ख़ुशी को पाने का नही, देने का प्रयास करना होगा, वो भी बिना किसी अपेक्षा के भाव के| तब देखना वह शाश्वत ख़ुशी प्राप्त होगी, जिसका वर्णन सभी धर्मं, संस्कृतियाँ, दार्शनिक व शास्त्र करते हैं| 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

विशेषण क्या है? परिभाषा, भेद, उदाहरण, अभ्यास प्रश्न | Class 6-8 Hindi Grammar

  परिभाषा • भेद • माइंड मैप • MCQ • वर्कशीट • क्विज़ • अभ्यास प्रश्न इस लेख में विशेषण को बहुत आसान भाषा में , ढेर सारे उदाहरणों , चित्रों और अभ्यास के साथ समझाया गया है। यह लेख खासकर कक्षा 6 से 9  तक के विद्यार्थियों के लिए बनाया गया है , ताकि हर बच्चा इसे आसानी से समझ सके। 1. विशेषण क्या है ? ( सरल व्याख्या) जब हम किसी व्यक्ति , वस्तु या जानवर के बारे में बात करते हैं , तो अक्सर यह भी बताते हैं कि वह कैसा है — जैसे उसका रंग क्या है , वह कितना बड़ा है , या कितने हैं। इसी बात को बताने वाले शब्द को विशेषण कहते हैं। परिभाषा: जो शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण , रंग , संख्या , आकार आदि) बताए , उसे विशेषण कहते हैं। जिस शब्द की विशेषता बताई जाती है , उसे विशेष्य कहते हैं। आसान उदाहरणों से समझें: राम अच्छा लड़का है। → "अच्छा" विशेषण है , " लड़का" विशेष्य है। मेज़ पर पाँच किताबें हैं। → "पाँच" गिनती बता रहा है , इसलिए विशेषण है। यह लाल गुलाब बहुत सुंदर है। → "लाल" रंग बता रहा ह...

संज्ञा (Noun) — पूरी जानकारी सरल भाषा में (कक्षा 6, 7 और 8 के विद्यार्थियों के लिए • उदाहरण, चित्र और माइंड मैप सहित)

  संज्ञा (Noun) — पूरी जानकारी सरल भाषा में कक्षा 6, 7 और 8 के विद्यार्थियों के लिए • उदाहरण, चित्र और माइंड मैप सहित ज़रा सोचिए — जब आप बोलते हैं "राम स्कूल जाता है", तो इस वाक्य में राम और स्कूल — ये दोनों शब्द किसी न किसी नाम को बता रहे हैं। हिंदी व्याकरण में ऐसे ही शब्दों को संज्ञा कहा जाता है। आज हम इसे बहुत आसान तरीके से, ढेर सारे उदाहरणों के साथ समझेंगे। 1. संज्ञा किसे कहते हैं? किसी भी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, भाव या गुण के नाम को "संज्ञा" कहते हैं। सरल शब्दों में — दुनिया की हर चीज़ का एक नाम होता है, और वह नाम ही संज्ञा है। संज्ञा = किसी भी नाम का बोध कराने वाला शब्द व्यक्ति (राम, सीता) वस्तु (किताब, कुर्सी) स्थान (दिल्ली, स्कूल) भाव / गुण (ख़ुशी, ईमानदारी) कुछ आसान उदाहरण वाक्यों में: मोहन बाज़ार से आम लाया। (व्यक्ति + वस्तु) दिल्ली भारत की राजधानी है। (स्थान) उसकी ईमानदारी सबको पसंद है। (गुण) गंगा एक पवित्र नदी है। (स्थान/वस्तु का नाम) ✻ ✻ ✻ 2. संज्ञा के भेद (प्रकार) — माइंड मैप संज्ञा मुख्यतः पाँच प्रकार की होती है। नीचे दिया गया माइंड मैप इसे ...

क्रिया (Verb) की परिभाषा, भेद, उदाहरण, पहचान, नियम, MCQ, Worksheet | हिंदी व्याकरण

  🌈 क्रिया क्या है? कक्षा 6–8 हिंदी व्याकरण परिभाषा, भेद, उदाहरण, माइंड मैप, अभ्यास और महत्वपूर्ण प्रश्न 📚 क्रिया का परिचय हिंदी भाषा में वाक्य को पूरा अर्थ देने के लिए कई प्रकार के शब्दों का प्रयोग किया जाता है। इनमें क्रिया का विशेष महत्व है। क्रिया से हमें किसी काम के करने, होने या किसी अवस्था का पता चलता है। जैसे—राम पढ़ता है, सीता गाना गाती है, बच्चे मैदान में खेलते हैं और पक्षी आकाश में उड़ते हैं। इन सभी वाक्यों में पढ़ता, गाती, खेलते और उड़ते शब्द किसी न किसी काम का बोध कराते हैं। इसलिए ये सभी क्रिया शब्द हैं। उदाहरण: मोहन पुस्तक पढ़ता है। बच्चे मैदान में खेलते हैं। माँ खाना बनाती हैं। चिड़िया आकाश में उड़ती है। दादाजी कुर्सी पर बैठे हैं। चित्र: विद्यार्थी पढ़ते और सीखते हुए। ✅ क्रिया की परिभाषा जिस शब्द से किसी का...